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मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले से हर दिन हजारों की संख्या में लोग रोजगार की तलाश में बड़े पैमाने पर पलायन कर रहे हैं। उपलब्ध तस्वीरों में यह स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि लोग अपने सिर पर बोरिया रखे हुए हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें रेल के डिब्बों में जगह नहीं मिल पा रही है, जिससे उनकी मुश्किलें और बढ़ रही हैं।
Jamil khan
मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले से हर दिन हजारों की संख्या में लोग रोजगार की तलाश में बड़े पैमाने पर पलायन कर रहे हैं। उपलब्ध तस्वीरों में यह स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि लोग अपने सिर पर बोरिया रखे हुए हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें रेल के डिब्बों में जगह नहीं मिल पा रही है, जिससे उनकी मुश्किलें और बढ़ रही हैं।
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- मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले से हर दिन हजारों की संख्या में लोग रोजगार की तलाश में बड़े पैमाने पर पलायन कर रहे हैं। उपलब्ध तस्वीरों में यह स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि लोग अपने सिर पर बोरिया रखे हुए हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें रेल के डिब्बों में जगह नहीं मिल पा रही है, जिससे उनकी मुश्किलें और बढ़ रही हैं।1
- जतारा विधायक हरिशंकर खटीक के खिलाफ सोशल मीडिया पर एक युवक द्वारा आपत्तिजनक टिप्पणी करने का मामला सामने आया है। इस घटना के बाद पुलिस ने आरोपी युवक को पकड़ लिया है।1
- टीकमगढ़ जिले की ग्राम पंचायत अस्तौन में आजाद समाज पार्टी का कार्यालय खुल चुका है। जानकारी के अनुसार, पार्टी द्वारा इस कार्यालय के माध्यम से अपने कार्यों को तेजी से संचालित किया जा रहा है।1
- बुंदेलखंड के टीकमगढ़ जिले में रोज़गार का गंभीर संकट बना हुआ है, जिसके कारण प्रतिदिन हज़ारों की संख्या में लोग अपने गांव और परिवार छोड़कर दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, गुजरात, महाराष्ट्र समेत अन्य राज्यों की ओर पलायन करने को मजबूर हैं। इस व्यापक पलायन की दर्दनाक तस्वीरें खरगापुर रेलवे स्टेशन पर देखने को मिल रही हैं, जहां ट्रेनों में चढ़ने के लिए यात्रियों के बीच भारी अफरा-तफरी और जद्दोजहद मची रहती है। खरगापुर रेलवे स्टेशन पर रोज़ाना मजदूर, किसान और युवा अपने सिर पर गठरी और हाथों में सामान लेकर ट्रेन का इंतज़ार करते हैं। ट्रेन के प्लेटफॉर्म पर पहुंचते ही, सामान्य डिब्बों में जगह बनाने के लिए लोगों में होड़ मच जाती है। हालात इतने विकट हैं कि यात्रियों को डिब्बों में घुसने के लिए भी संघर्ष करना पड़ता है। कई लोग दरवाजों पर लटककर यात्रा करने को मजबूर होते हैं, जबकि डिब्बों के अंदर यात्री एक-दूसरे से सटकर बैठे और खड़े दिखाई देते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जिले के अधिकांश गांवों में रोज़गार के साधनों का घोर अभाव है। खेती भी अब मौसम की अनिश्चितता और बढ़ती लागत के कारण घाटे का सौदा बनती जा रही है। गांवों में न तो कोई बड़ा उद्योग स्थापित है और न ही ऐसा कोई स्थायी रोज़गार उपलब्ध है, जिससे परिवार का भरण-पोषण हो सके। इसी मजबूरी के चलते लोग अपने घर, परिवार और छोटे बच्चों को छोड़कर दूसरे राज्यों में मजदूरी करने निकल पड़ते हैं। हर साल की तरह इस वर्ष भी पलायन का यह सिलसिला तेज़ हो गया है, जिससे सबसे ज़्यादा गरीब और मजदूर परिवार प्रभावित हो रहे हैं, जिनके पास रोज़गार का कोई स्थानीय विकल्प नहीं है। लोगों की मांग है कि यदि जिले में उद्योग स्थापित किए जाएं, रोज़गारपरक योजनाओं का प्रभावी ढंग से क्रियान्वयन हो और युवाओं को स्थानीय स्तर पर काम मिले, तो उन्हें अपना घर छोड़कर सैकड़ों किलोमीटर दूर जाने की विवशता से मुक्ति मिल सकती है। खरगापुर रेलवे स्टेशन की ये तस्वीरें टीकमगढ़ जिले की उस भयावह हकीकत को दर्शाती हैं, जहां रोज़गार की तलाश में हज़ारों लोग हर दिन अपना गांव छोड़ने को मजबूर हैं, सिर पर गठरी और आँखों में बेहतर भविष्य की उम्मीद लिए, लेकिन दिल में परिवार से बिछड़ने का दर्द।1
- टीकमगढ़ जिले के मोहनगढ़ थाना क्षेत्र के कंचनपुरा गांव में देर रात एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। दो दर्जन से अधिक लोगों ने एक दलित परिवार के घर में घुसकर उन पर लाठी-डंडों और कुल्हाड़ियों से हमला कर दिया, जब वे सो रहे थे।2