रात 2 बजे तेज रफ्तार 3 पिकअप का पीछा, गौरक्षकों ने दबोचे; 15 गोवंश मुक्त देर रात गौरक्षकों की सतर्कता और सक्रियता के चलते गोवंश से भरे तीन पिकअप वाहनों को पकड़कर पुलिस के हवाले किया गया। तीनों वाहनों से कुल 15 गोवंश को मुक्त कराया गया। पुलिस ने तीनों पिकअप वाहन जब्त कर पशु क्रूरता अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किया है और फरार आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है। गौरक्षक आतिश राणावत ने पूरी घटना की जानकारी देते हुए बताया कि देर रात करीब 2 बजे तीन पिकअप वाहन तेज रफ्तार से संदिग्ध परिस्थितियों में गोवंश को लेकर जा रहे थे। वाहनों की तेज आवाजाही और गोवंश के चिल्लाने की आवाज सुनकर गौरक्षकों को संदेह हुआ। सूचना मिलते ही गौरक्षक सक्रिय हुए और तीनों वाहनों का पीछा शुरू कर दिया। पीछा करने के बाद गौरक्षकों ने तीनों वाहनों को रोक लिया, लेकिन चालक और उनके साथ मौजूद अन्य लोग अंधेरे का फायदा उठाकर मौके से फरार हो गए। वाहनों की जांच करने पर एक पिकअप में 4, दूसरे में 6 और तीसरे पिकअप में 5 गोवंश भरे हुए मिले। इस तरह कुल 15 गोवंश को वाहनों में ठूंस-ठूंसकर ले जाया जा रहा था। इसके बाद गौरक्षकों ने तीनों वाहनों को पुलिस के सुपुर्द कर दिया। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और वाहनों की जांच कर गोवंश को सुरक्षित बाहर निकाला। पुलिस ने तीनों पिकअप वाहन जब्त करते हुए पशु क्रूरता अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है। फरार वाहन चालकों और अन्य आरोपियों की पहचान कर उनकी तलाश की जा रही है। वहीं, मुक्त कराए गए गोवंश की देखभाल और सेवा में भी गौरक्षक जुटे हुए हैं। 10 से अधिक युवा गौरक्षक गोवंश के लिए घास-पानी की व्यवस्था करते नजर आए और उनकी सेवा एवं देखभाल में लगे हुए हैं।
रात 2 बजे तेज रफ्तार 3 पिकअप का पीछा, गौरक्षकों ने दबोचे; 15 गोवंश मुक्त देर रात गौरक्षकों की सतर्कता और सक्रियता के चलते गोवंश से भरे तीन पिकअप वाहनों को पकड़कर पुलिस के हवाले किया गया। तीनों वाहनों से कुल 15 गोवंश को मुक्त कराया गया। पुलिस ने तीनों पिकअप वाहन जब्त कर पशु क्रूरता अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किया है और फरार आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है। गौरक्षक आतिश राणावत ने पूरी घटना की जानकारी देते हुए बताया कि देर रात करीब 2 बजे तीन पिकअप वाहन तेज रफ्तार से संदिग्ध परिस्थितियों में गोवंश को लेकर जा रहे थे। वाहनों की तेज आवाजाही और गोवंश के चिल्लाने की आवाज सुनकर गौरक्षकों को संदेह हुआ। सूचना मिलते ही गौरक्षक सक्रिय हुए और तीनों वाहनों का पीछा शुरू कर दिया। पीछा करने के बाद गौरक्षकों ने तीनों वाहनों को रोक लिया, लेकिन चालक और उनके
