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जमशेदपुर/ जिले के बहरागोड़ा प्रखंड अंतर्गत पानीपड़ा- नागुड़साई क्षेत्र में सुवर्णरेखा नदी किनारे मिला विशालकाय बम सफलतापूर्वक निष्क्रिय किया गया।
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जमशेदपुर/ जिले के बहरागोड़ा प्रखंड अंतर्गत पानीपड़ा- नागुड़साई क्षेत्र में सुवर्णरेखा नदी किनारे मिला विशालकाय बम सफलतापूर्वक निष्क्रिय किया गया।
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- सिसई(गुमला)। सिसई प्रखण्ड अंतर्गत,ग्राम पंचायत भदौली में मण्डा पूजा के शुभावसर पर "छऊ नृत्य" व "नागपुरी सांस्कृतिक" कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। राधेश्याम सिंह,अर्ख़ितानंद देवघरिया,अरुण किशोर सिंह,अजय कुमार सिंह ,राहुल सिंह के द्वारा संयुक्त रूप से फीता काटकर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। भदौली निवासी राधेश्याम सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि ग्राम भदौली में मण्डा पूजा सन् 1957 से पूर्वजों द्वारा किया जा रहा है। जिसे आज की पीढ़ी पूर्वजों के विरासत को आगे लेकर चल रही है और प्रत्येक वर्ष काफी धूमधाम से मनाया जाता है। श्रद्धालुओं एवं भक्तों की काफी भीड़ रहती है। लोग दूर दूर से मण्डा पूजा देखने आते हैं। पुरी आस्था और भक्ति के साथ इस धार्मिक अनुष्ठान को पाहान पूजारों द्वारा संपन्न कराया जाता है वहीं इस आयोजन में लोटनसेवा, धुंवासी के साथ रात्रि में फुलखुन्दी आग में चलने का रस्म किया जाता है, जिसमें भोक्ता और सोक्ताईन अपनी मनोकामनाओं को लेकर नंगे पांव आग के अंगारों में चलते हुए रस्म को पुरा करते हैं। इसबार फुलखुंदी के पश्चात रात्रि में छऊ नृत्य का आयोजन किया गया। जिसमें बंगाल से आये हुए छऊ नृत्य मंडली द्वारा छऊ नृत्य के माध्यम से रामायण के प्रसंग को अपने मनमोहक अंदाज में प्रस्तुत किया गया जिसे देखकर दर्शकगण भावविभोर हो उठे। वहीं अगले दिन मंगलवार की संध्या में आयोजित नागपुरी सांस्कृतिक कार्यक्रम में सत्या म्युजिकल ग्रुप के कलाकार कवि किशन,सूरज कुमार,बसीर अंसारी,दिव्या कुमारी,प्रीति बारला,रेशमा कुमारी एवं सपना कुमारी द्वारा एक से बढ़कर एक आधुनिक नागपुरी व भोजपुरी गीत और नृत्य की प्रस्तुति दी गई जो दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर झूमने पर विवश कर दिया। कार्यक्रम की शुरुआत धार्मिक भजनों से हुई। इसके बाद भोजपुरी व नागपुरी गीत संगीत और नृत्य का दौर देर रात तक चलता रहा जिसका दर्शकों ने खूब आनंद उठाया। कार्यक्रम में महिलाओं एवं पुरुषों की काफी भीड़ जुटि हुई थी। इसी के साथ तीन दिनों तक चलने वाले भक्ति और आस्था से जुड़ी धार्मिक आयोजन "मंडा पूजा" का समापन किया गया। इस आयोजन को सफल बनाने में भदौली मंडा पूजा समिति के अध्यक्ष राहुल सिंह,सचिव विक्रम ताम्रकर, उपाध्यक्ष शुभम सिंह,अरुण सिंह,नंदकिशोर सिंह,अजय सिंह,रामानंद सिंह,विकास पंडा,राजेश उराँव,सुरेन्द्र जायसवाल, करण सिंह,राजन गोप,गोपाल सिंह,गौतम ताम्रकर,सहित सभी कार्यकर्ताओं का भरपूर योगदान रहा।4
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- वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, झारखंड सरकार द्वारा पृथ्वी दिवस 2026 के अवसर पर "हमारी शक्ति, हमारा ग्रह" थीम के तहत पलाश सभागार, वन भवन, डोरंडा में एक गरिमामय कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। जिसमें विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, वैज्ञानिक और पर्यावरण विशेषज्ञ शामिल हुए। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधान मुख्य वन संरक्षक (PCCF & HAFF) संजीव कुमार ने कहा कि पृथ्वी दिवस केवल औपचारिक आयोजन नहीं बल्कि पूरे वर्ष पर्यावरण संरक्षण के लिए सतत प्रयासों का संकल्प लेने का दिन है। उन्होंने कहा, हम सालभर पर्यावरण संरक्षण के लिए कार्य करते हैं, लेकिन इस दिन हम एकजुट होकर रणनीति बनाते हैं और आगे की दिशा तय करते हैं।" उन्होंने जल, जैव विविधता और वृक्षों के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि ये तत्व मानव अस्तित्व के मूल आधार हैं। औद्योगिकीकरण के बढ़ते प्रभाव पर चिंता जताते हुए उन्होंने चेतावनी दी कि यदि वैश्विक तापमान वृद्धि को 1.5 डिग्री सेल्सियस के भीतर नियंत्रित नहीं किया गया, तो इसके गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं। श्री कुमार ने भारतीय संस्कृति और परंपराओं का उल्लेख करते हुए कहा कि हमारे ग्रंथों और जीवनशैली में प्रकृति संरक्षण का स्पष्ट संदेश निहित है। "अरण्यम सह पृथ्वी सो नमोस्तु" का उल्लेख करते हुए उन्होंने महुआ, कुसुम और आसन जैसे आजीविका से जुड़े पौधों के संरक्षण और जल संरक्षण पर विशेष जोर दिया। कार्यक्रम में झारखंड राज्य जैव विविधता बोर्ड के अध्यक्ष विश्वनाथ शाह, पीसीसीएफ (बंजर भूमि) ए.टी. मिश्रा, पीसीसीएफ (वन्यप्राणी) रवि रंजन, डॉ. ज्योतिष करकेट्टा और डॉ. बबली सिंह सहित कई विशेषज्ञों ने जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता संरक्षण और सतत विकास पर अपने विचार साझा किए। बोर्ड के सचिव आदिल अजीम ने कहा कि जल, जंगल और जमीन की रक्षा प्रत्येक नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है, और छोटे प्रयासों से बड़ा परिवर्तन संभव है। इस अवसर पर पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्तियों और संस्थाओं को सम्मानित किया गया। सम्मानित होने वालों में अरुण महली, मधुबाला देवी, दिनेश तिग्गा, सुनील कच्छप, पप्पू कुमार और श्रीमती चंचला देवी शामिल रहे। कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित लोगों ने पृथ्वी की रक्षा और पर्यावरण संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयास करने का संकल्प लिया। इस मौके पर आईएफएस संदीप शिंदे, डॉ. आर. शेंगा पांडियन (आरसीसीएफ, बोकारो), डीएफओ हजारीबाग मोहन प्रकाश, डीएफओ रजनीश कुमार, तकनीकी पदाधिकारी हरिशंकर लाल सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित थे।1