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दादा भंवर लाल परमार को आदिवासी परिवारों को आपस में जोड़ने वाले व्यक्ति के रूप में पहचाना जाता है।
Pappu Roat
दादा भंवर लाल परमार को आदिवासी परिवारों को आपस में जोड़ने वाले व्यक्ति के रूप में पहचाना जाता है।
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- डूंगरपुर के राजकीय आयुर्विज्ञान महाविद्यालय एवं संबद्ध चिकित्सालय से सेवामुक्त किए गए लगभग 100 नर्स ग्रेड-द्वितीय (नर्सिंग ऑफिसर) कार्मिकों ने अपनी सेवाओं को पुनः बहाल करने की मांग को लेकर पूर्व राज्यमंत्री एवं भाजपा के पूर्व प्रदेश महामंत्री सुशील कटारा को मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपा है। इस ज्ञापन में नर्सिंग कर्मियों ने सेवा समाप्ति के आदेश को निरस्त कर उन्हें पुनः नियुक्त करने और टीएसपी क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए नियमित पदों पर भर्ती की मांग उठाई है। ज्ञापन में बताया गया कि डूंगरपुर के राजकीय आयुर्विज्ञान महाविद्यालय एवं संबद्ध चिकित्सालय में प्लेसमेंट एजेंसी के माध्यम से कार्यरत इन लगभग 100 नर्स ग्रेड-द्वितीय कार्मिकों की सेवाएं 22 जून 2026 को समाप्त कर दी गई हैं। ये कर्मी कई वर्षों से अस्पताल में अपनी सेवाएं दे रहे थे और कोविड-19 महामारी सहित विभिन्न विषम परिस्थितियों में स्वास्थ्य सेवाओं को सुचारू बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं। उन्होंने आईसीयू, एनआईसीयू, पीआईसीयू, आपातकालीन इकाई तथा विभिन्न वार्डों में लगातार सेवाएं प्रदान कर मरीजों को गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराने में योगदान दिया है। इन सेवाओं के अचानक समाप्त होने से लगभग 100 परिवारों के समक्ष आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। नर्सिंग कर्मियों ने अपने ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया है कि राजस्थान कॉन्ट्रैक्चुअल हायरिंग टू सिविल पोस्ट्स रूल्स-2022 के तहत 242 नर्सिंग कार्मिकों को नियुक्ति दी गई थी, लेकिन उपलब्ध जानकारी के अनुसार इनमें से केवल 138 कार्मिकों ने ही कार्यग्रहण किया है। ऐसे में अस्पताल में 100 से अधिक पद रिक्त रहने की संभावना है। कर्मियों का तर्क है कि जब अस्पताल में नर्सिंग स्टाफ की आवश्यकता अभी भी बनी हुई है, तब अनुभवी कार्मिकों की सेवाएं समाप्त करना स्वास्थ्य सेवाओं के हित में उचित नहीं है। उन्होंने वागड़ संभाग और टीएसपी क्षेत्र की स्वास्थ्य आवश्यकताओं पर जोर देते हुए कहा कि डूंगरपुर मेडिकल कॉलेज एवं संबद्ध अस्पताल पूरे आदिवासी क्षेत्र का प्रमुख चिकित्सा संस्थान है और यहां अनुभवी नर्सिंग स्टाफ की कमी होने पर स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है, जिससे दूरस्थ एवं जनजातीय क्षेत्रों से आने वाले मरीजों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा। नर्सिंग कर्मियों ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि सेवा समाप्ति आदेश को तत्काल निरस्त किया जाए, सभी सेवामुक्त नर्स ग्रेड-द्वितीय कार्मिकों की सेवाएं बहाल की जाएं, रिक्त एवं संभावित रिक्त पदों पर अनुभवी