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न्याय के लिए भटक रहे सेवानिवृत्त एनटीपीसी महाप्रबंधक, अंचल प्रशासन की भूमिका पर उठे सवाल। (शंकर कुमार सिन्हा, जिला ब्यूरो चीफ, दैनिक अयोध्या टाइम्स बिहार, नालंदा बिहार।) नालंदा 12 जनवरी 2026-सिलाव। जिले में कानून-व्यवस्था और भूमि विवादों के निपटारे की जिम्मेदारी जिन अधिकारियों पर है, उनकी कथित निष्क्रियता और नियमों की गलत व्याख्या के कारण एक सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारी न्याय के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं। ताजा मामला सिलाव अंचल का है, जहां दबंगों के आगे कानून बौना नजर आ रहा है।मामला सिलाव अंचल के राजस्व मौजा नानंद, खाता संख्या 3, खसरा संख्या 3643 से जुड़ा है। यह भूमि बकास्त श्रेणी की है, जिसका कुल रकबा 19 डिसमिल है। उक्त भूमि का बंदोबस्त जमींदार द्वारा मध्यवर्ती किसान के नाम किया गया था। वर्ष 1995 में यह भूमि विधिवत निबंधित वसीका (सेल डीड) के माध्यम से उमा किरण कुमारी को प्राप्त हुई, जिनके पति इंजीनियर अनिल कुमार, एनटीपीसी से सेवानिवृत्त महाप्रबंधक हैं।विक्रेता से क्रेता के नाम पर विधिवत जमाबंदी कायम है तथा नियमित रूप से राजस्व रसीद भी निर्गत हो रही है। भूमि की मापी अंचल अमीन द्वारा कराई जा चुकी है और स्वयं अंचल अधिकारी, सिलाव ने स्थल निरीक्षण भी किया है।इसके बावजूद कुछ कथित असामाजिक तत्व इस रैयती भूमि को सरकारी भूमि बताकर लगभग सात डिसमिल हिस्से पर जबरन सरकारी कार्य कराना चाहते हैं। जब पीड़ित पक्ष ने इस संबंध में अंचल अधिकारी से शिकायत की, तो उन्हें भूमि का रैयतीकरण कराने की सलाह दी गई।भूमि मामलों के जानकारों का कहना है कि रैयतीकरण की प्रक्रिया उस स्थिति में अपनाई जाती है, जब किसी सरकारी प्रयोजन के लिए भूमि का अधिग्रहण किया जाता है और मुआवजा दिया जाना होता है। लेकिन इस मामले में भूमि स्वामी स्वयं अपनी जमीन का उपयोग अपने निजी प्रयोजन के लिए करना चाहते हैं। ऐसे में रैयतीकरण कराना या न कराना पूरी तरह भूमि स्वामी की इच्छा पर निर्भर करता है, न कि किसी अधिकारी के दबाव पर।इस संदर्भ में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग, बिहार सरकार द्वारा जारी पत्रांक 925/2014 का उल्लेख भी महत्वपूर्ण है। इस संकल्प में स्पष्ट किया गया है कि जिस भूमि पर वर्षों से राजस्व रसीद कट रही हो और जिस पर दखल-कब्जा स्थापित हो, उसे सरकार रैयती भूमि की श्रेणी में मानेगी। साथ ही, जिस भूमि पर 36 वर्षों से अधिक समय से कब्जा हो, वह एडवर्स पजेशन के अंतर्गत भी आती है।नियमों के अनुसार, ऐसी भूमि पर बलपूर्वक किसी भी प्रकार का कार्य कराना कानूनन गलत है और बिना वैधानिक आधार के एनओसी जारी करना भी नियमों का उल्लंघन है। दुखद यह है कि भूमि विवादों को सुलझाने की जिम्मेदारी जिन अधिकारियों पर है, उनकी कार्यशैली से आम नागरिक हताश हो रहे हैं और दबंगों का मनोबल बढ़ता जा रहा है।अब बड़ा सवाल यह है कि क्या जिला प्रशासन इस गंभीर मामले में हस्तक्षेप कर एक सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारी को न्याय दिलाएगा, या फिर कानून की खुलेआम अनदेखी यूं ही जारी रहेगी।

