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पहाड़ी उत्तराखंडी चैनल और रैबार news के सर्वे ने चौंकाया? उत्तराखंड राज्य के पौड़ी जिले के विकास खण्ड बीरोंखाल में पहाड़ी उत्तराखंडी और रैबार news के संयुक्त सर्वे ने चौंकाया।। आप को बताते चले कि पंचायती चुनाव को हुऐ एक वर्ष हो गया है। जिस बीरोंखाल ब्लॉक की ग्राम पंचायतों में एक वर्ष में हुऐ विकास कार्यों पर सर्वे किया गया। सर्वे के आधार पर बीरोंखाल ब्लॉक की ग्राम पंचायत नौगांव विकास कार्यों के मामलों में प्रथम रही।। जब कि बीरोंखाल बिलोक की ग्राम पंचायत गढ़कोट विकास कार्यों के मामलों में सबसे पीछे रही।।
रैबार news
पहाड़ी उत्तराखंडी चैनल और रैबार news के सर्वे ने चौंकाया? उत्तराखंड राज्य के पौड़ी जिले के विकास खण्ड बीरोंखाल में पहाड़ी उत्तराखंडी और रैबार news के संयुक्त सर्वे ने चौंकाया।। आप को बताते चले कि पंचायती चुनाव को हुऐ एक वर्ष हो गया है। जिस बीरोंखाल ब्लॉक की ग्राम पंचायतों में एक वर्ष में हुऐ विकास कार्यों पर सर्वे किया गया। सर्वे के आधार पर बीरोंखाल ब्लॉक की ग्राम पंचायत नौगांव विकास कार्यों के मामलों में प्रथम रही।। जब कि बीरोंखाल बिलोक की ग्राम पंचायत गढ़कोट विकास कार्यों के मामलों में सबसे पीछे रही।।
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- पहाड़ी उत्तराखंडी चैनल और रैबार news के सर्वे ने चौंकाया? उत्तराखंड राज्य के पौड़ी जिले के विकास खण्ड बीरोंखाल में पहाड़ी उत्तराखंडी और रैबार news के संयुक्त सर्वे ने चौंकाया।। आप को बताते चले कि पंचायती चुनाव को हुऐ एक वर्ष हो गया है। जिस बीरोंखाल ब्लॉक की ग्राम पंचायतों में एक वर्ष में हुऐ विकास कार्यों पर सर्वे किया गया। सर्वे के आधार पर बीरोंखाल ब्लॉक की ग्राम पंचायत नौगांव विकास कार्यों के मामलों में प्रथम रही।। जब कि बीरोंखाल बिलोक की ग्राम पंचायत गढ़कोट विकास कार्यों के मामलों में सबसे पीछे रही।।1
- 🏔️ पहाड़ की आवाज़, गैरसैंण का अधिकार! पहाड़ की माताओं-बहनों और युवाओं की एक ही मांग है—ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण में AIIMS की स्थापना हो। अब पहाड़ को सिर्फ आश्वासन नहीं, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ चाहिए। गैरसैंण में AIIMS बने, पहाड़ का भविष्य सुरक्षित बने! — जनसेवक युवा पवन नेगी गैरसैंण (कर्णप्रयाग विधानसभा क्षेत्र) #गैरसैंण #AIIMS #पहाड़कीआवाज़ #स्वास्थ्यअधिकार #उत्तराखंड1
- दीपावली पर्व के दृष्टिगत नैनीताल पुलिस अलर्ट, बड़ाई सुरक्षा नैनीताल:- दीपावली पर्व के दृष्टिगत नैनीताल पुलिस अलर्ट मोड पर है। सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई साथ ही चप्पे-चप्पे पर पुलिस द्वारा पैनी नजर रखी जा रही है। सभी थाना क्षेत्रों में सघन चेकिंग एवं प्रभावी गश्त जारी, रेलवे स्टेशन, बस अड्डों एवं भीड़भाड़ वाले स्थानों पर BDS टीम द्वारा भी सघन चेकिंग की जा रही है।। दीपावली पर्व के दृष्टिगत जनपद में शांति एवं कानून व्यवस्था बनाए रखने तथा आमजन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए SSP नैनीताल डॉ. मंजूनाथ टी.