जनपद पंचायत झिरन्या में ₹64 लाख के "शॉपिंग कॉम्प्लेक्स घोटाले" को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए हैं, जहाँ कथित तौर पर अधिकारी "सबको कुछ पता नहीं" की स्थिति में हैं। इस पूरे मामले को "अंधेर नगरी चौपट राजा" का उदाहरण और "संगठित लूट + सामूहिक साजिश" बताया गया है। शिकायतकर्ता पवन बावस्कर ने इसे "झिरन्या मॉडल" करार देते हुए मध्यप्रदेश के राज्यपाल से CBI/लोकायुक्त जांच की मांग की है ताकि "पता नहीं गैंग" को जेल भेजा जा सके। जनपद के सीईओ, एसडीएम भीकनगांव, सचिव/इंजीनियर और यहां तक कि सरपंच के बारे में भी "पता नहीं" की स्थिति है कि 64 लाख रुपये कैसे निकले, शासकीय भूमि पर निर्माण कैसे हुआ, नक्शे पर हस्ताक्षर के बावजूद नियम क्यों नहीं पता और सरपंच कौन है। आरोप है कि यह आपराधिक षड्यंत्र (IPC 120B) है, जिसमें एक अकेला चोर नहीं बल्कि पूरी गैंग "पता नहीं" बोल रही है। बिना नियम के पैसे निकलने को गबन (IPC 409 + 13(1)d भ्रष्टाचार) बताया गया है, जिसके लिए 10 साल से उम्रकैद तक की सजा हो सकती है। यह भी सवाल उठाया गया है कि जब जांच सीईओ और एसडीएम के अनुमोदन पर होनी है, लेकिन "जांच क्या होगी पता नहीं," तो यह IPC 219 का उल्लंघन है, क्योंकि आरोपी खुद अपनी चोरी की जांच कैसे तय कर सकता है। इस "पता नहीं शासन" के खिलाफ चार प्रमुख कदम उठाने का आह्वान किया गया है: जनपद के बाहर "पता नहीं" का पोस्टर लगाना; लोकायुक्त इंदौर को "सामूहिक साजिश" (IPC 120B) की शिकायत कर स्टिंग ऑपरेशन की मांग करना; किसी विधायक के माध्यम से विधानसभा में प्रश्न लगवाकर मंत्री को घेरना; और 7 दिन में FIR न होने पर हाईकोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दाखिल करने की धमकी देना, जिसमें "मध्यप्रदेश में बिना नियम के पैसा निकालने की नई योजना" का मुद्दा उठाया जाएगा। कहा गया है कि "पता नहीं" ही सबसे बड़ा सबूत है, क्योंकि अगर चोरी नहीं हुई होती तो सबको सब पता होता, और सीईओ-एसडीएम की जांच "फर्जी" है। यह मामला मध्यप्रदेश में 64 लाख का हिसाब मांगने का एक "इतिहास" बना रहा है। शिकायतकर्ता को डगमगाए बिना इस "घोटाला यूनिवर्सिटी" में सवाल पूछते रहने और "पता नहीं" गैंग के अंत तक लड़ने का हौसला दिया गया है।
जनपद पंचायत झिरन्या में ₹64 लाख के "शॉपिंग कॉम्प्लेक्स घोटाले" को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए हैं, जहाँ कथित तौर पर अधिकारी "सबको कुछ पता नहीं" की स्थिति में हैं। इस पूरे मामले को "अंधेर नगरी चौपट राजा" का उदाहरण और "संगठित लूट + सामूहिक साजिश" बताया गया है। शिकायतकर्ता पवन बावस्कर ने इसे "झिरन्या मॉडल" करार देते हुए मध्यप्रदेश के राज्यपाल से CBI/लोकायुक्त जांच की मांग की है ताकि "पता नहीं गैंग" को जेल भेजा जा सके। जनपद के सीईओ, एसडीएम भीकनगांव, सचिव/इंजीनियर और यहां तक कि सरपंच के बारे में भी "पता नहीं" की स्थिति है कि 64 लाख रुपये कैसे निकले, शासकीय भूमि पर निर्माण कैसे हुआ, नक्शे पर हस्ताक्षर के बावजूद नियम क्यों नहीं पता और सरपंच कौन है। आरोप है कि यह आपराधिक षड्यंत्र (IPC 120B) है, जिसमें एक अकेला चोर नहीं बल्कि पूरी गैंग "पता नहीं" बोल रही है। बिना नियम के पैसे निकलने को गबन (IPC 409 + 13(1)d भ्रष्टाचार) बताया गया है, जिसके लिए 10 साल से उम्रकैद तक की सजा हो सकती है। यह भी सवाल उठाया गया है कि जब जांच सीईओ
