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लड़की को भगाने का आरोपी गिरफ्तार विद्यापतिनगर। थाना क्षेत्र के एक गांव में नाबालिग लड़की को बहला-फुसलाकर भगाने के मामले में पुलिस ने जयनगर निवासी अन्नू उर्फ अनुराग कुमार को गिरफ्तार कर भेजा जेल.

1 hr ago
user_Anil shriwastav
Anil shriwastav
दलसिंहसराय, समस्तीपुर, बिहार•
1 hr ago

लड़की को भगाने का आरोपी गिरफ्तार विद्यापतिनगर। थाना क्षेत्र के एक गांव में नाबालिग लड़की को बहला-फुसलाकर भगाने के मामले में पुलिस ने जयनगर निवासी अन्नू उर्फ अनुराग कुमार को गिरफ्तार कर भेजा जेल.

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  • लड़की को भगाने का आरोपी गिरफ्तार विद्यापतिनगर। थाना क्षेत्र के एक गांव में नाबालिग लड़की को बहला-फुसलाकर भगाने के मामले में पुलिस ने जयनगर निवासी अन्नू उर्फ अनुराग कुमार को गिरफ्तार कर भेजा जेल.
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    लड़की को भगाने का आरोपी गिरफ्तार
विद्यापतिनगर। थाना क्षेत्र के एक गांव में नाबालिग लड़की को बहला-फुसलाकर भगाने के मामले में पुलिस ने जयनगर निवासी अन्नू उर्फ अनुराग कुमार को गिरफ्तार कर भेजा जेल.
    user_Anil shriwastav
    Anil shriwastav
    दलसिंहसराय, समस्तीपुर, बिहार•
    1 hr ago
  • Post by Ankit Kumar
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    Post by Ankit Kumar
    user_Ankit Kumar
    Ankit Kumar
    दलसिंहसराय, समस्तीपुर, बिहार•
    2 hrs ago
  • Post by न्यूज 30 बिहार
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    Post by न्यूज 30 बिहार
    user_न्यूज 30 बिहार
    न्यूज 30 बिहार
    Pandarak, Patna•
    4 hrs ago
  • Post by Arvind Kumar News 7 Samastipur
    1
    Post by Arvind Kumar News 7 Samastipur
    user_Arvind Kumar News 7 Samastipur
    Arvind Kumar News 7 Samastipur
    Samastipur, Bihar•
    1 hr ago
  • बंधार ग्राम सभा में ‘महिला सशक्तिकरण’ का दावा—जमीनी हकीकत: एक भी महिला नहीं! समस्तीपुर/शिवाजीनगर: 24 अप्रैल 2026 को बंधार पंचायत में आयोजित ग्राम सभा ने पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आधिकारिक एजेंडा में “महिला सशक्तिकरण” जैसे महत्वपूर्ण विषय को प्रमुखता से शामिल किया गया, लेकिन बैठक की वास्तविक तस्वीर इसके बिल्कुल उलट सामने आई। प्रत्यक्षदर्शियों का दावा है कि ग्राम सभा में एक भी महिला उपस्थित नहीं थी। इतना ही नहीं, स्थानीय लोगों का कहना है कि महिलाओं को बैठक में शामिल होने के लिए न तो प्रभावी रूप से आमंत्रित किया गया और न ही उनकी भागीदारी सुनिश्चित की गई। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि बैठक की अध्यक्षता स्वयं एक महिला मुखिया द्वारा की जा रही थी, फिर भी पूरे सत्र के दौरान उन्होंने कोई स्पष्ट या सारगर्भित वक्तव्य नहीं दिया। यह स्थिति इस बात की ओर इशारा करती है कि “महिला सशक्तिकरण” केवल कागज़ों में सीमित एक औपचारिक एजेंडा बनकर रह गया। जब एजेंडा में महिला सशक्तिकरण शामिल था, तो बैठक में महिलाओं की पूर्ण अनुपस्थिति और इस विषय पर चर्चा का अभाव गंभीर प्रश्न खड़े करता है: क्या ग्राम सभा केवल औपचारिकता निभाने का मंच बन गई है? क्या कागज़ों में दिखाए गए एजेंडा और जमीनी वास्तविकता के बीच गहरा अंतर है? ग्रामीणों ने मांग की है कि ग्राम सभा की कार्यवाही (minutes), उपस्थिति पंजी और विषयवार चर्चा का पूरा विवरण सार्वजनिक किया जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके और जिम्मेदारी तय हो सके।
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    बंधार ग्राम सभा में ‘महिला सशक्तिकरण’ का दावा—जमीनी हकीकत: एक भी महिला नहीं!