कार्मिकों को प्राथमिकता दी जाए, प्रभावित कर्मचारियों के हितों की रक्षा की जाए और अस्पताल की आवश्यकताओं को देखते हुए उनकी सेवाएं जारी रखी जाएं। इसके अतिरिक्त, ज्ञापन में टीएसपी क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए नर्सिंग ऑफिसर के लगभग 3000 नियमित पद पृथक रूप से स्वीकृत करने, राजस्थान चिकित्सा सेवा नियम, 1965 के तहत मेरिट एवं बोनस अंक आधारित भर्ती प्रक्रिया शीघ्र प्रारंभ करने तथा अनुभवी नर्सिंग कार्मिकों को उनके कार्यानुभव का लाभ देने की भी मांग की गई है। नर्सिंग कर्मियों ने उम्मीद जताई है कि राज्य सरकार जनहित, स्वास्थ्य सेवाओं की आवश्यकता तथा आदिवासी क्षेत्र की विशेष परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेगी। ज्ञापन सौंपते समय बड़ी संख्या में प्रभावित नर्स ग्रेड-द्वितीय कार्मिक उपस्थित थे।4
- डूंगरपुर जिले के सागवाड़ा शहर के गामाठावाड़ा क्षेत्र में एक भूखंड और निर्माण कार्य को लेकर विवाद सामने आया है। इस मामले में राजेंद्र कुमार वशिष्ठ ने मंगलेश वाडेल पर उनके निर्माण कार्य में बाधा डालने और मानसिक रूप से परेशान करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। राजेंद्र कुमार वशिष्ठ के अनुसार, उन्होंने वर्ष 1998 में बैंक ऑफ बड़ौदा के पास एक मकान खरीदा था। उनका दावा है कि उन्होंने इसके समीप स्थित भूमि पर 'प्रशासन शहरों के संग अभियान' के तहत नगर पालिका से आवश्यक अनुमति और पट्टा प्राप्त करने के बाद ही निर्माण कार्य शुरू करने की प्रक्रिया अपनाई थी। वशिष्ठ का आरोप है कि इसी दौरान मंगलेश वाडेल ने संबंधित भूमि को लेकर न्यायालय का रुख किया और स्थगन आदेश प्राप्त कर लिया। हालांकि, वशिष्ठ का कहना है कि बाद में न्यायालय से उन्हें राहत मिल गई, लेकिन इसके बावजूद उनके निर्माण कार्य में लगातार बाधाएं उत्पन्न की जा रही हैं। उन्होंने बताया कि जब भी वे निर्माण का प्रयास करते हैं, उन्हें रोका जाता है, जिससे वे मानसिक रूप से बहुत परेशान हैं। इस संबंध में, नगर पालिका के अधिकारी जितेंद्र शर्मा ने बताया कि राजेंद्र कुमार वशिष्ठ ने निर्माण संबंधी प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया है। उन्होंने यह भी बताया कि इस पर मंगलेश वाडेल की ओर से आपत्ति दर्ज करवाई गई है। अधिकारी के अनुसार, मामले की नियमानुसार जांच की जा रही है और जांच के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल, यह भूमि और निर्माण संबंधी मामला प्रशासनिक प्रक्रिया में है, तथा संबंधित पक्षों के दावों और आपत्तियों की जांच जारी है। मामले में अंतिम स्थिति जांच पूरी होने और सक्षम प्राधिकारी के निर्णय के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।1
- बांसवाड़ा नगर निगम ने धरोहर कोचिंग सेंटर के खिलाफ कार्रवाई की है। इस कार्रवाई के तहत कोचिंग सेंटर को सील कर दिया गया।1
