सफलता हमेशा हमेशा के लिए नहीं रहती और असफलता भी जिंदगी का अंत नहीं होती Success is not permanent, but failure is not final. The courage to continue is what really matters. इसका सरल अर्थ यह है कि सफलता हमेशा हमेशा के लिए नहीं रहती और असफलता भी जिंदगी का अंत नहीं होती। जीवन में उतार–चढ़ाव आते रहते हैं। कभी हम जीतते हैं, कभी हारते हैं। लेकिन असली फर्क उस इंसान में होता है जो हारने के बाद भी हिम्मत नहीं छोड़ता और आगे बढ़ता रहता है। जब कोई व्यक्ति सफल होता है तो उसे यह नहीं सोचना चाहिए कि अब सब कुछ हासिल हो गया, क्योंकि समय के साथ परिस्थितियां बदल सकती हैं। उसी तरह अगर किसी को असफलता मिलती है तो उसे यह नहीं मान लेना चाहिए कि अब सब खत्म हो गया। असफलता अक्सर हमें कुछ नया सिखाती है और आगे बेहतर करने का मौका देती है। इतिहास और वर्तमान में ऐसे कई उदाहरण मिलते हैं जहां लोगों ने कई बार असफल होने के बाद भी हिम्मत नहीं हारी और अंत में बड़ी सफलता हासिल की। उनकी सबसे बड़ी ताकत यही थी कि उन्होंने कठिन समय में भी प्रयास करना नहीं छोड़ा। इसलिए जीवन का असली मंत्र यही है कि सफलता आने पर विनम्र रहें और असफलता आने पर धैर्य रखें। लगातार प्रयास करने का साहस ही इंसान को आगे बढ़ाता है और अंततः वही उसे उसकी मंज़िल तक पहुंचाता है। संक्षेप में — सफलता और असफलता दोनों अस्थायी हैं, लेकिन आगे बढ़ते रहने का साहस ही असली जीत है। 💪
सफलता हमेशा हमेशा के लिए नहीं रहती और असफलता भी जिंदगी का अंत नहीं होती Success is not permanent, but failure is not final. The courage to continue is what really matters. इसका सरल अर्थ यह है कि सफलता हमेशा हमेशा के लिए नहीं रहती और असफलता भी जिंदगी का अंत नहीं होती। जीवन में उतार–चढ़ाव आते रहते हैं। कभी हम जीतते हैं, कभी हारते हैं। लेकिन असली फर्क उस इंसान में होता है जो हारने के बाद भी हिम्मत नहीं छोड़ता और आगे बढ़ता रहता है। जब कोई व्यक्ति सफल होता है तो उसे यह नहीं सोचना चाहिए कि अब सब कुछ हासिल हो गया, क्योंकि समय के साथ परिस्थितियां बदल सकती हैं। उसी तरह अगर किसी को असफलता मिलती है तो उसे यह नहीं मान लेना चाहिए कि अब सब खत्म हो गया। असफलता अक्सर हमें कुछ नया सिखाती है और आगे बेहतर करने का मौका देती है। इतिहास और वर्तमान में ऐसे कई उदाहरण मिलते हैं जहां लोगों ने कई बार असफल होने के बाद भी हिम्मत नहीं हारी और अंत में बड़ी सफलता हासिल की। उनकी सबसे बड़ी ताकत यही थी कि उन्होंने कठिन समय में भी प्रयास करना नहीं छोड़ा। इसलिए जीवन का असली मंत्र यही है कि सफलता आने पर विनम्र रहें और असफलता आने पर धैर्य रखें। लगातार प्रयास करने का साहस ही इंसान को आगे बढ़ाता है और अंततः वही उसे उसकी मंज़िल तक पहुंचाता है। संक्षेप में — सफलता और असफलता दोनों अस्थायी हैं, लेकिन आगे बढ़ते रहने का साहस ही असली जीत है। 💪
- Success is not permanent, but failure is not final. The courage to continue is what really matters. इसका सरल अर्थ यह है कि सफलता हमेशा हमेशा के लिए नहीं रहती और असफलता भी जिंदगी का अंत नहीं होती। जीवन में उतार–चढ़ाव आते रहते हैं। कभी हम जीतते हैं, कभी हारते हैं। लेकिन असली फर्क उस इंसान में होता है जो हारने के बाद भी हिम्मत नहीं छोड़ता और आगे बढ़ता रहता है। जब कोई व्यक्ति सफल होता है तो उसे यह नहीं सोचना चाहिए कि अब सब कुछ हासिल हो गया, क्योंकि समय के साथ परिस्थितियां बदल सकती हैं। उसी तरह अगर किसी को असफलता मिलती है तो उसे यह नहीं मान लेना चाहिए कि अब सब खत्म हो गया। असफलता अक्सर हमें कुछ नया सिखाती है और आगे बेहतर करने का मौका देती है। इतिहास और वर्तमान में ऐसे कई उदाहरण मिलते हैं जहां लोगों ने कई बार असफल होने के बाद भी हिम्मत नहीं हारी और अंत में बड़ी सफलता हासिल की। उनकी सबसे बड़ी ताकत यही थी कि उन्होंने कठिन समय में भी प्रयास करना नहीं छोड़ा। इसलिए जीवन का असली मंत्र यही है कि सफलता आने पर विनम्र रहें और असफलता आने पर धैर्य रखें। लगातार प्रयास करने का साहस ही इंसान को आगे बढ़ाता है और अंततः वही उसे उसकी मंज़िल तक पहुंचाता है। संक्षेप में — सफलता और असफलता दोनों अस्थायी हैं, लेकिन आगे बढ़ते रहने का साहस ही असली जीत है। 💪1
- वीरांगनाएँ जलाएगी जागृति का अलख गरुड़ में ब्लॉक लेवल वीरांगना महिला जन संगठन का गठन किया गया। विकास खंड के चार क्लस्टरों के 110 महिला पंचायत प्रतिनिधियों को वीरांगना महिला संगठन का सदस्य चुना गया। सदस्यों और पदाधिकारियों में खास उत्साह देखा गया। द हंगर प्रोजेक्ट दिल्ली की जिला संयोजक बागेश्वर बसंती कपकोटी ने जानकारी देते हुए कहा कि वीरांगना महिला जन संगठन नाम से प्रदेश भर में संगठन निर्माण का अभियान चल रहा है।1
- अल्मोड़ा। जनपद में रविवार को लोकपर्व फूलदेई उत्साह और पारंपरिक उल्लास के साथ मनाया गया। उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में चैत्र माह की संक्रांति के अवसर पर मनाया जाने वाला यह विशेष लोकपर्व प्रकृति और संस्कृति के अनूठे संगम का प्रतीक माना जाता है। बच्चों के बीच इसकी विशेष लोकप्रियता के कारण इसे बालपर्व भी कहा जाता है। फूलों की खुशबू से महकता यह पर्व चैत्र माह के पहले दिन मनाया जाता है, जो प्रायः मार्च के मध्य में पड़ता है। इस वर्ष फूलदेई का पर्व रविवार, 15 मार्च को मनाया गया। इतिहासकारों के अनुसार यह परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है और इसका संबंध उत्तराखंड के ग्रामीण समाज में सामूहिकता, प्रकृति के प्रति सम्मान और आपसी सद्भाव से जुड़ा है। इस दिन छोटे बच्चे सुबह जल्दी उठकर बगीचों और जंगलों से रंग-बिरंगे फूल तोड़कर लाते हैं और उन्हें गांव व कस्बों के घरों की दहलीज पर सजाते हैं। यह परंपरा घर-परिवार की सुख-समृद्धि और मंगलकामना से जुड़ी मानी जाती है। बच्चे घर-घर जाकर 'फूलदेई, छम्मा देई, दैणी द्वार भर भकार' गाकर आशीर्वाद मांगते हैं, जिसका अर्थ है कि घर में सुख-समृद्धि बनी रहे। बदले में उन्हें चावल, गुड़, पैसे या अन्य उपहार दिए जाते हैं। रात्रि में बच्चों द्वारा एकत्रित चावल और गुड़ से पारंपरिक पकवान ‘सेई’ बनाया जाता है। फूलदेई पर्व की जड़ें उत्तराखंड की कृषि परंपराओं से भी जुड़ी हुई हैं। यह त्योहार वसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक माना जाता है, जब पेड़-पौधे नई कोंपलों और फूलों से लद जाते हैं। घरों की चौखट पर फूल सजाने का अर्थ प्रकृति का स्वागत करना और परिवार की खुशहाली की कामना करना होता है। रविवार सुबह ठंड के मौसम के साथ हल्की बारिश के छींटे भी पड़े। इसके बावजूद अल्मोड़ा में फूलदेई के दिन बच्चों में खासा उत्साह देखने को मिला। बच्चे एक घर से दूसरे घर जाकर दहलीज पर फूल डालते हुए 'फूलदेई, छम्मा देई' गाते नजर आए और पूरे क्षेत्र में पर्व का उल्लास दिखाई दिया।1
