भारतीय जनता पार्टी की उदयपुर संभाग इकाई ने बलीचा दक्षिण विस्तार स्थित अपने नवीन कार्यालय में 'संविधान हत्या दिवस' के अवसर पर एक संभाग स्तरीय विचार गोष्ठी और लोकतंत्र सेनानी सम्मान समारोह का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में वर्ष 1975 में लगाए गए आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का सबसे काला अध्याय बताते हुए, लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले लोकतंत्र सेनानियों के योगदान को याद किया गया और उन्हें सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र सिंह राठौड़ रहे, जबकि भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष एवं उदयपुर संभाग प्रभारी नाहर सिंह जोधा विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता भाजपा शहर जिलाध्यक्ष गजपाल सिंह राठौड़ ने की। मंच पर देहात जिलाध्यक्ष पुष्कर तेली, भाजपा राजस्थान प्रदेश प्रकोष्ठ सहसंयोजक श्रवण सिंह राव, कार्यक्रम संयोजक प्रमोद सामर, सह संयोजक डॉ. चंद्रगुप्त सिंह चौहान, पूर्व विधायक धर्म नारायण जोशी, डॉ. बी.आर. चौधरी, बंशीलाल खटीक, राजसमंद जिलाध्यक्ष जगदीश पालीवाल, पूर्व जिलाध्यक्ष मांगीलाल जोशी, दिनेश भट्ट और नंदलाल सिंघवी सहित कई अन्य वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन, भारत माता एवं लोकतंत्र सेनानियों के चित्रों पर माल्यार्पण तथा वंदे मातरम् के सामूहिक गायन के साथ हुआ। स्वागत उद्बोधन में गजपाल सिंह राठौड़ ने आपातकाल के दौर को लोकतांत्रिक मूल्यों पर एक गंभीर प्रहार बताया और लोकतंत्र सेनानियों के संघर्ष को नमन किया। मुख्य वक्ता राजेंद्र सिंह राठौड़ ने 25 जून 1975 के दिन को भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में काले अक्षरों में दर्ज बताया। उन्होंने तत्कालीन कांग्रेस सरकार पर सत्ता बचाने के लिए संविधान की मूल भावना को कुचलने और देशवासियों के मौलिक अधिकारों को सीमित करने का आरोप लगाया। राठौड़ ने कहा कि हजारों राजनीतिक कार्यकर्ताओं, पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और राष्ट्रवादी विचारधारा से जुड़े लोगों को जेलों में बंद कर लोकतंत्र का गला घोंटने का प्रयास किया गया था। उन्होंने यह भी बताया कि आपातकाल की पीड़ा केवल जेलों में बंद लोगों तक सीमित नहीं थी, बल्कि उनके परिवारों ने भी कठिन परिस्थितियों का सामना किया, कई आर्थिक संकट से जूझे, फिर भी उनका मनोबल नहीं टूटा। राठौड़ ने नई पीढ़ी से आपातकाल की वास्तविकता और उसके दुष्परिणामों को जानने का आह्वान किया, ताकि भविष्य में कोई सत्ता संविधान, लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों के साथ खिलवाड़ करने का साहस न कर सके। विशिष्ट अतिथि नाहर सिंह जोधा ने कहा कि आपातकाल केवल एक राजनीतिक घटना नहीं, बल्कि भारत की लोकतांत्रिक चेतना पर सबसे बड़ा हमला था, जिसमें प्रेस की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाया गया और न्यायपालिका पर दबाव बनाया गया। उन्होंने लोकतंत्र सेनानियों और उनके परिवारों द्वारा झेली गई यातनाओं को आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बताया। समारोह के दौरान, मीसा बंदी संगठन के प्रदेश उपाध्यक्ष सौभाग्यमल नाहर सहित कुल 68 लोकतंत्र सेनानियों को पगड़ी, उपरणा, शॉल और श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया गया। इनमें डूंगरपुर जिले से राजेंद्र कुमार कोठारी, हिम्मत सिंह कोठारी, भंवरलाल दोषी, श्याम