पेड़ों की हो रही लूट सिस्टम मौन जलालपुर क्षेत्र में वन विभाग व व किसकी मिलीभगत। रात के अंधेरे में हरियाली का सफाया दिन में जांच का ड्रामा। कानून बेबस या संरक्षण मजबूत जलालपुर में अवैध कटान पर बड़ा सवाल रात में कटते पेड़ दिन में दबती फाइलें जलालपुर में कौन दे रहा संरक्षण । हरा कत्ल जारी जिम्मेदार बेखबर जलालपुर में सिस्टम पर उठे गंभीर सवाल। संवाददाता पंकज कुमार आलापुर अम्बेडकर नगर। अम्बेडकरनगर जनपद के जलालपुर तहसील क्षेत्र में हरे पेड़ों के कथित अवैध कटान का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। ग्राम सभा अरई, चौड़ी पुलिया के आगे लाभापार पुल से पहले जीपीएस कैमरे से रिकॉर्ड वीडियो में पेड़ों की कटाई के दृश्य सामने आने के बावजूद संबंधित विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं।सूत्रों के अनुसार, कर्बला बाजार से रफीगंज मार्ग तक अवैध कटान का सिलसिला लगातार जारी होने का आरोप है। पंथीपुर और सुधार नगर के पास भी सड़क किनारे पेड़ों की कटाई की शिकायतें मिल रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह गतिविधि कथित रूप से लंबे समय से चल रही है, लेकिन जिम्मेदार महकमा प्रभावी कार्रवाई करने में असफल दिखाई दे रहा है शिकायतकर्ताओं के अनुसार, जब वीडियो साक्ष्य मौजूद हैं, तब भी न तो दोषियों की पहचान की जा रही है और न ही कोई ठोस कार्रवाई की जा रही है। आरोप यह भी है कि हर बार जांच के नाम पर केवल औपचारिकताएं पूरी कर मामले को शांत कर दिया जाता है, जिससे कथित रूप से अवैध कटान से जुड़े लोगों का मनोबल बढ़ रहा है। गंभीर आरोप सामने आए सूत्रों के अनुसार, कथित तौर पर कुछ लोग नशे के आदी व्यक्तियों को मामूली पैसे देकर रात के समय प्रतिबंधित पेड़ों की कटाई करवाते हैं। इसके बाद लकड़ी को ठेकेदारों के माध्यम से अन्य स्थानों पर बेचे जाने का भी आरोप है।हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो सकी है। साथ ही, कुछ विभागीय कर्मियों की कथित भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं, लेकिन इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।बड़े सवाल खड़े सबसे अहम सवाल यही है कि जब कथित रूप से वीडियो साक्ष्य मौजूद हैं तो अब तक दोषियों की पहचान और सख्त कार्रवाई क्यों नहीं हो पाई क्या यह महज लापरवाही है या फिर किसी बड़े संरक्षण के चलते कार्रवाई ठंडी पड़ी है यह जांच का विषय बना हुआ है।यदि इस गंभीर पर्यावरणीय मुद्दे पर जल्द ठोस कार्रवाई नहीं होती है, तो मामले का विस्तृत फॉलोअप कर जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग तेज हो सकती है। निष्कर्ष रात के अंधेरे में हरे पेड़ों की कटाई और दिन में फाइलों में सिमटती जांच यह मामला न केवल पर्यावरण संरक्षण पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही की भी परीक्षा ले रहा है।
