भीषण गर्मी और बढ़ते तापमान के बीच प्रशासन की दोहरी नीति पर तीखा प्रहार पांढुर्णा। वर्तमान में सूर्यदेव अपने रौद्र रूप में हैं और आसमान से आग बरस रही है। बढ़ते तापमान और असहनीय गर्मी ने आम जनजीवन को झुलसा कर रख दिया है। लेकिन क्या हमने कभी गौर किया कि इस तपिश का असली जिम्मेदार कौन है? प्रकृति के साथ जो खिलवाड़ शासन और प्रशासन के संरक्षण में हो रहा है, यह उसी का दुष्परिणाम है। एक तरफ बड़े पैमाने पर जंगलों की कटाई की जा रही है, हरे-भरे पेड़ों को बेरहमी से काटकर बेचा जा रहा है, तो दूसरी तरफ पर्यावरण बचाने के नाम पर केवल फोटोबाजी का खेल चल रहा है। शासन का दोहरा चरित्र: विनाश और दिखावा एक साथ हैरानी की बात यह है कि जिस तंत्र पर पर्यावरण की रक्षा की जिम्मेदारी है, वही तंत्र जंगलों के विनाश का मूकदर्शक बना हुआ है। जंगल साफ किए जा रहे हैं, सड़कों और इमारतों के नाम पर सदियों पुराने पेड़ों की बलि चढ़ाई जा रही है। जब जंगल ही नहीं रहेंगे, तो शीतलता कहां से आएगी? इस विनाश को छिपाने के लिए प्रशासन अब 'दिखावटी पौधारोपण' का सहारा ले रहा है। छोटे-छोटे पौधे लगाकर अधिकारी और नेता फोटो खिंचवाते हैं और अखबारों में सुर्खियां बटोरते हैं, जबकि हकीकत में उन पौधों की सुध लेने वाला कोई नहीं होता। क्या चंद फोटो खिंचवाने से पर्यावरण बच जाएगा? जल गंगा संवर्धन योजना: जब प्यासी है धरती, तब जागी सरकार सरकार की एक और कथित महत्वाकांक्षी योजना 'जल गंगा संवर्धन' इन दिनों चर्चा में है। लेकिन सवाल यह उठता है कि जब भीषण गर्मी (धुपकाले) में चारों तरफ जलस्त्रोत सूख चुके हैं, तब जल बचाने की बात करना क्या महज एक मजाक नहीं है? जब धरती प्यासी है और नदी-नाले पूरी तरह दम तोड़ चुके हैं, तब प्रशासन जल बचाने की मुहिम चला रहा है। संगठनों की गहरी निद्रा और प्रशासन की अनदेखी विडंबना देखिए कि जब मानसून के दौरान नदी, नालों और जलाशयों में पानी का भरपूर संग्रह होता है और पानी व्यर्थ बह जाता है, तब ये सरकारी संगठन और प्रशासन गहरी नींद में सोए रहते हैं। उस समय न तो जल संचय की सुध आती है और न ही बहते पानी को रोकने का कोई ठोस प्रयास किया जाता है। स्थानीय प्रशासन की उदासीनता का आलम यह है कि धरातल पर कोई काम नजर नहीं आता, बस कागजों पर योजनाएं तैर रही हैं। जनता पूछ रही सवाल आज आम आदमी पूछ रहा है कि क्या केवल नारों और दिखावटी अभियानों से प्रकृति को बचाया जा सकता है? अगर प्रशासन वास्तव में गंभीर है, तो पहले पेड़ों की अवैध कटाई पर रोक लगाए और जल संरक्षण के प्रयासों को केवल गर्मी के महीनों तक सीमित न रखकर साल भर ईमानदारी से लागू करे। वरना यह बढ़ता तापमान आने वाले समय में और भी भयावह रूप अख्तियार कर लेगा। अटल प्रगति जिला ब्युरो चिफ पांढुर्णा निलेश कलसकर/8966053452
भीषण गर्मी और बढ़ते तापमान के बीच प्रशासन की दोहरी नीति पर तीखा प्रहार पांढुर्णा। वर्तमान में सूर्यदेव अपने रौद्र रूप में हैं और आसमान से आग बरस रही है। बढ़ते तापमान और असहनीय गर्मी ने आम जनजीवन को झुलसा कर रख दिया है। लेकिन क्या हमने कभी गौर किया कि इस तपिश का असली जिम्मेदार कौन है? प्रकृति के साथ जो खिलवाड़ शासन और प्रशासन के संरक्षण में हो रहा है, यह उसी का दुष्परिणाम है। एक तरफ बड़े पैमाने पर जंगलों की कटाई की जा रही है, हरे-भरे पेड़ों को बेरहमी से काटकर बेचा जा रहा है, तो दूसरी तरफ पर्यावरण बचाने के नाम पर केवल फोटोबाजी का खेल चल रहा