निवाड़ी गांव में आवासीय पट्टों को लेकर डीएम से शिकायत, ग्राम प्रधान व लेखपाल की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल आवासीय पट्टों पर बड़ा सवाल! पात्रों को दरकिनार कर अपात्रों को पट्टा देने का आरोप कालपी/जालौन ग्राम पंचायत बरदौली परगना कालपी के मजरा निवाड़ी में आवासीय पट्टों के आवंटन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्राम निवासी रामसिंह पुत्र स्व. श्यामलाल ने जिलाधिकारी को शिकायती पत्र देकर आरोप लगाया है कि गांव में गाटा संख्या 202, 141, 180 और 172/1 में किए गए आवासीय पट्टों के संबंध में न तो खुली बैठक की गई और न ही आमजन को इसकी सूचना दी गई। शिकायतकर्ता का आरोप है कि पात्र लोगों को दरकिनार कर कथित रूप से अपात्र लोगों को आवासीय पट्टे दिए गए। शिकायत में शीलादेवी पत्नी स्व. मान सिंह, रित्ता पत्नी स्व. अखिलेश, रामा पत्नी स्व. कृपाल और कुसुमकली पत्नी स्व. मोहन सिंह जैसी महिलाओं को पात्र होने के बावजूद पट्टे से वंचित किए जाने की बात कही गई है। शिकायत में ग्राम प्रधान और लेखपाल की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि ग्राम प्रधान ने अपने सगे देवर संजय पुत्र गयाप्रसाद को आवासीय पट्टा दे दिया, जबकि शिकायतकर्ता के अनुसार संजय के पास पहले से लगभग 30 बीघा कृषि भूमि और कई आवासीय मकान हैं। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि शिवकान्ती के नाम आवासीय पट्टा किए जाने के बावजूद वह संपन्न परिवार से हैं। शिकायतकर्ता के मुताबिक उनके पति संपन्न हैं, ससुर के नाम करीब 20 बीघा जमीन और तीन मकान हैं। इसी तरह गांव की लड़की आखरीन पुत्री शकील के विवाह के बाद उसके नाम भी आवासीय पट्टा किए जाने पर सवाल उठाया गया है। अब सबसे बड़ा सवाल— क्या वास्तव में आवासीय पट्टों के लिए खुली बैठक और सार्वजनिक सूचना दी गई थी? यदि दी गई थी तो उसकी कार्यवाही और प्रस्ताव कहां है? क्या पट्टा पाने वाले सभी लोग सरकारी नियमों के अनुसार पात्रता की शर्तें पूरी करते हैं? यदि किसी के पास पहले से जमीन और पक्का मकान है तो उसे आवासीय पट्टा किस आधार पर मिला? पात्र महिलाओं को कथित रूप से पट्टे से बाहर क्यों रखा गया? क्या ग्राम प्रधान और लेखपाल ने नियमों के अनुसार पूरी प्रक्रिया अपनाई? क्या राजस्व विभाग द्वारा मौके पर जाकर भौतिक सत्यापन किया गया? यदि शिकायत सही पाई जाती है तो अपात्रों को दिए गए पट्टे निरस्त होंगे या नहीं? शिकायतकर्ता ने जिलाधिकारी से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा जांच पूरी होने तक विवादित पट्टे वाली जमीन पर कब्जा किए जाने से रोकने की मांग की है। अब निगाहें जिला प्रशासन की जांच पर टिकी हैं। यदि शिकायत में लगाए गए आरोप जांच में सही साबित होते हैं तो यह मामला सिर्फ पट्टा आवंटन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पंचायत स्तर पर सरकारी जमीन के आवंटन की पूरी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करेगा। #जालौन #कालपी #निवाड़ी #बरदौली #आवासीयपट्टा #पट्टाआवंटन #डीएमजालौन #ग्रामपंचायत #ग्रामप्रधान #लेखपाल #राजस्वविभाग #सरकारीजमीन #पट्टाघोटाला #जांचकीमांग #JalaunNews #KalpiNews #BreakingNews #UPNews
