logo
Shuru
Apke Nagar Ki App…
  • Latest News
  • News
  • Politics
  • Elections
  • Viral
  • Astrology
  • Horoscope in Hindi
  • Horoscope in English
  • Latest Political News
logo
Shuru
Apke Nagar Ki App…

यह पोस्ट जनता की चुनावी पसंद पर सवाल उठाते हुए तीखी टिप्पणी करती है। इसमें कहा गया है कि जब जनता बार-बार ऐसे राजनीतिक दलों को चुनती रहेगी जो लाठीचार्ज करवाते हैं, तो फिर लाठीचार्ज रुकने की उम्मीद आखिर किससे की जा सकती है? यह संदेश इस बात पर निराशा व्यक्त करता है कि अपनी पसंद के माध्यम से जनता स्वयं ही लाठीचार्ज की घटनाओं के जारी रहने का कारण बन जाती है।

5 hrs ago
user_M.A.P NETWORK
M.A.P NETWORK
Local News Reporter पश्चिम चंपारण, पश्चिम चंपारण, बिहार•
5 hrs ago

यह पोस्ट जनता की चुनावी पसंद पर सवाल उठाते हुए तीखी टिप्पणी करती है। इसमें कहा गया है कि जब जनता बार-बार ऐसे राजनीतिक दलों को चुनती रहेगी जो लाठीचार्ज करवाते हैं, तो फिर लाठीचार्ज रुकने की उम्मीद आखिर किससे की जा सकती है? यह संदेश इस बात पर निराशा व्यक्त करता है कि अपनी पसंद के माध्यम से जनता स्वयं ही लाठीचार्ज की घटनाओं के जारी रहने का कारण बन जाती है।

More news from बिहार and nearby areas
  • यह पोस्ट जनता की चुनावी पसंद पर सवाल उठाते हुए तीखी टिप्पणी करती है। इसमें कहा गया है कि जब जनता बार-बार ऐसे राजनीतिक दलों को चुनती रहेगी जो लाठीचार्ज करवाते हैं, तो फिर लाठीचार्ज रुकने की उम्मीद आखिर किससे की जा सकती है? यह संदेश इस बात पर निराशा व्यक्त करता है कि अपनी पसंद के माध्यम से जनता स्वयं ही लाठीचार्ज की घटनाओं के जारी रहने का कारण बन जाती है।
    1
    यह पोस्ट जनता की चुनावी पसंद पर सवाल उठाते हुए तीखी टिप्पणी करती है। इसमें कहा गया है कि जब जनता बार-बार ऐसे राजनीतिक दलों को चुनती रहेगी जो लाठीचार्ज करवाते हैं, तो फिर लाठीचार्ज रुकने की उम्मीद आखिर किससे की जा सकती है? यह संदेश इस बात पर निराशा व्यक्त करता है कि अपनी पसंद के माध्यम से जनता स्वयं ही लाठीचार्ज की घटनाओं के जारी रहने का कारण बन जाती है।
    user_M.A.P NETWORK
    M.A.P NETWORK
    Local News Reporter पश्चिम चंपारण, पश्चिम चंपारण, बिहार•
    5 hrs ago
  • बिहार सरकार ने राज्य में जमीन रजिस्ट्री के नियमों में बदलाव किया है। इन बदलावों को लेकर जनसुराज के प्रदेश प्रवक्ता ने सरकार को घेरते हुए अपनी आपत्ति व्यक्त की।
    1
    बिहार सरकार ने राज्य में जमीन रजिस्ट्री के नियमों में बदलाव किया है। इन बदलावों को लेकर जनसुराज के प्रदेश प्रवक्ता ने सरकार को घेरते हुए अपनी आपत्ति व्यक्त की।
    user_BN Chitranjan
    BN Chitranjan
    बैरिया, पश्चिम चंपारण, बिहार•
    2 hrs ago
  • बगहा शास्त्री नगर के वार्ड नंबर 14 में सड़कों की दयनीय स्थिति सामने आई है, जहां जलजमाव के कारण सड़क की पहचान करना मुश्किल हो गया है। स्थानीय लोगों ने इस समस्या को उजागर करते हुए यह सवाल उठाया है कि क्या यह वास्तव में एक सड़क है या फिर एक तालाब में तब्दील हो चुकी है। इस गंभीर मुद्दे पर जनता अपनी आवाज उठा रही है और अधिकारियों से इस 'ग्राउंड रियलिटी' पर ध्यान देने की मांग कर रही है।
