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ऐसे लोगों ने इतना गंद मचा रखा है कि आप सोच नहीं सकते इनको शर्म नहीं आती वही मजार बना देंगे वहीं रहने लग जाते फिर इनको हटाओ और कुछ कहो तो उल्टा अपना अपनी जगह बताते हैं

18 hrs ago
user_Sonu Faujdar
Sonu Faujdar
Taxi Driver Bharatpur, Rajasthan•
18 hrs ago

ऐसे लोगों ने इतना गंद मचा रखा है कि आप सोच नहीं सकते इनको शर्म नहीं आती वही मजार बना देंगे वहीं रहने लग जाते फिर इनको हटाओ और कुछ कहो तो उल्टा अपना अपनी जगह बताते हैं

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    Post by Badan singh prades adyksh OBC mahasabha Rajasthan
    user_Badan singh prades adyksh OBC mahasabha Rajasthan
    Badan singh prades adyksh OBC mahasabha Rajasthan
    भरतपुर, भरतपुर, राजस्थान•
    11 hrs ago
  • Post by Sonu Faujdar
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    Post by Sonu Faujdar
    user_Sonu Faujdar
    Sonu Faujdar
    Taxi Driver Bharatpur, Rajasthan•
    18 hrs ago
  • Post by संवाददाता देवेन्द्र कुमार सत्य
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    Post by संवाददाता देवेन्द्र कुमार सत्य
    user_संवाददाता देवेन्द्र कुमार सत्य
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    4 hrs ago
  • मथुरा थाना कोसीकला क्षेत्र के अंतर्गत गांव फलेंन में विगत वर्षों की बात इस साल भी पंडा होली की ऊंची ऊंची लपटों के बीच से गुजरता दिखाई दिया। बताया जाता है भक्त प्रहलाद की शक्ति समाहित होती है तब आज के दरिया को पार किया जाता है पुजारी के बाहर निकलते ही लोगों के मुंह से वक्त प्रहलाद के जय जयकारे उड़ घोषित किए गए
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    मथुरा थाना कोसीकला क्षेत्र के अंतर्गत गांव फलेंन में विगत वर्षों की बात इस साल भी पंडा होली की ऊंची ऊंची लपटों के बीच से गुजरता दिखाई दिया। बताया जाता है भक्त प्रहलाद की शक्ति समाहित होती है तब आज के दरिया को पार किया जाता है पुजारी के बाहर निकलते ही लोगों के मुंह से वक्त प्रहलाद के जय जयकारे उड़ घोषित किए गए
    user_Murli Thakur Reporter
    Murli Thakur Reporter
    Court reporter मथुरा, मथुरा, उत्तर प्रदेश•
    5 hrs ago
  • मथुरा, 3 मार्च 2026: उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में स्थित फालेन गांव, जो भक्त प्रह्लाद की नगरी के रूप में जाना जाता है, ने एक बार फिर अपनी अनोखी होलिका दहन परंपरा को जीवंत किया. यहां पंडा समाज के सदस्य संजू पंडा ने धधकते अंगारों के बीच से नंगे पांव गुजरकर हजारों श्रद्धालुओं को आश्चर्यचकित कर दिया. यह परंपरा कथित तौर पर 5300 वर्ष पुरानी है और प्रह्लाद-होलिका की कथा से जुड़ी हुई है. सोमवार देर रात फालेन गांव में होलिका दहन का आयोजन हुआ. होलिका की विशाल संरचना लगभग 20 फीट ऊंची और 30 फीट लंबी थी, जिसे गांववासियों ने मिलकर तैयार किया था. शुभ मुहूर्त में संजू पंडा ने प्रह्लाद मंदिर में हवन किया, प्रह्लाद कुंड में स्नान किया और फिर आग के बीच से सुरक्षित निकल आए. इस दौरान उनके शरीर पर कोई खरोंच तक नहीं आई. हजारों की संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं ने प्रह्लाद के जयकारे लगाए और ढोल-नगाड़ों के साथ उत्सव मनाया। फालेन गांव मथुरा शहर से करीब 40 किलोमीटर दूर छाता तहसील में स्थित है. यहां मान्यता है कि यह भक्त प्रह्लाद का जन्मस्थान है, जहां होलिका ने प्रह्लाद को जलाने की कोशिश की थी लेकिन खुद जल गईं. इस घटना की स्मृति में हर वर्ष पंडा समाज का एक सदस्य इस रिवाज को निभाता है. संजू पंडा पिछले दो वर्षों से यह जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, इससे पहले उनके पिता और भाई यह करते थे. परंपरा निभाने के लिए संजू पंडा ने 45 दिनों की कठोर तपस्या की, जिसमें एक समय का फलाहार और मंदिर परिसर में एकांतवास शामिल था. तपस्या के दौरान किसी से मिलना वर्जित होता है. होलिका दहन से पहले उनकी बहन दूध की धार से रास्ता बनाती हैं, फिर वे अंगारों से गुजरते हैं. इस आयोजन को देखने के लिए भारत भर से और विदेशों से भी श्रद्धालु आते हैं. जिला प्रशासन द्वारा सुरक्षा व्यवस्थाएं की जाती हैं, ताकि कोई दुर्घटना न हो. इस वर्ष भी सबकुछ सुचारू रूप से संपन्न हुआ. यह परंपरा ब्रज क्षेत्र की होली की विविधता को दर्शाती है, जहां लठमार होली, फूलों की होली और अन्य रिवाज भी प्रचलित हैं. फालेन का पंडा न केवल धार्मिक महत्व रखता है बल्कि सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक भी है.
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    मथुरा, 3 मार्च 2026: उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में स्थित फालेन गांव, जो भक्त प्रह्लाद की नगरी के रूप में जाना जाता है, ने एक बार फिर अपनी अनोखी होलिका दहन परंपरा को जीवंत किया. यहां पंडा समाज के सदस्य संजू पंडा ने धधकते अंगारों के बीच से नंगे पांव गुजरकर हजारों श्रद्धालुओं को आश्चर्यचकित कर दिया. यह परंपरा कथित तौर पर 5300 वर्ष पुरानी है और प्रह्लाद-होलिका की कथा से जुड़ी हुई है.
सोमवार देर रात फालेन गांव में होलिका दहन का आयोजन हुआ. होलिका की विशाल संरचना लगभग 20 फीट ऊंची और 30 फीट लंबी थी, जिसे गांववासियों ने मिलकर तैयार किया था. शुभ मुहूर्त में संजू पंडा ने प्रह्लाद मंदिर में हवन किया, प्रह्लाद कुंड में स्नान किया और फिर आग के बीच से सुरक्षित निकल आए. इस दौरान उनके शरीर पर कोई खरोंच तक नहीं आई. हजारों की संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं ने प्रह्लाद के जयकारे लगाए और ढोल-नगाड़ों के साथ उत्सव मनाया।
फालेन गांव मथुरा शहर से करीब 40 किलोमीटर दूर छाता तहसील में स्थित है. यहां मान्यता है कि यह भक्त प्रह्लाद का जन्मस्थान है, जहां होलिका ने प्रह्लाद को जलाने की कोशिश की थी लेकिन खुद जल गईं. इस घटना की स्मृति में हर वर्ष पंडा समाज का एक सदस्य इस रिवाज को निभाता है. संजू पंडा पिछले दो वर्षों से यह जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, इससे पहले उनके पिता और भाई यह करते थे.
परंपरा निभाने के लिए संजू पंडा ने 45 दिनों की कठोर तपस्या की, जिसमें एक समय का फलाहार और मंदिर परिसर में एकांतवास शामिल था. तपस्या के दौरान किसी से मिलना वर्जित होता है. होलिका दहन से पहले उनकी बहन दूध की धार से रास्ता बनाती हैं, फिर वे अंगारों से गुजरते हैं.
इस आयोजन को देखने के लिए भारत भर से और विदेशों से भी श्रद्धालु आते हैं. जिला प्रशासन द्वारा सुरक्षा व्यवस्थाएं की जाती हैं, ताकि कोई दुर्घटना न हो. इस वर्ष भी सबकुछ सुचारू रूप से संपन्न हुआ.
यह परंपरा ब्रज क्षेत्र की होली की विविधता को दर्शाती है, जहां लठमार होली, फूलों की होली और अन्य रिवाज भी प्रचलित हैं. फालेन का पंडा न केवल धार्मिक महत्व रखता है बल्कि सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक भी है.
    user_राहुल गौड़ पत्रकार
    राहुल गौड़ पत्रकार
    Local News Reporter मथुरा, मथुरा, उत्तर प्रदेश•
    7 hrs ago
  • Post by संवाददाता देवेन्द्र कुमार सत्य
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    Post by संवाददाता देवेन्द्र कुमार सत्य
    user_संवाददाता देवेन्द्र कुमार सत्य
    संवाददाता देवेन्द्र कुमार सत्य
    Local News Reporter Rupbas, Bharatpur•
    6 hrs ago
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