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राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक जी गहलोत जाट कार्यालय सालवा कला में आए राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक जी गहलोत जाट कार्यालय सालवा कला में आए
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राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक जी गहलोत जाट कार्यालय सालवा कला में आए राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक जी गहलोत जाट कार्यालय सालवा कला में आए
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- साथीन गांव में आयोजित प्रतिभा सम्मान समारोह व सावण महोत्सव के तहत डां रूमा देवी बाड़मेर ने किया सम्बोधित। लाईव असलम खिलजी।1
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- अवैध लाईम स्टोन खनन पर नागौर पुलिस का बड़ा प्रहार: पांचौड़ी पुलिस ने एलएनटी मशीन और ट्रैक्टर-ट्रॉली को किया डिटेन एएसपी आशाराम चौधरी के निर्देशन में हुई कार्रवाई; अग्रिम कानूनी कार्रवाई हेतु खनिज विभाग को दी गई सूचना पांचौड़ी(नागौर):अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी) नागौर श्री आशा राम चौधरी (आर.पी.एस.) के निर्देशन में अवैध लाईम स्टोन खनन के विरुद्ध चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत पांचौड़ी थाना पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अवैध खनन और परिवहन में प्रयुक्त 01 एलएनटी (LNT) मशीन तथा पत्थर से भरी 01 ट्रैक्टर-ट्रॉली को डिटेन (जब्त) किया है। घटना का विवरण: सहायक पुलिस अधीक्षक (वृत्त नागौर) श्री जतिन जैन (आई.पी.एस.) के निकटतम सुपरविजन में पांचौड़ी थानाधिकारी उर्जा राम (उप निरीक्षक) मय पुलिस टीम क्षेत्र में गश्त पर थे। सरहद भेड़ से एलएनटी मशीन जब्त: गश्त के दौरान मौजा भेड़ स्थित खेत खसरा नंबर 2283/2275 के अंदर अवैध रूप से खनन करने में प्रयुक्त एलएनटी मशीन (चेसिस नंबर RSB-J-2-19 5859) खेत से लगभग 300 मीटर दूरी पर खड़ी पाई गई। वाहन मालिक धुन्धियाडी निवासी ओमप्रकाश जाट को मोबाइल के जरिए मौके पर बुलाने पर वह नहीं आया। इसके बाद पुलिस ने एलएनटी मशीन को डिटेन कर सुरक्षार्थ थाना परिसर में खड़ा करवा दिया। भुंडेल-निम्बोला मार्ग पर अवैध पत्थर से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली पकड़ी: तत्पश्चात थानाधिकारी मय टीम मौजा भेड़ से रवाना होकर भुंडेल पहुंचे। भुंडेल एवं निम्बोला के बीच पत्थरों से भरी एक ट्रैक्टर-ट्रॉली को रुकवाकर चालक से पूछताछ की गई। चालक ने अपना नाम चेनाराम पुत्र अनाराम जाति जाट (निवासी जीवणबेरा) बताया। ट्रॉली में भरे लाईम स्टोन पत्थरों के संबंध में वैध रवाना या दस्तावेज मांगने पर चालक कोई कागजात पेश नहीं कर सका। पुलिस ने ट्रैक्टर (नंबर RJ 21 RN 5398) को मय ट्रॉली जब्त कर लिया। खनिज विभाग को सौंपी जाएगी अग्रिम कार्रवाई: पांचौड़ी पुलिस ने जब्ती की संपूर्ण जानकारी खनिज विभाग नागौर के अभियंताओं को फोन के माध्यम से दे दी है। जब्त किए गए दोनों वाहनों को थाना परिसर में सुरक्षित खड़ा करवाया गया है और खनिज विभाग द्वारा मामले में अग्रिम नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।2
- Narayan ram jodihyasi naguar rajshatan 341001 आज की खबर लाइव वीडियो Narayan ram jodihyasi naguar rajshatan 341001 आज की खबर लाइव वीडियो देख लाइक शेयर जरुर करना धन्यवाद है?2