    1
    बगहा शास्त्री नगर के वार्ड नंबर 14 में सड़कों की दयनीय स्थिति सामने आई है, जहां जलजमाव के कारण सड़क की पहचान करना मुश्किल हो गया है। स्थानीय लोगों ने इस समस्या को उजागर करते हुए यह सवाल उठाया है कि क्या यह वास्तव में एक सड़क है या फिर एक तालाब में तब्दील हो चुकी है। इस गंभीर मुद्दे पर जनता अपनी आवाज उठा रही है और अधिकारियों से इस 'ग्राउंड रियलिटी' पर ध्यान देने की मांग कर रही है।
    user_Sahil kumar
    Sahil kumar
    Local News Reporter बगहा, पश्चिम चंपारण, बिहार•
    10 hrs ago
  • मझौलिया थाना को एक स्मार्ट थाना के रूप में विकसित किया जाएगा। यह जानकारी डीआईजी हरकिशोर राय ने दी है।
    1
    मझौलिया थाना को एक स्मार्ट थाना के रूप में विकसित किया जाएगा। यह जानकारी डीआईजी हरकिशोर राय ने दी है।
    user_A9Bharat News
    A9Bharat News
    Local News Reporter बेतिया, पश्चिम चंपारण, बिहार•
    17 min ago
  • कुशीनगर जनपद में निजी अस्पतालों की बेलगाम व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। पडरौना स्थित किलकारी हॉस्पिटल और उसके संचालक डॉ. कमलेश वर्मा नवजात की मौत के बाद दोबारा सुर्खियों में हैं, जिन पर गलत इलाज, लापरवाही और मौत के बाद "समझौते" का खेल रचने के पुराने आरोप लगे हैं। इस बार भी एक गरीब परिवार का "दीपक बुझ गया" और आरोप है कि सिस्टम अस्पताल की ढाल बनकर खड़ा दिखाई दिया। यह मामला खड्डा थाना क्षेत्र के सालिकपुर गांव की नंदनी पत्नी विष्णु से जुड़ा है, जो अपने नवजात बच्चे की तेज धड़कन की शिकायत पर किलकारी अस्पताल पहुंची थीं। अस्पताल प्रशासन ने परिवार को बच्चे के ठीक होने का भरोसा दिया और छह दिन तक भर्ती रखकर इलाज के नाम पर हजारों रुपये वसूले। परिजनों का आरोप है कि बच्चे की हालत लगातार बिगड़ती रही। आखिर में बीस हजार रुपये जमा कराने के बाद बच्चे को गोरखपुर रेफर कर दिया गया, लेकिन तब तक मासूम की सांसें थम चुकी थीं। मासूम की मां जब कैमरों के सामने डॉक्टर की लापरवाही गिनाते हुए फूट-फूटकर रो रही थीं, ठीक उसी समय अस्पताल के भीतर मामले को "मैनेज" करने की पटकथा लिखी जा रही थी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हंगामा बढ़ने पर अस्पताल प्रबंधन ने अपने करीबी लोगों, कथित पत्रकारों और पुलिस को मौके पर बुला लिया। इसके बाद दबाव का खेल शुरू हुआ, जिसमें पुलिस की भूमिका पर सबसे बड़ा सवाल उठ रहा है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, पुलिस पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के बजाय "समझौते" की सलाह देती दिखी और उन्हें यह कहकर डराया गया कि कार्रवाई करने पर नवजात का पोस्टमार्टम होगा और "इतने छोटे बच्चे की चीर-फाड़ से क्या मिलेगा?" अंततः चारों तरफ से दबाव, भय और मानसिक प्रताड़ना के बीच ₹23,000 में समझौते की बात तय कर दी गई। आरोप है कि नवजात के पिता से ₹10 के स्टाम्प पेपर पर लिखवाकर पूरे मामले को रफा-दफा करा दिया गया। यह यक्ष प्रश्न उठता है कि क्या किसी नवजात की मौत की