पेड़ों की हो रही लूट सिस्टम मौन जलालपुर क्षेत्र में वन विभाग व व किसकी मिलीभगत। रात के अंधेरे में हरियाली का सफाया दिन में जांच का ड्रामा। कानून बेबस या संरक्षण मजबूत जलालपुर में अवैध कटान पर बड़ा सवाल रात में कटते पेड़ दिन में दबती फाइलें जलालपुर में कौन दे रहा संरक्षण । हरा कत्ल जारी जिम्मेदार बेखबर जलालपुर में सिस्टम पर उठे गंभीर सवाल। संवाददाता पंकज कुमार आलापुर अम्बेडकर नगर। अम्बेडकरनगर जनपद के जलालपुर तहसील क्षेत्र में हरे पेड़ों के कथित अवैध कटान का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। ग्राम सभा अरई, चौड़ी पुलिया के आगे लाभापार पुल से पहले जीपीएस कैमरे से रिकॉर्ड वीडियो में पेड़ों की कटाई के दृश्य सामने आने के बावजूद संबंधित विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं।सूत्रों के अनुसार, कर्बला बाजार से रफीगंज मार्ग तक अवैध कटान का सिलसिला लगातार जारी होने का आरोप है। पंथीपुर और सुधार नगर के पास भी सड़क किनारे पेड़ों
की कटाई की शिकायतें मिल रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह गतिविधि कथित रूप से लंबे समय से चल रही है, लेकिन जिम्मेदार महकमा प्रभावी कार्रवाई करने में असफल दिखाई दे रहा है शिकायतकर्ताओं के अनुसार, जब वीडियो साक्ष्य मौजूद हैं, तब भी न तो दोषियों की पहचान की जा रही है और न ही कोई ठोस कार्रवाई की जा रही है। आरोप यह भी है कि हर बार जांच के नाम पर केवल औपचारिकताएं पूरी कर मामले को शांत कर दिया जाता है, जिससे कथित रूप से अवैध कटान से जुड़े लोगों का मनोबल बढ़ रहा है। गंभीर आरोप सामने आए सूत्रों के अनुसार, कथित तौर पर कुछ लोग नशे के आदी व्यक्तियों को मामूली पैसे देकर रात के समय प्रतिबंधित पेड़ों की कटाई करवाते हैं। इसके बाद लकड़ी को ठेकेदारों के माध्यम से अन्य स्थानों पर बेचे जाने का भी आरोप है।हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि
अभी नहीं हो सकी है। साथ ही, कुछ विभागीय कर्मियों की कथित भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं, लेकिन इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।बड़े सवाल खड़े सबसे अहम सवाल यही है कि जब कथित रूप से वीडियो साक्ष्य मौजूद हैं तो अब तक दोषियों की पहचान और सख्त कार्रवाई क्यों नहीं हो पाई क्या यह महज लापरवाही है या फिर किसी बड़े संरक्षण के चलते कार्रवाई ठंडी पड़ी है यह जांच का विषय बना हुआ है।यदि इस गंभीर पर्यावरणीय मुद्दे पर जल्द ठोस कार्रवाई नहीं होती है, तो मामले का विस्तृत फॉलोअप कर जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग तेज हो सकती है। निष्कर्ष रात के अंधेरे में हरे पेड़ों की कटाई और दिन में फाइलों में सिमटती जांच यह मामला न केवल पर्यावरण संरक्षण पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही की भी परीक्षा ले रहा है।
- पेड़ों की हो रही लूट सिस्टम मौन जलालपुर क्षेत्र में वन विभाग व व किसकी मिलीभगत। रात के अंधेरे में हरियाली का सफाया दिन में जांच का ड्रामा। कानून बेबस या संरक्षण मजबूत जलालपुर में अवैध कटान पर बड़ा सवाल रात में कटते पेड़ दिन में दबती फाइलें जलालपुर में कौन दे रहा संरक्षण । हरा कत्ल जारी जिम्मेदार बेखबर जलालपुर में सिस्टम पर उठे गंभीर सवाल। संवाददाता पंकज कुमार आलापुर अम्बेडकर नगर। अम्बेडकरनगर जनपद के जलालपुर तहसील क्षेत्र में हरे पेड़ों के कथित अवैध कटान का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। ग्राम सभा अरई, चौड़ी पुलिया के आगे लाभापार पुल से पहले जीपीएस कैमरे से रिकॉर्ड वीडियो में पेड़ों की कटाई के दृश्य सामने आने के बावजूद संबंधित विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं।सूत्रों के अनुसार, कर्बला बाजार से रफीगंज मार्ग तक अवैध कटान का सिलसिला लगातार जारी होने का आरोप है। पंथीपुर और सुधार नगर के पास भी सड़क किनारे पेड़ों की कटाई की शिकायतें मिल रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह गतिविधि कथित रूप से लंबे समय से चल रही है, लेकिन जिम्मेदार महकमा प्रभावी कार्रवाई करने में असफल दिखाई दे रहा है शिकायतकर्ताओं के अनुसार, जब वीडियो साक्ष्य मौजूद हैं, तब भी न तो दोषियों की पहचान की जा रही है और न ही कोई ठोस कार्रवाई की जा रही है। आरोप यह भी है कि हर बार जांच के नाम पर केवल औपचारिकताएं पूरी कर मामले को शांत कर दिया जाता है, जिससे कथित रूप से अवैध कटान से जुड़े लोगों का मनोबल बढ़ रहा है। गंभीर आरोप सामने आए सूत्रों के अनुसार, कथित तौर पर कुछ लोग नशे के आदी व्यक्तियों को मामूली पैसे देकर रात के समय प्रतिबंधित पेड़ों की कटाई करवाते हैं। इसके बाद लकड़ी को ठेकेदारों के माध्यम से अन्य स्थानों पर बेचे जाने का भी आरोप है।हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो सकी है। साथ ही, कुछ विभागीय कर्मियों की कथित भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं, लेकिन इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।बड़े सवाल खड़े सबसे अहम सवाल यही है कि जब कथित रूप से वीडियो साक्ष्य मौजूद हैं तो अब तक दोषियों की पहचान और सख्त कार्रवाई क्यों नहीं हो पाई क्या यह महज लापरवाही है या फिर किसी बड़े संरक्षण के चलते कार्रवाई ठंडी पड़ी है यह जांच का विषय बना हुआ है।यदि इस गंभीर पर्यावरणीय मुद्दे पर जल्द ठोस कार्रवाई नहीं होती है, तो मामले का विस्तृत फॉलोअप कर जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग तेज हो सकती है। निष्कर्ष रात के अंधेरे में हरे पेड़ों की कटाई और दिन में फाइलों में सिमटती जांच यह मामला न केवल पर्यावरण संरक्षण पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही की भी परीक्षा ले रहा है।3
- अंबेडकरनगर। अकबरपुर स्थित प्रधान डाकघर के पासपोर्ट कार्यालय को बुधवार को बम से उड़ाने की धमकी मिलने से क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल उत्पन्न हो गया। सूचना मिलते ही कार्यालय में तैनात कर्मचारियों और उपस्थित नागरिकों में हड़कंप मच गया तथा सभी को तत्काल परिसर से बाहर निकाल लिया गया। प्राप्त जानकारी के अनुसार, दोपहर लगभग 12 बजे पासपोर्ट कार्यालय के प्रभारी लालजी निषाद के मोबाइल ग्रुप पर एक संदिग्ध संदेश प्राप्त हुआ, जिसमें वाशरूम में सायनाइड गैस से भरे 19 बम रखे होने तथा उन्हें दोपहर 2:10 बजे विस्फोट करने की धमकी दी गई थी। संदेश पढ़ते ही उन्होंने तत्काल पोस्टमास्टर नूतन सिंह को अवगत कराया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तुरंत पुलिस को सूचना दी गई। थोड़ी ही देर में भारी पुलिस बल, एलआईयू टीम तथा बम निरोधक दस्ता मौके पर पहुंच गया और पूरे परिसर को खाली कराकर सघन तलाशी अभियान चलाया गया। अधिकारियों ने डाकघर के प्रत्येक हिस्से की बारीकी से जांच की, किन्तु देर शाम तक किसी भी प्रकार की विस्फोटक या संदिग्ध वस्तु बरामद नहीं हो सकी। बताया जा रहा है कि संदेश में तमिलनाडु से जुड़ी कुछ समस्याओं का उल्लेख करते हुए माफी मांगी गई है, साथ ही राजनीतिक विषयों और आपराधिक घटनाओं का भी जिक्र किया गया है। फिलहाल पुलिस मामले की गंभीरता से जांच कर रही है और संदेश भेजने वाले की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है।1
