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विनाशकारी 'तरक्की' बनाम ज़हरीला 'भविष्य' ​शीर्षक: सावधान! जिसे आप 'तरक्की' समझ रहे हैं, वह आपके बच्चों का 'भविष्य' निगल रही है — ज़हर खा रही है 'गौमाता', तो आपके बच्चे 'अमृत' कहाँ से पाएँगे? ​स्थान: कुरुक्षेत्र/हरियाणा | दिनांक: 02 अप्रैल, 2026 प्रस्तुति: विशाल शर्मा (स्वतंत्र पत्रकार एवं मीडिया शोधकर्ता) ​मुख्य बिंदु और चेतावनी: ​तरक्की का भ्रम: डिजिटल इंडिया और आधुनिकता के नाम पर हम तरक्की नहीं, बल्कि अपने बच्चों के भविष्य को रसायनों की आग में झोंक रहे हैं। असली तरक्की गाँव की स्वच्छता और खेत की मिट्टी की शुद्धता में है। ​ज़हर का जानलेवा चक्र: आज हमारी गौमाता पेस्टिसाइड और यूरिया से सना ज़हरीला घास खा रही है। जब चारा ही ज़हरीला है, तो दूध अमृत कैसे हो सकता है? हम अनजाने में अपनी आने वाली पीढ़ी की रगों में 'सफ़ेद ज़हर' उतार रहे हैं। ​गाँव की मर्यादा और प्रवेश द्वार: गाँव का प्रवेश द्वार (Entrance) ही 'फर्स्ट इम्प्रेशन' है। यदि वहाँ गोबर के ढेर और बीमारियों के मच्छर हैं, तो गाँव का भविष्य सुरक्षित नहीं। इसे फूलों और जड़ी-बूटियों से सजाना अनिवार्य है। ​वैज्ञानिकों और सरकार को सुझाव: वैज्ञानिकों ने गायों की नस्लें तो बदलीं, लेकिन उनके 'ईंधन' (चारे) पर ध्यान नहीं दिया। यदि सरकार 'औषधीय चारा नीति' लागू करे और हर किसान 2 एकड़ पर एक नीम और अर्जुन का वृक्ष लगाए, तो 20 साल में प्रकृति का कायाकल्प हो जाएगा। ​100+ औषधियों का कवच: समाज को बचाने के लिए 100 से अधिक औषधीय पौधों की सूची तैयार की गई है (जैसे: नीम, अर्जुन, मोरिंगा, गिलोय, अश्वगंधा, अपराजिता आदि)। ये पौधे न केवल सजावट के लिए श्रेष्ठ हैं, बल्कि घर-गाँव को 'प्राकृतिक ऑक्सीजन प्लांट' में बदल देते हैं। 1. प्रमुख औषधीय पौधे (Medicinal Plants) ये पौधे रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और विभिन्न विकारों के उपचार में सहायक हैं: नीम: रक्त शोधक और एंटी-बैक्टीरियल। तुलसी: (रामा, श्यामा, वन और कपूर तुलसी) श्वसन तंत्र के लिए रामबाण। गिलोय: जीर्ण ज्वर और इम्युनिटी के लिए प्रसिद्ध। एलोवेरा (घृतकुमारी): त्वचा और पाचन तंत्र हेतु। अश्वगंधा: मानसिक तनाव और शारीरिक शक्ति के लिए। आंवला: विटामिन-C का सर्वोत्तम स्रोत, नेत्र और केश विकार में लाभकारी। शतावरी: हार्मोनल संतुलन और कमजोरी दूर करने के लिए। ब्राह्मी: याददाश्त और मस्तिष्क की कार्यक्षमता बढ़ाने हेतु। कालमेघ: लिवर की सुरक्षा और बुखार के लिए। सर्पगंधा: उच्च रक्तचाप (BP) को नियंत्रित करने के लिए। मोरिंगा (सहजन): मल्टी-विटामिन और खनिज का खजाना। स्टीविया: प्राकृतिक शुगर-फ्री विकल्प। पत्थरचट्टा: गुर्दे की पथरी के उपचार में सहायक। अडूसा (वसाका): खांसी और दमा के लिए प्रभावी। हरड़ और बहेड़ा: त्रिफला के मुख्य घटक, पाचन के लिए श्रेष्ठ। 