- राजस्थान के गनोड़ा तहसील के ग्राम तख्ताजी का टांडा में जोगी समाज की श्मशान भूमि पर देवीलाल यादव और काना खराड़ी द्वारा अवैध कब्जा करने का मामला सामने आया है। इस संबंध में जोगी समाज ने पंचायत से लेकर तहसीलदार, पुलिस थाना और जिला कलेक्टर तक शिकायतें दर्ज कराई हैं, लेकिन अब तक इस मामले में कोई उचित कार्रवाई नहीं हुई है। जोगी समाज का आरोप है कि उचित कार्रवाई न होने के बजाय, प्रशासन ने कब्जाधारियों के पक्ष में रुख अपनाया है। तहसीलदार ने जोगी समाज की शव दफनाने की पीढ़ियों पुरानी प्रथा पर अशोभनीय टिप्पणियां करते हुए उन्हें कब्जाधारियों से 'भिड़ जाओ तुम लोगों में दम हो तो लाड़ो' जैसे गैर-जिम्मेदाराना बयान दिए हैं। पुलिस प्रशासन ने भी कोई संतोषजनक कार्रवाई नहीं की, जिससे जोगी समाज में भारी असंतोष है। अब तक की सरकारी कार्रवाई को देखते हुए जोगी समाज ने प्रशासन पर सवाल उठाए हैं, और इस पूरे मामले में कहीं न कहीं इन सबकी मिलीभगत का अंदेशा जताया है।4
- टंगपुर के ढेबरा गांव में फूड पॉइजनिंग की एक गंभीर घटना सामने आई है, जिसमें एक ही परिवार के सात सदस्य बीमार पड़ गए। इस दुखद घटना में एक किशोरी की मौत हो गई है, जबकि परिवार के पांच बच्चों सहित छह अन्य सदस्य अस्पताल में भर्ती हैं। जानकारी के अनुसार, परिवार ने शुक्रवार रात को एक साथ भोजन किया था, जिसके बाद शनिवार सुबह से ही उन्हें उल्टी होने लगी। हालत बिगड़ने पर सदस्यों को अस्पताल ले जाया गया, जहां एक किशोरी की जान चली गई और शेष छह का इलाज चल रहा है।1
- राजसमंद में गुरुवार दोपहर महामहिम राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागड़े ने विश्व प्रसिद्ध कुम्भलगढ़ दुर्ग स्थित महाराणा प्रताप की जन्मस्थली का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने पैदल चलकर दुर्ग के विभिन्न भागों का बारीकी से अवलोकन करते हुए इसकी ऐतिहासिक भव्यता और स्थापत्य कला को करीब से देखा। राज्यपाल के भ्रमण के समय कुम्भलगढ़ विधायक श्री सुरेन्द्र सिंह राठौड़, जिला कलक्टर श्री अरुण कुमार हसीजा और जिला पुलिस अधीक्षक श्री हेमंत कालाल सहित कई जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित रहे। महामहिम राज्यपाल ने दुर्ग की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्ता के संबंध में विस्तृत जानकारी हासिल की और इसके संरक्षण व संवर्धन के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। इस अवसर पर हेरिटेज सोसायटी के सचिव श्री कुबेर सिंह सोलंकी ने राज्यपाल को कुम्भलगढ़ दुर्ग के इतिहास, स्थापत्य विशेषताओं, मेवाड़ के विभिन्न शासकों के योगदान तथा दुर्ग से जुड़े अन्य ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक पहलुओं से अवगत कराया। उन्होंने दुर्ग की विश्वस्तरीय पहचान, इसकी विशाल प्राचीर और पर्यटन की दृष्टि से इसके महत्व पर भी प्रकाश डाला। महामहिम राज्यपाल श्री बागड़े ने कुम्भलगढ़ दुर्ग को एक अमूल्य धरोहर बताते हुए इसके संरक्षण एवं संवर्धन को प्राथमिकता देने पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक विरासत का संरक्षण हमारी सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करता है और भावी पीढ़ियों को अपने गौरवशाली इतिहास से परिचित कराता है। इसी क्रम में, उन्होंने संबंधित अधिकारियों को दुर्ग पर आने वाले देशी एवं विदेशी पर्यटकों के लिए सुविधाओं के विस्तार एवं सुदृढ़ीकरण के संबंध में आवश्यक निर्देश भी जारी किए।1
