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डूंगरपुर जिले में जर्जर स्कूल भवनों की समस्या डेढ़ साल बाद भी जस की तस बनी हुई है। हाल ही में हुए एक सर्वेक्षण के अनुसार, कुल 194 स्कूल भवन बच्चों के लिए असुरक्षित पाए गए हैं, जिनमें 169 जर्जर और 25 अति जर्जर श्रेणी के हैं। बताया गया है कि झालावाड़ में हुए हादसे के बाद जिले में कुल 209 जर्जर स्कूल भवन चिन्हित किए गए थे। हालांकि, इतने समय बाद भी अब तक केवल 13 स्कूलों के पुनर्निर्माण को ही स्वीकृति मिल पाई है। शिक्षा विभाग ने इन जर्जर भवनों के पुनर्निर्माण के लिए राज्य सरकार को 154 करोड़ रुपये से अधिक का एक नया प्रस्ताव भेजा है। इस बीच, कई स्कूलों के छात्र आज भी वैकल्पिक भवनों में पढ़ाई करने को मजबूर हैं। यह गंभीर स्थिति इशारा करती है कि जर्जर स्कूलें किसी और बड़े झालावाड़ जैसे हादसे का इंतजार कर रही हैं, और सरकार कब इस मामले में नींद से जागेगी।

13 hrs ago
user_Sagwara live news
Sagwara live news
Local News Reporter सागवाड़ा, डूंगरपुर, राजस्थान•
13 hrs ago

डूंगरपुर जिले में जर्जर स्कूल भवनों की समस्या डेढ़ साल बाद भी जस की तस बनी हुई है। हाल ही में हुए एक सर्वेक्षण के अनुसार, कुल 194 स्कूल भवन बच्चों के लिए असुरक्षित पाए गए हैं, जिनमें 169 जर्जर और 25 अति जर्जर श्रेणी के हैं। बताया गया है कि झालावाड़ में हुए हादसे के बाद जिले में कुल 209 जर्जर स्कूल भवन चिन्हित किए गए थे। हालांकि, इतने समय बाद भी अब तक केवल 13 स्कूलों के पुनर्निर्माण को ही स्वीकृति मिल पाई है। शिक्षा विभाग ने इन जर्जर भवनों के पुनर्निर्माण के लिए राज्य सरकार को 154 करोड़ रुपये से अधिक का एक नया प्रस्ताव भेजा है। इस बीच, कई स्कूलों के छात्र आज भी वैकल्पिक भवनों में पढ़ाई करने को मजबूर हैं। यह गंभीर स्थिति इशारा करती है कि जर्जर स्कूलें किसी और बड़े झालावाड़ जैसे हादसे का इंतजार कर रही हैं, और सरकार कब इस मामले में नींद से जागेगी।

More news from राजस्थान and nearby areas
  • डूंगरपुर जिले के सागवाड़ा शहर के गामाठावाड़ा क्षेत्र में एक भूखंड और निर्माण कार्य को लेकर विवाद सामने आया है। इस मामले में राजेंद्र कुमार वशिष्ठ ने मंगलेश वाडेल पर उनके निर्माण कार्य में बाधा डालने और मानसिक रूप से परेशान करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। राजेंद्र कुमार वशिष्ठ के अनुसार, उन्होंने वर्ष 1998 में बैंक ऑफ बड़ौदा के पास एक मकान खरीदा था। उनका दावा है कि उन्होंने इसके समीप स्थित भूमि पर 'प्रशासन शहरों के संग अभियान' के तहत नगर पालिका से आवश्यक अनुमति और पट्टा प्राप्त करने के बाद ही निर्माण कार्य शुरू करने की प्रक्रिया अपनाई थी। वशिष्ठ का आरोप है कि इसी दौरान मंगलेश वाडेल ने संबंधित भूमि को लेकर न्यायालय का रुख किया और स्थगन आदेश प्राप्त कर लिया। हालांकि, वशिष्ठ का कहना है कि बाद में न्यायालय से उन्हें राहत मिल गई, लेकिन इसके बावजूद उनके निर्माण कार्य में लगातार बाधाएं उत्पन्न की जा रही हैं। उन्होंने बताया कि जब भी वे निर्माण का प्रयास करते हैं, उन्हें रोका जाता है, जिससे वे मानसिक रूप से बहुत परेशान हैं। इस संबंध में, नगर पालिका के अधिकारी जितेंद्र शर्मा ने बताया कि राजेंद्र कुमार वशिष्ठ ने निर्माण संबंधी प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया है। उन्होंने यह भी बताया कि इस पर मंगलेश वाडेल की ओर से आपत्ति दर्ज करवाई गई है। अधिकारी के अनुसार, मामले की नियमानुसार जांच की जा रही है और जांच के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल, यह भूमि और निर्माण संबंधी मामला प्रशासनिक प्रक्रिया में है, तथा संबंधित पक्षों के दावों और आपत्तियों की जांच जारी है। मामले में अंतिम स्थिति जांच पूरी होने और सक्षम प्राधिकारी के निर्णय के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
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    डूंगरपुर जिले के सागवाड़ा शहर के गामाठावाड़ा क्षेत्र में एक भूखंड और निर्माण कार्य को लेकर विवाद सामने आया है। इस मामले में राजेंद्र कुमार वशिष्ठ ने मंगलेश वाडेल पर उनके निर्माण कार्य में बाधा डालने और मानसिक रूप से परेशान करने के गंभीर आरोप लगाए हैं।

