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नेपाल के मुस्तांग जिले में स्थित मुक्तिनाथ मंदिर, मुक्तिनाथ घाटी में समुद्र तल से लगभग 3,710 मीटर की ऊंचाई पर थोरोंग-ला दर्रे के तल पर मौजूद है। यह स्थान हिंदू और बौद्ध दोनों धर्मों के अनुयायियों के लिए एक अत्यंत पवित्र और पूजनीय तीर्थ स्थल माना जाता है। यह मंदिर विशेष रूप से भगवान विष्णु को समर्पित है और इसे मोक्ष प्राप्त करने का स्थान माना जाता है। इसे 108 दिव्य देशमों में से एक के रूप में मान्यता प्राप्त है, जो भगवान विष्णु के पवित्र मंदिरों में से हैं। मंदिर के पीछे 108 जल धाराएं (गौमुख) बहती हैं, और ऐसी मान्यता है कि इन पवित्र धाराओं में स्नान करने से सभी पाप धुल जाते हैं और व्यक्ति को मुक्ति (मोक्ष) प्राप्त होती है। इस पवित्र स्थल तक पहुंचने के लिए नेपाल का पोखरा शहर आधार बिंदु है, जहाँ से जोमसोम होते हुए मुक्तिनाथ पहुंचा जा सकता है। यह यात्रा 12,000 फीट से ऊपर 365 सीढ़ियां चढ़ने के बाद पूरी होती है, जिसके बाद भक्त दुनिया के सबसे बड़े मंदिरों में से एक, श्री मुक्तिनाथ जी के दर्शन कर पाते हैं।

17 hrs ago
user_Ramashankar sharma
Ramashankar sharma
Voice of people गढ़वा, गढ़वा, झारखंड•
17 hrs ago

नेपाल के मुस्तांग जिले में स्थित मुक्तिनाथ मंदिर, मुक्तिनाथ घाटी में समुद्र तल से लगभग 3,710 मीटर की ऊंचाई पर थोरोंग-ला दर्रे के तल पर मौजूद है। यह स्थान हिंदू और बौद्ध दोनों धर्मों के अनुयायियों के लिए एक अत्यंत पवित्र और पूजनीय तीर्थ स्थल माना जाता है। यह मंदिर विशेष रूप से भगवान विष्णु को समर्पित है और इसे मोक्ष प्राप्त करने का स्थान माना जाता है। इसे 108 दिव्य देशमों में से एक के रूप में मान्यता प्राप्त है, जो भगवान विष्णु के पवित्र मंदिरों में से हैं। मंदिर के पीछे 108 जल धाराएं (गौमुख) बहती हैं, और ऐसी मान्यता है कि इन पवित्र धाराओं में स्नान करने से सभी पाप धुल जाते हैं और व्यक्ति को मुक्ति (मोक्ष) प्राप्त होती है। इस पवित्र स्थल तक पहुंचने के लिए नेपाल का पोखरा शहर आधार बिंदु है, जहाँ से जोमसोम होते हुए मुक्तिनाथ पहुंचा जा सकता है। यह यात्रा 12,000 फीट से ऊपर 365 सीढ़ियां चढ़ने के बाद पूरी होती है, जिसके बाद भक्त दुनिया के सबसे बड़े मंदिरों में से एक, श्री मुक्तिनाथ जी के दर्शन कर पाते हैं।

