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हिमाचल प्रदेश मंडी भाव ~ मार्च 2026

हिमाचल प्रदेश मंडी भाव फसल का सही दाम तय करता है, इसलिए किसानों और व्यापारियों को इसकी जानकारी होना बेहद ज़रूरी है। पहाड़ों की गोद में बसा यह राज्य सेब, आलू, मटर और अदरक जैसी फसलों के लिए मशहूर है। हिमाचल प्रदेश की लगभग 79% जनसंख्या कृषि पर निर्भर है। ऐसे में मंडियों का महत्व और बढ़ जाता है। मंडी, कुल्लू, और सोलन जैसी मंडियां यहाँ के किसानों को पारदर्शी मूल्य जानने में मदद करती है। जैसे-जैसे मौसम बदलता है, हिमाचल प्रदेश में फसलों की कीमतों में भी अंतर आने लगता है; जैसे- सेब की फसल, जो दिसंबर से शुरू होकर जुलाई-अगस्त तक बाज़ार में आती है, और गर्मियों का सीजन आने तक इसकी कीमत बढ़ जाती है। वहीं, सर्दियों के मौसम में मटर और फूलों की मांग बढ़ जाती है। इसलिए इनके भाव में उछाल आता है। शुरू ऐप (Shuru App) पर आप इन रुझानों को आसानी से ट्रैक कर सकते हैं।

मंडी बदलें

कुल मंडियां: 73+
सामानन्यूनतम मूल्य (Rs./क्विंटल)अधिकतम मूल्य (Rs./क्विंटल)मंडीप्रकारअंतिम अपडेटसंपर्क करें
स्क्वैश (चप्पल कडू)₹1000₹1500धनोटू (मंडी)अन्य22 मार्च 2026डाउनलोड करें
भारतीय बीन्स (सीम)₹2800₹3200कांगड़ा(जयसिंहपुर)भारतीय बीन्स (सीम)19 मार्च 2026डाउनलोड करें
पत्तेदार सब्जी₹700₹1500मंडी (मंडी)पत्तीदार शाक भाजी20 मार्च 2026डाउनलोड करें
जैक फल₹6000₹7000एक प्रकार का हंसजैक फल22 मार्च 2026डाउनलोड करें
स्पंज लौकी₹4500₹5000कांगड़ाअन्य21 मार्च 2026डाउनलोड करें
आड़ू₹4000₹8000कांगड़ाअन्य21 मार्च 2026डाउनलोड करें
नींबू₹5000₹6000कांगड़ाअन्य19 मार्च 2026डाउनलोड करें
ख़ुरमा (जापानी फाल)₹7000₹10000कांगड़ा(जयसिंहपुर)अन्य21 मार्च 2026डाउनलोड करें
लोकी₹4000₹4500कांगड़ाअन्य20 मार्च 2026डाउनलोड करें
अमला (नेल्ली काई)₹3000₹3500हमीरपुरअमला20 मार्च 2026डाउनलोड करें

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अक्सर पूछे गए सवाल
  • Q.

    हिमाचल में मंडी में नीलामी कैसे होती है?

    A.

    हिमाचल प्रदेश में मंडी में नीलामी की प्रक्रिया पारदर्शी होती है। किसान अपनी फसल को मंडी यार्ड में लाते हैं और आढ़ती या मंडी सचिव से एंट्री स्लिप बनवाते हैं। इसके बाद मंडी परिसर में बोली लगाई जाती है। व्यापारी, आढ़ती की मदद से बोली लगाते हैं और अलग-अलग व्यापारी अपनी-अपनी कीमत बोलते हैं। जिस व्यापारी ने सबसे ऊँची बोली लगाई होती है, उसे किसान की उपज बेच दी जाती है। इसके बाद तौल होती है, रसीद बनती है और भुगतान तय समय में किया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया पर APMC (Agricultural Produce Market Committee) के कर्मचारी नजर रखते हैं, ताकि किसी भी तरह की धांधली न हो।

  • Q.

    हिमाचल प्रदेश में कौन-कौन सी फसलें मंडी में सबसे ज़्यादा बिकती हैं?

    A.

    हिमाचल प्रदेश बागवानी और सब्ज़ियों के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ की मंडियों में सबसे ज्यादा सेब बिकते हैं, जो राज्य की प्रमुख नकदी फसल है। इसके अलावा टमाटर, जो सोलन और कांगड़ा जैसे जिलों में बड़ी मात्रा में होता है, मंडी में सबसे अधिक बिकता है। मटर, शिमला मिर्च, फूलगोभी, बंदगोभी और अदरक जैसी सब्ज़ियाँ भी खूब बिकती हैं। लहसुन और अदरक की आपूर्ति पहाड़ी क्षेत्रों से पंजाब, दिल्ली जैसे बड़े बाजारों में होती है, इसलिए इनका भी मंडियों में बड़ा हिस्सा रहता है।

  • Q.

