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जरी खरका से द्वितीय कावड अमरौधा कालेश्वर धाम हर हर महादेव सभी लोगों

1 hr ago
user_Shiva Babu
Shiva Babu
Farmer भोगनीपुर, कानपुर देहात, उत्तर प्रदेश•
1 hr ago

जरी खरका से द्वितीय कावड अमरौधा कालेश्वर धाम हर हर महादेव सभी लोगों

More news from उत्तर प्रदेश and nearby areas
  • जरी खरका से द्वितीय कावड अमरौधा कालेश्वर धाम हर हर महादेव सभी लोगों
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    जरी खरका से द्वितीय कावड अमरौधा कालेश्वर धाम
हर हर महादेव सभी लोगों
    user_Shiva Babu
    Shiva Babu
    Farmer भोगनीपुर, कानपुर देहात, उत्तर प्रदेश•
    1 hr ago
  • निवाड़ी गांव में आवासीय पट्टों को लेकर डीएम से शिकायत, ग्राम प्रधान व लेखपाल की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल आवासीय पट्टों पर बड़ा सवाल! पात्रों को दरकिनार कर अपात्रों को पट्टा देने का आरोप कालपी/जालौन ग्राम पंचायत बरदौली परगना कालपी के मजरा निवाड़ी में आवासीय पट्टों के आवंटन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्राम निवासी रामसिंह पुत्र स्व. श्यामलाल ने जिलाधिकारी को शिकायती पत्र देकर आरोप लगाया है कि गांव में गाटा संख्या 202, 141, 180 और 172/1 में किए गए आवासीय पट्टों के संबंध में न तो खुली बैठक की गई और न ही आमजन को इसकी सूचना दी गई। शिकायतकर्ता का आरोप है कि पात्र लोगों को दरकिनार कर कथित रूप से अपात्र लोगों को आवासीय पट्टे दिए गए। शिकायत में शीलादेवी पत्नी स्व. मान सिंह, रित्ता पत्नी स्व. अखिलेश, रामा पत्नी स्व. कृपाल और कुसुमकली पत्नी स्व. मोहन सिंह जैसी महिलाओं को पात्र होने के बावजूद पट्टे से वंचित किए जाने की बात कही गई है। शिकायत में ग्राम प्रधान और लेखपाल की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि ग्राम प्रधान ने अपने सगे देवर संजय पुत्र गयाप्रसाद को आवासीय पट्टा दे दिया, जबकि शिकायतकर्ता के अनुसार संजय के पास पहले से लगभग 30 बीघा कृषि भूमि और कई आवासीय मकान हैं। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि शिवकान्ती के नाम आवासीय पट्टा किए जाने के बावजूद वह संपन्न परिवार से हैं। शिकायतकर्ता के मुताबिक उनके पति संपन्न हैं, ससुर के नाम करीब 20 बीघा जमीन और तीन मकान हैं। इसी तरह गांव की लड़की आखरीन पुत्री शकील के विवाह के बाद उसके नाम भी आवासीय पट्टा किए जाने पर सवाल उठाया गया है। अब सबसे बड़ा सवाल— क्या वास्तव में आवासीय पट्टों के लिए खुली बैठक और सार्वजनिक सूचना दी गई थी? यदि दी गई थी तो उसकी कार्यवाही और प्रस्ताव कहां है? क्या पट्टा पाने वाले सभी लोग सरकारी नियमों के अनुसार पात्रता की शर्तें पूरी करते हैं? यदि किसी के पास पहले से जमीन और पक्का मकान है तो उसे आवासीय पट्टा किस आधार पर मिला? पात्र महिलाओं को कथित रूप से पट्टे से बाहर क्यों रखा गया? क्या ग्राम प्रधान और लेखपाल ने नियमों के अनुसार पूरी प्रक्रिया अपनाई? क्या राजस्व विभाग द्वारा मौके पर जाकर भौतिक सत्यापन किया गया? यदि शिकायत सही पाई जाती है तो अपात्रों को दिए गए पट्टे निरस्त होंगे या नहीं? शिकायतकर्ता ने जिलाधिकारी से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा जांच पूरी होने तक विवादित पट्टे वाली जमीन पर कब्जा किए जाने से रोकने की मांग की है। अब निगाहें जिला प्रशासन की जांच पर टिकी हैं। यदि शिकायत में लगाए गए आरोप जांच में सही साबित होते हैं तो यह मामला सिर्फ पट्टा आवंटन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पंचायत स्तर पर सरकारी जमीन के आवंटन की पूरी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करेगा। #जालौन #कालपी #निवाड़ी #बरदौली #आवासीयपट्टा #पट्टाआवंटन #डीएमजालौन #ग्रामपंचायत #ग्रामप्रधान #लेखपाल #राजस्वविभाग #सरकारीजमीन #पट्टाघोटाला #जांचकीमांग #JalaunNews #KalpiNews #BreakingNews #UPNews
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    निवाड़ी गांव में आवासीय पट्टों को लेकर डीएम से शिकायत, ग्राम प्रधान व लेखपाल की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल

