किरंदुल में भक्ति और उत्साह का अद्भुत संगम — राघव मंदिर से निकली भव्य शिव रथ एवं कलश यात्रा,सैकड़ों श्रद्धालु हुए शामिल रिपोर्ट/ रवि सरकार लौह नगरी किरंदुल एक बार फिर गगनभेदी हर-हर महादेव के जयकारों से गूंज उठा,जब राघव मंदिर से भगवान शिव की भव्य रथ यात्रा एवं कलश यात्रा पूरे धार्मिक रीति-रिवाजों और उत्साह के साथ निकाली गई,इस पावन अवसर पर नगर के कोने-कोने से श्रद्धालु बड़ी संख्या में एकत्रित हुए और शिवभक्ति में लीन होकर इस ऐतिहासिक यात्रा का हिस्सा बने, रथ यात्रा का शुभारंभ राघव मंदिर प्रांगण से विधिवत पूजन-अर्चना के साथ किया गया इसके पश्चात यात्रा मेन मार्केट,लोडिंग प्लांट,आंबेडकर भवन होते हुए बैंक चौक तक पहुंची,मार्ग में जगह-जगह श्रद्धालुओं द्वारा भगवान शिव की आरती उतारी गई, पुष्प वर्षा की गई और रथ का भव्य स्वागत किया गया,वातावरण ढोल-नगाड़ों,शंखध्वनि और भक्तों के जयकारों से भक्तिमय हो उठा, कलश यात्रा में मातृशक्ति की विशेष भागीदारी देखने को मिली,सिर पर कलश धारण किए महिलाएं भक्ति गीत गाते हुए पूरे मार्ग में श्रद्धा और अनुशासन के साथ चलती रहीं,युवाओं और बच्चों में भी खासा उत्साह दिखाई दिया भक्तगण नाचते-गाते, झूमते हुए शिवजी की महिमा का गुणगान करते रहे,नगर की सड़कों पर आस्था का अद्भुत दृश्य देखने को मिला, गांधी नगर से होते हुए शिवजी महाराज की रथ यात्रा पुनः राघव मंदिर पहुंची,पूरे नगर का भ्रमण कर भगवान शिव की रथ परिक्रमा हर्षोल्लास और धार्मिक उल्लास के साथ संपन्न हुई,नगरवासियों ने इस आयोजन को एक महोत्सव के रूप में मनाया, गुरुवार को आयोजित धार्मिक कार्यक्रमों के अंतर्गत प्रातः 8 बजे से दोपहर 1 बजे तक तथा दोपहर 3:30 बजे से रात्रि 9 बजे तक विभिन्न वैदिक अनुष्ठान संपन्न किए जा रहे हैं,कार्यक्रम में वेदी रचना,समस्त देव शक्तियों का आवाहन एवं पूजन,सप्त तीर्थ,जल शयन अधिवास सहित अनेक धार्मिक विधियां श्रद्धा और विधि-विधान के साथ संपन्न हो रही हैं, पूरे दिन मंदिर परिसर में भजन-कीर्तन, पूजा-अर्चना और धार्मिक वातावरण बना रहा,इस आयोजन ने नगर में आध्यात्मिक ऊर्जा और सामाजिक एकता का संदेश दिया,किरंदुल की पहचान केवल लौह नगरी के रूप में ही नहीं,बल्कि आस्था और सांस्कृतिक समरसता के केंद्र के रूप में भी स्थापित होती नजर आईं
किरंदुल में भक्ति और उत्साह का अद्भुत संगम — राघव मंदिर से निकली भव्य शिव रथ एवं कलश यात्रा,सैकड़ों श्रद्धालु हुए शामिल रिपोर्ट/ रवि सरकार लौह नगरी किरंदुल एक बार फिर गगनभेदी हर-हर महादेव के जयकारों से गूंज उठा,जब राघव मंदिर से भगवान शिव की भव्य रथ यात्रा एवं कलश यात्रा पूरे धार्मिक रीति-रिवाजों और उत्साह के साथ निकाली गई,इस पावन अवसर पर नगर के कोने-कोने से श्रद्धालु बड़ी संख्या में एकत्रित हुए और शिवभक्ति में लीन होकर इस ऐतिहासिक यात्रा का हिस्सा बने, रथ यात्रा का