और एसडीएम के अनुमोदन पर होनी है, लेकिन "जांच क्या होगी पता नहीं," तो यह IPC 219 का उल्लंघन है, क्योंकि आरोपी खुद अपनी चोरी की जांच कैसे तय कर सकता है। इस "पता नहीं शासन" के खिलाफ चार प्रमुख कदम उठाने का आह्वान किया गया है: जनपद के बाहर "पता नहीं" का पोस्टर लगाना; लोकायुक्त इंदौर को "सामूहिक साजिश" (IPC 120B) की शिकायत कर स्टिंग ऑपरेशन की मांग करना; किसी विधायक के माध्यम से विधानसभा में प्रश्न लगवाकर मंत्री को घेरना; और 7 दिन में FIR न होने पर हाईकोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दाखिल करने की धमकी देना, जिसमें "मध्यप्रदेश में बिना नियम के पैसा निकालने की नई योजना" का मुद्दा उठाया जाएगा। कहा गया है कि "पता नहीं" ही सबसे बड़ा सबूत है, क्योंकि अगर चोरी नहीं हुई होती तो सबको सब पता होता, और सीईओ-एसडीएम की जांच "फर्जी" है। यह मामला मध्यप्रदेश में 64 लाख का हिसाब मांगने का एक "इतिहास" बना रहा है। शिकायतकर्ता को डगमगाए बिना इस "घोटाला यूनिवर्सिटी" में सवाल पूछते रहने और "पता नहीं" गैंग के अंत तक लड़ने का हौसला दिया गया है।
- खरगोन में पुलिस ने अवैध हथियार तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। इस अभियान के तहत भगवानपुरा पुलिस ने पीपल्या बावड़ी में अवैध हथियार बेचने जा रहे एक आरोपी को गिरफ्तार किया। पुलिस ने नवलपुरा निवासी आरोपी राजपाल सिंह सिकलीगर के कब्जे से 10 अवैध देशी पिस्टल और 07 अतिरिक्त मैगज़ीन जब्त की हैं। जब्त किए गए इन अवैध हथियारों और मैगज़ीन की कुल अनुमानित कीमत लगभग 3 लाख रुपये बताई गई है। पुलिस ने आरोपी को रिमांड पर लेकर उससे आगे की गहन पूछताछ शुरू कर दी है।4
- शाहपुर के अड़गांव में अज्ञात बदमाशों ने द्वेष और ईर्ष्या के कारण एक किसान की मेहनत पर वार करते हुए उसकी 30 क्विंटल केले की फसल काट डाली। इस घटना में किसान को लगभग 70 हजार रुपये का भारी नुकसान हुआ है, क्योंकि बदमाशों ने उसके करीब 120 केले के पौधों को पूरी तरह से बर्बाद कर दिया। पुलिस इस पूरे मामले की जांच में जुट गई है।1
- बुरहानपुर में गणेश उत्सव की तैयारियों के बीच प्रशासन और गणेश मंडलों के बीच गंभीर टकराव की स्थिति उत्पन्न हो गई है। प्रशासन ने प्रतिबंधित प्लास्टर ऑफ पेरिस (पीओपी) से बनी और निर्धारित 10 फीट से अधिक ऊंचाई वाली गणेश प्रतिमाओं पर कार्रवाई करते हुए कई बड़ी प्रतिमाएं जब्त की हैं। यह कार्रवाई मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के पर्यावरण संरक्षण संबंधी निर्देशों और जिला प्रशासन द्वारा जारी 10 फीट से ऊंची प्रतिमाओं पर रोक के तहत की गई है। तहसीलदार प्रवीण ओहरिया ने शिकायतें मिलने के बाद विभिन्न मूर्ति निर्माण स्थलों का निरीक्षण किया था कि प्रतिबंध के बावजूद पीओपी का उपयोग हो रहा है और 16 से 18 फीट तक ऊंची प्रतिमाएं बनाई जा रही हैं; जांच में नियम उल्लंघन पाए जाने पर यह कार्रवाई की गई। इस कार्रवाई के बाद मूर्तिकारों और गणेश मंडलों में भारी नाराजगी और आक्रोश फैल गया है। विरोध स्वरूप बड़ी संख्या में