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राजस्थान की राजनीति में गोविंद सिंह डोटासरा और किरोड़ी लाल मीणा के बीच चल रही गतिविधियां चर्चा का प्रमुख विषय बनी हुई हैं। यह खबर नवीनतम राजस्थानी राजनीतिक घटनाक्रमों को दर्शाती है।
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राजस्थान की राजनीति में गोविंद सिंह डोटासरा और किरोड़ी लाल मीणा के बीच चल रही गतिविधियां चर्चा का प्रमुख विषय बनी हुई हैं। यह खबर नवीनतम राजस्थानी राजनीतिक घटनाक्रमों को दर्शाती है।
More news from राजस्थान and nearby areas
- डूंगरपुर जिले में जर्जर स्कूल भवनों की समस्या डेढ़ साल बाद भी जस की तस बनी हुई है। हाल ही में हुए एक सर्वेक्षण के अनुसार, कुल 194 स्कूल भवन बच्चों के लिए असुरक्षित पाए गए हैं, जिनमें 169 जर्जर और 25 अति जर्जर श्रेणी के हैं। बताया गया है कि झालावाड़ में हुए हादसे के बाद जिले में कुल 209 जर्जर स्कूल भवन चिन्हित किए गए थे। हालांकि, इतने समय बाद भी अब तक केवल 13 स्कूलों के पुनर्निर्माण को ही स्वीकृति मिल पाई है। शिक्षा विभाग ने इन जर्जर भवनों के पुनर्निर्माण के लिए राज्य सरकार को 154 करोड़ रुपये से अधिक का एक नया प्रस्ताव भेजा है। इस बीच, कई स्कूलों के छात्र आज भी वैकल्पिक भवनों में पढ़ाई करने को मजबूर हैं। यह गंभीर स्थिति इशारा करती है कि जर्जर स्कूलें किसी और बड़े झालावाड़ जैसे हादसे का इंतजार कर रही हैं, और सरकार कब इस मामले में नींद से जागेगी।1
- प्रतापगढ़ में मोहर्रम की सात तारीख के अवसर पर बारी दरवाजे की छड़ी निकाली गई। इस कार्यक्रम में रतलाम से आए अखाड़े के पहलवानों ने अपने कलाबाजियों और शारीरिक करतबों का शानदार प्रदर्शन किया, जिससे उपस्थित लोग मंत्रमुग्ध हो गए।1
- जनजाति क्षेत्र के एक पुलिस थाने की तस्वीर सामने आई है, जिसमें एक महिला कांस्टेबल अपने पैरों पर पैर चढ़ाकर और पैर फैलाकर मेज पर बैठी दिखाई दे रही है। यह दृश्य एक 'पिता तुल्य बुजुर्ग' के सामने का है, जिसे देखकर ऐसा लगता है मानो यह पुलिसकर्मी अपने ही घर में बैठी हो। इस तस्वीर पर टिप्पणी करते हुए, समाज सेवी दिनेश चंद्र अहारी ने कहा कि यह घटना जनजाति क्षेत्र में हमारे नेताओं के कमजोर नेतृत्व को स्पष्ट रूप से दर्शाती है। उनके अनुसार, यह स्थिति इस बात का प्रमाण है कि जनजाति क्षेत्र में प्रजातंत्र पर नौकरशाही कितनी हावी हो चुकी है। अहारी ने नेताओं से आग्रह किया है कि वे इस पर गंभीरता से ध्यान दें और अपने प्रोटोकॉल तथा अपनी ताकत को समझें। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ऐसा नहीं किया गया, तो 'मालिक जनता' का इसी तरह शोषण होता रहेगा, जो उन्हें मालिक बनाती है।1
- रतलाम के सैलाना स्थित गांव करिया के पहाड़ी बांग्ला बंगला के जंगल में एक तेंदुआ देखे जाने से हड़कंप मच गया है। गांव के ईश्वर पिता देवीलाल खराड़ी ने अपने खेत पर जाते समय पहाड़ी क्षेत्र में इस तेंदुआ को घूमते हुए देखा। उन्होंने दूर से इसका एक वीडियो भी बनाया और तुरंत वन विभाग को इसकी जानकारी दी। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम अलर्ट हो गई और जंगल क्षेत्र में पहुंचकर सर्चिंग अभियान शुरू कर दिया है। हालांकि, अभी तक तेंदुआ पकड़ में नहीं आया है। वन विभाग ने ग्रामीणों के लिए अलर्ट जारी करते हुए कहा है कि वे अपने मवेशियों को खुला न छोड़ें और रात के समय घरों से बाहर न निकलें।1
