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Raj AHIRWAR
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- मध्य प्रदेश के दतिया उपचुनाव में नेता प्रतिपक्ष श्री उमंग सिंघार जी ने कांग्रेस प्रत्याशी श्री घनश्याम सिंह जी के समर्थन में प्रचार किया। दतियावासियों से आत्मीय मुलाकात के दौरान उन्हें स्नेह, विश्वास और अपार जनसमर्थन प्राप्त हुआ। जनता फसल नुकसान, खाद की किल्लत और 27% ओबीसी आरक्षण जैसे मुद्दों पर भाजपा सरकार से बेहद नाराज़ है। हर वर्ग से कांग्रेस प्रत्याशी श्री घनश्याम सिंह जी के पक्ष में मिल रहा अभूतपूर्व जनसमर्थन इस बात का संकेत है कि दतिया में कांग्रेस की जीत तय है। जनता के आशीर्वाद से घनश्याम सिंह जी विधानसभा पहुंचकर दतिया के किसानों, युवाओं, पिछड़ों और आमजन की आवाज़ को मजबूती से उठाएंगे, यहीं कांग्रेस का संकल्प हैं।1
- CJP के प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ की गई आपत्तिजनक टिप्पणियों पर एक 70 वर्षीय महिला ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। यह घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। महिला ने प्रदर्शनकारियों की टिप्पणियों की तीखी आलोचना की और उन्हें अनुचित बताया। इस वीडियो को देखने के बाद लोग सोशल मीडिया पर अपनी-अपनी राय व्यक्त कर रहे हैं। कुछ लोग महिला की प्रतिक्रिया का समर्थन कर रहे हैं, जबकि अन्य प्रदर्शनकारियों के पक्ष में हैं। इस घटना ने राजनीतिक और सामाजिक मंचों पर बहस छेड़ दी है।1
- कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रंका ने नई दिल्ली में एक बयान जारी कर केंद्र सरकार पर छात्रों से वादाखिलाफी करने का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि 20 जुलाई को केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा और जितेंद्र सिंह के साथ वार्ता में यह तय हुआ था कि देश भर (विशेषकर भाजपा शासित व सहयोगी राज्यों) में चल रहे प्रदर्शनों के दौरान किसी छात्र या आयोजक पर नई FIR दर्ज नहीं होगी और पुरानी FIR वापस ली जाएंगी। रंका ने आरोप लगाया कि समझौते के बावजूद बंगाल, बिहार, असम और दिल्ली में छात्रों पर लगातार FIR दर्ज की जा रही हैं और उन्हें हिरासत में लिया जा रहा है। उन्होंने सरकार को चेतावनी दी कि यदि मंगलवार तक उनकी मांगों पर लिखित आश्वासन नहीं मिला, प्रदर्शनकारियों को रिहा नहीं किया गया और मुकदमे वापस नहीं लिए गए, तो CJP दिल्ली में फिर से बड़ा धरना-प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होगी। #DelhiNews #CJP #AshutoshRanka #JPNadda #StudentProtest #BreakingNews1
- भारत में सड़कों का विकास और टोल टैक्स का मुद्दा एक दिलचस्प विरोधाभास प्रस्तुत करता है। एक ओर सरकार और नितिन गडकरी जैसे मंत्री सड़कों के विकास और नई परियोजनाओं की घोषणा करते हैं, वहीं दूसरी ओर आम जनता को इन सड़कों पर चलने के लिए बार-बार भुगतान करना पड़ता है। गाड़ी खरीदते समय रोड टैक्स, गाड़ी पर जीएसटी, पेट्रोल पर टैक्स, इंश्योरेंस, फिटनेस और प्रदूषण प्रमाणपत्र के अलावा, सड़क पर निकलते ही टोल टैक्स अलग से देना पड़ता है। ऐसा लगता है