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JKBOSE 10th Result 2026 OUT जम्मू-कश्मीर बोर्ड (JKBOSE) ने Class 10 का रिजल्ट जारी कर दिया है Date: 21 April 2026 Check करें: jkresultsStudents अपना Roll Number डालकर तुरंत result देख सकते हैं Website slow हो सकती है — घबराने की जरूरत नहीं Top Scorers के लिए मौका अगर आप अपने बच्चे की achievement मीडिया में दिखाना चाहते हैं, तो उनका photo और details हमें WhatsApp करें WhatsApp: 9797428273 अच्छे अंक हासिल करने वाले छात्र हमसे संपर्क कर सकते हैं — आपकी सफलता को मिलेगी पहचान #JKBOSE #10thResult #Topper #JammuKashmir #BreakingNews #ExploreNews #TillTheEndNews

2 hrs ago
user_Till The End News
Till The End News
Local News Reporter मजालता, उधमपुर, जम्मू और कश्मीर•
2 hrs ago

JKBOSE 10th Result 2026 OUT जम्मू-कश्मीर बोर्ड (JKBOSE) ने Class 10 का रिजल्ट जारी कर दिया है Date: 21 April 2026 Check करें: jkresultsStudents अपना Roll Number डालकर तुरंत result देख सकते हैं Website slow हो सकती है — घबराने की जरूरत नहीं Top Scorers के लिए मौका अगर आप अपने बच्चे की achievement मीडिया में दिखाना चाहते हैं, तो उनका photo और details हमें WhatsApp करें WhatsApp: 9797428273 अच्छे अंक हासिल करने वाले छात्र हमसे संपर्क कर सकते हैं — आपकी सफलता को मिलेगी पहचान #JKBOSE #10thResult #Topper #JammuKashmir #BreakingNews #ExploreNews #TillTheEndNews

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  • Post by Till The End News
    1
    Post by Till The End News
    user_Till The End News
    Till The End News
    Local News Reporter मजालता, उधमपुर, जम्मू और कश्मीर•
    2 hrs ago
  • jkbose 10th class result declare
    1
    jkbose 10th class result declare
    user_Jammu De Voice - Danesh Thakur
    Jammu De Voice - Danesh Thakur
    Local News Reporter Jammu, Jammu and Kashmir•
    1 hr ago
  • कांगड़ा के कच्छयारी चौक पर कार और बाइक की टक्कर हुई, लेकिन राहत की बात यह रही कि बाइक सवार सुरक्षित है
    1
    कांगड़ा के कच्छयारी चौक पर कार और बाइक की टक्कर हुई, लेकिन राहत की बात यह रही कि बाइक सवार सुरक्षित है
    user_SHARMA AS
    SHARMA AS
    its A Digital news website and web tv कांगड़ा, कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश•
    5 hrs ago
  • Post by Waqar Khan
    1
    Post by Waqar Khan
    user_Waqar Khan
    Waqar Khan
    मेंढर, पुंछ, जम्मू और कश्मीर•
    15 hrs ago
  • A Car Thief in #Punjab, India, Doesn't Stop Despite Facing Resistance from People
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    A Car Thief in #Punjab, India, Doesn't Stop Despite Facing Resistance from People
    user_Mudasir Manzoor
    Mudasir Manzoor
    Local News Reporter पंपोर, पुलवामा, जम्मू और कश्मीर•
    5 hrs ago