    हिमाचल में मंडी में फसल खराब होने पर मुआवजा मिलता है?

    A.

    अगर मंडी यार्ड में रखा हुआ माल किसी प्राकृतिक आपदा, भारी बारिश, आगजनी या अन्य आकस्मिक दुर्घटना से खराब हो जाता है तो किसान को नुकसान की भरपाई के लिए APMC के तहत बीमा योजना या मंडी निधि से आंशिक मुआवजा दिया जा सकता है। इसके लिए किसान को मंडी सचिव के पास आवेदन करना होता है और नुकसान का निरीक्षण मंडी अधिकारी द्वारा किया जाता है। इसके बाद तय नियमों के अनुसार कुछ प्रतिशत मुआवजा भुगतान किया जाता है।

  • Q.

    हिमाचल में किसान मंडी से भुगतान कैसे लेते हैं?

    A.

    हिमाचल प्रदेश की मंडियों में अधिकतर लेन-देन पारदर्शी तरीके से किया जाता है। किसान बोली लगने के बाद आढ़ती या व्यापारी से मंडी रसीद प्राप्त करते हैं। यह रसीद तौल और रेट का प्रमाण होती है। उसके आधार पर किसान को भुगतान नकद, RTGS या बैंक ट्रांसफर से मिल जाता है। बड़ी मात्रा में फसल बेचने पर व्यापारी आमतौर पर बैंक ट्रांसफर को ही प्राथमिकता देते हैं। कई मंडियों में भुगतान की अधिकतम अवधि भी तय होती है, जैसे 7 दिन या 14 दिन के अंदर भुगतान अनिवार्य है।

  • Q.

    हिमाचल में मंडी में ठेला या ट्रैक्टर से माल लाने पर शुल्क लगता है क्या?

    A.

    हिमाचल की मंडियों में किसानों को अपनी फसल मंडी यार्ड तक लाने के लिए ठेला, पिकअप, जीप या ट्रैक्टर का उपयोग करना पड़ता है। इस पर मंडी द्वारा कोई अलग टैक्स नहीं लिया जाता है। केवल फसल पर मंडी शुल्क (आमतौर पर 1% से 2%) ही लगता है, जो फसल की कुल कीमत के हिसाब से होता है। हाँ, कुछ जगहों पर नगर निगम या ग्राम पंचायत सीमा में प्रवेश शुल्क लग सकता, जो परिवहन वाहन के हिसाब से लिया जाता है।

  • Q.

    हिमाचल प्रदेश की मंडियों में स्क्वैश (चप्पल कडू) की भाव कैसे चेक करें?

    A.

    आप Shuru ऐप पर हिमाचल प्रदेश की पीएमवाई बिलासपुर और पीएमवाई बिलासपुर, एसएमवाई बैजनाथ, बिलासपुर, पीएमवाई ऊना, हमीरपुर मंडियों में स्क्वैश (चप्पल कडू) की कीमत काफ़ी आसानी से चेक कर सकते हैं। हमारी लिस्ट मार्च 2026 को अपडेट की गई है और स्क्वैश (चप्पल कडू) का भाव ₹1500.00 प्रति क्विंटल है।

  • Q.

    हिमाचल प्रदेश की मंडियां किसानों को कैसे लाभ पहुंचाती हैं?

    A.

    हिमाचल प्रदेश की मंडियां, जैसे पीएमवाई बिलासपुर मंडी और इसके आसपास की पीएमवाई बिलासपुर, एसएमवाई बैजनाथ, बिलासपुर, पीएमवाई ऊना, हमीरपुर मंडियां किसानों को उनकी फसलों, जैसे स्क्वैश (चप्पल कडू), के लिए सही कीमत दिलाने में मदद करती है। Shuru ऐप आपको किसी भी फसल जैसे स्क्वैश (चप्पल कडू) के ताजा भाव के बारे में बताता है, जो e-NAM डेटा पर आधारित हैं। यह किसानों को व्यापारियों से जोड़ता है और बिक्री का सही समय चुनने में आपकी मदद करता है। हिमाचल प्रदेश की मंडियां डिजिटल व्यापार को बढ़ावा देती हैं, जिससे किसान अपने मुनाफे को अधिकतम कर सकते हैं।

  • Q.

    हिमाचल प्रदेश में स्क्वैश (चप्पल कडू) की भाव क्यों बदलती रहती हैं?

    A.

