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हनुमान भजन से मशहूर सुनील लोधी मंडला पहुंचे, मंत्री संपतिया उईके ने किया स्वागत मंडला में पहली बार पहुंचे ‘हनुमान अंश’ फेम गायक सुनील लोधी। फिल्म के चर्चित भजन ‘मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान...’ से पहचान बनाने वाले सुनील लोधी का मंडला आगमन पर कैबिनेट मंत्री संपतिया उईके सहित स्थानीय लोगों ने स्वागत किया।

12 hrs ago
user_Hemant Nayak
Hemant Nayak
Local News Reporter मंडला, मंडला, मध्य प्रदेश•
12 hrs ago

हनुमान भजन से मशहूर सुनील लोधी मंडला पहुंचे, मंत्री संपतिया उईके ने किया स्वागत मंडला में पहली बार पहुंचे ‘हनुमान अंश’ फेम गायक सुनील लोधी। फिल्म के चर्चित भजन ‘मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान...’ से पहचान बनाने वाले सुनील लोधी का मंडला आगमन पर कैबिनेट मंत्री संपतिया उईके सहित स्थानीय लोगों ने स्वागत किया।

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  • मंडला के उपनगरीय क्षेत्र महाराजपुर में मंगलवार सुबह आयकर विभाग (IT) की टीम ने दो प्रमुख टिंबर मर्चेंट प्रतिष्ठानों पर अचानक छापामार कार्रवाई बड़ी खबर: मंडला में दो टिंबर मर्चेंट पर आयकर विभाग का छापा ​मंडला के उपनगरीय क्षेत्र महाराजपुर में मंगलवार सुबह आयकर विभाग (IT) की टीम ने दो प्रमुख टिंबर मर्चेंट प्रतिष्ठानों पर अचानक छापामार कार्रवाई की। ​किन पर हुई कार्रवाई: निरंजन लाल अग्रवाल टिंबर मर्चेंट एवं विकास गोहिल टिंबर मर्चेंट। ​जांच: जबलपुर से आई टीम द्वारा सुबह से देर शाम तक दोनों प्रतिष्ठानों के वित्तीय रिकॉर्ड्स और दस्तावेजों की सघन जांच जारी रही। ​अधिकारी मौन: कार्रवाई को लेकर विभागीय अधिकारियों ने फिलहाल चुप्पी साध रखी है और जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होने की बात कही जा रही है।
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    मंडला के उपनगरीय क्षेत्र महाराजपुर में मंगलवार सुबह आयकर विभाग (IT) की टीम ने दो प्रमुख टिंबर मर्चेंट प्रतिष्ठानों पर अचानक छापामार कार्रवाई
बड़ी खबर: मंडला में दो टिंबर मर्चेंट पर आयकर विभाग का छापा
​मंडला के उपनगरीय क्षेत्र महाराजपुर में मंगलवार सुबह आयकर विभाग (IT) की टीम ने दो प्रमुख टिंबर मर्चेंट प्रतिष्ठानों पर अचानक छापामार कार्रवाई की।
​किन पर हुई कार्रवाई: निरंजन लाल अग्रवाल टिंबर मर्चेंट एवं विकास गोहिल टिंबर मर्चेंट।
​जांच: जबलपुर से आई टीम द्वारा सुबह से देर शाम तक दोनों प्रतिष्ठानों के वित्तीय रिकॉर्ड्स और दस्तावेजों की सघन जांच जारी रही।
​अधिकारी मौन: कार्रवाई को लेकर विभागीय अधिकारियों ने फिलहाल चुप्पी साध रखी है और जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होने की बात कही जा रही है।
    user_Prahlad Kachhwaha
    Prahlad Kachhwaha
    Local News Reporter मंडला, मंडला, मध्य प्रदेश•
    8 hrs ago
  • चीतलों के बीच बेफिक्र घूमता दिखा बाघ 🐅 | जंगल का रोमांचक VIDEO | Mandla Tiger Viral Video मंडला के जंगल से सामने आया रोमांचक वीडियो। चीतलों के झुंड के बीच बेफिक्र अंदाज में चलता दिखाई दिया बाघ। बाघ को देखते ही चीतलों में मची हलचल और शुरू हुई दौड़।
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    चीतलों के बीच बेफिक्र घूमता दिखा बाघ 🐅 | जंगल का रोमांचक VIDEO | Mandla Tiger Viral Video
मंडला के जंगल से सामने आया रोमांचक वीडियो। चीतलों के झुंड के बीच बेफिक्र अंदाज में चलता दिखाई दिया बाघ। बाघ को देखते ही चीतलों में मची हलचल और शुरू हुई दौड़।
    user_Hemant Nayak
    Hemant Nayak
    Local News Reporter मंडला, मंडला, मध्य प्रदेश•
    12 hrs ago
  • मोदी का बाप भी जाएगा...खरगे के इस बयान से मचा सियासी घमासान 🔥 जुबानी जंग तेज़... सियासी पारा हाई... और सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा एक ऐसा वीडियो, जिसने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है! जी हाँ! कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का एक कथित बयान इन दिनों चर्चा में है, जिसमें वह जनसभा के मंच से कुछ ऐसा कहते नजर आ रहे हैं कि सियासत में नया विवाद खड़ा हो गया है! 🎙️ आखिर पूरा मामला क्या है? बताया जा रहा है कि जनसभा के दौरान जब भीड़ में से किसी व्यक्ति ने आवाज़ लगाई— "मोदी नहीं जाएगा!" तो जवाब देते हुए खरगे ने कथित तौर पर कहा— 🔴 "हाँ, चलो-चलो... मोदी का बाप भी जाएगा! बाप भी जाएगा!" बस फिर क्या था! इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने लगा और शुरू हो गई सियासी बयानबाजी! ⚡ बीजेपी का हमला या विपक्ष का आक्रामक अंदाज़? एक तरफ बीजेपी समर्थक इस भाषा को प्रधानमंत्री के प्रति अमर्यादित बताते हुए सवाल उठा रहे हैं, तो दूसरी तरफ कुछ विपक्षी समर्थक इसे आक्रामक राजनीतिक बयानबाजी के तौर पर देख रहे हैं। लेकिन सवाल सिर्फ एक बयान का नहीं, बल्कि देश की राजनीति में लगातार गिरते भाषाई स्तर का भी है! ❓ क्या जनता के मुद्दों पर होनी चाहिए चर्चा, या फिर नेताओं की जुबानी जंग ही बनेगी सुर्खियाँ? क्या देश के बड़े नेताओं को सार्वजनिक मंचों से बयान देते समय संयम बरतना चाहिए? या फिर चुनावी राजनीति में ऐसी तीखी बयानबाजी अब आम होती जा रही है? फिलहाल, वायरल वीडियो को लेकर सियासी बहस तेज़ है। हालांकि, वीडियो के पूरे संदर्भ और तारीख की स्वतंत्र पुष्टि किए बिना किसी निष्कर्ष पर पहुँचना उचित नहीं होगा। 📢 आपकी राय क्या है? कमेंट करके बताइए—राजनीति में ऐसी भाषा जायज़ है या नेताओं को अपनी मर्यादा में रहना चाहिए? वीडियो पसंद आया हो तो शेयर करें और ऐसी ही चटपटी राजनीतिक खबरों के लिए जुड़े रहिए! 🔥 कैमरा, खबर और सियासत पर पैनी नज़र—हम पहुँचाते हैं आप तक हर मुद्दे की हर बड़ी खबर!
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    मोदी का बाप भी जाएगा...खरगे के इस बयान से मचा सियासी घमासान
🔥 जुबानी जंग तेज़... सियासी पारा हाई... और सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा एक ऐसा वीडियो, जिसने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है!
जी हाँ! कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का एक कथित बयान इन दिनों चर्चा में है, जिसमें वह जनसभा के मंच से कुछ ऐसा कहते नजर आ रहे हैं कि सियासत में नया विवाद खड़ा हो गया है!
🎙️ आखिर पूरा मामला क्या है?
बताया जा रहा है कि जनसभा के दौरान जब भीड़ में से किसी व्यक्ति ने आवाज़ लगाई— "मोदी नहीं जाएगा!"
तो जवाब देते हुए खरगे ने कथित तौर पर कहा—
🔴 "हाँ, चलो-चलो... मोदी का बाप भी जाएगा! बाप भी जाएगा!"
बस फिर क्या था! इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने लगा और शुरू हो गई सियासी बयानबाजी!
⚡ बीजेपी का हमला या विपक्ष का आक्रामक अंदाज़?
एक तरफ बीजेपी समर्थक इस भाषा को प्रधानमंत्री के प्रति अमर्यादित बताते हुए सवाल उठा रहे हैं, तो दूसरी तरफ कुछ विपक्षी समर्थक इसे आक्रामक राजनीतिक बयानबाजी के तौर पर देख रहे हैं।
लेकिन सवाल सिर्फ एक बयान का नहीं, बल्कि देश की राजनीति में लगातार गिरते भाषाई स्तर का भी है!
❓ क्या जनता के मुद्दों पर होनी चाहिए चर्चा, या फिर नेताओं की जुबानी जंग ही बनेगी सुर्खियाँ?
क्या देश के बड़े नेताओं को सार्वजनिक मंचों से बयान देते समय संयम बरतना चाहिए? या फिर चुनावी राजनीति में ऐसी तीखी बयानबाजी अब आम होती जा रही है?
फिलहाल, वायरल वीडियो को लेकर सियासी बहस तेज़ है। हालांकि, वीडियो के पूरे संदर्भ और तारीख की स्वतंत्र पुष्टि किए बिना किसी निष्कर्ष पर पहुँचना उचित नहीं होगा।
📢 आपकी राय क्या है?
कमेंट करके बताइए—राजनीति में ऐसी भाषा जायज़ है या नेताओं को अपनी मर्यादा में रहना चाहिए?
वीडियो पसंद आया हो तो शेयर करें और ऐसी ही चटपटी राजनीतिक खबरों के लिए जुड़े रहिए!
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    user_Govardhan kushwaha