2. फलदार वृक्ष (Fruit Trees) ये न केवल पोषण देते हैं बल्कि वातावरण में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ाते हैं: आम: (दशहरी, लंगड़ा, चौसा, अल्फोंसो) फलों का राजा। जामुन: मधुमेह रोगियों के लिए वरदान। अमरूद: पेट की सफाई और विटामिन-C के लिए। बेल: लू से बचाव और पेट की ठंडक के लिए। नींबू: क्षारीय गुणों से भरपूर। पपीता: पाचन और प्लेटलेट्स बढ़ाने में सहायक। चीकू: ऊर्जा का त्वरित स्रोत। अनार: रक्त की कमी को दूर करने वाला। अंजीर: हड्डियों की मजबूती और कब्ज निवारक। शहतूत: शीतलता प्रदान करने वाला। इमली: विटामिन-C और खनिजों से युक्त। सीताफल (शरीफा): हृदय स्वास्थ्य के लिए उत्तम। 3. सुगंधित एवं सजावटी फूल (Flowering & Ornamental Plants) ये मानसिक शांति और सौंदर्य के साथ-साथ वातावरण को शुद्ध करते हैं: गुलाब: सौंदर्य प्रसाधन और गुलकंद के लिए। गेंदा: कीटनाशक गुणों से युक्त और सजावट में सर्वोपरि। मोगरा/चमेली: सुगंधित तेल और तनाव कम करने के लिए। पारिजात (हरसिंगार): इसके फूल और पत्तियां जोड़ों के दर्द में भी उपयोगी हैं। गुड़हल: बालों की सेहत और बीपी नियंत्रण के लिए। कनेर: कम पानी में उगने वाला सजावटी पौधा। अपराजिता: बुद्धि वर्धक और सुंदर नीले फूलों वाला। रजनीगंधा: रात में महकने वाला लोकप्रिय फूल। अमलतास: सुनहरे फूलों वाला औषधीय वृक्ष। गुलमोहर: ग्रीष्म ऋतु में छाया और सौंदर्य देने वाला। सदाबहार: शुगर कंट्रोल और कैंसर रोधी गुणों से युक्त। चांदनी: सफेद फूलों वाला शांत पौधा। 4. वायु शोधक एवं अन्य उपयोगी पौधे (Air Purifying & Others) स्नेक प्लांट: रात में ऑक्सीजन देने वाला। मनी प्लांट: हवा से टॉक्सिन्स दूर करने वाला। पीपल: 24 घंटे ऑक्सीजन देने वाला सबसे विशाल वृक्ष। बरगद: दीर्घायु और गहरी छाया का प्रतीक। कड़ी पत्ता (मीठा नीम): रसोई और पाचन के लिए अनिवार्य। लेमन ग्रास: काढ़ा और चाय के लिए बेहतरीन। गाँव और भविष्य के लिए सुझाव जैसा कि आप मानते हैं कि "शुद्ध वायु बढ़ाए आयु", यदि हर खेत की मेड़ पर और गाँव के प्रवेश द्वार पर निम्नलिखित का मिश्रण लगाया जाए, तो वातावरण संतुलित रहेगा: मेड़ पर: सहजन, नीम और आंवला (आर्थिक और स्वास्थ्य लाभ)। प्रवेश द्वार पर: फूलों वाले वृक्ष जैसे अमलतास, कचनार और गुलमोहर (सौंदर्य)। आंगन में: तुलसी, एलोवेरा और गिलोय (प्राथमिक चिकित्सा)। ​निष्कर्ष: "जब तक खेत की मेड़ पर औषधि नहीं होगी, तब तक न डेयरी का दूध शुद्ध होगा और न इंसान का खून। यह केवल व्यापार नहीं, हमारे वंश को रसायनों के चंगुल से बचाने का महा-यज्ञ है। बौद्धिक क्षमता बढ़ाएं, हिंदुस्तान बचाएं।" ​संपर्क: इंडिया न्यूज़ 9 लाइव (मीडिया रिसर्च विंग) विशाल शर्मा, स्वतंत्र पत्रकार शोधकर्ता

4 hrs ago
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Media company Thanesar, Kurukshetra•
4 hrs ago

