मथुरा से शुरू होकर पूरे भारतवर्ष में गौ सम्मान की माँग को लेकर ज्ञापन दिए गए हैं। इस आंदोलन का मकसद गायों के प्रति सम्मान और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना है। मथुरा में स्थानीय संगठनों ने इस आवाहन का नेतृत्व किया और अन्य राज्यों में भी यह माँग गूंजी। इस ज्ञापन में गायों की सुरक्षा, उनके लिए विशेष कानून और गौशालाओं के विकास की माँग शामिल है। आंदोलनकारियों का कहना है कि गायें सिर्फ एक पशु नहीं हैं, बल्कि वे हमारी संस्कृति और परंपरा का हिस्सा हैं। इसलिए उनकी सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करना हमारी नैतिक ज़िम्मेदारी है। इस ज्ञापन के बाद, कई राज्यों में स्थानीय प्रशासन और सरकारों से प्रतिक्रियाएँ आई हैं। कुछ जगहों पर गौशालाओं के विकास के लिए कदम उठाए जा रहे हैं, जबकि अन्य जगहों पर विशेष कानून बनाने की माँग जोर पकड़ रही है। आंदोलनकारी इस माँग को लेकर अड़े हुए हैं और आगे भी इसी तरह के कदम उठाते रहने की बात कह रहे हैं।
मथुरा से शुरू होकर पूरे भारतवर्ष में गौ सम्मान की माँग को लेकर ज्ञापन दिए गए हैं। इस आंदोलन का मकसद गायों के प्रति सम्मान और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना है। मथुरा में स्थानीय संगठनों ने इस आवाहन का नेतृत्व किया और अन्य राज्यों में भी यह माँग गूंजी। इस ज्ञापन में गायों की सुरक्षा, उनके लिए विशेष कानून और गौशालाओं के विकास की माँग शामिल है। आंदोलनकारियों का कहना है कि गायें सिर्फ एक पशु नहीं हैं, बल्कि वे हमारी संस्कृति और परंपरा का हिस्सा हैं। इसलिए उनकी सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करना हमारी नैतिक ज़िम्मेदारी है। इस ज्ञापन के बाद, कई राज्यों में स्थानीय प्रशासन और सरकारों से प्रतिक्रियाएँ आई हैं। कुछ जगहों पर गौशालाओं के विकास के लिए कदम उठाए जा रहे हैं, जबकि अन्य जगहों पर विशेष कानून बनाने की माँग जोर पकड़ रही है। आंदोलनकारी इस माँग को लेकर अड़े हुए हैं और आगे भी इसी तरह के कदम उठाते रहने की बात कह रहे हैं।
- उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में आयोजित होने वाले मुड़िया पूनो मेला 2026 की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की गई है। इस दौरान अधिकारियों ने परिक्रमा मार्ग का निरीक्षण किया। सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं, जिसमें बीडीडीएस, डॉग स्क्वाड और एटीएस कमांडो तैनात किए गए हैं। इस मेले के लिए सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद बनाने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।1
- मथुरा मुड़िया पूनो मेला 2026 के भव्य और सुरक्षित आयोजन को लेकर जिला प्रशासन और पुलिस विभाग पूरी तरह मुस्तैद हो गया है। मेले में देश-दुनिया से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से सोमवार को पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की टीम ने परिक्रमा मार्ग का संयुक्त रूप से पैदल भ्रमण कर तैयारियों का बारीकी से जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान पुलिस अधीक्षक ग्रामीण सुरेश चंद्र रावत, अपर जिलाधिकारी प्रशासन डॉ अमरेश कुमार, अपर जिलाधिकारी न्यायिक वेद प्रिय आर्य और मथुरा वृंदावन विकास प्राधिकरण (MVDA) के सचिव आशीष कुमार सिंह मौजूद रहे। अधिकारियों ने मुख्य मार्गों एवं परिक्रमा क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था, बैरिकेडिंग, यातायात प्रबंधन, साफ-सफाई और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं की गहन समीक्षा की। निरीक्षण के बाद संबंधित अधिकारियों को समय सीमा के भीतर सभी व्यवस्थाएं चाक-चौबंद करने के सख्त निर्देश दिए गए ताकि परिक्रमार्थियों को किसी भी तरह की असुविधा न हो। मेले के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। पूरे मेला क्षेत्र की अभेद्य घेराबंदी के लिए बम निरोधक दस्ता (BDDS), डॉग स्क्वाड और एटीएस (ATS) कमांडो तैनात किए गए हैं। इसके अतिरिक्त भीड़ नियंत्रण और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के लिए संपूर्ण परिक्रमा मार्ग और मेला परिसर में सीसीटीवी (CCTV) तथा ड्रोन कैमरों के जरिए 24 घंटे निगरानी रखी जाएगी।4