    Govardhan kushwaha
    Local News Reporter मंडला, मंडला, मध्य प्रदेश•
    19 hrs ago
  • *डिंडौरी में ‘जननायक’ सांस्कृतिक आयोजन में राजा हीराखान सिंह छत्री के शौर्य की गाथा नृत्य-नाट्य के माध्यम से प्रस्तुत * *गोंड सभ्यता के महानायकों के जीवन, संघर्ष और सांस्कृतिक विरासत को मंच पर किया जा रहा जीवंत* *डिंडौरी 27 अक्टूबर 2026* मध्यप्रदेश शासन के संस्कृति विभाग द्वारा गोंड सभ्यता के महानायकों के शौर्य, पराक्रम, परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत पर आधारित सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की श्रृंखला ‘जननायक’ का आयोजन 25 से 27 अक्टूबर 2026 तक डिंडौरी में किया जा रहा है। शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय के खेल मैदान में आयोजित इस कार्यक्रम में गोंड सभ्यता के गौरवशाली इतिहास और महानायकों के जीवन प्रसंगों को नृत्य-नाट्य के माध्यम से जीवंत रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। आयोजन के तीसरे और अंतिम दिवस दिन 27 अक्टूबर 2026 को राजा हीराखान सिंह छत्री के जीवन, शौर्य और संघर्ष पर आधारित नृत्य-नाट्य की प्रभावशाली प्रस्तुति दी गई। नृत्य-नाट्य का निर्देशन एवं पुनर्संयोजन श्री सतीश व्याम द्वारा किया गया, जबकि संगीत निर्देशन श्री कुलदीप सार्वा ने किया। कलाकारों ने अपने अभिनय, नृत्य और संगीत के माध्यम से गोंड समाज के इतिहास, वीरता, लोकपरंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। प्रस्तुति के दौरान राजा हीराखान सिंह छत्री के जीवन से जुड़े प्रसंगों, उनके संघर्ष, साहस और समाज के प्रति योगदान को मंच पर सजीव रूप में दर्शाया गया। कलाकारों की प्रभावशाली प्रस्तुति ने दर्शकों को गोंड सभ्यता के गौरवशाली इतिहास से परिचित कराया और कार्यक्रम स्थल पर उपस्थित दर्शकों ने प्रस्तुतियों की सराहना की। तीन दिवसीय ‘जननायक’ सांस्कृतिक आयोजन के माध्यम से गोंड समाज की समृद्ध संस्कृति, पारंपरिक कलाओं, लोकगाथाओं और ऐतिहासिक महानायकों की वीरगाथाओं को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। आयोजन का उद्देश्य नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों, इतिहास और गौरवशाली परंपराओं से जोड़ना तथा लुप्त होती लोककलाओं एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के प्रति जागरूक करना है। कार्यक्रम में जिला न्यायाधीश श्री डी. एस. मण्डलोई, जिला न्यायाधीश श्री शिवकुमार कौशल, सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण श्री पवन पटेल, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट श्री गिरिजेश सनोडिया, न्यायिक मजिस्ट्रेट श्री आर. पी. सिंह, न्यायिक मजिस्ट्रेट श्री अतुल हरदहा, शहपुरा विधायक श्री ओमप्रकाश धुर्वे, कलेक्टर श्रीमती अंजू पवन भदौरिया, सीईओ जिला पंचायत श्री दिव्यांशु चौधरी, नगर परिषद् अध्यक्ष श्रीमती सुनीता सारस, उपाध्यक्ष श्रीमती सारिका नायक, जिला पंचायत सदस्य श्रीमती हीरा रुद्रेश परस्ते सहित संबंधित विभागों के अधिकारी-कर्मचारी, जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित रहे।
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    *डिंडौरी में ‘जननायक’ सांस्कृतिक आयोजन में राजा हीराखान सिंह छत्री के शौर्य की गाथा नृत्य-नाट्य के माध्यम से प्रस्तुत
*
*गोंड सभ्यता के महानायकों के जीवन, संघर्ष और सांस्कृतिक विरासत को मंच पर किया जा रहा जीवंत*
*डिंडौरी 27 अक्टूबर 2026*
मध्यप्रदेश शासन के संस्कृति विभाग द्वारा गोंड सभ्यता के महानायकों के शौर्य, पराक्रम, परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत पर आधारित सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की श्रृंखला ‘जननायक’ का आयोजन 25 से 27 अक्टूबर 2026 तक डिंडौरी में किया जा रहा है। शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय के खेल मैदान में आयोजित इस कार्यक्रम में गोंड सभ्यता के गौरवशाली इतिहास और महानायकों के जीवन प्रसंगों को नृत्य-नाट्य के माध्यम से जीवंत रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है।
आयोजन के तीसरे और अंतिम दिवस दिन 27 अक्टूबर 2026 को राजा हीराखान सिंह छत्री के जीवन, शौर्य और संघर्ष पर आधारित नृत्य-नाट्य की प्रभावशाली प्रस्तुति दी गई। नृत्य-नाट्य का निर्देशन एवं पुनर्संयोजन श्री सतीश व्याम द्वारा किया गया, जबकि संगीत निर्देशन श्री कुलदीप सार्वा ने किया। कलाकारों ने अपने अभिनय, नृत्य और संगीत के माध्यम से गोंड समाज के इतिहास, वीरता, लोकपरंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।
प्रस्तुति के दौरान राजा हीराखान सिंह छत्री के जीवन से जुड़े प्रसंगों, उनके संघर्ष, साहस और समाज के प्रति योगदान को मंच पर सजीव रूप में दर्शाया गया। कलाकारों की प्रभावशाली प्रस्तुति ने दर्शकों को गोंड सभ्यता के गौरवशाली इतिहास से परिचित कराया और कार्यक्रम स्थल पर उपस्थित दर्शकों ने प्रस्तुतियों की सराहना की।
तीन दिवसीय ‘जननायक’ सांस्कृतिक आयोजन के माध्यम से गोंड समाज की समृद्ध संस्कृति, पारंपरिक कलाओं, लोकगाथाओं और ऐतिहासिक महानायकों की वीरगाथाओं को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। आयोजन का उद्देश्य नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों, इतिहास और गौरवशाली परंपराओं से जोड़ना तथा लुप्त होती लोककलाओं एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के प्रति जागरूक करना है।
कार्यक्रम में जिला न्यायाधीश श्री डी. एस. मण्डलोई,  जिला न्यायाधीश श्री शिवकुमार कौशल, सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण श्री पवन पटेल, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट श्री गिरिजेश सनोडिया, न्यायिक मजिस्ट्रेट श्री आर. पी. सिंह, न्यायिक मजिस्ट्रेट श्री अतुल हरदहा, शहपुरा विधायक श्री ओमप्रकाश धुर्वे,  कलेक्टर श्रीमती अंजू पवन भदौरिया, सीईओ जिला पंचायत श्री दिव्यांशु चौधरी, नगर परिषद् अध्यक्ष श्रीमती सुनीता सारस, उपाध्यक्ष श्रीमती सारिका नायक, जिला पंचायत सदस्य श्रीमती हीरा रुद्रेश परस्ते सहित संबंधित विभागों के अधिकारी-कर्मचारी, जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित रहे।
    user_डिण्डौरी न्यूज़ अपडेट्स
    डिण्डौरी न्यूज़ अपडेट्स
    Local News Reporter डिंडोरी, डिंडोरी, मध्य प्रदेश•
    4 hrs ago
  • 4 महीने बाद संगमरमरी वादियों में आवाजें, भेड़ाघाट में नौका विहार शुरू 4 महीने बाद संगमरमरी वादियों में आवाजें, भेड़ाघाट में नौका विहार शुरू जबलपुर समाचार पर्यटन नगरी भेड़ाघाट में आखिरकार चार महीने के लंबे इंतजार के बाद संगमरमरी वादियों के बीच नौका विहार फिर से शुरू हो गया है। 15 अक्टूबर से नर्मदा की लहरों पर नौकाएं दौड़ने लगी हैं, जिससे पर्यटकों के चेहरे खिल उठे हैं। हर साल बारिश के मौसम में नर्मदा नदी का जलस्तर बढ़ने और तेज बहाव के कारण सुरक्षा की दृष्टि से भेड़ाघाट में नौका विहार बंद कर दिया जाता है। इस बार भी चार महीने तक नौका विहार बंद रहा। अब पानी का स्तर सामान्य होने पर प्रशासन ने इसे फिर से शुरू करने की अनुमति दे दी है। नौका विहार शुरू होने के साथ ही सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। नगर परिषद के सदस्यों ने जानकारी देते हुए बताया कि सभी नावों में निर्धारित संख्या में ही पर्यटकों को बैठाया जा रहा है, लाइफ जैकेट अनिवार्य कर दी गई है और प्रत्येक घाट पर सुरक्षा कर्मी तैनात किए गए हैं। दीपावली, क्रिसमस और नए साल के जश्न को देखते हुए नगर परिषद ने तैयारियां तेज कर दी हैं। धुआंधार जलप्रपात और चौंसठ योगिनी मंदिर के साथ-साथ नौका विहार का लुत्फ लेने बड़ी संख्या में पर्यटकों के आने की उम्मीद है, जिससे स्थानीय रोजगार को भी बढ़ावा मिलेगा।
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    4 महीने बाद संगमरमरी वादियों में  आवाजें, भेड़ाघाट में नौका विहार शुरू