विनाशकारी 'तरक्की' बनाम ज़हरीला 'भविष्य' ​शीर्षक: सावधान! जिसे आप 'तरक्की' समझ रहे हैं, वह आपके बच्चों का 'भविष्य' निगल रही है — ज़हर खा रही है 'गौमाता', तो आपके बच्चे 'अमृत' कहाँ से पाएँगे? ​स्थान: कुरुक्षेत्र/हरियाणा | दिनांक: 02 अप्रैल, 2026 प्रस्तुति: विशाल शर्मा (स्वतंत्र पत्रकार एवं मीडिया शोधकर्ता) ​मुख्य बिंदु और चेतावनी: ​तरक्की का भ्रम: डिजिटल इंडिया और आधुनिकता के नाम पर हम तरक्की नहीं, बल्कि अपने बच्चों के भविष्य को रसायनों की आग में झोंक रहे हैं। असली तरक्की गाँव की स्वच्छता और खेत की मिट्टी की शुद्धता में है। ​ज़हर का जानलेवा चक्र: आज हमारी गौमाता पेस्टिसाइड और यूरिया से सना ज़हरीला घास खा रही है। जब चारा ही ज़हरीला है, तो दूध अमृत कैसे हो सकता है? हम अनजाने में अपनी आने वाली पीढ़ी की रगों में 'सफ़ेद ज़हर' उतार रहे हैं। ​गाँव की मर्यादा और प्रवेश द्वार: गाँव का प्रवेश द्वार (Entrance) ही 'फर्स्ट इम्प्रेशन' है। यदि वहाँ गोबर के ढेर और बीमारियों के मच्छर हैं, तो गाँव का भविष्य सुरक्षित नहीं। इसे फूलों और जड़ी-बूटियों से सजाना अनिवार्य है। ​वैज्ञानिकों और सरकार को सुझाव: वैज्ञानिकों ने गायों की नस्लें तो बदलीं, लेकिन उनके 'ईंधन' (चारे) पर ध्यान नहीं दिया। यदि सरकार 'औषधीय चारा नीति' लागू करे और हर किसान 2 एकड़ पर एक नीम और अर्जुन का वृक्ष लगाए, तो 20 साल में प्रकृति का कायाकल्प हो जाएगा। ​100+ औषधियों का कवच: समाज को बचाने के लिए 100 से अधिक औषधीय पौधों की सूची तैयार की गई है (जैसे: नीम, अर्जुन, मोरिंगा, गिलोय, अश्वगंधा, अपराजिता आदि)। ये पौधे न केवल सजावट के लिए श्रेष्ठ हैं, बल्कि घर-गाँव को 'प्राकृतिक ऑक्सीजन प्लांट' में बदल देते हैं। 1. प्रमुख औषधीय पौधे (Medicinal Plants) ये पौधे रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और विभिन्न विकारों के उपचार में सहायक हैं: नीम: रक्त शोधक और एंटी-बैक्टीरियल। तुलसी: (रामा, श्यामा, वन और कपूर तुलसी) श्वसन तंत्र के लिए रामबाण। गिलोय: जीर्ण ज्वर और इम्युनिटी के लिए प्रसिद्ध। एलोवेरा (घृतकुमारी): त्वचा और पाचन तंत्र हेतु। अश्वगंधा: मानसिक तनाव और शारीरिक शक्ति के लिए। आंवला: विटामिन-C का सर्वोत्तम स्रोत, नेत्र और केश विकार में लाभकारी। शतावरी: हार्मोनल संतुलन और कमजोरी दूर करने के लिए। ब्राह्मी: याददाश्त और मस्तिष्क की कार्यक्षमता बढ़ाने हेतु। कालमेघ: लिवर की सुरक्षा और बुखार के लिए। सर्पगंधा: उच्च रक्तचाप (BP) को नियंत्रित करने के लिए। मोरिंगा (सहजन): मल्टी-विटामिन और खनिज का खजाना। स्टीविया: प्राकृतिक शुगर-फ्री विकल्प। पत्थरचट्टा: गुर्दे की पथरी के उपचार में सहायक। अडूसा (वसाका): खांसी और दमा के लिए प्रभावी। हरड़ और बहेड़ा: त्रिफला के मुख्य घटक, पाचन के लिए श्रेष्ठ। 