समस्तीपुर/शिवाजीनगर: 24 अप्रैल 2026 को बंधार पंचायत में आयोजित ग्राम सभा ने पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आधिकारिक एजेंडा में “महिला सशक्तिकरण” जैसे महत्वपूर्ण विषय को प्रमुखता से शामिल किया गया, लेकिन बैठक की वास्तविक तस्वीर इसके बिल्कुल उलट सामने आई।
प्रत्यक्षदर्शियों का दावा है कि ग्राम सभा में एक भी महिला उपस्थित नहीं थी। इतना ही नहीं, स्थानीय लोगों का कहना है कि महिलाओं को बैठक में शामिल होने के लिए न तो प्रभावी रूप से आमंत्रित किया गया और न ही उनकी भागीदारी सुनिश्चित की गई।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि बैठक की अध्यक्षता स्वयं एक महिला मुखिया द्वारा की जा रही थी, फिर भी पूरे सत्र के दौरान उन्होंने कोई स्पष्ट या सारगर्भित वक्तव्य नहीं दिया। यह स्थिति इस बात की ओर इशारा करती है कि “महिला सशक्तिकरण” केवल कागज़ों में सीमित एक औपचारिक एजेंडा बनकर रह गया।
जब एजेंडा में महिला सशक्तिकरण शामिल था, तो बैठक में महिलाओं की पूर्ण अनुपस्थिति और इस विषय पर चर्चा का अभाव गंभीर प्रश्न खड़े करता है:
क्या ग्राम सभा केवल औपचारिकता निभाने का मंच बन गई है?
क्या कागज़ों में दिखाए गए एजेंडा और जमीनी वास्तविकता के बीच गहरा अंतर है?
ग्रामीणों ने मांग की है कि ग्राम सभा की कार्यवाही (minutes), उपस्थिति पंजी और विषयवार चर्चा का पूरा विवरण सार्वजनिक किया जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके और जिम्मेदारी तय हो सके।
    user_Mritunjay Kumar Thakur
    Mritunjay Kumar Thakur
    समस्तीपुर पत्रकार समस्तीपुर, समस्तीपुर, बिहार•
    2 hrs ago
  • बिहार में अप्रैल 2016 से लागू शराबबंदी को अब 10 साल पूरे होने को हैं। सरकार के ताज़ा आंकड़ों (मार्च 2026 तक) और विभिन्न रिपोर्ट्स के अनुसार, इस कानून का प्रभाव और इसकी चुनौतियां दोनों ही काफी व्यापक रही हैं। ​1. 10 साल का लेखा-जोखा: गिरफ्तारी और मुकदमे ​हाल ही में बिहार सरकार द्वारा जारी आंकड़ों और न्यायिक समीक्षा के अनुसार स्थिति कुछ इस प्रकार है: ​गिरफ्तारियां: पिछले 10 वर्षों में लगभग 17 लाख से अधिक लोगों को शराबबंदी कानून के उल्लंघन के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। ​दर्ज केस (FIR): अब तक कुल 11.37 लाख से ज्यादा मामले दर्ज किए जा चुके हैं। इनमें से लगभग 5.77 लाख केस पुलिस ने और 5.60 लाख केस उत्पाद विभाग ने दर्ज किए हैं। ​पेंडिंग केस और बोझ: न्यायपालिका पर इस कानून का भारी दबाव है। मार्च 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, लगभग 5.70 लाख मामलों का निपटारा किया जा चुका है, जिसका अर्थ है कि अभी भी करीब 5.67 लाख केस अदालतों में लंबित (Pending) हैं। ​जब्ती: 10 सालों में लगभग 4.83 करोड़ लीटर अवैध शराब जब्त की गई है, जिसमें विदेशी और देसी शराब की मात्रा लगभग बराबर है। इसके अलावा 1.67 लाख वाहन भी जब्त किए गए हैं। ​2. सिस्टम की नाकामियां: एक गंभीर विश्लेषण ​पटना हाई कोर्ट और विभिन्न सामाजिक अध्ययनों ने शराबबंदी को लागू करने वाले सिस्टम की कई खामियों को उजागर किया है: ​भ्रष्टाचार और पुलिस-माफिया साठगांठ ​हाई कोर्ट ने कई बार टिप्पणी की है कि राज्य की मशीनरी इस कानून को पूरी तरह लागू करने में विफल रही