राजेंद्र कुमार वशिष्ठ के अनुसार, उन्होंने वर्ष 1998 में बैंक ऑफ बड़ौदा के पास एक मकान खरीदा था। उनका दावा है कि उन्होंने इसके समीप स्थित भूमि पर 'प्रशासन शहरों के संग अभियान' के तहत नगर पालिका से आवश्यक अनुमति और पट्टा प्राप्त करने के बाद ही निर्माण कार्य शुरू करने की प्रक्रिया अपनाई थी। वशिष्ठ का आरोप है कि इसी दौरान मंगलेश वाडेल ने संबंधित भूमि को लेकर न्यायालय का रुख किया और स्थगन आदेश प्राप्त कर लिया। हालांकि, वशिष्ठ का कहना है कि बाद में न्यायालय से उन्हें राहत मिल गई, लेकिन इसके बावजूद उनके निर्माण कार्य में लगातार बाधाएं उत्पन्न की जा रही हैं। उन्होंने बताया कि जब भी वे निर्माण का प्रयास करते हैं, उन्हें रोका जाता है, जिससे वे मानसिक रूप से बहुत परेशान हैं।

इस संबंध में, नगर पालिका के अधिकारी जितेंद्र शर्मा ने बताया कि राजेंद्र कुमार वशिष्ठ ने निर्माण संबंधी प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया है। उन्होंने यह भी बताया कि इस पर मंगलेश वाडेल की ओर से आपत्ति दर्ज करवाई गई है। अधिकारी के अनुसार, मामले की नियमानुसार जांच की जा रही है और जांच के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल, यह भूमि और निर्माण संबंधी मामला प्रशासनिक प्रक्रिया में है, तथा संबंधित पक्षों के दावों और आपत्तियों की जांच जारी है। मामले में अंतिम स्थिति जांच पूरी होने और सक्षम प्राधिकारी के निर्णय के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
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    Sagwara live news
    Local News Reporter सागवाड़ा, डूंगरपुर, राजस्थान•
    13 hrs ago
  • भारतीय जनता पार्टी की उदयपुर संभाग इकाई ने बलीचा दक्षिण विस्तार स्थित अपने नवीन कार्यालय में 'संविधान हत्या दिवस' के अवसर पर एक संभाग स्तरीय विचार गोष्ठी और लोकतंत्र सेनानी सम्मान समारोह का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में वर्ष 1975 में लगाए गए आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का सबसे काला अध्याय बताते हुए, लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले लोकतंत्र सेनानियों के योगदान को याद किया गया और उन्हें सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र सिंह राठौड़ रहे, जबकि भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष एवं उदयपुर संभाग प्रभारी नाहर सिंह जोधा विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता भाजपा शहर जिलाध्यक्ष गजपाल सिंह राठौड़ ने की। मंच पर देहात जिलाध्यक्ष पुष्कर तेली, भाजपा राजस्थान प्रदेश प्रकोष्ठ सहसंयोजक श्रवण सिंह राव, कार्यक्रम संयोजक प्रमोद सामर, सह संयोजक डॉ. चंद्रगुप्त सिंह चौहान, पूर्व विधायक धर्म नारायण जोशी, डॉ. बी.आर. चौधरी, बंशीलाल खटीक, राजसमंद जिलाध्यक्ष जगदीश पालीवाल, पूर्व जिलाध्यक्ष मांगीलाल जोशी, दिनेश भट्ट और नंदलाल सिंघवी सहित कई अन्य वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन, भारत माता एवं लोकतंत्र सेनानियों के चित्रों पर माल्यार्पण तथा वंदे मातरम् के सामूहिक गायन के साथ हुआ। स्वागत उद्बोधन में गजपाल सिंह राठौड़ ने आपातकाल के दौर को लोकतांत्रिक मूल्यों पर एक गंभीर प्रहार बताया और लोकतंत्र सेनानियों के संघर्ष को नमन किया। मुख्य वक्ता राजेंद्र सिंह राठौड़ ने 25 जून 1975 के दिन को भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में काले अक्षरों में दर्ज बताया। उन्होंने तत्कालीन कांग्रेस सरकार पर सत्ता बचाने के लिए संविधान की मूल भावना को कुचलने और देशवासियों के मौलिक अधिकारों को सीमित करने का आरोप लगाया। राठौड़ ने कहा कि हजारों राजनीतिक कार्यकर्ताओं, पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और राष्ट्रवादी विचारधारा से जुड़े लोगों को जेलों में बंद कर लोकतंत्र का गला घोंटने का प्रयास किया गया था। उन्होंने यह भी बताया कि आपातकाल की पीड़ा केवल जेलों में बंद लोगों तक सीमित नहीं थी, बल्कि उनके परिवारों ने भी कठिन परिस्थितियों का सामना किया, कई आर्थिक संकट से जूझे, फिर भी उनका मनोबल नहीं टूटा। राठौड़ ने नई पीढ़ी से आपातकाल की वास्तविकता और उसके दुष्परिणामों को जानने का आह्वान किया, ताकि भविष्य में कोई सत्ता संविधान, लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों के साथ खिलवाड़ करने का साहस न कर सके। विशिष्ट अतिथि नाहर सिंह जोधा ने कहा कि आपातकाल केवल एक राजनीतिक घटना नहीं, बल्कि भारत की लोकतांत्रिक चेतना पर सबसे बड़ा हमला था, जिसमें प्रेस की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाया गया और न्यायपालिका पर दबाव बनाया गया। उन्होंने लोकतंत्र सेनानियों और उनके परिवारों द्वारा झेली गई यातनाओं को आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बताया। समारोह