शुभारंभ राघव मंदिर प्रांगण से विधिवत पूजन-अर्चना के साथ किया गया इसके पश्चात यात्रा मेन मार्केट,लोडिंग प्लांट,आंबेडकर भवन होते हुए बैंक चौक तक पहुंची,मार्ग में जगह-जगह श्रद्धालुओं द्वारा भगवान शिव की आरती उतारी गई, पुष्प वर्षा की गई और रथ का भव्य स्वागत किया गया,वातावरण ढोल-नगाड़ों,शंखध्वनि और भक्तों के जयकारों से भक्तिमय हो उठा, कलश यात्रा में मातृशक्ति की विशेष भागीदारी देखने को मिली,सिर पर कलश धारण किए महिलाएं भक्ति गीत गाते हुए पूरे मार्ग में श्रद्धा और अनुशासन के साथ चलती रहीं,युवाओं और बच्चों में
भी खासा उत्साह दिखाई दिया भक्तगण नाचते-गाते, झूमते हुए शिवजी की महिमा का गुणगान करते रहे,नगर की सड़कों पर आस्था का अद्भुत दृश्य देखने को मिला, गांधी नगर से होते हुए शिवजी महाराज की रथ यात्रा पुनः राघव मंदिर पहुंची,पूरे नगर का भ्रमण कर भगवान शिव की रथ परिक्रमा हर्षोल्लास और धार्मिक उल्लास के साथ संपन्न हुई,नगरवासियों ने इस आयोजन को एक महोत्सव के रूप में मनाया, गुरुवार को आयोजित धार्मिक कार्यक्रमों के अंतर्गत प्रातः 8 बजे से दोपहर 1 बजे तक तथा दोपहर 3:30 बजे से
रात्रि 9 बजे तक विभिन्न वैदिक अनुष्ठान संपन्न किए जा रहे हैं,कार्यक्रम में वेदी रचना,समस्त देव शक्तियों का आवाहन एवं पूजन,सप्त तीर्थ,जल शयन अधिवास सहित अनेक धार्मिक विधियां श्रद्धा और विधि-विधान के साथ संपन्न हो रही हैं, पूरे दिन मंदिर परिसर में भजन-कीर्तन, पूजा-अर्चना और धार्मिक वातावरण बना रहा,इस आयोजन ने नगर में आध्यात्मिक ऊर्जा और सामाजिक एकता का संदेश दिया,किरंदुल की पहचान केवल लौह नगरी के रूप में ही नहीं,बल्कि आस्था और सांस्कृतिक समरसता के केंद्र के रूप में भी स्थापित होती नजर आईं
- किरंदुल में भक्ति और उत्साह का अद्भुत संगम — राघव मंदिर से निकली भव्य शिव रथ एवं कलश यात्रा,सैकड़ों श्रद्धालु हुए शामिल रिपोर्ट/ रवि सरकार लौह नगरी किरंदुल एक बार फिर गगनभेदी हर-हर महादेव के जयकारों से गूंज उठा,जब राघव मंदिर से भगवान शिव की भव्य रथ यात्रा एवं कलश यात्रा पूरे धार्मिक रीति-रिवाजों और उत्साह के साथ निकाली गई,इस पावन अवसर पर नगर के कोने-कोने से श्रद्धालु बड़ी संख्या में एकत्रित हुए और शिवभक्ति में लीन होकर इस ऐतिहासिक यात्रा का हिस्सा बने, रथ यात्रा का शुभारंभ राघव मंदिर प्रांगण से विधिवत पूजन-अर्चना के साथ किया गया इसके पश्चात यात्रा मेन मार्केट,लोडिंग प्लांट,आंबेडकर भवन होते हुए बैंक चौक तक पहुंची,मार्ग में जगह-जगह श्रद्धालुओं द्वारा भगवान शिव की आरती उतारी गई, पुष्प वर्षा की गई और रथ का भव्य स्वागत किया गया,वातावरण ढोल-नगाड़ों,शंखध्वनि और भक्तों के जयकारों से भक्तिमय हो उठा, कलश यात्रा में मातृशक्ति की विशेष भागीदारी देखने को मिली,सिर पर कलश धारण किए महिलाएं भक्ति गीत गाते हुए पूरे मार्ग में श्रद्धा और अनुशासन के साथ चलती रहीं,युवाओं और बच्चों में भी खासा उत्साह दिखाई दिया भक्तगण नाचते-गाते, झूमते हुए शिवजी की महिमा का गुणगान करते रहे,नगर की सड़कों पर आस्था का अद्भुत दृश्य देखने को मिला, गांधी