सुंदर लोहार, पुरुषोत्तम सुखवाल, हिम्मत दुग्गड़, बसंतीलाल बाबेल, भोपाल सिंह बाबेल, ऋषभ जैन, पदम कुमार शर्मा, विजय सिंह चौहान, रामेश्वर जोशी, प्रकाश कुमार अग्रवाल, कृष्ण बल्लभ शर्मा, दमयंती शर्मा, मोहनलाल जैन, गोपाल कृष्ण त्रिवेदी, राजेंद्र प्रसाद शर्मा और रामचंद्र मेहता सहित उदयपुर संभाग के विभिन्न जिलों के लोकतंत्र सेनानी शामिल थे। कार्यक्रम स्थल पर आपातकाल की घटनाओं, समाचारों और लोकतंत्र सेनानियों के संघर्ष को दर्शाने वाली एक विशेष चित्र प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसका अवलोकन सभी अतिथियों और कार्यकर्ताओं ने किया। भाजपा मीडिया संभाग प्रभारी चंचल कुमार अग्रवाल के अनुसार, कार्यक्रम में शहर जिला महामंत्री पारस सिंघवी, देवीलाल सालवी, डॉ. पंकज बोराणा, देहात जिला महामंत्री ललित सिंह सिसोदिया, युवा मोर्चा प्रदेश मंत्री कृष्णपाल सिंह चुंडावत, अनुसूचित जाति मोर्चा प्रदेश उपाध्यक्ष संजय चंदेल, शैलेंद्र सिंह चौहान, पूर्व महापौर रजनी डांगी, पूर्व प्रधान तख्त सिंह शक्तावत सहित बड़ी संख्या में भाजपा पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे। डूंगरपुर जिले से भाजपा जिला महामंत्री पंकज जैन, जिला महामंत्री ईश्वरलाल लबाना, जिला प्रवक्ता राजेश पाटीदार, जिला मंत्री रेखा देवी रोत, जिला मीडिया प्रभारी गुणवंत कलाल, जिला आईटी सेल सह संयोजक अनु राठौड़ और अनुसूचित जाति मोर्चा जिलाध्यक्ष बृजेश वसीटा सहित कई पदाधिकारी भी कार्यक्रम में शामिल हुए। कार्यक्रम का संचालन प्रमोद सामर ने किया, जबकि अंत में देहात जिलाध्यक्ष पुष्कर तेली ने आभार व्यक्त किया। समारोह का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।
भारतीय जनता पार्टी की उदयपुर संभाग इकाई ने बलीचा दक्षिण विस्तार स्थित अपने नवीन कार्यालय में 'संविधान हत्या दिवस' के अवसर पर एक संभाग स्तरीय विचार गोष्ठी और लोकतंत्र सेनानी सम्मान समारोह का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में वर्ष 1975 में लगाए गए आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का सबसे काला अध्याय बताते हुए, लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले लोकतंत्र सेनानियों के योगदान को याद किया गया और उन्हें सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र सिंह राठौड़ रहे, जबकि भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष एवं उदयपुर संभाग प्रभारी नाहर सिंह जोधा विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता भाजपा शहर जिलाध्यक्ष गजपाल सिंह राठौड़ ने की। मंच पर देहात जिलाध्यक्ष पुष्कर तेली, भाजपा राजस्थान प्रदेश प्रकोष्ठ सहसंयोजक श्रवण सिंह राव, कार्यक्रम संयोजक प्रमोद सामर, सह संयोजक डॉ. चंद्रगुप्त सिंह चौहान, पूर्व विधायक धर्म नारायण जोशी, डॉ. बी.आर. चौधरी, बंशीलाल खटीक, राजसमंद जिलाध्यक्ष जगदीश पालीवाल, पूर्व जिलाध्यक्ष मांगीलाल जोशी, दिनेश भट्ट और नंदलाल सिंघवी सहित कई अन्य वरिष्ठ नेता
