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मीरजापुर जिले के जिगना स्थित ग्राम सभा कोठरा मिश्रान में अमित कुमार का जन्मदिन उत्साहपूर्वक मनाया गया। इस अवसर पर स्थानीय ग्रामीणों ने मिलकर एक कार्यक्रम का आयोजन किया, जिसमें नाच-गाने के साथ जश्न मनाया गया।
अमरनाथ गौतम पत्रकार
मीरजापुर जिले के जिगना स्थित ग्राम सभा कोठरा मिश्रान में अमित कुमार का जन्मदिन उत्साहपूर्वक मनाया गया। इस अवसर पर स्थानीय ग्रामीणों ने मिलकर एक कार्यक्रम का आयोजन किया, जिसमें नाच-गाने के साथ जश्न मनाया गया।
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- मीरजापुर जिले के जिगना स्थित ग्राम सभा कोठरा मिश्रान में अमित कुमार का जन्मदिन उत्साहपूर्वक मनाया गया। इस अवसर पर स्थानीय ग्रामीणों ने मिलकर एक कार्यक्रम का आयोजन किया, जिसमें नाच-गाने के साथ जश्न मनाया गया।2
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- उत्तर प्रदेश सरकार एक ओर भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस का दावा करती है, वहीं दूसरी ओर भ्रष्टाचार की शिकायतों से डरने का आरोप लगा है। इसी बीच, 8 जुलाई को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मिर्जापुर जनपद में प्रशासनिक बैठक और भ्रमण कार्यक्रम के मद्देनजर, जिला प्रशासन ने शिकायतकर्ताओं को मुख्यमंत्री से मिलने से रोक दिया। जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री के कार्यक्रम से दो दिन पहले करणी सेना के जिला अध्यक्ष दिलीप सिंह गहरवार और उनकी टीम ने मुख्यमंत्री से मिलने की योजना बनाई थी। वे मिर्जापुर की मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं जैसे जर्जर सड़कें, गड्ढों में भरा पानी, नटवा ओवरब्रिज के नीचे जमा पानी, और स्वास्थ्य विभाग में हुए ₹6 करोड़ 82 लाख के कथित व्यापक भ्रष्टाचार की शिकायत करना चाहते थे। उनकी मांग थी कि इन मुद्दों का तत्काल निस्तारण किया जाए। हालांकि, प्रदेश सरकार पर यह आरोप लगाया गया है कि वह अपने नुमाइंदों की शिकायतें सुनने से डरती है और शिकायतकर्ताओं को अपने पास नहीं आने देना चाहती। मिर्जापुर जिला और पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट रूप से कहा कि मुख्यमंत्री से न तो कोई जनप्रतिनिधि, न पत्रकार और न ही कोई समाजसेवी अपनी समस्या या मांग को लेकर मिल पाएगा। यह सवाल उठाया गया है कि राजा से जनता अपनी दुख बयान न कर सके तो कैसा शासन और कैसा प्रशासन? इसके परिणामस्वरूप, सरकार पर मूलभूत सुविधाओं की कमी और भ्रष्टाचार को उजागर होने से बचाने, तथा जनता की शिकायतें न सुनने के लिए जिला प्रशासन को निर्देश देने का आरोप लगा है। इसी के तहत, करणी सेना के जिला अध्यक्ष दिलीप सिंह गहरवार को उनके निवास चंदईपुर में ही घर पर नजरबंद (हाउस अरेस्ट) कर लिया गया। उनके घर पर ही उनसे मांग पत्र लिया गया और उन्हें व उनके साथियों को तब तक हाउस अरेस्ट में रखा जाएगा जब तक मुख्यमंत्री अपने गंतव्य पर वापस नहीं चले जाते। मौके पर दिलीप सिंह गहरवार सहित अभिषेक सिंह धवल, इंस्पेक्टर सिंह (शिवम), डॉ. अवनीश सिंह गहरवार, शाश्वत सिंह, पुष्कर सिंह राठौड़, अनुराग सिंह, विनीत सिंह, उदय सिंह, प्रीतम सिंह, युवराज सिंह, अभय सिंह, मंदीप, पंचम सिंह, अतुल सिंह, संजय गुप्ता, रमाकांत सिंह, हेमंत कुमार, प्रदीप सिंह, शिवम सिंह, धीरज सिंह, राकेश सिंह, अवनीश सिंह, राकेश सिंह राणा, शिवपाल सिंह, कुश सिंह, अमित सिंह, मोहित सिंह, मंगल सिंह, फुलेल सिंह, रत्नेश सिंह, अतुल सिंह और आवेश सिंह सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। इस घटना को प्रदेश सरकार की भ्रष्टाचार के मुद्दे पर 'उड़ी नींद' के रूप में देखा जा रहा है, जहाँ मुख्यमंत्री के आगमन पर जिला प्रशासन ने समाजसेवियों को भ्रष्टाचार उजागर करने से रोकने के लिए उन्हें हाउस अरेस्ट किया और उनका मांग पत्र घर पर ही लिया।1