सी. के निर्देश पर नैनीताल पुलिस पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। जनपद के समस्त थाना क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करते हुए सघन चेकिंग एवं प्रभावी गश्त की जा रही है। इसी क्रम में पुलिस टीमों द्वारा मुख्य बाजारों, सार्वजनिक स्थलों, प्रमुख चौराहों, संवेदनशील स्थानों एवं मुख्य मार्गों पर लगातार पैदल गश्त एवं सघन चेकिंग की जा रही है। साथ ही रेलवे स्टेशन, बस अड्डों एवं अन्य भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक स्थानों पर BDS की टीमों द्वारा विशेष चेकिंग एवं सुरक्षा जांच की जा रही है, ताकि किसी भी संभावित सुरक्षा खतरे को समय रहते रोका जा सके। देर रात्रि अनावश्यक रूप से घूमने वाले व्यक्तियों एवं संदिग्ध गतिविधियों पर भी विशेष निगरानी रखी जा रही है। SSP नैनीताल द्वारा समस्त थाना एवं चौकी प्रभारियों को विशेष सतर्कता बरतने, नियमित गश्त सुनिश्चित करने तथा किसी भी संदिग्ध गतिविधि अथवा कानून व्यवस्था प्रभावित करने वाली स्थिति पर तत्काल प्रभावी कार्यवाही करने के निर्देश दिए गए हैं। नैनीताल पुलिस द्वारा बाजारों, परिवहन केंद्रों एवं भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि चोरी, आपराधिक घटनाओं एवं अन्य असामाजिक गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके और आमजन निर्भीक होकर त्योहार मना सकें। नैनीताल पुलिस की अपील- आमजन सतर्क रहें और किसी भी संदिग्ध वस्तु अथवा गतिविधि की सूचना तत्काल पुलिस को दें।3
- सरकारी संपत्तियों को निजी हाथों में सौंपने का विरोध, कांग्रेस ने किया धरना-प्रदर्शन अल्मोड़ा। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के आह्वान पर चलाए जा रहे भूमि बचाओ–धामी हटाओ अभियान के तहत कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने शुक्रवार को गांधी पार्क में धरना-प्रदर्शन कर प्रदेश सरकार के खिलाफ विरोध जताया। धरने का नेतृत्व अल्मोड़ा विधायक मनोज तिवारी और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविन्द सिंह कुंजवाल ने किया। धरने के दौरान कांग्रेस नेताओं ने अल्मोड़ा नगर स्थित लोक निर्माण विभाग के गेस्ट हाउस और ऐतिहासिक एवं पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण कटारमल स्थित गेस्ट हाउस को बेचने की कथित तैयारी पर कड़ा विरोध जताया। विधायक मनोज तिवारी ने कहा कि अल्मोड़ा की सरकारी संपत्तियां जनता की धरोहर हैं और उनका निर्माण जनसुविधा तथा सार्वजनिक उपयोग के लिए किया गया है। सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि किन परिस्थितियों में इन सरकारी परिसंपत्तियों को बेचने की तैयारी की जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकारी संपत्तियों को बेचने के बजाय उनका बेहतर रखरखाव कर जनहित में उपयोग सुनिश्चित किया जाना चाहिए। जनता की संपत्तियों को निजी हाथों में सौंपने के किसी भी प्रयास का कांग्रेस विरोध करेगी। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविन्द सिंह कुंजवाल ने कहा कि उत्तराखंड राज्य का निर्माण जल, जंगल, जमीन और संसाधनों की रक्षा के संकल्प के साथ हुआ था। आज सरकारी संपत्तियों और भूमि को लेकर सामने आ रहे निर्णय गंभीर सवाल खड़े करते हैं। उन्होंने कहा कि अल्मोड़ा शहर और कटारमल के गेस्ट हाउस केवल भवन नहीं हैं, बल्कि इनका ऐतिहासिक, प्रशासनिक और पर्यटन की दृष्टि से भी महत्व है। सरकार को इन संपत्तियों के भविष्य को लेकर जनता के सामने पूरी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। वक्ताओं ने कहा कि पार्टी प्रदेश के प्राकृतिक संसाधनों, सरकारी भूमि और सार्वजनिक संपत्तियों की रक्षा के लिए लगातार संघर्ष करती रहेगी। उन्होंने मांग की कि अल्मोड़ा नगर और कटारमल के दोनों गेस्ट हाउसों को बेचने संबंधी किसी भी प्रस्ताव पर तत्काल रोक लगाई जाए और सरकार इस मामले में अपनी स्थिति सार्वजनिक करे। धरने की अध्यक्षता कांग्रेस जिलाध्यक्ष भूपेंद्र सिंह भोज ने की, जबकि संचालन पीसी सदस्य पीतांबर पांडे ने किया। धरना कार्यक्रम में महानगर अध्यक्ष तारा चंद्र जोशी, राधा बिष्ट, दीवान राम, परितोष जोशी, दीप डांगी, किरन आर्य, प्रकाश चंद्र जोशी, शोभा जोशी, विनोद वैष्णव, एनडी पांडेय, आनंद बगड़वाल, बीके पांडेय, संजय दुर्गापाल, मनोज बिष्ट, अमित बिष्ट, पूरन रौतेला, पार्षद मुकेश कुमार, दीपक कुमार, वैभव पांडेय, विकास कुमार, अम्बी राम सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे।1
- केदार के दर्शन। इस वर्ष अब तक कुल 19,02,210 श्रद्धालु कर चुके हैं बाबा केदार के दर्शन। बाबा केदार के जयकारों से गूंज रहा केदारनाथ धाम, श्रद्धालुओं की संख्या जा पहुंची 19 लाख के पार। आज दिनांक 06.11.2026 को 2,893 श्रद्धालुओं ने किए बाबा केदार के दर्शन। इस वर्ष अब तक कुल 19,02,210 श्रद्धालु कर चुके हैं बाबा केदार के दर्शन। 🌺 11 नवम्बर को शीतकाल के लिए बन्द होंगे श्री केदारनाथ धाम के कपाट, कपाट बन्द होने की तैयारियां हुई शुरू। भव्य एवं आकर्षक तरीके से फूलों से सजने लगा है बाबा का धाम।1
- Gyan Dena acchi baat h lakin har baat per Gyan Dena acchi baat nhi hoti1
- जिस ग्राम पंचायत के मुख्य रास्ते पूरी तरह ध्वस्त है। उस ग्राम पंचायत के प्रधान को देखिए बीडीसी में क्या समस्याएं उठा रही है। उत्तराखंड राज्य के पौड़ी जिले के विकास खण्ड बीरोंखाल की ग्राम पंचायत का है। मामला।। जहां ग्राम पंचायत के कई उप ग्राम के मुख्य रास्ते पूरी तरह ध्वस्त है। लेकिन प्रधान साहिबा को ग्राम पंचायत के ध्वस्त पड़े मुख्य रास्ते नजर नहीं आ रहे है। बल्कि भूमि विकास की बात को बीडीसी में रख रही है। पिछले साल हुए इन प्रधान जी के कार्य काल में हुऐ भूमि विकास कार्य के पुश्ते एक माह में टूट गए थे।1