आवासीय पट्टों पर बड़ा सवाल! पात्रों को दरकिनार कर अपात्रों को पट्टा देने का आरोप
कालपी/जालौन ग्राम पंचायत बरदौली परगना कालपी के मजरा निवाड़ी में आवासीय पट्टों के आवंटन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
ग्राम निवासी रामसिंह पुत्र स्व. श्यामलाल ने जिलाधिकारी को शिकायती पत्र देकर आरोप लगाया है कि गांव में गाटा संख्या 202, 141, 180 और 172/1 में किए गए आवासीय पट्टों के संबंध में न तो खुली बैठक की गई और न ही आमजन को इसकी सूचना दी गई।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि पात्र लोगों को दरकिनार कर कथित रूप से अपात्र लोगों को आवासीय पट्टे दिए गए। शिकायत में शीलादेवी पत्नी स्व. मान सिंह, रित्ता पत्नी स्व. अखिलेश, रामा पत्नी स्व. कृपाल और कुसुमकली पत्नी स्व. मोहन सिंह जैसी महिलाओं को पात्र होने के बावजूद पट्टे से वंचित किए जाने की बात कही गई है।
शिकायत में ग्राम प्रधान और लेखपाल की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। 
आरोप है कि ग्राम प्रधान ने अपने सगे देवर संजय पुत्र गयाप्रसाद को आवासीय पट्टा दे दिया, जबकि शिकायतकर्ता के अनुसार संजय के पास पहले से लगभग 30 बीघा कृषि भूमि और कई आवासीय मकान हैं।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि शिवकान्ती के नाम आवासीय पट्टा किए जाने के बावजूद वह संपन्न परिवार से हैं।
शिकायतकर्ता के मुताबिक उनके पति संपन्न हैं, ससुर के नाम करीब 20 बीघा जमीन और तीन मकान हैं। 
इसी तरह गांव की लड़की आखरीन पुत्री शकील के विवाह के बाद उसके नाम भी आवासीय पट्टा किए जाने पर सवाल उठाया गया है।
अब सबसे बड़ा सवाल—
क्या वास्तव में आवासीय पट्टों के लिए खुली बैठक और सार्वजनिक सूचना दी गई थी?
यदि दी गई थी तो उसकी कार्यवाही और प्रस्ताव कहां है?
क्या पट्टा पाने वाले सभी लोग सरकारी नियमों के अनुसार पात्रता की शर्तें पूरी करते हैं?
यदि किसी के पास पहले से जमीन और पक्का मकान है तो उसे आवासीय पट्टा किस आधार पर मिला?
पात्र महिलाओं को कथित रूप से पट्टे से बाहर क्यों रखा गया?
क्या ग्राम प्रधान और लेखपाल ने नियमों के अनुसार पूरी प्रक्रिया अपनाई?
क्या राजस्व विभाग द्वारा मौके पर जाकर भौतिक सत्यापन किया गया?
यदि शिकायत सही पाई जाती है तो अपात्रों को दिए गए पट्टे निरस्त होंगे या नहीं?
शिकायतकर्ता ने जिलाधिकारी से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा जांच पूरी होने तक विवादित पट्टे वाली जमीन पर कब्जा किए जाने से रोकने की मांग की है।
अब निगाहें जिला प्रशासन की जांच पर टिकी हैं।
यदि शिकायत में लगाए गए आरोप जांच में सही साबित होते हैं तो यह मामला सिर्फ पट्टा आवंटन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पंचायत स्तर पर सरकारी जमीन के आवंटन की पूरी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करेगा।
#जालौन #कालपी #निवाड़ी #बरदौली #आवासीयपट्टा #पट्टाआवंटन #डीएमजालौन #ग्रामपंचायत #ग्रामप्रधान #लेखपाल #राजस्वविभाग #सरकारीजमीन #पट्टाघोटाला #जांचकीमांग #JalaunNews #KalpiNews #BreakingNews #UPNews
    user_सोनू महाराज पत्रकार
    सोनू महाराज पत्रकार
    कालपी, जालौन, उत्तर प्रदेश•
    1 hr ago
  • 19.43 लाख का मरघट पूरा, अब उसी जैसी तस्वीर के साथ ₹24.50 लाख का नया काम? छिरिया सलेमपुर में सरकारी रिकॉर्ड और मौके की तस्वीर आमने-सामने, पुराने कार्य पर ₹19.43 लाख व्यय दर्ज, नए कार्य में अभी ₹0 खर्च जालौन। जालौन ब्लॉक क्षेत्र की ग्राम पंचायत छिरिया सलेमपुर में सरकारी निर्माण कार्यों से जुड़े रिकॉर्ड और मौके की स्थिति ने कई सवाल खड़े किए हैं। मेरी पंचायत पोर्टल पर दर्ज दो अलग-अलग कार्यों के रिकॉर्ड तथा दूसरे कार्य के साथ लगी जियो-टैग तस्वीर इस मामले को जांच के दायरे में लाती है। एक ओर अंत्येष्टि स्थल से जुड़े कार्य में ₹19,43,879 का व्यय दर्ज है और उसे पूर्ण दिखाया गया है। दूसरी ओर ₹24,50,000 की अनुमानित लागत वाला