- समाज सेवी दिनेश चंद्र अहारी ने बाण गंगा और बेडसी गंगा नामक दर्शनीय स्थानों के विषय में जानकारी मांगी है। उन्होंने इन स्थलों की स्थिति, उनके महत्व और उनके इतिहास को लेकर सवाल उठाए हैं।1
- डूंगरपुर जिले में जर्जर स्कूल भवनों की समस्या डेढ़ साल बाद भी जस की तस बनी हुई है। हाल ही में हुए एक सर्वेक्षण के अनुसार, कुल 194 स्कूल भवन बच्चों के लिए असुरक्षित पाए गए हैं, जिनमें 169 जर्जर और 25 अति जर्जर श्रेणी के हैं। बताया गया है कि झालावाड़ में हुए हादसे के बाद जिले में कुल 209 जर्जर स्कूल भवन चिन्हित किए गए थे। हालांकि, इतने समय बाद भी अब तक केवल 13 स्कूलों के पुनर्निर्माण को ही स्वीकृति मिल पाई है। शिक्षा विभाग ने इन जर्जर भवनों के पुनर्निर्माण के लिए राज्य सरकार को 154 करोड़ रुपये से अधिक का एक नया प्रस्ताव भेजा है। इस बीच, कई स्कूलों के छात्र आज भी वैकल्पिक भवनों में पढ़ाई करने को मजबूर हैं। यह गंभीर स्थिति इशारा करती है कि जर्जर स्कूलें किसी और बड़े झालावाड़ जैसे हादसे का इंतजार कर रही हैं, और सरकार कब इस मामले में नींद से जागेगी।1
- राजस्थान के डूंगरपुर जिले के सीमलवाड़ा ब्लॉक क्षेत्र की बांसिया ग्राम पंचायत में बुधवार को ग्रामीण सेवा शिविर का आयोजन किया गया, जिसका उद्देश्य राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को आमजन तक पहुँचाना और ग्रामीणों की समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करना था। इस शिविर में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लेकर विभिन्न विभागों की योजनाओं का लाभ उठाया और अपनी समस्याओं एवं मांगों से संबंधित प्रार्थना पत्र व ज्ञापन प्रस्तुत किए। शिविर में पात्र हितग्राहियों को मौके पर ही राहत प्रदान की गई; समाज कल्याण विभाग ने खुशबू पुत्री दिनेश अहारी को श्रवण यंत्र उपलब्ध कराया और पेंशन स्वीकृति पत्र वितरित किए। वहीं, पंचायतीराज विभाग की ओर से माधोर पुत्र भावसिंह बंजारा तथा गोपाल कृष्ण पुत्र शंकरलाल यादव को कृषि भूमि के विशेष पट्टे प्रदान किए गए। लाभार्थियों ने मौके पर मिली इस सहायता के लिए राज्य सरकार और प्रशासन का आभार व्यक्त किया। शिविर के दौरान, रोत फला निवासी नारायण लाल रोत ने सड़क मार्ग पर अतिक्रमण और झाड़ियों के कारण आवागमन में हो रही परेशानी को लेकर शिकायत की। मामले की गंभीरता को देखते हुए नायब तहसीलदार राजेश मीणा और विकास अधिकारी ललित कुमार पंड्या ने तत्काल मौके पर पहुँचकर निरीक्षण किया, जहाँ अतिक्रमण की पुष्टि होने पर ग्राम विकास अधिकारी भंवरलाल बंजारा को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए। प्रशासन की इस त्वरित प्रतिक्रिया से ग्रामीणों में संतोष देखने को मिला। इसके अतिरिक्त, पंचायतीराज विभाग ने शिविर में 28 आवासीय पट्टे, 9 व्यक्तिगत शौचालय, 7 जन्म-मृत्यु-विवाह पंजीकरण प्रमाण पत्र, 2 पेंशन स्वीकृतियाँ और 3 आबादी विस्तार के प्रस्तावों सहित अपनी प्रगति रिपोर्ट साझा की। ग्रामीणों ने विद्युत विभाग से कम वोल्टेज की समस्या के समाधान, आबादी भूमि पर अवैध दुकानों के अतिक्रमण हटाने, कृषि भूमि के गलत आवंटन की जाँच कराने, पंचायत भूमि पर अवैध