साथ मौजूद अन्य लोग अंधेरे का फायदा उठाकर मौके से फरार हो गए। वाहनों की जांच करने पर एक पिकअप में 4, दूसरे में 6 और तीसरे पिकअप में 5 गोवंश भरे हुए मिले। इस तरह कुल 15 गोवंश को वाहनों में ठूंस-ठूंसकर ले जाया जा रहा था। इसके बाद गौरक्षकों ने तीनों वाहनों को पुलिस के सुपुर्द कर दिया। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और वाहनों की जांच कर गोवंश को सुरक्षित बाहर निकाला। पुलिस ने तीनों पिकअप वाहन जब्त करते हुए पशु क्रूरता अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है। फरार वाहन चालकों और अन्य आरोपियों की पहचान कर उनकी तलाश की जा रही है। वहीं, मुक्त कराए गए गोवंश की देखभाल और सेवा में भी गौरक्षक जुटे हुए हैं। 10 से अधिक युवा गौरक्षक गोवंश के लिए घास-पानी की व्यवस्था करते नजर आए और उनकी सेवा एवं देखभाल में लगे हुए हैं।
- मोबाइल के युग में संस्कार व संस्कृति: खोती पहचान और आधुनिक चुनौतियाँ प्रख्यात संत रुद्रसेखर महाराज प्राइम न्यूज राजस्थान ब्यूरो रिपोर्ट धर्मेन्द्र कुमार सोनी कुशलगढ़ बांसवाड़ा राजस्थान के बांसवाड़ा जिले के गढ़ी तहसील के गांव सुजाजी का गडा के बरोडीया में जन्माष्टमी महोत्सव पर धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा कि आज हम एक ऐसे डिजिटल युग में जी रहे हैं जहाँ तकनीक हमारी बुनियादी ज़रूरतों का हिस्सा बन चुकी है। स्मार्टफोन आज हर व्यक्ति की हथेली में समाया हुआ एक ऐसा संसार है, जिसने पूरी दुनिया को एक क्लिक पर ला खड़ा किया है। मनोरंजन, शिक्षा और व्यापार के क्षेत्र में मोबाइल क्रांति ने अभूतपूर्व प्रगति की है। लेकिन इस तकनीकी विकास की एक भारी कीमत हमारे संस्कार और संस्कृति को चुकानी पड़ रही है। आज की युवा पीढ़ी और बच्चे मोबाइल स्क्रीन में इस कदर खो चुके हैं कि वे अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और नैतिक मूल्यों से दूर होते जा रहे हैं। प्राचीन काल से ही भारतीय संस्कृति में 'अतिथि देवो भव:', बड़ों का आदर, संयुक्त परिवार की परंपरा और आपसी संवाद को सर्वोपरि माना गया है। लेकिन मोबाइल के इस युग में मानवीय संवेदनाएँ और आपसी संवाद सिमट कर रह गए हैं। एक ही घर में रहने वाले सदस्य एक साथ बैठकर बात करने के बजाय अपने-अपने मोबाइल फोन में व्यस्त रहते हैं। त्योहारों और उत्सवों की रौनक, जो कभी सामूहिक उल्लास का प्रतीक हुआ करती थी, अब केवल सोशल मीडिया स्टेटस और रील्स तक सीमित होकर रह गई है। लोग सीधे मिलने के बजाय केवल मैसेज भेजकर अपने कर्तव्यों की इतिश्री समझ लेते हैं। इस डिजिटल लत का सबसे गहरा और चिंताजनक प्रभाव हमारी नई पीढ़ी के संस्कारों पर पड़ रहा है। बच्चे बचपन से ही मोबाइल के आदी हो रहे हैं, जिसके कारण वे दादा-दादी या नाना-नानी की उन कहानियों से महरुम हैं जो उन्हें जीवन के नैतिक मूल्य सिखाती थीं। सहनशीलता, धैर्य, त्याग और सहभागिता जैसे संस्कार, जो कभी परिवार के बीच रहकर सीखे जाते थे, अब एकाकीपन और इंटरनेट के वर्चुअल वर्ल्ड में कहीं खो गए हैं। सोशल मीडिया पर चल रही अंधाधुंध प्रतिस्पर्धा और रील्स बनाने की होड़ में युवा पीढ़ी शालीनता और मर्यादा की सीमाएं लांघ रही है, जो हमारी संस्कृति के बिल्कुल विपरीत है। इसके अतिरिक्त, मोबाइल के अत्यधिक उपयोग ने हमारी भाषा, पहनावे और जीवनशैली को भी प्रभावित किया है। पश्चिमी संस्कृति का अंधानुकरण और इंटरनेट पर परोसी जा रही अनियंत्रित सामग्री