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*बघेली-बुंदेली-पचेली का साहित्यिक संगम, लोकभाषाओं की मिठास से सराबोर हुई कवि गोष्ठी* *पिथौराबाद में त्रिभाषीय आयोजन में गूंजे लोकजीवन, किसान पीड़ा और समकालीन सरोकारों के स्वर* सतना। पिथौराबाद में बघेली, बुंदेली और पचेली लोकबोलियों का अनूठा साहित्यिक संगम देखने को मिला। वरिष्ठ साहित्यकार पद्मश्री बाबूलाल दाहिया के संयोजन में आयोजित त्रिभाषीय कवि गोष्ठी में तीनों लोकबोलियों के रचनाकारों ने कविता, गीत और दोहों के माध्यम से लोकजीवन, खेती-किसानी, सामाजिक सरोकार और समकालीन परिस्थितियों को स्वर दिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ बुंदेली कवि राजेंद्र सिंह परमार ने की, जबकि संचालन राजेंद्र सिंह ठाकुर ने किया। गोष्ठी की शुरुआत राजेंद्र सिंह ठाकुर की रचनात्मक प्रस्तुति से हुई। उन्होंने विभिन्न कवियों की रचनाओं के संदर्भों के साथ ‘पानी बरसाना’ कविता का पाठ किया। समरजीत वर्मा ने चुनावी व्यवस्था पर व्यंग्य करते हुए ‘9 पोलिंग पर 10 वोट’ कविता सुनाई। उनकी गजल ‘चोर-चोर मौसेरे भाई, सगे भाई से हबै लड़ाई’ ने समकालीन राजनीतिक परिस्थितियों पर व्यंग्यात्मक टिप्पणी की। अखिलेश खरे ‘अखिल’ ने पचेली बोली की विशेषताओं को कविता और दोहों के माध्यम से प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। डॉ.कंधीलाल हल्दकार ने ‘एक जमाना जब रहै ढूंरबन से भर सार’ जैसे दोहों और गीतों के माध्यम से पचेली की भाषाई पहचान और उसके शब्द-संसार को सामने रखा। उनकी रचनाओं में पचेली की सहजता के साथ हिंदी, उर्दू और अंग्रेजी सहित विभिन्न भाषाओं के प्रभाव की झलक भी दिखाई दी। गजेंद्र कुमार बख्शी ने ‘अपढ़ युवक का विवाह’ सहित हास्य रचनाओं से श्रोताओं को खूब गुदगुदाया। विजय कुमार बागरी ने ‘बगदर चामें रात भर कानन में भन्नाए’ जैसी रचनाओं के माध्यम से खेती-किसानी और ग्रामीण जीवन की तस्वीर लोक मुहावरों के साथ प्रस्तुत की। बघेली कवि अजीत प्रताप सिंह ‘कुंवर’ ने किसानों की पीड़ा और वर्तमान परिस्थितियों को स्वर देते हुए ‘सुनो हो राजा मालिक, अब जनतंत्र हमार’ कविता का पाठ किया। वरिष्ठ बुंदेली कवि राजेंद्र सिंह परमार ने ‘नोनी लगत बुंदेली’ सहित बुंदेली गीतों और कविताओं के माध्यम से बुंदेली भाषा की मिठास, लोकजीवन और सहज संवेदनाओं को अभिव्यक्ति दी। उनकी प्रस्तुति ने बुंदेली की विशिष्ट लोकधुन और शब्द-सौंदर्य का प्रभावशाली परिचय कराया। अपने संबोधन में पद्मश्री बाबूलाल दाहिया ने पचेली बोली को व्यापक साहित्यिक पहचान और मान्यता दिए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि लोकबोलियां केवल बोलचाल का माध्यम नहीं हैं, बल्कि किसी क्षेत्र की संस्कृति, परंपरा, इतिहास और लोकस्मृति की जीवंत धरोहर हैं। उन्होंने बघेली कविता का पाठ भी किया। गोष्ठी में तीनों लोकबोलियों के रचनाकारों के बीच आत्मीय साहित्यिक संवाद देखने को मिला। अलग-अलग अंचलों की बोलियां होने के बावजूद उनकी संवेदनाओं में लोकजीवन, प्रकृति, किसान और समाज की साझा तस्वीर उभरकर सामने आई। *कृषि संग्रहालय और बीज बैंक देख अभिभूत हुए कवि* गोष्ठी के बाद साहित्यकारों ने पद्मश्री बाबूलाल दाहिया द्वारा विकसित भूले-बिसरे कृषि यंत्रों के संग्रहालय और परंपरागत अनाजों के बीज बैंक का अवलोकन किया। यहां संरक्षित पुराने कृषि उपकरणों, ग्रामीण जीवन से जुड़ी वस्तुओं और पारंपरिक अनाजों की दुर्लभ किस्मों को देखकर अभिभूत नजर आए। उन्होंने दाहिया के इस संरक्षण कार्य को लोकसंस्कृति, कृषि परंपरा और जैव विविधता को बचाने की महत्वपूर्ण पहल बताया।

