जंगल में फूली कांस, अब छोड़ो बारिश की आस गांवो मर बोली जाने बाली पुरानी कहाबत का आज भी महत्त्व झींझक। गांवों में मौसम को लेकर कही जाने वाली पुरानी कहावतें आज भी ग्रामीण जीवन में खास महत्व रखती हैं। ऐसी ही एक प्रचलित कहावत है—“जंगल में फूली कांस, अब छोड़ो बारिश की आस।” इसका सीधा अर्थ है कि जब जंगल और खेतों के आसपास कांस के सफेद फूल खिलने लगें तो वर्षा ऋतु के विदा होने का समय माना जाता है। कांस का फूलना प्रकृति में मौसम के बदलाव का पारंपरिक संकेत माना जाता रहा है। बुजुर्गों के अनुसार कांस के सफेद फूल दिखाई देने लगें तो बरसात का दौर धीरे-धीरे समाप्ति की ओर बढ़ता है और शरद ऋतु के आगमन की आहट मिलने लगती है। इसी अनुभव को पीढ़ियों से कहावत के रूप में आगे बढ़ाया गया है। हालांकि आधुनिक मौसम विज्ञान के दौर में केवल कांस के फूलने के आधार पर बारिश की सटीक भविष्यवाणी नहीं की जा सकती, लेकिन यह कहावत ग्रामीण समाज की प्रकृति और मौसम के सूक्ष्म संकेतों को समझने की परंपरा को जरूर दर्शाती है। कांस के सफेद फूल अब गांवों में बदलते मौसम का संदेश देते नजर आने लगे हैं।
जंगल में फूली कांस, अब छोड़ो बारिश की आस गांवो मर बोली जाने बाली पुरानी कहाबत का आज भी महत्त्व झींझक। गांवों में मौसम को लेकर कही जाने वाली पुरानी कहावतें आज भी ग्रामीण जीवन में खास महत्व रखती हैं। ऐसी ही एक प्रचलित कहावत है—“जंगल में फूली कांस, अब छोड़ो बारिश की आस।” इसका सीधा अर्थ है कि जब जंगल और खेतों के आसपास कांस के सफेद फूल खिलने लगें तो वर्षा ऋतु के विदा होने का समय माना जाता है। कांस का फूलना प्रकृति में मौसम के बदलाव का पारंपरिक संकेत माना जाता रहा है। बुजुर्गों के अनुसार कांस के सफेद फूल दिखाई देने लगें तो बरसात का दौर धीरे-धीरे समाप्ति की ओर बढ़ता है और शरद ऋतु के आगमन की आहट मिलने लगती है। इसी अनुभव को पीढ़ियों से कहावत के रूप में आगे बढ़ाया गया है। हालांकि आधुनिक मौसम विज्ञान के दौर में केवल कांस के फूलने के आधार पर बारिश की सटीक भविष्यवाणी नहीं की जा सकती, लेकिन यह कहावत ग्रामीण समाज की प्रकृति और मौसम के सूक्ष्म संकेतों को समझने की परंपरा को जरूर दर्शाती है। कांस के सफेद फूल अब गांवों में बदलते मौसम का संदेश देते नजर आने लगे हैं।
- जंगल में फूली कांस, अब छोड़ो बारिश की आस गांवो मर बोली जाने बाली पुरानी कहाबत का आज भी महत्त्व झींझक। गांवों में मौसम को लेकर कही जाने वाली पुरानी कहावतें आज भी ग्रामीण जीवन में खास महत्व रखती हैं। ऐसी ही एक प्रचलित कहावत है—“जंगल में फूली कांस, अब छोड़ो बारिश की आस।” इसका सीधा अर्थ है कि जब जंगल और खेतों के आसपास कांस के सफेद फूल खिलने लगें तो वर्षा ऋतु के विदा होने का समय माना जाता है। कांस का फूलना प्रकृति में मौसम के बदलाव का पारंपरिक संकेत माना जाता रहा है। बुजुर्गों के अनुसार कांस के सफेद फूल दिखाई देने लगें तो बरसात का दौर धीरे-धीरे समाप्ति की ओर बढ़ता है और शरद ऋतु के आगमन की आहट मिलने लगती है। इसी अनुभव को पीढ़ियों से कहावत के रूप में आगे बढ़ाया गया है। हालांकि आधुनिक मौसम विज्ञान के दौर में केवल कांस के फूलने के आधार पर बारिश की सटीक भविष्यवाणी नहीं की जा सकती, लेकिन यह कहावत ग्रामीण समाज की प्रकृति और मौसम के सूक्ष्म संकेतों को समझने की परंपरा को जरूर दर्शाती है। कांस के सफेद फूल अब गांवों में बदलते मौसम का संदेश देते नजर आने लगे हैं।1