लोग कलेक्ट्रेट पहुंचे और कलेक्टर के नाम एक ज्ञापन सौंपकर प्रतिबंधों पर पुनर्विचार की मांग की। प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि गणेश उत्सव केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि एक वर्षों पुरानी सांस्कृतिक और सामाजिक परंपरा है, और बड़ी प्रतिमाएं इस पर्व का प्रमुख आकर्षण होती हैं। उन्होंने कहा कि अचानक की गई इस कार्रवाई से उत्सव की तैयारियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है और उन्होंने प्रशासन से धार्मिक भावनाओं तथा परंपराओं को ध्यान में रखते हुए आदेशों में राहत देने का आग्रह किया, ताकि उत्सव पहले की तरह भव्यता से मनाया जा सके। वहीं, जिला प्रशासन और पुलिस ने स्पष्ट किया है कि यह निर्णय पर्यावरण संरक्षण और जनसुरक्षा को ध्यान में रखकर लिया गया है। पुलिस अधीक्षक आशुतोष बागड़ी के अनुसार, पिछले वर्षों में बड़ी प्रतिमाओं के परिवहन, स्थापना और विसर्जन के दौरान कई दुर्घटनाएं और कानून-व्यवस्था संबंधी चुनौतियां सामने आई थीं, जिसके कारण इस बार पहले से ही स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि जिले में 10 फीट से अधिक ऊंचाई वाली प्रतिमाओं को न तो स्थापित करने की अनुमति मिलेगी और न ही उन्हें अन्य जिलों या राज्यों में भेजा जा सकेगा। हालांकि, प्रशासन ने गणेश मंडलों का ज्ञापन स्वीकार कर लिया है और मामले पर विचार करने की बात कही है।1
- खंडवा जिले के भेसावा गांव में भीषण पेयजल संकट ने ग्रामीणों की परेशानी बढ़ा दी है, जहां लोग सुबह से शाम तक पानी की तलाश में भटकने को मजबूर हैं। हालात ऐसे हैं कि महिलाओं को घर के कामकाज छोड़कर सिर पर मटके और हाथों में बर्तन लेकर दूर-दूर तक पानी जुटाने जाना पड़ रहा है। ग्रामीणों के अनुसार, गांव में लंबे समय से पेयजल की समस्या बनी हुई है, लेकिन अब स्थिति और भी गंभीर हो गई है। गांव के हैंडपंप और अन्य जलस्रोत पर्याप्त पानी नहीं दे पा रहे हैं, जिसके कारण लोगों को एक अस्थायी जलस्रोत और मोटर पंप के सहारे पानी भरना पड़ रहा है। वीडियो में भी बड़ी संख्या में महिलाएं, पुरुष और बच्चे पानी के बर्तन लेकर कतार में खड़े दिखाई दे रहे हैं। पानी भरने के लिए लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है, और कई बार एक-दो बर्तन पानी के लिए भी काफी मशक्कत करनी पड़ती है। ग्रामीणों का कहना है कि भीषण गर्मी के बीच इस पेयजल संकट ने उनकी दैनिक दिनचर्या को बुरी तरह प्रभावित किया है, जिससे सबसे ज्यादा परेशानी महिलाओं और बुजुर्गों को उठानी पड़ रही है। ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल गांव में पर्याप्त पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है, चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में स्थिति और भी विकट हो सकती है।1