 
4 महीने बाद संगमरमरी वादियों में  आवाजें, भेड़ाघाट में नौका विहार शुरू
जबलपुर समाचार 
पर्यटन नगरी भेड़ाघाट में आखिरकार चार महीने के लंबे इंतजार के बाद संगमरमरी वादियों के बीच नौका विहार फिर से शुरू हो गया है। 15 अक्टूबर से नर्मदा की लहरों पर नौकाएं दौड़ने लगी हैं, जिससे पर्यटकों के चेहरे खिल उठे हैं।
हर साल बारिश के मौसम में नर्मदा नदी का जलस्तर बढ़ने और तेज बहाव के कारण सुरक्षा की दृष्टि से भेड़ाघाट में नौका विहार बंद कर दिया जाता है। इस बार भी चार महीने तक नौका विहार बंद रहा। अब पानी का स्तर सामान्य होने पर प्रशासन ने इसे फिर से शुरू करने की अनुमति दे दी है।
नौका विहार शुरू होने के साथ ही सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। नगर परिषद के सदस्यों ने जानकारी देते हुए बताया कि सभी नावों में निर्धारित संख्या में ही पर्यटकों को बैठाया जा रहा है, लाइफ जैकेट अनिवार्य कर दी गई है और प्रत्येक घाट पर सुरक्षा कर्मी तैनात किए गए हैं।
दीपावली, क्रिसमस और नए साल के जश्न को देखते हुए नगर परिषद ने तैयारियां तेज कर दी हैं। धुआंधार जलप्रपात और चौंसठ योगिनी मंदिर के साथ-साथ नौका विहार का लुत्फ लेने बड़ी संख्या में पर्यटकों के आने की उम्मीद है, जिससे स्थानीय रोजगार को भी बढ़ावा मिलेगा।
    user_Sarvesh Tiwari
    Sarvesh Tiwari
    Psychologist जबलपुर, जबलपुर, मध्य प्रदेश•
    6 hrs ago
  • कान्हा में बाघों की मौत पर जबलपुर हाईकोर्ट सख्त, सरकार से मांगी रिपोर्ट कैनाइन डिस्टेंपर वायरस से मौत की आशंका पर उठे सवाल, सितंबर-अक्टूबर में मरे दो बाघों का कारण बताने के निर्देश; 16 नवंबर को अगली सुनवाई जबलपुर। मध्य प्रदेश के कान्हा टाइगर रिजर्व में बाघों की मौत के मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को सितंबर और अक्टूबर में हुई दो बाघों की मौत का कारण बताने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने इस संबंध में सरकार से रिपोर्ट मांगी है। मामले की अगली सुनवाई 16 नवंबर को निर्धारित की गई है। यह मामला कान्हा टाइगर रिजर्व में बाघों की मौत और उनमें कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (CDV) के संक्रमण की आशंका से जुड़ा है। मुंबई निवासी सुब्रत चक्रवर्ती ने इस संबंध में जनहित याचिका दायर की है। सालभर में 20 से अधिक बाघों की मौत का दावा याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अंशुमान सिंह ने अदालत को बताया कि इस साल कान्हा टाइगर रिजर्व में 20 से अधिक बाघों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो चुकी है। याचिका में यह भी कहा गया कि पांच बाघों की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में कैनाइन डिस्टेंपर वायरस से मौत होने की बात सामने आई है। इन मौतों के कारणों और वायरस के प्रसार को लेकर चिंता जताई गई है। हालांकि, सभी मौतों के कारणों की पुष्टि जांच और संबंधित रिपोर्टों के आधार पर ही हो सकेगी। मुक्की वन्यजीव उपचार केंद्र में रखे गए थे दो बाघ याचिका में बताया गया कि कान्हा टाइगर रिजर्व के दो बाघों को मुक्की स्थित वन्यजीव उपचार केंद्र में रखा गया था। याचिकाकर्ता ने वायरस के प्रसार में संक्रमित कुत्तों और सामूहिक जलस्रोतों की संभावित भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए। याचिका के अनुसार, कैनाइन डिस्टेंपर वायरस से संक्रमित होने पर बाघों के स्वाभाविक व्यवहार पर असर पड़ सकता है। इससे उनकी शिकार करने की क्षमता और व्यवहार प्रभावित होने की आशंका रहती है। दो हजार से अधिक कुत्तों का कराया गया टीकाकरण सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि कैनाइन डिस्टेंपर वायरस के प्रसार को रोकने के लिए कान्हा टाइगर रिजर्व और आसपास के क्षेत्रों में दो हजार से अधिक कुत्तों का टीकाकरण कराया गया है। यह कदम वन्यजीवों में संक्रमण के खतरे को कम करने के उद्देश्य से उठाया गया है। हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब मुख्य न्यायाधीश अल्पेश यशवंत कोगजे और न्यायमूर्ति विवेक जैन की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए सितंबर और अक्टूबर में हुई दो बाघों की मौत का कारण बताने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने राज्य सरकार से इस संबंध में रिपोर्ट मांगी है। अब मामले की अगली सुनवाई 16 नवंबर को होगी। उस दिन सरकार की ओर से प्रस्तुत जानकारी के आधार पर आगे की सुनवाई हो सकती है। सच तक पत्रिका न्यूज़ ✍️ रिपोर्ट: दीपक विश्वकर्मा, जबलपुर नोट: खबर में बाघों की मौत और वायरस से संबंधित विवरण याचिका में प्रस्तुत दावों तथा सुनवाई के दौरान बताई गई जानकारी पर आधारित हैं। सभी मौतों के कारणों की पुष्टि संबंधित जांच रिपोर्टों से ही होगी।
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    कान्हा में बाघों की मौत पर जबलपुर हाईकोर्ट सख्त, सरकार से मांगी रिपोर्ट