के दौरान, मीसा बंदी संगठन के प्रदेश उपाध्यक्ष सौभाग्यमल नाहर सहित कुल 68 लोकतंत्र सेनानियों को पगड़ी, उपरणा, शॉल और श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया गया। इनमें डूंगरपुर जिले से राजेंद्र कुमार कोठारी, हिम्मत सिंह कोठारी, भंवरलाल दोषी, श्याम सुंदर लोहार, पुरुषोत्तम सुखवाल, हिम्मत दुग्गड़, बसंतीलाल बाबेल, भोपाल सिंह बाबेल, ऋषभ जैन, पदम कुमार शर्मा, विजय सिंह चौहान, रामेश्वर जोशी, प्रकाश कुमार अग्रवाल, कृष्ण बल्लभ शर्मा, दमयंती शर्मा, मोहनलाल जैन, गोपाल कृष्ण त्रिवेदी, राजेंद्र प्रसाद शर्मा और रामचंद्र मेहता सहित उदयपुर संभाग के विभिन्न जिलों के लोकतंत्र सेनानी शामिल थे। कार्यक्रम स्थल पर आपातकाल की घटनाओं, समाचारों और लोकतंत्र सेनानियों के संघर्ष को दर्शाने वाली एक विशेष चित्र प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसका अवलोकन सभी अतिथियों और कार्यकर्ताओं ने किया। भाजपा मीडिया संभाग प्रभारी चंचल कुमार अग्रवाल के अनुसार, कार्यक्रम में शहर जिला महामंत्री पारस सिंघवी, देवीलाल सालवी, डॉ. पंकज बोराणा, देहात जिला महामंत्री ललित सिंह सिसोदिया, युवा मोर्चा प्रदेश मंत्री कृष्णपाल सिंह चुंडावत, अनुसूचित जाति मोर्चा प्रदेश उपाध्यक्ष संजय चंदेल, शैलेंद्र सिंह चौहान, पूर्व महापौर रजनी डांगी, पूर्व प्रधान तख्त सिंह शक्तावत सहित बड़ी संख्या में भाजपा पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे। डूंगरपुर जिले से भाजपा जिला महामंत्री पंकज जैन, जिला महामंत्री ईश्वरलाल लबाना, जिला प्रवक्ता राजेश पाटीदार, जिला मंत्री रेखा देवी रोत, जिला मीडिया प्रभारी गुणवंत कलाल, जिला आईटी सेल सह संयोजक अनु राठौड़ और अनुसूचित जाति मोर्चा जिलाध्यक्ष बृजेश वसीटा सहित कई पदाधिकारी भी कार्यक्रम में शामिल हुए। कार्यक्रम का संचालन प्रमोद सामर ने किया, जबकि अंत में देहात जिलाध्यक्ष पुष्कर तेली ने आभार व्यक्त किया। समारोह का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।
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    भारतीय जनता पार्टी की उदयपुर संभाग इकाई ने बलीचा दक्षिण विस्तार स्थित अपने नवीन कार्यालय में 'संविधान हत्या दिवस' के अवसर पर एक संभाग स्तरीय विचार गोष्ठी और लोकतंत्र सेनानी सम्मान समारोह का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में वर्ष 1975 में लगाए गए आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का सबसे काला अध्याय बताते हुए, लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले लोकतंत्र सेनानियों के योगदान को याद किया गया और उन्हें सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र सिंह राठौड़ रहे, जबकि भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष एवं उदयपुर संभाग प्रभारी नाहर सिंह जोधा विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता भाजपा शहर जिलाध्यक्ष गजपाल सिंह राठौड़ ने की। मंच पर देहात जिलाध्यक्ष पुष्कर तेली, भाजपा राजस्थान प्रदेश प्रकोष्ठ सहसंयोजक श्रवण सिंह राव, कार्यक्रम संयोजक प्रमोद सामर, सह संयोजक डॉ. चंद्रगुप्त सिंह चौहान, पूर्व विधायक धर्म नारायण जोशी, डॉ. बी.आर. चौधरी, बंशीलाल खटीक, राजसमंद जिलाध्यक्ष जगदीश पालीवाल, पूर्व जिलाध्यक्ष मांगीलाल जोशी, दिनेश भट्ट और नंदलाल सिंघवी सहित कई अन्य वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन, भारत माता एवं लोकतंत्र सेनानियों के चित्रों पर माल्यार्पण तथा वंदे मातरम् के सामूहिक गायन के साथ हुआ। स्वागत उद्बोधन में गजपाल सिंह राठौड़ ने आपातकाल के दौर को लोकतांत्रिक मूल्यों पर एक गंभीर प्रहार बताया और लोकतंत्र सेनानियों के संघर्ष को नमन किया। मुख्य वक्ता राजेंद्र सिंह राठौड़ ने 25 जून 1975 के दिन को भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में काले अक्षरों में दर्ज बताया। उन्होंने तत्कालीन कांग्रेस सरकार पर सत्ता बचाने के लिए संविधान की मूल भावना को कुचलने और देशवासियों के मौलिक अधिकारों को सीमित करने का आरोप लगाया। राठौड़ ने कहा कि हजारों राजनीतिक कार्यकर्ताओं, पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और राष्ट्रवादी विचारधारा से जुड़े लोगों को जेलों में बंद कर लोकतंत्र का गला घोंटने का प्रयास किया गया था। उन्होंने यह भी बताया कि आपातकाल की पीड़ा केवल जेलों में बंद लोगों तक सीमित नहीं थी, बल्कि उनके परिवारों ने भी कठिन परिस्थितियों का सामना किया, कई आर्थिक संकट से जूझे, फिर भी उनका मनोबल नहीं टूटा। राठौड़ ने नई पीढ़ी से आपातकाल की वास्तविकता और उसके दुष्परिणामों को जानने का आह्वान किया, ताकि भविष्य में कोई सत्ता संविधान, लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों के साथ खिलवाड़ करने का साहस न कर सके।