2. फलदार वृक्ष (Fruit Trees) ये न केवल पोषण देते हैं बल्कि वातावरण में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ाते हैं: आम: (दशहरी, लंगड़ा, चौसा, अल्फोंसो) फलों का राजा। जामुन: मधुमेह रोगियों के लिए वरदान। अमरूद: पेट की सफाई और विटामिन-C के लिए। बेल: लू से बचाव और पेट की ठंडक के लिए। नींबू: क्षारीय गुणों से भरपूर। पपीता: पाचन और प्लेटलेट्स बढ़ाने में सहायक। चीकू: ऊर्जा का त्वरित स्रोत। अनार: रक्त की कमी को दूर करने वाला। अंजीर: हड्डियों की मजबूती और कब्ज निवारक। शहतूत: शीतलता प्रदान करने वाला। इमली: विटामिन-C और खनिजों से युक्त। सीताफल (शरीफा): हृदय स्वास्थ्य के लिए उत्तम। 3. सुगंधित एवं सजावटी फूल (Flowering & Ornamental Plants) ये मानसिक शांति और सौंदर्य के साथ-साथ वातावरण को शुद्ध करते हैं: गुलाब: सौंदर्य प्रसाधन और गुलकंद के लिए। गेंदा: कीटनाशक गुणों से युक्त और सजावट में सर्वोपरि। मोगरा/चमेली: सुगंधित तेल और तनाव कम करने के लिए। पारिजात (हरसिंगार): इसके फूल और पत्तियां जोड़ों के दर्द में भी उपयोगी हैं। गुड़हल: बालों की सेहत और बीपी नियंत्रण के लिए। कनेर: कम पानी में उगने वाला सजावटी पौधा। अपराजिता: बुद्धि वर्धक और सुंदर नीले फूलों वाला। रजनीगंधा: रात में महकने वाला लोकप्रिय फूल। अमलतास: सुनहरे फूलों वाला औषधीय वृक्ष। गुलमोहर: ग्रीष्म ऋतु में छाया और सौंदर्य देने वाला। सदाबहार: शुगर कंट्रोल और कैंसर रोधी गुणों से युक्त। चांदनी: सफेद फूलों वाला शांत पौधा। 4. वायु शोधक एवं अन्य उपयोगी पौधे (Air Purifying & Others) स्नेक प्लांट: रात में ऑक्सीजन देने वाला। मनी प्लांट: हवा से टॉक्सिन्स दूर करने वाला। पीपल: 24 घंटे ऑक्सीजन देने वाला सबसे विशाल वृक्ष। बरगद: दीर्घायु और गहरी छाया का प्रतीक। कड़ी पत्ता (मीठा नीम): रसोई और पाचन के लिए अनिवार्य। लेमन ग्रास: काढ़ा और चाय के लिए बेहतरीन। गाँव और भविष्य के लिए सुझाव जैसा कि आप मानते हैं कि "शुद्ध वायु बढ़ाए आयु", यदि हर खेत की मेड़ पर और गाँव के प्रवेश द्वार पर निम्नलिखित का मिश्रण लगाया जाए, तो वातावरण संतुलित रहेगा: मेड़ पर: सहजन, नीम और आंवला (आर्थिक और स्वास्थ्य लाभ)। प्रवेश द्वार पर: फूलों वाले वृक्ष जैसे अमलतास, कचनार और गुलमोहर (सौंदर्य)। आंगन में: तुलसी, एलोवेरा और गिलोय (प्राथमिक चिकित्सा)। ​निष्कर्ष: "जब तक खेत की मेड़ पर औषधि नहीं होगी, तब तक न डेयरी का दूध शुद्ध होगा और न इंसान का खून। यह केवल व्यापार नहीं, हमारे वंश को रसायनों के चंगुल से बचाने का महा-यज्ञ है। बौद्धिक क्षमता बढ़ाएं, हिंदुस्तान बचाएं।" ​संपर्क: इंडिया न्यूज़ 9 लाइव (मीडिया रिसर्च विंग) विशाल शर्मा, स्वतंत्र पत्रकार शोधकर्ता

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    विनाशकारी 'तरक्की' बनाम ज़हरीला 'भविष्य'
​शीर्षक: सावधान! जिसे आप 'तरक्की' समझ रहे हैं, वह आपके बच्चों का 'भविष्य' निगल रही है — ज़हर खा रही है 'गौमाता', तो आपके बच्चे 'अमृत' कहाँ से पाएँगे?
