मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के तामिया जनपद के अंतर्गत ग्राम पंचायत सिधौली के उमरवहा गांव के हरदौल ढाना में विकास की तस्वीर पर एक बार फिर सवाल उठ रहे हैं। यहाँ, पंचायत की लगातार अनदेखी से तंग आकर ग्रामीणों ने स्वयं ही सड़क निर्माण का बीड़ा उठाया है। लगभग 45 घरों वाले इस गांव को मुख्य सड़क से जोड़ने वाली करीब 2 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण आज तक नहीं हो पाया था, जिसके लिए ग्रामीणों ने कई बार ग्राम पंचायत, सरपंच और सचिव को आवेदन दिए और ग्राम सभा में भी अपनी मांग रखी, लेकिन उन्हें हर बार केवल आश्वासन ही मिले। लगातार अनदेखी और कोई समाधान न निकलने पर ग्रामीणों ने खुद ही इस समस्या का हल निकालने का फैसला किया। गांव के लोगों ने मिलकर करीब 65 हजार रुपए का चंदा इकट्ठा किया और एक जेसीबी मशीन मंगवाकर कच्ची सड़क का निर्माण कार्य शुरू कराया। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क न होने के कारण उन्हें रोजमर्रा में भारी समस्याओं का सामना करना पड़ता है, खासकर बारिश के मौसम में स्थिति और भी बदतर हो जाती है, जहाँ बीमारों को अस्पताल ले जाना और गर्भवती महिलाओं तक समय पर एंबुलेंस पहुँचाना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में यह सवाल उठता है कि कई बार शिकायत और आवेदन देने के बावजूद भी पंचायत द्वारा सड़क निर्माण क्यों नहीं कराया गया? क्या यह लापरवाही है या फिर विकास योजनाओं का सही क्रियान्वयन नहीं हो रहा? अब देखना होगा कि इस मामले के सामने आने के बाद जिम्मेदार अधिकारी क्या कदम उठाते हैं और ग्रामीणों को पक्की सड़क की सुविधा कब तक मिल पाती है।
मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के तामिया जनपद के अंतर्गत ग्राम पंचायत सिधौली के उमरवहा गांव के हरदौल ढाना में विकास की तस्वीर पर एक बार फिर सवाल उठ रहे हैं। यहाँ, पंचायत की लगातार अनदेखी से तंग आकर ग्रामीणों ने स्वयं ही सड़क निर्माण का बीड़ा उठाया है। लगभग 45 घरों वाले इस गांव को मुख्य सड़क से जोड़ने वाली करीब 2 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण आज तक नहीं हो पाया था, जिसके लिए ग्रामीणों ने कई बार ग्राम पंचायत, सरपंच और सचिव को आवेदन दिए और ग्राम सभा में भी अपनी मांग रखी, लेकिन उन्हें हर बार केवल आश्वासन ही मिले। लगातार अनदेखी और कोई समाधान न निकलने पर ग्रामीणों ने खुद ही इस समस्या का हल निकालने का फैसला किया। गांव के लोगों ने मिलकर करीब 65 हजार रुपए
का चंदा इकट्ठा किया और एक जेसीबी मशीन मंगवाकर कच्ची सड़क का निर्माण कार्य शुरू कराया। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क न होने के कारण उन्हें रोजमर्रा में भारी समस्याओं का सामना करना पड़ता है, खासकर बारिश के मौसम में स्थिति और भी बदतर हो जाती है, जहाँ बीमारों को अस्पताल ले जाना और गर्भवती महिलाओं तक समय पर एंबुलेंस पहुँचाना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में यह सवाल उठता है कि कई बार शिकायत और आवेदन देने के बावजूद भी पंचायत द्वारा सड़क निर्माण क्यों नहीं कराया गया? क्या यह लापरवाही है या फिर विकास योजनाओं का सही क्रियान्वयन नहीं हो रहा? अब देखना होगा कि इस मामले के सामने आने के बाद जिम्मेदार अधिकारी क्या कदम उठाते हैं और ग्रामीणों को पक्की सड़क की सुविधा कब तक मिल पाती है।
- मानव अधिकार मिशन मीडिया सेक्रेछिंदवाड़ा नगर, छिंदवाड़ा, मध्य प्रदेश9755763392 यह खबर दीजिए पत्रकार जाहिद मंसुरी12 hrs ago