- डूंगरपुर के राजकीय आयुर्विज्ञान महाविद्यालय एवं संबद्ध चिकित्सालय से सेवामुक्त किए गए लगभग 100 नर्स ग्रेड-द्वितीय (नर्सिंग ऑफिसर) कार्मिकों ने अपनी सेवाओं को पुनः बहाल करने की मांग को लेकर पूर्व राज्यमंत्री एवं भाजपा के पूर्व प्रदेश महामंत्री सुशील कटारा को मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपा है। इस ज्ञापन में नर्सिंग कर्मियों ने सेवा समाप्ति के आदेश को निरस्त कर उन्हें पुनः नियुक्त करने और टीएसपी क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए नियमित पदों पर भर्ती की मांग उठाई है। ज्ञापन में बताया गया कि डूंगरपुर के राजकीय आयुर्विज्ञान महाविद्यालय एवं संबद्ध चिकित्सालय में प्लेसमेंट एजेंसी के माध्यम से कार्यरत इन लगभग 100 नर्स ग्रेड-द्वितीय कार्मिकों की सेवाएं 22 जून 2026 को समाप्त कर दी गई हैं। ये कर्मी कई वर्षों से अस्पताल में अपनी सेवाएं दे रहे थे और कोविड-19 महामारी सहित विभिन्न विषम परिस्थितियों में स्वास्थ्य सेवाओं को सुचारू बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं। उन्होंने आईसीयू, एनआईसीयू, पीआईसीयू, आपातकालीन इकाई तथा विभिन्न वार्डों में लगातार सेवाएं प्रदान कर मरीजों को गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराने में योगदान दिया है। इन सेवाओं के अचानक समाप्त होने से लगभग 100 परिवारों के समक्ष आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। नर्सिंग कर्मियों ने अपने ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया है कि राजस्थान कॉन्ट्रैक्चुअल हायरिंग टू सिविल पोस्ट्स रूल्स-2022 के तहत 242 नर्सिंग कार्मिकों को नियुक्ति दी गई थी, लेकिन उपलब्ध जानकारी के अनुसार इनमें से केवल 138 कार्मिकों ने ही कार्यग्रहण किया है। ऐसे में अस्पताल में 100 से अधिक पद रिक्त रहने की संभावना है। कर्मियों का तर्क है कि जब अस्पताल में नर्सिंग स्टाफ की आवश्यकता अभी भी बनी हुई है, तब अनुभवी कार्मिकों की सेवाएं समाप्त करना स्वास्थ्य सेवाओं के हित में उचित नहीं है। उन्होंने वागड़ संभाग और टीएसपी क्षेत्र की स्वास्थ्य आवश्यकताओं पर जोर देते हुए कहा कि डूंगरपुर मेडिकल कॉलेज एवं संबद्ध अस्पताल पूरे आदिवासी क्षेत्र का प्रमुख चिकित्सा संस्थान है और यहां अनुभवी नर्सिंग स्टाफ की कमी होने पर स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है, जिससे दूरस्थ एवं जनजातीय क्षेत्रों से आने वाले मरीजों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा। नर्सिंग कर्मियों ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि सेवा समाप्ति आदेश को तत्काल निरस्त किया जाए, सभी सेवामुक्त नर्स ग्रेड-द्वितीय कार्मिकों की सेवाएं बहाल की जाएं, रिक्त एवं संभावित रिक्त पदों पर अनुभवी कार्मिकों को प्राथमिकता दी जाए, प्रभावित कर्मचारियों के हितों की रक्षा की जाए और अस्पताल की आवश्यकताओं को देखते हुए उनकी सेवाएं जारी रखी जाएं। इसके अतिरिक्त, ज्ञापन में टीएसपी क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए नर्सिंग ऑफिसर के लगभग 3000 नियमित पद पृथक रूप से स्वीकृत करने, राजस्थान चिकित्सा सेवा नियम, 1965 के तहत मेरिट एवं बोनस अंक आधारित भर्ती प्रक्रिया शीघ्र प्रारंभ करने तथा अनुभवी नर्सिंग कार्मिकों को उनके कार्यानुभव का लाभ देने की भी मांग की गई है। नर्सिंग कर्मियों ने उम्मीद जताई है कि राज्य सरकार जनहित, स्वास्थ्य सेवाओं की आवश्यकता तथा आदिवासी क्षेत्र की विशेष परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेगी। ज्ञापन सौंपते समय बड़ी संख्या में प्रभावित नर्स ग्रेड-द्वितीय कार्मिक उपस्थित थे।4