एक नया कार्य 28 जुलाई 2026 को दर्ज हुआ है। खास बात यह है कि इस दूसरे कार्य की फोटो में पहले से निर्मित ढांचा दिखाई देता है, जबकि रिकॉर्ड में कार्य New/Fresh और Onset of work दर्ज है। पहले ₹19.43 लाख का कार्य मेरी पंचायत के रिकॉर्ड में Work ID 125166992 के तहत कार्य दर्ज है। कार्य का विवरण है— Construction/Maintenance/Upgradation of Building Hall, Community Centre, Boundary Wall, Flooring, Doors, Window, Fixtures Etc of Community Assets रिकॉर्ड के मुताबिक— अनुमानित लागत: ₹20,00,000 दर्ज व्यय: ₹19,43,879 योजना: Antyeshti Sthalon Ka Vikas गतिविधि: New/Fresh स्थिति: Completion of work पंजीकरण: 25 मई 2025 परिसंपत्ति विवरण में Buildings, उपश्रेणी Old Aged Home और कुल इकाई 1 दर्ज है। अर्थात उपलब्ध सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार यह कार्य पूर्ण है और इसमें करीब 19.43 लाख रुपये का व्यय दर्ज किया गया है। फिर सामने आया ₹24.50 लाख का दूसरा रिकॉर्ड इसी पंचायत में Work ID 130244502 के तहत दूसरा कार्य दर्ज है। इसका कार्य विवरण भी पहले रिकॉर्ड से काफी मिलता-जुलता है— Construction/Maintenance/Upgradation of Building Hall, Community Centre, Boundary Wall, Flooring, Doors, Window, Fixtures Etc of Community Assets इस रिकॉर्ड में— अनुमानित लागत: ₹24,50,000 व्यय: ₹0 पंजीकरण: 28 जुलाई 2026 स्थिति: Onset of work गतिविधि: New/Fresh योजना: Viksit Bharat–Guarantee for Rozgar and Ajeevika Mission... परिसंपत्ति: Buildings उपश्रेणी: Sheds कुल इकाई: 1 दर्ज है। यानी एक कार्य में ₹19.43 लाख खर्च दर्ज है, जबकि दूसरे में ₹24.50 लाख की अनुमानित लागत दिखाई जा रही है और फिलहाल व्यय शून्य है। नए काम की फोटो ने बढ़ाया सवाल मामले का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा दूसरे Work ID की फोटो है। फोटो रिकॉर्ड में 28 जुलाई 2026 की जियो-टैग तस्वीर दिखाई देती है। तस्वीर में एक पहले से बना हुआ पक्का ढांचा/शेड नजर आ रहा है। फोटो पर तारीख और लोकेशन की जानकारी भी दिखाई देती है। यहां सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि पोर्टल पर इसी कार्य को New/Fresh और Onset of work बताया गया है। क्या पहले से मौजूद ढांचा ही नए कार्य की तस्वीर है? यह बात अभी जांच का विषय है और उपलब्ध रिकॉर्ड से इसका अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। अगर ₹24.50 लाख वाला कार्य किसी अलग शेड या अलग परिसंपत्ति के लिए है, तो उसकी वास्तविक लोकेशन और प्रस्तावित निर्माण स्पष्ट होना चाहिए। वहीं यदि जांच में यह पाया जाता है कि फोटो में दिखाई दे रहा ढांचा उसी पुराने निर्माण से संबंधित है, जिस पर पहले ही करीब ₹19.43 लाख का व्यय दर्ज है, तो फिर नए कार्य को New/Fresh दर्ज किए जाने के आधार की जांच जरूरी होगी। ₹24.50 लाख खर्च होने की बात नहीं यह तथ्य स्पष्ट करना जरूरी है कि दूसरे कार्य में पोर्टल पर फिलहाल ₹0 व्यय दर्ज है। इसलिए उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर यह दावा नहीं किया जा सकता कि ₹24.50 लाख खर्च या भुगतान हो चुके हैं। मामला फिलहाल ₹24.50 लाख की अनुमानित लागत वाले दर्ज कार्य, उसकी स्थिति और उससे जुड़ी तस्वीर को लेकर उठ रहे सवालों का है। पुराने निर्माण की स्थिति पर भी सवाल मौके की पड़ताल में निर्माण के कुछ हिस्सों में दरारें दिखाई देने की बात सामने आई है। यदि यह वही निर्माण है, जिस पर ₹19.43 लाख का व्यय दर्ज है, तो इसकी तकनीकी स्थिति की जांच भी महत्वपूर्ण होगी। क्या कार्य की एमबी तैयार हुई? क्या तकनीकी जांच हुई? क्या पूर्णता प्रमाणपत्र जारी हुआ? क्या भुगतान से पहले गुणवत्ता का सत्यापन किया गया? इन सवालों का जवाब संबंधित अभिलेख और विभागीय जांच ही दे सकती है। अब दोनों रिकॉर्ड का मिलान जरूरी मामले की स्थिति स्पष्ट करने के लिए Work ID 125166992 और Work ID 130244502 की— लोकेशन जियो-टैग फोटो एस्टीमेट तकनीकी स्वीकृति एमबी पूर्णता प्रमाणपत्र भुगतान अभिलेख का मिलान