नगर से होते हुए शिवजी महाराज की रथ यात्रा पुनः राघव मंदिर पहुंची,पूरे नगर का भ्रमण कर भगवान शिव की रथ परिक्रमा हर्षोल्लास और धार्मिक उल्लास के साथ संपन्न हुई,नगरवासियों ने इस आयोजन को एक महोत्सव के रूप में मनाया, गुरुवार को आयोजित धार्मिक कार्यक्रमों के अंतर्गत प्रातः 8 बजे से दोपहर 1 बजे तक तथा दोपहर 3:30 बजे से रात्रि 9 बजे तक विभिन्न वैदिक अनुष्ठान संपन्न किए जा रहे हैं,कार्यक्रम में वेदी रचना,समस्त देव शक्तियों का आवाहन एवं पूजन,सप्त तीर्थ,जल शयन अधिवास सहित अनेक धार्मिक विधियां श्रद्धा और विधि-विधान के साथ संपन्न हो रही हैं, पूरे दिन मंदिर परिसर में भजन-कीर्तन, पूजा-अर्चना और धार्मिक वातावरण बना रहा,इस आयोजन ने नगर में आध्यात्मिक ऊर्जा और सामाजिक एकता का संदेश दिया,किरंदुल की पहचान केवल लौह नगरी के रूप में ही नहीं,बल्कि आस्था और सांस्कृतिक समरसता के केंद्र के रूप में भी स्थापित होती नजर आईं4
- *196 Bn CRPF और 170 Bn ने आवापल्ली-मुरदंडा एक्सिस पर लगभग 25-30 KG का कमांड IED डिटेक्ट किया और उसे सुरक्षित रूप से खत्म कर दिया* यह विनम्रतापूर्वक बताया जाता है कि CG सेक्टर के SST द्वारा डेवलप किए गए इंटेल के आधार पर, *एक कमांड वायर IED का समय पर पता लगाया गया* मुरदंडा - आवापल्ली रोड पर, मुरदंडा B & E/170 Bn कैंप से आवापल्ली की ओर लगभग 2.7 KMs की दूरी पर, 196 Bn के B/170 Bn और Young Platoon 196 ने लगभग 1140 बजे l JCB और पोकलेन की मदद से कमांड वायर IED का पता लगाया जा सका:- - लगभग वज़न- 25-30 KGs - IED में *लाल रंग का नॉटेड कॉर्डेक्स वायर और यूरिया* था - सड़क की सतह से लगभग 2 ft नीचे प्लास्टिक कंटेनर में छिपा हुआ था और कंटेनर का निचला हिस्सा सड़क से 5 ft नीचे था। - IED सड़क के किनारे से बीच की तरफ लगभग 5 ft अंदर था। - IED को बिजली के तार से मिट्टी के 2-5 इंच नीचे और सड़क के उत्तर दिशा में लगभग 350 mtrs तक खेत में जोड़ा गया था। - इसे लगभग 1600 बजे Sh Kumar manish Commandant 196 Bn के कमांड में Sh Shiva Prasad Second in Command 170 Bn और SHO PS अवापल्ली की मौजूदगी में सड़क से सुरक्षित रूप से हटा दिया गया। - JCB की मदद से सड़क को भरा गया और ट्रैफिक बहाल कर दिया गया। - किसी को कोई नुकसान या चोट नहीं आई है।1
- पनकी थाना अंतर्गत का मामला कानपुर नगर, उत्तर प्रदेश मामला HDFC Bank में वॉशरूम का दरवाज़ा बंद करने को लेकर था1
- ग्राम आंवरी में नए पुल का निर्माण जारी ग्रामीणों को जल्द मिलेगी सुगम आवागमन की सुविधा कलेक्टर ने पुल निर्माण का निरीक्षण कर जल्द पूर्ण करने के दिए निर्देश* कोंडागांव, 12 फरवरी 2026/ ग्राम पंचायत आंवरी में कई वर्ष पुराने जर्जर पुल की जगह पर नए पुल का निर्माण कार्य जारी है। गांव के खासपारा और टिपपारा के बीच पुल के बन जाने से ग्राम आंवरी से ग्राम धनोरा तक कई गांव को सुगम आवागमन की सुविधा।1
- एसपी कार्यालय में कानून व्यवस्था व अपराध नियंत्रण को लेकर एसपी ने ली क्राइम मीटिंग1