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- तीन जिलों की सीमा पर आस्था का महाधाम: कुड़की के नीलकंठ महादेव मंदिर में सावन भर उमड़ते हैं 5 लाख से अधिक श्रद्धालु कुड़की (ब्यावर)। नागौर, अजमेर और ब्यावर जिलों की सीमाओं पर स्थित कुड़की का प्राचीन नीलकंठ महादेव मंदिर सावन माह में शिवभक्तों की आस्था का सबसे बड़ा केंद्र बन जाता है। पहले पाली जिले में शामिल रहा कुड़की गांव नए जिलों के गठन के बाद अब ब्यावर जिले का हिस्सा है। पूरे सावन माह में यहां 5 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए पहुंचने का अनुमान है। हर सोमवार को विशाल मेले का आयोजन होता है, जिसमें 50 से 100 किलोमीटर दूर-दराज के गांवों सहित राजस्थान के विभिन्न क्षेत्रों से हजारों श्रद्धालु भगवान शिव का जलाभिषेक करने आते हैं। मंदिर से जुड़ी पौराणिक मान्यता के अनुसार, हजारों वर्ष पूर्व पुष्कर में भगवान विष्णु द्वारा आयोजित यज्ञ के दौरान राक्षसों से यज्ञ की रक्षा के लिए चारों दिशाओं में पवित्र कुंड स्थापित किए गए थे। इसी क्रम में इस स्थान पर भूमि से स्वयं शिवलिंग प्रकट हुआ और तभी से यह धाम नीलकंठ महादेव के नाम से प्रसिद्ध हो गया। मंदिर परिसर के समीप स्थित प्राचीन बावड़ी का जल आज भी श्रद्धालु भगवान शिव को अर्पित करते हैं। मान्यता है कि इस जल से जलाभिषेक करने पर मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। मंदिर में एक विशेष आकर्षण पुष्कर से प्राप्त तुलसी थाणा भी है। मंदिर के पुजारी बताते हैं कि पुष्कर के महंत विभूति पुरी महाराज ने वर्ष 1996 में पुष्कर मंदिर की ओर से यह विशेष पत्थर से निर्मित तुलसी थाणा मंदिर को भेंट किया था। इस पर आज भी अखंड दीप प्रज्वलित रहता है, जिसे श्रद्धालु विशेष श्रद्धा से नमन करते हैं। मंदिर से लगभग 500 मीटर दूर संत शिरोमणि मीराबाई का जन्मस्थल स्थित है, जहां मीराबाई एवं भगवान श्रीकृष्ण की विशाल प्रतिमाएं श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र हैं। यहां आने वाले श्रद्धालु मीरा जन्मस्थली, मीरा फोर्ट और नीलकंठ महादेव मंदिर के दर्शन कर अपनी यात्रा को पूर्ण मानते हैं। मंदिर में नाथ संप्रदाय के महंत पीढ़ी-दर-पीढ़ी पूजा-अर्चना और धार्मिक परंपराओं का निर्वहन करते आ रहे हैं। प्रतिदिन सुबह और शाम विशेष आरती होती है, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालु शामिल होकर भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। सावन माह में मंदिर परिसर "हर-हर महादेव" के जयघोष से गूंज उठता है। मंदिर परिसर चारों ओर हरियाली से घिरा हुआ है। यहां प्रतिदिन सैकड़ों मोर, कबूतर, चिड़ियां और अन्य पक्षी दाना चुगने आते हैं। मंदिर के पुजारियों द्वारा प्रतिदिन पक्षियों के लिए सैकड़ों किलो दाना डाला जाता है। दिनभर पक्षियों की मधुर चहचहाहट और मोरों की आवाज से पूरा परिसर भक्तिमय और प्राकृतिक वातावरण से सराबोर रहता है। मंदिर के पुजारी विक्रमनाथ ने बताया कि सावन माह में पूरे महीने श्रद्धालुओं का निरंतर आगमन रहता है और भगवान नीलकंठ महादेव के दरबार में आने वाले भक्त अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति की कामना करते हैं। उन्होंने बताया कि मंदिर परिसर के विकास का कार्य शुरू हो चुका है और लगभग 10 करोड़ रुपये की लागत से यहां भव्य मंदिर परिसर विकसित किया जाएगा, जिससे श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी। शिवरात्रि का मेला भी इस क्षेत्र की विशेष पहचान है। मेले में किसानों और पशुपालकों के लिए बांस से बने पारंपरिक कृषि एवं पशुपालन उपकरणों की सबसे अधिक बिक्री होती है। भेड़-बकरी पालकों के उपयोगी सामान खरीदने के लिए भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। वहीं पेठा यहां की प्रसिद्ध मिठाई है, जिसे श्रद्धालु प्रसाद के रूप में अपने साथ ले जाते हैं। बड़ी संख्या में नवविवाहित और