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*कभी थे दो जिस्म एक जान, आज हैं जानी दुश्मन* *पाकिस्तान की हार पर अफ़गानिस्तान में भारत की जीत पर जश्न का माहौल था ।* 🇮🇳 🇦🇫 🔥 #INDvsPAK
BHARAT TODAY NEWS
*कभी थे दो जिस्म एक जान, आज हैं जानी दुश्मन* *पाकिस्तान की हार पर अफ़गानिस्तान में भारत की जीत पर जश्न का माहौल था ।* 🇮🇳 🇦🇫 🔥 #INDvsPAK
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- AI का ‘महाकुंभ’ 🔥 यह वीडियो उस सोच पर सवाल उठाता है जहाँ चायवाला AI ज़मीनी हकीकत की बात करता है 👍 और विदेशी यूनिवर्सिटी में पढ़ा AI जाति की राजनीति में उलझा दिखता है! देश किस सोच के साथ आगे बढ़ेगा? ज़मीन से जुड़ी मेहनत या जाति में बँटी मानसिकता? देखिए पूरा वीडियो और खुद फैसला कीजिए 🇮🇳💥 👍 Video को Like करें 🔁 Share करें ताकि सच्चाई हर तक पहुँचे 💬 Comment करके अपनी राय ज़रूर बताएं 🔔 Channel को Subscribe करें और Bell Icon दबाएं SBharatNews — झूठ के खिलाफ… जंग1
- न्यूज़: दिल्ली में नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत सुल्तान पुरी थाना पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। SHO रविंद्र कुमार के नेतृत्व में पुलिस टीम ने सख्त कार्रवाई करते हुए एक महिला आरोपी को 201 ग्राम गांजा के साथ गिरफ्तार किया। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से बरामद प्रतिबंधित मादक पदार्थ को विधिवत जब्त कर लिया है तथा उसके खिलाफ NDPS Act के तहत मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी गई है। यह कार्रवाई एक बार फिर साफ संदेश देती है कि नशे के कारोबार में शामिल अपराधियों के प्रति पुलिस की नीति पूरी तरह स्पष्ट है — जीरो टॉलरेंस।1
- एआई कॉन्फ्रेंस में अनंत अंबानी ने मोदी जी को समझाया, मुख्यमंत्री बिष्ट शंकराचार्य को समझें-अखिलेश, किसानों की रोज़ी से कांग्रेस को समझौता मंजूर नहीं, डोटासरा मार देंगे घोटा, बीजेपी विधायक होने से दुखी विधायकजी और तीन अपराधी मंत्रियों को नहीं बोलने देंगे कांग्रेसी मप्र में.... देखिए देश दुनिया की छ बड़ी खबरें राजपथ न्यूज़ को....1
- तहसील में जमानत प्रक्रिया पर उठे सवाल बिना अधिकारी और पेशकार के प्राइवेट कर्मचारियों द्वारा जमानत कराए जाने का आरोप शाहाबाद (हरदोई)। तहसील शाहाबाद में जमानत प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि यहां बिना संबंधित अधिकारी और पेशकार की मौजूदगी के प्राइवेट कर्मचारी ही जमानत संबंधी कार्य निपटा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, फौजदारी अहलमद का चार्ज राजेंद्र बाबू के पास है, लेकिन व्यवहारिक रूप से अधिकतर कार्य प्राइवेट कर्मचारियों द्वारा संचालित किए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि जमानत से जुड़े दस्तावेजों की जांच-पड़ताल और प्रक्रिया पूरी कराने का काम भी बाहरी कर्मचारियों के माध्यम से किया जा रहा है, जिससे पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।स्थानीय logo और वादकारियों का कहना है कि न्यायालयीन कार्यों में अधिकृत कर्मचारियों की अनुपस्थिति से न केवल प्रक्रिया की वैधता प्रभावित होती है, बल्कि आमजन को भी असुविधा का सामना करना पड़ता है। उनका कहना है कि जमानत जैसी संवेदनशील प्रक्रिया में नियमानुसार अधिकारी और अधिकृत स्टाफ की उपस्थिति आवश्यक है। इस संबंध में जब संबंधित अधिकारियों से जानकारी करने का प्रयास किया गया तो स्पष्ट जवाब नहीं मिल सका उच्चाधिकारियों से मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है, ताकि न्यायिक प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनी रहे।1