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andhe aadami se liya panga to maar maar ke kar diya danga funny video|| #funny #news Bhai aap log ke liye Kitna mehnat karta hun please follow karo || news video|| #trending #videos #shuruapps #viral

14 hrs ago
user_Vijay kumar
Vijay kumar
Artist कुमारखंड, मधेपुरा, बिहार•
14 hrs ago

andhe aadami se liya panga to maar maar ke kar diya danga funny video|| #funny #news Bhai aap log ke liye Kitna mehnat karta hun please follow karo || news video|| #trending #videos #shuruapps #viral

More news from बिहार and nearby areas
  • Bhai aap log ke liye Kitna mehnat karta hun please follow karo || news video|| #trending #videos #shuruapps #viral
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    Bhai aap log ke liye Kitna mehnat karta hun please follow karo || news video|| #trending #videos #shuruapps #viral
    user_Vijay kumar
    Vijay kumar
    Artist कुमारखंड, मधेपुरा, बिहार•
    14 hrs ago
  • शंकरपुर पीएचसी में एम्बुलेंस की सुविधा समय पर नहीं मिल पाने के कारण मरीजों को भारी परेशानी हो रही हैं।यहाँ एक मात्र एम्बुलेंस के सहारे ही मरीजों को सुविधा उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाता हैं।पीएचसी को पूर्व में चालू हालत में मिला दो एम्बुलेंस मरम्मत के अभाव में एक कई वर्षों से सडक के किनारे सडकर बर्बाद हो रहा है तो एक पीएचसी में सडकर बर्बाद हो रहा है।एम्बुलेंस सुविधा उपलब्ध कराये जाने के सवाल पर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों एम्बुलेंस की मरम्मत के लिए फंड नहीं रहने की बात कहकर पल्ला झाड़ लेते हैं।स्थिति यह है कि मरम्मत के अभाव में बेकार पडा दोनों एम्बुलेंस धीरे धीरे धीरे जंग खाकर पूरी तरह बर्बाद होता जा रहा है।पीएचसी में फिलहाल एक 102 एम्बुलेंस हैं जिसमें मात्र जिला मुख्यालय तक ले जाने की सुविधा मिलती है।गंंभीर रूप से बीमार मरीजों को बेहतर ईलाज के लिए मरीजों के परिजनों को परेशान होना पडता हैं।लौगो की माने तो आये दिन दुर्घटना और भूमि विवाद में घायल होनेवाले लौगो को बेहतर ईलाज के लिए सहरसा , मधेपुरा , दरभंगा , पूर्णिया , सिलीगुड़ी , पटना रेफर किया जाता हैं।ऐसे समय में मरीज को ले जाने का साधन समय पर नहीं मिलता।मरीजों का ईलाज समय से नहीं होने के चलते और भी स्थिति गंभीर हो जाती हैं।मिली जानकारी अनुसार शंकरपुर पीएचसी को पूर्व में दो एम्बुलेंस उपलब्ध कराया गया था।एक एम्बुलेंस 2008 के प्रलंयकारी बाढ विभीषिका में गुजरात सरकार ने राम मनोहर लोहिया अस्पताल एम्बुलेंस दिया था और दूसरा विधायक रामेश्वर यादव ने विधायक फंड से एक एम्बुलेंस दिया था।दोनों एम्बुलेंस देखरेख के अभाव में सडकर बर्बाद हो रहा है। इस बाबत प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डाँ जीके दिनकर ने बताया कि एक एम्बुलेंस बाढ विभीषिका के दौरान गुजरात सरकार ने दिया था।और दूसरा विधायक फंड का है।जहाँ तक इसका मरम्मती का बात है तो मरम्मती का कार्य जो एम्बुलेंस पीएचसी को देता है।वही सारी खर्च एम्बुलेंस का उपलब्ध कराना होता है।पीएचसी मे कोई भी फंड से मरम्मती कार्य कराने का नहीं आता है।इसलिए हमलौग ठीक नहीं करवा सकते हैं।