हमारे पारंपरिक मूल्यों को कमजोर कर रही है। लोग अपनी मातृभाषा और लोक कलाओं को भूलकर एक आभासी और दिखावे की दुनिया को अपना रहे हैं। निष्कर्ष के तौर पर, मोबाइल फोन अपने आप में बुरा नहीं है, यह आधुनिक विज्ञान का एक बेहतरीन उपहार है। समस्या इसके अनियंत्रित उपयोग और हमारी निर्भरता में है। यदि हम अपनी संस्कृति और संस्कारों को बचाना चाहते हैं, तो हमें तकनीक और परंपरा के बीच एक संतुलन बनाना होगा। परिवारों में डिजिटल डिटॉक्स (कुछ समय के लिए मोबाइल से दूरी) की आदत डालनी होगी और बच्चों को गैजेट्स के बजाय अपने इतिहास, त्योहारों और पारिवारिक मूल्यों से जोड़ना होगा। विकास ज़रूरी है, लेकिन अपनी जड़ों को खोकर पाया गया विकास कभी भी कल्याणकारी नहीं हो सकता। यदि आप इस आर्टिकल में कुछ बदलाव करना चाहते हैं, तो मुझे बता सकते हैं:4
- के के गुप्ता की सागवाड़ा नगरपालिका चुनाव में एंट्री के बाद बीजेपी में बदलेंगे समीकरण? स्वच्छता मॉडल के चेहरे केके गुप्ता की सागवाड़ा चुनाव में एंट्री, बढ़ी सियासी हलचल डूंगरपुर को स्वच्छता में नई पहचान दिलाने वाले केके गुप्ता ने संभाली कमान, बोले—डेचा के नेतृत्व में सागवाड़ा को बनाएंगे स्वच्छता और विकास का नया मॉडल सागवाड़ा। नगर पालिका चुनाव को लेकर सागवाड़ा की सियासत में हलचल तेज हो गई है। चुनावी मैदान में अब डूंगरपुर के स्वच्छता मॉडल से पहचान बनाने वाले पूर्व सभापति केके गुप्ता की सक्रिय एंट्री हुई है। गुप्ता ने भाजपा प्रत्याशियों और कार्यकर्ताओं की बैठक लेकर चुनावी रणनीति पर चर्चा की और जीत का मंत्र दिया। बैठक में विधायक शंकरलाल डेचा, भाजपा जिलाध्यक्ष अशोक पटेल सहित पार्टी के प्रमुख नेता मौजूद रहे। बैठक के दौरान केके गुप्ता ने कहा कि सागवाड़ा विधानसभा क्षेत्र में विधायक शंकरलाल डेचा के नेतृत्व में स्वच्छता और विकास को प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री के नेतृत्व में स्वच्छता को लेकर लगातार काम किया जा रहा है और अब कार्यकर्ताओं को भी इसी संकल्प के साथ जनता के बीच पहुंचकर काम करना होगा। केके गुप्ता की पहचान डूंगरपुर में स्वच्छता अभियान को नई दिशा देने वाले नेताओं के रूप में रही है। ऐसे में सागवाड़ा नगर पालिका चुनाव में उनकी सक्रियता को भाजपा की चुनावी रणनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है। गुप्ता ने दावा किया कि डूंगरपुर के साथ अब सागवाड़ा में भी भाजपा का बोर्ड बनेगा और शहर को स्वच्छता एवं विकास का नया मॉडल बनाने की दिशा में काम किया जाएगा। उन्होंने प्रत्याशियों और कार्यकर्ताओं से चुनाव को महज राजनीतिक मुकाबला नहीं मानते हुए शहर के विकास और स्वच्छता से जोड़कर जनता के बीच जाने का आह्वान किया। गुप्ता की सक्रियता के बाद भाजपा प्रत्याशियों के चुनावी अभियान को भी नई धार मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। सागवाड़ा नगर पालिका चुनाव में स्वच्छता, विकास और संगठन की ताकत भाजपा के प्रमुख मुद्दों में शामिल होती दिखाई दे रही है। ऐसे में सवाल यह है कि क्या डूंगरपुर का स्वच्छता मॉडल सागवाड़ा के चुनावी मैदान में भाजपा के लिए वोटों का नया समीकरण तैयार कर पाएगा? फिलहाल केके गुप्ता की एंट्री ने सागवाड़ा के चुनावी माहौल को और गर्म कर दिया है।1
