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छतरपुर पुलिस ने ऑपरेशन विश्वास के तहत 90 मोबाइल खोज कर निकले मोबाइल धारकों को प्रेस कांफ्रेंस के माध्यम से किया वापस छतरपुर पुलिस ने ऑपरेशन विश्वास के तहत बड़ी सफलता हासिल की है। फरवरी माह में गुम और चोरी हुए करीब 90 मोबाइल फोन को पुलिस ने खोज निकाला। पुलिस की साइबर टीम और थानों की संयुक्त कार्रवाई के बाद इन मोबाइलों को ट्रेस कर बरामद किया गया। दो मार्च को आयोजित कार्यक्रम में सभी 90 मोबाइल उनके वास्तविक धारकों को वापस सौंप दिए गए। बरामद किए गए मोबाइलों की कुल अनुमानित कीमत करीब 14 लाख रुपये बताई जा रही है। मोबाइल वापस पाकर लोगों के चेहरों पर खुशी साफ दिखाई दी। छतरपुर पुलिस का कहना है कि ऑपरेशन विश्वास आगे भी लगातार जारी रहेगा, ताकि आम जनता को राहत मिलती रहे।
Angad yadav
छतरपुर पुलिस ने ऑपरेशन विश्वास के तहत 90 मोबाइल खोज कर निकले मोबाइल धारकों को प्रेस कांफ्रेंस के माध्यम से किया वापस छतरपुर पुलिस ने ऑपरेशन विश्वास के तहत बड़ी सफलता हासिल की है। फरवरी माह में गुम और चोरी हुए करीब 90 मोबाइल फोन को पुलिस ने खोज निकाला। पुलिस की साइबर टीम और थानों की संयुक्त कार्रवाई के बाद इन मोबाइलों को ट्रेस कर बरामद किया गया। दो मार्च को आयोजित कार्यक्रम में सभी 90 मोबाइल उनके वास्तविक धारकों को वापस सौंप दिए गए। बरामद किए गए मोबाइलों की कुल अनुमानित कीमत करीब 14 लाख रुपये बताई जा रही है। मोबाइल वापस पाकर लोगों के चेहरों पर खुशी साफ दिखाई दी। छतरपुर पुलिस का कहना है कि ऑपरेशन विश्वास आगे भी लगातार जारी रहेगा, ताकि आम जनता को राहत मिलती रहे।
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- छतरपुर जिले के खजुराहो थाना क्षेत्र से एक मामला सामने आया है, जहां पीड़िता ने पुलिस अधीक्षक से न्याय की गुहार लगाई है। पीड़िता द्वारा दिए गए आवेदन के अनुसार, थाना खजुराहो में अपराध क्रमांक 0053/2026 दर्ज है। पीड़िता का आरोप है कि आरोपियों द्वारा उसके साथ मारपीट की गई और जान से मारने की धमकी दी गई। आवेदन में उल्लेख किया गया है कि घटना 26 फरवरी 2026 की बताई जा रही है, जिसमें आरोपीगण ने गाली-गलौज करते हुए हमला किया। पीड़िता को उपचार के लिए जिला चिकित्सालय छतरपुर में भर्ती कराया गया। पीड़िता का यह भी आरोप है कि आरोपियों द्वारा लगातार दबाव बनाया जा रहा है और समझौता करने की धमकी दी जा रही है। पीड़िता ने एसपी कार्यालय पहुंचकर आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और सुरक्षा प्रदान किए जाने की मांग की है। फिलहाल पुलिस द्वारा मामले की जांच की जा रही है।3
- नौगांव पोलिटेकनिक स्टाप की उदासीनता से गई मेरे बेटे की जान मृतक छात्रा के पिता सुनील तिवारी । मृतक छात्र राज तिवारी के शव का आज पोस्टमार्टम उपरांत परिजनों को शव सौंप दिया गया । मृतक छात्र के पिता सुनील तिवारी ने अपने बेटे के अचानक निधन से सदमे में हैं तथा उन्होंने पोलिटेकनिक प्राचार्य सहित सम्बन्धित स्टाप पर घोर लापरवाही का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज करने की मांग की है ।1