कराया जाना चाहिए। यदि दोनों अलग-अलग कार्य और परिसंपत्तियां हैं तो रिकॉर्ड की स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। लेकिन यदि जांच में दोनों एक ही स्थल या निर्माण से जुड़े पाए जाते हैं, तो फिर यह जानना जरूरी होगा कि अलग कार्य के रूप में रिकॉर्ड तैयार करने का आधार क्या था। सवाल गंभीर हैं, निष्कर्ष जांच के बाद इस मामले में उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर किसी व्यक्ति या संस्था पर सीधे आरोप लगाना उचित नहीं होगा। लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज जानकारी और मौके पर दिखाई दे रही स्थिति के बीच उठ रहे सवालों की निष्पक्ष जांच जरूरी है। एक तरफ ₹19,43,879 व्यय वाला कार्य पूर्ण दर्ज है। दूसरी तरफ ₹24,50,000 अनुमानित लागत वाला कार्य New/Fresh और Onset of work के रूप में दर्ज है। और इसी दूसरे कार्य के साथ पहले से निर्मित ढांचा दिखाई देने वाली तस्वीर मौजूद है। अब असली सवाल— जब पुराने कार्य का रिकॉर्ड पूर्ण है, तो ₹24.50 लाख का नया कार्य किस परिसंपत्ति के लिए दर्ज किया गया? और यदि दोनों कार्य अलग हैं तो उनकी अलग-अलग लोकेशन और स्वीकृत कार्य का विवरण सार्वजनिक रिकॉर्ड से स्पष्ट क्यों न किया जाए? फिलहाल नए कार्य में ₹0 व्यय दर्ज है। ऐसे में किसी भुगतान पर निष्कर्ष निकालने के बजाय भुगतान से पहले रिकॉर्ड, स्थल और तकनीकी दस्तावेजों का सत्यापन सबसे जरूरी कदम होगा। जांच के बाद ही साफ होगा कि मामला रिकॉर्ड की सामान्य प्रक्रिया/त्रुटि है, अलग-अलग कार्यों का है या फिर किसी अनियमितता की स्थिति सामने आती है। फिलहाल दस्तावेज सवाल पूछ रहे हैं और जवाब जांच से सामने आना बाकी है।
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    19.43 लाख का मरघट पूरा, अब उसी जैसी तस्वीर के साथ ₹24.50 लाख का नया काम?

छिरिया सलेमपुर में सरकारी रिकॉर्ड और मौके की तस्वीर आमने-सामने, पुराने कार्य पर ₹19.43 लाख व्यय दर्ज, नए कार्य में अभी ₹0 खर्च
जालौन। जालौन ब्लॉक क्षेत्र की ग्राम पंचायत छिरिया सलेमपुर में सरकारी निर्माण कार्यों से जुड़े रिकॉर्ड और मौके की स्थिति ने कई सवाल खड़े किए हैं। मेरी पंचायत पोर्टल पर दर्ज दो अलग-अलग कार्यों के रिकॉर्ड तथा दूसरे कार्य के साथ लगी जियो-टैग तस्वीर इस मामले को जांच के दायरे में लाती है।
एक ओर अंत्येष्टि स्थल से जुड़े कार्य में ₹19,43,879 का व्यय दर्ज है और उसे पूर्ण दिखाया गया है। दूसरी ओर ₹24,50,000 की अनुमानित लागत वाला एक नया कार्य 28 जुलाई 2026 को दर्ज हुआ है। खास बात यह है कि इस दूसरे कार्य की फोटो में पहले से निर्मित ढांचा दिखाई देता है, जबकि रिकॉर्ड में कार्य New/Fresh और Onset of work दर्ज है।
पहले ₹19.43 लाख का कार्य
मेरी पंचायत के रिकॉर्ड में Work ID 125166992 के तहत कार्य दर्ज है।
कार्य का विवरण है—
Construction/Maintenance/Upgradation of Building Hall, Community Centre, Boundary Wall, Flooring, Doors, Window, Fixtures Etc of Community Assets
रिकॉर्ड के मुताबिक—
अनुमानित लागत: ₹20,00,000
दर्ज व्यय: ₹19,43,879
योजना: Antyeshti Sthalon Ka Vikas
गतिविधि: New/Fresh
स्थिति: Completion of work
पंजीकरण: 25 मई 2025
परिसंपत्ति विवरण में Buildings, उपश्रेणी Old Aged Home और कुल इकाई 1 दर्ज है।
अर्थात उपलब्ध सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार यह कार्य पूर्ण है और इसमें करीब 19.43 लाख रुपये का व्यय दर्ज किया गया है।
फिर सामने आया ₹24.50 लाख का दूसरा रिकॉर्ड
इसी पंचायत में Work ID 130244502 के तहत दूसरा कार्य दर्ज है। इसका कार्य विवरण भी पहले रिकॉर्ड से काफी मिलता-जुलता है—
Construction/Maintenance/Upgradation of Building Hall, Community Centre, Boundary Wall, Flooring, Doors, Window, Fixtures Etc of Community Assets
इस रिकॉर्ड में—
अनुमानित लागत: ₹24,50,000
व्यय: ₹0
पंजीकरण: 28 जुलाई 2026
स्थिति: Onset of work
गतिविधि: New/Fresh
योजना: Viksit Bharat–Guarantee for Rozgar and Ajeevika Mission...