- माननिय राजस्थान सरकार मुख्यमंत्री वृक्षारोपण महाअभियान: 'हरयाळो राजस्थान' के तहत निनोर में 500 पौधों का रोपण, माननिय राजस्थान सरकार मुख्यमंत्री वृक्षारोपण महाअभियान: 'हरयाळो राजस्थान' के तहत निनोर में 500 पौधों का रोपण, बिट कांस्टेबल महेंद्र सिंह बिश्नोई को मिला प्रशस्ति पत्र निनोर। प्रदेशव्यापी "मुख्यमंत्री वृक्षारोपण महाअभियान" (हरयाळो राजस्थान - एक पेड़ माँ के नाम, 2026) के अंतर्गत ग्राम पंचायत निनोर में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक भव्य एवं प्रेरणादायक कार्यक्रम आयोजित किया गया। अभियान के तहत पुलिस प्रशासन और स्थानीय ग्रामीणों के साझा प्रयासों से विभिन्न सार्वजनिक स्थानों पर कुल 500 पौधे लगाए गए। नारूलाल मीणा को मिला प्रशस्ति पत्र पर्यावरण संरक्षण की दिशा में उत्कृष्ट एवं उल्लेखनीय योगदान देने के लिए बिट कांस्टेबल महेंद्र सिंह बिश्नोई को "मुख्यमंत्री वृक्षारोपण महाअभियान" 2026 के तहत प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। उनके द्वारा किया गया यह पौधरोपण समाज के अन्य लोगों के लिए एक मिसाल और प्रेरणा स्रोत बन गया है। अभियान का मुख्य संदेश "आपका पेड़, आपकी पहचान" इस अवसर पर चरितार्थ होता नजर आया। पुलिस चौकी, श्मशान घाट व पंचायत परिसर में सघन पौधरोपण थाना अधिकारी दीपक कुमार एवं निनोर चौकी प्रभारी सूरजमल मीणा व सालमगढ हेड कांस्टेबल गोविंद सिंह के नेतृत्व में पुलिस स्टाफ और ग्रामीणों ने निनोर चौकी, श्मशान घाट तथा पंचायत भवन परिसर सहित कई स्थानों पर पौधरोपण किया। कार्यक्रम में ग्रामीणों की सक्रिय सहभागिता ने इस हरित पहल को जन-आंदोलन का रूप दे दिया। 'बच्चों की तरह करेंगे देखभाल' — थाना अधिकारी ने दिलाई शपथ वृक्षारोपण के उपरांत थाना अधिकारी दीपक कुमार ने उपस्थित सभी पुलिसकर्मियों और ग्रामीणों को पौधों के संरक्षण की शपथ दिलाई। उन्होंने कहा कि पौधों को सिर्फ लगाना ही काफी नहीं है, बल्कि उन्हें अपने बच्चों की तरह मानकर समय-समय पर पानी देना और उनकी देखभाल करना हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है। इस अवसर पर चौकी प्रभारी सूरजमल मीणा, समस्त पुलिस स्टाफ और ग्रामीणों ने एक स्वर में इन 500 पौधों को सुरक्षित व सींचित रखने का संकल्प दोहराया।1
- संनराइज संस्थान में बाल लीला ने मनमोहा, मटकी भी फोड़ी सांस्कृतिक कार्यक्रम का जलवा बिखरा बाल लीला ने मनमोहा, मटकी भी फोड़ी सांस्कृतिक कार्यक्रम का जलवा बिखरा आसपुर क्षेत्र के विभिन्न शिक्षण संस्थानों में गुरुवार को श्री कृष्ण जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया। पेसिफिक पब्लिक सीनियर सैकेंडरी स्कूल गोल आसपुर में समन्वयक रामसिंह राठौड़ एवं प्रधानाचार्य ललित आचार्य के निर्देशन में भगवान कृष्ण की लीला गाथा से जुड़े सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं मटकी फोड़ कार्यक्रम हुआ। मुख्य अतिथि श्रीकृष्ण प्रणामी राजधाम जैताणा