*खबर का जोरदार असर*जबरदस्त नारेबाजी बौखलाया केंद्र प्रभारी स्वयं बयान में कबूल रहा कि मैं फोर्थ क्लास का हूं कर्मचारी *वायरल वीडियो में होश उड़ा देने वाला बयान* आखिर फोर्थ क्लास कर्मचारी को कैसे बना दिया गया केंद्र प्रभारी *🚨 मेगा ब्रेकिंग* *उत्तर प्रदेश कोऑपरेटिव फेडरेशन लि. (PCF) अम्बेडकर नगर में भ्रष्टाचार का संगठित खेल?* जनपद अम्बेडकर नगर में PCF के जनपदीय कार्यालय से सामने आई जानकारी ने पूरे सहकारिता तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक सहयोगी/चौकीदार विनय पटेल द्वारा मीडिया से कथित बातचीत में किए गए दावों ने उर्वरक वितरण प्रणाली की पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। बातचीत का वीडियो रिकॉर्ड होने का दावा किया जा रहा है। *🎥 कैमरे में कैद कथित दावे* मीडिया से बातचीत के दौरान निम्न गंभीर आरोप सामने आए: KSK ( किसान सेवा केन्द्र )को उर्वरक उपलब्ध कराने और प्रभार पाने के लिए “मोटी रकम” देने की बात। खाद लाने पर “बाबू से लेकर अधिकारी तक खिलाना-पिलाना पड़ता है” जैसा कथन। कार्यालय में अपने प्रभाव और रिश्तेदारों की मौजूदगी का दावा। दावे में बाबू से लेकर स्टोर कीपर तक अपने होने का दावा किया गया। “खबर चलने से कुछ नहीं होगा” जैसा बयान। यूरिया निर्धारित दर से 300 रुपये तक की कीमत पर बेचने का संकेत। हालांकि यह भी कहा गया कि बयान नशे की अवस्था में दिया गया, लेकिन यदि वीडियो साक्ष्य उपलब्ध है तो जांच आवश्यक हो जाती है। ⚖️ संभावित कानूनी प्रश्न यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो निम्न बिंदुओं पर जांच बनती है: क्या किसी सहयोगी/चपरासी को वित्तीय या प्रभार संबंधी अधिकार दिए गए? यदि हाँ, किस आदेश से? उर्वरक की बिक्री दर क्या अधिकृत थी, और वास्तविक बिक्री दर क्या रही? क्या कार्यालय में हितों का टकराव (conflict of interest) या पारिवारिक प्रभाव है? कितने कर्मचारी कई वर्षों से एक ही स्थान पर पदस्थ हैं? क्या उर्वरक नियंत्रण आदेश/आवश्यक वस्तु अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन हुआ? *📞 प्रशासन कीप्रतिक्रिया?* मीडिया द्वारा जिला प्रबंधक PCF से संपर्क का प्रयास किया गया, किंतु फोन रिसीव नहीं किया गया। आधिकारिक प्रतिक्रिया न आने से संदेह और गहरा गया है। निष्पक्ष जांच और दस्तावेजी सत्यापन के बिना किसी निष्कर्ष पर पहुँचना उचित नहीं, परंतु आरोपों की गंभीरता को नज़रअंदाज़ भी नहीं किया जा सकता। *❓ अब सबसे बड़े सवाल* क्या किसानों को निर्धारित दर पर उर्वरक मिल रहा है? क्या प्रभार और स्टॉक आवंटन में पारदर्शिता है? क्या उच्च अधिकारी स्वतंत्र जांच कराएंगे? 📢 यह मामला केवल एक कार्यालय का नहीं, बल्कि किसानों के विश्वास और सहकारिता व्यवस्था की साख का है। यदि आरोपों में सत्यता है तो यह व्यापक प्रशासनिक जवाबदेही का विषय बनेगा। भ्रष्टाचार की परतें खुल रही हैं… सत्य सामने आने तक जुड़े रहे आप मेरे साथ । *शेष खबर अगले अंक में...*