कैनाइन डिस्टेंपर वायरस से मौत की आशंका पर उठे सवाल, सितंबर-अक्टूबर में मरे दो बाघों का कारण बताने के निर्देश; 16 नवंबर को अगली सुनवाई

जबलपुर। मध्य प्रदेश के कान्हा टाइगर रिजर्व में बाघों की मौत के मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को सितंबर और अक्टूबर में हुई दो बाघों की मौत का कारण बताने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने इस संबंध में सरकार से रिपोर्ट मांगी है। मामले की अगली सुनवाई 16 नवंबर को निर्धारित की गई है।

यह मामला कान्हा टाइगर रिजर्व में बाघों की मौत और उनमें कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (CDV) के संक्रमण की आशंका से जुड़ा है। मुंबई निवासी सुब्रत चक्रवर्ती ने इस संबंध में जनहित याचिका दायर की है।

सालभर में 20 से अधिक बाघों की मौत का दावा

याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अंशुमान सिंह ने अदालत को बताया कि इस साल कान्हा टाइगर रिजर्व में 20 से अधिक बाघों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो चुकी है। याचिका में यह भी कहा गया कि पांच बाघों की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में कैनाइन डिस्टेंपर वायरस से मौत होने की बात सामने आई है।

इन मौतों के कारणों और वायरस के प्रसार को लेकर चिंता जताई गई है। हालांकि, सभी मौतों के कारणों की पुष्टि जांच और संबंधित रिपोर्टों के आधार पर ही हो सकेगी।

मुक्की वन्यजीव उपचार केंद्र में रखे गए थे दो बाघ

याचिका में बताया गया कि कान्हा टाइगर रिजर्व के दो बाघों को मुक्की स्थित वन्यजीव उपचार केंद्र में रखा गया था। याचिकाकर्ता ने वायरस के प्रसार में संक्रमित कुत्तों और सामूहिक जलस्रोतों की संभावित भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए।

याचिका के अनुसार, कैनाइन डिस्टेंपर वायरस से संक्रमित होने पर बाघों के स्वाभाविक व्यवहार पर असर पड़ सकता है। इससे उनकी शिकार करने की क्षमता और व्यवहार प्रभावित होने की आशंका रहती है।

दो हजार से अधिक कुत्तों का कराया गया टीकाकरण

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि कैनाइन डिस्टेंपर वायरस के प्रसार को रोकने के लिए कान्हा टाइगर रिजर्व और आसपास के क्षेत्रों में दो हजार से अधिक कुत्तों का टीकाकरण कराया गया है।

यह कदम वन्यजीवों में संक्रमण के खतरे को कम करने के उद्देश्य से उठाया गया है।

हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब

मुख्य न्यायाधीश अल्पेश यशवंत कोगजे और न्यायमूर्ति विवेक जैन की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए सितंबर और अक्टूबर में हुई दो बाघों की मौत का कारण बताने के निर्देश दिए हैं।

अदालत ने राज्य सरकार से इस संबंध में रिपोर्ट मांगी है। अब मामले की अगली सुनवाई 16 नवंबर को होगी। उस दिन सरकार की ओर से प्रस्तुत जानकारी के आधार पर आगे की सुनवाई हो सकती है।

