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थाना सहायल क्षेत्र का मामला
Ashish Yadav Etawah
थाना सहायल क्षेत्र का मामला
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- Post by Ashish Yadav Etawah1
- इटावा | रिपोर्ट: ओमकार कठेरिया वैदपुरा थाना क्षेत्र के अंतर्गत जसवंतनगर रोड स्थित आर.एस. मैरिज होम वेदपुरा में धनुषवंशी धानुक एकता मंच क्रांतिकारी द्वारा एक दिवसीय सामाजिक चिंतन शिविर का आयोजन किया गया। शिविर का उद्देश्य धानुक समाज को शिक्षा, संगठन और सामाजिक जागरूकता के माध्यम से एकजुट करना रहा। कार्यक्रम में समाज के बुद्धिजीवी, युवा और वरिष्ठजन बड़ी संख्या में शामिल हुए।1
- *इटावा : महिला सिपाही से इश्क करना सिविल सेवा प्रतियोगी छात्र मनीष यादव को मंहगा पड़ा* *सीआरपीएफ जालंधर में तैनात महिला सिपाही के भाई ने दो दोस्तों की मदद से गोली मार हत्या की* *इटावा के भरथना इलाके से लापता हुआ था मनीष*1
- औरैया। कस्बा खानपुर स्थित अस्थाई गौ आश्रय स्थल में उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी प्रेमचंद निरंजन ने गोकाष्ठ (गोबर से बनी लकड़ी) मशीन का पूजन कर शुभारंभ किया। पूजन सुरभि स्वयं सहायता समूह की पूनम शुक्ला द्वारा किया गया। गौशाला संचालक एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, कानपुर प्रांत के सह गौ सेवा संयोजक संतोष जी ने बताया कि मशीन में गोबर, सूखा भूसा और घास डालकर लकड़ी तैयार की जाएगी, जिसे बिक्री के लिए उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि गोकाष्ठ का उपयोग हवन, पूजा-पाठ, होलिका दहन एवं अंतिम संस्कार में किया जा सकेगा, जिससे पेड़ों की कटाई कम होगी और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। इस अवसर पर उत्कर्ष शुक्ला, रमा गुप्ता, विशाल, सुशील, बृजेश बंधु सहित अन्य लोग मौजूद रहे।2
- Post by Ghanshyam Rajput1
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- गाय का गोबर कई प्रकार की वस्तुओं को बनाने में उपयोग किया जाता है-: प्रेमचन्द निंरजन जी उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी औरैया, गाय गोबर भी कई प्रकार की वस्तुओं को बनाने में उपयोग किया जाता है। जैसे - खाद, बायोगैस, मच्छरमार अगरबत्ती, गमला आदि जो कि पूरी तरह प्राकृतिक और रसायन-मुक्त तरीके से बनाए जाते हैं। अब इस गोबर का इस्तेमाल गोकाष्ट (गाय के गोबर से बनी लकड़ी) बनाने में भी किया जाने लगा है। उक्त जानकारी उप मुख्य पशुचिकित्साधिकारी प्रेमचन्द निंरजन जी ने अस्थाई गौ आश्रय स्थल कस्बा खानपुर, औरैया में गोकाक मशीन का पूजन व उसे प्रारम्भ करते हुये दी। मशीन का पूजन पूनम शुक्ला, सुरभि स्वयं सहायता समूह के द्वारा किया गया। उन्होंने कहा कि यह गौशालाओं को स्वाबंलम्बी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कड़ी है। गौशाला संचालक एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, कानपुर प्रान्त के सह गौ सेवा संयोजक संतोष जी ने बताया कि गोकाक मशीन में आपको गाय का गोबर, सूखा भूसा और घास को मशीन में डालना होगा जिससे ये लकड़ी तैयार करेगा, जो कि लकड़ी केंद्र पर बिक्री के लिए उपलब्ध होगी। इससे गौशाला स्वावलम्बी बनने के साथ-साथ धार्मिक, सांस्कृतिक वैज्ञानिक एवं पर्यावरण रक्षा में अपनी महती भूमिका का निर्वहन करेगी। उन्होनें बताया कि गौकाष्ठ के जलने से नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है तथा इसका धुंआ कीटाणू रहित होता है। होलिका दहन के समय काफी लकड़ी को जलाया जाता है, यदि हम गौकाष्ट के द्वारा होलिका दहन करते है तो यह पर्यावरण संरक्षण में काफी महत्वपूर्ण पहल होगी। इसी तरह अंतिम संस्कार के लिए लकड़ी प्राप्त करने के लिए भी बड़ी संख्या में पेड़ों को काट दिया जाता है जो कि पर्यावरण को नुकसान पहुंचाता है और अधिक धुआं भी पैदा करता है। इसी वजह से पर्यावरण को अनुकूल बनाने के लिए गोबर से बनी लकड़ी काफी फायदेमंद है। इस लकड़ी का उपयोग आप हवन, यज्ञ -पूजा पाठ, संस्कार आदि के लिए किया जायेगा और इसके साथ ही युवाओं के लिए भी रोजगार के साधन खुलेंगे। इसके साथ ही गौशाला में गाय के गोबर से बने अन्य उत्पाद जैसे मूर्तियां, फेसपैक धूपबती, हवनकप, पंचगव्य औषधि, मूर्ति दीपक, और दवा आदि उत्पाद भी उपलब्ध है। इस असवसर पर उत्कर्ष शुक्ला, रमा गुप्ता, विशाल, सुशील बृजेश बन्धु सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।1
- Post by Ashish Yadav Etawah2