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  • सोनभद्र जिले के दुद्धी विकासखंड में स्थित केवाल ग्राम पंचायत के प्राथमिक विद्यालय में आयोजित टीकाकरण अभियान के दौरान स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर ग्रामीणों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि आशा कार्यकर्ता द्वारा छोटे बच्चों को जिस वैक्सीन बॉक्स से टीके लगाए जा रहे थे, उस बॉक्स में कचरा भी मौजूद था। इस गंभीर लापरवाही को देखकर अभिभावकों में तत्काल आक्रोश फैल गया, जिसके बाद उन्होंने मौके पर ही अपना विरोध दर्ज कराया। ग्रामीणों ने दृढ़ता से कहा है कि बच्चों के स्वास्थ्य से किसी भी प्रकार का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और स्वास्थ्य विभाग की इस घोर लापरवाही ने मासूम बच्चों की सुरक्षा पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। उन्होंने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की है। यह टीकाकरण कार्यक्रम दुद्धी उप स्वास्थ्य केंद्र द्वारा आयोजित किया गया था। मामले की जानकारी मिलने पर संबंधित चिकित्साधिकारी, डॉ. शाह आलम ने जांच कराने का आश्वासन दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि यदि जांच में किसी भी कर्मचारी की लापरवाही सामने आती है, तो नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। ग्रामीणों ने एक बार फिर मांग की है कि टीकाकरण जैसी संवेदनशील स्वास्थ्य सेवाओं में गुणवत्ता और स्वच्छता के सभी निर्धारित मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए, ताकि बच्चों की सुरक्षा से कोई समझौता न हो सके। अब सभी की निगाहें स्वास्थ्य विभाग की विस्तृत जांच रिपोर्ट और उसके बाद होने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं।
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    सोनभद्र जिले के दुद्धी विकासखंड में स्थित केवाल ग्राम पंचायत के प्राथमिक विद्यालय में आयोजित टीकाकरण अभियान के दौरान स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर ग्रामीणों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि आशा कार्यकर्ता द्वारा छोटे बच्चों को जिस वैक्सीन बॉक्स से टीके लगाए जा रहे थे, उस बॉक्स में कचरा भी मौजूद था।

इस गंभीर लापरवाही को देखकर अभिभावकों में तत्काल आक्रोश फैल गया, जिसके बाद उन्होंने मौके पर ही अपना विरोध दर्ज कराया। ग्रामीणों ने दृढ़ता से कहा है कि बच्चों के स्वास्थ्य से किसी भी प्रकार का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और स्वास्थ्य विभाग की इस घोर लापरवाही ने मासूम बच्चों की सुरक्षा पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। उन्होंने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

