कानपुर देहात में 2 जुलाई 2026 को भारतीय जनता पार्टी के नवनियुक्त क्षेत्रीय अध्यक्ष रामकिशोर साहू का ज़िले भर में भव्य स्वागत किया गया, जिसके उपरांत उन्होंने कानपुर के हिंदी भवन में आयोजित डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती एवं बलिदान दिवस के अवसर पर एक विचार गोष्ठी में सहभागिता की। क्षेत्रीय अध्यक्ष साहू का कालपी पुल पर ज़िला अध्यक्ष रेणुका सचान के नेतृत्व में अभिनंदन हुआ, जिसके बाद भोगनीपुर में अब्दुल हमीद की प्रतिमा पर उन्होंने माल्यार्पण किया। रिलायंस पेट्रोल पंप पुखरायां और पूर्व विधायक विनोद कटियार के आवास सहित पटेल चौक देवीपुर में भी उनका स्वागत किया गया। अकबरपुर में युवा मोर्चा के सत्यम चतुर्वेदी ने हाइड्रा मशीन का उपयोग कर क्षेत्रीय अध्यक्ष को 20 फीट की विशाल माला पहनाकर विशेष अभिनंदन किया। हिंदी भवन, कानपुर में आयोजित इस विचार गोष्ठी के मुख्य अतिथि रामकिशोर साहू रहे, जिनका पदाधिकारियों ने पुष्पगुच्छ देकर अभिनंदन किया। कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. मुखर्जी के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन से हुआ, जिसमें ज़िला अध्यक्ष रेणुका सचान, ज़िला प्रभारी अशोक राजपूत, राज्य मंत्री प्रतिभा शुक्ला, पूर्व केंद्रीय मंत्री भानु प्रताप वर्मा और विधायक पूनम शंखवार सहित कई पदाधिकारी उपस्थित रहे। अपने संबोधन में क्षेत्रीय अध्यक्ष रामकिशोर साहू ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को मात्र एक राजनीतिक नेता नहीं, बल्कि एक दूरदर्शी व्यक्तित्व बताया। उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी ने 33 वर्ष की आयु में कलकत्ता विश्वविद्यालय के कुलपति बनकर शिक्षा के क्षेत्र में क्रांति लाई और स्वतंत्र भारत के पहले उद्योग मंत्री के रूप में देश की औद्योगिक नींव रखी। साहू ने ज़ोर देकर कहा कि कश्मीर में 'दो विधान, दो प्रधान और दो निशान' की व्यवस्था के विरोध में डॉ. मुखर्जी ने ऐतिहासिक आंदोलन छेड़ा था, और उनका 23 जून 1953 को श्रीनगर में रहस्यमय परिस्थितियों में हुआ बलिदान ही आज पूरे देश को एक संविधान, एक प्रधान और एक निशान के साथ खड़ा कर पाया है। उन्होंने युवाओं से डॉ. मुखर्जी के जीवन से प्रेरणा लेकर राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने और सामाजिक कुरीतियों के ख़िलाफ़ जागरूकता फैलाने का आह्वान किया। इस अवसर पर ज़िला अध्यक्ष रेणुका सचान ने बताया कि डॉ. मुखर्जी ने तुष्टीकरण की नीतियों का विरोध करते हुए नेहरू मंत्रिमंडल से इस्तीफ़ा दिया था। एक वरिष्ठ कार्यकर्ता ने डॉ. मुखर्जी के 'सांस्कृतिक राष्ट्रवाद' के विचार पर भी विस्तार से प्रकाश डाला। कार्यक्रम का संचालन ज़िला महामंत्री सत्यम सिंह चौहान ने किया और समापन पर सभी ने 'भारत माता की जय' और 'वंदे मातरम' के गगनभेदी नारे लगाए। इस पूरे कार्यक्रम में क्षेत्रीय मंत्री सुनील तिवारी, क्षेत्रीय मीडिया प्रभारी अनूप अवस्थी, पूर्व सांसद अनिल शुक्ला, डॉ. सतीश शुक्ला, पूर्व विधायक विनोद कटियार, निर्मला शंखवार, ज़िला महामंत्री सत्यम सिंह चौहान, बबलू शुक्ला, पूर्व ज़िला अध्यक्ष राजेंद्र सिंह चौहान, मदन पांडे, राजेश सचान, राहुल अग्निहोत्री, विकास मिश्रा और ज़िला मीडिया प्रभारी सहित कई अन्य पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे।
