अररिया जिले के कुर्साकांटा प्रखंड की सिकटिया पंचायत के वार्ड नंबर 3 में, बाजार की जमीन पर झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले परिवारों को अररिया जिलाधिकारी के आदेश पर बेदखल कर दिया गया है। इन भूमिहीन परिवारों का आरोप है कि अपने बाल बच्चों के साथ जीवन-यापन करते हुए उन्हें यह जमीन खाली करनी पड़ी। उन्हें आश्वासन दिया गया था कि तीन-तीन दशमलव जमीन दी जाएगी, लेकिन जो भूमि आवंटित की गई वह 'पानी वाली' जमीन निकली, जबकि 'पानी के ऊपर वाली' सूखी जमीन उन्हें नहीं दी गई। शिकायतकर्ताओं के अनुसार, इलाके में दो एकड़ से अधिक 'पानी के ऊपर वाली' जमीन उपलब्ध है। उन्हें मिली 'पानी वाली' जमीन का खाता 66 और खेसरा 36 है। इन परिवारों का सीधा आरोप है कि कुर्साकांटा के अमीन ने बिहार सरकार की उस जमीन को, जो 'कर्जा में' थी, उसमें काबिज व्यक्तियों से मिलीभगत कर भूमिहीनों को 'पानी वाली' जमीन दी। वहीं, उन्हीं व्यक्तियों को खेती करने के लिए 'पानी के ऊपर वाली' सूखी जमीन छोड़ दी गई, जिससे भूमिहीन परिवार खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।
अररिया जिले के कुर्साकांटा प्रखंड की सिकटिया पंचायत के वार्ड नंबर 3 में, बाजार की जमीन पर झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले परिवारों को अररिया जिलाधिकारी के आदेश पर बेदखल कर दिया गया है। इन भूमिहीन परिवारों का आरोप है कि अपने बाल बच्चों के साथ जीवन-यापन करते हुए उन्हें यह जमीन खाली करनी पड़ी। उन्हें आश्वासन दिया गया था कि तीन-तीन दशमलव जमीन दी जाएगी, लेकिन जो भूमि आवंटित की गई वह 'पानी वाली' जमीन निकली, जबकि 'पानी के ऊपर वाली' सूखी जमीन उन्हें नहीं दी गई। शिकायतकर्ताओं के अनुसार, इलाके में दो एकड़ से अधिक 'पानी के ऊपर वाली' जमीन उपलब्ध है। उन्हें मिली 'पानी वाली' जमीन का खाता 66 और खेसरा 36 है। इन परिवारों का सीधा आरोप है कि कुर्साकांटा के अमीन ने बिहार सरकार की उस जमीन को, जो 'कर्जा में' थी, उसमें काबिज व्यक्तियों से मिलीभगत कर भूमिहीनों को 'पानी वाली' जमीन दी। वहीं, उन्हीं व्यक्तियों को खेती करने के लिए 'पानी के ऊपर वाली' सूखी जमीन छोड़ दी गई, जिससे भूमिहीन परिवार खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।
- अररिया जिले के कुर्साकांटा प्रखंड की सिकटिया पंचायत के वार्ड नंबर 3 में, बाजार की जमीन पर झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले परिवारों को अररिया जिलाधिकारी के आदेश पर बेदखल कर दिया गया है। इन भूमिहीन परिवारों का आरोप है कि अपने बाल बच्चों के साथ जीवन-यापन करते हुए उन्हें यह जमीन खाली करनी पड़ी। उन्हें आश्वासन दिया गया था कि तीन-तीन दशमलव जमीन दी जाएगी, लेकिन जो भूमि आवंटित की गई वह 'पानी वाली' जमीन निकली, जबकि 'पानी के ऊपर वाली' सूखी जमीन उन्हें नहीं दी गई। शिकायतकर्ताओं के अनुसार, इलाके में दो एकड़ से अधिक 'पानी के ऊपर वाली' जमीन उपलब्ध है। उन्हें मिली 'पानी वाली' जमीन का खाता 66 और खेसरा 36 है। इन परिवारों का सीधा आरोप है कि कुर्साकांटा के अमीन ने बिहार सरकार की उस जमीन को, जो 'कर्जा में' थी, उसमें काबिज व्यक्तियों से मिलीभगत कर भूमिहीनों को 'पानी वाली' जमीन दी। वहीं, उन्हीं व्यक्तियों को खेती करने के लिए 'पानी के ऊपर वाली' सूखी जमीन छोड़ दी गई, जिससे भूमिहीन परिवार खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।1