विशिष्ट अतिथि नाहर सिंह जोधा ने कहा कि आपातकाल केवल एक राजनीतिक घटना नहीं, बल्कि भारत की लोकतांत्रिक चेतना पर सबसे बड़ा हमला था, जिसमें प्रेस की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाया गया और न्यायपालिका पर दबाव बनाया गया। उन्होंने लोकतंत्र सेनानियों और उनके परिवारों द्वारा झेली गई यातनाओं को आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बताया। समारोह के दौरान, मीसा बंदी संगठन के प्रदेश उपाध्यक्ष सौभाग्यमल नाहर सहित कुल 68 लोकतंत्र सेनानियों को पगड़ी, उपरणा, शॉल और श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया गया। इनमें डूंगरपुर जिले से राजेंद्र कुमार कोठारी, हिम्मत सिंह कोठारी, भंवरलाल दोषी, श्याम सुंदर लोहार, पुरुषोत्तम सुखवाल, हिम्मत दुग्गड़, बसंतीलाल बाबेल, भोपाल सिंह बाबेल, ऋषभ जैन, पदम कुमार शर्मा, विजय सिंह चौहान, रामेश्वर जोशी, प्रकाश कुमार अग्रवाल, कृष्ण बल्लभ शर्मा, दमयंती शर्मा, मोहनलाल जैन, गोपाल कृष्ण त्रिवेदी, राजेंद्र प्रसाद शर्मा और रामचंद्र मेहता सहित उदयपुर संभाग के विभिन्न जिलों के लोकतंत्र सेनानी शामिल थे।

