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“AC बंद… सिस्टम ठंडा! जबलपुर मेडिकल कॉलेज के बच्चा वार्ड में गर्मी से जूझते मासूम” क्लोज-अप शॉट—एक मां पसीने से तर-बतर है और हाथ में पकड़ी हुई मेडिकल फाइल से अपने बेसुध बच्चे को हवा कर रही है। पीछे ICU की मशीनें दिख रही हैं। "बाहर पारा 44 डिग्री के पार है और अंदर... अंदर सिस्टम की संवेदनहीनता अपने चरम पर है। ये नजारा किसी पिछड़े गांव के क्लिनिक का नहीं, बल्कि जबलपुर के नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज का है।"
Deepak Vishawakarma
“AC बंद… सिस्टम ठंडा! जबलपुर मेडिकल कॉलेज के बच्चा वार्ड में गर्मी से जूझते मासूम” क्लोज-अप शॉट—एक मां पसीने से तर-बतर है और हाथ में पकड़ी हुई मेडिकल फाइल से अपने बेसुध बच्चे को हवा कर रही है। पीछे ICU की मशीनें दिख रही हैं। "बाहर पारा 44 डिग्री के पार है और अंदर... अंदर सिस्टम की संवेदनहीनता अपने चरम पर है। ये नजारा किसी पिछड़े गांव के क्लिनिक का नहीं, बल्कि जबलपुर के नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज का है।"
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- क्लोज-अप शॉट—एक मां पसीने से तर-बतर है और हाथ में पकड़ी हुई मेडिकल फाइल से अपने बेसुध बच्चे को हवा कर रही है। पीछे ICU की मशीनें दिख रही हैं। "बाहर पारा 44 डिग्री के पार है और अंदर... अंदर सिस्टम की संवेदनहीनता अपने चरम पर है। ये नजारा किसी पिछड़े गांव के क्लिनिक का नहीं, बल्कि जबलपुर के नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज का है।"1
- के. के. मुहम्मद ने मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में स्थित लगभग 1200 साल पुराने बटेश्वर मंदिर समूह को फिर से जीवित करने का ऐतिहासिक काम किया। कभी 200 से अधिक मंदिरों का यह परिसर समय, भूकंप और उपेक्षा के कारण पूरी तरह खंडहर बनकर पत्थरों के ढेर में बदल गया था। 2005 के आसपास जब के. के. मुहम्मद ने इस स्थल का अध्ययन किया, तो उन्होंने इसे एक अधूरी विरासत के रूप में देखा और इसे पुनर्निर्मित करने का संकल्प लिया। सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि हजारों बिखरे पत्थरों में से हर एक को पहचानकर सही स्थान पर जोड़ना था, जैसे एक विशाल जिगसॉ पज़ल। इलाका चंबल क्षेत्र का था, जहां डाकुओं का प्रभाव था, लेकिन उन्होंने स्थानीय लोगों और डाकुओं से संवाद कर संरक्षण का माहौल बनाया। लगभग 7 वर्षों की मेहनत के बाद 80 से अधिक मंदिरों को सफलतापूर्वक पुनर्निर्मित किया गया। इस ऐतिहासिक कार्य के लिए उन्हें पद्म श्री सम्मान मिला और आज बटेश्वर मंदिर भारतीय धरोहर संरक्षण का एक प्रेरणादायक उदाहरण बन चुका है। #IndianHeritage #ArchaeologyIndia #RestorationProject #CulturalHeritage #PadhmShriAward #JagranJosh1
- दिनांक 27 अप्रैल 2026 को जबलपुर का मौसम बदल गया अचानक बहुत जोरों की आंधी के साथ बहुत तेज हवा चलने लगी जिस राह में चल रहे राहगीरों का भी परेशानी का सामना करना पड़ा1
- सिद्धि खुर्द से जाने वाले रास्ते पर शिवपहरी ,में सिद्धि खुर्द की बड़र हर्रहवा में वाले रास्ते भाढी में जाने वाले शासन विधान में जाने वाले रास्ते1