कीमत ₹23,000 है? क्या एक स्टाम्प पेपर पर लिखवा लेने से चिकित्सकीय लापरवाही समाप्त हो जाती है और क्या पुलिस का काम समझौता कराना है या निष्पक्ष कार्रवाई करना? जानकार बताते हैं कि इलाज के दौरान मौत और चिकित्सकीय लापरवाही के आरोपों पर स्वास्थ्य विभाग की स्वतंत्र जांच, मेडिकल बोर्ड की समीक्षा और कानूनी प्रक्रिया अनिवार्य होती है, लेकिन कुशीनगर में मौत के बाद जांच नहीं, बल्कि "सेटिंग" शुरू हो जाती है। स्थानीय लोगों के अनुसार, किलकारी हॉस्पिटल का विवादों से पुराना नाता रहा है और इस पर पहले भी गलत इंजेक्शन, देर से रेफर करने तथा मोटी रकम वसूलने के बाद मरीज की मौत जैसे आरोप लगते रहे हैं। हर बार एक ही फार्मूला दोहराया जाता है: इलाज का भरोसा, हालत बिगड़ने पर रेफर, फिर हंगामा और अंत में "ले-देकर मामला खत्म"। इसी कारण जनपद में चर्चा है कि यह अस्पताल इलाज से ज्यादा मौत बांटने व "मैनेजमेंट" के लिए जाना जाता है। स्वास्थ्य विभाग की चुप्पी भी संदेह के घेरे में है, क्योंकि जनपद में कई निजी अस्पताल बिना पर्याप्त संसाधनों और विशेषज्ञ चिकित्सकों के संचालित हो रहे हैं। बड़े हादसों के बाद कुछ दिन नोटिस और बयानबाजी होती है, फिर फाइलें ठंडे बस्ते में चली जाती हैं। सबसे बड़ा सवाल स्वास्थ्य विभाग पर उठ रहा है कि यदि किसी अस्पताल पर लगातार गंभीर आरोप लग रहे हैं, तो उसकी उच्चस्तरीय जांच क्यों नहीं हुई? पुलिस की भूमिका पर भी गंभीर प्रश्न उठते हैं कि यदि निष्पक्ष जांच के बजाय समझौते का दबाव बनाया जा रहा है, तो पीड़ित परिवार न्याय की उम्मीद किससे करे। जानकार कहते हैं कि अगर हर मौत के बाद कुछ हजार रुपये देकर मामला दबा दिया जाएगा, तो फिर कानून, जांच और प्रशासन सिर्फ दिखावे के लिए ही रह जाएंगे। आरोप है कि किलकारी हॉस्पिटल "मौत, मोलभाव और मैनेजमेंट" का अड्डा बन चुका है।
    1
    कुशीनगर जनपद में निजी अस्पतालों की बेलगाम व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। पडरौना स्थित किलकारी हॉस्पिटल और उसके संचालक डॉ. कमलेश वर्मा नवजात की मौत के बाद दोबारा सुर्खियों में हैं, जिन पर गलत इलाज, लापरवाही और मौत के बाद "समझौते" का खेल रचने के पुराने आरोप लगे हैं। इस बार भी एक गरीब परिवार का "दीपक बुझ गया" और आरोप है कि सिस्टम अस्पताल की ढाल बनकर खड़ा दिखाई दिया।

यह मामला खड्डा थाना क्षेत्र के सालिकपुर गांव की नंदनी पत्नी विष्णु से जुड़ा है, जो अपने नवजात बच्चे की तेज धड़कन की शिकायत पर किलकारी अस्पताल पहुंची थीं। अस्पताल प्रशासन ने परिवार को बच्चे के ठीक होने का भरोसा दिया और छह दिन तक भर्ती रखकर इलाज के नाम पर हजारों रुपये वसूले। परिजनों का आरोप है कि बच्चे की हालत लगातार बिगड़ती रही। आखिर में बीस हजार रुपये जमा कराने के बाद बच्चे को गोरखपुर रेफर कर दिया गया, लेकिन तब तक मासूम की सांसें थम चुकी थीं।