निवाड़ी गांव में आवासीय पट्टों को लेकर डीएम से शिकायत, ग्राम प्रधान व लेखपाल की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल आवासीय पट्टों पर बड़ा सवाल! पात्रों को दरकिनार कर अपात्रों को पट्टा देने का आरोप कालपी/जालौन ग्राम पंचायत बरदौली परगना कालपी के मजरा निवाड़ी में आवासीय पट्टों के आवंटन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्राम निवासी रामसिंह पुत्र स्व. श्यामलाल ने जिलाधिकारी को शिकायती पत्र देकर आरोप लगाया है कि गांव में गाटा संख्या 202, 141, 180 और 172/1 में किए गए आवासीय पट्टों के संबंध में न तो खुली बैठक की गई और न ही आमजन को इसकी सूचना दी गई। शिकायतकर्ता का आरोप है कि पात्र लोगों को दरकिनार कर कथित रूप से अपात्र लोगों को आवासीय पट्टे दिए गए। शिकायत में शीलादेवी पत्नी स्व. मान सिंह, रित्ता पत्नी स्व. अखिलेश, रामा पत्नी स्व. कृपाल और कुसुमकली पत्नी स्व. मोहन सिंह जैसी महिलाओं को पात्र होने के बावजूद पट्टे से वंचित किए जाने की बात कही गई है। शिकायत में ग्राम प्रधान और लेखपाल की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि ग्राम प्रधान ने अपने सगे देवर संजय पुत्र गयाप्रसाद को आवासीय पट्टा दे दिया, जबकि शिकायतकर्ता के अनुसार संजय के पास पहले से लगभग 30 बीघा कृषि भूमि और कई आवासीय मकान हैं। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि शिवकान्ती के नाम आवासीय पट्टा किए जाने के बावजूद वह संपन्न परिवार से हैं। शिकायतकर्ता के मुताबिक उनके पति संपन्न हैं, ससुर के नाम करीब 20 बीघा जमीन और तीन मकान हैं। इसी तरह गांव की लड़की आखरीन पुत्री शकील के विवाह के बाद उसके नाम भी आवासीय पट्टा किए जाने पर सवाल उठाया गया है। अब सबसे बड़ा सवाल— क्या वास्तव में आवासीय पट्टों के लिए खुली बैठक और सार्वजनिक सूचना दी गई थी? यदि दी गई थी तो उसकी कार्यवाही और प्रस्ताव कहां है? क्या पट्टा पाने वाले सभी लोग सरकारी नियमों के अनुसार पात्रता की शर्तें पूरी करते हैं? यदि किसी के पास पहले से जमीन और पक्का मकान है तो उसे आवासीय पट्टा किस आधार पर मिला? पात्र महिलाओं को कथित रूप से पट्टे से बाहर क्यों रखा गया? क्या ग्राम प्रधान और लेखपाल ने नियमों के अनुसार पूरी प्रक्रिया अपनाई? क्या राजस्व विभाग द्वारा मौके पर जाकर भौतिक सत्यापन किया गया? यदि शिकायत सही पाई जाती है तो अपात्रों को दिए गए पट्टे निरस्त होंगे या नहीं? शिकायतकर्ता ने जिलाधिकारी से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा जांच पूरी होने तक विवादित पट्टे वाली जमीन पर कब्जा किए जाने से रोकने की मांग की है। अब निगाहें जिला प्रशासन की जांच पर टिकी हैं। यदि शिकायत में लगाए गए आरोप जांच में सही साबित होते हैं तो यह मामला सिर्फ पट्टा आवंटन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पंचायत स्तर पर सरकारी जमीन के आवंटन की पूरी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करेगा। #जालौन #कालपी #निवाड़ी #बरदौली #आवासीयपट्टा #पट्टाआवंटन #डीएमजालौन #ग्रामपंचायत #ग्रामप्रधान #लेखपाल #राजस्वविभाग #सरकारीजमीन #पट्टाघोटाला #जांचकीमांग #JalaunNews #KalpiNews #BreakingNews #UPNews