कि गाड़ी सड़क पर कम और टैक्स के जंगल में ज़्यादा दौड़ रही है। टोल प्लाज़ा पर अक्सर ऐसा देखा जाता है कि पांच मिनट का रास्ता बचाने के लिए दस मिनट की लाइन में लगना पड़ता है, जबकि बोर्ड पर 'सुगम यात्रा' लिखा होता है। सरकार का दावा है कि टोल से सड़क का रखरखाव होता है, लेकिन जनता का सवाल है कि फिर हर बरसात में सड़कें गड्ढों में क्यों बदल जाती हैं? टोल वसूली की अवधि बढ़ती ही क्यों जा रही है? जनता को लगता है कि सड़क का खर्च कभी न कभी पूरा हो जाएगा, लेकिन टोल प्लाज़ा बताते हैं कि विकास की कहानी का अंतिम अध्याय अभी लिखा ही नहीं गया है। हाल ही में शिक्षा मंत्री के इस्तीफे ने राजनीति का तापमान बढ़ा दिया है, और अब यह चर्चा होने लगी है कि टोल टैक्स का मुद्दा भी ऐसा न बन जाए कि विपक्ष के भाषणों का मुख्य विषय और जनता के गुस्से का नया केंद्र बन जाए। राजनीति में कुर्सियां कई बार बड़े-बड़े मुद्दों से नहीं, छोटे-छोटे जनाक्रोश से भी हिल जाती हैं। गडकरी जी को लोग काम करने वाला मंत्री मानते हैं, लेकिन राजनीति केवल काम से नहीं, जनता की धारणा से भी चलती है। यदि जनता को यह लगने लगे कि सड़कें तो शानदार हैं, लेकिन उन पर चलना महंगा होता जा रहा है, तो विरोध की रफ्तार भी एक्सप्रेसवे से कम नहीं होगी। विकास और वसूली के बीच संतुलन भी जरूरी है। जनता अच्छी सड़कें चाहती है, लेकिन हर मोड़ पर जेब हल्की होने का अहसास नहीं। आखिर सड़क पर चलने वाला वही नागरिक है जिसने टैक्स देकर सरकार बनाई, गाड़ी खरीदी, पेट्रोल खरीदा और फिर उसी सड़क पर चलने के लिए दोबारा भुगतान भी किया। इसलिए गडकरी जी, देश को अच्छी सड़कें दीजिए, आधुनिक पुल बनाइए, एक्सप्रेसवे का जाल बिछाइए, लेकिन जनता को यह भरोसा भी दिलाइए कि विकास केवल टोल की रसीदों से नहीं मापा जाएगा। वरना कहीं ऐसा न हो कि आने वाले दिनों में लोग सड़क की गुणवत्ता से कम और टोल की रसीद से ज़्यादा परेशान दिखाई दें।1
- मध्य प्रदेश के भोपाल जिले के बेरसिया उप-जिले में रिश्तों की एक नई परिभाषा उभर कर सामने आई है। यहाँ के लोग अब रिश्तों को एक नए तरीके से देख रहे हैं और साथ में चलने की बात कर रहे हैं। इस बदलाव का कारण और इसके पीछे की भावना को समझने की कोशिश की जा रही है। लोग अब साथ में चलने और रिश्तों को नए सिरे से परिभाषित करने की बात कर रहे हैं।1
- ग्रेटर नोएडा के नॉलेज पार्क स्थित कलाधाम सोसायटी के पास कथित तौर पर नोएडा अथॉरिटी की लापरवाही के कारण एक मासूम की जान चली गई। यहां बोरिंग के लिए खोदा गया करीब 15 फीट गहरा गड्ढा बारिश के बाद पानी से भर गया था। इस खतरनाक जगह पर न तो कोई बैरिकेडिंग की गई थी और न ही कोई चेतावनी बोर्ड लगाया गया था, जिससे खेलते-खेलते 6 साल का एक मासूम बच्चा उस गड्ढे में गिर गया। स्थानीय लोगों ने बच्चे को बाहर निकालकर तुरंत अस्पताल पहुंचाया, लेकिन उसकी जान नहीं बच सकी। परिजनों का आरोप है कि अगर समय रहते सुरक्षा के इंतजाम किए गए होते, तो यह हादसा टल सकता था। हादसे के बाद यह सवाल उठ रहा है कि आखिर नोएडा अथॉरिटी की ऐसी लापरवाही की कीमत आम लोगों को कब तक अपनी जान देकर चुकानी पड़ेगी। मामले की जांच जारी है।1