- 23 साल बाद जेनी का बड़ा खुलासा, हरक सिंह रावत पर रेप का आरोप, बोलीं- मेरे बेटे को पिता का नाम चाहिए उत्तराखंड की राजनीति में करीब 23 साल पुराने जेनी प्रकरण ने शनिवार को नया और बेहद गंभीर मोड़ ले लिया। वर्ष 2003 में तत्कालीन मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत पर यौन शोषण और अपने बच्चे का पिता होने का आरोप लगाने वाली जेनी ने शनिवार को उत्तरांचल प्रेस क्लब में पत्रकार वार्ता कर अपनी आपबीती सुनाई। उन्होंने हरक सिंह रावत पर दुष्कर्म का सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि उनका ऐसा शोषण हुआ, जैसा शायद किसी अन्य महिला के साथ नहीं हुआ होगा। उन्होंने दावा किया कि उन्हें मानसिक अस्पताल में रखा गया, जहां उनसे जबरन हस्ताक्षर कराए गए। उनके इस बयान से प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज होने के आसार हैं। जेनी ने पत्रकार वार्ता में कहा कि जिस समय उन्हें मानसिक अस्पताल में रखा गया, उस दौरान उनकी मानसिक स्थिति बेहद खराब हो चुकी थी। उन्होंने आरोप लगाया कि सीबीआइ के अधिकारी उनसे मिलने केवल एक बार अस्पताल आए थे। उस समय वह पूरी तरह मानसिक रूप से टूट चुकी थीं। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि उस समय उनकी परिस्थितियों और मानसिक स्थिति को समझने का प्रयास क्यों नहीं किया गया। हालांकि, इन आरोपों के समर्थन में प्रस्तुत दस्तावेजों और संबंधित अस्पताल के अभिलेखों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है। ‘मेरा बेटा 23 साल से बिना पिता के रह रहा, उसे नाम चाहिए’ पत्रकार वार्ता में जेनी ने अपने 23 वर्षीय बेटे का जिक्र करते हुए कहा कि वह इतने वर्षों से पिता के नाम और पहचान के बिना जीवन बिता रहा है। उन्होंने कहा कि उनके बेटे को उसका नाम मिलना चाहिए। जेनी ने बेटे का डीएनए परीक्षण कराने की मांग भी उठाई। उनका कहना था कि इतने वर्षों से उनके बच्चे की पहचान को लेकर राजनीति होती रही, लेकिन किसी ने उसके भविष्य और अधिकारों की चिंता नहीं की। उन्होंने हरक सिंह रावत पर दुष्कर्म का आरोप दोहराते हुए कहा कि उनके साथ हुए कथित शोषण के बाद उन्हें मानसिक और सामाजिक रूप से भी काफी प्रताड़ना झेलनी पड़ी। उन्होंने जबरन हस्ताक्षर कराए जाने का आरोप लगाते हुए पुराने घटनाक्रम की परिस्थितियों पर सवाल उठाए। जेनी के इन नए बयानों पर अब हरक सिंह रावत का पक्ष और उनके दावों के समर्थन में उपलब्ध साक्ष्य महत्वपूर्ण होंगे। दिसंबर 2002 में देहरादून पहुंची थीं जेनी, जून 2003 में दिया था बच्चे को जन्म जेनी प्रकरण की शुरुआत वर्ष 2002 के आखिर में हुई थी। उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, असम की रहने वाली इंदिरा देवी उर्फ जेनी दिसंबर 2002 में देहरादून पहुंची थीं। उस समय उत्तराखंड में नारायण दत्त तिवारी के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार थी और डॉ. हरक सिंह रावत राजस्व मंत्री थे। जेनी ने आरोप लगाया था कि नौकरी दिलाने का भरोसा देकर उनके साथ शारीरिक संबंध बनाए गए और बाद में उन्हें सरकारी आवास में रखा गया। 15 जून 2003 को उन्होंने देहरादून के एक सरकारी अस्पताल में बच्चे को जन्म दिया। इसके बाद उन्होंने हरक सिंह रावत को बच्चे का पिता बताते हुए यौन शोषण का आरोप लगाया। 