भारत में 'मौत का कुआं' (Well of Death) जैसे साहसिक और जोखिम भरे प्रदर्शनों के आयोजन के लिए किसी एक अधिकारी नहीं, बल्कि कई विभागों से अनुमति और एनओसी (NOC) लेनी पड़ती है। यह प्रक्रिया सार्वजनिक सुरक्षा और कानून व्यवस्था से जुड़ी होती है। मुख्य रूप से निम्नलिखित अधिकारियों और विभागों की स्वीकृति आवश्यक होती है: 1. जिला मजिस्ट्रेट (DM) या कलेक्टर आयोजन की अंतिम अनुमति जिला मजिस्ट्रेट या उनके द्वारा नामित अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट (ADM) द्वारा दी जाती है। मनोरंजन कर (Entertainment Tax) और सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए लाइसेंस यहीं से जारी होता है। 2. पुलिस विभाग (SP/DSP) स्थानीय पुलिस अधीक्षक (SP) या संबंधित क्षेत्र के एसडीओपी (SDOP) से कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) लेना होता है। पुलिस यह सुनिश्चित करती है कि आयोजन से यातायात या सार्वजनिक शांति में बाधा न आए। 3. लोक निर्माण विभाग (PWD) या फिटनेस इंजीनियर चूंकि मौत का कुआं एक लकड़ी का ढांचा होता है, इसलिए इसकी मजबूती की जांच अनिवार्य है। PWD के इंजीनियर या शासन द्वारा अधिकृत मैकेनिकल इंजीनियर से स्ट्रक्चरल फिटनेस सर्टिफिकेट लेना पड़ता है, जो यह प्रमाणित करता है कि ढांचा दर्शकों और कलाकारों के लिए सुरक्षित है। 4. अग्निशमन विभाग (Fire Department) मेले या सर्कस में आग लगने की घटनाओं को रोकने के लिए फायर ब्रिगेड से अग्नि सुरक्षा एनओसी लेना अनिवार्य है। 5. स्थानीय नगर निगम या ग्राम पंचायत यदि आयोजन किसी सरकारी भूमि या निकाय की सीमा में हो रहा है, तो संबंधित नगर निगम आयुक्त या ग्राम पंचायत से अनापत्ति लेनी होगी। मुख्य दस्तावेज जिनकी आवश्यकता होती है: आयोजक का पहचान पत्र और हलफनामा। कौशल प्रदर्शन करने वाले कलाकारों का बीमा (Insurance)। एंबुलेंस और प्राथमिक चिकित्सा (First Aid) की व्यवस्था का विवरण। ढांचे (Structure) का सुरक्षा प्रमाण पत्र। नोट: यह प्रक्रिया अलग-अलग राज्यों के 'मेला अधिनियम' या 'मनोरंजन नियमावली' के आधार पर थोड़ी भिन्न हो सकती है। अब सवाल यह है कि (चिरमिरी)पोड़ी जग्गन्नाथ मंदिर के सामने जो मीना बाजार लगा है उसमें जो मौत का कुआं चालू था उसके पास इनमें से कितने जगहों से अनुमति प्राप्त किया गया था और किसने दिया? इसका जवाब कौन देगा?
भारत में 'मौत का कुआं' (Well of Death) जैसे साहसिक और जोखिम भरे प्रदर्शनों के आयोजन के लिए किसी एक अधिकारी नहीं, बल्कि कई विभागों से अनुमति और एनओसी (NOC) लेनी पड़ती है। यह प्रक्रिया सार्वजनिक सुरक्षा और कानून व्यवस्था से जुड़ी होती है। मुख्य रूप से निम्नलिखित अधिकारियों और विभागों की स्वीकृति आवश्यक होती है: 1. जिला मजिस्ट्रेट (DM) या कलेक्टर आयोजन की अंतिम अनुमति जिला मजिस्ट्रेट या उनके द्वारा नामित अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट (ADM) द्वारा दी जाती है। मनोरंजन कर (Entertainment Tax) और सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए लाइसेंस यहीं से जारी होता है। 2. पुलिस विभाग (SP/DSP) स्थानीय पुलिस अधीक्षक (SP) या संबंधित क्षेत्र के एसडीओपी (SDOP) से कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) लेना होता है। पुलिस यह सुनिश्चित करती है कि आयोजन से यातायात या सार्वजनिक शांति में बाधा न आए। 3. लोक निर्माण विभाग (PWD) या फिटनेस इंजीनियर चूंकि मौत का कुआं एक लकड़ी का ढांचा होता है, इसलिए इसकी मजबूती की जांच अनिवार्य है। PWD के इंजीनियर या शासन द्वारा अधिकृत मैकेनिकल इंजीनियर से स्ट्रक्चरल फिटनेस सर्टिफिकेट लेना पड़ता है, जो यह प्रमाणित करता है कि ढांचा दर्शकों और कलाकारों के लिए सुरक्षित है। 