- हिन्दू नव वर्ष और चैत्र मास आगमन के अवसर पर नगर पालिका चिलियानौला की ओर से रविवार की देर शाम यहां चौमूथान मंदिर परिसर के निर्माणाधीन पार्क में झोड़ा गायन का आयोजन हुआ। पारम्परिक संस्कृति को बचाने और युवा पीढ़ी को जागरूक करने के उद्देश्य से झोड़ा गायन का आयोजन हुआ, जिसमें क्षेत्र की महिलाओं ने बड़ी संख्या में भागीदारी की। पालिकाध्यक्ष अरुण रावत ने कहा कि भविष्य में इस आयोजन को वृहद रूप दिया जाएगा। सभासद सुंदर कुवार्बी ने बताया कि शार्ट नोटिस में महिलाएं पहुंच गई यह प्राचीन परम्परा को लेकर उनके उत्साह को दर्शाता है। यहां व्यापार मंडल अध्यक्ष कमलेश बोरा, ललित बिष्ट, हरीश सिंह देव, धर्मेंद्र सिंह अधिकारी सहित पालिका कि महिलाओं ने सहयोग किया।1
- Post by Peshkar1
- विडियो देखें- विदाई ऐसी कि पत्थर दिल भी रो पड़े! हरीश राणा का ये वीडियो कर देगा आंखें नम। हरीश राणा का यह अंतिम भावुक विडियो सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है । 19 साल का एक नौजवान बी-टेक करने के लिए चंडीगढ़ गया था। बहन से बात कर रहा था। और वही चौथी मंजिल से नीचे गिर गया। और तब से ही बीमार और कोमा में हैं। माता -पिता जो कि गाजियाबाद में रहते हैं। लगातार बीमार बेटे के इलाज के लिए धन-दौलत पुरखों की जमीन सब चला गया। लेकिन बेटे का दर्द देखा नहीं जा रहा था सुप्रीम कोर्ट से इच्छा मृत्यु मांगी उसके बाद एम्स में एडमिट करने के लिए कहा गया। ब्रह्मकुमारी केंद्र की वरिष्ठ लवली दीदी जिसमें वो कहती नजर आ रही है सबको माफ करते हुए, सबसे माफी मांगते हुए सो जाओ। जिसने भी यह विडियो देखी और सुनी बहुत ही भावुक हो गया।1
- रचनात्मक शिक्षक मंडल की पहल पर शिक्षकों एवं बच्चों की तीन दिवसीय हिंदी भाषा शिक्षण की कार्यशाला आज ज्योतिबा फुले सावित्रीबाई फुले सायंकालीन स्कूल सांवल्दे(पश्चिम) में शुरू हो गई. कार्यशाला की शुरुआत बच्चों द्वारा लोक पर्व फूलदेई मना कर हुई.कार्यशाला के पहले सत्र में आज शिक्षकों और विद्यार्थियों से उनके पढ़ने लिखने के अनुभवों पर बातचीत की गई. कार्यशाला में बतौर विषय विशेषज्ञ एस सी ई आर टी में रहे वरिष्ठ प्रवक्ता मदन पांडे जी रहे. बातचीत खासकर भाषा सीखने के उनके अनुभवों पर केंद्रित रही.प्रतिभागियों ने बताया कि बचपन में भाषा सीखने में उन्हें अलग अलग लोगों और कारणों से मदद मिली.कुछ मामलों में परिवारजनों ने भूमिका निभाई कुछ में शिक्षकों ने.अनेक ने बताया कि सीखने के दौरान उन्हें भय अनुभव होता था. अनुभवों का सत्र पूरा होने के बाद मदन पांडे जी द्वारा भाषा में विभिन्न तरीकों से भाषा निर्माण की गतिविधियों को कराया गया.इनमें एक चीज पर एक वाक्य बोलना,किसी एक चीज पर दो और तीन वाक्य बोलना,किसी वस्तु पर लगातार एक मिनट बोलना तथा एक चीज के पक्ष और विपक्ष में एक ही वाक्य में बोलने के अभ्यास कराए गए.फिर दो दो की टोलियों में किसी वस्तु की प्रशंसा और निंदा में तीन तीन वाक्य बोलने के अभ्यास कराए गए. इन गतिविधियों द्वारा स्पष्ट किया गया कि जब हमारे सामने किसी विषय या वस्तु पर बोलने की चुनौती रखी जाती है तो हमारा दिमाग उसी के अनुसार भाषा खोजने लगता है. मदन पांडे जी ने कहा भाषा मनुष्य का आविष्कार है.पशु पक्षियों के पास दर्जनों ध्वनि संकेत तो होते हैं पर भाषा नहीं होती.स्कूलों और कक्षाओं में भाषा को सृजनात्मक ढंग से उपयोग करने की जरूरत होती है. बच्चों से जितना अधिक ढांचों ,तरीकों से भाषा निर्माण कराया जाएगा बच्चे उतनी ही अधिक भाषा सीखेंगे. प्रात 9 बजे से दोपहर 2 बजे तक और फिर सांय साढ़े तीन से 6 बजे तक चली कार्यशाला में 50 से अधिक प्रतिभागियों की भागीदारी रही.कार्यशाला कल भी प्रात 9 बजे से शुरू होगी..4
- कमर्शियल गैस बंद, दुकानों में चेकिंग तेज… आखिर दुकानदार कैसे चलाएंगे अपना काम कमर्शियल गैस बंद, दुकानों में चेकिंग तेज… आखिर दुकानदार कैसे चलाएंगे अपना काम? #LPG #GasChecking #CommercialCylinder #GasSupply #LocalNews #MeraHaqNews1