कानपुर देहात में 2 जुलाई 2026 को भारतीय जनता पार्टी के नवनियुक्त क्षेत्रीय अध्यक्ष रामकिशोर साहू का ज़िले भर में भव्य स्वागत किया गया, जिसके उपरांत उन्होंने कानपुर के हिंदी भवन में आयोजित डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती एवं बलिदान दिवस के अवसर पर एक विचार गोष्ठी में सहभागिता की। क्षेत्रीय अध्यक्ष साहू का कालपी पुल पर ज़िला अध्यक्ष रेणुका सचान के नेतृत्व में अभिनंदन हुआ, जिसके बाद भोगनीपुर में अब्दुल हमीद की प्रतिमा पर उन्होंने माल्यार्पण किया। रिलायंस पेट्रोल पंप पुखरायां और पूर्व विधायक विनोद कटियार के आवास सहित पटेल चौक देवीपुर में भी उनका स्वागत किया गया। अकबरपुर में युवा मोर्चा के सत्यम चतुर्वेदी ने हाइड्रा मशीन का उपयोग कर क्षेत्रीय अध्यक्ष को 20 फीट की विशाल माला पहनाकर विशेष अभिनंदन किया। हिंदी भवन, कानपुर में आयोजित इस विचार गोष्ठी के मुख्य अतिथि रामकिशोर साहू रहे, जिनका पदाधिकारियों ने पुष्पगुच्छ देकर अभिनंदन किया। कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. मुखर्जी के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन से हुआ, जिसमें ज़िला अध्यक्ष रेणुका सचान, ज़िला प्रभारी अशोक राजपूत, राज्य मंत्री प्रतिभा शुक्ला, पूर्व केंद्रीय मंत्री भानु प्रताप वर्मा और विधायक पूनम शंखवार सहित कई पदाधिकारी उपस्थित रहे। अपने संबोधन में क्षेत्रीय अध्यक्ष रामकिशोर साहू ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को मात्र एक राजनीतिक नेता नहीं, बल्कि एक दूरदर्शी व्यक्तित्व बताया। उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी ने 33 वर्ष की आयु में कलकत्ता विश्वविद्यालय के कुलपति बनकर शिक्षा के
क्षेत्र में क्रांति लाई और स्वतंत्र भारत के पहले उद्योग मंत्री के रूप में देश की औद्योगिक नींव रखी। साहू ने ज़ोर देकर कहा कि कश्मीर में 'दो विधान, दो प्रधान और दो निशान' की व्यवस्था के विरोध में डॉ. मुखर्जी ने ऐतिहासिक आंदोलन छेड़ा था, और उनका 23 जून 1953 को श्रीनगर में रहस्यमय परिस्थितियों में हुआ बलिदान ही आज पूरे देश को एक संविधान, एक प्रधान और एक निशान के साथ खड़ा कर पाया है। उन्होंने युवाओं से डॉ. मुखर्जी के जीवन से प्रेरणा लेकर राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने और सामाजिक कुरीतियों के ख़िलाफ़ जागरूकता फैलाने का आह्वान किया। इस अवसर पर ज़िला अध्यक्ष रेणुका सचान ने बताया कि डॉ. मुखर्जी ने तुष्टीकरण की नीतियों का विरोध करते हुए नेहरू मंत्रिमंडल से इस्तीफ़ा दिया था। एक वरिष्ठ कार्यकर्ता ने डॉ. मुखर्जी के 'सांस्कृतिक राष्ट्रवाद' के विचार पर भी विस्तार से प्रकाश डाला। कार्यक्रम का संचालन ज़िला महामंत्री सत्यम सिंह चौहान ने किया और समापन पर सभी ने 'भारत माता की जय' और 'वंदे मातरम' के गगनभेदी नारे लगाए। इस पूरे कार्यक्रम में क्षेत्रीय मंत्री सुनील तिवारी, क्षेत्रीय मीडिया प्रभारी अनूप अवस्थी, पूर्व सांसद अनिल शुक्ला, डॉ. सतीश शुक्ला, पूर्व विधायक विनोद कटियार, निर्मला शंखवार, ज़िला महामंत्री सत्यम सिंह चौहान, बबलू शुक्ला, पूर्व ज़िला अध्यक्ष राजेंद्र सिंह चौहान, मदन पांडे, राजेश सचान, राहुल अग्निहोत्री, विकास मिश्रा और ज़िला मीडिया प्रभारी सहित कई अन्य पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे।