1 hr ago
user_अनुपम दाहिया
अनुपम दाहिया
Local News Reporter उंचाहरा, सतना, मध्य प्रदेश•
1 hr ago

*बघेली-बुंदेली-पचेली का साहित्यिक संगम, लोकभाषाओं की मिठास से सराबोर हुई कवि गोष्ठी* *पिथौराबाद में त्रिभाषीय आयोजन में गूंजे लोकजीवन, किसान पीड़ा और समकालीन सरोकारों के स्वर* सतना। पिथौराबाद में बघेली, बुंदेली और पचेली लोकबोलियों का अनूठा साहित्यिक संगम देखने को मिला। वरिष्ठ साहित्यकार पद्मश्री बाबूलाल दाहिया के संयोजन में आयोजित त्रिभाषीय कवि गोष्ठी में तीनों लोकबोलियों के रचनाकारों ने कविता, गीत और दोहों के माध्यम से लोकजीवन, खेती-किसानी, सामाजिक सरोकार और समकालीन परिस्थितियों को स्वर दिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ बुंदेली कवि राजेंद्र सिंह परमार ने की, जबकि संचालन राजेंद्र सिंह ठाकुर ने किया। गोष्ठी की शुरुआत राजेंद्र सिंह ठाकुर की रचनात्मक प्रस्तुति से हुई। उन्होंने विभिन्न कवियों की रचनाओं के संदर्भों के साथ ‘पानी बरसाना’ कविता का पाठ किया। समरजीत वर्मा ने चुनावी व्यवस्था पर व्यंग्य करते हुए ‘9 पोलिंग पर 10 वोट’ कविता सुनाई। उनकी गजल ‘चोर-चोर मौसेरे भाई, सगे भाई से हबै लड़ाई’ ने समकालीन राजनीतिक परिस्थितियों पर व्यंग्यात्मक टिप्पणी की। अखिलेश खरे ‘अखिल’ ने पचेली बोली की विशेषताओं को कविता और दोहों

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के माध्यम से प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। डॉ.कंधीलाल हल्दकार ने ‘एक जमाना जब रहै ढूंरबन से भर सार’ जैसे दोहों और गीतों के माध्यम से पचेली की भाषाई पहचान और उसके शब्द-संसार को सामने रखा। उनकी रचनाओं में पचेली की सहजता के साथ हिंदी, उर्दू और अंग्रेजी सहित विभिन्न भाषाओं के प्रभाव की झलक भी दिखाई दी। गजेंद्र कुमार बख्शी ने ‘अपढ़ युवक का विवाह’ सहित हास्य रचनाओं से श्रोताओं को खूब गुदगुदाया। विजय कुमार बागरी ने ‘बगदर चामें रात भर कानन में भन्नाए’ जैसी रचनाओं के माध्यम से खेती-किसानी और ग्रामीण जीवन की तस्वीर लोक मुहावरों के साथ प्रस्तुत की। बघेली कवि अजीत प्रताप सिंह ‘कुंवर’ ने किसानों की पीड़ा और वर्तमान परिस्थितियों को स्वर देते हुए ‘सुनो हो राजा मालिक, अब जनतंत्र हमार’ कविता का पाठ किया। वरिष्ठ बुंदेली कवि राजेंद्र सिंह परमार ने ‘नोनी लगत बुंदेली’ सहित बुंदेली गीतों और कविताओं के माध्यम से बुंदेली भाषा की मिठास, लोकजीवन और सहज संवेदनाओं को अभिव्यक्ति दी। उनकी प्रस्तुति ने बुंदेली की विशिष्ट लोकधुन

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और शब्द-सौंदर्य का प्रभावशाली परिचय कराया। अपने संबोधन में पद्मश्री बाबूलाल दाहिया ने पचेली बोली को व्यापक साहित्यिक पहचान और मान्यता दिए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि लोकबोलियां केवल बोलचाल का माध्यम नहीं हैं, बल्कि किसी क्षेत्र की संस्कृति, परंपरा, इतिहास और लोकस्मृति की जीवंत धरोहर हैं। उन्होंने बघेली कविता का पाठ भी किया। गोष्ठी में तीनों लोकबोलियों के रचनाकारों के बीच आत्मीय