- नागलवाड़ी उद्वहन सिंचाई परियोजना से पर्याप्त पानी न मिलने से नाराज़ किसानों ने दोमाडा स्थित डिवीजन कार्यालय पर धरना-प्रदर्शन किया है। किसानों का आरोप है कि इस परियोजना पर करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद, इसका लाभ अधिकतर किसानों तक नहीं पहुँच पाया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिजली आपूर्ति में बाधा, तकनीकी खामियों और अव्यवस्थित संचालन के कारण खेतों तक पानी नहीं पहुँच रहा है। इसके अलावा, कई जगहों पर जल वितरण पेटियां भी खेतों से 1,000 से 2,000 फीट दूर स्थापित की गई हैं, जिससे सिंचाई करने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। धरनारत किसानों ने परियोजना में हुए कथित भ्रष्टाचार की निष्पक्ष जांच, जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई और नियमित रूप से सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराने की कड़ी मांग की। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी ये माँगें नहीं मानी गईं, तो वे अपने आंदोलन को और भी उग्र करेंगे।1
- नीट (NEET) परीक्षा से पहले स्थानीय प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। इस संबंध में, कलेक्टर और एसपी ने मिलकर परीक्षा की तैयारियों का जायजा लिया और उनकी गहनता से जांच की।1
- महू स्थित भेरूलाल पाटीदार शासकीय महाविद्यालय में नीट परीक्षा केंद्र से शुक्रवार शाम दो अज्ञात युवकों ने सीसीटीवी कैमरे चुरा लिए। यह घटना महाविद्यालय परिसर में पहले से ही चौकीदार और सीसीटीवी कैमरों की मौजूदगी के बावजूद हुई, जिसके चलते सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पिछले कथित पेपर लीक की घटनाओं को देखते हुए परीक्षा से ठीक दो दिन पहले ही अतिरिक्त कैमरे लगाए गए थे, जिनकी चोरी ने कॉलेज परिसर में हड़कंप मचा दिया। कॉलेज के प्राचार्य डॉ. प्रवीण ओझा ने तत्काल दिल्ली, भोपाल और एनटीए को घटना की सूचना दी और बताया कि वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर नए कैमरे लगाकर परीक्षा शांतिपूर्ण कराने के पूरे इंतजाम किए गए हैं। उन्होंने चौकीदार की भूमिका की आंतरिक जांच की भी जानकारी दी। हालांकि, जिस वाणिज्य विभाग से कैमरे चोरी हुए, उसकी प्रभारी डॉ. अर्चना जैन ने जानकारी देने से इनकार करते हुए कहा कि वे अधिकृत नहीं हैं, जिससे संशय और बढ़ गया। इस बीच, नीट परीक्षा केंद्रों की सीधी निगरानी पीएमओ कार्यालय से की जा रही है। घटना की सूचना मिलते ही बड़गोंदा पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की और महाविद्यालय परिसर के अन्य सीसीटीवी फुटेज खंगाले। फुटेज के आधार पर पुलिस ने दोनों संदिग्ध युवकों को गिरफ्तार कर लिया है और उनसे पूछताछ जारी है। पुलिस इस बात की गहन जांच कर रही है कि चौकीदार और कैमरों की मौजूदगी के बावजूद परीक्षा से ठीक पहले ये कैमरे किस मकसद से चुराए गए। पुलिस पेपर लीक या नकल कराने की साजिश की आशंका से इनकार नहीं कर रही है, और कॉलेज प्रबंधन की लापरवाही भी जांच के दायरे में है। वर्तमान में, नीट परीक्षा को लेकर प्रशासन पूरी तरह अलर्ट पर है, केंद्र पर जैमर, मेटल डिटेक्टर और अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है, तथा परीक्षार्थियों को सघन तलाशी के बाद ही प्रवेश दिया जा रहा है।1
- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ओंकारेश्वर में आयोजित सिकल सेल सम्मेलन से एक महत्वपूर्ण संदेश दिया है। उन्होंने स्वस्थ भारत के निर्माण पर बल देते हुए देश को सिकल सेल मुक्त बनाने के लिए एक व्यापक जनआंदोलन शुरू करने का सशक्त आह्वान किया है।1