18 जून 2003 को यह मामला विधानसभा में गूंजा। विपक्ष ने सदन में सरकार को घेरा और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई। विवाद बढ़ने के बीच हरक सिंह रावत ने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने आरोपों को राजनीतिक साजिश बताया और कहा था कि जब तक वह बेदाग साबित नहीं होते, तब तक विधानसभा में प्रवेश नहीं करेंगे। सीबीआइ ने दर्ज किया था दुष्कर्म का मुकदमा, डीएनए रिपोर्ट से बदला घटनाक्रम मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्कालीन मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी ने सीबीआइ जांच की संस्तुति की थी। सीबीआइ ने जांच के दौरान जेनी और अन्य संबंधित लोगों के बयान दर्ज किए। 25 जुलाई 2003 को जेनी के बयान के आधार पर हरक सिंह रावत के खिलाफ दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज किया गया था। जांच के दौरान बच्चे और हरक सिंह रावत के डीएनए नमूनों का परीक्षण कराया गया। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, दोनों के नमूनों का मिलान नहीं हुआ। इसके बाद बच्चे का जैविक पिता होने के आरोप में हरक सिंह रावत को क्लीन चिट मिलने की जानकारी सार्वजनिक हुई। हरक सिंह रावत ने भी इस रिपोर्ट को अपनी बेगुनाही का आधार बताया था। हालांकि, डीएनए परीक्षण का निष्कर्ष बच्चे के जैविक पितृत्व से संबंधित था। इसे जेनी के प्रत्येक दूसरे आरोप का स्वतः खंडन नहीं माना जा सकता। पितृत्व और यौन शोषण के आरोप कानूनी रूप से अलग-अलग विषय हैं। पुराने मुकदमे के अंतिम निस्तारण और सीबीआइ की क्लोजर रिपोर्ट का मूल अभिलेख देखना इस प्रकरण की पूरी कानूनी स्थिति समझने के लिए आवश्यक है। संरक्षण गृह में 12 लाख रुपये देने की पेशकश का भी आया था मामला वर्ष 2003 में ही इस प्रकरण में एक और विवाद सामने आया था। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, जेनी के संरक्षण गृह में रहने के दौरान एक कर्मचारी पर उन्हें शिकायत वापस लेने के लिए 12 लाख रुपये देने की पेशकश करने का आरोप लगा था। आरोप था कि संरक्षण गृह की एक कर्मचारी 16 अगस्त को जेनी के पास रकम और एक बिना हस्ताक्षर वाला शपथपत्र लेकर पहुंची थी। तत्कालीन प्रशासनिक जांच में संरक्षण गृह की एक रसोइया सरोज पर आरोप सही पाए जाने की जानकारी सामने आई थी। इसके बाद उसे स्थानांतरित करने और जांच रिपोर्ट सीबीआइ को भेजने का निर्णय हुआ था। हरक सिंह रावत ने उस समय इस तरह की रकम देने की पेशकश से खुद को अलग बताया था। 2016 में जेनी ने हरीश रावत पर लगाए थे उकसाने के आरोप करीब 13 साल बाद वर्ष 2016 में यह प्रकरण फिर सुर्खियों में आया। इस बार जेनी ने तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत और उनके सहयोगियों पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया था कि उन्हें हरक सिंह रावत के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने के लिए उकसाया गया था। इसके बाद मुख्यमंत्री के निजी सचिव कमल सिंह रावत की शिकायत पर देहरादून में जेनी के खिलाफ आपराधिक षड्यंत्र, झूठे साक्ष्य और रंगदारी से संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज होने की जानकारी सामने आई थी। पुलिस ने उनकी तलाश शुरू की, लेकिन उनका मोबाइल बंद मिला और दिल्ली में बताया गया पता भी सही नहीं पाया गया। उस समय पुलिस