- छिंदवाड़ा जिले में जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत गंगा दशमी पर्व के अवसर पर जिला मुख्यालय स्थित छोटा तालाब में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इस आयोजन के अंतर्गत जल कलश यात्रा निकाली गई, जलाभिषेक किया गया और जल चौपाल भी आयोजित की गई।1
- अमरवाड़ा जैन समाज ने रीवा में हुई आर्यिका माताजी की दुर्घटना के प्रकरण में निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। समाज ने इस मामले के साथ-साथ संत सुरक्षा नीति लागू करने और विहाररत जैन साधु-संतों के लिए विशेष सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु एक ज्ञापन सौंपा। इस दौरान जैन समाज के कई सदस्य उपस्थित थे।1
- सोहागपुर नगर परिषद ने शहर की सड़कों पर घूम रहे निराश्रित एवं आवारा पशुओं को पकड़कर गौशाला भेजने का एक विशेष अभियान शुरू किया है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य सड़क दुर्घटनाओं पर रोक लगाना और यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखना है। अभियान की पहली कार्रवाई के तहत, आज दोपहर 3 बजे स्टेट हाईवे सहित नगर के विभिन्न क्षेत्रों से कुल 11 निराश्रित पशुओं को पकड़ा गया, जिन्हें ग्राम सिटिया गोहना स्थित गौशाला में भेजा गया है। यह अभियान नगर परिषद द्वारा वर्षों बाद मई माह की भीषण गर्मी के दौरान चलाया जा रहा है। मुख्य नगर पालिका अधिकारी धर्मेंद्र शर्मा ने बताया कि यह मुहिम कलेक्टर सोमेश मिश्रा के निर्देश पर प्रारंभ की गई है। नगर परिषद की टीम अब नियमित रूप से मुख्य मार्गों, स्टेट हाईवे, वार्डों और गलियों में घूम रहे निराश्रित पशुओं को पकड़कर गौशाला भेजेगी।1
- चौरई के तुलसी नगर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के दौरान पंडित पुरुषोत्तम तिवारी जी महाराज ने श्रीकृष्ण-सुदामा मिलन का एक भावुक प्रसंग सुनाया। इस मार्मिक कथा को सुनकर सभी श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे और पूरा पंडाल भक्ति रस में डूब गया। विशेष रूप से “जब श्रीकृष्ण ने गले लगाया सुदामा को” प्रसंग ने उपस्थित जनसमूह को अत्यधिक भावुक कर दिया।1
- पेंच टाइगर रिजर्व के खमारपानी बफर जोन में बड़े पैमाने पर सागौन की लकड़ी की तस्करी का चौंकाने वाला खुलासा हुआ है, जहाँ तस्करों ने 11 बार बिना किसी रोक-टोक के अवैध कटाई और परिवहन को अंजाम दिया। 'सामान्य वन विभाग' ने 12वीं बार में एक पिकअप को दबोचकर इस 'तस्कर राज' का पर्दाफाश किया है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, पिकअप क्रमांक MP 28 G 5373 रात के अंधेरे में खमारपानी बफर जोन के कढ़ैया बीट के कक्ष 1479 में प्रवेश करती थी, जहाँ पहले से कटे हुए सागौन के लट्ठे लोड होते थे और फिर पिकअप खमारपानी से बिछुआ की ओर निकल पड़ती थी। यह सिलसिला 11 बार सफलतापूर्वक चला। शनिवार-रविवार की रात करीब 3 बजे, 12वीं खेप निकालते समय, 'सामान्य वन विभाग' को मिली पुख्ता सूचना पर टीम ने फिल्मी स्टाइल में घेराबंदी की और पिकअप से 15 नग सागौन के लट्ठे बरामद किए, जिनकी अनुमानित कीमत ₹3 लाख है। पिकअप का ड्राइवर भोला पहाड़े, पिता फ़कीर पहाड़े, निवासी पुलपुलडोह, ड्राइवर सीट पर था। इस घटना ने बफर जोन प्रबंधन की घोर लापरवाही और संभावित मिलीभगत पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पेंच टाइगर रिजर्व के नियमों के अनुसार, बफर में प्रवेश करने वाली हर गाड़ी के लिए परमिट, एंट्री रजिस्टर में नाम-समय दर्ज करना और कैमरा ट्रैप में फोटो अनिवार्य