कार्यक्रम स्थल पर आपातकाल की घटनाओं, समाचारों और लोकतंत्र सेनानियों के संघर्ष को दर्शाने वाली एक विशेष चित्र प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसका अवलोकन सभी अतिथियों और कार्यकर्ताओं ने किया। भाजपा मीडिया संभाग प्रभारी चंचल कुमार अग्रवाल के अनुसार, कार्यक्रम में शहर जिला महामंत्री पारस सिंघवी, देवीलाल सालवी, डॉ. पंकज बोराणा, देहात जिला महामंत्री ललित सिंह सिसोदिया, युवा मोर्चा प्रदेश मंत्री कृष्णपाल सिंह चुंडावत, अनुसूचित जाति मोर्चा प्रदेश उपाध्यक्ष संजय चंदेल, शैलेंद्र सिंह चौहान, पूर्व महापौर रजनी डांगी, पूर्व प्रधान तख्त सिंह शक्तावत सहित बड़ी संख्या में भाजपा पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे। डूंगरपुर जिले से भाजपा जिला महामंत्री पंकज जैन, जिला महामंत्री ईश्वरलाल लबाना, जिला प्रवक्ता राजेश पाटीदार, जिला मंत्री रेखा देवी रोत, जिला मीडिया प्रभारी गुणवंत कलाल, जिला आईटी सेल सह संयोजक अनु राठौड़ और अनुसूचित जाति मोर्चा जिलाध्यक्ष बृजेश वसीटा सहित कई पदाधिकारी भी कार्यक्रम में शामिल हुए। कार्यक्रम का संचालन प्रमोद सामर ने किया, जबकि अंत में देहात जिलाध्यक्ष पुष्कर तेली ने आभार व्यक्त किया। समारोह का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।
    user_Gunwant kalal
    Gunwant kalal
    Local News Reporter सीमलवाड़ा, डूंगरपुर, राजस्थान•
    12 min ago
  • डूंगरपुर जिले के चाडोली और भैंसरा बड़ा ग्राम पंचायतों की सीमा पर स्थित वर्षों पुराने सार्वजनिक मार्ग को लेकर विवाद एक बार फिर गहरा गया है। ग्राम पंचायत चाडोली के सरपंच रमेश भगोरा ने आरोप लगाया है कि प्रशासनिक कार्रवाई और ₹100 के स्टाम्प पेपर पर हुए लिखित राजीनामे के बावजूद कुछ सरकारी शिक्षकों ने 20 जून 2026 को दोबारा रास्ते पर अतिक्रमण कर उसे बंद कर दिया है। इस मामले में पंचायत ने स्थानीय थाने और उपखंड अधिकारी (एसडीएम) कार्यालय में शिकायत दर्ज कराते हुए तत्काल कार्रवाई की मांग की है। सरपंच रमेश भगोरा ने बताया कि यह सड़क वर्षों से ग्रामीणों के आवागमन का प्रमुख मार्ग रही है। कुछ समय पहले भी इस सड़क पर अतिक्रमण कर रास्ता अवरुद्ध कर दिया गया था। उस समय ग्रामीणों की शिकायत पर तत्कालीन एसडीएम अनिल जैन ने मौके का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान, ग्रामीणों ने सरकारी शिक्षक दिनेश पुत्र प्रभुलाल मीणा, जितेंद्र पुत्र प्रभुलाल मीणा, गौतमलाल पुत्र धीरा मीणा, प्रभु पुत्र मोगा मीणा और धना पुत्र धीरा मीणा पर सड़क के बीच परकोटा बनाकर रास्ता बंद करने का आरोप लगाया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए, एसडीएम ने उस अतिक्रमण को हटवाकर रास्ता खुलवाया था। इसके बाद संबंधित पक्षों ने लिखित राजीनामा प्रस्तुत कर भविष्य में कभी भी रास्ता बंद नहीं करने का भरोसा दिलाया था, जिसमें यह भी उल्लेख था कि यह वर्षों पुरानी सार्वजनिक सड़क है और इस पर लोगों की आवाजाही जारी रहेगी। अब, 20 जून 2026 को उसी स्थान पर पत्थर, कांटे और अन्य अवरोधक सामग्री डालकर मार्ग को फिर से बंद कर दिया गया है, जिससे सीसी सड़क को भी नुकसान पहुँचा है। इस कारण क्षेत्र के लोगों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासनिक आदेशों और लिखित समझौते की खुलेआम अवहेलना की गई है। पंचायत प्रशासन ने आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए चेतावनी दी है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में फिर से विवाद की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। क्षेत्र में इस मामले को लेकर चर्चा का माहौल है, और ग्रामीण भी प्रशासन से सार्वजनिक मार्ग को स्थायी रूप से अतिक्रमण मुक्त कराने तथा दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की मांग कर रहे हैं। सभी की निगाहें अब प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं कि लिखित राजीनामे और पूर्व आदेशों की अवहेलना करने वालों के खिलाफ क्या कदम उठाए जाते हैं।
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    डूंगरपुर जिले के चाडोली और भैंसरा बड़ा ग्राम पंचायतों की सीमा पर स्थित वर्षों पुराने सार्वजनिक मार्ग को लेकर विवाद एक बार फिर गहरा गया है। ग्राम पंचायत चाडोली के सरपंच रमेश भगोरा ने आरोप लगाया है कि प्रशासनिक कार्रवाई और ₹100 के स्टाम्प पेपर पर हुए लिखित राजीनामे के बावजूद कुछ सरकारी शिक्षकों ने 20 जून 2026 को दोबारा रास्ते पर अतिक्रमण कर उसे बंद कर दिया है। इस मामले में पंचायत ने स्थानीय थाने और उपखंड अधिकारी (एसडीएम) कार्यालय में शिकायत दर्ज कराते हुए तत्काल कार्रवाई की मांग की है।

सरपंच रमेश भगोरा ने बताया कि यह सड़क वर्षों से ग्रामीणों के आवागमन का प्रमुख मार्ग रही है। कुछ समय पहले भी इस सड़क पर अतिक्रमण कर रास्ता अवरुद्ध कर दिया गया था। उस समय ग्रामीणों की शिकायत पर तत्कालीन एसडीएम अनिल जैन ने मौके का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान, ग्रामीणों ने सरकारी शिक्षक दिनेश पुत्र प्रभुलाल मीणा, जितेंद्र पुत्र प्रभुलाल मीणा, गौतमलाल पुत्र धीरा मीणा, प्रभु पुत्र मोगा मीणा और धना पुत्र धीरा मीणा पर सड़क के बीच परकोटा बनाकर रास्ता बंद करने का आरोप लगाया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए, एसडीएम ने उस अतिक्रमण को हटवाकर रास्ता खुलवाया था। इसके बाद संबंधित पक्षों ने लिखित राजीनामा प्रस्तुत कर भविष्य में कभी भी रास्ता बंद नहीं करने का भरोसा दिलाया था, जिसमें यह भी उल्लेख था कि यह वर्षों पुरानी सार्वजनिक सड़क है और इस पर लोगों की आवाजाही जारी रहेगी।