यह टीकाकरण कार्यक्रम दुद्धी उप स्वास्थ्य केंद्र द्वारा आयोजित किया गया था। मामले की जानकारी मिलने पर संबंधित चिकित्साधिकारी, डॉ. शाह आलम ने जांच कराने का आश्वासन दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि यदि जांच में किसी भी कर्मचारी की लापरवाही सामने आती है, तो नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। ग्रामीणों ने एक बार फिर मांग की है कि टीकाकरण जैसी संवेदनशील स्वास्थ्य सेवाओं में गुणवत्ता और स्वच्छता के सभी निर्धारित मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए, ताकि बच्चों की सुरक्षा से कोई समझौता न हो सके। अब सभी की निगाहें स्वास्थ्य विभाग की विस्तृत जांच रिपोर्ट और उसके बाद होने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं।
    user_Jitendr Prshad
    Jitendr Prshad
    Court reporter दुद्धी, सोनभद्र, उत्तर प्रदेश•
    4 hrs ago
  • एक सोशल मीडिया पोस्ट में एक उपयोगकर्ता ने अपने गाँव के नज़ारे को साझा किया है। पोस्ट में प्रस्तुत यह दृश्य निजी रूप से साझा किया गया है।
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    एक सोशल मीडिया पोस्ट में एक उपयोगकर्ता ने अपने गाँव के नज़ारे को साझा किया है। पोस्ट में प्रस्तुत यह दृश्य निजी रूप से साझा किया गया है।
    user_Sintu nandan
    Sintu nandan
    Grain Shop डुमरिया, गया, बिहार•
    19 hrs ago
  • सोनभद्र जनपद के जुगैल वन रेंज अंतर्गत सेमिया गांव के छितीरपुरवा टोला स्थित एक चेकडैम में शनिवार को लोगों में उस समय कौतूहल फैल गया, जब एक साथ करीब 35 मगरमच्छों के शिशु दिखाई दिए। यह दुर्लभ दृश्य देखने के लिए मौके पर ग्रामीणों की भारी भीड़ जुट गई। जानकारी के अनुसार, चेकडैम में पानी का स्तर कम होने के बाद मगरमच्छों के बच्चों की आवाजें सुनाई देने लगीं। आवाज सुनकर पहुंचे ग्रामीणों ने देखा कि चेकडैम के किनारे बड़ी संख्या में मगरमच्छों के नवजात शिशु मौजूद थे, जिसके बाद यह खबर पूरे क्षेत्र में फैल गई और मौके पर लोगों का जमावड़ा लग गया। ग्रामीणों द्वारा सूचना दिए जाने पर वन विभाग की टीम तत्काल घटनास्थल पर पहुंची। स्थानीय मल्लाहों के सहयोग से सभी शिशु मगरमच्छों का बेहद सावधानी और सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू किया गया। वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि सभी मगरमच्छ शिशुओं को उनके प्राकृतिक आवास को ध्यान में रखते हुए सोन नदी के गहरे जलाशय में सुरक्षित छोड़ दिया गया है, ताकि वे प्राकृतिक वातावरण में सुरक्षित रूप से विकसित हो सकें। वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि यदि कहीं मगरमच्छ या उसके शिशु दिखाई दें तो उनसे दूरी बनाए रखें और तत्काल वन विभाग को सूचना दें। विभाग ने वन्यजीवों के संरक्षण में आमजन के सहयोग को अत्यंत आवश्यक बताया है।
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    सोनभद्र जनपद के जुगैल वन रेंज अंतर्गत सेमिया गांव के छितीरपुरवा टोला स्थित एक चेकडैम में शनिवार को लोगों में उस समय कौतूहल फैल गया, जब एक साथ करीब 35 मगरमच्छों के शिशु दिखाई दिए। यह दुर्लभ दृश्य देखने के लिए मौके पर ग्रामीणों की भारी भीड़ जुट गई। जानकारी के अनुसार, चेकडैम में पानी का स्तर कम होने के बाद मगरमच्छों के बच्चों की आवाजें सुनाई देने लगीं। आवाज सुनकर पहुंचे ग्रामीणों ने देखा कि चेकडैम के किनारे बड़ी संख्या में मगरमच्छों के नवजात शिशु मौजूद थे, जिसके बाद यह खबर पूरे क्षेत्र में फैल गई और मौके पर लोगों का जमावड़ा लग गया।

ग्रामीणों द्वारा सूचना दिए जाने पर वन विभाग की टीम तत्काल घटनास्थल पर पहुंची। स्थानीय मल्लाहों के सहयोग से सभी शिशु मगरमच्छों का बेहद सावधानी और सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू किया गया। वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि सभी मगरमच्छ शिशुओं को उनके प्राकृतिक आवास को ध्यान में रखते हुए सोन नदी के गहरे जलाशय में सुरक्षित छोड़ दिया गया है, ताकि वे प्राकृतिक वातावरण में सुरक्षित रूप से विकसित हो सकें।

वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि यदि कहीं मगरमच्छ या उसके शिशु दिखाई दें तो उनसे दूरी बनाए रखें और तत्काल वन विभाग को सूचना दें। विभाग ने वन्यजीवों के संरक्षण में आमजन के सहयोग को अत्यंत आवश्यक बताया है।
    user_कालचिंतन समाचार
    कालचिंतन समाचार
    Obra, Sonbhadra•
    2 hrs ago
  • लातेहार के चंदनडीह स्थित आजसू पार्टी के जिला कार्यालय में रविवार को नव नियुक्त जिला कमेटी के पदाधिकारियों के सम्मान में एक समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर, जिला अध्यक्ष अमित पांडेय ने सभी पदाधिकारियों का फूल-माला पहनाकर स्वागत किया। उन्होंने बताया कि केंद्रीय कमेटी में नई जिम्मेदारियां मिलने के बाद जिला कमेटी का पुनर्गठन किया गया है। अमित पांडेय ने नव पदाधिकारियों से संगठन की नीतियों और जनहित के कार्यों को पूरी निष्ठा से आगे बढ़ाने का आह्वान किया। साथ ही, कार्यक्रम में संगठन को मजबूत बनाने का संकल्प भी दोहराया गया। इस समारोह में कई पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
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    लातेहार के चंदनडीह स्थित आजसू पार्टी के जिला कार्यालय में रविवार को नव नियुक्त जिला कमेटी के पदाधिकारियों के सम्मान में एक समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर, जिला अध्यक्ष अमित पांडेय ने सभी पदाधिकारियों का फूल-माला पहनाकर स्वागत किया। उन्होंने बताया कि केंद्रीय कमेटी में नई जिम्मेदारियां मिलने के बाद जिला कमेटी का पुनर्गठन किया गया है। अमित पांडेय ने नव पदाधिकारियों से संगठन की नीतियों और जनहित के कार्यों को पूरी निष्ठा से आगे बढ़ाने का आह्वान किया। साथ ही, कार्यक्रम में संगठन को मजबूत बनाने का संकल्प भी दोहराया गया। इस समारोह में कई पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
    user_Ram Kumar
    Ram Kumar
    Photographer लातेहार, लातेहार, झारखंड•
    2 hrs ago
  • बिहार के भोजपुर जिले के अंतर्गत आने वाला जवईनिया गांव गंगा नदी के भीषण कटाव और विनाशकारी बाढ़ के कारण लगभग खत्म हो चुका है। इस त्रासदी में गांव के सैकड़ों घर नदी में समा गए हैं, और पूरा इलाका जलमग्न होकर रेत में बदल गया है। इस स्थिति के चलते गांव के लगभग सभी घर तबाह हो गए हैं, जिससे भारी विस्थापन हुआ है और लोग बेघर होकर तटबंधों तथा राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं। नदी की चपेट में आने से उपजाऊ कृषि भूमि भी पूरी तरह से नष्ट हो गई है, जिससे स्थानीय निवासियों ने अपनी आजीविका खो दी है। प्रशासन ने बेघर हुए परिवारों को लगभग ₹7,000 से ₹1.20 लाख तक का मुआवजा देने और उन्हें सुरक्षित स्थानों पर बसाने की योजना बनाई है। हालांकि, कई ग्रामीणों की शिकायत है कि उन्हें अभी तक पूरी सहायता प्राप्त नहीं हुई है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए, स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों ने केवल राहत सामग्री की जगह, नदी के कटाव को रोकने के लिए एक पक्के तटबंध के निर्माण और प्रभावित परिवारों के लिए उचित पुनर्वास की मांग की है।
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    बिहार के भोजपुर जिले के अंतर्गत आने वाला जवईनिया गांव गंगा नदी के भीषण कटाव और विनाशकारी बाढ़ के कारण लगभग खत्म हो चुका है। इस त्रासदी में गांव के सैकड़ों घर नदी में समा गए हैं, और पूरा इलाका जलमग्न होकर रेत में बदल गया है। इस स्थिति के चलते गांव के लगभग सभी घर तबाह हो गए हैं, जिससे भारी विस्थापन हुआ है और लोग बेघर होकर तटबंधों तथा राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं।

नदी की चपेट में आने से उपजाऊ कृषि भूमि भी पूरी तरह से नष्ट हो गई है, जिससे स्थानीय निवासियों ने अपनी आजीविका खो दी है। प्रशासन ने बेघर हुए परिवारों को लगभग ₹7,000 से ₹1.20 लाख तक का मुआवजा देने और उन्हें सुरक्षित स्थानों पर बसाने की योजना बनाई है। हालांकि, कई ग्रामीणों की शिकायत है कि उन्हें अभी तक पूरी सहायता प्राप्त नहीं हुई है।