मौजूद रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन, भारत माता एवं लोकतंत्र सेनानियों के चित्रों पर माल्यार्पण तथा वंदे मातरम् के सामूहिक गायन के साथ हुआ। स्वागत उद्बोधन में गजपाल सिंह राठौड़ ने आपातकाल के दौर को लोकतांत्रिक मूल्यों पर एक गंभीर प्रहार बताया और लोकतंत्र सेनानियों के संघर्ष को नमन किया। मुख्य वक्ता राजेंद्र सिंह राठौड़ ने 25 जून 1975 के दिन को भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में काले अक्षरों में दर्ज बताया। उन्होंने तत्कालीन कांग्रेस सरकार पर सत्ता बचाने के लिए संविधान की मूल भावना को कुचलने और देशवासियों के मौलिक अधिकारों को सीमित करने का आरोप लगाया। राठौड़ ने कहा कि हजारों राजनीतिक कार्यकर्ताओं, पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और राष्ट्रवादी विचारधारा से जुड़े लोगों को जेलों में बंद कर लोकतंत्र का गला घोंटने का प्रयास किया गया था। उन्होंने यह भी बताया कि आपातकाल की पीड़ा केवल जेलों में बंद लोगों तक सीमित नहीं थी, बल्कि उनके परिवारों ने भी कठिन परिस्थितियों का सामना किया, कई आर्थिक संकट से जूझे, फिर भी उनका मनोबल नहीं टूटा। राठौड़ ने नई पीढ़ी से आपातकाल
की वास्तविकता और उसके दुष्परिणामों को जानने का आह्वान किया, ताकि भविष्य में कोई सत्ता संविधान, लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों के साथ खिलवाड़ करने का साहस न कर सके। विशिष्ट अतिथि नाहर सिंह जोधा ने कहा कि आपातकाल केवल एक राजनीतिक घटना नहीं, बल्कि भारत की लोकतांत्रिक चेतना पर सबसे बड़ा हमला था, जिसमें प्रेस की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाया गया और न्यायपालिका पर दबाव बनाया गया। उन्होंने लोकतंत्र सेनानियों और उनके परिवारों द्वारा झेली गई यातनाओं को आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बताया। समारोह के दौरान, मीसा बंदी संगठन के प्रदेश उपाध्यक्ष सौभाग्यमल नाहर सहित कुल 68 लोकतंत्र सेनानियों को पगड़ी, उपरणा, शॉल और श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया गया। इनमें डूंगरपुर जिले से राजेंद्र कुमार कोठारी, हिम्मत सिंह कोठारी, भंवरलाल दोषी, श्याम सुंदर लोहार, पुरुषोत्तम सुखवाल, हिम्मत दुग्गड़, बसंतीलाल बाबेल, भोपाल सिंह बाबेल, ऋषभ जैन, पदम कुमार शर्मा, विजय सिंह चौहान, रामेश्वर जोशी, प्रकाश कुमार अग्रवाल, कृष्ण बल्लभ शर्मा, दमयंती शर्मा, मोहनलाल जैन, गोपाल कृष्ण त्रिवेदी, राजेंद्र प्रसाद शर्मा और रामचंद्र मेहता सहित उदयपुर संभाग के विभिन्न जिलों
के लोकतंत्र सेनानी शामिल थे। कार्यक्रम स्थल पर आपातकाल की घटनाओं, समाचारों और लोकतंत्र सेनानियों के संघर्ष को दर्शाने वाली एक विशेष चित्र प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसका अवलोकन सभी अतिथियों और कार्यकर्ताओं ने किया। भाजपा मीडिया संभाग प्रभारी चंचल कुमार अग्रवाल के अनुसार, कार्यक्रम में शहर जिला महामंत्री पारस सिंघवी, देवीलाल सालवी, डॉ. पंकज बोराणा, देहात जिला महामंत्री ललित सिंह सिसोदिया, युवा मोर्चा प्रदेश मंत्री कृष्णपाल सिंह चुंडावत, अनुसूचित जाति मोर्चा प्रदेश उपाध्यक्ष संजय चंदेल, शैलेंद्र सिंह चौहान, पूर्व महापौर रजनी डांगी, पूर्व प्रधान तख्त सिंह शक्तावत सहित बड़ी संख्या में भाजपा पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे। डूंगरपुर जिले से भाजपा जिला महामंत्री पंकज जैन, जिला महामंत्री ईश्वरलाल लबाना, जिला प्रवक्ता राजेश पाटीदार, जिला मंत्री रेखा देवी रोत, जिला मीडिया प्रभारी गुणवंत कलाल, जिला आईटी सेल सह संयोजक अनु राठौड़ और अनुसूचित जाति मोर्चा जिलाध्यक्ष बृजेश वसीटा सहित कई पदाधिकारी भी कार्यक्रम में शामिल हुए। कार्यक्रम का संचालन प्रमोद सामर ने किया, जबकि अंत में देहात जिलाध्यक्ष पुष्कर तेली ने आभार व्यक्त किया। समारोह का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।
