दरभंगा युवा जिला अध्यक्ष प्रदीप पासवान ने ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय (एलएनएमयू) में कथित भ्रष्टाचार, वित्तीय अनियमितताओं और प्रशासनिक मनमानी के खिलाफ आवाज उठाते हुए केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान से मुलाकात कर एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा है। प्रदीप पासवान ने दावा किया कि विश्वविद्यालय में चल रही कथित अनियमितताओं को उजागर करने और सवाल उठाने के कारण उन्हें व्यक्तिगत, सामाजिक और मानसिक दबावों का सामना करना पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय प्रशासन में लंबे समय से नियमों की अनदेखी, मनमानी नियुक्तियां, वित्तीय अपारदर्शिता और प्रशासनिक गड़बड़ियां जारी हैं। प्रदीप पासवान के अनुसार, जब उन्होंने इन मुद्दों को सार्वजनिक मंचों और संबंधित अधिकारियों के समक्ष उठाया, तो उन्हें नजरअंदाज करने, दबाव बनाने और उनकी बातों को गंभीरता से नहीं लेने की कोशिश की गई। उन्होंने कहा कि दलित समाज से आने वाले एक व्यक्ति द्वारा भ्रष्टाचार के विरुद्ध आवाज उठाना कुछ लोगों को स्वीकार नहीं हुआ, जिसके कारण उन्हें कई स्तरों पर उपेक्षा और असहज परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। उनका आरोप है कि यदि कोई प्रभावशाली या उच्च पद से जुड़ा व्यक्ति यही सवाल उठाता, तो संभवत: मामले को अलग गंभीरता से लिया जाता। ज्ञापन में यह भी आरोप लगाया गया कि विश्वविद्यालय में सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े मामलों में निजी एजेंसियों के माध्यम से तैनात कर्मियों को निर्धारित शर्तों के अनुरूप भुगतान नहीं हो रहा, जबकि कागजों में भारी वित्तीय व्यय दर्शाया जा रहा है। प्रदीप पासवान ने आशंका जताई कि प्रत्येक माह लाखों रुपये के भुगतान और कार्य निष्पादन में गंभीर अनियमितता हो सकती है, जिसकी स्वतंत्र एजेंसी से जांच होनी चाहिए। इसके अतिरिक्त, उन्होंने विश्वविद्यालय के कई विकास कार्यों, प्रशासनिक खर्च, संविदा प्रक्रियाओं, नियुक्तियों एवं भुगतान प्रणाली की भी निष्पक्ष जांच की मांग उठाई। प्रदीप पासवान ने ज़ोर दिया कि शिक्षा संस्थानों में भ्रष्टाचार केवल आर्थिक नुकसान नहीं बल्कि छात्रों, कर्मचारियों और पूरे शैक्षणिक ढांचे के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। मामले को लेकर केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान से हुई मुलाकात में सभी बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। प्रदीप पासवान के अनुसार, मंत्री ने मामले को गंभीर बताते हुए सक्षम स्तर पर जांच और आवश्यक कार्रवाई हेतु पहल करने का आश्वासन दिया है। प्रदीप पासवान ने मांग की है कि पूरे मामले की जांच विजिलेंस, आर्थिक अपराध इकाई अथवा किसी स्वतंत्र उच्चस्तरीय जांच एजेंसी से कराई जाए, ताकि यदि भ्रष्टाचार या पद के दुरुपयोग के आरोप सत्य हों तो जिम्मेदार व्यक्तियों पर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। हालांकि, इन आरोपों पर विश्वविद्यालय प्रशासन का आधिकारिक पक्ष अभी तक सामने नहीं आया है। प्राप्त होने पर प्रशासन का पक्ष भी प्रकाशित किया जाएगा।
दरभंगा युवा जिला अध्यक्ष प्रदीप पासवान ने ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय (एलएनएमयू) में कथित भ्रष्टाचार, वित्तीय अनियमितताओं और प्रशासनिक मनमानी के खिलाफ आवाज उठाते हुए केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान से मुलाकात कर एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा है। प्रदीप पासवान ने दावा किया कि विश्वविद्यालय में चल रही कथित अनियमितताओं को उजागर करने और सवाल उठाने के कारण उन्हें व्यक्तिगत, सामाजिक और मानसिक दबावों का सामना करना पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय प्रशासन में लंबे समय से नियमों की अनदेखी, मनमानी नियुक्तियां, वित्तीय अपारदर्शिता और प्रशासनिक गड़बड़ियां जारी हैं। प्रदीप पासवान के अनुसार, जब उन्होंने इन मुद्दों को सार्वजनिक मंचों और संबंधित अधिकारियों के समक्ष उठाया, तो उन्हें नजरअंदाज करने, दबाव बनाने और उनकी बातों को गंभीरता से नहीं लेने की कोशिश