अब, 20 जून 2026 को उसी स्थान पर पत्थर, कांटे और अन्य अवरोधक सामग्री डालकर मार्ग को फिर से बंद कर दिया गया है, जिससे सीसी सड़क को भी नुकसान पहुँचा है। इस कारण क्षेत्र के लोगों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासनिक आदेशों और लिखित समझौते की खुलेआम अवहेलना की गई है। पंचायत प्रशासन ने आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए चेतावनी दी है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में फिर से विवाद की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

क्षेत्र में इस मामले को लेकर चर्चा का माहौल है, और ग्रामीण भी प्रशासन से सार्वजनिक मार्ग को स्थायी रूप से अतिक्रमण मुक्त कराने तथा दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की मांग कर रहे हैं। सभी की निगाहें अब प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं कि लिखित राजीनामे और पूर्व आदेशों की अवहेलना करने वालों के खिलाफ क्या कदम उठाए जाते हैं।
    user_मुकेश कुमार आर. पंड्या
    मुकेश कुमार आर. पंड्या
    Local News Reporter सीमलवाड़ा, डूंगरपुर, राजस्थान•
    17 min ago
  • राजस्थान के डूंगरपुर जिले के कॉल खंडा खास में आयोजित एक शिविर के दौरान ग्रामीण सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ उठा रहे हैं। इस शिविर में कई ग्रामीणों को उनके जमीन के पट्टे वितरित किए गए। साथ ही, गोद भराई का कार्यक्रम भी संपन्न हुआ, जिससे लोगों में खुशी का माहौल देखा गया। इसके अतिरिक्त, जमीन संबंधी कई विवादों का निपटारा भी एक ही छत के नीचे सफलतापूर्वक किया गया, जिससे ग्रामीणों को बड़ी राहत मिली।
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    राजस्थान के डूंगरपुर जिले के कॉल खंडा खास में आयोजित एक शिविर के दौरान ग्रामीण सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ उठा रहे हैं। इस शिविर में कई ग्रामीणों को उनके जमीन के पट्टे वितरित किए गए। साथ ही, गोद भराई का कार्यक्रम भी संपन्न हुआ, जिससे लोगों में खुशी का माहौल देखा गया। इसके अतिरिक्त, जमीन संबंधी कई विवादों का निपटारा भी एक ही छत के नीचे सफलतापूर्वक किया गया, जिससे ग्रामीणों को बड़ी राहत मिली।
    user_Yashwant Joshi
    Yashwant Joshi
    Dowda, Dungarpur•
    4 hrs ago
  • जनजाति क्षेत्र के एक पुलिस थाने की तस्वीर सामने आई है, जिसमें एक महिला कांस्टेबल अपने पैरों पर पैर चढ़ाकर और पैर फैलाकर मेज पर बैठी दिखाई दे रही है। यह दृश्य एक 'पिता तुल्य बुजुर्ग' के सामने का है, जिसे देखकर ऐसा लगता है मानो यह पुलिसकर्मी अपने ही घर में बैठी हो। इस तस्वीर पर टिप्पणी करते हुए, समाज सेवी दिनेश चंद्र अहारी ने कहा कि यह घटना जनजाति क्षेत्र में हमारे नेताओं के कमजोर नेतृत्व को स्पष्ट रूप से दर्शाती है। उनके अनुसार, यह स्थिति इस बात का प्रमाण है कि जनजाति क्षेत्र में प्रजातंत्र पर नौकरशाही कितनी हावी हो चुकी है। अहारी ने नेताओं से आग्रह किया है कि वे इस पर गंभीरता से ध्यान दें और अपने प्रोटोकॉल तथा अपनी ताकत को समझें। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ऐसा नहीं किया गया, तो 'मालिक जनता' का इसी तरह शोषण होता रहेगा, जो उन्हें मालिक बनाती है।
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    जनजाति क्षेत्र के एक पुलिस थाने की तस्वीर सामने आई है, जिसमें एक महिला कांस्टेबल अपने पैरों पर पैर चढ़ाकर और पैर फैलाकर मेज पर बैठी दिखाई दे रही है। यह दृश्य एक 'पिता तुल्य बुजुर्ग' के सामने का है, जिसे देखकर ऐसा लगता है मानो यह पुलिसकर्मी अपने ही घर में बैठी हो।

इस तस्वीर पर टिप्पणी करते हुए, समाज सेवी दिनेश चंद्र अहारी ने कहा कि यह घटना जनजाति क्षेत्र में हमारे नेताओं के कमजोर नेतृत्व को स्पष्ट रूप से दर्शाती है। उनके अनुसार, यह स्थिति इस बात का प्रमाण है कि जनजाति क्षेत्र में प्रजातंत्र पर नौकरशाही कितनी हावी हो चुकी है।