- जालौन जिले के कालपी क्षेत्र की एक महिला ने गांव के तीन लोगों पर छेड़छाड़, मारपीट और जान से मारने की धमकी देने का गंभीर आरोप लगाया है। पीड़िता ने पुलिस अधीक्षक सहित अन्य उच्च अधिकारियों से न्याय की गुहार लगाई है। महिला का आरोप है कि एक विवाह समारोह के दौरान उसके साथ अश्लील हरकत की गई, और जब उसने इसका विरोध किया तो उसके पति के साथ उसे भी पीटा गया। इसके बाद घर पहुंचकर शिकायत करने पर आरोपियों ने उन्हें जान से मारने की धमकी भी दी। महिला का कहना है कि उसने थाने में शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन इसके बावजूद कोई मुकदमा दर्ज नहीं किया गया। इसके बाद उसने उच्च अधिकारियों को प्रार्थना पत्र भेजकर निष्पक्ष जांच और आरोपी व्यक्तियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। हालांकि, इस मामले में फिलहाल पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, और यह समाचार पीड़िता के प्रार्थना पत्र में लगाए गए आरोपों के आधार पर प्रकाशित किया गया है।1
- उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री, निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और मत्स्य विभाग के मंत्री संजय निषाद हाल ही में जालौन पहुंचे। कालपी स्थित श्याम पैलेस गेस्ट हाउस में उनका सैकड़ों निषाद पार्टी कार्यकर्ताओं ने 'संजय निषाद जिंदाबाद' के नारों और फूल-मालाओं से जोरदार स्वागत किया। इस अवसर पर, संजय निषाद ने विपक्ष और 'अंग्रेजों' पर तीखा निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि पिछली सरकारों ने निषाद पार्टी के कार्यकर्ताओं को गरीबी दी। अपने संबोधन के दौरान, उन्होंने कार्यकर्ताओं को एक बड़ा बयान देते हुए कहा कि 'जो ज़मीन सरकारी, वह ज़मीन हमारी'।5
- उत्तर प्रदेश के लखनऊ में 'हर बच्चे को शिक्षा का अधिकार, समृद्ध और उज्ज्वल भविष्य का आधार' के संदेश को जन-जन तक पहुँचाने के उद्देश्य से शिक्षा के अधिकार के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया। इस दौरान अभिभावकों से अपील की गई कि वे अपने बच्चों का समय पर विद्यालयों में नामांकन कराएँ और उन्हें नियमित रूप से विद्यालय भेजें। कार्यक्रम में यह स्पष्ट किया गया कि शिक्षा प्रत्येक बच्चे का मौलिक अधिकार है, और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा न केवल उनके ज्ञान व कौशल को विकसित करती है, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर और जिम्मेदार नागरिक बनने की दिशा में भी प्रेरित करती है। अधिकारियों ने बताया कि सभी बच्चों को समान अवसर उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है, ताकि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे। इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए समाज के सभी वर्गों से बच्चों की शिक्षा में सक्रिय सहयोग देने का आह्वान किया। वक्ताओं ने कहा कि एक शिक्षित बच्चा ही परिवार, समाज और राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव होता है, जो 'हर बच्चे को शिक्षा का अधिकार, समृद्ध और उज्ज्वल भविष्य का आधार' के मूल संदेश को दोहराता है।1