है। शासन का दोहरा चरित्र: विनाश और दिखावा एक साथ हैरानी की बात यह है कि जिस तंत्र पर पर्यावरण की रक्षा की जिम्मेदारी है, वही तंत्र जंगलों के विनाश का मूकदर्शक बना हुआ है। जंगल साफ किए जा रहे हैं, सड़कों और इमारतों के नाम पर सदियों पुराने पेड़ों की बलि चढ़ाई जा रही है। जब जंगल ही नहीं रहेंगे, तो शीतलता कहां से आएगी? इस विनाश को छिपाने के लिए प्रशासन अब 'दिखावटी पौधारोपण' का सहारा ले रहा है। छोटे-छोटे पौधे लगाकर अधिकारी और नेता फोटो खिंचवाते हैं और अखबारों में सुर्खियां बटोरते हैं, जबकि हकीकत में उन पौधों की सुध लेने वाला कोई नहीं होता। क्या चंद फोटो खिंचवाने से पर्यावरण बच जाएगा? जल गंगा संवर्धन योजना: जब प्यासी है धरती, तब जागी सरकार सरकार की एक और कथित महत्वाकांक्षी योजना 'जल गंगा संवर्धन' इन दिनों चर्चा में है। लेकिन सवाल यह उठता है कि जब भीषण गर्मी (धुपकाले) में चारों तरफ जलस्त्रोत सूख चुके हैं, तब जल बचाने की बात करना क्या महज एक मजाक नहीं है? जब धरती प्यासी है और नदी-नाले पूरी तरह दम तोड़ चुके हैं, तब प्रशासन जल बचाने की मुहिम चला रहा है। संगठनों की गहरी निद्रा और प्रशासन की अनदेखी विडंबना देखिए कि जब मानसून के दौरान नदी, नालों और जलाशयों में पानी का भरपूर संग्रह होता है और पानी व्यर्थ बह जाता है, तब ये सरकारी संगठन और प्रशासन गहरी नींद में सोए रहते हैं। उस समय न तो जल संचय की सुध आती है और न ही बहते पानी को रोकने का कोई ठोस प्रयास किया जाता है। स्थानीय प्रशासन की उदासीनता का आलम यह है कि धरातल पर कोई काम नजर नहीं आता, बस कागजों पर योजनाएं तैर रही हैं। जनता पूछ रही सवाल आज आम आदमी पूछ रहा है कि क्या केवल नारों और दिखावटी अभियानों से प्रकृति को बचाया जा सकता है? अगर प्रशासन वास्तव में गंभीर है, तो पहले पेड़ों की अवैध कटाई पर रोक लगाए और जल संरक्षण के प्रयासों को केवल गर्मी के महीनों तक सीमित न रखकर साल भर ईमानदारी से लागू करे। वरना यह बढ़ता तापमान आने वाले समय में और भी भयावह रूप अख्तियार कर लेगा। अटल प्रगति जिला ब्युरो चिफ पांढुर्णा निलेश कलसकर/8966053452
- पांढुर्णा: मध्य प्रदेश में औद्योगिक अधोसंरचना को मजबूत करने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने इंदौर और आसपास के जिलों के लिए एक बड़ा मास्टर प्लान तैयार किया है। इसके तहत इंदौर सहित उज्जैन, देवास, धार, शाजापुर और रतलाम को मेट्रोपॉलिटन सिटी के रूप में विकसित किया जा रहा है। विशेष रूप से इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर के निर्माण से न केवल परिवहन सुगम होगा, बल्कि एग्री-प्रोसेसिंग और ऑटोमोबाइल जैसे क्षेत्रों में क्रांति आएगी। इस परियोजना में किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए उन्हें विकास का सहभागी बनाया गया है, जिससे ग्रामीण और शहरी अर्थव्यवस्था के बीच नया तालमेल देखने को मिलेगा। निलेश कलस्कर, जिला ब्यूरो चीफ, अटल प्रगति न्यूज़, पांढुर्णा2
- 1947 से पाकिस्तान हमारी फुट का फायदा उठा रहा बोले अब्दुल्ला, टीएमसी की याचिका स्वीकार हुई -सिब्बल, झालमुई जुमलेबाज नौटंकियों से सावधान- संजय सिंह, बीजेपी सांसद पाठक पिछवाड़े से भागे, वार खत्म होते ही पैट्रोल सस्ता हो जाएगा ट्रंप का एलान और जयपुर में सिलेंडर की शवयात्रा.... देखिए देश दुनिया की छ बड़ी खबरें राजपथ न्यूज़ पर...1
- Post by Kashinath Sahu1