अहारी ने नेताओं से आग्रह किया है कि वे इस पर गंभीरता से ध्यान दें और अपने प्रोटोकॉल तथा अपनी ताकत को समझें। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ऐसा नहीं किया गया, तो 'मालिक जनता' का इसी तरह शोषण होता रहेगा, जो उन्हें मालिक बनाती है।
    user_समाज सेवी दिनेश चंद्र अहारी
    समाज सेवी दिनेश चंद्र अहारी
    Teacher सीमलवाड़ा, डूंगरपुर, राजस्थान•
    9 hrs ago
  • राजस्थान के गनोड़ा तहसील के ग्राम तख्ताजी का टांडा में जोगी समाज की श्मशान भूमि पर देवीलाल यादव और काना खराड़ी द्वारा अवैध कब्जा करने का मामला सामने आया है। इस संबंध में जोगी समाज ने पंचायत से लेकर तहसीलदार, पुलिस थाना और जिला कलेक्टर तक शिकायतें दर्ज कराई हैं, लेकिन अब तक इस मामले में कोई उचित कार्रवाई नहीं हुई है। जोगी समाज का आरोप है कि उचित कार्रवाई न होने के बजाय, प्रशासन ने कब्जाधारियों के पक्ष में रुख अपनाया है। तहसीलदार ने जोगी समाज की शव दफनाने की पीढ़ियों पुरानी प्रथा पर अशोभनीय टिप्पणियां करते हुए उन्हें कब्जाधारियों से 'भिड़ जाओ तुम लोगों में दम हो तो लाड़ो' जैसे गैर-जिम्मेदाराना बयान दिए हैं। पुलिस प्रशासन ने भी कोई संतोषजनक कार्रवाई नहीं की, जिससे जोगी समाज में भारी असंतोष है। अब तक की सरकारी कार्रवाई को देखते हुए जोगी समाज ने प्रशासन पर सवाल उठाए हैं, और इस पूरे मामले में कहीं न कहीं इन सबकी मिलीभगत का अंदेशा जताया है।
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    राजस्थान के गनोड़ा तहसील के ग्राम तख्ताजी का टांडा में जोगी समाज की श्मशान भूमि पर देवीलाल यादव और काना खराड़ी द्वारा अवैध कब्जा करने का मामला सामने आया है। इस संबंध में जोगी समाज ने पंचायत से लेकर तहसीलदार, पुलिस थाना और जिला कलेक्टर तक शिकायतें दर्ज कराई हैं, लेकिन अब तक इस मामले में कोई उचित कार्रवाई नहीं हुई है।

जोगी समाज का आरोप है कि उचित कार्रवाई न होने के बजाय, प्रशासन ने कब्जाधारियों के पक्ष में रुख अपनाया है। तहसीलदार ने जोगी समाज की शव दफनाने की पीढ़ियों पुरानी प्रथा पर अशोभनीय टिप्पणियां करते हुए उन्हें कब्जाधारियों से 'भिड़ जाओ तुम लोगों में दम हो तो लाड़ो' जैसे गैर-जिम्मेदाराना बयान दिए हैं। पुलिस प्रशासन ने भी कोई संतोषजनक कार्रवाई नहीं की, जिससे जोगी समाज में भारी असंतोष है।

अब तक की सरकारी कार्रवाई को देखते हुए जोगी समाज ने प्रशासन पर सवाल उठाए हैं, और इस पूरे मामले में कहीं न कहीं इन सबकी मिलीभगत का अंदेशा जताया है।
    user_Mukesh Rawal
    Mukesh Rawal
    गनोड़ा, बांसवाड़ा, राजस्थान•
    12 hrs ago
  • डूंगरपुर में इस्लाम धर्म के पैगंबर हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम और मां आयशा सिद्दीका के खिलाफ की गई अमर्यादित टिप्पणी को लेकर स्थानीय मुस्लिम समुदाय में भारी आक्रोश है। इस घटना के विरोध में मुस्लिम महासभा जिला कमेटी डूंगरपुर ने जिला कलेक्टर के मार्फत महामहिम राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन सौंपा है। मुस्लिम महासभा के जिला अध्यक्ष मोहम्मद इकबाल गौरी ने स्पष्ट किया कि पैगंबर साहब की शान में गुस्ताखी बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी। ज्ञापन में बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा की सदस्य नाजिया इलाही खान पर आरोप लगाया गया है कि उन्होंने बीते 20 जून को पैगंबर मोहम्मद साहब और मां आयशा के खिलाफ विवादित और अमर्यादित बयान दिया था। महासभा ने नाजिया इलाही खान के खिलाफ तत्काल मुकदमा दर्ज कर कानूनी कार्रवाई करने और उन्हें गिरफ्तार करने की मांग की है। आरोप है कि नाजिया इलाही खान एक सोची-समझी साजिश के तहत लगातार ऐसे बयान देकर मुस्लिम समुदाय की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने और उन्हें भड़काने का प्रयास कर रही हैं, जिससे पूरे मुस्लिम समाज में गहरा रोष व्याप्त है। ज्ञापन सौंपने के दौरान मुस्लिम महासभा के जिला पदाधिकारियों और सदस्यों ने प्रशासन से इस मामले में त्वरित और सख्त कानूनी कदम उठाने की पुरजोर वकालत की। इस अवसर पर जिला संगठन मंत्री रियाज अहमद कुरैशी, मोहसिन शेख, अयातुल्ला खान, साजिद मलिक, फैजान अशरफी, नगर उपाध्यक्ष अजीज खान, मजहर कुरैशी, हासिम मकरानी, असलम खान, रेहान और सईद उल्लाह खान सहित समाज के कई अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
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    डूंगरपुर में इस्लाम धर्म के पैगंबर हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम और मां आयशा सिद्दीका के खिलाफ की गई अमर्यादित टिप्पणी को लेकर स्थानीय मुस्लिम समुदाय में भारी आक्रोश है। इस घटना के विरोध में मुस्लिम महासभा जिला कमेटी डूंगरपुर ने जिला कलेक्टर के मार्फत महामहिम राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन सौंपा है।