साहित्यिक संवाद देखने को मिला। अलग-अलग अंचलों की बोलियां होने के बावजूद उनकी संवेदनाओं में लोकजीवन, प्रकृति, किसान और समाज की साझा तस्वीर उभरकर सामने आई। *कृषि संग्रहालय और बीज बैंक देख अभिभूत हुए कवि* गोष्ठी के बाद साहित्यकारों ने पद्मश्री बाबूलाल दाहिया द्वारा विकसित भूले-बिसरे कृषि यंत्रों के संग्रहालय और परंपरागत अनाजों के बीज बैंक का अवलोकन किया। यहां संरक्षित पुराने कृषि उपकरणों, ग्रामीण जीवन से जुड़ी वस्तुओं और पारंपरिक अनाजों की दुर्लभ किस्मों को देखकर अभिभूत नजर आए। उन्होंने दाहिया के इस संरक्षण कार्य को लोकसंस्कृति, कृषि परंपरा और जैव विविधता को बचाने की महत्वपूर्ण पहल बताया।

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  • *मैहर में निकली भव्य तिरंगा यात्रा मैहर विधायक सहित प्रशासनिक अधिकारियों ने एवं सैकड़ों छात्र-छात्राओं ने लिया हिस्सा* *मैहर में निकली भव्य तिरंगा यात्रा मैहर विधायक सहित प्रशासनिक अधिकारियों ने एवं सैकड़ों छात्र-छात्राओं ने लिया हिस्सा* मैहर - स्वतंत्रता दिवस के शुभ अवसर पर देशभक्ति के रंग में रंगे मैहर में भव्य तिरंगा यात्रा निकाली गई। यात्रा का शुभारंभ मैहर के उस्ताद अलाउद्दीन खां स्टेडियम से हुआ, जिसमें मैहर विधायक श्रीकांत चतुर्वेदी, कलेक्टर बिदिशा मुखर्जी, पुलिस अधीक्षक अवधेश प्रताप सिंह, एसडीएम दिव्या पटेल, सीएसपी महेंद्र सिंह एवं तहसीलदार जितेंद्र पटेल सहित प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। तिरंगा यात्रा में सैकड़ों की संख्या में छात्र-छात्राओं ने हाथों में राष्ट्रीय ध्वज लेकर उत्साहपूर्वक भाग लिया। पूरे मार्ग में देशभक्ति के नारों और तिरंगे की शान ने माहौल को राष्ट्रभक्ति से सराबोर कर दिया। यात्रा शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए घंटाघर पहुंची, जहां इसका समापन किया गया। इस दौरान विद्यार्थियों और नागरिकों में खासा उत्साह देखने को मिला। तिरंगा यात्रा ने मैहर की एकता, देशभक्ति और राष्ट्रीय गौरव का संदेश दिया।
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    *मैहर में निकली भव्य तिरंगा यात्रा मैहर विधायक सहित प्रशासनिक अधिकारियों ने एवं सैकड़ों छात्र-छात्राओं ने लिया हिस्सा*
*मैहर में निकली भव्य तिरंगा यात्रा मैहर विधायक सहित प्रशासनिक अधिकारियों ने एवं सैकड़ों छात्र-छात्राओं ने लिया हिस्सा*
मैहर - स्वतंत्रता दिवस के शुभ अवसर पर देशभक्ति के रंग में रंगे मैहर में भव्य तिरंगा यात्रा निकाली गई। यात्रा का शुभारंभ मैहर के उस्ताद अलाउद्दीन खां स्टेडियम से हुआ, जिसमें मैहर विधायक श्रीकांत चतुर्वेदी, कलेक्टर बिदिशा मुखर्जी, पुलिस अधीक्षक अवधेश प्रताप सिंह, एसडीएम दिव्या पटेल, सीएसपी महेंद्र सिंह एवं तहसीलदार जितेंद्र पटेल सहित प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।
तिरंगा यात्रा में सैकड़ों की संख्या में छात्र-छात्राओं ने हाथों में राष्ट्रीय ध्वज लेकर उत्साहपूर्वक भाग लिया। पूरे मार्ग में देशभक्ति के नारों और तिरंगे की शान ने माहौल को राष्ट्रभक्ति से सराबोर कर दिया।
यात्रा शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए घंटाघर पहुंची, जहां इसका समापन किया गया। इस दौरान विद्यार्थियों और नागरिकों में खासा उत्साह देखने को मिला। तिरंगा यात्रा ने मैहर की एकता, देशभक्ति और राष्ट्रीय गौरव का संदेश दिया।