- छतरपुर पुलिस ने ऑपरेशन विश्वास के तहत बड़ी सफलता हासिल की है। फरवरी माह में गुम और चोरी हुए करीब 90 मोबाइल फोन को पुलिस ने खोज निकाला। पुलिस की साइबर टीम और थानों की संयुक्त कार्रवाई के बाद इन मोबाइलों को ट्रेस कर बरामद किया गया। दो मार्च को आयोजित कार्यक्रम में सभी 90 मोबाइल उनके वास्तविक धारकों को वापस सौंप दिए गए। बरामद किए गए मोबाइलों की कुल अनुमानित कीमत करीब 14 लाख रुपये बताई जा रही है। मोबाइल वापस पाकर लोगों के चेहरों पर खुशी साफ दिखाई दी। छतरपुर पुलिस का कहना है कि ऑपरेशन विश्वास आगे भी लगातार जारी रहेगा, ताकि आम जनता को राहत मिलती रहे।3
- Post by Roshani shivhare1
- छतरपुर में आयोजित संकल्प यात्रा कार्यक्रम के दौरान मंच पर बैठे आजाद समाज पार्टी (मध्य प्रदेश) के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुनील असते ने भाषण के समय जूता दिखाया, जिसके बाद कार्यक्रम में राजनीतिक चर्चा तेज हो गई। इस वीडियो में देखें: • पूरा घटनाक्रम • मंच से दिया गया बयान • जूता दिखाने का पल • कार्यक्रम का माहौल यह वीडियो मौके से रिकॉर्ड किया गया है। 📍 स्थान: छतरपुर 🎥 रिपोर्ट: Ankit Speaks News आप इस घटना को कैसे देखते हैं? अपनी राय कमेंट में जरूर लिखें।1
- तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि “28 साल के ढोंगी लड़के के यहां चंदा-मित्र लेने प्रशासन के लोग लगे रहते हैं।” उनका यह बयान सभा स्थल पर मौजूद लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया। बताया जा रहा है कि यह बयान दामोदर यादव की सभा के दौरान दिया गया, जिसके बाद कार्यक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में मंच से प्रशासन और कथित व्यक्तियों पर आरोप लगाए जाते दिखाई दे रहे हैं। हालांकि, इस बयान को लेकर प्रशासन या संबंधित पक्ष की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।1
- Post by Journalist Santosh Kumar1
- द्वारा कथित रूप से “मनुवादियों” को जूता दिखाकर संबोधित करने का मामला सामने आया है। घटना के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में बहस तेज हो गई है। जानकारों का कहना है कि भारत का संविधान, जिसकी रचना में डॉ. भीमराव अंबेडकर की अहम भूमिका रही, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता तो देता है, लेकिन सार्वजनिक मंचों पर मर्यादा और शिष्टाचार बनाए रखने की भी अपेक्षा करता है। संविधान का अनुच्छेद 19(1)(a) नागरिकों को बोलने की आज़ादी देता है, परंतु यह स्वतंत्रता कानून व्यवस्था और सार्वजनिक शांति की सीमाओं के भीतर है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लोकतंत्र में विरोध दर्ज कराने के कई संवैधानिक तरीके हैं, लेकिन जूता दिखाकर संबोधन करना लोकतांत्रिक संवाद की गरिमा के अनुरूप नहीं माना जाता। इस तरह की घटनाएं समाज में वैचारिक टकराव को और बढ़ा सकती हैं। वहीं सभा के दौरान कुछ लोगों ने यह भी सवाल उठाया कि यदि वास्तव में समाजहित प्राथमिकता है, तो भ्रष्टाचार, विकास, महंगाई और रोजगार जैसे ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा क्यों नहीं हो रही। ग्रामीण क्षेत्रों से पलायन और स्थानीय समस्याओं पर भी ध्यान देने की जरूरत बताई गई। घटना के बाद आमजन में मिश्रित प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। अब देखना होगा कि इस मामले में संबंधित पक्ष की ओर से कोई स्पष्टीकरण सामने आता है या नहीं।1