परिसंपत्ति: Buildings
उपश्रेणी: Sheds
कुल इकाई: 1
दर्ज है।
यानी एक कार्य में ₹19.43 लाख खर्च दर्ज है, जबकि दूसरे में ₹24.50 लाख की अनुमानित लागत दिखाई जा रही है और फिलहाल व्यय शून्य है।
नए काम की फोटो ने बढ़ाया सवाल
मामले का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा दूसरे Work ID की फोटो है।
फोटो रिकॉर्ड में 28 जुलाई 2026 की जियो-टैग तस्वीर दिखाई देती है। तस्वीर में एक पहले से बना हुआ पक्का ढांचा/शेड नजर आ रहा है। फोटो पर तारीख और लोकेशन की जानकारी भी दिखाई देती है।
यहां सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि पोर्टल पर इसी कार्य को New/Fresh और Onset of work बताया गया है।
क्या पहले से मौजूद ढांचा ही नए कार्य की तस्वीर है?
यह बात अभी जांच का विषय है और उपलब्ध रिकॉर्ड से इसका अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
अगर ₹24.50 लाख वाला कार्य किसी अलग शेड या अलग परिसंपत्ति के लिए है, तो उसकी वास्तविक लोकेशन और प्रस्तावित निर्माण स्पष्ट होना चाहिए।
वहीं यदि जांच में यह पाया जाता है कि फोटो में दिखाई दे रहा ढांचा उसी पुराने निर्माण से संबंधित है, जिस पर पहले ही करीब ₹19.43 लाख का व्यय दर्ज है, तो फिर नए कार्य को New/Fresh दर्ज किए जाने के आधार की जांच जरूरी होगी।
₹24.50 लाख खर्च होने की बात नहीं
यह तथ्य स्पष्ट करना जरूरी है कि दूसरे कार्य में पोर्टल पर फिलहाल ₹0 व्यय दर्ज है।
इसलिए उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर यह दावा नहीं किया जा सकता कि ₹24.50 लाख खर्च या भुगतान हो चुके हैं।
मामला फिलहाल ₹24.50 लाख की अनुमानित लागत वाले दर्ज कार्य, उसकी स्थिति और उससे जुड़ी तस्वीर को लेकर उठ रहे सवालों का है।
पुराने निर्माण की स्थिति पर भी सवाल
मौके की पड़ताल में निर्माण के कुछ हिस्सों में दरारें दिखाई देने की बात सामने आई है।
यदि यह वही निर्माण है, जिस पर ₹19.43 लाख का व्यय दर्ज है, तो इसकी तकनीकी स्थिति की जांच भी महत्वपूर्ण होगी।
क्या कार्य की एमबी तैयार हुई?
क्या तकनीकी जांच हुई?
क्या पूर्णता प्रमाणपत्र जारी हुआ?
क्या भुगतान से पहले गुणवत्ता का सत्यापन किया गया?
इन सवालों का जवाब संबंधित अभिलेख और विभागीय जांच ही दे सकती है।
अब दोनों रिकॉर्ड का मिलान जरूरी
मामले की स्थिति स्पष्ट करने के लिए Work ID 125166992 और Work ID 130244502 की—
लोकेशन
जियो-टैग फोटो
एस्टीमेट
तकनीकी स्वीकृति
एमबी
पूर्णता प्रमाणपत्र
भुगतान अभिलेख
का मिलान कराया जाना चाहिए।
यदि दोनों अलग-अलग कार्य और परिसंपत्तियां हैं तो रिकॉर्ड की स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। लेकिन यदि जांच में दोनों एक ही स्थल या निर्माण से जुड़े पाए जाते हैं, तो फिर यह जानना जरूरी होगा कि अलग कार्य के रूप में रिकॉर्ड तैयार करने का आधार क्या था।
सवाल गंभीर हैं, निष्कर्ष जांच के बाद
इस मामले में उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर किसी व्यक्ति या संस्था पर सीधे आरोप लगाना उचित नहीं होगा। लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज जानकारी और मौके पर दिखाई दे रही स्थिति के बीच उठ रहे सवालों की निष्पक्ष जांच जरूरी है।
एक तरफ ₹19,43,879 व्यय वाला कार्य पूर्ण दर्ज है। दूसरी तरफ ₹24,50,000 अनुमानित लागत वाला कार्य New/Fresh और Onset of work के रूप में दर्ज है। और इसी दूसरे कार्य के साथ पहले से निर्मित ढांचा दिखाई देने वाली तस्वीर मौजूद है।
अब असली सवाल—
जब पुराने कार्य का रिकॉर्ड पूर्ण है, तो ₹24.50 लाख का नया कार्य किस परिसंपत्ति के लिए दर्ज किया गया?
और यदि दोनों कार्य अलग हैं तो उनकी अलग-अलग लोकेशन और स्वीकृत कार्य का विवरण सार्वजनिक रिकॉर्ड से स्पष्ट क्यों न किया जाए?