    user_Satyaprakash Media Maihar
    Satyaprakash Media Maihar
    Photographer मैहर, सतना, मध्य प्रदेश•
    1 hr ago
  • अमरपाटन में रहवासियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल 32 घंटे से जारी: मर्चुरी शिफ्टिंग और नाली निर्माण समेत कई मांगों को लेकर धरना मैहर (मध्य भारत न्यूज़): मैहर जिले के अमरपाटन नगर परिषद अंतर्गत वार्ड नंबर 5 के निवासियों का बेमियादी धरना लगातार दूसरे दिन भी जारी रहा। 32 घंटे से अधिक समय से चल रहे इस आंदोलन में स्थानीय नागरिकों का गुस्सा प्रशासन की अनदेखी के खिलाफ लगातार बढ़ता जा रहा है। रहवासियों का आरोप है कि नगर परिषद को पूर्व में ज्ञापन सौंपकर निर्धारित समय-सीमा में समस्याओं के समाधान की मांग की गई थी, लेकिन कोई कदम न उठाए जाने के कारण मजबूरन उन्हें अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठना पड़ा। मुख्य मांगें: मर्चुरी की शिफ्टिंग: वार्ड नंबर 5 में निर्माणाधीन मर्चुरी (शवगृह) को यहां से हटाकर सिविल अस्पताल परिसर में स्थापित किया जाए। जलभराव से मुक्ति: क्षेत्र में पानी भराव की समस्या के स्थायी समाधान के लिए नाली निर्माण कराया जाए। सौंदर्यीकरण: वार्ड स्थित डॉ. भीमराव आंबेडकर की मूर्ति का सौंदर्यीकरण किया जाए। 30 घंटे बाद भी नहीं पहुंचे जिम्मेदार अफसर धरने पर बैठे लोगों ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि प्रदर्शन शुरू हुए 30 घंटे से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन प्रशासन या नगर परिषद का कोई भी जिम्मेदार अधिकारी उनकी सुध लेने नहीं पहुंचा है। इस उपेक्षा से स्थानीय जनता में भारी असंतोष है। प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी, आंदोलन जारी रखने की चेतावनी प्रदर्शन के दौरान आक्रोशित नागरिकों ने नगर परिषद और स्थानीय प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे धर्मेंद्र बंसल और सिद्धार्थ नालंदा ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस और लिखित कार्रवाई नहीं होती, तब तक यह अनिश्चितकालीन आंदोलन समाप्त नहीं होगा।
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    अमरपाटन में रहवासियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल 32 घंटे से जारी: मर्चुरी शिफ्टिंग और नाली निर्माण समेत कई मांगों को लेकर धरना
मैहर (मध्य भारत न्यूज़): मैहर जिले के अमरपाटन नगर परिषद अंतर्गत वार्ड नंबर 5 के निवासियों का बेमियादी धरना लगातार दूसरे दिन भी जारी रहा। 32 घंटे से अधिक समय से चल रहे इस आंदोलन में स्थानीय नागरिकों का गुस्सा प्रशासन की अनदेखी के खिलाफ लगातार बढ़ता जा रहा है। रहवासियों का आरोप है कि नगर परिषद को पूर्व में ज्ञापन सौंपकर निर्धारित समय-सीमा में समस्याओं के समाधान की मांग की गई थी, लेकिन कोई कदम न उठाए जाने के कारण मजबूरन उन्हें अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठना पड़ा।
मुख्य मांगें:
मर्चुरी की शिफ्टिंग: वार्ड नंबर 5 में निर्माणाधीन मर्चुरी (शवगृह) को यहां से हटाकर सिविल अस्पताल परिसर में स्थापित किया जाए।
जलभराव से मुक्ति: क्षेत्र में पानी भराव की समस्या के स्थायी समाधान के लिए नाली निर्माण कराया जाए।
सौंदर्यीकरण: वार्ड स्थित डॉ. भीमराव आंबेडकर की मूर्ति का सौंदर्यीकरण किया जाए।