के पीठाधीश प्रकाशानंद ने भगवान श्री कृष्ण की लीला गाथा की जानकारी दी। सनराइज हिंदी व अंग्रेजी उमावि में जितेन्द्र बुनकर व देवेंद्रसिंह चौहान व विकास चौबीसा, नयनराजसिंह शक्तावत एवं वैभव वैष्णव के निर्देशन में, संनराइज अंग्रेजी उमावि आसपुर में निदेशक नागेंद्रसिंह सटोड़ा, विजय सिंह शक्तावत,मनोहर दास वैष्णव की मुख्य अतिथि में कृष्ण बनो राधा बनो प्रतियोगिता व कृष्ण की बाल लीला से जुडे रोचक सांस्कृतिक कार्यक्रम व मटकी फोड़ प्रतियोगिता हुई। संनराइज संस्थान के द्वारा नन्हे मुन्ने बच्चे को कृण जन्मोत्सव पर विभिन्न प्रकार की पोशाक पहनकर मकटा फोट सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया बच्चों में काफी उत्साह देखा गया संनराइज संस्थान में बच्चों को शिक्षा,स्वास्थ्य, सांस्कृतिक कार्यक्रम सहित ज़िन्दगी में कुछ बनने का गुरु मंत्र भी सिखाया। विधालय की अध्यापिका रक्षा सोनी, प्रति मेडम सहित अन्य स्टाफ मौजूद रहा1
- सीमलवाड़ा मे भव्य आतिशबाजी व धार्मिक धुनो के साथ मनाया गया भगवान श्री कृष्ण का जन्म महोत्सव, सीमलवाड़ा |जन्माष्टमी महोत्सव को लेकर सीमलवाड़ा मे युवाओं बच्चों महिलाओं में महिलाओं में खास उत्साह रहा था | आयोजन को भव्य शानदार बनाने के लिए 7 दिनों से युवाओं की टोलिया द्वारा घर घर पहुंचकर अधिक से अधिक संख्या में कार्यक्रम में पहुंचकर कार्यक्रम को सफल बनाने का आह्वान किया था| जिसके फल स्वरुप आज सीमलवाड़ा प्रांगण में हजारों की संख्या में जनसैलाब मौजूद रहा|कमेटी द्वारा की गई विशेष रोशनी आतिशबाजी सहित विशेष का आयोजन किया गया विशेष आतिशबाजी सहित बैंड द्वारा धार्मिक घूनो पर सैकड़ो की संख्या में युवकों की समूह द्वारा विश्वनाथ महादेव मंदिर से शुरू होकर ब्राह्मणवादी महाजन वाडी, राजपुर चौकड़ी,मंडली रोड में दही हंडी फो ड़ते हुए जुलूस भारी संख्या में मुख्य दहीहंडी स्थल पर पहुंचा जहाँ गरबा रास का आयोजन किया गया इसके बाद युवाओं की टोली द्वारा चार से पांच प्रयासों के बाद दहीहंडी फोडने में सफलता प्राप्त की राष्ट्रगान के बाद कार्यक्रम का समापन करते हुए प्रसाद का वितरण किया गया4
- श्रीगोवर्धननाथ जी सेवा समिति की नई कार्यकारिणी गठित, दिनेश पंड्या अध्यक्ष श्री गोवर्धननाथ जी सेवा समिति (त्रिमेस), घम्बोला की साधारण सभा की बैठक शुक्रवार को आयोजित हुई। बैठक में समिति के दो वर्ष का कार्यकाल पूर्ण होने के बाद चुनाव संबंधी चर्चा की गई। उपस्थित सदस्यों की सहमति से राजेश्वर पंड्या को चुनाव अधिकारी नामित किया गया। बैठक में उपस्थित सदस्यों ने सर्वसम्मति से नई कार्यकारिणी का गठन किया। इसमें दिनेश चंद्र पंड्या को अध्यक्ष, कन्हैयालाल पंड्या को उपाध्यक्ष, रजनीकांत पंड्या को सचिव, नंदकिशोर भट्ट को सहसचिव तथा भानुप्रसाद पंड्या को कोषाध्यक्ष सदस्य हँसमुख भट्ट को बनाया गया। वहीं कार्यकारिणी सदस्य के रूप में किरीट पंड्या के स्थान पर रमेशचंद्र पंड्या को सदस्य बनाया गया। पूर्व सदस्य देवीलाल मेहता के निधन के बाद उनके स्थान पर परिवार की ओर से विपिन मेहता को सदस्य नामित किया गया। बैठक में समिति के पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने नई कार्यकारिणी को शुभकामनाएं दीं तथा समिति के सेवा कार्यों को आगे बढ़ाने पर चर्चा की। इस दौरान प्रदीप पंड्या,राजेंद्र शर्मा,सुभाष पंड्या, सुरेश पंड्या उपस्थित रहे।1