6 hrs ago
user_दैनिक अयोध्या टाईम्स बिहार
दैनिक अयोध्या टाईम्स बिहार
Journalist पकड़ी दयाल, पूर्वी चंपारण, बिहार•
6 hrs ago

न्याय के लिए भटक रहे सेवानिवृत्त एनटीपीसी महाप्रबंधक, अंचल प्रशासन की भूमिका पर उठे सवाल। (शंकर कुमार सिन्हा, जिला ब्यूरो चीफ, दैनिक अयोध्या टाइम्स बिहार, नालंदा बिहार।) नालंदा 12 जनवरी 2026-सिलाव। जिले में कानून-व्यवस्था और भूमि विवादों के निपटारे की जिम्मेदारी जिन अधिकारियों पर है, उनकी कथित निष्क्रियता और नियमों की गलत व्याख्या के कारण एक सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारी न्याय के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं। ताजा मामला सिलाव अंचल का है, जहां दबंगों के आगे कानून बौना नजर आ रहा है।मामला सिलाव अंचल के राजस्व मौजा नानंद, खाता संख्या 3, खसरा संख्या 3643 से जुड़ा है। यह भूमि बकास्त श्रेणी की है, जिसका कुल रकबा 19 डिसमिल है। उक्त भूमि का बंदोबस्त जमींदार द्वारा मध्यवर्ती किसान के नाम किया गया था। वर्ष 1995 में यह भूमि विधिवत निबंधित वसीका (सेल डीड) के माध्यम से उमा किरण कुमारी को प्राप्त हुई, जिनके पति इंजीनियर अनिल कुमार, एनटीपीसी से सेवानिवृत्त महाप्रबंधक हैं।विक्रेता से क्रेता के नाम पर विधिवत जमाबंदी कायम है तथा नियमित रूप से राजस्व रसीद भी निर्गत हो रही है। भूमि की मापी अंचल अमीन द्वारा कराई जा चुकी है और स्वयं अंचल अधिकारी, सिलाव ने स्थल निरीक्षण भी किया है।इसके बावजूद कुछ कथित असामाजिक तत्व इस रैयती भूमि को सरकारी भूमि बताकर लगभग सात डिसमिल हिस्से पर जबरन सरकारी कार्य कराना चाहते हैं। जब पीड़ित पक्ष ने इस संबंध में अंचल अधिकारी से शिकायत की, तो उन्हें भूमि का रैयतीकरण कराने की सलाह दी गई।भूमि मामलों

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के जानकारों का कहना है कि रैयतीकरण की प्रक्रिया उस स्थिति में अपनाई जाती है, जब किसी सरकारी प्रयोजन के लिए भूमि का अधिग्रहण किया जाता है और मुआवजा दिया जाना होता है। लेकिन इस मामले में भूमि स्वामी स्वयं अपनी जमीन का उपयोग अपने निजी प्रयोजन के लिए करना चाहते हैं। ऐसे में रैयतीकरण कराना या न कराना पूरी तरह भूमि स्वामी की इच्छा पर निर्भर करता है, न कि किसी अधिकारी के दबाव पर।इस संदर्भ में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग, बिहार सरकार द्वारा जारी पत्रांक 925/2014 का उल्लेख भी महत्वपूर्ण है। इस संकल्प में स्पष्ट किया गया है कि जिस भूमि पर वर्षों से राजस्व रसीद कट रही हो और जिस पर दखल-कब्जा स्थापित हो, उसे सरकार रैयती भूमि की श्रेणी में मानेगी। साथ ही, जिस भूमि पर 36 वर्षों से अधिक समय से कब्जा हो, वह एडवर्स पजेशन के अंतर्गत भी आती है।नियमों के अनुसार, ऐसी भूमि पर बलपूर्वक किसी भी प्रकार का कार्य कराना कानूनन गलत है और बिना वैधानिक आधार के एनओसी जारी करना भी नियमों का उल्लंघन है। दुखद यह है कि भूमि विवादों को सुलझाने की जिम्मेदारी जिन अधिकारियों पर है, उनकी कार्यशैली से आम नागरिक हताश हो रहे हैं और दबंगों का मनोबल बढ़ता जा रहा है।अब बड़ा सवाल यह है कि क्या जिला प्रशासन इस गंभीर मामले में हस्तक्षेप कर एक सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारी को न्याय दिलाएगा, या फिर कानून की खुलेआम अनदेखी यूं ही जारी रहेगी।