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    शंकरपुर पीएचसी में एम्बुलेंस की सुविधा समय पर नहीं मिल पाने के कारण मरीजों को भारी परेशानी हो रही हैं।यहाँ एक मात्र एम्बुलेंस के सहारे ही मरीजों को सुविधा उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाता हैं।पीएचसी को पूर्व में चालू हालत में मिला दो एम्बुलेंस मरम्मत के अभाव में एक कई वर्षों से सडक के किनारे सडकर बर्बाद हो रहा है तो एक पीएचसी में सडकर बर्बाद हो रहा है।एम्बुलेंस सुविधा उपलब्ध कराये जाने के सवाल पर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों एम्बुलेंस की मरम्मत के लिए फंड नहीं रहने की बात कहकर पल्ला झाड़ लेते हैं।स्थिति यह है कि मरम्मत के अभाव में बेकार पडा दोनों एम्बुलेंस धीरे धीरे धीरे जंग खाकर पूरी तरह बर्बाद होता जा रहा है।पीएचसी में फिलहाल एक 102 एम्बुलेंस हैं जिसमें मात्र जिला मुख्यालय तक ले जाने की सुविधा मिलती है।गंंभीर रूप से बीमार मरीजों को बेहतर ईलाज के लिए मरीजों के परिजनों को परेशान होना पडता हैं।लौगो की माने तो आये दिन दुर्घटना और भूमि विवाद में घायल होनेवाले लौगो को बेहतर ईलाज के लिए सहरसा , मधेपुरा , दरभंगा , पूर्णिया , सिलीगुड़ी  , पटना रेफर किया जाता हैं।ऐसे समय में मरीज को ले जाने का साधन समय पर नहीं मिलता।मरीजों का ईलाज समय से नहीं होने के चलते और भी स्थिति गंभीर हो जाती हैं।मिली जानकारी अनुसार शंकरपुर पीएचसी को पूर्व में दो एम्बुलेंस उपलब्ध कराया गया था।एक एम्बुलेंस 2008 के प्रलंयकारी बाढ विभीषिका में गुजरात सरकार ने राम मनोहर लोहिया अस्पताल एम्बुलेंस दिया था  और दूसरा विधायक रामेश्वर यादव ने विधायक फंड से एक एम्बुलेंस दिया था।दोनों एम्बुलेंस देखरेख के अभाव में सडकर बर्बाद हो रहा है।
इस बाबत प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डाँ जीके दिनकर ने बताया कि एक एम्बुलेंस बाढ विभीषिका के दौरान गुजरात सरकार ने दिया था।और दूसरा विधायक फंड का है।जहाँ तक इसका मरम्मती का बात है तो मरम्मती का कार्य जो एम्बुलेंस पीएचसी को देता है।वही सारी खर्च एम्बुलेंस का उपलब्ध कराना होता है।पीएचसी मे कोई भी फंड से मरम्मती कार्य कराने का नहीं आता है।इसलिए हमलौग ठीक नहीं करवा सकते हैं।
    user_Mukesh  Kumar
    Mukesh Kumar
    शंकरपुर, मधेपुरा, बिहार•
    14 hrs ago
  • 🥲😢😢😢😭😭😭😭
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    🥲😢😢😢😭😭😭😭
    user_Raju yadav
    Raju yadav
    मुरलीगंज, मधेपुरा, बिहार•
    21 hrs ago
  • राज्य सदन में गरजे PM / खबर DAT NEWS/ दैनिक अयोध्या टाइम्स
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    राज्य सदन में गरजे  PM / खबर DAT NEWS/ दैनिक अयोध्या टाइम्स
    user_S.alam D.A.T/M.D.E news