- कलेक्टर डॉ सोनवणे पहुंचे बर्राढाना, प्रभावित ग्रामीणों से किया आत्मीय संवाद ---------- हर संभव मदद उपलब्ध कराने के लिए किया आश्वस्त -------------- बैतूल 2 मई,2026/भीमपुर विकासखंड के ग्राम मोहदा के बर्राढाना पहुंचकर कलेक्टर डॉ. सौरभ संजय सोनवणे ने आगजनी से प्रभावित परिवारों से आत्मीय संवाद किया। उन्होंने मौके पर राहत कार्यों का अवलोकन किया और प्रभावित ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि शासन-प्रशासन की ओर से हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। कलेक्टर ने संबंधित राजस्व अधिकारियों को निर्देश दिए कि आगजनी से हुए नुकसान का सही एवं विस्तृत आकलन किया जाए तथा आरबीसी 6-4 के प्रावधानों के तहत प्रभावितों को शीघ्र आर्थिक सहायता प्रदान की जाए। कलेक्टर के निर्देशानुसार प्रभावित परिवारों के लिए राशन सहित अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं तत्काल सुनिश्चित की गई हैं, ताकि उन्हें किसी प्रकार की परेशानी न हो। कलेक्टर ने इन व्यवस्थाओं का अवलोकन भी किया। उन्होंने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को खुद की निगरानी में कैंप लगाकर सभी का स्वास्थ्य परिक्षण भी करवाने के निर्देश दिए। इस दौरान , अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्रीमती कमला जोशी, एसडीएम श्री अजीत मरावी सहित अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी मौके पर उपस्थित रहे।1
- Post by AMLA NEWS1
- कलेक्टर डॉ सोनवणे पहुंचे बर्राढाना, प्रभावित ग्रामीणों से किया आत्मीय संवाद हर संभव मदद उपलब्ध कराने के लिए किया आश्वस्त बैतूल। भीमपुर विकासखंड के ग्राम मोहदा के बर्राढाना पहुंचकर कलेक्टर डॉ. सौरभ संजय सोनवणे ने आगजनी से प्रभावित परिवारों से आत्मीय संवाद किया। उन्होंने मौके पर राहत कार्यों का अवलोकन किया और प्रभावित ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि शासन-प्रशासन की ओर से हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। कलेक्टर ने संबंधित राजस्व अधिकारियों को निर्देश दिए कि आगजनी से हुए नुकसान का सही एवं विस्तृत आकलन किया जाए तथा आरबीसी 6-4 के प्रावधानों के तहत प्रभावितों को शीघ्र आर्थिक सहायता प्रदान की जाए। कलेक्टर के निर्देशानुसार प्रभावित परिवारों के लिए राशन सहित अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं तत्काल सुनिश्चित की गई हैं, ताकि उन्हें किसी प्रकार की परेशानी न हो। कलेक्टर ने इन व्यवस्थाओं का अवलोकन भी किया। उन्होंने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को खुद की निगरानी में कैंप लगाकर सभी का स्वास्थ्य परीक्षण भी करवाने के निर्देश दिए। इस दौरान अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कमला जोशी, एसडीएम अजीत मरावी सहित अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी मौके पर उपस्थित रहे।1
- मुलताई। अवैध जुआ-सट्टा गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए चलाए जा रहे अभियान के तहत मुलताई पुलिस ने कार्रवाई करते हुए एक आरोपी को सट्टा लिखते रंगे हाथों पकड़ा है। पुलिस अधीक्षक बैतूल वीरेन्द्र जैन के निर्देशन में एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कमला जोशी के मार्गदर्शन में यह अभियान चलाया जा रहा है। वहीं एसडीओपी मुलताई एस.