की गई। उन्होंने कहा कि दलित समाज से आने वाले एक व्यक्ति द्वारा भ्रष्टाचार के विरुद्ध आवाज उठाना कुछ लोगों को स्वीकार नहीं हुआ, जिसके कारण उन्हें कई स्तरों पर उपेक्षा और असहज परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। उनका आरोप है कि यदि कोई प्रभावशाली या उच्च पद से जुड़ा व्यक्ति यही सवाल उठाता, तो संभवत: मामले को अलग गंभीरता से लिया जाता। ज्ञापन में यह भी आरोप लगाया गया कि विश्वविद्यालय में सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े मामलों में निजी एजेंसियों के माध्यम से तैनात कर्मियों को निर्धारित
शर्तों के अनुरूप भुगतान नहीं हो रहा, जबकि कागजों में भारी वित्तीय व्यय दर्शाया जा रहा है। प्रदीप पासवान ने आशंका जताई कि प्रत्येक माह लाखों रुपये के भुगतान और कार्य निष्पादन में गंभीर अनियमितता हो सकती है, जिसकी स्वतंत्र एजेंसी से जांच होनी चाहिए। इसके अतिरिक्त, उन्होंने विश्वविद्यालय के कई विकास कार्यों, प्रशासनिक खर्च, संविदा प्रक्रियाओं, नियुक्तियों एवं भुगतान प्रणाली की भी निष्पक्ष जांच की मांग उठाई। प्रदीप पासवान ने ज़ोर दिया कि शिक्षा संस्थानों में भ्रष्टाचार केवल आर्थिक नुकसान नहीं बल्कि छात्रों, कर्मचारियों और पूरे शैक्षणिक ढांचे के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। मामले को लेकर केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान से हुई मुलाकात में सभी बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। प्रदीप पासवान के अनुसार, मंत्री ने मामले को गंभीर बताते हुए सक्षम स्तर पर जांच और आवश्यक कार्रवाई हेतु पहल करने का आश्वासन दिया है। प्रदीप पासवान ने मांग की है कि पूरे मामले की जांच विजिलेंस, आर्थिक अपराध इकाई अथवा किसी स्वतंत्र उच्चस्तरीय जांच एजेंसी से कराई जाए, ताकि यदि भ्रष्टाचार या पद के दुरुपयोग के आरोप सत्य हों तो जिम्मेदार व्यक्तियों पर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। हालांकि, इन आरोपों पर विश्वविद्यालय प्रशासन का आधिकारिक पक्ष अभी तक सामने नहीं आया है। प्राप्त होने पर प्रशासन का पक्ष भी प्रकाशित किया जाएगा।
- दरभंगा में एक मकान के भीतर अवैध धंधा संचालित होने के आरोपों को लेकर घंटों तक हाई-वोल्टेज ड्रामा चलता रहा। इस मामले की सूचना मिलने के बाद बहादुरपुर थाना की पुलिस मौके पर पहुँची और बंद कमरे को खुलवाया, लेकिन तलाशी के दौरान कमरे में कोई लड़की नहीं मिली। मकान मालिक राधे श्याम ने आरोपों का खंडन करते हुए बताया कि जिस 16 वर्षीय लड़की से अवैध धंधा करवाने का आरोप लगाया जा रहा है, वह उसकी पत्नी है। पुलिस ने आरोपित युवक राधे श्याम को हिरासत में लेकर थाना पहुँचाया। इस बीच, तथाकथित मालकिनी मनीषा देवी समेत कई लड़कियाँ थाने पर गायब लड़की गुंजन कुमारी को सामने लाने की गुहार लगाती रहीं।1
- दरभंगा के सुनियार वकील और भाजपा नेता ने मुख्यमंत्री को लेकर अपनी बात रखी है। उन्होंने मुख्यमंत्री पर टिप्पणी की है।1
- बहादुरपुर प्रखंड की बहादुरपुर देकुली पंचायत में लाखों रुपये के फंड से एक नई सड़क और नाले का निर्माण किया गया है। यह नवनिर्मित ढाँचा सीधे तौर पर भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया है, जिसके कारण जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस सड़क की गुणवत्ता इतनी खराब है कि इस पर चलना तो दूर, नाले से पानी भी ठीक से नहीं बहता। स्थिति इतनी बदतर है कि लोग अपनी नाक बंद किए बिना पैदल भी नहीं चल सकते, जो बदबू और गंदगी की गंभीर समस्या को दर्शाता है। इन सभी समस्याओं के बावजूद, संवेदक और अभियंता कथित तौर पर अपनी स्थिति से खुश दिखाई देते हैं।1