- गोमाता की सेवा, सुरक्षा एवं सम्मान सुनिश्चित कराने के उद्देश्य से संचालित गो सम्मान आह्वान अभियान के द्वितीय चरण के अंतर्गत आज जनपद मथुरा सहित देशभर के सभी जिलों में संबंधित जिलाधिकारी महोदय/महोदया के माध्यम से भारत के महामहिम राष्ट्रपति, माननीय प्रधानमंत्री, संबंधित राज्य के राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री के नाम हस्ताक्षरयुक्त प्रार्थना-पत्र एवं ज्ञापन सौंपे गए। पिछले लगभग छह माह से देशभर के संतों, गौसेवकों एवं गोभक्तों के नेतृत्व में गो सम्मान आह्वान अभियान संचालित किया जा रहा है। अभियान के माध्यम से सम्पूर्ण भारत में गोहत्या-निषेध हेतु केंद्रीय कानून, गोमाता को राष्ट्रमाता का सम्मान, गोचर भूमि को अतिक्रमणमुक्त कराना, केंद्रीय गो मंत्रालय की स्थापना, केंद्रीय गो-चारा नीति का निर्माण तथा कृषि, चिकित्सा, पर्यावरण, शिक्षा एवं मानव जीवन से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण विषयों को गो-केंद्रित राष्ट्रीय नीति का हिस्सा बनाने सहित 30 से अधिक प्रमुख मांगें सरकार के समक्ष रखी गई हैं। इन मांगों के समर्थन में देशभर में व्यापक जनजागरण एवं हस्ताक्षर अभियान चलाया गया। अभियान के प्रथम चरण में 27 अप्रैल 2026 को देश की लगभग 5,000 तहसीलों के माध्यम से 5 करोड़ से अधिक नागरिकों के हस्ताक्षरों सहित प्रार्थना-पत्र राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, संबंधित राज्यों के राज्यपाल एवं मुख्यमंत्रियों को सौंपे गए थे। इन मांगों पर अपेक्षित निर्णय न होने के कारण अभियान के द्वितीय चरण में आज पुनः देशभर के सभी जिलों से 15 करोड़ से अधिक नागरिकों के हस्ताक्षरों सहित अनुस्मारक (रिमाइंडर) प्रार्थना-पत्र सरकार को प्रेषित किए गए। जनपद मथुरा की ओर से भी लगभग 21 लाख से अधिक नागरिकों के हस्ताक्षरों सहित प्रार्थना-पत्र संबंधित जिलाधिकारी महोदय/महोदया के माध्यम से भारत सरकार को प्रेषित किया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ निर्धारित शुभ मुहूर्त में गोमाता के पूजन, शंखनाद एवं “श्री राम जय राम जय जय राम” विजय मंत्र के सामूहिक जप के साथ हुआ। इसके उपरांत गोभक्तों ने झंडे, बैनर, अभियान संदेशों वाले प्लेकार्ड एवं भजन-कीर्तन के साथ शांतिपूर्ण एवं अनुशासित प्रार्थना-यात्रा निकालते हुए जिलाधिकारी कार्यालय तक पहुँचे। प्रार्थना-यात्रा में भगवान श्रीकृष्ण-बलराम के स्वरूप, गोमाता की झांकी तथा अभियान के अंतर्गत संकलित हस्ताक्षरों का प्रतीकात्मक प्रदर्शन किया गया। तत्पश्चात संत-महात्माओं, जिला कार्यकारिणी, विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधियों तथा गणमान्य नागरिकों के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी महोदय/महोदया को ज्ञापन एवं हस्ताक्षरयुक्त प्रार्थना-पत्र सौंपा। मथुरा जिले के जिलाधिकारी ने सभी संतों के समक्ष बाहर आकर स्वयं ज्ञापन लिया और संतों को आश्वासन दिया कि यह ज्ञापन वो सरकार तक पहुचायेंगे। साथ ही उन्होंने मथुरा में गोमाता के सम्मान में हर प्रकार का प्रायस करने का भी आश्वासन दिया। इस अवसर पर अभियान के प्रतिनिधियों ने कहा कि गोमाता केवल धार्मिक आस्था का विषय ही नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, कृषि, पर्यावरण, ग्राम्य अर्थव्यवस्था एवं जनकल्याण का भी महत्वपूर्ण आधार है। उन्होंने सरकार से गोमाता की सेवा, सुरक्षा एवं सम्मान से संबंधित सभी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेने का आग्रह किया। साथ ही कहा कि यह अभियान पूर्णतः शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से संचालित किया जा रहा है तथा जनभावनाओं के अनुरूप निर्णय होने तक चरणबद्ध रूप से आगे भी जारी रहेगा।4
- मथुरा के संत प्रेमानंद महाराज जी ने गुरु पूर्णिमा के अवसर पर श्रद्धालुओं को संबोधित किया। इस पवित्र दिन पर, उन्होंने अपने अनुयायियों से आध्यात्मिक गुरुओं के प्रति श्रद्धा और समर्पण व्यक्त करने का आग्रह किया। संत प्रेमानंद महाराज जी ने कहा कि गुरु की कृपा से ही जीवन में आध्यात्मिक उन्नति संभव है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि वे अपने गुरुओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करें और उनके आशीर्वाद से जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास करें।1
