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बारां में गौ क्रूरता को लेकर फूटा जनआक्रोश बारां शहर के महाकाल नगर बर्डीया बस्ती में गाय के बछड़े के साथ हुई निर्मम क्रूरता के विरोध में आज गौ सेवक सड़कों पर उतर आए। गौ सेवकों ने पशु चिकित्सालय से पैदल मार्च करते हुए प्रताप चौक पहुंचकर सर्कल बनाकर रोड जाम किया। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि घटना के बाद भी अब तक आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। गौ सेवकों ने चेतावनी दी कि अगर 48 घंटे के भीतर गौ माता के हत्यारे को गिरफ्तार नहीं किया गया, तो उग्र आंदोलन किया जाएगा।
मोहम्मद अन्नू बारां
बारां में गौ क्रूरता को लेकर फूटा जनआक्रोश बारां शहर के महाकाल नगर बर्डीया बस्ती में गाय के बछड़े के साथ हुई निर्मम क्रूरता के विरोध में आज गौ सेवक सड़कों पर उतर आए। गौ सेवकों ने पशु चिकित्सालय से पैदल मार्च करते हुए प्रताप चौक पहुंचकर सर्कल बनाकर रोड जाम किया। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि घटना के बाद भी अब तक आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। गौ सेवकों ने चेतावनी दी कि अगर 48 घंटे के भीतर गौ माता के हत्यारे को गिरफ्तार नहीं किया गया, तो उग्र आंदोलन किया जाएगा।
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- बड़ी खबर | स्वास्थ्य व्यवस्था फेल मुंडला बिसोती के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भारी लापरवाही सामने आई है। सुबह 10:00 बजे तक अस्पताल का ताला नहीं खुला न डॉक्टर पहुंचे न कंपाउंडर मौजूद इलाज की उम्मीद लेकर पहुंचे मरीजों की लंबी कतार अस्पताल के बाहर लग गई। बुजुर्ग महिलाएं बच्चे सब घंटों तक परेशान होते रहे। स्थानीय लोगों का आरोप है कि डॉक्टर और कंपाउंडर समय पर ड्यूटी नहीं आते, जबकि चिकित्सा विभाग इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा।लापरवाही का सीधा असर आमजन की सेहत पर पड़ रहा है। सवाल यह है— जब समय पर डॉक्टर नहीं आएंगे, तो सरकारी अस्पताल किस काम का? स्थान : सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, मुंडला बिसोती1
- Post by Ajit Meena1
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- इटावा कोटा,6 फरवरी/ आज मजदूर फैडरेशन CWFI के 11 वे राष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन समारोह के दौरान cpim के सीकर सांसद कामरेड अमराराम जी ने मजदूरों के विरोध में लाए गए चार श्रम संहिता कानूनों को देश के मेहनतकश वर्ग और आमजनता को कारपोरेट घरानों और पूंजीपतियों के लिए गुलाम बनाने वाले कानून कहते हुए कहा कि इस तानाशाही सरकार के हमलों से मजदूरों को बचाने को लेकर आगामी 12फरवरी 2026को होने वाली राष्ट्रीय हड़ताल को सफल बनाना है और सरकार को झुकाने में देश का किसान मजदूर एकजुट होकर हड़ताल को सफल बनाने का काम करेगे।3
- कोटा। एर्नाकुलम-निजामुद्दीन दूरंतो एक्सप्रेस में गंदे शौचालय की शिकायत करने पर एक यात्री को टीटीई मारने के लिए दौड़ा। बड़ौदा निवासी मंगेश तिवारी ने शिकायत की, लेकिन कोटा पहुंचने तक सफाई नहीं हुई। वीडियो में टीटीई यात्री को धमकाता और धक्का-मुक्की करता दिख रहा है। सफाई कर्मचारियों और गार्ड की निष्क्रियता के कारण स्थिति और बिगड़ी। मामला दर्ज कर रिपोर्ट दिल्ली मंडल को भेजी जा रही है।1
- आए दिन हो रहे हादसों जा रही लोगों की जान शहर की सुंदरता को कर रहे दागदार कोटा। शैक्षणिक नगरी के रूप में देश-दुनिया में मशहूर कोटा अब आवारा मवेशियों की लगातार बढ़ती समस्या से जूझ रहा है। शहर की सड़कों, चौराहों और गलियों में खुलेआम घूमते आवारा गाय, सांड और अन्य मवेशी न केवल शहर की सुंदरता को दागदार कर रहे हैं, बल्कि बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं का प्रमुख कारण भी बन रहे हैं। इन मवेशियों के कारण आमजन अकाल मौत का शिकार हो रहा है, जबकि प्रशासन की ओर से इस समस्या का स्थायी समाधान अभी तक नजर नहीं आ रहा। टीम जीवनदाता के संरक्षक एवं संयोजक, सड़क सुरक्षा समिति के उपसचिव तथा लायंस क्लब कोटा टेक्नो के निदेशक भुवनेश गुप्ता ने बताया कि कोटा जैसे सुंदर, स्वच्छ और सजग शहर में आवारा मवेशी बड़े पैमाने पर विचरण कर रहे हैं। उन्होंने शहर का हालिया भ्रमण किया और कई संवेदनशील स्थानों की पहचान की, जहां यह समस्या सबसे गंभीर है। ये हैं सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र गुप्ता ने बताया कि कोटा में तलवंडी, एरोड्रम सर्किल, टीलेश्वर महादेव चौराहा, नयापुरा, स्टेशन क्षेत्र, मेडिकल कॉलेज कोटा एवं इसके आसपास के इलाके सबसे ज्यादा आवारा मवेशियों की समस्या से प्रभावित हैं। इन क्षेत्रों में मवेशी अक्सर सड़कों पर आकर खड़े हो जाते हैं या समूह में घूमते हैं, जिससे वाहन चालकों को अचानक ब्रेक लगाना पड़ता है और दुर्घटनाएं हो जाती हैं। कई बार गंभीर चोटें या मौत भी हो जाती है। कैटल फ्री शहर का दावा खोखला साबित भुवनेश गुप्ता ने कहा कि कोटा को नाममात्र का 'कैटल फ्री शहर' घोषित किया गया है, ठीक वैसे ही जैसे 'रेड लाइट फ्री शहर' का दावा किया जाता है। लेकिन हकीकत में सड़कें और चौराहे आवारा मवेशियों से पटे पड़े हैं। सख्त नियमों, अथक प्रयासों और प्रभावी कार्रवाई के अभाव में यह समस्या दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है। शहर की सुंदरता और सुरक्षा दोनों खतरे में हैं। सांडों की लड़ाई से जा चुकी हैं कई जानें पिछले कुछ महीनों में सांडों के आपसी झगड़ों से कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं और कुछ की मौत भी हो चुकी है। ऐसे हादसे आम हो गए हैं, लेकिन नगर निगम, कोटा विकास प्राधिकरण (केडीए), जिला प्रशासन और संबंधित विभागों की ओर से पर्याप्त कदम नहीं उठाए जा रहे। भुवनेश गुप्ता ने अपील की है कि सभी को मिलकर इस समस्या का तुरंत और स्थायी समाधान निकालना होगा।4
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