    S.alam D.A.T/M.D.E news
    पत्रकार छातापुर, सुपौल, बिहार•
    5 hrs ago
  • film bruslihirovinaysunghjhansi
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    film bruslihirovinaysunghjhansi
    user_Vinaysinghjhansi
    Vinaysinghjhansi
    रानीगंज, अररिया, बिहार•
    7 hrs ago
  • Post by Pintu Bihari
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    Post by Pintu Bihari
    user_Pintu Bihari
    Pintu Bihari
    Farmer Madhepura, Bihar•
    7 hrs ago
  • मधेपुरा से इंसानियत को शर्मसार कर देने वाली एक बेहद दर्दनाक और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। यहां निजी अस्पतालों और दलालों के गठजोड़ ने एक गरीब परिवार की खुशियां छीन लीं। आरोप है कि इलाज के नाम पर अवैध वसूली, दबाव और लापरवाही की वजह से एक नवजात की जान चली गई। मामला मधेपुरा शहर के कर्पूरी चौक स्थित सत्यम इमरजेंसी हॉस्पिटल का है। पीड़ित परिवार ग्वालपाड़ा प्रखंड के रसना पंचायत, वार्ड नंबर 09 का रहने वाला है। प्रकाश मंडल और उनकी पत्नी मीरा कुमारी ने इस पूरे मामले को लेकर जिला पदाधिकारी अभिषेक रंजन को लिखित शिकायत दी है। पीड़िता मीरा कुमारी का आरोप है कि तीन फरवरी को जब उन्हें प्रसव पीड़ा हुई तो पहले ग्वालपाड़ा सीएचसी ले जाया गया, लेकिन वहां संसाधनों की कमी का हवाला देकर रेफर कर दिया गया। इसके बाद उदाकिशुनगंज के एक नर्सिंग होम ने भी हायर सेंटर भेज दिया। पीड़ित परिवार का कहना है कि जैसे ही वे मधेपुरा पहुंचे, दो दलालों ने एंबुलेंस को रोक लिया और सदर अस्पताल में बेड नहीं होने की बात कहकर उन्हें जबरन कर्पूरी चौक स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती करा दिया। आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन ने नवजात को ICU में रखने के नाम पर पहले पांच हजार और फिर चार हजार रुपये जबरन वसूले। इतना ही नहीं, डॉक्टरों ने इलाज के नाम पर पचास हजार रुपये तक खर्च होने की धमकी दी। मीरा कुमारी का कहना है कि जब उन्होंने अपनी गरीबी और असमर्थता बताई, तो अस्पताल कर्मियों ने उनके साथ बदसलूकी की, यहां तक कि उन्हें अपने नवजात को देखने तक नहीं दिया गया। इलाज में देरी और लापरवाही के चलते नवजात की हालत लगातार बिगड़ती चली गई और आखिरकार उसकी मौत हो गई। दर्दनाक बात यह है कि बच्चे की मौत के बाद भी अस्पताल प्रशासन ने मामले को दबाने की कोशिश की और परिजनों को अस्पताल से बाहर निकाल दिया। बाइट --पीड़िता मीरा कुमारी ने रोते हुए कहा— "मेरी गरीबी का फायदा उठाया गया, मेरे बच्चे की जान चली गई… हमें सिर्फ न्याय चाहिए।" इस मामले में जिला पदाधिकारी अभिषेक रंजन ने आरोपों को गंभीर बताते हुए जांच और कार्रवाई का आश्वासन दिया है। वहीं सिविल सर्जन ने कहा है कि यदि आरोप सही पाए गए, तो ऐसे फर्जी और अवैध निजी क्लिनिकों को सील किया जाएगा और दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी। फिलहाल सवाल यही है— क्या इस गरीब परिवार को न्याय मिलेगा, या यह मामला भी कागजों में दबकर रह जाएगा?