के. सिंह के निर्देशन और थाना प्रभारी निरीक्षक नरेन्द्र सिंह परिहार के नेतृत्व में यह कार्रवाई की गई। मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने की घेराबंदी पुलिस को सूचना मिली थी कि बिजली ऑफिस के पास कामथ क्षेत्र में एक व्यक्ति अवैध रूप से सट्टा पर्ची लिख रहा है। सूचना पर तत्काल कार्रवाई करते हुए पुलिस टीम मौके पर पहुंची और घेराबंदी कर आरोपी को पकड़ लिया। पकड़े गए आरोपी की पहचान रमेश वामनकर (40 वर्ष) निवासी चिखलीखुर्द के रूप में हुई है। सट्टा पर्ची, नगदी व पेन जब्त तलाशी के दौरान आरोपी के पास से— 01 सट्टा पर्ची 01 लीड पेन नगदी 560 रुपये बरामद किए गए। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ सट्टा एक्ट की धारा 4(क) के तहत मामला दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है। आरोपी को न्यायालय में उपस्थित होने हेतु नोटिस दिया गया है। पुलिस टीम की सराहनीय भूमिका इस कार्रवाई में थाना प्रभारी नरेन्द्र सिंह परिहार के साथ प्रधान आरक्षक सुशील धुर्वे, आरक्षक अरविन्द एवं विवेक चौरे की महत्वपूर्ण भूमिका रही। पुलिस की अपील पुलिस अधीक्षक वीरेन्द्र जैन ने आम नागरिकों से अपील की है कि अवैध जुआ और सट्टा जैसी गतिविधियों की सूचना तुरंत पुलिस को दें, ताकि ऐसे तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सके।2
- पांढुर्णा/सौंसर। उड़ान भरने वालों के लिए सारा आसमान खुला है। संसाधन विहीन परंतु कुछ कर गुजरने की चाह रखने वाला शख्स अपना रास्ता खुद खोज लेता है। मूलतः ग्राम जाम (सावली) निवासी निर्धन परिवार और झोपड़ी से जिंदगी की शुरुआत करने वाले मृदुभाषी व मिलनसार व्यक्तित्व के धनी पेशे से अध्यापक एस.आर.शेंडे ने भारतीय समाज में सर्वधर्म समभाव की अमिट छाप छोड़ी है। उनके प्रखर व्यक्तित्व को देखते हुए सिविल राइट्स प्रोटेक्शन सेल के राष्ट्रीय अध्यक्ष और प्रख्यात विद्वान डॉ. मिलिन्द जीवने 'शाक्य' ने उन्हें सीआरपीसी मध्यप्रदेश राज्य इकाई का अध्यक्ष नियुक्त किया है। इससे पूर्व उन्हें साहित्यिक प्रभाग का राष्ट्रीय सचिव भी बनाया गया था। विदित हो कि वर्ष 1993 में तत्कालीन राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा ने श्री शेंडे को साहित्य सेवा के लिए डॉ. आम्बेडकर फेलोशिप से सम्मानित किया था। वे 40 साल तक शासकीय सेवा में रहते हुए अजाक्स के जिला सचिव, मध्यप्रदेश शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष, भारतीय बौद्ध महासभा के जिला महामंत्री और अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के संगठक जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं। इसके अलावा वे प्रगतिशील लेखक संघ और मध्यप्रदेश उर्दू अकादमी के भी सक्रिय सदस्य हैं। उन्हें समाज भूषण, साहित्य भूषण और नगर भूषण जैसे सम्मानों से नवाजा जा चुका है। विगत 50 वर्षों से उनकी रचनाएं और लेख प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो रहे हैं। श्री शेंडे ने पूर्व विधायक स्व. विठ्ठल राव महाले के निज सहायक के रूप में भी 5 साल तक अपनी सेवाएं दी थीं। उम्र के इस पड़ाव में भी वे धार्मिक, सामाजिक और साहित्यिक आयोजनों में सक्रिय रहते हैं। अपनी लेखनी के माध्यम से वे पाखंड, विषमता और दहशतगर्दी के खिलाफ निर्भीकता से आवाज उठाते रहे हैं। अपनी नियुक्ति पर उन्होंने राष्ट्रीय नेतृत्व सहित सभी पत्रकार और साहित्यकार साथियों का आभार व्यक्त किया है। अटल प्रगति जिला ब्युरो चिफ पांढुर्णा निलेश कलसकर/89660534521