More news from बिहार and nearby areas
  • थरथरी में सनसनीखेज हत्या, बोरे में बंद युवक अंशु कुमार का शव बरामद। (शंकर कुमार सिन्हा, जिला ब्यूरो चीफ, दैनिक अयोध्या टाइम्स बिहार, नालंदा बिहार।) नालंदा 12 जनवरी 2026-थरथरी। नालंदा जिले के थरथरी थाना क्षेत्र अंतर्गत कोयल बीघा गांव के पास पुलिस ने बोरे में बंद एक युवक का शव बरामद किया है। मृतक की पहचान अंशु कुमार के रूप में की गई है।घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी। इस संबंध में एएसपी हिलसा सैलजा ने बताया कि पुलिस को सूचना मिली थी कि कोयल बीघा गांव के पास एक शव पड़ा हुआ है। सूचना के सत्यापन के लिए जब पुलिस टीम वहां पहुंची, तो बोरे में बंद युवक का शव बरामद हुआ।पुलिस के अनुसार मृतक के गले पर धारदार हथियार से काटे जाने के निशान पाए गए हैं, जिससे हत्या की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, हत्या के कारणों का फिलहाल पता नहीं चल सका है।पुलिस पूरे मामले की गहन जांच में जुटी हुई है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के बाद ही मामले का पूर्ण खुलासा हो सकेगा।
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    थरथरी में सनसनीखेज हत्या, बोरे में बंद युवक अंशु कुमार का शव बरामद।
(शंकर कुमार सिन्हा, जिला ब्यूरो चीफ, दैनिक अयोध्या टाइम्स बिहार, नालंदा बिहार।)
नालंदा 12 जनवरी 2026-थरथरी। नालंदा जिले के थरथरी थाना क्षेत्र अंतर्गत कोयल बीघा गांव के पास पुलिस ने बोरे में बंद एक युवक का शव बरामद किया है। मृतक की पहचान अंशु कुमार के रूप में की गई है।घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी। इस संबंध में एएसपी हिलसा सैलजा ने बताया कि पुलिस को सूचना मिली थी कि कोयल बीघा गांव के पास एक शव पड़ा हुआ है। सूचना के सत्यापन के लिए जब पुलिस टीम वहां पहुंची, तो बोरे में बंद युवक का शव बरामद हुआ।पुलिस के अनुसार मृतक के गले पर धारदार हथियार से काटे जाने के निशान पाए गए हैं, जिससे हत्या की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, हत्या के कारणों का फिलहाल पता नहीं चल सका है।पुलिस पूरे मामले की गहन जांच में जुटी हुई है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के बाद ही मामले का पूर्ण खुलासा हो सकेगा।
    user_दैनिक अयोध्या टाईम्स बिहार
    दैनिक अयोध्या टाईम्स बिहार
    Journalist पकड़ी दयाल, पूर्वी चंपारण, बिहार•
    6 hrs ago
  • सरकार दे रही ₹5000, लेकिन क्या इससे सड़क सुधरेगी या विवाद बढ़ेगा? #सरकार_का_ऑफर #₹5000_गड्ढा_योजना #बिहार_सड़क_संकट #हमारा_बिहार_हमारी_सड़क #जनभागीदारी_या_जोखिम #RoadSafetyBihar #PublicMoneyPublicRisk #SarkariYojana #GroundReality #BiharNewsAnalysis #निष्पक्ष_ख़बरें_अब_तक_बिहार #Ankesh_Thakur
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    सरकार दे रही ₹5000,
लेकिन क्या इससे सड़क सुधरेगी या विवाद बढ़ेगा?