- *अग्नि से वनों की रक्षा हम सबकी जिम्मेदारी — धनसाय हुरा* *दुर्गूकोंदल में अग्नि से वनों को बचाने प्रशिक्षण सह कार्यशाला आयोजित* *वन संपदा और वन्य प्राणियों की सुरक्षा को लेकर ग्रामीणों व अग्नि प्रहरियों को किया गया प्रशिक्षित* *शिरो कोमरे, व मुकेश गावड़े ने जन-जागरूकता पर दिया जोर* दुर्गूकोदल | 3 फरवरी 2026। पूर्व भानुप्रतापपुर वनमण्डल अंतर्गत वन परिक्षेत्र दुर्गूकोंदल में वनों को आग से बचाने एवं वन्य प्राणियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से अग्नि से वनों को बचाने संबंधी प्रशिक्षण सह कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम विकासखंड दुर्गूकोदल के साधुमिचगांव मोड़ पर जन-जागरूकता अभियान के तहत आयोजित हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, अग्नि प्रहरी, वन प्रबंधन समिति के सदस्य, ग्रामीणजन एवं स्कूली छात्र-छात्राओं ने सहभागिता निभाई। कार्यक्रम में जनपद सदस्य एवं वन सभापति धनसाय हुरा ने कहा कि जंगल हमारी जीवनरेखा हैं और आग से इनकी रक्षा करना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि वे छोटी-सी लापरवाही को भी गंभीरता से लें और वनाग्नि की सूचना तुरंत विभाग को दें। इस अवसर पर पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष शिरो कोमरे ने कहा कि वनों की सुरक्षा से ही पर्यावरण संतुलन और आने वाली पीढ़ियों का भविष्य सुरक्षित रहेगा। ग्राम पंचायत साधुमिचगांव के सरपंच मुकेश कुमार गावड़े ने ग्रामीणों को जागरूक करते हुए कहा कि वन्य प्राणियों और जंगलों को बचाने में ग्राम स्तर की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। कार्यशाला में उपवनमण्डलाधिकारी आई. पी. गेंद्रे एवं वन परिक्षेत्र अधिकारी सतीश कुमार मिश्रा द्वारा एक दिवसीय प्रशिक्षण दिया गया। अधिकारियों ने बताया कि जंगलों में लगने वाली आग से बहुमूल्य वन संपदा नष्ट होती है, वन्य प्राणियों का जीवन संकट में पड़ता है तथा पर्यावरण असंतुलन, मृदा की उर्वरता में कमी और जल स्रोतों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। प्रशिक्षण के दौरान आग लगने के प्रमुख कारण, रोकथाम के उपाय, फायर लाइन निर्माण, प्रारंभिक स्तर पर आग पर नियंत्रण, त्वरित सूचना तंत्र और विभागीय समन्वय की विस्तृत जानकारी दी गई। अग्नि प्रहरियों एवं वन प्रबंधन समिति के सदस्यों को बताया गया कि समय पर सतर्कता और त्वरित कार्रवाई से बड़ी वनाग्नि की घटनाओं को रोका जा सकता है। इस अवसर पर साधुमिचगांव स्कूल के छात्र-छात्राओं को भी वन संरक्षण का महत्व समझाया गया। बच्चों को बताया गया कि जंगल केवल संसाधन नहीं, बल्कि जीवनदायिनी संपदा हैं, जिनकी रक्षा करना हम सभी का नैतिक दायित्व है। कार्यक्रम में सिद्धार्थ भारती, एकता कर, अखंड प्रताप तिवारी, डोमार सिंह पटेल, श्रीकान्त यदु, वनपाल हेमलता नरेटी, सतीश कुमार ठाकुर, संजय सेवता, सिताप सिंह नरेटी, लोकेश कुमार उइके सहित समस्त वन विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने संकल्प लिया कि वे वनों को आग से बचाने के लिए सतर्क रहेंगे और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत सूचना देकर वन विभाग को सहयोग करेंगे।3