*खबर का जोरदार असर*जबरदस्त नारेबाजी बौखलाया केंद्र प्रभारी स्वयं बयान में कबूल रहा कि मैं फोर्थ क्लास का हूं कर्मचारी *वायरल वीडियो में होश उड़ा देने वाला बयान* आखिर फोर्थ क्लास कर्मचारी को कैसे बना दिया गया केंद्र प्रभारी *🚨 मेगा ब्रेकिंग* *उत्तर प्रदेश कोऑपरेटिव फेडरेशन लि. (PCF) अम्बेडकर नगर में भ्रष्टाचार का संगठित खेल?* जनपद अम्बेडकर नगर में PCF के जनपदीय कार्यालय से सामने आई जानकारी ने पूरे सहकारिता तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक सहयोगी/चौकीदार विनय पटेल द्वारा मीडिया से कथित बातचीत में किए गए दावों ने उर्वरक वितरण प्रणाली की पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। बातचीत का वीडियो रिकॉर्ड होने का दावा किया जा रहा है। *🎥 कैमरे में कैद कथित दावे* मीडिया से बातचीत के दौरान निम्न गंभीर आरोप सामने आए: KSK ( किसान सेवा केन्द्र )को उर्वरक उपलब्ध कराने और प्रभार पाने के लिए “मोटी रकम” देने की बात। खाद लाने पर “बाबू से लेकर अधिकारी तक खिलाना-पिलाना पड़ता है” जैसा कथन। कार्यालय में अपने प्रभाव और रिश्तेदारों की मौजूदगी का दावा। दावे में बाबू से लेकर स्टोर कीपर तक अपने होने का दावा किया गया। “खबर चलने से कुछ नहीं होगा” जैसा बयान। यूरिया निर्धारित दर से 300 रुपये तक की कीमत पर बेचने का संकेत। हालांकि यह भी कहा गया कि बयान नशे की अवस्था में दिया गया, लेकिन यदि वीडियो साक्ष्य उपलब्ध है तो जांच आवश्यक हो जाती है। ⚖️ संभावित कानूनी प्रश्न यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो निम्न बिंदुओं पर जांच बनती है: क्या किसी सहयोगी/चपरासी को वित्तीय या प्रभार संबंधी अधिकार दिए गए? यदि हाँ, किस आदेश से? उर्वरक की बिक्री दर क्या अधिकृत थी, और वास्तविक बिक्री दर क्या रही? क्या कार्यालय में हितों का टकराव (conflict of interest) या पारिवारिक प्रभाव है? कितने कर्मचारी कई वर्षों से एक ही स्थान पर पदस्थ हैं? क्या उर्वरक नियंत्रण आदेश/आवश्यक वस्तु अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन हुआ? *📞 प्रशासन कीप्रतिक्रिया?* मीडिया द्वारा जिला प्रबंधक PCF से संपर्क का प्रयास किया गया, किंतु फोन रिसीव नहीं किया गया। आधिकारिक प्रतिक्रिया न आने से संदेह और गहरा गया है। निष्पक्ष जांच और दस्तावेजी सत्यापन के बिना किसी निष्कर्ष पर पहुँचना उचित नहीं, परंतु आरोपों की गंभीरता को नज़रअंदाज़ भी नहीं किया जा सकता। *❓ अब सबसे बड़े सवाल* क्या किसानों को निर्धारित दर पर उर्वरक मिल रहा है? क्या प्रभार और स्टॉक आवंटन में पारदर्शिता है? क्या उच्च अधिकारी स्वतंत्र जांच कराएंगे? 📢 यह मामला केवल एक कार्यालय का नहीं, बल्कि किसानों के विश्वास और सहकारिता व्यवस्था की साख का है। यदि आरोपों में सत्यता है तो यह व्यापक प्रशासनिक जवाबदेही का विषय बनेगा। भ्रष्टाचार की परतें खुल रही हैं… सत्य सामने आने तक जुड़े रहे आप मेरे साथ । *शेष खबर अगले अंक में...*
