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राम मंदिर में हुए कथित चंदा चोरी के मामले को लेकर सनातन धर्म की बदनामी पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। इस घटना ने एक व्यापक बहस छेड़ दी है कि क्या मंदिरों में चढ़ावे पर ट्रस्ट या सरकार का अधिकार होना सही है, और क्या धार्मिक स्थलों पर चढ़ावे की प्रथा को समाप्त कर देना चाहिए। इन महत्वपूर्ण मुद्दों पर प्रधान संपादक कृष्ण कुमार दुबे के साथ एक चर्चा आयोजित की गई, जिसमें वर्क फाउंडेशन के प्रमुख सैयद अब्दुल्लाह तारिक अल्लामा साहेब, रामसेना प्रमुख विष्णु विनोदम जी, महाचार्य सौरभ सरकार जी और राजनीतिक विश्लेषक ग्रूप कैप्टन प्रेमवीर सिंह जी ने अपनी राय साझा की।
Rajpath News
राम मंदिर में हुए कथित चंदा चोरी के मामले को लेकर सनातन धर्म की बदनामी पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। इस घटना ने एक व्यापक बहस छेड़ दी है कि क्या मंदिरों में चढ़ावे पर ट्रस्ट या सरकार का अधिकार होना सही है, और क्या धार्मिक स्थलों पर चढ़ावे की प्रथा को समाप्त कर देना चाहिए। इन महत्वपूर्ण मुद्दों पर प्रधान संपादक कृष्ण कुमार दुबे के साथ एक चर्चा आयोजित की गई, जिसमें वर्क फाउंडेशन के प्रमुख सैयद अब्दुल्लाह तारिक अल्लामा साहेब, रामसेना प्रमुख विष्णु विनोदम जी, महाचार्य सौरभ सरकार जी और राजनीतिक विश्लेषक ग्रूप कैप्टन प्रेमवीर सिंह जी ने अपनी राय साझा की।
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- जंतर मंतर पर कॉरपोरेशन जनता पार्टी के समर्थन में बैठे सुमन बंगचुग ने वहां मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए एक स्पष्ट संदेश दिया। उन्होंने समझाया कि लोग वहाँ खाने के लिए नहीं, बल्कि प्रदर्शन के लिए आए हैं। सुमन बंगचुग का यह साफ संकेत था कि उनकी उपस्थिति वास्तविक विरोध प्रदर्शन के लिए होनी चाहिए, न कि सिर्फ दिखावा करने के लिए।1
- उत्तराखंड के देहरादून में एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहाँ करीब एक साल पहले चोरी हुए ₹10 लाख के गहनों का राज सोशल मीडिया पर बनी एक रील से खुल गया। दरअसल, चोरी के इन गहनों को पहनकर रील और व्हाट्सएप स्टेटस डालना एक नौकरानी को महंगा पड़ गया। राजपुर थाना पुलिस ने इस मामले में उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी की निवासी 34 वर्षीय विमला देवी को गिरफ्तार किया है। मालकिन ने अपनी चोरी की हुई ज्वैलरी सोशल मीडिया पर पहचान ली, जिसके बाद उन्होंने पुलिस से शिकायत की। शिकायत के आधार पर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी नौकरानी को सलाखों के पीछे पहुँचाया और चोरी हुए सभी गहने भी बरामद कर लिए।1
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- भीम आर्मी के एडवोकेट आजाद ने अपना समर्थन पत्र सीजेपी को सौंपा है। सीजेपी ने इस समर्थन पत्र को स्वीकार कर लिया।1
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- राजधानी दिल्ली में महज़ 10 मिनट की बारिश ने स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली को उजागर कर दिया है। पूर्वी दिल्ली स्थित लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल में जलभराव का ऐसा नज़ारा देखने को मिला, जिसने सरकारी दावों की पोल खोल दी। अस्पताल के अंदर पानी इस कदर भर गया कि मरीजों को इलाज से ज़्यादा पानी से जूझना पड़ा, जिससे ऐसा लग रहा था मानो यहां 'फ्री स्विमिंग पूल' की सुविधा शुरू कर दी गई हो। अस्पताल के वार्ड, गलियारे और प्रवेश द्वार तक पानी से लबालब थे, जिससे मरीजों, उनके तीमारदारों और अस्पताल के स्टाफ को भी भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। इस स्थिति को न केवल असुविधाजनक बल्कि खतरनाक भी बताया जा रहा है, क्योंकि कई लोग पानी के बीच से निकलने को मजबूर थे। यह भयावह स्थिति तब सामने आई है जब सरकार लगातार बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं और इंफ्रास्ट्रक्चर के दावे कर रही है। एक छोटी सी बारिश ने इन दावों की ज़मीनी हकीकत को सबके सामने ला दिया है और यह सवाल खड़ा कर दिया है कि अगर हल्की बारिश का यह हाल है, तो भारी बारिश के दौरान स्थिति कितनी गंभीर हो सकती है। स्थानीय लोगों और मरीजों के परिजनों ने इस गंभीर लापरवाही पर गहरा रोष व्यक्त किया है और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका स्पष्ट कहना है कि अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान पर ऐसी बदइंतजामी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जा सकती। दिल्ली की जनता अब यह पूछ रही है कि क्या उन्हें अस्पतालों में इलाज मिलेगा या फिर जलभराव से ही जूझना पड़ेगा, और क्या जिम्मेदार विभाग इस गंभीर लापरवाही पर कोई जवाबदेही तय करेगा।1