​स्थान: कुरुक्षेत्र/हरियाणा |
दिनांक: 02 अप्रैल, 2026
प्रस्तुति: विशाल शर्मा (स्वतंत्र पत्रकार एवं मीडिया शोधकर्ता)
​मुख्य बिंदु और चेतावनी:
​तरक्की का भ्रम: डिजिटल इंडिया और आधुनिकता के नाम पर हम तरक्की नहीं, बल्कि अपने बच्चों के भविष्य को रसायनों की आग में झोंक रहे हैं। असली तरक्की गाँव की स्वच्छता और खेत की मिट्टी की शुद्धता में है।
​ज़हर का जानलेवा चक्र: आज हमारी गौमाता पेस्टिसाइड और यूरिया से सना ज़हरीला घास खा रही है। जब चारा ही ज़हरीला है, तो दूध अमृत कैसे हो सकता है? हम अनजाने में अपनी आने वाली पीढ़ी की रगों में 'सफ़ेद ज़हर' उतार रहे हैं।
​गाँव की मर्यादा और प्रवेश द्वार: गाँव का प्रवेश द्वार (Entrance) ही 'फर्स्ट इम्प्रेशन' है। यदि वहाँ गोबर के ढेर और बीमारियों के मच्छर हैं, तो गाँव का भविष्य सुरक्षित नहीं। इसे फूलों और जड़ी-बूटियों से सजाना अनिवार्य है।
​वैज्ञानिकों और सरकार को सुझाव: वैज्ञानिकों ने गायों की नस्लें तो बदलीं, लेकिन उनके 'ईंधन' (चारे) पर ध्यान नहीं दिया। यदि सरकार 'औषधीय चारा नीति' लागू करे और हर किसान 2 एकड़ पर एक नीम और अर्जुन का वृक्ष लगाए, तो 20 साल में प्रकृति का कायाकल्प हो जाएगा।
​100+ औषधियों का कवच: समाज को बचाने के लिए 100 से अधिक औषधीय पौधों की सूची तैयार की गई है (जैसे: नीम, अर्जुन, मोरिंगा, गिलोय, अश्वगंधा, अपराजिता आदि)। ये पौधे न केवल सजावट के लिए श्रेष्ठ हैं, बल्कि घर-गाँव को 'प्राकृतिक ऑक्सीजन प्लांट' में बदल देते हैं।
1. प्रमुख औषधीय पौधे (Medicinal Plants)
ये पौधे रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और विभिन्न विकारों के उपचार में सहायक हैं:
नीम: रक्त शोधक और एंटी-बैक्टीरियल।
तुलसी: (रामा, श्यामा, वन और कपूर तुलसी) श्वसन तंत्र के लिए रामबाण।
गिलोय: जीर्ण ज्वर और इम्युनिटी के लिए प्रसिद्ध।
एलोवेरा (घृतकुमारी): त्वचा और पाचन तंत्र हेतु।
अश्वगंधा: मानसिक तनाव और शारीरिक शक्ति के लिए।
आंवला: विटामिन-C का सर्वोत्तम स्रोत, नेत्र और केश विकार में लाभकारी।
शतावरी: हार्मोनल संतुलन और कमजोरी दूर करने के लिए।
ब्राह्मी: याददाश्त और मस्तिष्क की कार्यक्षमता बढ़ाने हेतु।
कालमेघ: लिवर की सुरक्षा और बुखार के लिए।
सर्पगंधा: उच्च रक्तचाप (BP) को नियंत्रित करने के लिए।
मोरिंगा (सहजन): मल्टी-विटामिन और खनिज का खजाना।
स्टीविया: प्राकृतिक शुगर-फ्री विकल्प।
पत्थरचट्टा: गुर्दे की पथरी के उपचार में सहायक।
अडूसा (वसाका): खांसी और दमा के लिए प्रभावी।
हरड़ और बहेड़ा: त्रिफला के मुख्य घटक, पाचन के लिए श्रेष्ठ।
2. फलदार वृक्ष (Fruit Trees)
ये न केवल पोषण देते हैं बल्कि वातावरण में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ाते हैं:
आम: (दशहरी, लंगड़ा, चौसा, अल्फोंसो) फलों का राजा।
जामुन: मधुमेह रोगियों के लिए वरदान।
अमरूद: पेट की सफाई और विटामिन-C के लिए।
बेल: लू से बचाव और पेट की ठंडक के लिए।