30 घंटे बाद भी नहीं पहुंचे जिम्मेदार अफसर
धरने पर बैठे लोगों ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि प्रदर्शन शुरू हुए 30 घंटे से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन प्रशासन या नगर परिषद का कोई भी जिम्मेदार अधिकारी उनकी सुध लेने नहीं पहुंचा है। इस उपेक्षा से स्थानीय जनता में भारी असंतोष है।
प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी, आंदोलन जारी रखने की चेतावनी
प्रदर्शन के दौरान आक्रोशित नागरिकों ने नगर परिषद और स्थानीय प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे धर्मेंद्र बंसल और सिद्धार्थ नालंदा ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस और लिखित कार्रवाई नहीं होती, तब तक यह अनिश्चितकालीन आंदोलन समाप्त नहीं होगा।
    user_MADHYA BHARAT NEWS
    MADHYA BHARAT NEWS
    Local News Reporter मैहर, सतना, मध्य प्रदेश•
    3 hrs ago
  • सुप्रभात, आपका दिन मंगलमय हो! 🌹 जगत जननी माँ "शारदा भवानी" जी के मैहर स्थित *श्री शारदा शक्तिपीठ* में आज दि. 13 अगस्त *प्रातः कालीन दिव्य श्रृंगार दर्शन।* जय माई की 🙏🏻 सुप्रभात, आपका दिन मंगलमय हो! 🌹 जगत जननी माँ "शारदा भवानी" जी के मैहर स्थित *श्री शारदा शक्तिपीठ* में आज दि. 13 अगस्त *प्रातः कालीन दिव्य श्रृंगार दर्शन।* जय माई की 🙏🏻
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    सुप्रभात, आपका दिन मंगलमय हो! 🌹

जगत जननी माँ "शारदा भवानी" जी के मैहर स्थित *श्री शारदा शक्तिपीठ* में आज दि. 13 अगस्त *प्रातः कालीन दिव्य श्रृंगार दर्शन।* जय माई की 🙏🏻
सुप्रभात, आपका दिन मंगलमय हो! 🌹
जगत जननी माँ "शारदा भवानी" जी के मैहर स्थित *श्री शारदा शक्तिपीठ* में आज दि. 13 अगस्त *प्रातः कालीन दिव्य श्रृंगार दर्शन।* जय माई की 🙏🏻
    user_Satyanarayan tiwari
    Satyanarayan tiwari
    Local News Reporter मैहर•
    4 hrs ago
  • हर घर तिरंगा अभियान अंतर्गत 13 अगस्त को प्रातः 10:30 बजे से उस्ताद अल्लाउद्दीन खां स्टेडियम से निकाली जाने वाली तिरंगा यात्रा में सम्मिलित होने की पुलिस अधीक्षक श्री अवधेश प्रताप सिंह की गणमान्य नागरिकों, समाजसेवियों से अपील ।
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    हर घर तिरंगा अभियान अंतर्गत 13 अगस्त को प्रातः 10:30 बजे से उस्ताद अल्लाउद्दीन खां स्टेडियम से निकाली जाने वाली तिरंगा यात्रा में सम्मिलित होने की पुलिस अधीक्षक श्री अवधेश प्रताप सिंह की गणमान्य नागरिकों, समाजसेवियों से अपील ।
    user_Sharda Shrivastava
    Sharda Shrivastava
    पत्रकार मैहर, सतना, मध्य प्रदेश•
    14 hrs ago
  • हर घर तिरंगा अभियान अंतर्गत 13 अगस्त को प्रातः 10:30 बजे से उस्ताद अल्लाउद्दीन खां स्टेडियम से निकाली जाने वाली तिरंगा यात्रा में सम्मिलित होने की पुलिस अधीक्षक श्री अवधेश प्रताप सिंह की गणमान्य नागरिकों, समाजसेवियों से अपील ।
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    हर घर तिरंगा अभियान अंतर्गत 13 अगस्त को प्रातः 10:30 बजे से उस्ताद अल्लाउद्दीन खां स्टेडियम से निकाली जाने वाली तिरंगा यात्रा में सम्मिलित होने की पुलिस अधीक्षक श्री अवधेश प्रताप सिंह की गणमान्य नागरिकों, समाजसेवियों से अपील ।
    user_गोवर्धन गुप्ता