#सरकार_का_ऑफर #₹5000_गड्ढा_योजना #बिहार_सड़क_संकट #हमारा_बिहार_हमारी_सड़क #जनभागीदारी_या_जोखिम #RoadSafetyBihar #PublicMoneyPublicRisk #SarkariYojana #GroundReality #BiharNewsAnalysis #निष्पक्ष_ख़बरें_अब_तक_बिहार #Ankesh_Thakur
    user_Ankesh Thakur
    Ankesh Thakur
    News Anchor Kalyanpur, Purbi Champaran•
    6 hrs ago
  • Bihar क़े प्रमुख विनय कुमार जी का आवास पर आगमन
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    Bihar क़े प्रमुख विनय कुमार जी का आवास पर आगमन
    user_Misty Helping Foundation
    Misty Helping Foundation
    Voice of people Tetaria, Purbi Champaran•
    5 hrs ago
  • Post by Santosh kumar
    1
    Post by Santosh kumar
    user_Santosh kumar
    Santosh kumar
    Farmer मीनापुर, मुजफ्फरपुर, बिहार•
    8 hrs ago
  • सुगौली पुलिस ने बाइक सवार शराब कारोबारी को 20 लीटर देशी चुलाई शराब के साथ और आधा दर्जन पियक्कड़ों को किया गिरफ्तार, भेजे गए जेल।
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    सुगौली पुलिस ने बाइक सवार शराब कारोबारी को 20 लीटर देशी चुलाई शराब के साथ और आधा दर्जन पियक्कड़ों को किया गिरफ्तार, भेजे गए जेल।
    user_Shambhu sharan
    Shambhu sharan
    Journalist सुगौली, पूर्वी चंपारण, बिहार•
    10 hrs ago
  • सीतामढ़ी रेलवे ओवरब्रिज निर्माण में देरी और लापरवाही पर सख्त रुख। स्थल निरीक्षण के दौरान सांसद, विधायक और डीएम ने ठेकेदार को कड़ी फटकार लगाई और तय समय-सीमा में कार्य पूर्ण करने का सख्त निर्देश दिया।।। #Sitamarhi #RailwayOverbridge #ROB #DevelopmentWork #Inspection #Administration #MP #MLA #DM #Contractor #WorkDelay #StrictAction #PublicIssue #BiharNews Expose Sitamarhi
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    सीतामढ़ी रेलवे ओवरब्रिज निर्माण में देरी और लापरवाही पर सख्त रुख। स्थल निरीक्षण के दौरान सांसद, विधायक और डीएम ने ठेकेदार को कड़ी फटकार लगाई और तय समय-सीमा में कार्य पूर्ण करने का सख्त निर्देश दिया।।।
#Sitamarhi #RailwayOverbridge #ROB #DevelopmentWork #Inspection #Administration #MP #MLA #DM #Contractor #WorkDelay #StrictAction #PublicIssue #BiharNews Expose Sitamarhi
    user_Expose sitamarhi
    Expose sitamarhi
    Local News Reporter डुमरा, सीतामढ़ी, बिहार•
    9 hrs ago
  • दादर पंचायत दादर कोल्हू वार्ड नंबर 13, नल जल की समस्या से लोग है अब परेशान नालों में निकल रहे हैं नालाओं का पानी बालू ही बालू निकल रहे हैं #दादर #vilar #मुजफ्फरपुर
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    दादर पंचायत दादर कोल्हू वार्ड नंबर 13, नल जल की समस्या से लोग है अब परेशान नालों में निकल रहे हैं नालाओं का पानी बालू ही बालू निकल रहे हैं #दादर #vilar #मुजफ्फरपुर
    user_Bihari_vlogs_2.0
    Bihari_vlogs_2.0
    Dacia dealer कांति, मुजफ्फरपुर, बिहार•
    20 hrs ago