- मऊ में वैलेंटाइन वीकेंड पर प्रेमी से नाराज़ होकर एक युवती ने सरयू नदी में छलांग लगा दी। ठंडे पानी में उतरते ही उसे अपनी गलती का एहसास हुआ और वह खुद को बचाने के लिए तैरने लगी। नदी में मौजूद नाविकों ने उसे संघर्ष करते देखा तो तुरंत नाव लेकर पहुंचे और सुरक्षित बाहर निकाल लिया। समय रहते रेस्क्यू होने से बड़ा हादसा टल गया।1
- किरंदुल में भक्ति और उत्साह का अद्भुत संगम — राघव मंदिर से निकली भव्य शिव रथ एवं कलश यात्रा,सैकड़ों श्रद्धालु हुए शामिल रिपोर्ट/ रवि सरकार लौह नगरी किरंदुल एक बार फिर गगनभेदी हर-हर महादेव के जयकारों से गूंज उठा,जब राघव मंदिर से भगवान शिव की भव्य रथ यात्रा एवं कलश यात्रा पूरे धार्मिक रीति-रिवाजों और उत्साह के साथ निकाली गई,इस पावन अवसर पर नगर के कोने-कोने से श्रद्धालु बड़ी संख्या में एकत्रित हुए और शिवभक्ति में लीन होकर इस ऐतिहासिक यात्रा का हिस्सा बने, रथ यात्रा का शुभारंभ राघव मंदिर प्रांगण से विधिवत पूजन-अर्चना के साथ किया गया इसके पश्चात यात्रा मेन मार्केट,लोडिंग प्लांट,आंबेडकर भवन होते हुए बैंक चौक तक पहुंची,मार्ग में जगह-जगह श्रद्धालुओं द्वारा भगवान शिव की आरती उतारी गई, पुष्प वर्षा की गई और रथ का भव्य स्वागत किया गया,वातावरण ढोल-नगाड़ों,शंखध्वनि और भक्तों के जयकारों से भक्तिमय हो उठा, कलश यात्रा में मातृशक्ति की विशेष भागीदारी देखने को मिली,सिर पर कलश धारण किए महिलाएं भक्ति गीत गाते हुए पूरे मार्ग में श्रद्धा और अनुशासन के साथ चलती रहीं,युवाओं और बच्चों में भी खासा उत्साह दिखाई दिया भक्तगण नाचते-गाते, झूमते हुए शिवजी की महिमा का गुणगान करते रहे,नगर की सड़कों पर आस्था का अद्भुत दृश्य देखने को मिला, गांधी नगर से होते हुए शिवजी महाराज की रथ यात्रा पुनः राघव मंदिर पहुंची,पूरे नगर का भ्रमण कर भगवान शिव की रथ परिक्रमा हर्षोल्लास और धार्मिक उल्लास के साथ संपन्न हुई,नगरवासियों ने इस आयोजन को एक महोत्सव के रूप में मनाया, गुरुवार को आयोजित धार्मिक कार्यक्रमों के अंतर्गत प्रातः 8 बजे से दोपहर 1 बजे तक तथा दोपहर 3:30 बजे से रात्रि 9 बजे तक विभिन्न वैदिक अनुष्ठान संपन्न किए जा रहे हैं,कार्यक्रम में वेदी रचना,समस्त देव शक्तियों का आवाहन एवं पूजन,सप्त तीर्थ,जल शयन अधिवास सहित अनेक धार्मिक विधियां श्रद्धा और विधि-विधान के साथ संपन्न हो रही हैं, पूरे दिन मंदिर परिसर में भजन-कीर्तन, पूजा-अर्चना और धार्मिक वातावरण बना रहा,इस आयोजन ने नगर में आध्यात्मिक ऊर्जा और सामाजिक एकता का संदेश दिया,किरंदुल की पहचान केवल लौह नगरी के रूप में ही नहीं,बल्कि आस्था और सांस्कृतिक समरसता के केंद्र के रूप में भी स्थापित होती नजर आईं4