- बड़ी खबर | इंसानियत पर सवाल 📝 खबर विस्तार से: मध्यप्रदेश के कटनी जिला अस्पताल से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वायरल वीडियो के अनुसार, एक घायल मरीज दर्द से कराहता रहा, लेकिन मौके पर मौजूद कर्मचारियों ने तुरंत इलाज देने के बजाय परिजनों को ही 108 एंबुलेंस धुलने की बात कह दी। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में मौजूद स्टाफ ने जिम्मेदारी निभाने के बजाय लापरवाही दिखाई, जिससे मरीज की हालत और बिगड़ती गई। यह घटना न सिर्फ सिस्टम की कमजोरी को उजागर करती है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं पर भी सवाल खड़े करती है। ⚠️ बड़ा सवाल: क्या सरकारी अस्पतालों में अब प्राथमिक उपचार भी तुरंत मिलना मुश्किल हो गया है? क्या जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई होगी या फिर मामला दबा दिया जाएगा? वीडियो वायरल होने के बाद अब प्रशासन की भूमिका पर सभी की निगाहें टिकी हैं। उम्मीद की जा रही है कि दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होगी�। #mpn1
- बिगड़ते मौसम के बीच खेतों में पड़ा गेहूं, किसानों की बढ़ी चिंता... कटनी। जिले में इन दिनों समर्थन मूल्य पर उपज विक्रय के लिए स्लॉट बुकिंग नहीं हो पाने से किसानों की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है। हालात यह हैं कि बड़ी संख्या में किसानों की स्लॉट बुकिंग नहीं हो पा रही है, जिससे उनकी गेहूं की फसल खेतों और खलिहानों में पड़ी हुई है और उपार्जन प्रक्रिया बाधित हो रही है। किसानों का कहना है कि उन्होंने समय पर पंजीयन कराया था, लेकिन स्लॉट बुकिंग की प्रक्रिया सही तरीके से नहीं चलने के कारण उन्हें तारीख नहीं मिल पा रही है। इस वजह से वे अपनी उपज मंडी या उपार्जन केंद्रों तक नहीं पहुंचा पा रहे हैं। वहीं दूसरी ओर मौसम लगातार खराब हो रहा है, जिससे खुले में रखी फसल खराब होने का खतरा भी बढ़ गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में कई किसानों ने बताया कि गेहूं कटकर तैयार है, लेकिन स्लॉट न मिलने के कारण वह खेतों में ही पड़ा है। अचानक बारिश या आंधी आने की स्थिति में फसल को भारी नुकसान हो सकता है। ऐसे में किसानों के सामने आर्थिक संकट की स्थिति बनती जा रही है। किसानों ने प्रशासन से जल्द से जल्द स्लॉट बुकिंग की समस्या का समाधान करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया तो उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। किसानों ने जिला प्रशासन, विशेष रूप से कलेक्टर से निवेदन किया है कि उपार्जन व्यवस्था को सुचारू बनाते हुए अतिरिक्त स्लॉट उपलब्ध कराए जाएं, ताकि वे अपनी उपज सुरक्षित तरीके से बेच सकें।1
- Post by भगवत सिंह लोधी पत्रकार1
- आज सुबह 11 बजे कटनी के मिशन चौक फ्लाईओवर पर एक इलेक्ट्रिक स्कूटी धू-धू कर जल उठी। कैसे हुआ: चलती गाड़ी में अचानक धुआं उठा और देखते ही देखते भीषण आग लग गई। राहत की बात: स्कूटी सवार छात्राएं समय रहते नीचे उतर गईं, जिससे बड़ी जनहानि टल गई। नतीजा: बीच सड़क पर आग लगने से कुछ देर ट्रैफिक बाधित रहा; स्कूटी पूरी तरह जलकर खाक।1