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छतरपुर जिले के बमीठा थाना क्षेत्र के ग्राम कावर में एक युवक ने गांव के ही दो लोगों पर कुल्हाड़ी और लकड़ी के पटिए से जानलेवा हमला करने का गंभीर आरोप लगाया है। पीड़ित का दावा है कि इस हमले के कारण उसे सिर और पैर में गंभीर चोटें आई हैं। पीड़ित ने स्थानीय पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि पुलिस ने उसकी शिकायत के बावजूद मामले में उचित और गंभीर धाराओं के तहत कार्रवाई नहीं की। इस उपेक्षा से नाराज पीड़ित ने न्याय की गुहार लगाते हुए पुलिस अधीक्षक (SP) कार्यालय में आवेदन सौंपा है। उसने निष्पक्ष जांच और हमलावरों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
Bharat Junction News
छतरपुर जिले के बमीठा थाना क्षेत्र के ग्राम कावर में एक युवक ने गांव के ही दो लोगों पर कुल्हाड़ी और लकड़ी के पटिए से जानलेवा हमला करने का गंभीर आरोप लगाया है। पीड़ित का दावा है कि इस हमले के कारण उसे सिर और पैर में गंभीर चोटें आई हैं। पीड़ित ने स्थानीय पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि पुलिस ने उसकी शिकायत के बावजूद मामले में उचित और गंभीर धाराओं के तहत कार्रवाई नहीं की। इस उपेक्षा से नाराज पीड़ित ने न्याय की गुहार लगाते हुए पुलिस अधीक्षक (SP) कार्यालय में आवेदन सौंपा है। उसने निष्पक्ष जांच और हमलावरों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
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- छतरपुर में 10 जुलाई को दोपहर करीब 12:00 बजे जिला स्वास्थ्य समिति और महिला बाल विकास विभाग की संयुक्त समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में कलेक्टर पार्थ जैसवाल ने स्वास्थ्य सेवाओं में बरती जा रही लापरवाही पर नाराजगी जताते हुए कड़े निर्देश जारी किए। उन्होंने स्पष्ट किया कि हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं की संभावित प्रसव तिथि से 15 दिन पहले से ही नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए और इस कार्य में किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बैठक के दौरान कई अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई। कुपी और देवरा की एएनएम पर पंजीयन में लापरवाही, बिजावर और गौरिहार के बीएमओ पर हाई रिस्क महिलाओं के प्रबंधन में कमी, तथा नौगांव और ईशानगर के बीएमओ पर डिलेवरी अपडेट न होने के कारण वेतन वृद्धि रोकने के निर्देश दिए गए। इसके अतिरिक्त, प्रथम प्रसव के बाद घर जाकर फॉलोअप न करने वाली आशा कार्यकर्ताओं पर कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। कलेक्टर ने हरपालपुर के एक डॉक्टर की संविदा समाप्त करने और देवरा एसएमओ के खिलाफ कार्रवाई प्रस्तावित करने को भी कहा है। यू-विन पोर्टल पर टीकाकरण, टीबी कार्यक्रम, एमएलसी, बच्चों के पंजीयन, चाइल्ड डेथ रिव्यू और एनसीडी स्क्रीनिंग में लापरवाही के चलते संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी करने और वेतन कटौती के आदेश दिए गए हैं। बैठक में जननी सुरक्षा योजना के लंबित भुगतान, ब्लड कैंप के आयोजन और 14 जुलाई से 31 अगस्त तक प्रस्तावित दस्तक अभियान एवं स्टॉप डायरिया कैंपेन की तैयारियों पर भी चर्चा की गई। कलेक्टर ने मातृ मृत्यु के प्रत्येक मामले की गहन समीक्षा और लापरवाही पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है।1
- मध्य प्रदेश के सतना जिले की मझगवां जनपद पंचायत से निलंबित संविदा उपयंत्री सतीश समेले ने पहली बार मीडिया के सामने आकर राज्य के प्रशासनिक तंत्र पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं। समेले ने दावा किया कि जनपद स्तर से लेकर भोपाल तक एक सुनियोजित कमीशन का सिस्टम सक्रिय है और उन्हें भी अधिकारियों के लिए जबरन वसूली करने को मजबूर किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि विकास कार्यों के भुगतान और उपयोगिता प्रमाण पत्र जारी करने जैसी प्रक्रियाओं के लिए सरपंच, सचिव, जीआरएस, उपयंत्री और सहायक यंत्री के स्तर पर कमीशन पहले से तय होते हैं। इतना ही नहीं, उन्होंने जिला, संभाग और भोपाल से आने वाले निरीक्षण अधिकारियों तक 'सूटकेस' भेजने का भी दावा किया है। समेले