- निवाड़ी गांव में आवासीय पट्टों को लेकर डीएम से शिकायत, ग्राम प्रधान व लेखपाल की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल आवासीय पट्टों पर बड़ा सवाल! पात्रों को दरकिनार कर अपात्रों को पट्टा देने का आरोप कालपी/जालौन ग्राम पंचायत बरदौली परगना कालपी के मजरा निवाड़ी में आवासीय पट्टों के आवंटन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्राम निवासी रामसिंह पुत्र स्व. श्यामलाल ने जिलाधिकारी को शिकायती पत्र देकर आरोप लगाया है कि गांव में गाटा संख्या 202, 141, 180 और 172/1 में किए गए आवासीय पट्टों के संबंध में न तो खुली बैठक की गई और न ही आमजन को इसकी सूचना दी गई। शिकायतकर्ता का आरोप है कि पात्र लोगों को दरकिनार कर कथित रूप से अपात्र लोगों को आवासीय पट्टे दिए गए। शिकायत में शीलादेवी पत्नी स्व. मान सिंह, रित्ता पत्नी स्व. अखिलेश, रामा पत्नी स्व. कृपाल और कुसुमकली पत्नी स्व. मोहन सिंह जैसी महिलाओं को पात्र होने के बावजूद पट्टे से वंचित किए जाने की बात कही गई है। शिकायत में ग्राम प्रधान और लेखपाल की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि ग्राम प्रधान ने अपने सगे देवर संजय पुत्र गयाप्रसाद को आवासीय पट्टा दे दिया, जबकि शिकायतकर्ता के अनुसार संजय के पास पहले से लगभग 30 बीघा कृषि भूमि और कई आवासीय मकान हैं। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि शिवकान्ती के नाम आवासीय पट्टा किए जाने के बावजूद वह संपन्न परिवार से हैं। शिकायतकर्ता के मुताबिक उनके पति संपन्न हैं, ससुर के नाम करीब 20 बीघा जमीन और तीन मकान हैं। इसी तरह गांव की लड़की आखरीन पुत्री शकील के विवाह के बाद उसके नाम भी आवासीय पट्टा किए जाने पर सवाल उठाया गया है। अब सबसे बड़ा सवाल— क्या वास्तव में आवासीय पट्टों के लिए खुली बैठक और सार्वजनिक सूचना दी गई थी? यदि दी गई थी तो उसकी कार्यवाही और प्रस्ताव कहां है? क्या पट्टा पाने वाले सभी लोग सरकारी नियमों के अनुसार पात्रता की शर्तें पूरी करते हैं? यदि किसी के पास पहले से जमीन और पक्का मकान है तो उसे आवासीय पट्टा किस आधार पर मिला? पात्र महिलाओं को कथित रूप से पट्टे से बाहर क्यों रखा गया? क्या ग्राम प्रधान और लेखपाल ने नियमों के अनुसार पूरी प्रक्रिया अपनाई? क्या राजस्व विभाग द्वारा मौके पर जाकर भौतिक सत्यापन किया गया? यदि शिकायत सही पाई जाती है तो अपात्रों को दिए गए पट्टे निरस्त होंगे या नहीं? शिकायतकर्ता ने जिलाधिकारी से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा जांच पूरी होने तक विवादित पट्टे वाली जमीन पर कब्जा किए जाने से रोकने की मांग की है। अब निगाहें जिला प्रशासन की जांच पर टिकी हैं। यदि शिकायत में लगाए गए आरोप जांच में सही साबित होते हैं तो यह मामला सिर्फ पट्टा आवंटन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पंचायत स्तर पर सरकारी जमीन के आवंटन की पूरी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करेगा। #जालौन #कालपी #निवाड़ी #बरदौली #आवासीयपट्टा #पट्टाआवंटन #डीएमजालौन #ग्रामपंचायत #ग्रामप्रधान #लेखपाल #राजस्वविभाग #सरकारीजमीन #पट्टाघोटाला #जांचकीमांग #JalaunNews #KalpiNews #BreakingNews #UPNews1
