राजस्थान के करौली जिले में हिंडौन सिटी के क्यारदा कला स्थित अपना घर आश्रम के निरंतर प्रयासों और मानवीय संवेदनाओं के चलते एक बार फिर आठ महीने से बिछड़ा एक परिवार आपस में मिल गया है। आश्रम में पिछले आठ महीनों से रह रहे एक 'प्रभु जी' को कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी करने के बाद बुधवार को उनके परिजनों को सौंप दिया गया। लगभग आठ महीने पहले मानसिक रूप से अस्वस्थ और लावारिस हालत में घूम रहे इन 'प्रभु जी' को समाजसेवियों और आश्रम की रेस्क्यू टीम की मदद से लाया गया था। आगमन के समय वह अपना नाम, पता या परिजनों के बारे में कुछ भी बताने की स्थिति में नहीं थे, लेकिन संस्था के चिकित्सकों और सेवादारों की देखरेख, नियमित दवाओं, उचित पोषण और स्नेहपूर्ण व्यवहार के चलते उनकी मानसिक स्थिति में धीरे-धीरे सुधार हुआ और याददाश्त वापस आने पर उन्होंने अपने परिवार के बारे में कुछ धुंधली यादें साझा कीं। याददाश्त वापस आने के बाद आश्रम के सोशल विंग और प्रशासन ने करौली जिले के मंडरायल में संपर्क साधा, जहां स्थानीय प्रशासन और ग्रामीणों की मदद से उनके वास्तविक परिजनों की पहचान हुई। परिजनों को जैसे ही सूचना मिली, वे तुरंत अपना घर आश्रम पहुंचे। आठ महीने से लापता अपने परिजन सुरेश सैन को बिल्कुल सुरक्षित देखकर उनके बेटे लक्ष्मी नारायण सैन और अन्य परिजनों की आंखें छलक आईं। विदाई के समय आश्रम की ओर से सुरेश सैन को नए वस्त्र और जरूरी दवाइयां दी गईं। इस भावुक पल में बेटे लक्ष्मी नारायण सैन ने हाथ जोड़कर सेवादारों का आभार जताया और कहा कि आश्रम की निस्वार्थ सेवा के बिना उनके परिवार के सदस्य का वापस मिलना असंभव था। इस दौरान आश्रम के सेवादार योगेश कुमार, रिशु गुर्जर और चेतन दत्ता भी मौजूद रहे।
राजस्थान के करौली जिले में हिंडौन सिटी के क्यारदा कला स्थित अपना घर आश्रम के निरंतर प्रयासों और मानवीय संवेदनाओं के चलते एक बार फिर आठ महीने से बिछड़ा एक परिवार आपस में मिल गया है। आश्रम में पिछले आठ महीनों से रह रहे एक 'प्रभु जी' को कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी करने के बाद बुधवार को उनके परिजनों को सौंप दिया गया। लगभग आठ महीने पहले मानसिक रूप से अस्वस्थ और लावारिस हालत में घूम रहे इन 'प्रभु जी' को समाजसेवियों और आश्रम की रेस्क्यू टीम की मदद से लाया गया था। आगमन के समय वह अपना नाम, पता या परिजनों के बारे में कुछ भी बताने की स्थिति में नहीं थे, लेकिन संस्था के चिकित्सकों और सेवादारों की देखरेख, नियमित दवाओं, उचित पोषण और स्नेहपूर्ण व्यवहार के चलते उनकी मानसिक स्थिति में धीरे-धीरे सुधार हुआ और याददाश्त वापस आने पर उन्होंने अपने परिवार के बारे में कुछ धुंधली यादें साझा कीं। याददाश्त वापस आने के बाद आश्रम के सोशल विंग और प्रशासन ने करौली जिले के मंडरायल में संपर्क साधा, जहां स्थानीय प्रशासन और ग्रामीणों की मदद से उनके वास्तविक परिजनों की पहचान हुई। परिजनों को जैसे ही सूचना मिली, वे तुरंत अपना घर आश्रम पहुंचे। आठ महीने से लापता अपने परिजन सुरेश सैन को बिल्कुल सुरक्षित देखकर उनके बेटे लक्ष्मी नारायण सैन और अन्य परिजनों की आंखें छलक आईं। विदाई के समय आश्रम की ओर से सुरेश सैन को नए वस्त्र और जरूरी दवाइयां दी गईं। इस भावुक पल में बेटे लक्ष्मी नारायण सैन ने हाथ जोड़कर सेवादारों का आभार जताया और कहा कि आश्रम की निस्वार्थ सेवा के बिना उनके परिवार के सदस्य का वापस मिलना असंभव था। इस दौरान आश्रम के सेवादार योगेश कुमार, रिशु गुर्जर और चेतन दत्ता भी मौजूद रहे।