- रात 2 बजे तेज रफ्तार 3 पिकअप का पीछा, गौरक्षकों ने दबोचे; 15 गोवंश मुक्त देर रात गौरक्षकों की सतर्कता और सक्रियता के चलते गोवंश से भरे तीन पिकअप वाहनों को पकड़कर पुलिस के हवाले किया गया। तीनों वाहनों से कुल 15 गोवंश को मुक्त कराया गया। पुलिस ने तीनों पिकअप वाहन जब्त कर पशु क्रूरता अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किया है और फरार आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है। गौरक्षक आतिश राणावत ने पूरी घटना की जानकारी देते हुए बताया कि देर रात करीब 2 बजे तीन पिकअप वाहन तेज रफ्तार से संदिग्ध परिस्थितियों में गोवंश को लेकर जा रहे थे। वाहनों की तेज आवाजाही और गोवंश के चिल्लाने की आवाज सुनकर गौरक्षकों को संदेह हुआ। सूचना मिलते ही गौरक्षक सक्रिय हुए और तीनों वाहनों का पीछा शुरू कर दिया। पीछा करने के बाद गौरक्षकों ने तीनों वाहनों को रोक लिया, लेकिन चालक और उनके साथ मौजूद अन्य लोग अंधेरे का फायदा उठाकर मौके से फरार हो गए। वाहनों की जांच करने पर एक पिकअप में 4, दूसरे में 6 और तीसरे पिकअप में 5 गोवंश भरे हुए मिले। इस तरह कुल 15 गोवंश को वाहनों में ठूंस-ठूंसकर ले जाया जा रहा था। इसके बाद गौरक्षकों ने तीनों वाहनों को पुलिस के सुपुर्द कर दिया। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और वाहनों की जांच कर गोवंश को सुरक्षित बाहर निकाला। पुलिस ने तीनों पिकअप वाहन जब्त करते हुए पशु क्रूरता अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है। फरार वाहन चालकों और अन्य आरोपियों की पहचान कर उनकी तलाश की जा रही है। वहीं, मुक्त कराए गए गोवंश की देखभाल और सेवा में भी गौरक्षक जुटे हुए हैं। 10 से अधिक युवा गौरक्षक गोवंश के लिए घास-पानी की व्यवस्था करते नजर आए और उनकी सेवा एवं देखभाल में लगे हुए हैं।2
- *रुद्र यज्ञ हवन अनुष्ठान - शिव कृपा प्राप्ति का सबसे शक्तिशाली वैदिक संत नरसिंह गीरी महाराज प्राइम न्यूज राजस्थान की विशेष कवरेज ब्यूरो रिपोर्ट धर्मेन्द्र कुमार सोनी कुशलगढ़ बांसवाड़ा राष्ट्रीय सनातन मानव धर्म रक्षा संघ भारत के राष्ट्रीय प्रमुख संत नरसिंह गीरी महाराज ने बताया कि हिंदू सनातन धर्म में जितने भी यज्ञ और हवन हैं, उनमें *रुद्र यज्ञ* को सबसे शक्तिशाली, सबसे पवित्र और सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाला माना गया है। कहा जाता है कि जहाँ रुद्र यज्ञ होता है, वहाँ स्वयं भगवान शिव अपने परिवार - माता पार्वती, श्री गणेश और कार्तिकेय के साथ निवास करते हैं। यह सिर्फ एक पूजा नहीं, बल्कि आत्मा की शुद्धि और ब्रह्मांड की ऊर्जा को जागृत करने का विज्ञान है। 1. रुद्र यज्ञ क्या है? रुद्र भगवान शिव का ही एक उग्र और कल्याणकारी रूप है। ऋग्वेद में रुद्र को 'रुद्राय नमः' कहकर प्रणाम किया गया है। 