ने खुद पर हुई निलंबन की कार्रवाई को पूरे सिस्टम को बचाने की एक सोची-समझी साजिश बताया है। उनका कहना है कि विभाग छोटे कर्मचारियों को बलि का बकरा बनाकर असल भ्रष्टाचार को छिपा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके पास इन दावों को पुष्ट करने के लिए ऑडियो, वीडियो और अन्य ठोस दस्तावेजी साक्ष्य मौजूद हैं, जिन्हें वे हाईकोर्ट में पेश करेंगे। गौरतलब है कि सतीश समेले मझगवां जनपद पंचायत की हिरौंदी ग्राम पंचायत में आरईएस विभाग में तैनात थे। उनके खिलाफ सरपंचों, सचिवों और ग्रामीणों ने निर्माण कार्यों के निरीक्षण के दौरान बंदूक लेकर चलने जैसी कई गंभीर शिकायतें दर्ज कराई थीं। इन शिकायतों के आधार पर जिला पंचायत सीईओ ने उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया था, जिसका संतोषजनक जवाब न मिलने पर उन्हें पहले कार्यालय से अटैच किया गया और बाद में निलंबित कर उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू की गई।1
- छतरपुर जिले की छिरावल पंचायत के जामनान पुरवा की सड़क जर्जर स्थिति में है, जिससे स्थानीय निवासियों को भारी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने इस बदहाल मार्ग की मरम्मत और उचित समाधान की मांग की है।1
- केन-बेतवा लिंक परियोजना के अंतर्गत कुपी के समीप धरने पर बैठे प्रदर्शनकारियों से शुक्रवार को छतरपुर और पन्ना जिले के प्रशासनिक अधिकारियों ने मुलाकात की। कलेक्टर पार्थ जैसवाल के निर्देशन में हुई इस संयुक्त बैठक में अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों की समस्याएं सुनीं और उन्हें प्रशासन से संवाद बनाए रखने की अपील की। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि वर्तमान बारिश के मौसम को देखते हुए फिलहाल किसी का मकान खाली नहीं कराया जाएगा। सर्वे प्रक्रिया को लेकर जानकारी देते हुए बताया गया कि पात्र परिवारों का पहले ही सर्वे किया जा चुका है और ग्रामीणों की मांग पर एक पृथक टीम बनाकर दोबारा सर्वे भी कराया गया है। जो परिवार पात्रता सूची में पाए गए, उन्हें राशि स्वीकृत कर दी गई है। प्रशासन ने साफ कर दिया कि जो लोग नियमानुसार पात्र नहीं हैं, उन्हें किसी भी प्रकार की राशि का लाभ नहीं दिया जाएगा और शासन की निर्धारित नीति के विपरीत की गई मांगें पूरी नहीं की जाएंगी। इस दौरान अजयगढ़ तहसीलदार सुरेंद्र अहिरवार, सटई तहसीलदार इंद्रकुमार गौतम और नायब तहसीलदार ओमप्रकाश गौतम मौजूद रहे। प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों से भ्रामक बातों से दूर रहने और शांति एवं कानून-व्यवस्था बनाए रखने का आग्रह किया। साथ ही, प्रदर्शनकारियों को सलाह दी गई कि वे अपने घरों को लौट जाएं और भविष्य में किसी भी समस्या के समाधान के लिए अपने क्षेत्र के सक्षम अधिकारी से संपर्क करें।3
- नगीना के सांसद और भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आजाद का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें वे पुलिस को कड़ी चेतावनी देते नजर आ रहे हैं। वीडियो में चंद्रशेखर आजाद को यह कहते हुए सुना जा सकता है कि, "गालियां दोगे तो मुझे आना पड़ेगा।" यह घटना उत्तर प्रदेश के मेरठ में ललिता गौतम मामले से जुड़ी है, जहां चंद्रशेखर आजाद पीड़ित परिवार से मुलाकात करने पहुंचे थे। सोशल मीडिया पर यूजर्स द्वारा यह दावा किया जा रहा है कि जिन पुलिस अधिकारियों ने पहले बहुजन समाज के लोगों के साथ कथित तौर पर अभद्र व्यवहार किया था, वे चंद्रशेखर आजाद के सामने आने पर हाथ जोड़ते हुए दिखाई दिए।1
- छतरपुर जिले के बमीठा थाना क्षेत्र के ग्राम कावर में एक युवक ने गांव के ही दो लोगों पर कुल्हाड़ी और लकड़ी के पटिए से जानलेवा हमला करने का गंभीर आरोप लगाया है। पीड़ित का दावा है कि इस हमले के कारण उसे सिर और पैर में गंभीर चोटें आई हैं। पीड़ित ने स्थानीय पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि पुलिस ने उसकी शिकायत के बावजूद मामले में उचित और गंभीर धाराओं के तहत कार्रवाई नहीं की। इस उपेक्षा से नाराज पीड़ित ने न्याय की गुहार लगाते हुए पुलिस अधीक्षक (SP) कार्यालय में आवेदन सौंपा है। उसने निष्पक्ष जांच और हमलावरों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है।1