इस गंभीर स्थिति को देखते हुए, स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों ने केवल राहत सामग्री की जगह, नदी के कटाव को रोकने के लिए एक पक्के तटबंध के निर्माण और प्रभावित परिवारों के लिए उचित पुनर्वास की मांग की है।
    user_Ramashankar sharma
    Ramashankar sharma
    Voice of people गढ़वा, गढ़वा, झारखंड•
    20 hrs ago
  • गरहवा जिले के रंका प्रखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत चुतरू के उर्दू मध्य विद्यालय परिसर में राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान का शुभारंभ किया गया। इस अभियान के तहत रविवार सुबह दस बजे 0 से 5 वर्ष तक के बच्चों को पोलियो रोधी दवा की दो बूंद पिलाई गईं। चुतरू पंचायत के सक्रिय उपमुखिया जियाउद्दीन अंसारी ने व्यक्तिगत रूप से बच्चों को पोलियो ड्रॉप पिलाकर इस महत्वपूर्ण पहल की शुरुआत की। स्वास्थ्य विभाग ने सभी अभिभावकों से अपील की है कि 28 जून 2026 से शुरू हुए इस पल्स पोलियो अभियान के दौरान हर बच्चे को खुराक दिलाई जाए, ताकि देश को पोलियो मुक्त बनाए रखने का लक्ष्य कायम रहे। इस अवसर पर उपमुखिया जियाउद्दीन अंसारी ने अभिभावकों से अपने सभी छोटे बच्चों को पोलियो की खुराक अवश्य दिलाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि "हर बच्चे का स्वस्थ और सुरक्षित भविष्य हमारी प्राथमिकता है" और पोलियो जैसी गंभीर बीमारी से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका समय पर 'दो बूंद जिंदगी की' पिलाना है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कोई भी बच्चा इस जीवनरक्षक दवा से वंचित न रहे, और सभी अभिभावकों से स्वास्थ्य विभाग के इस अभियान को सफल बनाने में सहयोग करने की अपील की। कार्यक्रम के दौरान सहिया किस्मती देवी और प्रेमा देवी सहित अन्य स्वास्थ्य कर्मियों ने भी बच्चों को पोलियो की दवा पिलाई और लोगों को पोलियो उन्मूलन के प्रति जागरूक किया। उपस्थित लोगों ने इस जनहितकारी अभियान की सराहना करते हुए इसे सफल बनाने का संकल्प लिया। क्षेत्र में उपमुखिया जियाउद्दीन अंसारी की सक्रिय भागीदारी और जनसेवा की भावना की स्थानीय लोगों ने भी खूब प्रशंसा की। उनका कहना है कि जियाउद्दीन अंसारी हमेशा स्वास्थ्य, शिक्षा और जनकल्याण से जुड़े कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं तथा आम जनता के हित में निरंतर कार्य करते रहते हैं। अंत में, लोगों को "दो बूंद जिंदगी के" – 0 से 5 वर्ष तक के हर बच्चे को पोलियो की दवा अवश्य पिलाने का संदेश दिया गया।
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    गरहवा जिले के रंका प्रखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत चुतरू के उर्दू मध्य विद्यालय परिसर में राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान का शुभारंभ किया गया। इस अभियान के तहत रविवार सुबह दस बजे 0 से 5 वर्ष तक के बच्चों को पोलियो रोधी दवा की दो बूंद पिलाई गईं। चुतरू पंचायत के सक्रिय उपमुखिया जियाउद्दीन अंसारी ने व्यक्तिगत रूप से बच्चों को पोलियो ड्रॉप पिलाकर इस महत्वपूर्ण पहल की शुरुआत की। स्वास्थ्य विभाग ने सभी अभिभावकों से अपील की है कि 28 जून 2026 से शुरू हुए इस पल्स पोलियो अभियान के दौरान हर बच्चे को खुराक दिलाई जाए, ताकि देश को पोलियो मुक्त बनाए रखने का लक्ष्य कायम रहे।

इस अवसर पर उपमुखिया जियाउद्दीन अंसारी ने अभिभावकों से अपने सभी छोटे बच्चों को पोलियो की खुराक अवश्य दिलाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि "हर बच्चे का स्वस्थ और सुरक्षित भविष्य हमारी प्राथमिकता है" और पोलियो जैसी गंभीर बीमारी से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका समय पर 'दो बूंद जिंदगी की' पिलाना है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कोई भी बच्चा इस जीवनरक्षक दवा से वंचित न रहे, और सभी अभिभावकों से स्वास्थ्य विभाग के इस अभियान को सफल बनाने में सहयोग करने की अपील की। कार्यक्रम के दौरान सहिया किस्मती देवी और प्रेमा देवी सहित अन्य स्वास्थ्य कर्मियों ने भी बच्चों को पोलियो की दवा पिलाई और लोगों को पोलियो उन्मूलन के प्रति जागरूक किया।