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    मधेपुरा से इंसानियत को शर्मसार कर देने वाली एक बेहद दर्दनाक और चौंकाने वाली खबर सामने आई है।
यहां निजी अस्पतालों और दलालों के गठजोड़ ने एक गरीब परिवार की खुशियां छीन लीं।
आरोप है कि इलाज के नाम पर अवैध वसूली, दबाव और लापरवाही की वजह से एक नवजात की जान चली गई।
मामला मधेपुरा शहर के कर्पूरी चौक स्थित सत्यम इमरजेंसी हॉस्पिटल का है।
पीड़ित परिवार ग्वालपाड़ा प्रखंड के रसना पंचायत, वार्ड नंबर 09 का रहने वाला है।
प्रकाश मंडल और उनकी पत्नी मीरा कुमारी ने इस पूरे मामले को लेकर जिला पदाधिकारी अभिषेक रंजन को लिखित शिकायत दी है।
पीड़िता मीरा कुमारी का आरोप है कि तीन फरवरी को जब उन्हें प्रसव पीड़ा हुई तो पहले ग्वालपाड़ा सीएचसी ले जाया गया,
लेकिन वहां संसाधनों की कमी का हवाला देकर रेफर कर दिया गया।
इसके बाद उदाकिशुनगंज के एक नर्सिंग होम ने भी हायर सेंटर भेज दिया।
पीड़ित परिवार का कहना है कि जैसे ही वे मधेपुरा पहुंचे,
दो दलालों ने एंबुलेंस को रोक लिया और सदर अस्पताल में बेड नहीं होने की बात कहकर
उन्हें जबरन कर्पूरी चौक स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती करा दिया।
आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन ने नवजात को ICU में रखने के नाम पर पहले पांच हजार
और फिर चार हजार रुपये जबरन वसूले।
इतना ही नहीं, डॉक्टरों ने इलाज के नाम पर पचास हजार रुपये तक खर्च होने की धमकी दी।
मीरा कुमारी का कहना है कि जब उन्होंने अपनी गरीबी और असमर्थता बताई,
तो अस्पताल कर्मियों ने उनके साथ बदसलूकी की,
यहां तक कि उन्हें अपने नवजात को देखने तक नहीं दिया गया।
इलाज में देरी और लापरवाही के चलते नवजात की हालत लगातार बिगड़ती चली गई
और आखिरकार उसकी मौत हो गई।
दर्दनाक बात यह है कि बच्चे की मौत के बाद भी अस्पताल प्रशासन ने
मामले को दबाने की कोशिश की और परिजनों को अस्पताल से बाहर निकाल दिया।
बाइट --पीड़िता मीरा कुमारी ने रोते हुए कहा—
"मेरी गरीबी का फायदा उठाया गया, मेरे बच्चे की जान चली गई… हमें सिर्फ न्याय चाहिए।"
इस मामले में जिला पदाधिकारी अभिषेक रंजन ने आरोपों को गंभीर बताते हुए
जांच और कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
वहीं सिविल सर्जन ने कहा है कि यदि आरोप सही पाए गए,
तो ऐसे फर्जी और अवैध निजी क्लिनिकों को सील किया जाएगा
और दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी।
फिलहाल सवाल यही है—
क्या इस गरीब परिवार को न्याय मिलेगा,
या यह मामला भी कागजों में दबकर रह जाएगा?
    user_RAMAN KUMAR
    RAMAN KUMAR
    REPORTER मधेपुरा, मधेपुरा, बिहार•
    7 hrs ago
  • sabhi ke sabhi bevkuf Hai Bhai video aise banta hai achcha Lage to follow karke rakhna #shuruapps #entertainment #news #viral #biharnews #madhepuranews
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    sabhi ke sabhi bevkuf Hai Bhai video aise banta hai achcha Lage to follow karke rakhna #shuruapps #entertainment #news #viral #biharnews #madhepuranews
    user_Vijay kumar
    Vijay kumar
    Artist कुमारखंड, मधेपुरा, बिहार•
    20 hrs ago
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