है। आरोप है कि स्थानीय पुलिस और उत्पाद विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से शराब की होम डिलीवरी एक "समानांतर अर्थव्यवस्था" बन गई है। ​गरीबों पर गाज, माफिया 'आजाद' ​विपक्ष और सामाजिक कार्यकर्ताओं का तर्क है कि जेल जाने वाले 17 लाख लोगों में से 50% से अधिक लोग समाज के अत्यंत पिछड़े या गरीब तबके से आते हैं, जो अक्सर "कैरियर" (ढोने वाले) के रूप में इस्तेमाल होते हैं। बड़े शराब माफिया और किंगपिन अक्सर कानून के शिकंजे से बाहर रहते हैं। ​न्यायपालिका पर अतिरिक्त बोझ ​इतनी बड़ी संख्या में मुकदमों के कारण निचली अदालतों में सामान्य आपराधिक मामलों की सुनवाई प्रभावित हुई है। हालांकि सरकार ने विशेष 'एक्साइज कोर्ट' बनाए हैं, लेकिन केस पेंडेंसी की दर अभी भी बहुत ऊंची है। ​जहरीली शराब की त्रासदी (Hooch Tragedy) ​पूर्ण शराबबंदी के बावजूद, अवैध रूप से निर्मित जहरीली शराब के कारण बिहार में समय-समय पर बड़ी मौतें होती रही हैं। यह सिस्टम की विफलता का सबसे काला पक्ष है, जहाँ लोग सरकारी नियंत्रण न होने के कारण असुरक्षित रसायनों का सेवन कर लेते हैं। ​प्रमुख असर और वर्तमान स्थिति (2026) ​सकारात्मक पक्ष: महिलाओं के खिलाफ घरेलू हिंसा में कमी और ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति में सुधार (शिक्षा और भोजन पर खर्च बढ़ना) दर्ज किया गया है। ​आर्थिक नुकसान: बिहार को सालाना लगभग 5,000 करोड़ से 8,000 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है, जिसकी कुल भरपाई अब तक 30,000 करोड़ रुपये से अधिक मानी जा रही है। ​नया मोड़: 2026 के अप्रैल माह में बिहार की राजनीति में बदलाव के संकेत मिल रहे हैं, जहाँ कुछ गठबंधन सहयोगी शराबबंदी कानून में ढील देने या इसे चरणबद्ध तरीके से वापस लेने पर चर्चा कर रहे हैं। ​Liquor Ban Impact in Bihar: A 10-Year Report ​
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    बिहार में अप्रैल 2016 से लागू शराबबंदी को अब 10 साल पूरे होने को हैं। सरकार के ताज़ा आंकड़ों (मार्च 2026 तक) और विभिन्न रिपोर्ट्स के अनुसार, इस कानून का प्रभाव और इसकी चुनौतियां दोनों ही काफी व्यापक रही हैं।
​1. 10 साल का लेखा-जोखा: गिरफ्तारी और मुकदमे
​हाल ही में बिहार सरकार द्वारा जारी आंकड़ों और न्यायिक समीक्षा के अनुसार स्थिति कुछ इस प्रकार है:
​गिरफ्तारियां: पिछले 10 वर्षों में लगभग 17 लाख से अधिक लोगों को शराबबंदी कानून के उल्लंघन के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।
​दर्ज केस (FIR): अब तक कुल 11.37 लाख से ज्यादा मामले दर्ज किए जा चुके हैं। इनमें से लगभग 5.77 लाख केस पुलिस ने और 5.60 लाख केस उत्पाद विभाग ने दर्ज किए हैं।
​पेंडिंग केस और बोझ: न्यायपालिका पर इस कानून का भारी दबाव है। मार्च 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, लगभग 5.70 लाख मामलों का निपटारा किया जा चुका है, जिसका अर्थ है कि अभी भी करीब 5.67 लाख केस अदालतों में लंबित (Pending) हैं।
​जब्ती: 10 सालों में लगभग 4.83 करोड़ लीटर अवैध शराब जब्त की गई है, जिसमें विदेशी और देसी शराब की मात्रा लगभग बराबर है। इसके अलावा 1.67 लाख वाहन भी जब्त किए गए हैं।
​2. सिस्टम की नाकामियां: एक गंभीर विश्लेषण