    हिमाचल प्रदेश की मंडियों, जैसे पीएमवाई बिलासपुर और पीएमवाई बिलासपुर, एसएमवाई बैजनाथ, बिलासपुर, पीएमवाई ऊना, हमीरपुर, में स्क्वैश (चप्पल कडू) की कीमतें मांग, आपूर्ति, और परिवहन लागत के कारण बदलती हैं। आज मार्च 2026 को स्क्वैश (चप्पल कडू) की कीमत 1500.00/क्विंटल है, और यह कल बदल सकती है। आप अपने हिसाब से अलग-अलग मंडियों में Shuru ऐप से कीमतों की तुलना भी कर सकते हैं।

  • Q.

    हिमाचल प्रदेश में कुल कितनी मंडियां हैं?

    A.

    e-NAM पोर्टल के मुताबिक, हिमाचल प्रदेश में कुल 73 मंडियां है।

और जानें

हिमाचल की प्रमुख मंडियाँ- मंडी, शिमला, सोलन, और कुल्लू जगह पर एक्टिव हैं। सेब, आलू, मटर, अदरक, और फूल यहाँ की प्रमुख फसलें हैं। ऐसे में हिमाचल प्रदेश मंडी भाव जानकारी किसानों को बाज़ार के रुझानों से जोड़े रखती है। हिमाचल प्रदेश में मंडी जिला मंडियों का केंद्र माना जाता है। वहीं, शिमला की ढली और सोलन की मंडी फलों और सब्ज़ियों के लिए जानी जाती हैं। कुल्लू की मंडियां सेब और अदरक के व्यापार का बड़ा केंद्र हैं।

किसानों और व्यापारियों के लिए टिप्स

  1. मॉडल मूल्य को समझें: मंडी में मॉडल मूल्य वह औसत दाम है, जो दिन के व्यापार के आधार पर तय होता है। सही मूल्य जानकर आप अधिक मुनाफा कमा सकते हैं।
  2. मौसमी के असर को समझें : हिमाचल प्रदेश में फसलों पर मौसम का काफ़ी असर होता है, इसके कारण फसलों की कीमतों में भारी बदलाव देखने को मिलता है। मौसमी रुझानों और बाज़ार की मांग के अनुसार फसलों की कीमत में होने वाले बदलावों की जानकारी के लिए आप शुरू ऐप (Shuru App) का इस्तेमाल कर सकते हैं।
  3. छोटे-छोटे लॉट में फसल बेचें : हिमाचल प्रदेश मंडी भाव में रोजाना उतार-चढ़ाव होता रहता है। उदाहरण के लिए, एक हफ्ते के अंदर सेब की कीमत में 5 रुपये से लेकर 10 रुपये तक का अंतर आ सकता है। ऐसे में पूरी फसल को एक बार में बेचने के बजाय, छोटे- छोटे लॉट में बेचें। वहीं, व्यापारी भी छोटे लॉट खरीदकर स्टॉक कर सकते हैं और बाजार की मांग के अनुसार फसल को आगे बेच सकते हैं।
  4. प्रमुख मंडियों को चुनें : मंडी, शिमला (ढली), सोलन, और कुल्लू की मंडियां सेब, आलू, मटर, और अदरक के लिए प्रसिद्ध हैं। मंडी शहर की कृषि उपज मंडी राज्य की सबसे बड़ी मंडियों में से एक है, जहाँ हिमाचल प्रदेश मंडी भाव पारदर्शी और अधिक होता है। कुल्लू में अदरक और सेब का व्यापार बड़ा है, जबकि सोलन सब्ज़ियों के लिए जाना जाता है। इन मंडियों में किसानों को अधिक व्यापारी मिल सकते हैं। वहीं, थोक खरीदी के लिए व्यापारियों को इन मंडियों को चुनना चाहिए।
  5. फसल की क्वालिटी पर ध्यान दें : अच्छी क्वालिटी वाली फसल को मंडी में अधिक महत्व दिया जाता है। इसलिए किसानों को अपनी फसल; जैसे- सेब, आलू, या मटर को अच्छे से छांटना और पैक करना चाहिए। व्यापारियों को भी फसल की क्वालिटी चेक करके ही उसे खरीदना चाहिए, ताकि आगे चलकर मुनाफा अधिक हो।

हिमाचल प्रदेश सरकार की नीतियाँ और पहल

हिमाचल सरकार किसानों के लिए कई योजनाएं चला रही है। ई-नाम प्रोजेक्ट के तहत मंडियों को डिजिटल किया जा रहा है, जिसकी मदद से किसान अपनी फसल को ऑनलाइन भी बेच सकते हैं। इसके साथ ही, सरकार सेब और अन्य फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) भी बढ़ा रही है, जिससे किसानों को लाभ हो रहा है। किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) और प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN) जैसी केंद्रीय योजनाओं का भी राज्य को फ़ायदा हो रहा है। ये योजनाएँ किसानों को आर्थिक मदद देती है।

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