- बिहार की राजनीति से जुड़ी एक अहम खबर में, पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने दस सर्कुलर रोड स्थित अपने सरकारी आवास को खाली करने के आदेश को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने कड़े शब्दों में स्पष्ट कहा है कि वह किसी भी कीमत पर अपना आवास खाली नहीं करेंगी और चाहे कुछ भी हो जाए, वह अपना घर नहीं छोड़ेंगी। इस मामले में राबड़ी देवी ने प्रशासन पर गंभीर आरोप भी लगाए हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें आवास खाली करने के लिए मजबूर किया जा रहा है और 'बल' का प्रयोग किया जा रहा है, जिस पर उन्होंने सवाल उठाया कि क्या यह तरीका उचित है। इसी दौरान, तीखी बहस और आक्रोश भी देखने को मिला, जब पत्रकारों ने इस विषय पर उनसे सवाल पूछने का प्रयास किया, तो राबड़ी देवी का गुस्सा भड़क उठा। उन्होंने गुस्से में एक पत्रकार के हाथ से माइक झटक कर किनारे कर दिया, जिसका वीडियो भी स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। सरकार की ओर से सरकारी आवास खाली करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन राबड़ी देवी ने अपनी बात साफ करते हुए कहा है कि वह झुकने वाली नहीं हैं। अब यह देखना होगा कि सरकार इस विवाद को लेकर अगला कदम क्या उठाती है और क्या यह मुद्दा और गहराएगा।1
- स्थानीय सरकारी रास्ते पर लगातार गाय का गोबर रखा जा रहा है। जानकारी के अनुसार, जब कोई व्यक्ति इस संबंध में आवाज़ उठाता है या इसका विरोध करता है, तो उसे थाने में शिकायत करने या कानूनी कार्रवाई (केस) करने की धमकी दी जाती है।1
- यह एक हार्दिक कामना है कि जीवन की हर सुबह और हर शाम केवल ईश्वर के स्मरण और ध्यान में ही व्यतीत हो। इस आध्यात्मिक संदेश में यह भी दृढ़ता से कहा गया है कि ईश्वर की उपस्थिति और कृपा के बिना सब कुछ अधूरा है, जो भक्ति और शांति के महत्व को रेखांकित करता है।1
- दरभंगा जेल में बंद एक कैदी की मां ने जेल उपाधीक्षक समेत कुल 10 नामजद व्यक्तियों और 20 अज्ञात लोगों के खिलाफ परिवाद दायर किया है। यह जानकारी Darpan24 News के अनुसार सामने आई है।1
- दरभंगा जिले के बहादुरपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत पंडासराय गुमटी के समीप स्थित एक मकान में शनिवार को कथित रूप से नाबालिग लड़की से अवैध धंधा कराए जाने के आरोप को लेकर घंटों हाई-वोल्टेज ड्रामा चलता रहा। सूचना मिलने पर बहादुरपुर थाना पुलिस मौके पर पहुँची और बंद कमरे की जाँच की, लेकिन वहाँ कोई लड़की नहीं मिली। इस मामले में एक महिला, जिसने खुद को आर्केस्ट्रा संचालिका बताया, ने आरोप लगाया कि एक नाबालिग लड़की ने उन्हें जानकारी दी थी कि उसे एक युवक द्वारा जबरन रखा गया है और उससे अवैध गतिविधियाँ कराई जा रही हैं। महिला ने दावा किया कि 27 मई को राधेश्याम नामक युवक लड़की को अपने साथ ले गया था, जिसके बाद से उसका कोई पता नहीं चल रहा है। इसी आशंका के आधार पर वह अन्य लड़कियों के साथ उस मकान पर पहुँची थी। हालाँकि, मकान का दरवाजा खुलवाने पर कथित तौर पर लापता लड़की वहाँ नहीं मिली, लेकिन आरोप लगाने वाली महिलाओं ने कमरे से लड़की के कपड़े और अन्य सामान बरामद होने का दावा किया, जिससे उसके वहाँ रहने की आशंका को बल मिला। वहीं, आरोपित युवक कृष्ण कन्हैया उर्फ राधेश्याम ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि वह लड़की उसकी पत्नी है और दोनों ने मंदिर में शादी की है। हालांकि, वह मौके पर विवाह से संबंधित कोई दस्तावेज या प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर सका। इसके बाद पुलिस युवक को पूछताछ के लिए थाने ले गई, जहाँ थाना परिसर में भी महिला और उसके साथ आई अन्य लड़कियां कथित रूप से लापता लड़की को सामने लाने की मांग करती रहीं ताकि पूरे मामले की सच्चाई स्पष्ट हो सके। बाद में महिला ने बहेड़ी थाना जाकर प्राथमिकी दर्ज कराने की बात कही। इस घटना को लेकर क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएं होती रहीं और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग घटनास्थल पर जुट गए। कुछ स्थानीय लोगों ने युवक की गतिविधियों पर संदेह जताते हुए दावा किया कि उसके यहाँ देर रात लोगों का आना-जाना होता था। उन्होंने पुलिस से सीसीटीवी फुटेज और मोबाइल फोन की जांच कर मामले की निष्पक्ष पड़ताल करने की मांग की। कानूनी जानकारों का कहना है कि यदि लड़की की उम्र 18 वर्ष से कम है, तो विवाह की वैधता और उससे जुड़े अन्य पहलुओं की जांच आवश्यक होगी। फिलहाल, पुलिस की ओर से मामले में आधिकारिक बयान आने और जांच पूरी होने का इंतजार किया जा रहा है ताकि लड़की की वास्तविक स्थिति, उम्र और दोनों पक्षों के दावों की पुष्टि हो सके।1