नींबू: क्षारीय गुणों से भरपूर।
पपीता: पाचन और प्लेटलेट्स बढ़ाने में सहायक।
चीकू: ऊर्जा का त्वरित स्रोत।
अनार: रक्त की कमी को दूर करने वाला।
अंजीर: हड्डियों की मजबूती और कब्ज निवारक।
शहतूत: शीतलता प्रदान करने वाला।
इमली: विटामिन-C और खनिजों से युक्त।
सीताफल (शरीफा): हृदय स्वास्थ्य के लिए उत्तम।
3. सुगंधित एवं सजावटी फूल (Flowering & Ornamental Plants)
ये मानसिक शांति और सौंदर्य के साथ-साथ वातावरण को शुद्ध करते हैं:
गुलाब: सौंदर्य प्रसाधन और गुलकंद के लिए।
गेंदा: कीटनाशक गुणों से युक्त और सजावट में सर्वोपरि।
मोगरा/चमेली: सुगंधित तेल और तनाव कम करने के लिए।
पारिजात (हरसिंगार): इसके फूल और पत्तियां जोड़ों के दर्द में भी उपयोगी हैं।
गुड़हल: बालों की सेहत और बीपी नियंत्रण के लिए।
कनेर: कम पानी में उगने वाला सजावटी पौधा।
अपराजिता: बुद्धि वर्धक और सुंदर नीले फूलों वाला।
रजनीगंधा: रात में महकने वाला लोकप्रिय फूल।
अमलतास: सुनहरे फूलों वाला औषधीय वृक्ष।
गुलमोहर: ग्रीष्म ऋतु में छाया और सौंदर्य देने वाला।
सदाबहार: शुगर कंट्रोल और कैंसर रोधी गुणों से युक्त।
चांदनी: सफेद फूलों वाला शांत पौधा।
4. वायु शोधक एवं अन्य उपयोगी पौधे (Air Purifying & Others)
स्नेक प्लांट: रात में ऑक्सीजन देने वाला।
मनी प्लांट: हवा से टॉक्सिन्स दूर करने वाला।
पीपल: 24 घंटे ऑक्सीजन देने वाला सबसे विशाल वृक्ष।
बरगद: दीर्घायु और गहरी छाया का प्रतीक।
कड़ी पत्ता (मीठा नीम): रसोई और पाचन के लिए अनिवार्य।
लेमन ग्रास: काढ़ा और चाय के लिए बेहतरीन।
गाँव और भविष्य के लिए सुझाव
जैसा कि आप मानते हैं कि "शुद्ध वायु बढ़ाए आयु", यदि हर खेत की मेड़ पर और गाँव के प्रवेश द्वार पर निम्नलिखित का मिश्रण लगाया जाए, तो वातावरण संतुलित रहेगा:
मेड़ पर: सहजन, नीम और आंवला (आर्थिक और स्वास्थ्य लाभ)।
प्रवेश द्वार पर: फूलों वाले वृक्ष जैसे अमलतास, कचनार और गुलमोहर (सौंदर्य)।
आंगन में: तुलसी, एलोवेरा और गिलोय (प्राथमिक चिकित्सा)।
​निष्कर्ष:
"जब तक खेत की मेड़ पर औषधि नहीं होगी, तब तक न डेयरी का दूध शुद्ध होगा और न इंसान का खून। यह केवल व्यापार नहीं, हमारे वंश को रसायनों के चंगुल से बचाने का महा-यज्ञ है। बौद्धिक क्षमता बढ़ाएं, हिंदुस्तान बचाएं।"
​संपर्क: इंडिया न्यूज़ 9 लाइव (मीडिया रिसर्च विंग)
विशाल शर्मा, स्वतंत्र पत्रकार शोधकर्ता
    user_IndiaNews 9Live
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    Media company Thanesar, Kurukshetra•
    4 hrs ago
  • हरियाणा जिला करनाल इंद्री मार्ग जो गढ़पुर खालसा और बीयना ट्रॉली एक्टिवा कैसे चकनाचूर हुई और उनके सवारी बैठी हुई उसका ख्याल हुआ देखिए हमारे साथ वीडियो में ‌
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    हरियाणा जिला करनाल इंद्री मार्ग जो गढ़पुर खालसा और बीयना ट्रॉली एक्टिवा कैसे चकनाचूर हुई और उनके सवारी बैठी हुई उसका ख्याल हुआ देखिए हमारे साथ वीडियो में ‌