4. अग्निशमन विभाग (Fire Department) मेले या सर्कस में आग लगने की घटनाओं को रोकने के लिए फायर ब्रिगेड से अग्नि सुरक्षा एनओसी लेना अनिवार्य है। 5. स्थानीय नगर निगम या ग्राम पंचायत यदि आयोजन किसी सरकारी भूमि या निकाय की सीमा में हो रहा है, तो संबंधित नगर निगम आयुक्त या ग्राम पंचायत से अनापत्ति लेनी होगी। मुख्य दस्तावेज जिनकी आवश्यकता होती है: आयोजक का पहचान पत्र और हलफनामा। कौशल प्रदर्शन करने वाले कलाकारों का बीमा (Insurance)। एंबुलेंस और प्राथमिक चिकित्सा (First Aid) की व्यवस्था का विवरण। ढांचे (Structure) का सुरक्षा प्रमाण पत्र। नोट: यह प्रक्रिया अलग-अलग राज्यों के 'मेला अधिनियम' या 'मनोरंजन नियमावली' के आधार पर थोड़ी भिन्न हो सकती है। अब सवाल यह है कि (चिरमिरी)पोड़ी जग्गन्नाथ मंदिर के सामने जो मीना बाजार लगा है उसमें जो मौत का कुआं चालू था उसके पास इनमें से कितने जगहों से अनुमति प्राप्त किया गया था और किसने दिया? इसका जवाब कौन देगा?
- भारत में 'मौत का कुआं' (Well of Death) जैसे साहसिक और जोखिम भरे प्रदर्शनों के आयोजन के लिए किसी एक अधिकारी नहीं, बल्कि कई विभागों से अनुमति और एनओसी (NOC) लेनी पड़ती है। यह प्रक्रिया सार्वजनिक सुरक्षा और कानून व्यवस्था से जुड़ी होती है। मुख्य रूप से निम्नलिखित अधिकारियों और विभागों की स्वीकृति आवश्यक होती है: 1. जिला मजिस्ट्रेट (DM) या कलेक्टर आयोजन की अंतिम अनुमति जिला मजिस्ट्रेट या उनके द्वारा नामित अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट (ADM) द्वारा दी जाती है। मनोरंजन कर (Entertainment Tax) और सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए लाइसेंस यहीं से जारी होता है। 2. पुलिस विभाग (SP/DSP) स्थानीय पुलिस अधीक्षक (SP) या संबंधित क्षेत्र के एसडीओपी (SDOP) से कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) लेना होता है। पुलिस यह सुनिश्चित करती है कि आयोजन से यातायात या सार्वजनिक शांति में बाधा न आए। 3. लोक निर्माण विभाग (PWD) या फिटनेस इंजीनियर चूंकि मौत का कुआं एक लकड़ी का ढांचा होता है, इसलिए इसकी मजबूती की जांच अनिवार्य है। PWD के इंजीनियर या शासन द्वारा अधिकृत मैकेनिकल इंजीनियर से स्ट्रक्चरल फिटनेस सर्टिफिकेट लेना पड़ता है, जो यह प्रमाणित करता है कि ढांचा दर्शकों और कलाकारों के लिए सुरक्षित है। 4. अग्निशमन विभाग (Fire Department) मेले या सर्कस में आग लगने की घटनाओं को रोकने के लिए फायर ब्रिगेड से अग्नि सुरक्षा एनओसी लेना अनिवार्य है। 5. स्थानीय नगर निगम या ग्राम पंचायत यदि आयोजन किसी सरकारी भूमि या निकाय की सीमा में हो रहा है, तो संबंधित नगर निगम आयुक्त या ग्राम पंचायत से अनापत्ति लेनी होगी। मुख्य दस्तावेज जिनकी आवश्यकता होती है: आयोजक का पहचान पत्र और हलफनामा। कौशल प्रदर्शन करने वाले कलाकारों का बीमा (Insurance)। एंबुलेंस और प्राथमिक चिकित्सा (First Aid) की व्यवस्था का विवरण। ढांचे (Structure) का सुरक्षा प्रमाण पत्र। नोट: यह प्रक्रिया अलग-अलग राज्यों के 'मेला अधिनियम' या 'मनोरंजन नियमावली' के आधार पर थोड़ी भिन्न हो सकती है। अब सवाल यह है कि (चिरमिरी)पोड़ी जग्गन्नाथ मंदिर के सामने जो मीना बाजार लगा है उसमें जो मौत का कुआं चालू था उसके पास इनमें से कितने जगहों से अनुमति प्राप्त किया गया था और किसने दिया? इसका जवाब कौन देगा?1