- मथुरा से शुरू होकर पूरे भारतवर्ष में गौ सम्मान की माँग को लेकर ज्ञापन दिए गए हैं। इस आंदोलन का मकसद गायों के प्रति सम्मान और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना है। मथुरा में स्थानीय संगठनों ने इस आवाहन का नेतृत्व किया और अन्य राज्यों में भी यह माँग गूंजी। इस ज्ञापन में गायों की सुरक्षा, उनके लिए विशेष कानून और गौशालाओं के विकास की माँग शामिल है। आंदोलनकारियों का कहना है कि गायें सिर्फ एक पशु नहीं हैं, बल्कि वे हमारी संस्कृति और परंपरा का हिस्सा हैं। इसलिए उनकी सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करना हमारी नैतिक ज़िम्मेदारी है। इस ज्ञापन के बाद, कई राज्यों में स्थानीय प्रशासन और सरकारों से प्रतिक्रियाएँ आई हैं। कुछ जगहों पर गौशालाओं के विकास के लिए कदम उठाए जा रहे हैं, जबकि अन्य जगहों पर विशेष कानून बनाने की माँग जोर पकड़ रही है। आंदोलनकारी इस माँग को लेकर अड़े हुए हैं और आगे भी इसी तरह के कदम उठाते रहने की बात कह रहे हैं।1
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने परीक्षा प्रणाली में सुधार को लेकर महत्वपूर्ण बात कही है। इस दिशा में कदम बढ़ाते हुए श्री नंदन नीलेकणी के नेतृत्व में एक हाई पावर्ड टास्क फोर्स का गठन किया गया है। इस टास्क फोर्स का मुख्य उद्देश्य परीक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और विश्वसनीय बनाना है। परीक्षा सुधारों से जुड़े इस फैसले का छात्रों, अभिभावकों और पूरे शिक्षा जगत पर सीधा प्रभाव पड़ेगा।1
- मथुरा के गोवर्धन में गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर आयोजित होने वाली ऐतिहासिक व पारंपरिक मुड़िया शोभायात्रा की तैयारियां अपने अंतिम चरण में पहुंच गई हैं। इस शोभायात्रा से पूर्व, मुड़िया संतों ने सदियों पुरानी परंपरा का निर्वहन करते हुए विधि विधान के साथ मुंडन संस्कार कराया और अपने गुरु के प्रति अगाध श्रद्धा व समर्पण व्यक्त किया। धार्मिक मान्यता के अनुसार, संतों का यह मुंडन संस्कार केवल केश त्यागने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह अहंकार, बुराइयों और सांसारिक मोह माया को छोड़कर पूर्ण रूप से गुरु की शरण में जाने का संदेश देता है। गुरुवार सुबह करीब 9 बजे यह भव्य शोभायात्रा गोवर्धन के राधाश्याम सुंदर चकलेश्वर मंदिर से विधिवत पूजा अर्चना के साथ प्रारंभ होगी। चकलेश्वर मंदिर, दसविसा, दानघाटी, बड़ा बाजार, चकलेश्वर मंदिर यात्रा में देशभर से आए संत, महात्मा, साधु समाज और लाखों श्रद्धालु शामिल होंगे। गाजे-बाजे, आकर्षक धार्मिक झांकियों और गुरु महिमा के जयघोष से पूरा गोवर्धन क्षेत्र भक्तिमय हो उठा है। विशाल जनसैलाब और श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पुलिस और प्रशासन ने कड़े सुरक्षा प्रबंध किए हैं। संवेदनशील और प्रमुख स्थानों पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। श्रद्धालुओं को आवागमन में कोई असुविधा न हो, इसके लिए विशेष ट्रैफिक डायवर्जन प्लान लागू किया गया है। गुरु भक्ति, त्याग और तपस्या की प्रतीक यह मुड़िया शोभायात्रा सदियों पुरानी सनातन परंपरा का जीवंत स्वरूप है। इस अलौकिक क्षण का साक्षी बनने के लिए देशभर से लाखों श्रद्धालुओं का गोवर्धन पहुंचने का सिलसिला जारी है।4
- सोमवार दोपहर मथुरा के दुसायत मोहल्ले में उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब एक जर्जर पीपल का पेड़ अचानक तेज आवाज के साथ पार्किंग में खड़ी गाड़ियों पर गिर पड़ा। पेड़ गिरते ही मौके पर चीख-पुकार मच गई और लोगों की भीड़ जमा हो गई। गनीमत रही कि हादसे के वक्त कार सवार श्रद्धालु मंदिर दर्शन के लिए गए हुए थे, जिससे एक बहुत बड़ी जनहानि टल गई। स्थानीय लोगों ने बताया कि उन्होंने रविवार रात अपनी कार इस स्टैंड पर खड़ी की थी। सोमवार को दर्शन करके वापस आए तो गाड़ी पेड़ के नीचे पूरी तरह से दबी मिली। घटना के कई घंटे बीत जाने के बाद भी पार्किंग संचालक की तरफ से कोई मदद नहीं मिली है। लोगों का आरोप है कि हमारी गाड़ी बाहर निकालने तक का इंतजाम नहीं किया गया।4