  • सुजानपुर जिला हमीरपुर में कम वर्षा और पथरीली जमीन वाले क्षेत्रों में भी गन्ने की खेती की जा सकती है। आम तौर पर यह अविश्वसनीय प्रतीत हो सकता है, लेकिन विकास खंड बमसन के गांव हरनेड़ के प्रगतिशील किसान ललित कालिया ने इसे संभव करके दिखाया है। पूरी तरह प्राकृतिक खेती करने वाले ललित कालिया ने मात्र 18 मरले जमीन पर गन्ना लगाकर पहले ही सीजन में लगभग 70 किलोग्राम शक्कर तैयार की है। प्राकृतिक खेती में कई बड़ी उपलब्धियां हासिल कर चुके ललित कालिया, गांव चमनेड ने आतमा परियोजना के अधिकारियों के साथ उपायुक्त गंधर्वा राठौड़ से भेंट करके उन्हें प्राकृतिक खेती के उत्साहजनक परिणामों से अवगत करवाया। ललित कालिया ने बताया कि उन्होंने कुछ वर्ष पूर्व प्राकृतिक खेती आरंभ की थी। आतमा परियोजना के अधिकारियों की प्रेरणा और प्रदेश सरकार के निरंतर प्रोत्साहन से अब गांव हरनेड़ के लगभग 52 परिवार पूरी तरह से प्राकृतिक खेती से जुड़ चुके हैं। ये किसान परिवार गेहूं और मक्की के अलावा पारंपरिक मोटे अनाज, पारंपरिक दलहनी फसलें तथा अन्य फसलें प्राकृतिक विधि से ही उगा रहे हैं। ललित कालिया ने बताया कि उनके दादा-परदादा कभी गन्ना भी लगाते थे और खाने में इसी की शक्कर का प्रयोग करते थे, लेकिन वर्तमान दौर में यहां गन्ने की खेती की कल्पना भी नहीं की जा सकती थी। ललित कालिया ने बताया कि पिछले सीजन में उन्होंने अपने 18 मरले खेत में प्राकृतिक खेती से ही गन्ना लगाने का निर्णय लिया तो सभी लोग इसे असंभव ही बता रहे थे। देखते ही देखते गन्ने की फसल तैयार होने लगी और इसकी कटाई के बाद उन्होंने पेराई भी स्वयं करवाई तथा इससे लगभग 70 किलोग्राम शक्कर निकली। ललित कालिया ने बताया कि उन्होंने गन्ने के खेत में एक बार भी सिंचाई नहीं की। जंगली सूअर ने आधी फसल उजाड़ दी थी। इसके बावजूद उन्हें अच्छी पैदावार हुई। अगले सीजन के लिए उन्हें दोबारा बिजाई की आवश्यकता भी नहीं है, क्योंकि गन्ने का यह बीज 5-7 साल तक खेत में रह जाता है। इसलिए, गन्ने की खेती जिला हमीरपुर के किसानों के लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकती है। ललित कालिया ने बताया कि वह भारत के प्राचीन पारंपरिक बीजों के संरक्षण के लिए विशेष प्रयास कर रहे हैं। ये पारंपरिक किस्में काफी पौष्टिक होती हैं और मौसम की विपरीत परिस्थितियों को भी सहन करने में सक्षम होती हैं। उपायुक्त हमीरपुर गंधर्वा राठौड़ ने कहा कि प्रदेश सरकार प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहन देने के लिए काम कर रही है । उन्होंने बताया कि उन्होंने कई क्षेत्रों में प्राकृतिक खेती कर रहे किसानों से मुलाकात की । उन्होंने कहा कि जिला में आत्मा प्रोजेक्ट के माध्यम से प्राकृतिक खेती के अच्छे परिणाम देखने को मिल रहे हैं और किसान भी इस ओर आकर्षित हो रहे हैं । उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती के फसल की गुणवत्ता बेहतर है और प्रोष्टिक भी है ।
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    सुजानपुर
जिला हमीरपुर में कम वर्षा और पथरीली जमीन वाले क्षेत्रों में भी गन्ने की खेती की जा सकती है। आम तौर पर यह अविश्वसनीय प्रतीत हो सकता है, लेकिन विकास खंड बमसन के गांव हरनेड़ के प्रगतिशील किसान ललित कालिया ने इसे संभव करके दिखाया है। पूरी तरह प्राकृतिक खेती करने वाले ललित कालिया ने मात्र 18 मरले जमीन पर गन्ना लगाकर पहले ही सीजन में लगभग 70 किलोग्राम शक्कर तैयार की है।