मासूम की मां जब कैमरों के सामने डॉक्टर की लापरवाही गिनाते हुए फूट-फूटकर रो रही थीं, ठीक उसी समय अस्पताल के भीतर मामले को "मैनेज" करने की पटकथा लिखी जा रही थी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हंगामा बढ़ने पर अस्पताल प्रबंधन ने अपने करीबी लोगों, कथित पत्रकारों और पुलिस को मौके पर बुला लिया। इसके बाद दबाव का खेल शुरू हुआ, जिसमें पुलिस की भूमिका पर सबसे बड़ा सवाल उठ रहा है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, पुलिस पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के बजाय "समझौते" की सलाह देती दिखी और उन्हें यह कहकर डराया गया कि कार्रवाई करने पर नवजात का पोस्टमार्टम होगा और "इतने छोटे बच्चे की चीर-फाड़ से क्या मिलेगा?" अंततः चारों तरफ से दबाव, भय और मानसिक प्रताड़ना के बीच ₹23,000 में समझौते की बात तय कर दी गई। आरोप है कि नवजात के पिता से ₹10 के स्टाम्प पेपर पर लिखवाकर पूरे मामले को रफा-दफा करा दिया गया।

यह यक्ष प्रश्न उठता है कि क्या किसी नवजात की मौत की कीमत ₹23,000 है? क्या एक स्टाम्प पेपर पर लिखवा लेने से चिकित्सकीय लापरवाही समाप्त हो जाती है और क्या पुलिस का काम समझौता कराना है या निष्पक्ष कार्रवाई करना? जानकार बताते हैं कि इलाज के दौरान मौत और चिकित्सकीय लापरवाही के आरोपों पर स्वास्थ्य विभाग की स्वतंत्र जांच, मेडिकल बोर्ड की समीक्षा और कानूनी प्रक्रिया अनिवार्य होती है, लेकिन कुशीनगर में मौत के बाद जांच नहीं, बल्कि "सेटिंग" शुरू हो जाती है। स्थानीय लोगों के अनुसार, किलकारी हॉस्पिटल का विवादों से पुराना नाता रहा है और इस पर पहले भी गलत इंजेक्शन, देर से रेफर करने तथा मोटी रकम वसूलने के बाद मरीज की मौत जैसे आरोप लगते रहे हैं। हर बार एक ही फार्मूला दोहराया जाता है: इलाज का भरोसा, हालत बिगड़ने पर रेफर, फिर हंगामा और अंत में "ले-देकर मामला खत्म"। इसी कारण जनपद में चर्चा है कि यह अस्पताल इलाज से ज्यादा मौत बांटने व "मैनेजमेंट" के लिए जाना जाता है।

स्वास्थ्य विभाग की चुप्पी भी संदेह के घेरे में है, क्योंकि जनपद में कई निजी अस्पताल बिना पर्याप्त संसाधनों और विशेषज्ञ चिकित्सकों के संचालित हो रहे हैं। बड़े हादसों के बाद कुछ दिन नोटिस और बयानबाजी होती है, फिर फाइलें ठंडे बस्ते में चली जाती हैं। सबसे बड़ा सवाल स्वास्थ्य विभाग पर उठ रहा है कि यदि किसी अस्पताल पर लगातार गंभीर आरोप लग रहे हैं, तो उसकी उच्चस्तरीय जांच क्यों नहीं हुई? पुलिस की भूमिका पर भी गंभीर प्रश्न उठते हैं कि यदि निष्पक्ष जांच के बजाय समझौते का दबाव बनाया जा रहा है, तो पीड़ित परिवार न्याय की उम्मीद किससे करे। जानकार कहते हैं कि अगर हर मौत के बाद कुछ हजार रुपये देकर मामला दबा दिया जाएगा, तो फिर कानून, जांच और प्रशासन सिर्फ दिखावे के लिए ही रह जाएंगे। आरोप है कि किलकारी हॉस्पिटल "मौत, मोलभाव और मैनेजमेंट" का अड्डा बन चुका है।
    user_संजय चाणक्य
    संजय चाणक्य
    पडरौना, कुशी नगर, उत्तर प्रदेश•
    3 hrs ago
  • नौतन थाना परिसर में बकरा ईद के मद्देनजर शांति समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक के बाद पुलिस ने सूचित किया है कि पर्व के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने और शांति सुनिश्चित करने के लिए पुलिस पूरी तरह से अलर्ट रहेगी।
    1