- घोरावल ब्लॉक के भैसवार गांव में चकबंदी घोटाले के आरोप को लेकर किसानों का गुस्सा 414वें दिन भी उबाल पर है। किसानों ने प्रशासन की निष्क्रियता पर गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए चेतावनी दी है कि यदि उनकी समस्याओं का जल्द संज्ञान नहीं लिया गया तो आंदोलन को आगे नहीं बढ़ने दिया जाएगा और इसे और उग्र रूप दिया जाएगा। भारतीय किसान यूनियन लोक शक्ति के सोनभद्र जिलाध्यक्ष बिरजू कुशवाहा ने घोषणा की कि बहुत जल्द पांच सूत्री मांगों को लेकर एक महापंचायत बुलाई जाएगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी। मिर्ज़ापुर के जिला प्रभारी ब्रह्म देव त्रिपाठी जी ने भी प्रशासनिक निष्क्रियता पर रोष जताते हुए कहा कि किसानों की समस्याओं की लगातार अनदेखी हो रही है; उन्होंने भैसवार गांव के किसानों को न्याय और तत्काल राहत देने की मांग की। राष्ट्रीय संगठन भारतीय किसान यूनियन (भानु गुट) के हित गोपाल अपअध्याय ने अधिकारियों पर संज्ञान न लेने का आरोप लगाते हुए कहा कि प्रशासनिक अधिकारी और चकबंदी अधिकारी चकबंदी अनियमितताओं पर जल्द से जल्द आख्या प्रस्तुत करें, अन्यथा किसी भी प्रकार की समस्या होने पर जिलाधिकारी और चकबंदी अधिकारी जिम्मेदार होंगे। बरसाना (मथुरा) से आए सीताराम बाबा ने भी किसानों की समस्याओं को सुनकर सरकार से उन्हें अनदेखा न करने की अपील की। इस धरना स्थल पर बिरजू कुशवाहा, सचिव संजय कुमार यादव, बृजदाश (सुनील भैया), ब्रह्म देव त्रिपाठी जी, सीताराम बाबा, मनोज कुमार यादव, सुभाष चंद्र और राधेश्याम मौर्य सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे, जिन्होंने चकबंदी अनियमितताओं के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की।1
- सीएम योगी आदित्यनाथ मिर्ज़ापुर पहुंचे, जहाँ उन्होंने सबसे पहले माँ विंध्यवासिनी के दरबार में अपनी हाजिरी लगाई। इस दौरान उन्होंने विधि-विधान से दर्शन और पूजन किया।1
- उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज मिर्जापुर पहुंचे, जहां उन्होंने सबसे पहले मां विंध्यवासिनी का दर्शन-पूजन किया। इसके बाद वे अष्टभुजा डाक बंगले गए, जहां अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक करने वाले थे। इसी दौरान, अष्टभुजा और अहरौरा टोल प्लाजा से जुड़ी समस्याओं को लेकर कांग्रेसी नेता मुख्यमंत्री से मिलने पहुंच गए। कांग्रेस के जिलाध्यक्ष शिव कुमार के साथ करीब आधा दर्जन कांग्रेसी अष्टभुजा डाक बंगले पहुंचे। कांग्रेसी नेताओं को देखते ही पुलिस के हाथ-पांव फूल गए, और उन्हें तुरंत वहां से हटा दिया गया।2
- यह पोस्ट श्रीराधे, माँ विंध्यवासिनी, प्रभु श्री कृष्ण और देवों के देव महादेव जैसे पूजनीय देवी-देवताओं के प्रति गहन आस्था व्यक्त करती है। इसमें धर्म, कर्म और सत्य जैसे मौलिक आध्यात्मिक सिद्धांतों के महत्व को भी रेखांकित किया गया है, जो भारतीय संस्कृति के गहरे मूल्यों को दर्शाते हैं।1
- उत्तर प्रदेश के मीरजापुर जनपद में स्थित प्रतिष्ठित बाबू लाल जायसवाल इंटर कॉलेज का प्रशासनिक कार्यालय बेहद जर्जर अवस्था में है। कार्यालय भवन की छत और दीवारें पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं, जिससे कभी भी कोई बड़ा हादसा होने की आशंका बनी हुई है। इस खतरनाक स्थिति के कारण कार्यालय में प्रतिदिन काम करने वाले कर्मचारियों और अपने अभिलेख जमा करने आने वाले छात्र-छात्राओं की जान लगातार जोखिम में है। कॉलेज के प्रधान लिपिक ने इस गंभीर स्थिति के लिए कार्यवाहक प्रधानाचार्या पर घोर लापरवाही और उपेक्षा का आरोप लगाया है। प्रधान लिपिक के अनुसार, उन्होंने कार्यालय की जर्जर स्थिति के संबंध में कई बार प्रधानाचार्या को अवगत कराया, लेकिन इसके बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई। उनका यह भी कहना है कि कार्यवाहक प्रधानाचार्या स्वयं अपने कक्ष में उपस्थित नहीं रहती हैं, जिस कारण उन्हें कार्यालय की वास्तविक और गंभीर स्थिति की जानकारी ही नहीं हो पा रही है। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए, प्रधान लिपिक ने कार्यवाहक प्रधानाचार्या को एक लिखित पत्र देकर स्पष्ट चेतावनी दी है। इस चेतावनी में कहा गया है कि यदि जर्जर भवन के गिरने से कोई जनहानि होती है, तो उसकी संपूर्ण जिम्मेदारी कार्यवाहक प्रधानाचार्या की होगी। नगर के गणमान्य नागरिकों ने भी इस विषय पर चिंता व्यक्त की है और जिला प्रशासन तथा माध्यमिक शिक्षा विभाग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने आग्रह किया है कि कॉलेज के जर्जर भवन का अविलंब निरीक्षण कराया जाए और आवश्यक मरम्मत के साथ-साथ कर्मचारियों एवं छात्रों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। गणमान्य नागरिकों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए, तो कोई भी अप्रिय घटना घटित हो सकती है।1