सच तक पत्रिका न्यूज़
✍️ रिपोर्ट: दीपक विश्वकर्मा, जबलपुर

नोट: खबर में बाघों की मौत और वायरस से संबंधित विवरण याचिका में प्रस्तुत दावों तथा सुनवाई के दौरान बताई गई जानकारी पर आधारित हैं। सभी मौतों के कारणों की पुष्टि संबंधित जांच रिपोर्टों से ही होगी।
    user_Deepak Vishwakarma
    Deepak Vishwakarma
    Photographer जबलपुर, जबलपुर, मध्य प्रदेश•
    6 hrs ago
  • डिंडौरी में किसानों की समस्याओं पर बड़ा मंथन, 43 सूत्रीय मांगों से विभागों का ध्यान खींचा धान की फसल के नुकसान का सर्वे, उपार्जन सीमा बढ़ाने, बिजली-पानी की समस्या दूर करने और नहरों की मरम्मत सहित विभिन्न मुद्दों पर कलेक्टर के समक्ष रखे प्रस्ताव डिंडौरी, 27 अक्टूबर 2026। भारतीय किसान संघ महाकौशल प्रांत, जिला डिंडौरी के प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को कलेक्टर डिंडौरी एवं संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक कर किसानों की समस्याओं और कृषि क्षेत्र से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। बैठक में कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन, विद्युत, जल संसाधन, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति, सहकारिता, मत्स्य, कृषि उपज मंडी, वन और नापतौल विभाग सहित विभिन्न विभागों से संबंधित मांगें रखी गईं। भारतीय किसान संघ ने रबी सीजन के लिए समय पर बीज वितरण, धान की फसल में बीमारी और कम बारिश से हुए नुकसान का सर्वे कर मुआवजा देने, फसल बीमा राशि का भुगतान कराने, धान एवं गेहूं के उपार्जन की सीमा बढ़ाने, सिंचाई व्यवस्था दुरुस्त करने और किसानों को निर्बाध बिजली उपलब्ध कराने जैसे महत्वपूर्ण विषय उठाए। संघ ने कहा कि किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए विभागीय स्तर पर ठोस पहल और प्रभावी निगरानी जरूरी है। कृषि विभाग से संबंधित प्रमुख मांगें भारतीय किसान संघ ने मांग की कि किसानों को रबी फसलों के बीज समय पर उपलब्ध कराए जाएं। विकासखंड स्तरीय कार्यालयों में बीज एवं अन्य सामग्री की दर सूची, योजनाओं के नाम तथा योजनाओं से लाभान्वित होने वाले संभावित किसानों की जानकारी सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित की जाए। पूर्व बैठकों में उठाए गए इन मुद्दों पर भी कार्रवाई की मांग की गई। संघ ने बताया कि जिले में कम बारिश और फसल में बीमारियों के कारण धान की फसल को नुकसान हुआ है। प्रभावित किसानों की फसलों का सर्वे कराकर नियमानुसार क्षतिपूर्ति तथा फसल बीमा कराने वाले किसानों को बीमा राशि दिलाने की मांग की गई। धान की फसल में फुदका कीट के प्रकोप को लेकर कृषि विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए गए। संघ का कहना है कि समय पर कीट नियंत्रण के लिए आवश्यक मार्गदर्शन और उपचार उपलब्ध नहीं होने तथा कीटनाशक दुकानों की निगरानी में कमी के कारण किसानों को नुकसान उठाना पड़ा। संघ ने कीटनाशक विक्रेताओं की दुकानों का नियमित निरीक्षण करने और किसानों को उचित दवाइयां उपलब्ध कराने की मांग की। इसके साथ ही धान का उपार्जन प्रति हेक्टेयर 22 क्विंटल से बढ़ाकर 40 क्विंटल तथा गेहूं का उपार्जन 18 क्विंटल से बढ़ाकर 35 क्विंटल करने की मांग दोहराई गई। संघ ने कहा कि यह मांग पिछले तीन वर्षों से उठाई जा रही है। फसल कटाई प्रयोग की सूचना भारतीय किसान संघ को देने, बीज वितरण की अनुदान राशि किसानों के खातों में तत्काल जमा कराने तथा संबंधित सूची सार्वजनिक करने की मांग भी रखी गई। इसके अतिरिक्त जिला, राज्य और अंतरराज्यीय कृषक भ्रमण कार्यक्रमों की जानकारी 15 दिन पहले सार्वजनिक करने और विकासखंड एवं जिला स्तरीय किसान कल्याण सलाहकार समितियों में संघ के प्रतिनिधियों को शामिल करने की मांग की गई। कृषि अनुसंधान केंद्र की गतिविधियों में पारदर्शिता की मांग कृषि अनुसंधान केंद्र में किन-किन फसलों एवं बीजों पर अनुसंधान किया जा रहा है, किन गांवों को गोद लिया गया है और वहां किन बीजों का प्रयोग किया जा रहा है, इसकी जानकारी उपलब्ध कराने की मांग की गई। अनुसंधान कार्यक्रमों के लिए किसानों का चयन किस प्रक्रिया के तहत किया जाता है, इसे भी स्पष्ट करने की बात कही गई। उद्यानिकी विभाग की योजनाओं का लक्ष्य बढ़ाने पर जोर उद्यानिकी विभाग के अंतर्गत स्थायी ढांचा, फेंसिंग तार, पावर टिलर और अन्य योजनाओं का लक्ष्य बढ़ाने की मांग की गई। संघ ने इन योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक किसानों तक पहुंचाने तथा कृषक भ्रमण कार्यक्रमों की जानकारी 15 दिन पूर्व सार्वजनिक करने की आवश्यकता बताई। पशुओं के उपचार, टीकाकरण और बीमा की मांग पशु चिकित्सा विभाग में दवाइयों की उपलब्धता सुनिश्चित करने और पशुओं का समय पर उपचार कराने की मांग उठाई गई। जिले में पशु टीकाकरण समय पर कराने तथा सभी पशु चिकित्सा केंद्रों और चलित पशु चिकित्सा वाहनों में रेबीज के इंजेक्शन उपलब्ध कराने की बात कही गई। संघ ने जिला कार्यालय में संलग्न फील्ड अधिकारियों को वापस मैदानी कार्य में भेजने, विभागीय योजनाओं का दीवार लेखन के माध्यम से प्रचार-प्रसार करने और पशुओं का बीमा कराने की मांग भी रखी, ताकि पशुपालकों को योजनाओं का लाभ मिल सके। बिजली समस्या दूर करने और शहपुरा सब स्टेशन शीघ्र शुरू करने की मांग विद्युत विभाग से संबंधित मुद्दों में कम वोल्टेज की समस्या प्रमुखता से उठाई गई। संघ ने मांग की कि संबंधित योजना के तहत सर्वे कराकर कम क्षमता वाले ट्रांसफार्मरों को आवश्यकता के अनुसार अधिक क्षमता वाले ट्रांसफार्मरों से बदला जाए। ग्रामीण क्षेत्रों में जर्जर विद्युत लाइनों को भी दुरुस्त किया जाए। शहपुरा में प्रस्तावित 132 केवी सब स्टेशन के शुरू होने की समय-सीमा स्पष्ट करने की मांग की गई। मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुसार किसानों को पांच रुपये में बिजली कनेक्शन उपलब्ध कराने तथा स्टाम्प शुल्क हटाने का मुद्दा भी उठाया गया। संघ ने अस्थायी पंप कनेक्शनों में विद्युत पोल से जलस्रोत तक अधिक दूरी होने पर सर्वे कराकर लाइन पहुंचाने तथा नदी, नाले और नहरों के किनारे उपलब्ध पोलों के आधार पर स्थायी कनेक्शन देने की मांग की। शहपुरा और मेंहदवानी क्षेत्र में बार-बार बिजली बंद होने की समस्या का स्थायी समाधान करने तथा विद्युत फॉल्ट को समय पर ठीक कर पर्याप्त बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। क्षतिग्रस्त नहरों की मरम्मत कर खेतों तक पहुंचाया जाए पानी जल संसाधन विभाग के समक्ष जिले में निर्मित 97 बांधों से 291 गांवों तक सिंचाई सुविधा पहुंचाने की योजना का