- 19.43 लाख का मरघट पूरा, अब उसी जैसी तस्वीर के साथ ₹24.50 लाख का नया काम? छिरिया सलेमपुर में सरकारी रिकॉर्ड और मौके की तस्वीर आमने-सामने, पुराने कार्य पर ₹19.43 लाख व्यय दर्ज, नए कार्य में अभी ₹0 खर्च जालौन। जालौन ब्लॉक क्षेत्र की ग्राम पंचायत छिरिया सलेमपुर में सरकारी निर्माण कार्यों से जुड़े रिकॉर्ड और मौके की स्थिति ने कई सवाल खड़े किए हैं। मेरी पंचायत पोर्टल पर दर्ज दो अलग-अलग कार्यों के रिकॉर्ड तथा दूसरे कार्य के साथ लगी जियो-टैग तस्वीर इस मामले को जांच के दायरे में लाती है। एक ओर अंत्येष्टि स्थल से जुड़े कार्य में ₹19,43,879 का व्यय दर्ज है और उसे पूर्ण दिखाया गया है। दूसरी ओर ₹24,50,000 की अनुमानित लागत वाला एक नया कार्य 28 जुलाई 2026 को दर्ज हुआ है। खास बात यह है कि इस दूसरे कार्य की फोटो में पहले से निर्मित ढांचा दिखाई देता है, जबकि रिकॉर्ड में कार्य New/Fresh और Onset of work दर्ज है। पहले ₹19.43 लाख का कार्य मेरी पंचायत के रिकॉर्ड में Work ID 125166992 के तहत कार्य दर्ज है। कार्य का विवरण है— Construction/Maintenance/Upgradation of Building Hall, Community Centre, Boundary Wall, Flooring, Doors, Window, Fixtures Etc of Community Assets रिकॉर्ड के मुताबिक— अनुमानित लागत: ₹20,00,000 दर्ज व्यय: ₹19,43,879 योजना: Antyeshti Sthalon Ka Vikas गतिविधि: New/Fresh स्थिति: Completion of work पंजीकरण: 25 मई 2025 परिसंपत्ति विवरण में Buildings, उपश्रेणी Old Aged Home और कुल इकाई 1 दर्ज है। अर्थात उपलब्ध सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार यह कार्य पूर्ण है और इसमें करीब 19.43 लाख रुपये का व्यय दर्ज किया गया है। फिर सामने आया ₹24.50 लाख का दूसरा रिकॉर्ड इसी पंचायत में Work ID 130244502 के तहत दूसरा कार्य दर्ज है। इसका कार्य विवरण भी पहले रिकॉर्ड से काफी मिलता-जुलता है— Construction/Maintenance/Upgradation of Building Hall, Community Centre, Boundary Wall, Flooring, Doors, Window, Fixtures Etc of Community Assets इस रिकॉर्ड में— अनुमानित लागत: ₹24,50,000 व्यय: ₹0 पंजीकरण: 28 जुलाई 2026 स्थिति: Onset of work गतिविधि: New/Fresh योजना: Viksit Bharat–Guarantee for Rozgar and Ajeevika Mission... परिसंपत्ति: Buildings उपश्रेणी: Sheds कुल इकाई: 1 दर्ज है। यानी एक कार्य में ₹19.43 लाख खर्च दर्ज है, जबकि दूसरे में ₹24.50 लाख की अनुमानित लागत दिखाई जा रही है और फिलहाल व्यय शून्य है। नए काम की फोटो ने बढ़ाया सवाल मामले का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा दूसरे Work ID की फोटो है। फोटो रिकॉर्ड में 28 जुलाई 2026 की जियो-टैग तस्वीर दिखाई देती है। तस्वीर में एक पहले से बना हुआ पक्का ढांचा/शेड नजर आ रहा है। फोटो पर तारीख और लोकेशन की जानकारी भी दिखाई देती है। यहां सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि पोर्टल पर इसी कार्य को New/Fresh और Onset of work बताया गया है। क्या पहले से मौजूद ढांचा ही नए कार्य की तस्वीर है? यह बात अभी जांच का विषय है और उपलब्ध रिकॉर्ड