- पूर्व प्रत्याशी प्रभाकर पांडे का मनाया ज्ञाजनं दी । पार्टी ने दी बधाई। प्रभाकर पांडे का जन्मदिन डेरापुर गेस्ट हाउस में धूमधाम से मनाया गया डेरापुर। डेरापुर कृष्णा प्रेम गेस्ट हाउस में सोमवार को प्रभाकर पांडे का जन्मदिन केक काटकर कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने उत्साहपूर्वक मनाया। वही साथ पूर्व विधायक मदन गौतम नीतम सचान अमरीश सिंह गौर ने इस दौरान बड़ी संख्या में कार्यकर्ता व समर्थक मौजूद रहे। सभी ने प्रभाकर पांडे को जन्मदिन की शुभकामनाएं देते हुए उनके स्वस्थ एवं उज्ज्वल भविष्य की कामना की।जन्मदिन समारोह के दौरान कार्यकर्ताओं में खासा उत्साह देखने को मिला। वही फूल माला पहनाकर और चांदी का मुकुट पहनाकर समर्थकों ने केक काटकर खुशी मनाई और एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर शुभकामनाएं दीं। गेस्ट हाउस में काफी देर तक बधाई देने वालों का सिलसिला चलता रहा। प्रभाकर पांडे ने सभी कार्यकर्ताओं और समर्थकों का आभार जताते हुए कहा कि उनका स्नेह और सहयोग ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने सभी का धन्यवाद करते हुए आगे भी इसी तरह सहयोग बनाए रखने की अपील की। समारोह में क्षेत्र के कई कार्यकर्ता व समर्थक मौजूद रहे। जिसमें जिलाध्यक्ष बबलू राजा वीरसेन यादव लाखन सिंह यादव बबलू दीक्षित लाला मिश्रा लालू आदि तमाम सक्रिय कार्यकर्ता मौजू रहे।। अक्षय शुक्ला पत्रकार डेरापुर99186285412
- डेरापुर में दिनदहाड़े कथित अवैध खनन का वीडियो वायरल कानपुर देहात के संदलपुर ब्लॉक क्षेत्र के जरौली में कथित अवैध खनन का मामला मंगलवार को उस समय चर्चा में आ गया, जब मंगलवार दोपहर करीब 1 बजे खनन का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वायरल वीडियो के आधार पर ग्रामीणों ने क्षेत्र में खुलेआम खनन किए जाने के आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव क्षेत्र में दिन के उजाले में खनन का काम चल रहा है, बावजूद इसके संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों और विभागीय अमले की प्रभावी निगरानी नजर नहीं आ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि वायरल वीडियो में दिखाई दे रहा खनन वास्तव में अवैध है, तो यह प्रशासनिक निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। वायरल वीडियो सामने आने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब दिन में कथित रूप से खनन गतिविधियां चल रही थीं, तो जिम्मेदार विभाग के अधिकारियों की नजर आखिर क्यों नहीं पड़ी? ग्रामीणों ने प्रशासन से वायरल वीडियो की जांच कराने, मौके पर स्थलीय निरीक्षण करने और यदि खनन अवैध पाया जाए तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई किए जाने की मांग की है। हालांकि, वायरल वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और वीडियो में दिखाई दे रही गतिविधियों की वास्तविक स्थिति प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल मामला सामने आने के बाद प्रशासन की भूमिका और कार्रवाई पर लोगों की निगाहें टिकी हुई हैं। अब देखना यह है कि वायरल वीडियो के आधार पर प्रशासन जांच कर कथित अवैध खनन की सच्चाई सामने लाता है या मामला महज आरोपों तक सीमित रह जाता है।1