मुस्लिम महासभा के जिला अध्यक्ष मोहम्मद इकबाल गौरी ने स्पष्ट किया कि पैगंबर साहब की शान में गुस्ताखी बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी। ज्ञापन में बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा की सदस्य नाजिया इलाही खान पर आरोप लगाया गया है कि उन्होंने बीते 20 जून को पैगंबर मोहम्मद साहब और मां आयशा के खिलाफ विवादित और अमर्यादित बयान दिया था। महासभा ने नाजिया इलाही खान के खिलाफ तत्काल मुकदमा दर्ज कर कानूनी कार्रवाई करने और उन्हें गिरफ्तार करने की मांग की है। आरोप है कि नाजिया इलाही खान एक सोची-समझी साजिश के तहत लगातार ऐसे बयान देकर मुस्लिम समुदाय की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने और उन्हें भड़काने का प्रयास कर रही हैं, जिससे पूरे मुस्लिम समाज में गहरा रोष व्याप्त है।

ज्ञापन सौंपने के दौरान मुस्लिम महासभा के जिला पदाधिकारियों और सदस्यों ने प्रशासन से इस मामले में त्वरित और सख्त कानूनी कदम उठाने की पुरजोर वकालत की। इस अवसर पर जिला संगठन मंत्री रियाज अहमद कुरैशी, मोहसिन शेख, अयातुल्ला खान, साजिद मलिक, फैजान अशरफी, नगर उपाध्यक्ष अजीज खान, मजहर कुरैशी, हासिम मकरानी, असलम खान, रेहान और सईद उल्लाह खान सहित समाज के कई अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
    user_Santosh Vyas
    Santosh Vyas
    Court reporter डूंगरपुर, डूंगरपुर, राजस्थान•
    33 min ago
  • डूंगरपुर जिले में जर्जर स्कूल भवनों की समस्या डेढ़ साल बाद भी जस की तस बनी हुई है। हाल ही में हुए एक सर्वेक्षण के अनुसार, कुल 194 स्कूल भवन बच्चों के लिए असुरक्षित पाए गए हैं, जिनमें 169 जर्जर और 25 अति जर्जर श्रेणी के हैं। बताया गया है कि झालावाड़ में हुए हादसे के बाद जिले में कुल 209 जर्जर स्कूल भवन चिन्हित किए गए थे। हालांकि, इतने समय बाद भी अब तक केवल 13 स्कूलों के पुनर्निर्माण को ही स्वीकृति मिल पाई है। शिक्षा विभाग ने इन जर्जर भवनों के पुनर्निर्माण के लिए राज्य सरकार को 154 करोड़ रुपये से अधिक का एक नया प्रस्ताव भेजा है। इस बीच, कई स्कूलों के छात्र आज भी वैकल्पिक भवनों में पढ़ाई करने को मजबूर हैं। यह गंभीर स्थिति इशारा करती है कि जर्जर स्कूलें किसी और बड़े झालावाड़ जैसे हादसे का इंतजार कर रही हैं, और सरकार कब इस मामले में नींद से जागेगी।
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    डूंगरपुर जिले में जर्जर स्कूल भवनों की समस्या डेढ़ साल बाद भी जस की तस बनी हुई है। हाल ही में हुए एक सर्वेक्षण के अनुसार, कुल 194 स्कूल भवन बच्चों के लिए असुरक्षित पाए गए हैं, जिनमें 169 जर्जर और 25 अति जर्जर श्रेणी के हैं।

बताया गया है कि झालावाड़ में हुए हादसे के बाद जिले में कुल 209 जर्जर स्कूल भवन चिन्हित किए गए थे। हालांकि, इतने समय बाद भी अब तक केवल 13 स्कूलों के पुनर्निर्माण को ही स्वीकृति मिल पाई है। शिक्षा विभाग ने इन जर्जर भवनों के पुनर्निर्माण के लिए राज्य सरकार को 154 करोड़ रुपये से अधिक का एक नया प्रस्ताव भेजा है। इस बीच, कई स्कूलों के छात्र आज भी वैकल्पिक भवनों में पढ़ाई करने को मजबूर हैं।

यह गंभीर स्थिति इशारा करती है कि जर्जर स्कूलें किसी और बड़े झालावाड़ जैसे हादसे का इंतजार कर रही हैं, और सरकार कब इस मामले में नींद से जागेगी।
    user_Sagwara live news
    Sagwara live news
    Local News Reporter सागवाड़ा, डूंगरपुर, राजस्थान•
    13 hrs ago
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