से इसका अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। अगर ₹24.50 लाख वाला कार्य किसी अलग शेड या अलग परिसंपत्ति के लिए है, तो उसकी वास्तविक लोकेशन और प्रस्तावित निर्माण स्पष्ट होना चाहिए। वहीं यदि जांच में यह पाया जाता है कि फोटो में दिखाई दे रहा ढांचा उसी पुराने निर्माण से संबंधित है, जिस पर पहले ही करीब ₹19.43 लाख का व्यय दर्ज है, तो फिर नए कार्य को New/Fresh दर्ज किए जाने के आधार की जांच जरूरी होगी। ₹24.50 लाख खर्च होने की बात नहीं यह तथ्य स्पष्ट करना जरूरी है कि दूसरे कार्य में पोर्टल पर फिलहाल ₹0 व्यय दर्ज है। इसलिए उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर यह दावा नहीं किया जा सकता कि ₹24.50 लाख खर्च या भुगतान हो चुके हैं। मामला फिलहाल ₹24.50 लाख की अनुमानित लागत वाले दर्ज कार्य, उसकी स्थिति और उससे जुड़ी तस्वीर को लेकर उठ रहे सवालों का है। पुराने निर्माण की स्थिति पर भी सवाल मौके की पड़ताल में निर्माण के कुछ हिस्सों में दरारें दिखाई देने की बात सामने आई है। यदि यह वही निर्माण है, जिस पर ₹19.43 लाख का व्यय दर्ज है, तो इसकी तकनीकी स्थिति की जांच भी महत्वपूर्ण होगी। क्या कार्य की एमबी तैयार हुई? क्या तकनीकी जांच हुई? क्या पूर्णता प्रमाणपत्र जारी हुआ? क्या भुगतान से पहले गुणवत्ता का सत्यापन किया गया? इन सवालों का जवाब संबंधित अभिलेख और विभागीय जांच ही दे सकती है। अब दोनों रिकॉर्ड का मिलान जरूरी मामले की स्थिति स्पष्ट करने के लिए Work ID 125166992 और Work ID 130244502 की— लोकेशन जियो-टैग फोटो एस्टीमेट तकनीकी स्वीकृति एमबी पूर्णता प्रमाणपत्र भुगतान अभिलेख का मिलान कराया जाना चाहिए। यदि दोनों अलग-अलग कार्य और परिसंपत्तियां हैं तो रिकॉर्ड की स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। लेकिन यदि जांच में दोनों एक ही स्थल या निर्माण से जुड़े पाए जाते हैं, तो फिर यह जानना जरूरी होगा कि अलग कार्य के रूप में रिकॉर्ड तैयार करने का आधार क्या था। सवाल गंभीर हैं, निष्कर्ष जांच के बाद इस मामले में उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर किसी व्यक्ति या संस्था पर सीधे आरोप लगाना उचित नहीं होगा। लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज जानकारी और मौके पर दिखाई दे रही स्थिति के बीच उठ रहे सवालों की निष्पक्ष जांच जरूरी है। एक तरफ ₹19,43,879 व्यय वाला कार्य पूर्ण दर्ज है। दूसरी तरफ ₹24,50,000 अनुमानित लागत वाला कार्य New/Fresh और Onset of work के रूप में दर्ज है। और इसी दूसरे कार्य के साथ पहले से निर्मित ढांचा दिखाई देने वाली तस्वीर मौजूद है। अब असली सवाल— जब पुराने कार्य का रिकॉर्ड पूर्ण है, तो ₹24.50 लाख का नया कार्य किस परिसंपत्ति के लिए दर्ज किया गया? और यदि दोनों कार्य अलग हैं तो उनकी अलग-अलग लोकेशन और स्वीकृत कार्य का विवरण सार्वजनिक रिकॉर्ड से स्पष्ट क्यों न किया जाए? फिलहाल नए कार्य में ₹0 व्यय दर्ज है। ऐसे में किसी भुगतान पर निष्कर्ष निकालने के बजाय भुगतान से पहले रिकॉर्ड, स्थल और तकनीकी दस्तावेजों का सत्यापन सबसे जरूरी कदम होगा। जांच के बाद ही साफ होगा कि मामला रिकॉर्ड की सामान्य प्रक्रिया/त्रुटि है, अलग-अलग कार्यों का है या फिर किसी अनियमितता की स्थिति सामने आती है। फिलहाल दस्तावेज सवाल पूछ रहे हैं और जवाब जांच से सामने आना बाकी है।1