- सिकंदरा। थाना क्षेत्र के गोपालपुर गांव निवासी ट्रक चालक अक्षय कुमार ने सोमवार शाम करीब चार बजे पुलिस को तहरीर देकर पड़ोसी समेत चार लोगों पर गाली-गलौज, मारपीट और जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया है। सिकंदरा। थाना क्षेत्र के गोपालपुर गांव निवासी ट्रक चालक अक्षय कुमार ने सोमवार शाम करीब चार बजे पुलिस को तहरीर देकर पड़ोसी समेत चार लोगों पर गाली-गलौज, मारपीट और जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया है। पुलिस ने मामले की रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पीड़ित ने बताया कि रविवार शाम करीब सात बजे उसका पड़ोसी संत शरण से भूमि संबंधी विवाद हो गया था। विवाद की सूचना 112 पुलिस को दी गई। मौके पर पहुंची पुलिस ने दोनों पक्षों को समझाकर मामला शांत करा दिया। आरोप है कि इसी बात से नाराज होकर संत शरण ने रात करीब 10:30 बजे अपने साथियों के साथ पीड़ित के घर के दरवाजे पर पहुंचकर गाली-गलौज शुरू कर दी। आरोप है कि इसके बाद संत शरण, उसकी पत्नी उर्मिला, पुत्र प्रिंस और बहनोई सीताराम ने पीड़ित की पत्नी और पुत्री के साथ लाठी-डंडे और लोहे की रॉड से मारपीट की। मारपीट में उन्हें गंभीर चोटें आईं। इस दौरान आरोपियों ने गाली-गलौज करते हुए परिवार को जान से मारने की धमकी भी दी। आरोप है कि हमलावर पीड़ित के पुत्र का मोबाइल फोन भी छीन ले गए। घटना के बाद पीड़ित घायल अवस्था में सिकंदरा थाने पहुंचा, जहां पुलिस ने उसकी तहरीर लेकर कार्रवाई शुरू की। पुलिस ने घायलों का उपचार कराया और मामले की जांच की जा रही है।2
- डेरापुर में दिनदहाड़े कथित अवैध खनन का वीडियो वायरल, प्रशासन की निगरानी पर उठे सवाल डेरापुर में दिनदहाड़े कथित अवैध खनन का वीडियो वायरल, प्रशासन की निगरानी पर उठे सवाल डेरापुर थाना क्षेत्र के जरौली में कथित अवैध खनन का मामला मंगलवार को उस समय चर्चा में आ गया, जब मंगलवार दोपहर करीब 1 बजे खनन का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वायरल वीडियो के आधार पर ग्रामीणों ने क्षेत्र में खुलेआम खनन किए जाने के आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव क्षेत्र में दिन के उजाले में खनन का काम चल रहा है, बावजूद इसके संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों और विभागीय अमले की प्रभावी निगरानी नजर नहीं आ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि वायरल वीडियो में दिखाई दे रहा खनन वास्तव में अवैध है, तो यह प्रशासनिक निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। वायरल वीडियो सामने आने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब दिन में कथित रूप से खनन गतिविधियां चल रही थीं, तो जिम्मेदार विभाग के अधिकारियों की नजर आखिर क्यों नहीं