​पटना हाई कोर्ट और विभिन्न सामाजिक अध्ययनों ने शराबबंदी को लागू करने वाले सिस्टम की कई खामियों को उजागर किया है:
​भ्रष्टाचार और पुलिस-माफिया साठगांठ
​हाई कोर्ट ने कई बार टिप्पणी की है कि राज्य की मशीनरी इस कानून को पूरी तरह लागू करने में विफल रही है। आरोप है कि स्थानीय पुलिस और उत्पाद विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से शराब की होम डिलीवरी एक "समानांतर अर्थव्यवस्था" बन गई है।
​गरीबों पर गाज, माफिया 'आजाद'
​विपक्ष और सामाजिक कार्यकर्ताओं का तर्क है कि जेल जाने वाले 17 लाख लोगों में से 50% से अधिक लोग समाज के अत्यंत पिछड़े या गरीब तबके से आते हैं, जो अक्सर "कैरियर" (ढोने वाले) के रूप में इस्तेमाल होते हैं। बड़े शराब माफिया और किंगपिन अक्सर कानून के शिकंजे से बाहर रहते हैं।
​न्यायपालिका पर अतिरिक्त बोझ
​इतनी बड़ी संख्या में मुकदमों के कारण निचली अदालतों में सामान्य आपराधिक मामलों की सुनवाई प्रभावित हुई है। हालांकि सरकार ने विशेष 'एक्साइज कोर्ट' बनाए हैं, लेकिन केस पेंडेंसी की दर अभी भी बहुत ऊंची है।
​जहरीली शराब की त्रासदी (Hooch Tragedy)
​पूर्ण शराबबंदी के बावजूद, अवैध रूप से निर्मित जहरीली शराब के कारण बिहार में समय-समय पर बड़ी मौतें होती रही हैं। यह सिस्टम की विफलता का सबसे काला पक्ष है, जहाँ लोग सरकारी नियंत्रण न होने के कारण असुरक्षित रसायनों का सेवन कर लेते हैं।
​प्रमुख असर और वर्तमान स्थिति (2026)
​सकारात्मक पक्ष: महिलाओं के खिलाफ घरेलू हिंसा में कमी और ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति में सुधार (शिक्षा और भोजन पर खर्च बढ़ना) दर्ज किया गया है।
​आर्थिक नुकसान: बिहार को सालाना लगभग 5,000 करोड़ से 8,000 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है, जिसकी कुल भरपाई अब तक 30,000 करोड़ रुपये से अधिक मानी जा रही है।
​नया मोड़: 2026 के अप्रैल माह में बिहार की राजनीति में बदलाव के संकेत मिल रहे हैं, जहाँ कुछ गठबंधन सहयोगी शराबबंदी कानून में ढील देने या इसे चरणबद्ध तरीके से वापस लेने पर चर्चा कर रहे हैं।
​Liquor Ban Impact in Bihar: A 10-Year Report
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    user_RUBY JOURNALIST
    RUBY JOURNALIST
    Court reporter बाढ़, पटना, बिहार•
    3 hrs ago
  • समस्तीपुर जिले के हसनपुर थाना क्षेत्र में अग्निशमन विभाग के द्वारा मॉक ड्रिल का आयोजन एवं जन-जागरूकता अभियान
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    समस्तीपुर जिले के हसनपुर थाना क्षेत्र में अग्निशमन विभाग के द्वारा मॉक ड्रिल का आयोजन एवं जन-जागरूकता अभियान
    user_NK (पत्रकार)
    NK (पत्रकार)
    समस्तीपुर, समस्तीपुर, बिहार•
    5 hrs ago
  • *समस्तीपुर. दिल्ली पुलिस द्वारा बिहारी युवक की गोली मारकर हत्या के खिलाफ, प्रतिरोध मार्च, गृहमंत्री का पुतला दहन*
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    *समस्तीपुर.
दिल्ली पुलिस द्वारा बिहारी युवक की गोली मारकर हत्या के खिलाफ, प्रतिरोध मार्च, गृहमंत्री का पुतला दहन*
    user_Anil shriwastav
    Anil shriwastav
    दलसिंहसराय, समस्तीपुर, बिहार•
    4 hrs ago
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