'रुद्र' शब्द का अर्थ है - जो रुलाता है, जो दुखों को दूर करता है और जो ज्ञान देता है। रुद्र यज्ञ में *श्री रुद्रम्* का पाठ किया जाता है, जो यजुर्वेद के रुद्राष्टाध्यायी में आता है। इसमें 11 अनुवाक (अध्याय) होते हैं। इसके दो मुख्य भाग हैं: *1. नमक चमक:* पहला भाग 'नमकम्' है, जिसमें भगवान शिव को बार-बार 'नमः' कहकर नमन किया जाता है - जैसे 'नमः शिवाय च शिवतराय च'। दूसरा भाग 'चमकम्' है, जिसमें भक्त भगवान से सब कुछ मांगता है - धन, बुद्धि, संतान, आरोग्य, मोक्ष। *2. लघु रुद्र, महारुद्र और अतिरुद्र:* - जब 11 ब्राह्मण 11 बार रुद्राष्टाध्यायी का पाठ करते हैं, तो उसे *लघु रुद्र* कहते हैं (121 पाठ)। - जब 121 ब्राह्मण 11 बार पाठ करते हैं, तो उसे *महारुद्र* कहते हैं। - जब 121 ब्राह्मण 11 दिन तक लगातार पाठ करते हैं, तो वह *अतिरुद्र महायज्ञ* कहलाता है, जो बहुत दुर्लभ है। 2. रुद्र हवन कैसे किया जाता है? - सम्पूर्ण विधि रुद्र यज्ञ एक दिन का नहीं, बल्कि कम से कम 2 से 11 दिन का अनुष्ठान होता है। इसकी विधि बहुत ही कठोर और वैदिक नियमों से बंधी है। *पहला चरण - संकल्प और वेदी निर्माण:* सबसे पहले यजमान (जिसके लिए यज्ञ हो रहा है) संकल्प लेता है। पंडित जी यजमान के नाम, गोत्र और मनोकामना का उच्चारण करते हैं। फिर उत्तर-पूर्व दिशा में मिट्टी की वेदी बनाई जाती है। वेदी पर आम की लकड़ी, गाय के गोबर के उपले रखे जाते हैं। *दूसरा चरण - शिवलिंग स्थापना और रुद्राभिषेक:* वेदी के बीच में पार्थिव शिवलिंग (मिट्टी का शिवलिंग) या नर्मदेश्वर शिवलिंग की स्थापना की जाती है। फिर 11 ब्राह्मण लगातार रुद्राष्टाध्यायी का पाठ करते हुए शिवलिंग का अभिषेक करते हैं - दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल, बेलपत्र, भस्म और धतूरे से। *तीसरा चरण - हवन:* हर 'नमः' मंत्र के बाद हवन कुंड में आहुति दी जाती है। आहुति में तिल, जौ, घी, गुग्गल, लोहबान, आम की लकड़ी, बेलपत्र, और औषधियों का उपयोग होता है। कहा जाता है कि जब घी अग्नि में जलता है, तो उससे निकलने वाला धुआं वातावरण के बैक्टीरिया को मार देता है और सकारात्मक ऊर्जा फैलाता है। *चौथा चरण - पूर्णाहुति और भंडारा:* अंत में नारियल की पूर्णाहुति दी जाती है और ब्राह्मणों को भोजन कराकर दक्षिणा दी जाती है। यज्ञ की भस्म (विभूति) को बहुत पवित्र माना जाता है। 3. रुद्र यज्ञ क्यों कराया जाता है? - 7 बड़े लाभ शास्त्रों में कहा गया है - *"रुद्राभिषेकात् नास्ति अन्यत् श्रेष्ठम्"* अर्थात रुद्राभिषेक से श्रेष्ठ कुछ भी नहीं है। *1. ग्रह दोष शांति:* जिन लोगों की कुंडली में कालसर्प दोष, पितृदोष, शनि की साढ़ेसाती, राहु-केतु का प्रकोप हो, उनके लिए रुद्र यज्ञ रामबाण है। शिव ही सभी ग्रहों के स्वामी हैं। *2. रोग और भय से मुक्ति:* महामृत्युंजय मंत्र भी रुद्र यज्ञ का ही हिस्सा है। जो व्यक्ति लंबे समय से बीमार है, जिसे डॉक्टर जवाब दे चुके हैं, उसके स्वास्थ्य के लिए रुद्र यज्ञ कराया जाता है। *3. संतान प्राप्ति और परिवार में सुख:* जिन दंपतियों को संतान नहीं हो रही है, वे यदि श्रावण मास या महाशिवरात्रि पर रुद्र यज्ञ कराते हैं तो