मुद्दा रखा गया। संघ के अनुसार, कई स्थानों पर नहरें क्षतिग्रस्त होने के कारण किसानों के खेतों तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है। ऐसी नहरों की मरम्मत कर सिंचाई व्यवस्था बहाल करने की मांग की गई। मोहदा जलाशय की नहर का मरम्मत कार्य कराने तथा किवटी तक नहर का विस्तार करने की मांग भी रखी गई, जिससे क्षेत्र के किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिल सके। जल जीवन मिशन की गुणवत्ता पर सवाल लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के अंतर्गत जल जीवन मिशन की नल-जल योजनाओं के गुणवत्ताहीन कार्यों का मुद्दा उठाया गया। संघ ने बताया कि पंचायतों को हस्तांतरित किए जाने के तीन-चार महीने बाद ही कई योजनाएं बंद हो जाती हैं। इसके उदाहरण के तौर पर जनपद पंचायत अमरपुर के सामर मोहगांव, जनपद पंचायत समनापुर के मोहदा, किवटी और पड़रिया तथा जनपद पंचायत शहपुरा के ढोंढ़ा और चंदवाही सहित अन्य गांवों का उल्लेख किया गया। संघ ने नल-जल योजनाओं में विद्युत कार्य और ट्रांसफार्मर की गुणवत्ता सुनिश्चित करने की मांग की। बताया गया कि कुछ स्थानों पर दो-तीन महीने में ही ट्रांसफार्मर खराब हो जाने से पेयजल आपूर्ति प्रभावित होती है। विभागीय निगरानी और गुणवत्ता परीक्षण की व्यवस्था मजबूत करने पर जोर दिया गया। धान खरीदी में परिवहन और तौल व्यवस्था सुधारने की मांग जिला आपूर्ति विभाग से धान खरीदी केंद्रों पर वारदाना और परिवहन की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की गई, ताकि किसानों को उपज बेचने में परेशानी न हो। धान खरीदी के दौरान धर्मकांटों की जांच कराने का मुद्दा भी उठाया गया। संघ ने कहा कि अलग-अलग धर्मकांटों पर तौल में अंतर की शिकायतों को देखते हुए सभी धर्मकांटों और खरीदी केंद्रों में उपलब्ध तौल उपकरणों की जांच की जानी चाहिए। इसके अतिरिक्त गोदाम स्तरीय खरीदी के दौरान गोदाम प्रभारियों द्वारा दोबारा तौल कराने की व्यवस्था में सुधार करने की मांग की गई, जिससे किसानों को अनावश्यक परेशानी से बचाया जा सके। सहकारी बैंक और समितियों में पारदर्शिता की मांग सहकारी बैंक से संबंधित मुद्दे पर संघ ने कहा कि ऋण की राशि जमा करने के लिए किसानों को लैम्प्स भेजे जाने से असुविधा होती है। किसानों की सुविधा के अनुसार बैंक में ही ऋण जमा करने की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की गई। पड़रिया कला लैम्प्स में किसान क्रेडिट कार्ड बनाने के नाम पर निर्धारित राशि से अधिक पैसा लेने और रसीद नहीं देने की शिकायत की जांच कर व्यवस्था सुधारने की मांग रखी गई। सहकारी समितियों की वार्षिक ऑडिट रिपोर्ट में कितनी समितियों पर आपत्तियां आई हैं, इसकी सूची उपलब्ध कराने तथा बिना टोकन उर्वरक वितरण की शिकायतों की जांच करने की मांग भी की गई। संघ ने स्टॉक पंजी, टोकन और निर्धारित दर सूची का मिलान कर पारदर्शिता सुनिश्चित करने पर जोर दिया। मंडी में रेट सूची लगाने और किसानों को उचित मूल्य दिलाने की मांग कृषि उपज मंडी विभाग के समक्ष लाइसेंसधारी गल्ला व्यापारियों द्वारा रेट सूची प्रदर्शित नहीं किए जाने का मुद्दा उठाया गया। संघ ने सवाल किया कि निर्धारित दर सूची नहीं लगाने वाले व्यापारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं की जाती। किसानों को उचित मूल्य और पारदर्शी व्यापार व्यवस्था उपलब्ध कराने की मांग की गई। साथ ही, सड़क किनारे और अन्य स्थानों पर खरीदी करने वाले लाइसेंसधारी व्यापारियों को कृषि उपज मंडी परिसर में अस्थायी स्थान उपलब्ध कराने का प्रस्ताव रखा गया, ताकि खरीदी व्यवस्था व्यवस्थित हो सके। वन्यजीवों से फसल नुकसान पर मुआवजा और फेंसिंग अनुदान की मांग वन विभाग से जंगली जानवरों और आवारा पशुओं के कारण फसलों को होने वाले नुकसान की क्षतिपूर्ति देने की मांग की गई। किसानों के खेतों की सुरक्षा के लिए फेंसिंग लगाने पर 80 प्रतिशत अनुदान उपलब्ध कराने की मांग भी बैठक में रखी गई। मत्स्य योजनाओं का प्रचार-प्रसार कराया जाए मत्स्य विभाग से वर्तमान में संचालित योजनाओं और आगामी योजनाओं की जानकारी सार्वजनिक करने तथा गांव-गांव तक प्रचार-प्रसार कराने की मांग की गई, ताकि पात्र हितग्राही योजनाओं का लाभ ले सकें। डिंडौरी में कृषि महाविद्यालय खोलने की मांग भारतीय किसान संघ ने कृषि विज्ञान केंद्र, डिंडौरी में कृषि महाविद्यालय खोलने की मांग रखी। संघ का कहना है कि जिले में कृषि क्षेत्र में पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए बाहर जाना पड़ता है। स्थानीय स्तर पर कृषि महाविद्यालय खुलने से विद्यार्थियों को जिले में ही अध्ययन की सुविधा मिल सकेगी और कृषि शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा। किसानों के हित में मांगों पर ठोस कार्रवाई की अपेक्षा बैठक में भारतीय किसान संघ ने विभिन्न विभागों से संबंधित समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर हल करने, पूर्व बैठकों में रखे गए मुद्दों पर हुई कार्रवाई की जानकारी उपलब्ध कराने और योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता सुनिश्चित करने पर जोर दिया। संघ की प्रमुख मांगों में समय पर कृषि सामग्री उपलब्ध कराना, फसल नुकसान का उचित आकलन, सिंचाई एवं विद्युत सुविधाओं में सुधार, सरकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन, खरीदी केंद्रों पर पारदर्शी व्यवस्था और सहकारी संस्थाओं की जवाबदेही सुनिश्चित करना शामिल रहा। अब किसानों की निगाहें इस बात पर रहेंगी कि बैठक में उठाए गए मुद्दों पर संबंधित विभाग किस तरह कार्रवाई करते हैं और समस्याओं का समाधान कितनी समय-सीमा में किया जाता है। इस कार्यक्रम मे जिलाध्यक्ष बिहारी लाल साहू, जिला जैविक प्रमुख तरुण परस्ते, जिला विपणन प्रमुख खिलपत गौतम, डिण्डौरी तहसील अध्यक्ष खमोद चंदेल, रमेश चौहान, द्वारका ठाकुर,तुलसीराम राजपूत, गणेश गौतम, बजाग तहसील अध्यक्ष आशाराम यादव, शहपुरा प्रचार प्रमुख कृष्ण कुमार साहू, सदस्य मटरू दादा, संतोष झारिया,प्रेम सिंह धुर्वे, अमृत सिंह परस्ते, दुर्गेश कुमार झारिया, महिला संयोजिका अमरपुर सुशीला धुर्वे, तारा भवेदी, सुनीता धुर्वे आदि रहे उपस्थित। दिनॉक :- 27 अक्टूबर 2026
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    डिंडौरी में किसानों की समस्याओं पर बड़ा मंथन, 43 सूत्रीय मांगों से विभागों का ध्यान खींचा
धान की फसल के नुकसान का सर्वे, उपार्जन सीमा बढ़ाने, बिजली-पानी की समस्या दूर करने और नहरों की मरम्मत सहित विभिन्न मुद्दों पर कलेक्टर के समक्ष रखे प्रस्ताव
डिंडौरी, 27 अक्टूबर 2026।