युवा जोड़े भगवान शिव के समक्ष शीश नवाकर सुखी वैवाहिक जीवन और समृद्धि की कामना करते हैं। पूर्व सरपंच हरेंद्र सिंह, जो मीराबाई की 22वीं पीढ़ी के वंशज हैं, ने बताया कि नीलकंठ महादेव मंदिर और कुड़की किले का निर्माण लगभग एक ही कालखंड में हुआ था। उन्होंने बताया कि मीराबाई का जन्म वर्ष 1498 में कुड़की में हुआ था। बचपन से ही वे श्रीकृष्ण भक्ति में लीन थीं और बाद में उनका अधिकांश समय मेड़ता में राव दूदा के किले में बीता। आज मीरा फोर्ट में प्रतिदिन देश-विदेश से पर्यटक पहुंचते हैं और अधिकांश पर्यटक नीलकंठ महादेव मंदिर में भी दर्शन कर अपनी यात्रा को आध्यात्मिक अनुभव से जोड़ते हैं। धार्मिक आस्था, ऐतिहासिक विरासत और प्राकृतिक सौंदर्य का अद्भुत संगम बना यह मंदिर सावन माह में राजस्थान के प्रमुख शिवधामों में अपनी विशेष पहचान बनाए हुए है। तीन जिलों की सीमा पर आस्था का महाधाम: कुड़की के नीलकंठ महादेव मंदिर में सावन भर उमड़ते हैं 5 लाख से अधिक श्रद्धालु कुड़की (ब्यावर)। नागौर, अजमेर और ब्यावर जिलों की सीमाओं पर स्थित कुड़की का प्राचीन नीलकंठ महादेव मंदिर सावन माह में शिवभक्तों की आस्था का सबसे बड़ा केंद्र बन जाता है। पहले पाली जिले में शामिल रहा कुड़की गांव नए जिलों के गठन के बाद अब ब्यावर जिले का हिस्सा है। पूरे सावन माह में यहां 5 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए पहुंचने का अनुमान है। हर सोमवार को विशाल मेले का आयोजन होता है, जिसमें 50 से 100 किलोमीटर दूर-दराज के गांवों सहित राजस्थान के विभिन्न क्षेत्रों से हजारों श्रद्धालु भगवान शिव का जलाभिषेक करने आते हैं। मंदिर से जुड़ी पौराणिक मान्यता के अनुसार, हजारों वर्ष पूर्व पुष्कर में भगवान विष्णु द्वारा आयोजित यज्ञ के दौरान राक्षसों से यज्ञ की रक्षा के लिए चारों दिशाओं में पवित्र कुंड स्थापित किए गए थे। इसी क्रम में इस स्थान पर भूमि से स्वयं शिवलिंग प्रकट हुआ और तभी से यह धाम नीलकंठ महादेव के नाम से प्रसिद्ध हो गया। मंदिर परिसर के समीप स्थित प्राचीन बावड़ी का जल आज भी श्रद्धालु भगवान शिव को अर्पित करते हैं। मान्यता है कि इस जल से जलाभिषेक करने पर मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। मंदिर में एक विशेष आकर्षण पुष्कर से प्राप्त तुलसी थाणा भी है। मंदिर के पुजारी बताते हैं कि पुष्कर के महंत विभूति पुरी महाराज ने वर्ष 1996 में पुष्कर मंदिर की ओर से यह विशेष पत्थर से निर्मित तुलसी थाणा मंदिर को भेंट किया था। इस पर आज भी अखंड दीप प्रज्वलित रहता है, जिसे श्रद्धालु विशेष श्रद्धा से नमन करते हैं। मंदिर से लगभग 500 मीटर दूर संत शिरोमणि मीराबाई का जन्मस्थल स्थित है, जहां मीराबाई एवं भगवान श्रीकृष्ण की विशाल प्रतिमाएं श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र हैं। यहां आने वाले श्रद्धालु मीरा जन्मस्थली, मीरा फोर्ट और नीलकंठ महादेव मंदिर के दर्शन कर अपनी यात्रा को पूर्ण मानते हैं। मंदिर में नाथ संप्रदाय के महंत पीढ़ी-दर-पीढ़ी पूजा-अर्चना और धार्मिक परंपराओं का निर्वहन करते आ रहे हैं। प्रतिदिन सुबह और शाम विशेष आरती होती है, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालु शामिल होकर भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। सावन माह में मंदिर परिसर "हर-हर महादेव" के जयघोष से गूंज उठता है। मंदिर परिसर चारों ओर हरियाली से घिरा हुआ है। यहां प्रतिदिन सैकड़ों मोर, कबूतर, चिड़ियां और अन्य पक्षी दाना चुगने आते हैं। मंदिर के पुजारियों द्वारा प्रतिदिन पक्षियों के लिए सैकड़ों किलो दाना डाला जाता है। दिनभर 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