    गोवर्धन गुप्ता
    Local News Reporter मैहर, सतना, मध्य प्रदेश•
    17 hrs ago
  • *बघेली-बुंदेली-पचेली का साहित्यिक संगम, लोकभाषाओं की मिठास से सराबोर हुई कवि गोष्ठी* *पिथौराबाद में त्रिभाषीय आयोजन में गूंजे लोकजीवन, किसान पीड़ा और समकालीन सरोकारों के स्वर* सतना। पिथौराबाद में बघेली, बुंदेली और पचेली लोकबोलियों का अनूठा साहित्यिक संगम देखने को मिला। वरिष्ठ साहित्यकार पद्मश्री बाबूलाल दाहिया के संयोजन में आयोजित त्रिभाषीय कवि गोष्ठी में तीनों लोकबोलियों के रचनाकारों ने कविता, गीत और दोहों के माध्यम से लोकजीवन, खेती-किसानी, सामाजिक सरोकार और समकालीन परिस्थितियों को स्वर दिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ बुंदेली कवि राजेंद्र सिंह परमार ने की, जबकि संचालन राजेंद्र सिंह ठाकुर ने किया। गोष्ठी की शुरुआत राजेंद्र सिंह ठाकुर की रचनात्मक प्रस्तुति से हुई। उन्होंने विभिन्न कवियों की रचनाओं के संदर्भों के साथ ‘पानी बरसाना’ कविता का पाठ किया। समरजीत वर्मा ने चुनावी व्यवस्था पर व्यंग्य करते हुए ‘9 पोलिंग पर 10 वोट’ कविता सुनाई। उनकी गजल ‘चोर-चोर मौसेरे भाई, सगे भाई से हबै लड़ाई’ ने समकालीन राजनीतिक परिस्थितियों पर व्यंग्यात्मक टिप्पणी की। अखिलेश खरे ‘अखिल’ ने पचेली बोली की विशेषताओं को कविता और दोहों के माध्यम से प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। डॉ.कंधीलाल हल्दकार ने ‘एक जमाना जब रहै ढूंरबन से भर सार’ जैसे दोहों और गीतों के माध्यम से पचेली की भाषाई पहचान और उसके शब्द-संसार को सामने रखा। उनकी रचनाओं में पचेली की सहजता के साथ हिंदी, उर्दू और अंग्रेजी सहित विभिन्न भाषाओं के प्रभाव की झलक भी दिखाई दी। गजेंद्र कुमार बख्शी ने ‘अपढ़ युवक का विवाह’ सहित हास्य रचनाओं से श्रोताओं को खूब गुदगुदाया। विजय कुमार बागरी ने ‘बगदर चामें रात भर कानन में भन्नाए’ जैसी रचनाओं के माध्यम से खेती-किसानी और ग्रामीण जीवन की तस्वीर लोक मुहावरों के साथ प्रस्तुत की। बघेली कवि अजीत प्रताप सिंह ‘कुंवर’ ने किसानों की पीड़ा और वर्तमान परिस्थितियों को स्वर देते हुए ‘सुनो हो राजा मालिक, अब जनतंत्र हमार’ कविता का पाठ किया। वरिष्ठ बुंदेली कवि राजेंद्र सिंह परमार ने ‘नोनी लगत बुंदेली’ सहित बुंदेली गीतों और कविताओं के माध्यम से बुंदेली भाषा की मिठास, लोकजीवन और सहज संवेदनाओं को अभिव्यक्ति दी। उनकी प्रस्तुति ने बुंदेली की विशिष्ट लोकधुन और शब्द-सौंदर्य का प्रभावशाली परिचय कराया। अपने संबोधन में पद्मश्री बाबूलाल दाहिया ने पचेली बोली को व्यापक साहित्यिक पहचान और मान्यता दिए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि लोकबोलियां केवल बोलचाल का माध्यम नहीं हैं, बल्कि किसी क्षेत्र की संस्कृति, परंपरा, इतिहास और लोकस्मृति की जीवंत धरोहर हैं। उन्होंने बघेली कविता का पाठ भी किया। गोष्ठी में तीनों लोकबोलियों के रचनाकारों के बीच आत्मीय साहित्यिक संवाद देखने को मिला। अलग-अलग अंचलों की बोलियां होने के बावजूद उनकी संवेदनाओं में लोकजीवन, प्रकृति, किसान और समाज की साझा तस्वीर उभरकर सामने आई। *कृषि संग्रहालय और बीज बैंक देख अभिभूत हुए कवि* गोष्ठी के बाद साहित्यकारों ने पद्मश्री बाबूलाल दाहिया द्वारा विकसित भूले-बिसरे कृषि यंत्रों के संग्रहालय और परंपरागत अनाजों के बीज बैंक का अवलोकन किया। यहां संरक्षित पुराने कृषि उपकरणों, ग्रामीण जीवन से जुड़ी वस्तुओं और पारंपरिक अनाजों की दुर्लभ किस्मों को देखकर अभिभूत नजर आए। उन्होंने दाहिया के इस संरक्षण कार्य को लोकसंस्कृति, कृषि परंपरा और जैव विविधता को बचाने की महत्वपूर्ण पहल बताया।