फिलहाल नए कार्य में ₹0 व्यय दर्ज है। ऐसे में किसी भुगतान पर निष्कर्ष निकालने के बजाय भुगतान से पहले रिकॉर्ड, स्थल और तकनीकी दस्तावेजों का सत्यापन सबसे जरूरी कदम होगा।
जांच के बाद ही साफ होगा कि मामला रिकॉर्ड की सामान्य प्रक्रिया/त्रुटि है, अलग-अलग कार्यों का है या फिर किसी अनियमितता की स्थिति सामने आती है। फिलहाल दस्तावेज सवाल पूछ रहे हैं और जवाब जांच से सामने आना बाकी है।
    user_पत्रकार विकाश सिंह
    पत्रकार विकाश सिंह
    कालपी, जालौन, उत्तर प्रदेश•
    1 hr ago
  • नालियां न होने से हारामऊ गांव में जलभराव, कीचड़ से होकर स्कूल जाने को मजबूर नौनिहाल बदहाल रास्तों और जलभराव से ग्रामीण परेशान, विकास कार्यों को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी नालियां न होने से हारामऊ गांव में जलभराव, कीचड़ से होकर स्कूल जाने को मजबूर नौनिहाल बदहाल रास्तों और जलभराव से ग्रामीण परेशान, विकास कार्यों को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी विकासखंड डेरापुर की ग्राम पंचायत हारामऊ में जल निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने से ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। गांव में नालियां नहीं होने के कारण घरों और रास्तों का पानी सड़कों पर जमा हो रहा है। बारिश के बाद कई रास्तों पर जलभराव के साथ कीचड़ की स्थिति बन जाती है, जिससे ग्रामीणों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मंगलवार सुबह करीब 10 बजे ग्रामीणों ने गांव की समस्या को लेकर अपनी परेशानी बताई। ग्रामीणों के अनुसार, गांव की कई सड़कें लंबे समय से जर्जर हालत में हैं। जगह-जगह वर्षों पुराने ईंटों के खड़ंजे पड़े हैं, जो बारिश के बाद कीचड़ और फिसलन के कारण राहगीरों के लिए परेशानी का सबब बन जाते हैं। सबसे ज्यादा परेशानी स्कूली बच्चों को उठानी पड़ रही है। बच्चों को रोजाना कीचड़ और जलभराव से होकर स्कूल आने-जाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। अभिभावकों का कहना है कि खराब रास्तों के कारण बच्चों के कपड़े गंदे होने के साथ-साथ उनके फिसलकर चोटिल होने का खतरा भी बना रहता है। ग्रामीणों का कहना है कि रास्तों पर कुछ स्थानों पर जानवर बांध दिए जाने से भी आवागमन प्रभावित होता है। इससे पहले से खराब रास्तों पर लोगों को निकलने में और अधिक परेशानी होती है। ग्रामीणों ने ग्राम प्रधान पर गांव में अपेक्षित विकास कार्य नहीं कराए जाने का आरोप लगाते हुए नाराजगी जताई है। ग्रामीणों का कहना है कि जल निकासी और जर्जर रास्तों की समस्या लंबे समय से बनी हुई है, लेकिन अभी तक इसका स्थायी समाधान नहीं हो सका है। कीमती देवी, वीरू, लवकुश, वेदपाल सिंह, सतपाल, राजू, सुरेश सिंह समेत अन्य ग्रामीणों ने संबंधित अधिकारियों से गांव का स्थलीय निरीक्षण कराकर पक्की सड़कों का निर्माण, जल निकासी के लिए नालियों का निर्माण तथा जर्जर रास्तों की मरम्मत कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में सड़क और नाली जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध होने से ही जलभराव और कीचड़ की समस्या से स्थायी राहत मिल सकेगी। ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द कार्रवाई की उम्मीद जताई है।
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    नालियां न होने से हारामऊ गांव में जलभराव, कीचड़ से होकर स्कूल जाने को मजबूर नौनिहाल
बदहाल रास्तों और जलभराव से ग्रामीण परेशान, विकास कार्यों को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी
नालियां न होने से हारामऊ गांव में जलभराव, कीचड़ से होकर स्कूल जाने को मजबूर नौनिहाल
बदहाल रास्तों और जलभराव से ग्रामीण परेशान, विकास कार्यों को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी
विकासखंड डेरापुर की ग्राम पंचायत हारामऊ में जल निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने से ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। गांव में नालियां नहीं होने के कारण घरों और रास्तों का पानी सड़कों पर जमा हो रहा है। बारिश के बाद कई रास्तों पर जलभराव के साथ कीचड़ की स्थिति बन जाती है, जिससे ग्रामीणों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
मंगलवार सुबह करीब 10 बजे ग्रामीणों ने गांव की समस्या को लेकर अपनी परेशानी बताई। ग्रामीणों के अनुसार, गांव की कई सड़कें लंबे समय से जर्जर हालत में हैं। जगह-जगह वर्षों पुराने ईंटों के खड़ंजे पड़े हैं, जो बारिश के बाद कीचड़ और फिसलन के कारण राहगीरों के लिए परेशानी का सबब बन जाते हैं।