  • न्याय के लिए भटक रहे सेवानिवृत्त एनटीपीसी महाप्रबंधक, अंचल प्रशासन की भूमिका पर उठे सवाल। (शंकर कुमार सिन्हा, जिला ब्यूरो चीफ, दैनिक अयोध्या टाइम्स बिहार, नालंदा बिहार।) नालंदा 12 जनवरी 2026-सिलाव। जिले में कानून-व्यवस्था और भूमि विवादों के निपटारे की जिम्मेदारी जिन अधिकारियों पर है, उनकी कथित निष्क्रियता और नियमों की गलत व्याख्या के कारण एक सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारी न्याय के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं। ताजा मामला सिलाव अंचल का है, जहां दबंगों के आगे कानून बौना नजर आ रहा है।मामला सिलाव अंचल के राजस्व मौजा नानंद, खाता संख्या 3, खसरा संख्या 3643 से जुड़ा है। यह भूमि बकास्त श्रेणी की है, जिसका कुल रकबा 19 डिसमिल है। उक्त भूमि का बंदोबस्त जमींदार द्वारा मध्यवर्ती किसान के नाम किया गया था। वर्ष 1995 में यह भूमि विधिवत निबंधित वसीका (सेल डीड) के माध्यम से उमा किरण कुमारी को प्राप्त हुई, जिनके पति इंजीनियर अनिल कुमार, एनटीपीसी से सेवानिवृत्त महाप्रबंधक हैं।विक्रेता से क्रेता के नाम पर विधिवत जमाबंदी कायम है तथा नियमित रूप से राजस्व रसीद भी निर्गत हो रही है। भूमि की मापी अंचल अमीन द्वारा कराई जा चुकी है और स्वयं अंचल अधिकारी, सिलाव ने स्थल निरीक्षण भी किया है।इसके बावजूद कुछ कथित असामाजिक तत्व इस रैयती भूमि को सरकारी भूमि बताकर लगभग सात डिसमिल हिस्से पर जबरन सरकारी कार्य कराना चाहते हैं। जब पीड़ित पक्ष ने इस संबंध में अंचल अधिकारी से शिकायत की, तो उन्हें भूमि का रैयतीकरण कराने की सलाह दी गई।भूमि मामलों के जानकारों का कहना है कि रैयतीकरण की प्रक्रिया उस स्थिति में अपनाई जाती है, जब किसी सरकारी प्रयोजन के लिए भूमि का अधिग्रहण किया जाता है और मुआवजा दिया जाना होता है। लेकिन इस मामले में भूमि स्वामी स्वयं अपनी जमीन का उपयोग अपने निजी प्रयोजन के लिए करना चाहते हैं। ऐसे में रैयतीकरण कराना या न कराना पूरी तरह भूमि स्वामी की इच्छा पर निर्भर करता है, न कि किसी अधिकारी के दबाव पर।इस संदर्भ में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग, बिहार सरकार द्वारा जारी पत्रांक 925/2014 का उल्लेख भी महत्वपूर्ण है। इस संकल्प में स्पष्ट किया गया है कि जिस भूमि पर वर्षों से राजस्व रसीद कट रही हो और जिस पर दखल-कब्जा स्थापित हो, उसे सरकार रैयती भूमि की श्रेणी में मानेगी। साथ ही, जिस भूमि पर 36 वर्षों से अधिक समय से कब्जा हो, वह एडवर्स पजेशन के अंतर्गत भी आती है।नियमों के अनुसार, ऐसी भूमि पर बलपूर्वक किसी भी प्रकार का कार्य कराना कानूनन गलत है और बिना वैधानिक आधार के एनओसी जारी करना भी नियमों का उल्लंघन है। दुखद यह है कि भूमि विवादों को सुलझाने की जिम्मेदारी जिन अधिकारियों पर है, उनकी कार्यशैली से आम नागरिक हताश हो रहे हैं और दबंगों का मनोबल बढ़ता जा रहा है।अब बड़ा सवाल यह है कि क्या जिला प्रशासन इस गंभीर मामले में हस्तक्षेप कर एक सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारी को न्याय दिलाएगा, या फिर कानून की खुलेआम अनदेखी यूं ही जारी रहेगी।
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    न्याय के लिए भटक रहे सेवानिवृत्त एनटीपीसी महाप्रबंधक, अंचल प्रशासन की भूमिका पर उठे सवाल।