है, लेकिन आरोप है कि 11 बार पिकअप बिना किसी परमिशन के घुसी, न रजिस्टर में दर्ज हुई और न ही कैमरे में कैद हुई। सूत्रों ने सवाल उठाया है कि कक्ष 1479 तक जाने वाले रास्ते पर लगे बैरियर को 11 बार किसने खोला और कैमरा ट्रैप क्यों 'अंधे' बने रहे या उनकी मेमोरी जानबूझकर डिलीट की गई। आरोप है कि कढ़ैया बीट प्रभारी वन रक्षक नीतेश बरकड़े की नाक के नीचे से 12 बार लकड़ी निकाली गई, जो या तो मिलीभगत या घोर लापरवाही का परिणाम है। सूत्रों का कहना है कि जहाँ तस्कर की पिकअप 11 बार घुस सकती है, वहाँ शिकारी की बंदूक भी पहुँच सकती है, जिससे पेंच के टाइगर खतरे में हैं। पूरे मामले का खुलासा सहायक परिक्षेत्र अधिकारी सुनील बनवारी, रामदास उईके, विनायक और प्रयाग चौहान सहित 'सामान्य वन विभाग' की टीम ने रात में जान पर खेलकर घेराबंदी करके किया। वन विभाग ने प्रकरण दर्ज कर आरोपी भोला पहाड़े को मुचलके पर छोड़ दिया है और पिकअप को राजसात करने की कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है। हालाँकि, सवाल यह बना हुआ है कि 11 बार की तस्करी के दौरान बफर जोन की टीम कहाँ थी और उन्हें इसकी भनक तक क्यों नहीं लगी।1
- गाडरवारा स्थित राठी वेयरहाउस खरीदी केंद्र में हुई गुणवत्ता जांच में कुल 1785 क्विंटल गेहूं फेल हो गया है। इस परिणाम के बाद खरीदी प्रक्रिया में अनियमितताओं की बात सामने आई है, जिसको लेकर स्थानीय लोगों और संबंधित पक्षों द्वारा इन अनियमितताओं की गहन जांच की मांग की जा रही है।1
- छिंदवाड़ा जिले के परासिया शहर के हृदयस्थल मैगजीन लाइन के वार्ड नंबर 05 और 06 में आयोजित पावन 'श्रीराम कथा' महोत्सव में कांग्रेस के पार्षद नेता प्रतिपक्ष वीर बहादुर सिंह अन्य पार्षदों के साथ सम्मिलित हुए। इस अवसर पर नेता प्रतिपक्ष वीर बहादुर सिंह, पार्षद बृजेश भलावी, वरिष्ठ कांग्रेसी बसंत मालवीय, पार्षद पूनम कैथवास, पार्षद प्रतिभा सोनी, पार्षद रुकमा बांसोड़ सहित अन्य धर्म प्रेमी बंधु भी उपस्थित रहे। इन सभी को प्रभु श्री राम जी की आरती करने और कथा श्रवण करने का परम सौभाग्य प्राप्त हुआ। नेता प्रतिपक्ष वीर बहादुर सिंह ने इस दौरान प्रभु श्री राम से प्रार्थना की कि वे परासिया शहर के सभी परिवारजनों पर अपनी असीम कृपा बनाए रखें और क्षेत्र में सुख, समृद्धि व शांति का संचार करें।1
- भागवत कथा के दौरान आरती के समय कुछ श्रद्धालुओं पर देवी एवं भार आने की घटनाओं को लेकर कथा वाचक आकाश दुबे जी के साथ एक विशेष आध्यात्मिक एवं वैदिक चर्चा की गई। इस चर्चा में लोगों ने देवी-भार के कारण, इसके पीछे की धार्मिक मान्यताओं, वेदों के दृष्टिकोण और व्यावहारिक जीवन से जुड़े कई प्रश्न पूछे, जिनका सरल एवं वैदिक आधार पर उत्तर दिया गया। वीडियो में देवी-भार की आध्यात्मिक मान्यता, वेद एवं शास्त्रों का इस विषय पर क्या कहना है, श्रद्धा और मनोभाव का संबंध, लोगों की विभिन्न जिज्ञासाओं के उत्तर, और कथा स्थल के धार्मिक वातावरण जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर प्रकाश डाला गया।1
- गंगा दशहरा के शुभ अवसर पर 'जल गंगा संवर्धन अभियान' के तहत सिंगरी नदी के पुनर्जीवन के लिए व्यापक स्तर पर श्रमदान का आयोजन किया गया। इस महत्वपूर्ण पहल में मंत्री श्री प्रहलाद सिंह पटेल और अखंड निराहार परम पूज्य दादा गुरु ने भी सक्रिय रूप से हिस्सा लिया। उनके साथ-साथ, अनेक जनप्रतिनिधियों, अधिकारी-कर्मचारियों और अन्य गणमान्य नागरिकों ने भी सिंगरी नदी को नया जीवन प्रदान करने के इस प्रयास में अपना श्रमदान दिया।1