को उनकी तलाश में सफलता नहीं मिली थी। इस घटनाक्रम ने पुराने प्रकरण को एक नया राजनीतिक मोड़ दे दिया था। एक ओर हरक सिंह रावत पहले से लगे आरोपों को राजनीतिक साजिश बताते रहे, वहीं दूसरी ओर जेनी ने भी तत्कालीन सरकार के कुछ लोगों पर आरोप लगाए। अक्टूबर-नवंबर 2026 में फिर शुरू हुई राजनीतिक बयानबाजी करीब एक दशक बाद अक्टूबर 2026 में जेनी प्रकरण फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हल्द्वानी में इस पुराने मामले का उल्लेख करते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा। इसके बाद भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सदस्य महेंद्र भट्ट ने भी बच्चे के पिता की पहचान को लेकर सवाल उठाए। इस पर हरक सिंह रावत ने पलटवार करते हुए कहा कि उनका डीएनए परीक्षण पहले ही हो चुका है और जांच में वह निर्दोष साबित हुए हैं। उन्होंने महेंद्र भट्ट को भी डीएनए परीक्षण कराने की चुनौती दी। हरक सिंह रावत ने सार्वजनिक रूप से अपनी बेगुनाही दोहराते हुए कहा कि उन्होंने जेनी को कभी छुआ तक नहीं और उनके खिलाफ लगाए गए आरोप राजनीतिक साजिश का हिस्सा हैं। लगातार राजनीतिक बयानबाजी के बीच जेनी के नाम से इंटरनेट मीडिया पर एक वीडियो भी सामने आया। इसमें उन्होंने नेताओं से उनके नाम पर राजनीति बंद करने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि इतने वर्षों में किसी ने यह जानने की कोशिश नहीं की कि वर्ष 2003 में उनके साथ वास्तव में क्या हुआ था। उन्होंने अपने दस्तावेज और साक्ष्य सार्वजनिक करने की बात कही थी। इसके बाद सात नवंबर को उत्तरांचल प्रेस क्लब में पत्रकार वार्ता कर उन्होंने नए आरोप लगाए। मानसिक अस्पताल में रखे जाने, जबरन हस्ताक्षर कराने और सीबीआइ अधिकारियों के केवल एक बार मिलने आने के दावे के साथ उन्होंने अपने बेटे के लिए पिता का नाम और डीएनए परीक्षण की मांग दोहराई। अब इन सवालों के जवाब तलाशना जरूरी जेनी के नए आरोपों के बाद इस पूरे प्रकरण में कई सवाल फिर खड़े हो गए हैं। क्या उन्हें वास्तव में मानसिक अस्पताल में भर्ती कराया गया था? यदि हां, तो किस अवधि में और किन परिस्थितियों में? किन दस्तावेजों पर उनसे कथित तौर पर जबरन हस्ताक्षर कराए गए? सीबीआइ अधिकारियों ने उनसे कब और किन परिस्थितियों में पूछताछ की थी? क्या इन घटनाओं से जुड़े अस्पताल, पुलिस या जांच एजेंसी के अभिलेख उपलब्ध हैं? इसके अलावा वर्ष 2003 की सीबीआइ जांच, डीएनए रिपोर्ट और मुकदमे के अंतिम निस्तारण से संबंधित मूल दस्तावेजों का परीक्षण भी जरूरी है। जेनी द्वारा अब बेटे का दोबारा डीएनए परीक्षण कराने की मांग उठाए जाने के बाद यह भी सवाल है कि क्या वह इसके लिए विधिक प्रक्रिया अपनाएंगी। फिलहाल 23 साल पुराना यह प्रकरण एक बार फिर उत्तराखंड की राजनीति के केंद्र में आ गया है। जेनी के नए आरोपों पर हरक सिंह रावत का जवाब, पुराने सीबीआइ रिकॉर्ड और अब सामने आने वाले नए साक्ष्य आगे की स्थिति स्पष्ट करेंगे। इतना तय है कि इस मामले में केवल राजनीतिक बयानबाजी नहीं, बल्कि पुराने दस्तावेजों और नए दावों की निष्पक्ष पड़ताल भी जरूरी होगी।1