- गुरुवार को भारत-नेपाल सीमा पर स्थित जोगबनी बॉर्डर के नेपाल क्षेत्र रानी (विराटनगर) में दुकानदारों ने नेपाल प्रशासन के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। इस विरोध के दौरान प्रदर्शनकारियों ने कुछ समय के लिए नेपाल से भारत आने-जाने वाले मुख्य बैरियर को बंद कर दिया, जिससे सीमा पर आवागमन बुरी तरह प्रभावित हुआ। विरोध का मुख्य कारण नेपाल प्रशासन का छोटी सड़क पर नया बैरियर लगाने का निर्णय था। जोगबनी से नेपाल में प्रवेश करने पर दो सड़कें हैं, जिनमें से एक छोटी सड़क पर यह नया बैरियर प्रस्तावित है। दुकानदारों का तर्क है कि वर्षों से एक बैरियर पहले से मौजूद है और ऐसे में दूसरे बैरियर की कोई आवश्यकता नहीं है। उनका आरोप है कि नए बैरियर के कारण भारत की ओर से आने वाले ग्राहकों की संख्या में कमी आएगी, जिससे स्थानीय व्यापार पर प्रतिकूल असर पड़ेगा और कई दुकानदारों के सामने रोजी-रोटी का संकट उत्पन्न हो सकता है। प्रदर्शन के दौरान दुकानदारों और नेपाल प्रशासन के अधिकारियों के बीच काफी देर तक तीखी नोकझोंक हुई। प्रदर्शनकारी नया बैरियर हटाने की अपनी मांग पर अड़े रहे। हालांकि, बाद में प्रशासन ने सख्ती बरतते हुए प्रदर्शनकारियों को वहां से हटाया और मुख्य मार्ग को खाली करवाकर आवागमन को पुनः सामान्य कराया। इस घटना के बाद सीमा क्षेत्र में कुछ समय तक तनावपूर्ण माहौल रहा, लेकिन प्रशासन की त्वरित कार्रवाई के बाद स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में आ गई। फिलहाल सीमा पर आवाजाही सामान्य रूप से जारी है। स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि यदि उनकी मांगों पर उचित ध्यान नहीं दिया गया, तो वे भविष्य में भी आंदोलन करने के लिए विवश हो सकते हैं।1
- राबड़ी आवास के खाली होने के बाद राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के कार्यकर्ता अत्यधिक भावुक हो उठे। इस घटना से व्यथित एक RJD कार्यकर्ता ने अपनी भावनाएँ व्यक्त करते हुए कहा कि 'हमारे भगवान को निकाल दिया गया है।' कार्यकर्ताओं ने इस पूरे मामले को लेकर सम्राट चौधरी की जमकर आलोचना की और उन्हें कोसा।1
- Manish Pandey 🫂🫂🙏1
- संतोष कल्कि शिव बाबा सुंदरानाथ धाम सरकार ने स्वयं को अंतिम अवतार घोषित किया है। इस घोषणा में उन्हें विशेष रूप से कल्कि अवतार के रूप में संदर्भित किया गया है।1
- Post by Diler Ali khan1
- किशनगंज जिले के टेढ़ागाछ प्रखंड की हवाकोल पंचायत स्थित खुरखुरिया रेतुआ नदी घाट पर शुक्रवार से नाव सेवा फिर से शुरू कर दी गई है। इस सेवा की बहाली से नदी के दोनों किनारों पर बसे ग्रामीणों को आवागमन में बहुत बड़ी राहत मिली है, जिससे उनकी लंबे समय से चली आ रही परेशानी खत्म हुई है। पिछले कुछ दिनों से नाव सेवा बाधित होने के कारण स्थानीय लोगों, किसानों, छात्रों और दैनिक यात्रियों को आवाजाही में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। जदयू पंचायत अध्यक्ष कृष्ण प्रसाद मंडल ने बताया कि शुक्रवार सुबह से खुरखुरिया घाट पर नावों का नियमित संचालन शुरू हो गया है, जिससे पूरे क्षेत्र में लोगों की आवाजाही एक बार फिर सुचारु हो गई है। वहीं, नाविक चमन लाल मंडल ने जानकारी दी कि प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के सहयोग से यह नाव सेवा सुरक्षित तरीके से बहाल की गई है। उन्होंने यात्रियों से अपील की है कि वे नाव की निर्धारित क्षमता के अनुसार ही उस पर सवार हों और सभी सुरक्षा नियमों का पालन करें। नाव सेवा बहाल होने पर स्थानीय ग्रामीणों ने गहरा संतोष व्यक्त किया है और इसे क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण राहत बताया है।1
- भारत-नेपाल सीमा पर स्थित जोगबनी में, नेपाल की ओर के दुकानदारों ने अपना विरोध दर्ज कराया है। विरोध स्वरूप उन्होंने नेपाल बैरियर को बंद कर दिया और प्रदर्शन किया।1