    नौतन थाना परिसर में बकरा ईद के मद्देनजर शांति समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक के बाद पुलिस ने सूचित किया है कि पर्व के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने और शांति सुनिश्चित करने के लिए पुलिस पूरी तरह से अलर्ट रहेगी।
    user_Triloki rai
    Triloki rai
    TV News Anchor बेतिया, पश्चिम चंपारण, बिहार•
    3 hrs ago
  • एक नए एप्लिकेशन का प्रचार किया जा रहा है जो उपयोगकर्ताओं को प्रतिदिन ₹400 से ₹500 कमाने का अवसर प्रदान करता है। इस अवसर का लाभ उठाने के लिए, इच्छुक उपयोगकर्ताओं को कमेंट बॉक्स में दिए गए लिंक से एप्लिकेशन डाउनलोड करना होगा। एप्लिकेशन डाउनलोड करने पर ₹51 का मुफ्त बोनस मिलेगा, और दोस्तों को रेफर करने पर ₹200 का अतिरिक्त मुफ्त रेफरल बोनस प्राप्त होगा। उपयोगकर्ताओं को ऐप डाउनलोड करके गेम खेलने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
    1
    एक नए एप्लिकेशन का प्रचार किया जा रहा है जो उपयोगकर्ताओं को प्रतिदिन ₹400 से ₹500 कमाने का अवसर प्रदान करता है। इस अवसर का लाभ उठाने के लिए, इच्छुक उपयोगकर्ताओं को कमेंट बॉक्स में दिए गए लिंक से एप्लिकेशन डाउनलोड करना होगा। एप्लिकेशन डाउनलोड करने पर ₹51 का मुफ्त बोनस मिलेगा, और दोस्तों को रेफर करने पर ₹200 का अतिरिक्त मुफ्त रेफरल बोनस प्राप्त होगा। उपयोगकर्ताओं को ऐप डाउनलोड करके गेम खेलने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
    user_Aj
    Aj
    Classified ads newspaper publisher पडरौना, कुशी नगर, उत्तर प्रदेश•
    3 hrs ago
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जहाँ एक ओर 'ईंधन बचाओ' की अपील की है, वहीं बिहार में इस अपील की हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। भाजपा के बिहार प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने बीते कल बेतिया में लगभग 1 दर्जन गाड़ियों के काफिले के साथ पहुँचकर प्रधानमंत्री की इस अपील की खुलेआम धज्जियाँ उड़ाईं। इस घटना पर टिप्पणी की गई कि लोग भले ही तस्वीरें खिंचवा रहे हों, लेकिन यह हकीकत नहीं छिपती कि भाजपा के बिहार प्रदेश अध्यक्ष ने स्वयं मोदी की ईंधन बचाओ अपील को खुलेआम हवा में उड़ा दिया।
    1
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जहाँ एक ओर 'ईंधन बचाओ' की अपील की है, वहीं बिहार में इस अपील की हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। भाजपा के बिहार प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने बीते कल बेतिया में लगभग 1 दर्जन गाड़ियों के काफिले के साथ पहुँचकर प्रधानमंत्री की इस अपील की खुलेआम धज्जियाँ उड़ाईं। इस घटना पर टिप्पणी की गई कि लोग भले ही तस्वीरें खिंचवा रहे हों, लेकिन यह हकीकत नहीं छिपती कि भाजपा के बिहार प्रदेश अध्यक्ष ने स्वयं मोदी की ईंधन बचाओ अपील को खुलेआम हवा में उड़ा दिया।
    user_BN Chitranjan
    BN Chitranjan
    बैरिया, पश्चिम चंपारण, बिहार•
    14 hrs ago
View latest news on Shuru App
Download_Android
  • Terms & Conditions
  • Career
  • Privacy Policy
  • Blogs
Shuru, a product of Close App Private Limited.