भारतीय किसान संघ महाकौशल प्रांत, जिला डिंडौरी के प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को कलेक्टर डिंडौरी एवं संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक कर किसानों की समस्याओं और कृषि क्षेत्र से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। बैठक में कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन, विद्युत, जल संसाधन, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति, सहकारिता, मत्स्य, कृषि उपज मंडी, वन और नापतौल विभाग सहित विभिन्न विभागों से संबंधित मांगें रखी गईं।
भारतीय किसान संघ ने रबी सीजन के लिए समय पर बीज वितरण, धान की फसल में बीमारी और कम बारिश से हुए नुकसान का सर्वे कर मुआवजा देने, फसल बीमा राशि का भुगतान कराने, धान एवं गेहूं के उपार्जन की सीमा बढ़ाने, सिंचाई व्यवस्था दुरुस्त करने और किसानों को निर्बाध बिजली उपलब्ध कराने जैसे महत्वपूर्ण विषय उठाए। संघ ने कहा कि किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए विभागीय स्तर पर ठोस पहल और प्रभावी निगरानी जरूरी है।
कृषि विभाग से संबंधित प्रमुख मांगें
भारतीय किसान संघ ने मांग की कि किसानों को रबी फसलों के बीज समय पर उपलब्ध कराए जाएं। विकासखंड स्तरीय कार्यालयों में बीज एवं अन्य सामग्री की दर सूची, योजनाओं के नाम तथा योजनाओं से लाभान्वित होने वाले संभावित किसानों की जानकारी सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित की जाए। पूर्व बैठकों में उठाए गए इन मुद्दों पर भी कार्रवाई की मांग की गई।
संघ ने बताया कि जिले में कम बारिश और फसल में बीमारियों के कारण धान की फसल को नुकसान हुआ है। प्रभावित किसानों की फसलों का सर्वे कराकर नियमानुसार क्षतिपूर्ति तथा फसल बीमा कराने वाले किसानों को बीमा राशि दिलाने की मांग की गई।
धान की फसल में फुदका कीट के प्रकोप को लेकर कृषि विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए गए। संघ का कहना है कि समय पर कीट नियंत्रण के लिए आवश्यक मार्गदर्शन और उपचार उपलब्ध नहीं होने तथा कीटनाशक दुकानों की निगरानी में कमी के कारण किसानों को नुकसान उठाना पड़ा। संघ ने कीटनाशक विक्रेताओं की दुकानों का नियमित निरीक्षण करने और किसानों को उचित दवाइयां उपलब्ध कराने की मांग की।
इसके साथ ही धान का उपार्जन प्रति हेक्टेयर 22 क्विंटल से बढ़ाकर 40 क्विंटल तथा गेहूं का उपार्जन 18 क्विंटल से बढ़ाकर 35 क्विंटल करने की मांग दोहराई गई। संघ ने कहा कि यह मांग पिछले तीन वर्षों से उठाई जा रही है।
फसल कटाई प्रयोग की सूचना भारतीय किसान संघ को देने, बीज वितरण की अनुदान राशि किसानों के खातों में तत्काल जमा कराने तथा संबंधित सूची सार्वजनिक करने की मांग भी रखी गई। इसके अतिरिक्त जिला, राज्य और अंतरराज्यीय कृषक भ्रमण कार्यक्रमों की जानकारी 15 दिन पहले सार्वजनिक करने और विकासखंड एवं जिला स्तरीय किसान कल्याण सलाहकार समितियों में संघ के प्रतिनिधियों को शामिल करने की मांग की गई।
कृषि अनुसंधान केंद्र की गतिविधियों में पारदर्शिता की मांग
कृषि अनुसंधान केंद्र में किन-किन फसलों एवं बीजों पर अनुसंधान किया जा रहा है, किन गांवों को गोद लिया गया है और वहां किन बीजों का प्रयोग किया जा रहा है, इसकी जानकारी उपलब्ध कराने की मांग की गई। अनुसंधान कार्यक्रमों के लिए किसानों का चयन किस प्रक्रिया के तहत किया जाता है, इसे भी स्पष्ट करने की बात कही गई।
उद्यानिकी विभाग की योजनाओं का लक्ष्य बढ़ाने पर जोर
उद्यानिकी विभाग के अंतर्गत स्थायी ढांचा, फेंसिंग तार, पावर टिलर और अन्य योजनाओं का लक्ष्य बढ़ाने की मांग की गई। संघ ने इन योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक किसानों तक पहुंचाने तथा कृषक भ्रमण कार्यक्रमों की जानकारी 15 दिन पूर्व सार्वजनिक करने की आवश्यकता बताई।
पशुओं के उपचार, टीकाकरण और बीमा की मांग
पशु चिकित्सा विभाग में दवाइयों की उपलब्धता सुनिश्चित करने और पशुओं का समय पर उपचार कराने की मांग उठाई गई। जिले में पशु टीकाकरण समय पर कराने तथा सभी पशु चिकित्सा केंद्रों और चलित पशु चिकित्सा वाहनों में रेबीज के इंजेक्शन उपलब्ध कराने की बात कही गई।
संघ ने जिला कार्यालय में संलग्न फील्ड अधिकारियों को वापस मैदानी कार्य में भेजने, विभागीय योजनाओं का दीवार लेखन के माध्यम से प्रचार-प्रसार करने और पशुओं का बीमा कराने की मांग भी रखी, ताकि पशुपालकों को योजनाओं का लाभ मिल सके।
बिजली समस्या दूर करने और शहपुरा सब स्टेशन शीघ्र शुरू करने की मांग
विद्युत विभाग से संबंधित मुद्दों में कम वोल्टेज की समस्या प्रमुखता से उठाई गई। संघ ने मांग की कि संबंधित योजना के तहत सर्वे कराकर कम क्षमता वाले ट्रांसफार्मरों को आवश्यकता के अनुसार अधिक क्षमता वाले ट्रांसफार्मरों से बदला जाए। ग्रामीण क्षेत्रों में जर्जर विद्युत लाइनों को भी दुरुस्त किया जाए।
शहपुरा में प्रस्तावित 132 केवी सब स्टेशन के शुरू होने की समय-सीमा स्पष्ट करने की मांग की गई। मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुसार किसानों को पांच रुपये में बिजली कनेक्शन उपलब्ध कराने तथा स्टाम्प शुल्क हटाने का मुद्दा भी उठाया गया।
संघ ने अस्थायी पंप कनेक्शनों में विद्युत पोल से जलस्रोत तक अधिक दूरी होने पर सर्वे कराकर लाइन पहुंचाने तथा नदी, नाले और नहरों के किनारे उपलब्ध पोलों के आधार पर स्थायी कनेक्शन देने की मांग की। शहपुरा और मेंहदवानी क्षेत्र में बार-बार बिजली बंद होने की समस्या का स्थायी समाधान करने तथा विद्युत फॉल्ट को समय पर ठीक कर पर्याप्त बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।
क्षतिग्रस्त नहरों की मरम्मत कर खेतों तक पहुंचाया जाए पानी
जल संसाधन विभाग के समक्ष जिले में निर्मित 97 बांधों से 291 गांवों तक सिंचाई सुविधा पहुंचाने की योजना का मुद्दा रखा गया। संघ के अनुसार, कई स्थानों पर नहरें क्षतिग्रस्त होने के कारण किसानों के खेतों तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है। ऐसी नहरों की मरम्मत कर सिंचाई व्यवस्था बहाल करने की मांग की गई।
मोहदा जलाशय की नहर का मरम्मत कार्य कराने तथा किवटी तक नहर का विस्तार करने की मांग भी रखी गई, जिससे क्षेत्र के किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिल सके।
जल जीवन मिशन की गुणवत्ता पर सवाल
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के अंतर्गत जल जीवन मिशन की नल-जल योजनाओं के गुणवत्ताहीन कार्यों का मुद्दा उठाया गया। संघ ने बताया कि पंचायतों को हस्तांतरित किए जाने के तीन-चार महीने बाद ही कई योजनाएं बंद हो जाती हैं।