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    *बघेली-बुंदेली-पचेली का साहित्यिक संगम, लोकभाषाओं की मिठास से सराबोर हुई कवि गोष्ठी* 
*पिथौराबाद में त्रिभाषीय आयोजन में गूंजे लोकजीवन, किसान पीड़ा और समकालीन सरोकारों के स्वर* 
सतना। पिथौराबाद में बघेली, बुंदेली और पचेली लोकबोलियों का अनूठा साहित्यिक संगम देखने को मिला। वरिष्ठ साहित्यकार पद्मश्री बाबूलाल दाहिया के संयोजन में आयोजित त्रिभाषीय कवि गोष्ठी में तीनों लोकबोलियों के रचनाकारों ने कविता, गीत और दोहों के माध्यम से लोकजीवन, खेती-किसानी, सामाजिक सरोकार और समकालीन परिस्थितियों को स्वर दिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ बुंदेली कवि राजेंद्र सिंह परमार ने की, जबकि संचालन राजेंद्र सिंह ठाकुर ने किया। गोष्ठी की शुरुआत राजेंद्र सिंह ठाकुर की रचनात्मक प्रस्तुति से हुई। उन्होंने विभिन्न कवियों की रचनाओं के संदर्भों के साथ ‘पानी बरसाना’ कविता का पाठ किया। समरजीत वर्मा ने चुनावी व्यवस्था पर व्यंग्य करते हुए ‘9 पोलिंग पर 10 वोट’ कविता सुनाई। उनकी गजल ‘चोर-चोर मौसेरे भाई, सगे भाई से हबै लड़ाई’ ने समकालीन राजनीतिक परिस्थितियों पर व्यंग्यात्मक टिप्पणी की। अखिलेश खरे ‘अखिल’ ने पचेली बोली की विशेषताओं को कविता और दोहों के माध्यम से प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। डॉ.कंधीलाल हल्दकार ने ‘एक जमाना जब रहै ढूंरबन से भर सार’ जैसे दोहों और गीतों के माध्यम से पचेली की भाषाई पहचान और उसके शब्द-संसार को सामने रखा। उनकी रचनाओं में पचेली की सहजता के साथ हिंदी, उर्दू और अंग्रेजी सहित विभिन्न भाषाओं के प्रभाव की झलक भी दिखाई दी। गजेंद्र कुमार बख्शी ने ‘अपढ़ युवक का विवाह’ सहित हास्य रचनाओं से श्रोताओं को खूब गुदगुदाया। विजय कुमार बागरी ने ‘बगदर चामें रात भर कानन में भन्नाए’ जैसी रचनाओं के माध्यम से खेती-किसानी और ग्रामीण जीवन की तस्वीर लोक मुहावरों के साथ प्रस्तुत की। बघेली कवि अजीत प्रताप सिंह ‘कुंवर’ ने किसानों की पीड़ा और वर्तमान परिस्थितियों को स्वर देते हुए ‘सुनो हो राजा मालिक, अब जनतंत्र हमार’ कविता का पाठ किया। वरिष्ठ बुंदेली कवि राजेंद्र सिंह परमार ने ‘नोनी लगत बुंदेली’ सहित बुंदेली गीतों और कविताओं के माध्यम से बुंदेली भाषा की मिठास, लोकजीवन और सहज संवेदनाओं को अभिव्यक्ति दी। उनकी प्रस्तुति ने बुंदेली की विशिष्ट लोकधुन और शब्द-सौंदर्य का प्रभावशाली परिचय कराया।
अपने संबोधन में पद्मश्री बाबूलाल दाहिया ने पचेली बोली को व्यापक साहित्यिक पहचान और मान्यता दिए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि लोकबोलियां केवल बोलचाल का माध्यम नहीं हैं, बल्कि किसी क्षेत्र की संस्कृति, परंपरा, इतिहास और लोकस्मृति की जीवंत धरोहर हैं। उन्होंने बघेली कविता का पाठ भी किया। गोष्ठी में तीनों लोकबोलियों के रचनाकारों के बीच आत्मीय साहित्यिक संवाद देखने को मिला। अलग-अलग अंचलों की बोलियां होने के बावजूद उनकी संवेदनाओं में लोकजीवन, प्रकृति, किसान और समाज की साझा तस्वीर उभरकर सामने आई।