- *खबर का जोरदार असर*जबरदस्त नारेबाजी बौखलाया केंद्र प्रभारी स्वयं बयान में कबूल रहा कि मैं फोर्थ क्लास का हूं कर्मचारी *वायरल वीडियो में होश उड़ा देने वाला बयान* आखिर फोर्थ क्लास कर्मचारी को कैसे बना दिया गया केंद्र प्रभारी *🚨 मेगा ब्रेकिंग* *उत्तर प्रदेश कोऑपरेटिव फेडरेशन लि. (PCF) अम्बेडकर नगर में भ्रष्टाचार का संगठित खेल?* जनपद अम्बेडकर नगर में PCF के जनपदीय कार्यालय से सामने आई जानकारी ने पूरे सहकारिता तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक सहयोगी/चौकीदार विनय पटेल द्वारा मीडिया से कथित बातचीत में किए गए दावों ने उर्वरक वितरण प्रणाली की पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। बातचीत का वीडियो रिकॉर्ड होने का दावा किया जा रहा है। *🎥 कैमरे में कैद कथित दावे* मीडिया से बातचीत के दौरान निम्न गंभीर आरोप सामने आए: KSK ( किसान सेवा केन्द्र )को उर्वरक उपलब्ध कराने और प्रभार पाने के लिए “मोटी रकम” देने की बात। खाद लाने पर “बाबू से लेकर अधिकारी तक खिलाना-पिलाना पड़ता है” जैसा कथन। कार्यालय में अपने प्रभाव और रिश्तेदारों की मौजूदगी का दावा। दावे में बाबू से लेकर स्टोर कीपर तक अपने होने का दावा किया गया। “खबर चलने से कुछ नहीं होगा” जैसा बयान। यूरिया निर्धारित दर से 300 रुपये तक की कीमत पर बेचने का संकेत। हालांकि यह भी कहा गया कि बयान नशे की अवस्था में दिया गया, लेकिन यदि वीडियो साक्ष्य उपलब्ध है तो जांच आवश्यक हो जाती है। ⚖️ संभावित कानूनी प्रश्न यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो निम्न बिंदुओं पर जांच बनती है: क्या किसी सहयोगी/चपरासी को वित्तीय या प्रभार संबंधी अधिकार दिए गए? यदि हाँ, किस आदेश से? उर्वरक की बिक्री दर क्या अधिकृत थी, और वास्तविक बिक्री दर क्या रही? क्या कार्यालय में हितों का टकराव (conflict of interest) या पारिवारिक प्रभाव है? कितने कर्मचारी कई वर्षों से एक ही स्थान पर पदस्थ हैं? क्या उर्वरक नियंत्रण आदेश/आवश्यक वस्तु अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन हुआ? *📞 प्रशासन कीप्रतिक्रिया?* मीडिया द्वारा जिला प्रबंधक PCF से संपर्क का प्रयास किया गया, किंतु फोन रिसीव नहीं किया गया। आधिकारिक प्रतिक्रिया न आने से संदेह और गहरा गया है। निष्पक्ष जांच और दस्तावेजी सत्यापन के बिना किसी निष्कर्ष पर पहुँचना उचित नहीं, परंतु आरोपों की गंभीरता को नज़रअंदाज़ भी नहीं किया जा सकता। *❓ अब सबसे बड़े सवाल* क्या किसानों को निर्धारित दर पर उर्वरक मिल रहा है? क्या प्रभार और स्टॉक आवंटन में पारदर्शिता है? क्या उच्च अधिकारी स्वतंत्र जांच कराएंगे? 📢 यह मामला केवल एक कार्यालय का नहीं, बल्कि किसानों के विश्वास और सहकारिता व्यवस्था की साख का है। यदि आरोपों में सत्यता है तो यह व्यापक प्रशासनिक जवाबदेही का विषय बनेगा। भ्रष्टाचार की परतें खुल रही हैं… सत्य सामने आने तक जुड़े रहे आप मेरे साथ । *शेष खबर अगले अंक में...*1
- Post by Deepak.kumar1
- भागवत कथा...सियासी हलके में खलबली - दोनों डिप्टी सीएम का आगमन - कथा को न जोड़े राजनीति से... अवधेश द्विवेदी Ambedkarnagar_news1
- शिक्षा विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार का मुद्दा पंहुचा सदन तक1
- *कार और ऑल्टो कार में हुई भीषण भिड़ंत , ट्रैक्टर के उड़े परखच्चे कार चालक हुआ फरार* *कार में मौजूद दारू की बोतले नशे में कार सवार* *अंबेडकर नगर* जिले के सम्मनपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत बरियावन बाजार पट्टी रोड पर हुआ भीषण सड़क हादसा ट्रैक्टर और कार में हुई जोरदार टक्कर कार सवार लोग हुए फरार कार में मौजूद दारू की बोतले, स्थानीय लोगों ने कार को बीच रोड से हताकर किया किनारे। बड़ी घटना होते-होते बची। *ब्यूरो रिपोर्ट वैभव सिंह*✍️1