- डूंगरपुर के राजकीय आयुर्विज्ञान महाविद्यालय एवं संबद्ध चिकित्सालय से सेवामुक्त किए गए लगभग 100 नर्स ग्रेड-द्वितीय (नर्सिंग ऑफिसर) कार्मिकों ने अपनी सेवाओं को पुनः बहाल करने की मांग को लेकर पूर्व राज्यमंत्री एवं भाजपा के पूर्व प्रदेश महामंत्री सुशील कटारा को मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपा है। इस ज्ञापन में नर्सिंग कर्मियों ने सेवा समाप्ति के आदेश को निरस्त कर उन्हें पुनः नियुक्त करने और टीएसपी क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए नियमित पदों पर भर्ती की मांग उठाई है। ज्ञापन में बताया गया कि डूंगरपुर के राजकीय आयुर्विज्ञान महाविद्यालय एवं संबद्ध चिकित्सालय में प्लेसमेंट एजेंसी के माध्यम से कार्यरत इन लगभग 100 नर्स ग्रेड-द्वितीय कार्मिकों की सेवाएं 22 जून 2026 को समाप्त कर दी गई हैं। ये कर्मी कई वर्षों से अस्पताल में अपनी सेवाएं दे रहे थे और कोविड-19 महामारी सहित विभिन्न विषम परिस्थितियों में स्वास्थ्य सेवाओं को सुचारू बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं। उन्होंने आईसीयू, एनआईसीयू, पीआईसीयू, आपातकालीन इकाई तथा विभिन्न वार्डों में लगातार सेवाएं प्रदान कर मरीजों को गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराने में योगदान दिया है। इन सेवाओं के अचानक समाप्त होने से लगभग 100 परिवारों के समक्ष आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। नर्सिंग कर्मियों ने अपने ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया है कि राजस्थान कॉन्ट्रैक्चुअल हायरिंग टू सिविल पोस्ट्स रूल्स-2022 के तहत 242 नर्सिंग कार्मिकों को नियुक्ति दी गई थी, लेकिन उपलब्ध जानकारी के अनुसार इनमें से केवल 138 कार्मिकों ने ही कार्यग्रहण किया है। ऐसे में अस्पताल में 100 से अधिक पद रिक्त रहने की संभावना है। कर्मियों का तर्क है कि जब अस्पताल में नर्सिंग स्टाफ की आवश्यकता अभी भी बनी हुई है, तब अनुभवी कार्मिकों की सेवाएं समाप्त करना स्वास्थ्य सेवाओं के हित में उचित नहीं है। उन्होंने वागड़ संभाग और टीएसपी क्षेत्र की स्वास्थ्य आवश्यकताओं पर जोर देते हुए कहा कि डूंगरपुर मेडिकल कॉलेज एवं संबद्ध अस्पताल पूरे आदिवासी क्षेत्र का प्रमुख चिकित्सा संस्थान है और यहां अनुभवी नर्सिंग स्टाफ की कमी होने पर स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है, जिससे दूरस्थ एवं जनजातीय क्षेत्रों से आने वाले मरीजों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा। नर्सिंग कर्मियों ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि सेवा समाप्ति आदेश को तत्काल निरस्त किया जाए, सभी सेवामुक्त नर्स ग्रेड-द्वितीय कार्मिकों की सेवाएं बहाल की जाएं, रिक्त एवं संभावित रिक्त पदों पर अनुभवी कार्मिकों को प्राथमिकता दी जाए, प्रभावित कर्मचारियों के हितों की रक्षा की जाए और अस्पताल की आवश्यकताओं को देखते हुए उनकी सेवाएं जारी रखी जाएं। इसके अतिरिक्त, ज्ञापन में टीएसपी क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए नर्सिंग ऑफिसर के लगभग 3000 नियमित पद पृथक रूप से स्वीकृत करने, राजस्थान चिकित्सा सेवा नियम, 1965 के तहत मेरिट एवं बोनस अंक आधारित भर्ती प्रक्रिया शीघ्र प्रारंभ करने तथा अनुभवी नर्सिंग कार्मिकों को उनके कार्यानुभव का लाभ देने की भी मांग की गई है। नर्सिंग कर्मियों ने उम्मीद जताई है कि राज्य सरकार जनहित, स्वास्थ्य सेवाओं की आवश्यकता तथा आदिवासी क्षेत्र की विशेष परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेगी। ज्ञापन सौंपते समय बड़ी संख्या में प्रभावित नर्स ग्रेड-द्वितीय कार्मिक उपस्थित थे।4