इसके उदाहरण के तौर पर जनपद पंचायत अमरपुर के सामर मोहगांव, जनपद पंचायत समनापुर के मोहदा, किवटी और पड़रिया तथा जनपद पंचायत शहपुरा के ढोंढ़ा और चंदवाही सहित अन्य गांवों का उल्लेख किया गया।
संघ ने नल-जल योजनाओं में विद्युत कार्य और ट्रांसफार्मर की गुणवत्ता सुनिश्चित करने की मांग की। बताया गया कि कुछ स्थानों पर दो-तीन महीने में ही ट्रांसफार्मर खराब हो जाने से पेयजल आपूर्ति प्रभावित होती है। विभागीय निगरानी और गुणवत्ता परीक्षण की व्यवस्था मजबूत करने पर जोर दिया गया।
धान खरीदी में परिवहन और तौल व्यवस्था सुधारने की मांग
जिला आपूर्ति विभाग से धान खरीदी केंद्रों पर वारदाना और परिवहन की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की गई, ताकि किसानों को उपज बेचने में परेशानी न हो।
धान खरीदी के दौरान धर्मकांटों की जांच कराने का मुद्दा भी उठाया गया। संघ ने कहा कि अलग-अलग धर्मकांटों पर तौल में अंतर की शिकायतों को देखते हुए सभी धर्मकांटों और खरीदी केंद्रों में उपलब्ध तौल उपकरणों की जांच की जानी चाहिए।
इसके अतिरिक्त गोदाम स्तरीय खरीदी के दौरान गोदाम प्रभारियों द्वारा दोबारा तौल कराने की व्यवस्था में सुधार करने की मांग की गई, जिससे किसानों को अनावश्यक परेशानी से बचाया जा सके।
सहकारी बैंक और समितियों में पारदर्शिता की मांग
सहकारी बैंक से संबंधित मुद्दे पर संघ ने कहा कि ऋण की राशि जमा करने के लिए किसानों को लैम्प्स भेजे जाने से असुविधा होती है। किसानों की सुविधा के अनुसार बैंक में ही ऋण जमा करने की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की गई।
पड़रिया कला लैम्प्स में किसान क्रेडिट कार्ड बनाने के नाम पर निर्धारित राशि से अधिक पैसा लेने और रसीद नहीं देने की शिकायत की जांच कर व्यवस्था सुधारने की मांग रखी गई।
सहकारी समितियों की वार्षिक ऑडिट रिपोर्ट में कितनी समितियों पर आपत्तियां आई हैं, इसकी सूची उपलब्ध कराने तथा बिना टोकन उर्वरक वितरण की शिकायतों की जांच करने की मांग भी की गई। संघ ने स्टॉक पंजी, टोकन और निर्धारित दर सूची का मिलान कर पारदर्शिता सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
मंडी में रेट सूची लगाने और किसानों को उचित मूल्य दिलाने की मांग
कृषि उपज मंडी विभाग के समक्ष लाइसेंसधारी गल्ला व्यापारियों द्वारा रेट सूची प्रदर्शित नहीं किए जाने का मुद्दा उठाया गया। संघ ने सवाल किया कि निर्धारित दर सूची नहीं लगाने वाले व्यापारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं की जाती। किसानों को उचित मूल्य और पारदर्शी व्यापार व्यवस्था उपलब्ध कराने की मांग की गई।
साथ ही, सड़क किनारे और अन्य स्थानों पर खरीदी करने वाले लाइसेंसधारी व्यापारियों को कृषि उपज मंडी परिसर में अस्थायी स्थान उपलब्ध कराने का प्रस्ताव रखा गया, ताकि खरीदी व्यवस्था व्यवस्थित हो सके।
वन्यजीवों से फसल नुकसान पर मुआवजा और फेंसिंग अनुदान की मांग
वन विभाग से जंगली जानवरों और आवारा पशुओं के कारण फसलों को होने वाले नुकसान की क्षतिपूर्ति देने की मांग की गई। किसानों के खेतों की सुरक्षा के लिए फेंसिंग लगाने पर 80 प्रतिशत अनुदान उपलब्ध कराने की मांग भी बैठक में रखी गई।
मत्स्य योजनाओं का प्रचार-प्रसार कराया जाए
मत्स्य विभाग से वर्तमान में संचालित योजनाओं और आगामी योजनाओं की जानकारी सार्वजनिक करने तथा गांव-गांव तक प्रचार-प्रसार कराने की मांग की गई, ताकि पात्र हितग्राही योजनाओं का लाभ ले सकें।
डिंडौरी में कृषि महाविद्यालय खोलने की मांग
भारतीय किसान संघ ने कृषि विज्ञान केंद्र, डिंडौरी में कृषि महाविद्यालय खोलने की मांग रखी। संघ का कहना है कि जिले में कृषि क्षेत्र में पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए बाहर जाना पड़ता है। स्थानीय स्तर पर कृषि महाविद्यालय खुलने से विद्यार्थियों को जिले में ही अध्ययन की सुविधा मिल सकेगी और कृषि शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा।
किसानों के हित में मांगों पर ठोस कार्रवाई की अपेक्षा
बैठक में भारतीय किसान संघ ने विभिन्न विभागों से संबंधित समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर हल करने, पूर्व बैठकों में रखे गए मुद्दों पर हुई कार्रवाई की जानकारी उपलब्ध कराने और योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
संघ की प्रमुख मांगों में समय पर कृषि सामग्री उपलब्ध कराना, फसल नुकसान का उचित आकलन, सिंचाई एवं विद्युत सुविधाओं में सुधार, सरकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन, खरीदी केंद्रों पर पारदर्शी व्यवस्था और सहकारी संस्थाओं की जवाबदेही सुनिश्चित करना शामिल रहा। अब किसानों की निगाहें इस बात पर रहेंगी कि बैठक में उठाए गए मुद्दों पर संबंधित विभाग किस तरह कार्रवाई करते हैं और समस्याओं का समाधान कितनी समय-सीमा में किया जाता है।
इस कार्यक्रम मे जिलाध्यक्ष बिहारी लाल साहू, जिला जैविक प्रमुख तरुण परस्ते, जिला विपणन प्रमुख खिलपत गौतम, डिण्डौरी तहसील अध्यक्ष खमोद चंदेल, रमेश चौहान, द्वारका ठाकुर,तुलसीराम राजपूत, गणेश गौतम, बजाग तहसील अध्यक्ष आशाराम यादव, शहपुरा प्रचार प्रमुख कृष्ण कुमार साहू, सदस्य मटरू दादा, संतोष झारिया,प्रेम सिंह धुर्वे, अमृत सिंह परस्ते, दुर्गेश कुमार झारिया, महिला संयोजिका अमरपुर सुशीला धुर्वे, तारा भवेदी, सुनीता धुर्वे आदि रहे उपस्थित।
दिनॉक :- 27 अक्टूबर 2026
    user_Sharda Prasad Namdeo
    Sharda Prasad Namdeo
    शाहपुरा, डिंडोरी, मध्य प्रदेश•
    8 hrs ago
  • हनुमान भजन से मशहूर सुनील लोधी मंडला पहुंचे, मंत्री संपतिया उईके ने किया स्वागत मंडला में पहली बार पहुंचे ‘हनुमान अंश’ फेम गायक सुनील लोधी। फिल्म के चर्चित भजन ‘मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान...’ से पहचान बनाने वाले सुनील लोधी का मंडला आगमन पर कैबिनेट मंत्री संपतिया उईके सहित स्थानीय लोगों ने स्वागत किया।
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    हनुमान भजन से मशहूर सुनील लोधी मंडला पहुंचे, मंत्री संपतिया उईके ने किया स्वागत
मंडला में पहली बार पहुंचे ‘हनुमान अंश’ फेम गायक सुनील लोधी। फिल्म के चर्चित भजन ‘मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान...’ से पहचान बनाने वाले सुनील लोधी का मंडला आगमन पर कैबिनेट मंत्री संपतिया उईके सहित स्थानीय लोगों ने स्वागत किया।
    user_Hemant Nayak
    Hemant Nayak
    Local News Reporter मंडला, मंडला, मध्य प्रदेश•
    12 hrs ago
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