    user_Sadak ki awaaz (sadak ki awaaz
    Sadak ki awaaz (sadak ki awaaz
    Artist इंद्री, करनाल, हरियाणा•
    4 hrs ago
  • Post by Dharamvir Singh
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    Post by Dharamvir Singh
    user_Dharamvir Singh
    Dharamvir Singh
    Shahbad, Kurukshetra•
    13 hrs ago
  • Post by Vinod Paul Holkar JHANSA
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    Post by Vinod Paul Holkar JHANSA
    user_Vinod Paul Holkar JHANSA
    Vinod Paul Holkar JHANSA
    Social worker इस्माइलाबाद स्ट, कुरुक्षेत्र, हरियाणा•
    17 hrs ago
  • पंचमुखी हनुमान मंदिर बिलासपुर बसातियावाला मे, हनुमान जी के जन्मदिन के मौक़े पर श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ा। हनुमान जी के जन्मोत्सव के मौक़े आज, बसातियावाला मे मंदिर को बाहर से अंदर तक सजाया गया है। धूम धाम से हनुमान जी का जन्मदिन मनाने और दर्शन करने श्रद्धालू भारी संख्या मे पहुंच रहे है। मंदिर मे भंडारा भी सुबह से रात तक लगातार चलता है। बताया गया है श्रद्धालू रात के 1 बजे से हनुमान जी के दर्शन करने के लिए लाइन मे लगे हुए थे।
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    पंचमुखी हनुमान मंदिर बिलासपुर बसातियावाला मे, हनुमान जी के जन्मदिन के मौक़े पर श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ा।
हनुमान जी के जन्मोत्सव के मौक़े आज, बसातियावाला मे मंदिर को बाहर से अंदर तक सजाया गया है। धूम धाम से हनुमान जी का जन्मदिन मनाने और दर्शन करने श्रद्धालू भारी संख्या मे पहुंच  रहे है। मंदिर मे भंडारा भी सुबह से रात तक लगातार चलता है। बताया गया है श्रद्धालू रात के 1 बजे से हनुमान जी के दर्शन करने के लिए लाइन मे लगे हुए थे।
    user_Gulshan Dhiman
    Gulshan Dhiman
    रादौर, यमुनानगर, हरियाणा•
    16 hrs ago
  • Post by Gyanendu Rajput
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    user_Gyanendu Rajput
    Gyanendu Rajput
    Local News Reporter अंबाला, अंबाला, हरियाणा•
    4 hrs ago
  • Post by HR02 City News
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    user_HR02 City News
    HR02 City News
    News Anchor जगाधरी, यमुनानगर, हरियाणा•
    7 hrs ago
  • " 'शांतिप्रिय परंतु बहादुर' "देश🇮🇳भारत" बिना किसी अन्य देश की सहायता के इस 'भीषण युद्ध' के मुहाने पर 'अकेला' पहुंच
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    " 'शांतिप्रिय परंतु बहादुर' "देश🇮🇳भारत" बिना किसी अन्य देश की सहायता के इस 'भीषण युद्ध' के मुहाने पर 'अकेला' पहुंच
    user_पानीपत क्रांति न्यूज़ पानीपत क
    पानीपत क्रांति न्यूज़ पानीपत क
    Court reporter Assandh, Karnal•
    7 hrs ago
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