- चिरमिरी हल्दीबाड़ी वार्ड नं 14 की SECL की पानी टंकी की स्थिति जर्जर1
- एंकर- बागबहार थाना क्षेत्र के एक गांव में आयोजित नाटक देखकर भोर भोर को पैदल घर लौट रही एक 17 साल की नाबालिग लड़की के साथ सामूहिक दुष्कर्म फिर सबूत मिटाने की नीयत से उसकी हत्या की कोशिश करने का सनसनीखेज वारदात सामने आया है। जानकारी के अनुसार पीड़िता लगभग तीन बजे गांव में चल रहे नाटक कार्यक्रम देखकर अपने गांव की ओर पैदल जा रही थी। रास्ते में उसे अकेली देखकर कुछ युवकों ने उसे जबरन पकड़ लिया और पास स्थित जंगल में ले गए। दिनभर जंगल में उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया। देर रात करीब 11 बजे, आरोपियों ने लड़की का गला दबाया और उसको मरा हुआ समझकर सड़क किनारे फेंककर फरार हो गए। पीड़िता के गले पर दबाने के गहरे निशान हैं तथा शरीर के कई हिस्सों में गंभीर चोटें पाई गई हैं। देर रात राहगीरों ने जब लड़की को बेहोशी की हालत में देखा, तो तत्काल पुलिस को सूचना दी। ग्रामीणों ने मानवता दिखाते हुए देखा कि उसकी सांस चल रही है और उसे निजी वाहन से पहले गांव के स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया। वहां प्राथमिक उपचार के बाद हालत गंभीर देखते हुए उसे पत्थलगांव सिविल अस्पताल भेजा गया, जहां चिकित्सकों ने स्थिति अत्यंत गंभीर पाकर तत्काल अंबिकापुर रेफर कर दिया। फिलहाल पीड़िता की हालत नाजुक बनी हुई है और वह जिंदगी व मौत के बीच संघर्ष कर रही है। स्टेट टीवी इंडिया के लिए बगीचा से प्रभा यादव की रिपोर्ट3
- Gram panchayat kraiya vikaskhand ambikapur k anganbadi karyakarta anganbadi ki samshya kahte..khas report himanshu raj md news vice buero chief ambikapur dist.surguja cg.7805838076.1
- कुशमी ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत पहुंचे सरपंच जिला सीधी कलेक्ट्रेट मे1
- तहसील कुसमी क्षेत्र पुजारी हत्याकांड मामले में आरोपी लाला केवट गिरफ्तार..! जिला सीधी1
- गोहपारू, शहडोल। जिले के गोहपारू थाना क्षेत्र में पुलिस ने पशु तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए एक ट्रक समेत आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस की इस कार्रवाई से इलाके में हड़कंप मच गया है। जानकारी के अनुसार, गोहपारू पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि एक ट्रक में अवैध रूप से पशुओं की तस्करी कर उन्हें दूसरे राज्य ले जाया जा रहा है। सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने तुरंत नाकाबंदी कर संदिग्ध वाहन की तलाश शुरू कर दी। कुछ देर बाद बताए गए हुलिए का ट्रक इलाके से गुजरता हुआ दिखाई दिया। पुलिस ने ट्रक को रोककर जब जांच की तो उसमें बड़ी संख्या में पशु ठूंस-ठूंस कर भरे पाए गए। पशुओं को बिना किसी वैध दस्तावेज के ले जाया जा रहा था। पुलिस ने मौके पर ही ट्रक चालक सहित अन्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। ट्रक और पशुओं को जब्त कर लिया गया है। पशुओं को सुरक्षित स्थान पर भेजने की व्यवस्था की जा रही है। पुलिस के अनुसार आरोपियों के खिलाफ पशु क्रूरता अधिनियम तथा अन्य संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है और उनसे पूछताछ जारी है। इस कार्रवाई से पशु तस्करी करने वालों में डर का माहौल बना हुआ है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि यदि कहीं भी पशु तस्करी की जानकारी मिले तो तुरंत पुलिस को सूचना दें, ताकि ऐसे अपराधों पर सख्ती से रोक लगाई जा सके।1
- बाबा चिश्ती साहब के दरबार में होता है दुखो का अंत?1