सबसे ज्यादा परेशानी स्कूली बच्चों को उठानी पड़ रही है। बच्चों को रोजाना कीचड़ और जलभराव से होकर स्कूल आने-जाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। अभिभावकों का कहना है कि खराब रास्तों के कारण बच्चों के कपड़े गंदे होने के साथ-साथ उनके फिसलकर चोटिल होने का खतरा भी बना रहता है।
ग्रामीणों का कहना है कि रास्तों पर कुछ स्थानों पर जानवर बांध दिए जाने से भी आवागमन प्रभावित होता है। इससे पहले से खराब रास्तों पर लोगों को निकलने में और अधिक परेशानी होती है।
ग्रामीणों ने ग्राम प्रधान पर गांव में अपेक्षित विकास कार्य नहीं कराए जाने का आरोप लगाते हुए नाराजगी जताई है। ग्रामीणों का कहना है कि जल निकासी और जर्जर रास्तों की समस्या लंबे समय से बनी हुई है, लेकिन अभी तक इसका स्थायी समाधान नहीं हो सका है।
कीमती देवी, वीरू, लवकुश, वेदपाल सिंह, सतपाल, राजू, सुरेश सिंह समेत अन्य ग्रामीणों ने संबंधित अधिकारियों से गांव का स्थलीय निरीक्षण कराकर पक्की सड़कों का निर्माण, जल निकासी के लिए नालियों का निर्माण तथा जर्जर रास्तों की मरम्मत कराने की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि गांव में सड़क और नाली जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध होने से ही जलभराव और कीचड़ की समस्या से स्थायी राहत मिल सकेगी। ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द कार्रवाई की उम्मीद जताई है।
    user_भानु प्रताप सिंह कानपुर देहात
    भानु प्रताप सिंह कानपुर देहात
    संवाददाता कानपुर देहात सिकंदरा, कानपुर देहात, उत्तर प्रदेश•
    1 hr ago
  • कुबेर टीला के शिव मंदिर में पूजन-अर्चन, दर्शन को उमड़े रामभक्त । श्रावण मास के दूसरे सोमवार को श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। कुबेर टीला स्थित शिवलिंग और मुख्य मंदिर के ईशान कोण में स्थित शिव मंदिर में भव्य श्रृंगार कर विधि-विधान से पूजन-अर्चन किया गया। सुबह से ही अयोध्या नगरी ‘जय श्रीराम’ और ‘बम-बम भोले’ के जयकारों से गूंजती रही। सरयू तट पर स्नान के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही। कांवड़ियों ने भी माहौल को भक्तिमय बना दिया। सरयू तट से नागेश्वरनाथ मंदिर होते हुए राम जन्मभूमि परिसर की ओर श्रद्धालुओं का निरंतर प्रवाह बना रहा। श्रद्धालुओं की संभावित भीड़ को देखते हुए मंदिर परिसर में सुरक्षा और दर्शन की पर्याप्त व्यवस्थाएं की गई थीं। राम मंदिर को आकर्षक ढंग से सजाया गया। परिसर के दोनों शिवलिंगों के साथ नंदी महाराज और कच्छप का भी विशेष श्रृंगार किया गया। पूरे दिन मंदिर परिसर श्रद्धालुओं से भरा रहा।
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    कुबेर टीला के शिव मंदिर में पूजन-अर्चन, दर्शन को उमड़े रामभक्त
। श्रावण मास के दूसरे सोमवार को श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। कुबेर टीला स्थित शिवलिंग और मुख्य मंदिर के ईशान कोण में स्थित शिव मंदिर में भव्य श्रृंगार कर विधि-विधान से पूजन-अर्चन किया गया।
सुबह से ही अयोध्या नगरी ‘जय श्रीराम’ और ‘बम-बम भोले’ के जयकारों से गूंजती रही। सरयू तट पर स्नान के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही। कांवड़ियों ने भी माहौल को भक्तिमय बना दिया। सरयू तट से नागेश्वरनाथ मंदिर होते हुए राम जन्मभूमि परिसर की ओर श्रद्धालुओं का निरंतर प्रवाह बना रहा।
श्रद्धालुओं की संभावित भीड़ को देखते हुए मंदिर परिसर में सुरक्षा और दर्शन की पर्याप्त व्यवस्थाएं की गई थीं। राम मंदिर को आकर्षक ढंग से सजाया गया। परिसर के दोनों शिवलिंगों के साथ नंदी महाराज और कच्छप का भी विशेष श्रृंगार किया गया। पूरे दिन मंदिर परिसर श्रद्धालुओं से भरा रहा।
    user_कुमार पंकज
    कुमार पंकज
    Journalist डेरापुर, कानपुर देहात, उत्तर प्रदेश•
    4 hrs ago