- संत कबीर नगर जनपद के धनघटा थाना अंतर्गत नेतवापुर ग्राम सभा में लोगों ने राजकुमार हत्याकांड में शामिल दोषियों को सजा दिलाने के लिए श्रद्धांजलि के रूप मे नेतवापुर चौराहा से उमरिया बाजार तक लोगों ने कैंडल मार्च निकालकर प्रदर्शन किया और सरकार विरोधी नारे लगाए। दोषियों को उचित दंड मिले यही राजकुमार के लिए सच्ची श्रद्धांजलि होगी।1
- . मरहरा. खराब. बाजार1
- अम्बेडकर नगर के जलालपुर नगर पालिका में एंटी करप्शन टीम ने बड़ी कार्रवाई की है। प्रधानमंत्री आवास योजना की पात्रता सूची में नाम डालने के नाम पर ₹5,000 की रिश्वत मांग रहे बाबू रमाकांत चौबे को रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया है। अयोध्या मंडल की टीम ने पीड़ित की शिकायत पर यह जाल बिछाया था। भ्रष्टाचार के खिलाफ इस बड़ी कार्रवाई की पूरी रिपोर्ट देखें।1
- Post by Ramnath chauhan1
- Post by Dushyant Kumar Journalist1
- जलालपुर लापरवाही के घेरे में CDPO शेषनाथ वर्मा, खाली कुर्सी बनी जनता की परेशानी की वजह। संवाददाता पंकज कुमार आलापुर अम्बेडकरनगर। अम्बेडकरनगर जिले के तहसील व ब्लाक जलालपुर तहसील बाल विकास परियोजना कार्यालय में तैनात CDPO शेषनाथ वर्मा की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। क्षेत्रीय स्तर पर लगातार उठ रही शिकायतों के मुताबिक, लापरवाही इस हद तक हावी बताई जा रही है कि अधिकारी की अनुपस्थिति अब आम बात बन चुकी है।सूत्रों एवं शिकायतकर्ताओं का कहना है कि कार्यालय समय के दौरान अक्सर उनकी कुर्सी खाली रहती है, जिससे दूर-दराज से आने वाले लोगों को बेवजह परेशान होना पड़ता है। खासकर महिलाएं और आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां, जो विभागीय योजनाओंजैसे पोषण, पंजीकरण व अन्य कार्यों के लिए आती हैं, घंटों इंतजार के बाद निराश होकर लौटने को मजबूर हो रही हैं। आरोप यह भी है कि संबंधित अधिकारी से संपर्क करने की कोशिश करने पर फोन कॉल तक रिसीव नहीं होता, जिससे लंबित मामलों का बोझ बढ़ता जा रहा है और योजनाओं का लाभ समय पर लोगों तक नहीं पहुंच पा रहा है।जब इस संबंध में CDPO शेषनाथ वर्मा से उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया तो संपर्क स्थापित नहीं हो सका। उनके पक्ष के अभाव में आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो पाई है, लेकिन लगातार सामने आ रही शिकायतों ने पूरे मामले को गंभीर बना दिया है।क्षेत्रीय नागरिकों में बढ़ते असंतोष के बीच प्रशासन से निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग तेज हो रही है, ताकि व्यवस्था में जवाबदेही तय हो सके और आम जनता को राहत मिल सके।जब जिम्मेदारी की कुर्सी ही लापरवाही की पहचान बन जाए तो सवाल उठना लाजमी है आखिर व्यवस्था चला कौन रहा है और जवाबदेह कौन है।3