उन्हें शिव कृपा से संतान प्राप्ति होती है। *4. धन और व्यापार वृद्धि:* 'चमकम्' पाठ में धन-धान्य की प्रार्थना है। व्यापार में घाटा, नौकरी में रुकावट, कर्ज से मुक्ति के लिए यह यज्ञ कराया जाता है। *5. वास्तु दोष निवारण:* नया घर, दुकान या फैक्ट्री शुरू करने से पहले रुद्र यज्ञ कराने से वास्तु दोष समाप्त हो जाता है और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। *6. अकाल मृत्यु से रक्षा:* भागवत पुराण में कथा है कि मार्कंडेय ऋषि ने रुद्र यज्ञ करके ही यमराज को भी हरा दिया था और अमर हो गए थे। *7. मोक्ष प्राप्ति:* अंत में यह यज्ञ मन को शांत करता है और मोक्ष का मार्ग खोलता है। 4. रुद्र यज्ञ कब कराना चाहिए? - *सावन मास (श्रावण)* - सबसे उत्तम महीना - महाशिवरात्रि - सोमवार - प्रदोष काल - ग्रहण काल के बाद - जब घर में लगातार अशुभ घटनाएं हो रही हों यज्ञ के दौरान यजमान को ब्रह्मचर्य, सात्विक भोजन और जमीन पर सोने का पालन करना चाहिए। 5. वैज्ञानिक महत्व आज विज्ञान भी मानता है कि वैदिक मंत्रों में एक विशेष ध्वनि कंपन (Sound Vibration) होता है। जब 11 ब्राह्मण एक साथ 'नमक चमक' का उच्चारण करते हैं, तो उससे उत्पन्न ध्वनि तरंगें हमारे मस्तिष्क की अल्फा तरंगों को शांत करती हैं। हवन में जलने वाला घी और औषधियां वातावरण को शुद्ध करती हैं। इसलिए रुद्र यज्ञ केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए भी लाभदायक है। निष्कर्ष रुद्र यज्ञ एक ऐसा अनुष्ठान है जो अकेले नहीं किया जा सकता। इसके लिए विद्वान ब्राह्मणों, शुद्ध आचरण और सच्ची श्रद्धा की आवश्यकता होती है। यह यज्ञ हमें सिखाता है कि अहंकार को छोड़ो, 'नमः' कहो - अर्थात मैं कुछ नहीं, सब आप ही हैं। जब हम सच्चे मन से "ॐ नमः शिवाय" कहते हुए आहुति देते हैं, तो हमारे अंदर का रुद्र - क्रोध, लोभ, भय - जलकर भस्म हो जाता है और अंदर शिवत्व - शांति, प्रेम और कल्याण - जागृत होता है।3
- सालमगढ़ में रक्षाबंधन की धूम: बहनों ने बांधी राखी, भाइयों ने लिया रक्षा का संकल्प सालमगढ़ में रक्षाबंधन की धूम: बहनों ने बांधी राखी, भाइयों ने लिया रक्षा का संकल्प सालमगढ़। क्षेत्र में रक्षाबंधन का पावन पर्व अत्यंत हर्षोल्लास, प्रेम और पारंपरिक उत्साह के साथ मनाया गया। त्योहार के मुख्य दिन किसी कारणवश राखी न बांध पाने वाली बहनों ने आज अपने भाइयों की कलाई पर पवित्र रक्षासूत्र सजाया और उनके दीर्घायु तथा उज्ज्वल भविष्य की कामना की। सुबह से ही घरों में उत्सव का माहौल देखने को मिला। बहनों ने पूजा की थाली सजाकर भाइयों का तिलक किया, आरती उतारी और कलाई पर रेशमी धागे बांधकर उनका मुंह मीठा कराया। वहीं, भाइयों ने भी पूरी आत्मीयता के साथ अपनी बहनों को स्नेह स्वरूप उपहार भेंट किए और जीवनभर उनकी रक्षा करने का वचन दिया। त्योहार को लेकर बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी में खासा उत्साह देखा गया। बहनों के चेहरे पर खुशी और भाइयों की आंखों में जिम्मेदारी का भाव इस पर्व की सार्थकता को बयां कर रहा था। गांव-कस्बों में दिनभर आपसी प्रेम और भाईचारे का माहौल बना रहा।1