*कृषि संग्रहालय और बीज बैंक देख अभिभूत हुए कवि* 
गोष्ठी के बाद साहित्यकारों ने पद्मश्री बाबूलाल दाहिया द्वारा विकसित भूले-बिसरे कृषि यंत्रों के संग्रहालय और परंपरागत अनाजों के बीज बैंक का अवलोकन किया। यहां संरक्षित पुराने कृषि उपकरणों, ग्रामीण जीवन से जुड़ी वस्तुओं और पारंपरिक अनाजों की दुर्लभ किस्मों को देखकर अभिभूत नजर आए। उन्होंने दाहिया के इस संरक्षण कार्य को लोकसंस्कृति, कृषि परंपरा और जैव विविधता को बचाने की महत्वपूर्ण पहल बताया।
    user_अनुपम दाहिया
    अनुपम दाहिया
    Local News Reporter उंचाहरा, सतना, मध्य प्रदेश•
    1 hr ago
  • घर में घुसा 8 फीट लंबा अजगर, डायल-112 को मिली सूचना; पुलिस ने वन विभाग की मदद से कराया रेस्क्यू* *घर में घुसा 8 फीट लंबा अजगर, डायल-112 को मिली सूचना; पुलिस ने वन विभाग की मदद से कराया रेस्क्यू* सतना। जिले के नागौद थाना क्षेत्र की पोड़ी चौकी अंतर्गत नंदहा गांव में बुधवार देर रात उस समय हड़कंप मच गया, जब एक बुनकर परिवार के घर में करीब 8 फीट लंबा अजगर घुस गया। घर में विशालकाय अजगर को देखकर परिवार के लोगों ने तत्काल 112 में पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलते ही पोड़ी चौकी पुलिस मौके पर पहुंची और वन विभाग को जानकारी दी। इसके बाद वन विभाग की टीम बुलाकर अजगर का सुरक्षित रेस्क्यू कराया गया। काफी मशक्कत के बाद अजगर को पकड़कर सुरक्षित स्थान पर रखा गया। प्रधान आरक्षक आरके कुशवाहा ने बताया कि देर रात डायल-112 वाहन को नंदहा गांव में बुनकर परिवार के घर में भारी-भरकम अजगर घुसने की सूचना मिली थी। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और वन विभाग की मदद से अजगर को सुरक्षित बाहर निकलवाकर उसका रेस्क्यू कराया गया और आज अजगर को सुरक्षित जंगल में छोड़ दिया जाएगा ।
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    घर में घुसा 8 फीट लंबा अजगर, डायल-112 को मिली सूचना; पुलिस ने वन विभाग की मदद से कराया रेस्क्यू*
*घर में घुसा 8 फीट लंबा अजगर, डायल-112 को मिली सूचना; पुलिस ने वन विभाग की मदद से कराया रेस्क्यू* 
सतना। जिले के नागौद थाना क्षेत्र की पोड़ी चौकी अंतर्गत नंदहा गांव में बुधवार देर रात  उस समय हड़कंप मच गया, जब एक बुनकर परिवार के घर में करीब 8 फीट लंबा अजगर घुस गया। घर में विशालकाय अजगर को देखकर परिवार के लोगों ने तत्काल 112 में पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलते ही पोड़ी चौकी पुलिस मौके पर पहुंची और वन विभाग को जानकारी दी। इसके बाद वन विभाग की टीम बुलाकर  अजगर का सुरक्षित रेस्क्यू कराया गया। काफी मशक्कत के बाद अजगर को पकड़कर सुरक्षित स्थान पर रखा गया।
प्रधान आरक्षक आरके कुशवाहा ने बताया कि देर रात डायल-112 वाहन को नंदहा गांव में बुनकर परिवार के घर में भारी-भरकम अजगर घुसने की सूचना मिली थी। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और वन विभाग की मदद से अजगर को सुरक्षित बाहर निकलवाकर उसका रेस्क्यू कराया  गया और आज अजगर को  सुरक्षित जंगल में  छोड़ दिया जाएगा ।
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    अनुपम दाहिया
    Local News Reporter उंचाहरा, सतना, मध्य प्रदेश•
    1 hr ago
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