  • सरवन खेड़ा ब्लॉक क्षेत्र में ग्रामीणों में लहराया हर घर तिरंगा। सरवन खेड़ा ब्लॉक क्षेत्र में हर घर तिरंगे को लेकर दिखाई ग्रामीणों ने सशक्त देश प्रेम। शासन के निर्देश क्रम में आयोजित हर घर तिरंगा अभियान, खंड विकास अधिकारी सरवन खेड़ा के निर्देश अनुसार सहायक विकास अधिकारी( ग्राम विकास अधिकारी) विमल सचान के नेतृत्व में हर घर तिरंगे को लेकर आयोजित कार्यक्रम अंतर्गत प्राथमिक विद्यालय लोदीपुर में वंदे मातरम का गायन किया गया।इसके पश्चात ग्राम पंचायत लोदीपुर की गलियों में तिरंगे की रैली निकाली गई।आयोजित कार्यक्रम में शामिल रहे।अधिकारी गण ग्राम विकास अधिकारी अनिल यादव, संतोष पाल, प्रधान प्रतिनिधि दीपक, रोजगार सेवक संदीप बाबू, पंचायत सहायक दीपमाला, प्राथमिक विद्यालय की प्रधानाध्यापिका,आरती खरे, एवं केयरटेकर बेबी, सूबेदार, अजय, सतीश कुमार, रानी देवी (आशा बहू) नरपत कुमार आदि प्राथमिक विद्यालय के बच्चे सहित सैकड़ो ग्रामीण रहे।सम्मिलित।
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    सरवन खेड़ा ब्लॉक क्षेत्र में ग्रामीणों में लहराया हर घर तिरंगा।
सरवन खेड़ा ब्लॉक क्षेत्र में हर घर तिरंगे को लेकर दिखाई ग्रामीणों ने सशक्त देश प्रेम।
शासन के निर्देश क्रम में आयोजित हर घर तिरंगा अभियान, खंड विकास अधिकारी सरवन खेड़ा के निर्देश अनुसार सहायक विकास अधिकारी( ग्राम विकास अधिकारी) विमल सचान के नेतृत्व में हर घर तिरंगे को लेकर आयोजित कार्यक्रम अंतर्गत प्राथमिक विद्यालय लोदीपुर में वंदे मातरम का गायन किया गया।इसके पश्चात ग्राम पंचायत लोदीपुर की गलियों में तिरंगे की रैली निकाली गई।आयोजित कार्यक्रम में शामिल रहे।अधिकारी गण ग्राम विकास अधिकारी अनिल यादव, संतोष पाल, प्रधान प्रतिनिधि दीपक, रोजगार सेवक संदीप बाबू, पंचायत सहायक दीपमाला, प्राथमिक विद्यालय की प्रधानाध्यापिका,आरती खरे, एवं केयरटेकर बेबी, सूबेदार, अजय, सतीश कुमार, रानी देवी (आशा बहू) नरपत कुमार आदि प्राथमिक विद्यालय के बच्चे सहित सैकड़ो ग्रामीण रहे।सम्मिलित।
    user_वेद प्रकाश  पत्रकार
    वेद प्रकाश पत्रकार
    Political party office अकबरपुर, कानपुर देहात, उत्तर प्रदेश•
    14 hrs ago
  • अटरिया गांव में रास्ते को लेकर विवाद, लाइसेंसी बंदूक से फायरिंग कालपी। थाना आटा क्षेत्र के ग्राम अटरिया में रास्ते से निकलने को लेकर दो पक्षों के बीच विवाद हो गया। पुलिस के अनुसार पहले दोनों पक्षों में कहासुनी हुई, जिसके बाद मारपीट हो गई। विवाद के दौरान शैलेन्द्र निरंजन द्वारा अपनी लाइसेंसी बंदूक से दो फायर किए जाने की सूचना है। घटना की जानकारी मिलते ही थाना आटा पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को संभाला। पुलिस ने दोनों पक्षों से तहरीर प्राप्त कर अभियोग पंजीकृत करने की कार्रवाई शुरू कर दी है। आरोपियों की तलाश की जा रही है। पुलिस के मुताबिक मौके पर शांति व्यवस्था कायम है और मामले में अन्य वैधानिक कार्रवाई जारी है। मामले को लेकर क्षेत्राधिकारी कालपी द्वारा जानकारी दी गई है।
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    अटरिया गांव में रास्ते को लेकर विवाद, लाइसेंसी बंदूक से फायरिंग
कालपी। थाना आटा क्षेत्र के ग्राम अटरिया में रास्ते से निकलने को लेकर दो पक्षों के बीच विवाद हो गया। पुलिस के अनुसार पहले दोनों पक्षों में कहासुनी हुई, जिसके बाद मारपीट हो गई।
विवाद के दौरान शैलेन्द्र निरंजन द्वारा अपनी लाइसेंसी बंदूक से दो फायर किए जाने की सूचना है। घटना की जानकारी मिलते ही थाना आटा पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को संभाला।
पुलिस ने दोनों पक्षों से तहरीर प्राप्त कर अभियोग पंजीकृत करने की कार्रवाई शुरू कर दी है। आरोपियों की तलाश की जा रही है। पुलिस के मुताबिक मौके पर शांति व्यवस्था कायम है और मामले में अन्य वैधानिक कार्रवाई जारी है।
मामले को लेकर क्षेत्राधिकारी कालपी द्वारा जानकारी दी गई है।
    user_पत्रकार विकाश सिंह
    पत्रकार विकाश सिंह
    कालपी, जालौन, उत्तर प्रदेश•
    3 hrs ago
  • जालौन ; छेड़खानी का विरोध करना पडा। पिता को भारी । जालौन ; छेड़खानी का विरोध करना पिता को पड़ा भारी ➡️दबंगों ने व्यक्ति को लाठी और डंडों से पीटा ➡️मारपीट की घटना का वीडियो हुआ वायरल ➡️कालपी के मैनूपुर गांव का पूरा मामला ।
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    जालौन ; 
छेड़खानी  का  विरोध  करना  पडा। 
पिता को  भारी । 
जालौन ; छेड़खानी का विरोध करना पिता को पड़ा भारी
➡️दबंगों ने व्यक्ति को लाठी और डंडों से पीटा
➡️मारपीट की घटना का वीडियो हुआ वायरल
➡️कालपी के मैनूपुर गांव का पूरा मामला ।
    user_Dev Patel
    Dev Patel
    Local News Reporter कालपी, जालौन, उत्तर प्रदेश•
    13 hrs ago
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