- *फार्मा शिष्ट चला रहे ओपीडी, बिन डॉक्टर–बिन अधीक्षक चल रहा पीएचसी तारखुर्द — आखिर किधर है सीएमओ अम्बेडकरनगर का ध्यान* अकबरपुर (अम्बेडकरनगर)। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मीरानपुर अकबरपुर के अंतर्गत आने वाले तारखुर्द प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की बदहाली अब किसी से छिपी नहीं है। यहां न तो नियमित अधीक्षक की तैनाती है और न ही चिकित्सक की, इसके बावजूद स्वास्थ्य केंद्र का संचालन किया जा रहा है। स्थानीय लोगों और स्वास्थ्यकर्मियों के अनुसार वर्तमान में फार्मा शिष्ट द्वारा ओपीडी संचालित की जा रही है, जो स्वास्थ्य नियमों और मापदंडों के सीधे उल्लंघन की श्रेणी में आता है। बिना डॉक्टर के मरीजों को देखना न सिर्फ अव्यवस्था का प्रतीक है, बल्कि आम जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ भी है। *स्वास्थ्य केंद्र परिसर की हालत बेहद दयनीय बताई जा रही है। चारों तरफ कूड़े का अंबार लगा है। कर्मचारियों का कहना है कि स्थापना के बाद से अब तक यहां कोई सफाई कर्मचारी तैनात नहीं किया गया। दूर-दराज से आने वाले मरीजों और उनके तीमारदारों के लिए शौचालय तक की समुचित व्यवस्था नहीं है, जिससे लोगों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है* इस बदहाल व्यवस्था का नतीजा यह है कि तारखुर्द और आसपास के इलाकों में छोटे-छोटे बिना पंजीकरण वाले मेडिकल स्टोर और अवैध क्लीनिकों की भरमार हो गई है। झोलाछाप और अप्रशिक्षित लोग इलाज कर रहे हैं, जो मेडिकल एक्ट का खुला उल्लंघन है। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग ने अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है,स्थानीय लोगों का आरोप है कि पूर्व में हुई कई घटनाओं के बावजूद मुख्य चिकित्सा अधिकारी अम्बेडकरनगर की ओर से आंखें मूंद ली गई हैं। सवाल यह है कि जब नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, तो जिम्मेदार अधिकारी आखिर कब संज्ञान लेंगे,क्षेत्रवासियों ने मांग की है कि पीएचसी तारखुर्द में तत्काल अधीक्षक व डॉक्टर की नियुक्ति की जाए, सफाई व्यवस्था बहाल की जाए और मेडिकल एक्ट के तहत अवैध क्लीनिकों व झोलाछापों पर सख्त कार्रवाई हो, ताकि जनता को सुरक्षित और भरोसेमंद स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।2
- करोड़ो अरबो रुपये का हों गया रात्रि की आड़ मे खनन भ्रष्ट खनन अधिकारी की कृपा से जिलाधिकारी के भी संज्ञान में है मामला फिर भी नहीं रुक रहा थम रहा अवैध खनन नियमों और मानकों को ताक पर रखकर कराया जा रहा अवैध खनन वायरल वीडियो बयान कर रही सारी हकीकत खोल रही सारी पोल #suyash #suyashkumarmishra #suyashmishra #suyashkumar #viral #video #reels #india #UttarPradesh #AmbedkarNagar #akbarpur #YogiAdityanath #MYogiAdityanath #pmo #PMOIndia #अकबरपुर #khanan #mafiya1
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