उपस्थित लोगों ने इस जनहितकारी अभियान की सराहना करते हुए इसे सफल बनाने का संकल्प लिया। क्षेत्र में उपमुखिया जियाउद्दीन अंसारी की सक्रिय भागीदारी और जनसेवा की भावना की स्थानीय लोगों ने भी खूब प्रशंसा की। उनका कहना है कि जियाउद्दीन अंसारी हमेशा स्वास्थ्य, शिक्षा और जनकल्याण से जुड़े कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं तथा आम जनता के हित में निरंतर कार्य करते रहते हैं। अंत में, लोगों को "दो बूंद जिंदगी के" – 0 से 5 वर्ष तक के हर बच्चे को पोलियो की दवा अवश्य पिलाने का संदेश दिया गया।
    user_Sunil singh
    Sunil singh
    रंका, गढ़वा, झारखंड•
    17 hrs ago
  • सोनभद्र जनपद के दुद्धी तहसील अंतर्गत घिवाही ग्राम पंचायत निवासी सुरेंद्र कुशवाहा का परिवार पिछले लगभग 40 वर्षों से एक जर्जर कच्चे मकान में रहने को मजबूर है। बरसात के मौसम में इस मकान की स्थिति और भी बदतर हो जाती है, जिससे परिवार पर हर समय किसी हादसे का खतरा मंडराता रहता है। ग्रामीणों ने बताया कि सुरेंद्र कुशवाहा का यह मकान ग्राम प्रधान के आवास से महज 500 मीटर की दूरी पर स्थित है, फिर भी अब तक उन्हें पक्का आवास नहीं मिल पाया। कुछ ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि जनप्रतिनिधि चुनाव के समय विकास और आवास दिलाने के वादे तो करते हैं, लेकिन चुनाव जीतने के बाद वे इन समस्याओं पर अपेक्षित ध्यान नहीं देते। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए, ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने आग्रह किया है कि पात्रता के अनुसार सुरेंद्र कुशवाहा के परिवार को शीघ्र सरकारी आवास योजना का लाभ उपलब्ध कराया जाए, ताकि उनका परिवार एक सुरक्षित आवास में रह सके।
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    सोनभद्र जनपद के दुद्धी तहसील अंतर्गत घिवाही ग्राम पंचायत निवासी सुरेंद्र कुशवाहा का परिवार पिछले लगभग 40 वर्षों से एक जर्जर कच्चे मकान में रहने को मजबूर है। बरसात के मौसम में इस मकान की स्थिति और भी बदतर हो जाती है, जिससे परिवार पर हर समय किसी हादसे का खतरा मंडराता रहता है।

ग्रामीणों ने बताया कि सुरेंद्र कुशवाहा का यह मकान ग्राम प्रधान के आवास से महज 500 मीटर की दूरी पर स्थित है, फिर भी अब तक उन्हें पक्का आवास नहीं मिल पाया। कुछ ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि जनप्रतिनिधि चुनाव के समय विकास और आवास दिलाने के वादे तो करते हैं, लेकिन चुनाव जीतने के बाद वे इन समस्याओं पर अपेक्षित ध्यान नहीं देते।