निर्माण हटाने, सीसी सड़क निर्माण, नए हैंडपंप खुदवाने, बंद पड़े सोलर पनघटों को फिर से शुरू कराने, बालिका छात्रावास से चौवड़ियां तालाब तक सड़क मार्ग को राजस्व अभिलेखों में दर्ज कराने, राजस्व नामावली में शुद्धिकरण तथा डोडियार फला से मुख्य गाँव की सड़क पर अत्यधिक झाड़ियाँ हटाने सहित कई अन्य मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपे। संबंधित विभागीय अधिकारियों ने इन प्रकरणों का परीक्षण कर नियमानुसार कार्रवाई का भरोसा दिलाया। इस अवसर पर, भाजपा जिला महामंत्री ईश्वरलाल लबाना ने कहा कि राज्य सरकार ग्रामीण क्षेत्रों तक योजनाओं का लाभ पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है और ग्रामीण सेवा शिविरों से लोगों को कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ते। भाजपा मंडल अध्यक्ष परेश पाटीदार ने इन शिविरों को सुशासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया, जिससे आमजन की समस्याओं का मौके पर समाधान हो रहा है। शिविर का निरीक्षण करने पहुँचे अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी (एसीईओ) अनिल पहाड़िया ने विभिन्न विभागों के स्टॉलों का अवलोकन किया और प्राप्त प्रकरणों की समीक्षा की। उन्होंने कुछ विभागों की कार्यप्रणाली और मामलों के निस्तारण में दिखाई दे रही उदासीनता पर गहरी नाराजगी व्यक्त की। एसीईओ ने अधिकारियों और कर्मचारियों को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि ग्रामीण सेवा शिविर केवल औपचारिकता मात्र नहीं हैं, बल्कि आमजन की समस्याओं के समाधान का प्रभावी माध्यम हैं, और किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनावश्यक विलंब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को लंबित प्रकरणों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करने, प्रत्येक आवेदन की नियमित निगरानी करने और पात्र लोगों को योजनाओं का लाभ प्राथमिकता से उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। एसीईओ ने जोर देकर कहा कि शिविरों की सफलता तभी मानी जाएगी जब ग्रामीणों को वास्तविक राहत मिले और उनकी समस्याओं का समाधान धरातल पर दिखाई दे। उन्होंने सभी विभागों को समन्वय स्थापित कर कार्य करने और जनहित के मामलों में त्वरित कार्रवाई करने के लिए निर्देशित किया। शिविर के दौरान वन विभाग ने पंचायत कार्यालय परिसर में वृक्षारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया, वहीं कृषि विभाग द्वारा किसानों को उन्नत किस्म के मक्का बीज वितरित किए गए और आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी प्रदान की गई। इस आयोजन में भाजपा जिला मीडिया प्रभारी गुणवंत कलाल, मंडल उपाध्यक्ष लोकेंद्र सिंह चौहान, सरपंच सूरज देवी डोडियार, विमल प्रकाश डोडियार, एसीबीईओ हमराज सिंह चौहान, पीईईओ धनपाल भोई सहित जनप्रतिनिधि, विभागीय अधिकारी, कर्मचारी और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे, जिन्होंने शिविर को जनसमस्याओं के समाधान और सरकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त करने का प्रभावी माध्यम बताते हुए ऐसे आयोजनों को निरंतर जारी रखने की माँग की।1