पड़ी? ग्रामीणों ने प्रशासन से वायरल वीडियो की जांच कराने, मौके पर स्थलीय निरीक्षण करने और यदि खनन अवैध पाया जाए तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई किए जाने की मांग की है। हालांकि, वायरल वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और वीडियो में दिखाई दे रही गतिविधियों की वास्तविक स्थिति प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल मामला सामने आने के बाद प्रशासन की भूमिका और कार्रवाई पर लोगों की निगाहें टिकी हुई हैं। अब देखना यह है कि वायरल वीडियो के आधार पर प्रशासन जांच कर कथित अवैध खनन की सच्चाई सामने लाता है या मामला महज आरोपों तक सीमित रह जाता है।1
- डिजिटल लाइब्रेरी से अधिक विद्यार्थियों को जोड़ने पर जोर कानपुर देहात। मुख्य विकास अधिकारी विधान जायसवाल ने डीग एवं गुरुग्राम स्थित डिजिटल लाइब्रेरी का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने डिजिटल सुविधाओं, इंटरनेट कनेक्टिविटी, ई-लर्निंग व्यवस्था और अध्ययन संसाधनों का अवलोकन किया। उन्होंने अधिकारियों से पंजीकृत पाठकों, ई-पुस्तकों, ऑनलाइन अध्ययन सामग्री और तकनीकी व्यवस्थाओं की जानकारी ली। सीडीओ ने कहा कि डिजिटल लाइब्रेरी विद्यार्थियों, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं और शोधार्थियों के लिए उपयोगी माध्यम है। उन्होंने डिजिटल संसाधनों को समृद्ध करने, इंटरनेट सुविधा निर्बाध रखने और अध्ययन कक्षों में बेहतर व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। सीडीओ ने कहा कि अधिकाधिक विद्यार्थियों को डिजिटल लाइब्रेरी से जोड़ने के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए। नियमित रखरखाव और प्रभावी संचालन पर भी विशेष ध्यान देने को कहा। निरीक्षण के दौरान जिला विकास अधिकारी सुनील तिवारी, उपायुक्त श्रम रोजगार अशोक कुमार, खंड विकास अधिकारी समेत अन्य अधिकारी व कर्मचारी मौजूद रहे।1
- महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर मेंआईफोन की EMI विवाद के बाद पहाड़ी से 18 वर्षीय कुणाल और उसको बचाने आए माता-पिता की 200 फीट गहरी खाई में गिरने से मौत हो गई। इस घटना के पहले का परिवार का एक भावुक वीडियो सामने आया है, जिसमें मां-बेटे का अटूट प्यार देखने को मिल रहा है। सोशल मीडिया पर सामने आए एक नए वीडियो में संगीता अपने बेटे कुणाल को पीछे खींचने के लिए गिड़गिड़ाती, रोती और विनती करती नजर आ रही हैं। वीडियो में कुणाल पहाड़ी के खतरनाक किनारे पर खड़ा है, जबकि संगीता उससे कुछ ही फीट की दूरी पर जमीन पर बैठकर रो रही हैं और उसे समझाने का प्रयास कर रही हैं। ब्रेकिंग न्यूज़ संवाददाता आशीष मिश्रा लखनऊ दैनिक समाचार पत्र1
- औरैया अजीतमल के छीतापुर गांव में देर रात बड़ा हादसा। पड़ोसी की कच्ची दीवार टीन शेड पर गिरने से पांच लोग दबे। तीन बच्चों समेत पति-पत्नी मलबे में दबकर हुए घायल। सीओ मनोज गंगवार और कोतवाली प्रभारी विनोद कुमार मौके पर पहुंचे। पुलिस ने सभी घायलों को सीएचसी अजीतमल पहुंचाया। गंभीर घायल धीरेंद्र सिंह को जिला अस्पताल रेफर किया गया। नायब तहसीलदार अशोक कुमार ने अस्पताल पहुंचकर जानकारी ली।1