इस गंभीर स्थिति को देखते हुए, ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने आग्रह किया है कि पात्रता के अनुसार सुरेंद्र कुशवाहा के परिवार को शीघ्र सरकारी आवास योजना का लाभ उपलब्ध कराया जाए, ताकि उनका परिवार एक सुरक्षित आवास में रह सके।
    user_Jitendr Prshad
    Jitendr Prshad
    Court reporter दुद्धी, सोनभद्र, उत्तर प्रदेश•
    4 hrs ago
  • रंका प्रखंड की दूधवल पंचायत अंतर्गत 12 डीह गांव में आज रविवार को एक जंगली हाथी ने भारी उत्पात मचाया। हाथी ने गांव में एक पक्के मकान और उससे जुड़ी दुकान को बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया, जिससे दुकान में रखा लाखों रुपये का सामान नष्ट हो गया। इस घटना के बाद पीड़ित परिवार के सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है और पूरे गांव में दहशत का माहौल है। पीड़ित रामजी साव ने रविवार सुबह करीब 9:00 बजे बताया कि जंगली हाथी ने उनके पक्के मकान पर हमला कर दिया, जिससे मकान का एक बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया। साथ ही, दुकान में रखा लगभग 36 हजार रुपये मूल्य का फ्रीजर और अन्य लाखों रुपये का सामान भी टूट-फूट कर बर्बाद हो गया। रामजी साव ने कहा कि इस भारी नुकसान के कारण उनके परिवार के सामने गहरा आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया है, क्योंकि वे दुकान चलाकर ही अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं। घटना के बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंचे और हुए नुकसान का जायजा लिया। ग्रामीणों ने सरकार और वन विभाग से पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा देने की मांग की है, ताकि वे दोबारा अपना रोजगार शुरू कर सकें। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि पिछले कुछ समय से रंका प्रखंड की दूधवल और चुतरु पंचायतों में जंगली हाथियों का लगातार आतंक बना हुआ है। ये हाथी आए दिन खेतों, घरों और दुकानों को नुकसान पहुंचा रहे हैं, जिससे लोगों में भय व्याप्त है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि वन विभाग हाथियों को आबादी वाले क्षेत्रों से हटाने और उनकी गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण करने में सफल नहीं हो पा रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन और वन विभाग से अपील की है कि हाथियों के आतंक से प्रभावित क्षेत्रों में स्थायी समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं तथा प्रभावित परिवारों को शीघ्र उचित मुआवजा उपलब्ध कराया जाए, ताकि उन्हें राहत मिल सके।
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    रंका प्रखंड की दूधवल पंचायत अंतर्गत 12 डीह गांव में आज रविवार को एक जंगली हाथी ने भारी उत्पात मचाया। हाथी ने गांव में एक पक्के मकान और उससे जुड़ी दुकान को बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया, जिससे दुकान में रखा लाखों रुपये का सामान नष्ट हो गया। इस घटना के बाद पीड़ित परिवार के सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है और पूरे गांव में दहशत का माहौल है।

पीड़ित रामजी साव ने रविवार सुबह करीब 9:00 बजे बताया कि जंगली हाथी ने उनके पक्के मकान पर हमला कर दिया, जिससे मकान का एक बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया। साथ ही, दुकान में रखा लगभग 36 हजार रुपये मूल्य का फ्रीजर और अन्य लाखों रुपये का सामान भी टूट-फूट कर बर्बाद हो गया। रामजी साव ने कहा कि इस भारी नुकसान के कारण उनके परिवार के सामने गहरा आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया है, क्योंकि वे दुकान चलाकर ही अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं।

घटना के बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंचे और हुए नुकसान का जायजा लिया। ग्रामीणों ने सरकार और वन विभाग से पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा देने की मांग की है, ताकि वे दोबारा अपना रोजगार शुरू कर सकें। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि पिछले कुछ समय से रंका प्रखंड की दूधवल और चुतरु पंचायतों में जंगली हाथियों का लगातार आतंक बना हुआ है। ये हाथी आए दिन खेतों, घरों और दुकानों को नुकसान पहुंचा रहे हैं, जिससे लोगों में भय व्याप्त है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि वन विभाग हाथियों को आबादी वाले क्षेत्रों से हटाने और उनकी गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण करने में सफल नहीं हो पा रहा है।

ग्रामीणों ने प्रशासन और वन विभाग से अपील की है कि हाथियों के आतंक से प्रभावित क्षेत्रों में स्थायी समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं तथा प्रभावित परिवारों को शीघ्र उचित मुआवजा उपलब्ध कराया जाए, ताकि उन्हें राहत मिल सके।
    user_Sunil singh
    Sunil singh
    रंका, गढ़वा, झारखंड•
    17 hrs ago
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