- माती कोर्ट ने महिला के ऊपर हमला करने व दुष्कर्म के मामले में दो अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई और प्रत्येक को ₹1,34,000 के अर्थदंड से किया दंडित महिला के ऊपर हमला करने व दुष्कर्म करने के मामले में माती कोर्ट में माननीय न्यायालय एडीजे एफटीसी 1 ने दो अभियुक्तों भूपनारायण पुत्र स्व0 मोहन लाल व संतोष कटियार पुत्र मेवालाल निवासीगण बहेरी खुर्द थाना भोगनीपुर जनपद कानपुर देहात को दोषी करार दिया और दोनों अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई और प्रत्येक को ₹1,34,000 के अर्थदंड से दंडित किया।1
- जरी खरका से द्वितीय कावड अमरौधा कालेश्वर धाम हर हर महादेव सभी लोगों1
- सरवन खेड़ा ब्लॉक क्षेत्र में ग्रामीणों में लहराया हर घर तिरंगा। सरवन खेड़ा ब्लॉक क्षेत्र में हर घर तिरंगे को लेकर दिखाई ग्रामीणों ने सशक्त देश प्रेम। शासन के निर्देश क्रम में आयोजित हर घर तिरंगा अभियान, खंड विकास अधिकारी सरवन खेड़ा के निर्देश अनुसार सहायक विकास अधिकारी( ग्राम विकास अधिकारी) विमल सचान के नेतृत्व में हर घर तिरंगे को लेकर आयोजित कार्यक्रम अंतर्गत प्राथमिक विद्यालय लोदीपुर में वंदे मातरम का गायन किया गया।इसके पश्चात ग्राम पंचायत लोदीपुर की गलियों में तिरंगे की रैली निकाली गई।आयोजित कार्यक्रम में शामिल रहे।अधिकारी गण ग्राम विकास अधिकारी अनिल यादव, संतोष पाल, प्रधान प्रतिनिधि दीपक, रोजगार सेवक संदीप बाबू, पंचायत सहायक दीपमाला, प्राथमिक विद्यालय की प्रधानाध्यापिका,आरती खरे, एवं केयरटेकर बेबी, सूबेदार, अजय, सतीश कुमार, रानी देवी (आशा बहू) नरपत कुमार आदि प्राथमिक विद्यालय के बच्चे सहित सैकड़ो ग्रामीण रहे।सम्मिलित।4
- बच्चों की सुरक्षा एवं विद्यालय परिवहन व्यवस्था को लेकर प्रबंधकों एवं प्रधानाचायो की बैठक संपन्न हुई आज दिनांक 10 अगस्त 2026 को "मिशन सेफ़ फ़्यूचर 2.0" के अंतर्गत तहसील अकबरपुर स्थित डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम सभागार में विकास खंड अकबरपुर एवं सरवनखेड़ा के प्राइवेट विद्यालयों के बच्चों की सुरक्षा एवं विद्यालय परिवहन व्यवस्था को लेकर प्रबंधकों एवं प्रधानाचार्यो की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में संबंधित अधिकारियों द्वारा विद्यालयों में बच्चों की सुरक्षा, भवन की स्थिति तथा विद्यालयीय वाहनों के सुरक्षित संचालन के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। बैठक में उपजिलाधिकारी महोदय राज कुमार पाण्डेय ने स्पष्ट निर्देश दिए कि किसी भी विद्यालय में जर्जर भवन में शिक्षण कार्य न कराया जाए तथा कक्षाओं में निर्धारित क्षमता से अधिक बच्चों को न बैठाया जाए। बच्चों की सुरक्षा के साथ किसी भी प्रकार का समझौता न किया जाए। आरटीओ महोदय ने विद्यालयीय वाहनों की सुरक्षा के संबंध में कहा कि 15 वर्ष से अधिक पुराने वाहनों का नियमानुसार पंजीकरण/पुनः पंजीकरण कराया जाए तथा एम-परिवहन (m-Parivahan) एप का प्रयोग स्कूली वाहन की फिटनेस एवं वैद्यता स्थिति की जाँच के लिए किया जाए। उन्होंने वाहन चालकों के स्वास्थ्य एवं नेत्र परीक्षण को भी अनिवार्य रूप से कराए जाने पर बल दिया, ताकि बच्चों को सुरक्षित परिवहन सुविधा उपलब्ध हो सके। क्षेत्राधिकारी (CO) अकबरपुर महोदय ने निर्देशित किया कि विद्यालयीय वाहन चालकों का चरित्र प्रमाण-पत्र अवश्य बनवाया जाए तथा चालक की पृष्ठभूमि का समुचित सत्यापन किया जाए। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) आशीष कुमार पाण्डेय ने कहा कि विद्यालयों में अध्ययनरत बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने सभी विद्यालयीय वाहनों की ट्रैकिंग व्यवस्था सुनिश्चित करने, प्रत्येक बार वाहन के संचालन से पूर्व उसकी नियमित जाँच करने तथा ओवरलोडिंग, शराब पीकर वाहन चलाने एवं नाबालिग द्वारा वाहन चलाने पर पूर्ण प्रतिबंध सुनिश्चित करने तथा उनके अभिभावकों की नियमित काउंसलिंग कराने के निर्देश दिए। उन्होंने सड़क सुरक्षा की दृष्टि से विद्यालयीय वाहनों में एक अटेंडेंट की अनिवार्यता पर भी ज़ोर दिया। साथ ही बच्चों को गुड टच एवं बैड टच के संबंध में जागरूक किए जाने की आवश्यकता बताई। ज़िला सड़क सुरक्षा नोडल सन्त कुमार दीक्षित ने विद्यालयों में विद्यालय परिवहन सुरक्षा समिति एवं रोड सेफ्टी क्लब के गठन की व्यवस्था पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इन समितियों के माध्यम से विद्यालय स्तर पर सड़क सुरक्षा संबंधी गतिविधियों, वाहन सुरक्षा एवं विद्यार्थियों में यातायात नियमों के प्रति जागरूकता को प्रभावी बनाया जा सकता है। बैठक में उपस्थित अधिकारियों ने एकमत होकर कहा कि विद्यालयीय बच्चों की सुरक्षित यात्रा एवं सुरक्षित शिक्षण वातावरण सुनिश्चित करना सभी संबंधित विभागों एवं विद्यालय प्रबंधन की सामूहिक ज़िम्मेदारी है। सभी विद्यालयों को शासन एवं विभागीय निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। बैठक में जिला विद्यालय निरीक्षक के प्रतिनिधि एस एन कटियार, ब्लॉक सड़क सुरक्षा नोडल अकबरपुर एवं सरवनखेड़ा महाराज सिंह तथा अंकित मिश्रा भी उपस्थित रहे।1
- अटरिया गांव में रास्ते को लेकर विवाद, लाइसेंसी बंदूक से फायरिंग कालपी। थाना आटा क्षेत्र के ग्राम अटरिया में रास्ते से निकलने को लेकर दो पक्षों के बीच विवाद हो गया। पुलिस के अनुसार पहले दोनों पक्षों में कहासुनी हुई, जिसके बाद मारपीट हो गई। विवाद के दौरान शैलेन्द्र निरंजन द्वारा अपनी लाइसेंसी बंदूक से दो फायर किए जाने की सूचना है। घटना की जानकारी मिलते ही थाना आटा पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को संभाला। पुलिस ने दोनों पक्षों से तहरीर प्राप्त कर अभियोग पंजीकृत करने की कार्रवाई शुरू कर दी है। आरोपियों की तलाश की जा रही है। पुलिस के मुताबिक मौके पर शांति व्यवस्था कायम है और मामले में अन्य वैधानिक कार्रवाई जारी है। मामले को लेकर क्षेत्राधिकारी कालपी द्वारा जानकारी दी गई है।1
- जालौन ; छेड़खानी का विरोध करना पडा। पिता को भारी । जालौन ; छेड़खानी का विरोध करना पिता को पड़ा भारी ➡️दबंगों ने व्यक्ति को लाठी और डंडों से पीटा ➡️मारपीट की घटना का वीडियो हुआ वायरल ➡️कालपी के मैनूपुर गांव का पूरा मामला ।1