प्राकृतिक खेती में कई बड़ी उपलब्धियां हासिल कर चुके ललित कालिया, गांव चमनेड ने आतमा परियोजना के अधिकारियों के साथ उपायुक्त गंधर्वा राठौड़ से भेंट करके उन्हें प्राकृतिक खेती के उत्साहजनक परिणामों से अवगत करवाया।
ललित कालिया ने बताया कि उन्होंने कुछ वर्ष पूर्व प्राकृतिक खेती आरंभ की थी। आतमा परियोजना के अधिकारियों की प्रेरणा और प्रदेश सरकार के निरंतर प्रोत्साहन से अब गांव हरनेड़ के लगभग 52 परिवार पूरी तरह से प्राकृतिक खेती से जुड़ चुके हैं। ये किसान परिवार गेहूं और मक्की के अलावा पारंपरिक मोटे अनाज, पारंपरिक दलहनी फसलें तथा अन्य फसलें प्राकृतिक विधि से ही उगा रहे हैं।
ललित कालिया ने बताया कि उनके दादा-परदादा कभी गन्ना भी लगाते थे और खाने में इसी की शक्कर का प्रयोग करते थे, लेकिन वर्तमान दौर में यहां गन्ने की खेती की कल्पना भी नहीं की जा सकती थी। ललित कालिया ने बताया कि पिछले सीजन में उन्होंने अपने 18 मरले खेत में प्राकृतिक खेती से ही गन्ना लगाने का निर्णय लिया तो सभी लोग इसे असंभव ही बता रहे थे। देखते ही देखते गन्ने की फसल तैयार होने लगी और इसकी कटाई के बाद उन्होंने पेराई भी स्वयं करवाई तथा इससे लगभग 70 किलोग्राम शक्कर निकली।
ललित कालिया ने बताया कि उन्होंने गन्ने के खेत में एक बार भी सिंचाई नहीं की। जंगली सूअर ने आधी फसल उजाड़ दी थी। इसके बावजूद उन्हें अच्छी पैदावार हुई। अगले सीजन के लिए उन्हें दोबारा बिजाई की आवश्यकता भी नहीं है, क्योंकि गन्ने का यह बीज 5-7 साल तक खेत में रह जाता है। इसलिए, गन्ने की खेती जिला हमीरपुर के किसानों के लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकती है। ललित कालिया ने बताया कि वह भारत के प्राचीन पारंपरिक बीजों के संरक्षण के लिए विशेष प्रयास कर रहे हैं। ये पारंपरिक किस्में काफी पौष्टिक होती हैं और मौसम की विपरीत परिस्थितियों को भी सहन करने में सक्षम होती हैं।
उपायुक्त हमीरपुर गंधर्वा राठौड़ ने कहा कि प्रदेश सरकार प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहन देने के लिए काम कर रही है । उन्होंने बताया कि उन्होंने कई क्षेत्रों में प्राकृतिक खेती कर रहे किसानों से मुलाकात की । उन्होंने कहा कि जिला में आत्मा प्रोजेक्ट के माध्यम से प्राकृतिक खेती के अच्छे परिणाम देखने को मिल रहे हैं और किसान भी इस ओर आकर्षित हो रहे हैं । उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती के फसल की गुणवत्ता बेहतर है और प्रोष्टिक भी है ।
    user_Ranjna Kumari
    Ranjna Kumari
    टीरा सुजानपुर, हमीरपुर, हिमाचल प्रदेश•
    57 min ago
  • Post by Sanam Aijaz
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    Post by Sanam Aijaz
    user_Sanam Aijaz
    Sanam Aijaz
    TV News Anchor श्रीनगर सेंट्रल, श्रीनगर, जम्मू और कश्मीर•
    15 hrs ago
  • Post by Till The End News
    1
    Post by Till The End News
    user_Till The End News
    Till The End News
    Local News Reporter मजालता, उधमपुर, जम्मू और कश्मीर•
    2 hrs ago
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