- जालौन पुलिस ने सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे एक वीडियो को लेकर आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी करते हुए बड़ा खुलासा किया है। कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और यूट्यूब चैनलों पर यह दावा किया जा रहा था कि जनपद जालौन के कंट्रोल रूम में तैनात सिपाही अरविंद पटेल ने एक महिला कांस्टेबल के साथ 'मेरा बालम थानेदार' गाने पर सर्विस रिवॉल्वर के साथ रील बनाई थी। जालौन पुलिस ने इन सभी दावों को भ्रामक, अपुष्ट और तथ्यहीन बताते हुए इनका स्पष्ट रूप से खंडन किया है। पुलिस द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार, वायरल वीडियो में दिख रहा व्यक्ति अरविंद पटेल नहीं है। इतना ही नहीं, जनपद जालौन के कंट्रोल रूम में अरविंद नाम का कोई आरक्षी तैनात नहीं है, और प्रारंभिक जांच से यह भी स्पष्ट हुआ है कि वीडियो में दिख रहा आरक्षी जनपद जालौन में नियुक्त ही नहीं है। पुलिस ने कहा कि कुछ सोशल मीडिया चैनलों और प्लेटफॉर्म ने बिना किसी आधिकारिक पुष्टि के इस वीडियो को जालौन पुलिस से जोड़कर प्रसारित कर दिया, जिससे लोगों में भ्रम की स्थिति पैदा हुई। पुलिस अब वायरल वीडियो की सत्यता, उसके वास्तविक स्थान, उसमें दिख रहे पुलिसकर्मी की पहचान और वीडियो प्रसारित करने वालों की भूमिका की गहन जांच कर रही है। जांच पूरी होने के बाद सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आवश्यक विधिक कार्रवाई की जाएगी। इस पूरे मामले में क्षेत्राधिकारी नगर ने भी आधिकारिक बयान जारी कर जनता से अपील की है कि वे बिना सत्यापन के किसी भी वीडियो या खबर पर विश्वास न करें और न ही उसे आगे साझा करें, क्योंकि सोशल मीडिया पर भ्रामक जानकारी फैलाना कानूनन अपराध हो सकता है। यह घटना सोशल मीडिया पर वायरल होने वाली हर खबर की सत्यता को लेकर सतर्क रहने की आवश्यकता को दोहराती है। किसी भी सूचना को साझा करने से पहले उसकी आधिकारिक पुष्टि करना अनिवार्य है, ताकि किसी व्यक्ति, संस्था या विभाग की गलत छवि प्रस्तुत न हो।1
- जालौन के कालपी में आयोजित बूथ कार्यकर्ता सम्मेलन के दौरान कैबिनेट मंत्री डॉ. संजय कुमार निषाद ने एक कार्यकर्ता पर मंच पर ही तीखी टिप्पणी की, जिससे विवाद खड़ा हो गया है। रिपोर्ट के अनुसार, मंत्री ने कार्यकर्ता को डांटते हुए कठोर शब्दों का इस्तेमाल किया, जिनमें 'दिमाग सही कर लो...' और 'संगठन में काम तुम्हारा बाप करेगा' जैसे वाक्यांश शामिल हैं। इस घटना के बाद राजनीतिक गलियारों में मंत्री के इस बयान को लेकर चर्चा तेज हो गई है। आगामी चुनावों के मद्देनजर, निषाद वोट बैंक को साधने की कोशिशें तेज हो गई हैं, और मंत्री निषाद विभिन्न मंचों से फूलन देवी के संघर्ष और सामाजिक न्याय की याद दिलाते भी नजर आ रहे हैं।2
- जालौन के रामपुरा थाना क्षेत्र के जायघा गांव में एक महिला की हत्या कर दी गई है, जो पिछले 25 वर्षों से अकेले रह रही थी। महिला का खून से लथपथ शव उसके घर में मिलने के बाद से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है। सूचना मिलते ही पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर आगे की जांच शुरू कर दी। मामले की गंभीरता को देखते हुए, फोरेंसिक टीम को भी घटनास्थल पर बुलाया गया, जिसने महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाए हैं।2