- समाज सेवी दिनेश चंद्र अहारी ने बाण गंगा और बेडसी गंगा नामक दर्शनीय स्थानों के विषय में जानकारी मांगी है। उन्होंने इन स्थलों की स्थिति, उनके महत्व और उनके इतिहास को लेकर सवाल उठाए हैं।1
- डूंगरपुर जिले में जर्जर स्कूल भवनों की समस्या डेढ़ साल बाद भी जस की तस बनी हुई है। हाल ही में हुए एक सर्वेक्षण के अनुसार, कुल 194 स्कूल भवन बच्चों के लिए असुरक्षित पाए गए हैं, जिनमें 169 जर्जर और 25 अति जर्जर श्रेणी के हैं। बताया गया है कि झालावाड़ में हुए हादसे के बाद जिले में कुल 209 जर्जर स्कूल भवन चिन्हित किए गए थे। हालांकि, इतने समय बाद भी अब तक केवल 13 स्कूलों के पुनर्निर्माण को ही स्वीकृति मिल पाई है। शिक्षा विभाग ने इन जर्जर भवनों के पुनर्निर्माण के लिए राज्य सरकार को 154 करोड़ रुपये से अधिक का एक नया प्रस्ताव भेजा है। इस बीच, कई स्कूलों के छात्र आज भी वैकल्पिक भवनों में पढ़ाई करने को मजबूर हैं। यह गंभीर स्थिति इशारा करती है कि जर्जर स्कूलें किसी और बड़े झालावाड़ जैसे हादसे का इंतजार कर रही हैं, और सरकार कब इस मामले में नींद से जागेगी।1
- दादा भंवर लाल परमार को आदिवासी परिवारों को आपस में जोड़ने वाले व्यक्ति के रूप में पहचाना जाता है।1
- डूंगरपुर जिले में दिनदहाड़े हुई लूट और चाकूबाजी की घटना ने कानून-व्यवस्था और समाज की संवेदनहीनता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बुधवार दोपहर सदर थाना क्षेत्र के सतीरामपुर के पास तीन अज्ञात बदमाशों ने एक निजी टावर कंपनी के फील्ड सपोर्ट इंजीनियर पर चाकू से हमला कर उसका लैपटॉप से भरा बैग लूट लिया। चित्तौड़गढ़ जिले के भाटो का बमनिया निवासी रोशन पुत्र जगदीश भट्ट, जो डूंगरपुर में एक निजी टावर कंपनी में कार्यरत हैं, खेरवाड़ा क्षेत्र में टावर निरीक्षण का काम पूरा कर बाइक से डूंगरपुर लौट रहे थे। इसी दौरान सतीरामपुर के निकट पावर बाइक पर सवार तीन युवकों ने उनकी बाइक रोक दी और बैग छीनने का प्रयास किया। जब रोशन ने इसका विरोध किया, तो एक बदमाश ने धारदार चाकू निकालकर उनकी कलाई पर लगातार तीन वार कर दिए। हमले से रोशन के हाथ से कंपनी के लैपटॉप वाला बैग छूट गया, जिसे लेकर बदमाश मौके से फरार हो गए। चाकू के हमले में गंभीर रूप से घायल रोशन करीब आधे घंटे तक सड़क किनारे मदद की गुहार लगाते रहे। इस दौरान वहां भीड़ जमा हो गई, लेकिन दुःखद रूप से, कोई भी व्यक्ति उनकी सहायता के लिए आगे नहीं आया।1
- बांसवाड़ा नगर निगम ने धरोहर कोचिंग सेंटर के खिलाफ कार्रवाई की है। इस कार्रवाई के तहत कोचिंग सेंटर को सील कर दिया गया।1
- राजस्थान के गनोड़ा तहसील के ग्राम तख्ताजी का टांडा में जोगी समाज की श्मशान भूमि पर देवीलाल यादव और काना खराड़ी द्वारा अवैध कब्जा करने का मामला सामने आया है। इस संबंध में जोगी समाज ने पंचायत से लेकर तहसीलदार, पुलिस थाना और जिला कलेक्टर तक शिकायतें दर्ज कराई हैं, लेकिन अब तक इस मामले में कोई उचित कार्रवाई नहीं हुई है। जोगी समाज का आरोप है कि उचित कार्रवाई न होने के बजाय, प्रशासन ने कब्जाधारियों के पक्ष में रुख अपनाया है। तहसीलदार ने जोगी समाज की शव दफनाने की पीढ़ियों पुरानी प्रथा पर अशोभनीय टिप्पणियां करते हुए उन्हें कब्जाधारियों से 'भिड़ जाओ तुम लोगों में दम हो तो लाड़ो' जैसे गैर-जिम्मेदाराना बयान दिए हैं। पुलिस प्रशासन ने भी कोई संतोषजनक कार्रवाई नहीं की, जिससे जोगी समाज में भारी असंतोष है। अब तक की सरकारी कार्रवाई को देखते हुए जोगी समाज ने प्रशासन पर सवाल उठाए हैं, और इस पूरे मामले में कहीं न कहीं इन सबकी मिलीभगत का अंदेशा जताया है।4
- राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री ने जोधपुर सर्किट हाउस में मीडिया से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को लेकर एक महत्वपूर्ण बयान दिया। उन्होंने अपनी इच्छा व्यक्त करते हुए कहा कि भजनलाल शर्मा मुख्यमंत्री पद पर बने रहें। इस दौरान प्रदेश की राजनीति से जुड़े और जनहित के कई अन्य मुद्दों पर भी चर्चा की गई।3
- धरियावद के मूंगाणा-जूना बारिया ग्राम पंचायत के वैली फल क्षेत्र में वन विभाग की कथित कार्रवाई को लेकर एक गंभीर विवाद सामने आया है। एक गरीब परिवार ने आरोप लगाया है कि वन विभाग के दल ने उनका निर्माणाधीन मकान ध्वस्त कर दिया, महिलाओं के साथ मारपीट की और सामान को भी नुकसान पहुंचाया। पीड़ित पवन नाथ (45) ने बताया कि उनका मकान सरकारी योजना के तहत जियो टैगिंग के बाद स्वीकृत हुआ था और इंदिरा आवास योजना के तहत उन्हें ₹15 हजार की किस्त भी मिली थी। उन्होंने दो वर्षों तक अहमदाबाद में मजदूरी करके मकान के लिए सामग्री जुटाई थी, और छत डलनी ही बाकी थी। आरोप है कि वन विभाग के कर्मचारियों के साथ मूंगाणा और पारसोला क्षेत्र से आए एक दल ने जेसीबी, ट्रैक्टर, मोटरसाइकिल और जीपों सहित मौके पर पहुंचकर इस निर्माणाधीन मकान को तोड़ा। परिवार का कहना है कि इस दौरान पवन नाथ की पत्नी पूंजी देवी और बहू सुमित्रा के साथ धक्का-मुक्की और मारपीट की गई; पूंजी देवी ने तो एक महिला कांस्टेबल पर कपड़े फाड़ने और मारपीट का आरोप लगाया है। परिवार ने बताया कि सुमित्रा की डिलीवरी को केवल 25 दिन हुए हैं और उनका बच्चा आईसीयू में भर्ती है। परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि कार्रवाई के दौरान उनके दो बकरे और एक बकरी लापता हो गए। ग्रामीणों ने शिकायत की कि यह कार्रवाई केवल एक मकान तक सीमित नहीं रही, बल्कि आसपास कुमारी क्षेत्र में हर्निया, कैलाश और गणेश के परिवारों की तीन झोपड़ियां भी तोड़ी गईं, और उन्हें जबरन वाहनों में बैठाकर ले जाया गया। इसके अतिरिक्त, गीता नाथ के बिजली के पोल तोड़ दिए गए और तारबंदी भी क्षतिग्रस्त कर दी गई। पीड़ित परिवार ने वनरक्षक कैलाश चौधरी पर कार्रवाई से पहले ₹20 हजार से ₹50 हजार मांगने और राशि न देने पर मारपीट करने का आरोप लगाया है। ग्रामीणों का दावा है कि संबंधित भूमि लगभग चार बीघा क्षेत्र में थी और उस पर वन विभाग का अधिकार नहीं बनता। घटना की सूचना पर क्षेत्रीय विधायक थावरचंद डामोर मौके पर पहुंचे, जिन्होंने रेंजर रामलाल भील और पटवारी को बुलाकर स्थिति की जानकारी ली। पटवारी बाबूलाल मीणा ने स्पष्ट किया कि जुना बोरिया आराजी नंबर 1/3 ऑनलाइन जमाबंदी के अनुसार ग्राम पंचायत गोठड़ा सुरक्षित चारागाह दर्ज है, और इस स्थान पर वन विभाग का कोई आधिपत्य नहीं है। इसके बाद, रेंजर रामलाल भील ने पीड़ित परिवार को तत्काल राशन और छत के लिए अस्थायी सहायता राशि उपलब्ध कराई। विधायक थावरचंद डामोर ने अधिकारियों को 29 जून तक पीड़ित परिवार का मकान पुनः निर्माण कर तैयार करके देने का अल्टीमेटम दिया है, साथ ही संबंधित अधिकारी को निलंबित करने की भी मांग की है। इस घटना के बाद से ग्रामीणों में भारी नाराजगी है और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग जोर पकड़ने लगी है।4