(शंकर कुमार सिन्हा, जिला ब्यूरो चीफ, दैनिक अयोध्या टाइम्स बिहार, नालंदा बिहार।)
नालंदा 12 जनवरी 2026-सिलाव। जिले में कानून-व्यवस्था और भूमि विवादों के निपटारे की जिम्मेदारी जिन अधिकारियों पर है, उनकी कथित निष्क्रियता और नियमों की गलत व्याख्या के कारण एक सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारी न्याय के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं। ताजा मामला सिलाव अंचल का है, जहां दबंगों के आगे कानून बौना नजर आ रहा है।मामला सिलाव अंचल के राजस्व मौजा नानंद, खाता संख्या 3, खसरा संख्या 3643 से जुड़ा है। यह भूमि बकास्त श्रेणी की है, जिसका कुल रकबा 19 डिसमिल है। उक्त भूमि का बंदोबस्त जमींदार द्वारा मध्यवर्ती किसान के नाम किया गया था। वर्ष 1995 में यह भूमि विधिवत निबंधित वसीका (सेल डीड) के माध्यम से उमा किरण कुमारी को प्राप्त हुई, जिनके पति इंजीनियर अनिल कुमार, एनटीपीसी से सेवानिवृत्त महाप्रबंधक हैं।विक्रेता से क्रेता के नाम पर विधिवत जमाबंदी कायम है तथा नियमित रूप से राजस्व रसीद भी निर्गत हो रही है। भूमि की मापी अंचल अमीन द्वारा कराई जा चुकी है और स्वयं अंचल अधिकारी, सिलाव ने स्थल निरीक्षण भी किया है।इसके बावजूद कुछ कथित असामाजिक तत्व इस रैयती भूमि को सरकारी भूमि बताकर लगभग सात डिसमिल हिस्से पर जबरन सरकारी कार्य कराना चाहते हैं। जब पीड़ित पक्ष ने इस संबंध में अंचल अधिकारी से शिकायत की, तो उन्हें भूमि का रैयतीकरण कराने की सलाह दी गई।भूमि मामलों के जानकारों का कहना है कि रैयतीकरण की प्रक्रिया उस स्थिति में अपनाई जाती है, जब किसी सरकारी प्रयोजन के लिए भूमि का अधिग्रहण किया जाता है और मुआवजा दिया जाना होता है। लेकिन इस मामले में भूमि स्वामी स्वयं अपनी जमीन का उपयोग अपने निजी प्रयोजन के लिए करना चाहते हैं। ऐसे में रैयतीकरण कराना या न कराना पूरी तरह भूमि स्वामी की इच्छा पर निर्भर करता है, न कि किसी अधिकारी के दबाव पर।इस संदर्भ में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग, बिहार सरकार द्वारा जारी पत्रांक 925/2014 का उल्लेख भी महत्वपूर्ण है। इस संकल्प में स्पष्ट किया गया है कि जिस भूमि पर वर्षों से राजस्व रसीद कट रही हो और जिस पर दखल-कब्जा स्थापित हो, उसे सरकार रैयती भूमि की श्रेणी में मानेगी। साथ ही, जिस भूमि पर 36 वर्षों से अधिक समय से कब्जा हो, वह एडवर्स पजेशन के अंतर्गत भी आती है।नियमों के अनुसार, ऐसी भूमि पर बलपूर्वक किसी भी प्रकार का कार्य कराना कानूनन गलत है और बिना वैधानिक आधार के एनओसी जारी करना भी नियमों का उल्लंघन है। दुखद यह है कि भूमि विवादों को सुलझाने की जिम्मेदारी जिन अधिकारियों पर है, उनकी कार्यशैली से आम नागरिक हताश हो रहे हैं और दबंगों का मनोबल बढ़ता जा रहा है।अब बड़ा सवाल यह है कि क्या जिला प्रशासन इस गंभीर मामले में हस्तक्षेप कर एक सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारी को न्याय दिलाएगा, या फिर कानून की खुलेआम अनदेखी यूं ही जारी रहेगी।
    user_दैनिक अयोध्या टाईम्स बिहार
    दैनिक अयोध्या टाईम्स बिहार
    Journalist पकड़ी दयाल, पूर्वी चंपारण, बिहार•
    6 hrs ago
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