- धरियावद के मूंगाणा-जूना बारिया ग्राम पंचायत के वैली फल क्षेत्र में वन विभाग की कथित कार्रवाई को लेकर एक गंभीर विवाद सामने आया है। एक गरीब परिवार ने आरोप लगाया है कि वन विभाग के दल ने उनका निर्माणाधीन मकान ध्वस्त कर दिया, महिलाओं के साथ मारपीट की और सामान को भी नुकसान पहुंचाया। पीड़ित पवन नाथ (45) ने बताया कि उनका मकान सरकारी योजना के तहत जियो टैगिंग के बाद स्वीकृत हुआ था और इंदिरा आवास योजना के तहत उन्हें ₹15 हजार की किस्त भी मिली थी। उन्होंने दो वर्षों तक अहमदाबाद में मजदूरी करके मकान के लिए सामग्री जुटाई थी, और छत डलनी ही बाकी थी। आरोप है कि वन विभाग के कर्मचारियों के साथ मूंगाणा और पारसोला क्षेत्र से आए एक दल ने जेसीबी, ट्रैक्टर, मोटरसाइकिल और जीपों सहित मौके पर पहुंचकर इस निर्माणाधीन मकान को तोड़ा। परिवार का कहना है कि इस दौरान पवन नाथ की पत्नी पूंजी देवी और बहू सुमित्रा के साथ धक्का-मुक्की और मारपीट की गई; पूंजी देवी ने तो एक महिला कांस्टेबल पर कपड़े फाड़ने और मारपीट का आरोप लगाया है। परिवार ने बताया कि सुमित्रा की डिलीवरी को केवल 25 दिन हुए हैं और उनका बच्चा आईसीयू में भर्ती है। परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि कार्रवाई के दौरान उनके दो बकरे और एक बकरी लापता हो गए। ग्रामीणों ने शिकायत की कि यह कार्रवाई केवल एक मकान तक सीमित नहीं रही, बल्कि आसपास कुमारी क्षेत्र में हर्निया, कैलाश और गणेश के परिवारों की तीन झोपड़ियां भी तोड़ी गईं, और उन्हें जबरन वाहनों में बैठाकर ले जाया गया। इसके अतिरिक्त, गीता नाथ के बिजली के पोल तोड़ दिए गए और तारबंदी भी क्षतिग्रस्त कर दी गई। पीड़ित परिवार ने वनरक्षक कैलाश चौधरी पर कार्रवाई से पहले ₹20 हजार से ₹50 हजार मांगने और राशि न देने पर मारपीट करने का आरोप लगाया है। ग्रामीणों का दावा है कि संबंधित भूमि लगभग चार बीघा क्षेत्र में थी और उस पर वन विभाग का अधिकार नहीं बनता। घटना की सूचना पर क्षेत्रीय विधायक थावरचंद डामोर मौके पर पहुंचे, जिन्होंने रेंजर रामलाल भील और पटवारी को बुलाकर स्थिति की जानकारी ली। पटवारी बाबूलाल मीणा ने स्पष्ट किया कि जुना बोरिया आराजी नंबर 1/3 ऑनलाइन जमाबंदी के अनुसार ग्राम पंचायत गोठड़ा सुरक्षित चारागाह दर्ज है, और इस स्थान पर वन विभाग का कोई आधिपत्य नहीं है। इसके बाद, रेंजर रामलाल भील ने पीड़ित परिवार को तत्काल राशन और छत के लिए अस्थायी सहायता राशि उपलब्ध कराई। विधायक थावरचंद डामोर ने अधिकारियों को 29 जून तक पीड़ित परिवार का मकान पुनः निर्माण कर तैयार करके देने का अल्टीमेटम दिया है, साथ ही संबंधित अधिकारी को निलंबित करने की भी मांग की है। इस घटना के बाद से ग्रामीणों में भारी नाराजगी है और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग जोर पकड़ने लगी है।4
- डूंगरपुर जिले के निठाऊवा गांव में अज्ञात चोरों ने मांगीलाल पुत्र रतन पंचाल के घर को निशाना बनाते हुए चोरी की वारदात को अंजाम दिया। चोरों ने किचन की खिड़की तोड़कर घर में प्रवेश किया और तिजोरी व अलमारी से 20 तोला सोना तथा 60 तोला चांदी के जेवरात चोरी कर फरार हो गए। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची।1
- समाज सेवी दिनेश चंद्र अहारी ने बाण गंगा और बेडसी गंगा नामक दर्शनीय स्थानों के विषय में जानकारी मांगी है। उन्होंने इन स्थलों की स्थिति, उनके महत्व और उनके इतिहास को लेकर सवाल उठाए हैं।1
- प्रतापगढ़ में मोहर्रम की 7वीं तारीख को बारी दरवाजे से छड़ी का जुलूस निकाला गया। इस दौरान, रतलाम से आए अखाड़े के पहलवानों ने अपनी कला का प्रदर्शन करते हुए हैरतअंगेज करतब दिखाए।1