- राजस्थान के करौली जिले में हिंडौन सिटी के क्यारदा कला स्थित अपना घर आश्रम के निरंतर प्रयासों और मानवीय संवेदनाओं के चलते एक बार फिर आठ महीने से बिछड़ा एक परिवार आपस में मिल गया है। आश्रम में पिछले आठ महीनों से रह रहे एक 'प्रभु जी' को कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी करने के बाद बुधवार को उनके परिजनों को सौंप दिया गया। लगभग आठ महीने पहले मानसिक रूप से अस्वस्थ और लावारिस हालत में घूम रहे इन 'प्रभु जी' को समाजसेवियों और आश्रम की रेस्क्यू टीम की मदद से लाया गया था। आगमन के समय वह अपना नाम, पता या परिजनों के बारे में कुछ भी बताने की स्थिति में नहीं थे, लेकिन संस्था के चिकित्सकों और सेवादारों की देखरेख, नियमित दवाओं, उचित पोषण और स्नेहपूर्ण व्यवहार के चलते उनकी मानसिक स्थिति में धीरे-धीरे सुधार हुआ और याददाश्त वापस आने पर उन्होंने अपने परिवार के बारे में कुछ धुंधली यादें साझा कीं। याददाश्त वापस आने के बाद आश्रम के सोशल विंग और प्रशासन ने करौली जिले के मंडरायल में संपर्क साधा, जहां स्थानीय प्रशासन और ग्रामीणों की मदद से उनके वास्तविक परिजनों की पहचान हुई। परिजनों को जैसे ही सूचना मिली, वे तुरंत अपना घर आश्रम पहुंचे। आठ महीने से लापता अपने परिजन सुरेश सैन को बिल्कुल सुरक्षित देखकर उनके बेटे लक्ष्मी नारायण सैन और अन्य परिजनों की आंखें छलक आईं। विदाई के समय आश्रम की ओर से सुरेश सैन को नए वस्त्र और जरूरी दवाइयां दी गईं। इस भावुक पल में बेटे लक्ष्मी नारायण सैन ने हाथ जोड़कर सेवादारों का आभार जताया और कहा कि आश्रम की निस्वार्थ सेवा के बिना उनके परिवार के सदस्य का वापस मिलना असंभव था। इस दौरान आश्रम के सेवादार योगेश कुमार, रिशु गुर्जर और चेतन दत्ता भी मौजूद रहे।1
- करौली के हिंडौन सिटी में बुधवार को अपनी विभिन्न मांगों को लेकर आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं ने उपखंड कार्यालय पर प्रदर्शन किया। इस दौरान उन्होंने नारेबाजी करते हुए मुख्यमंत्री के नाम उपखंड अधिकारी (एसडीएम) और सीडीपीओ को ज्ञापन सौंपा। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने सरकार से अपनी इन मांगों पर शीघ्र निर्णय लेने की मांग की है।1
- करौली के श्रीमहावीरजी में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के तत्वावधान में सुरौठ खंड के श्रीमहावीरजी मंडल द्वारा स्थानीय खेल मैदान पर 'भगवान महावीर खेल संगम' का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण युवाओं में खेल भावना विकसित करना, अनुशासन की भावना जागृत करना और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना रहा। खेल संगम के दौरान रस्साकशी, रूमाल झपट्टा, दौड़ और हैंडबॉल सहित विभिन्न प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। इनमें विशेष रूप से रूमाल झपट्टा और रस्साकशी के मुकाबले दर्शकों के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र रहे, जिनका लोगों ने भरपूर आनंद लिया। इस खेल आयोजन में जिला कार्यवाह रामकेश, धर्म जागरण जिला संयोजक रमेश गुर्जर, खंड कार्यवाह तेजप्रकाश, खंड व्यवस्था प्रमुख अवध बिहारी जांगिड़, ग्राम विकास संयोजक बजरंग सिंह, कपलेश शर्मा और तुलसीराम गोदारा सहित संघ के अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे और खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन किया। प्रतियोगिताओं का संचालन शारीरिक शिक्षक समय सिंह गुर्जर, जयराम स्वामी और शिक्षक मनोज द्वारा किया गया, जबकि दिनेश गुर्जर ने रेफरी के रूप में निष्पक्ष ढंग से सभी मुकाबले संपन्न कराए। समापन समारोह में जिला कार्यवाह रामकेश ने खेलों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए युवाओं से नियमित खेल गतिविधियों में भाग लेने का आह्वान किया, जिसके बाद उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को पुरस्कार और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।3
- राजस्थान के करौली जिला इकाई के तहत सपोटरा स्थित मीणा धर्मशाला में भारतीय किसान संघ की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। यह बैठक प्रांतीय उपाध्यक्ष गंगाराम मीणा और संभाग उपाध्यक्ष गिरिराज मीणा के आतिथ्य में तथा जिला अध्यक्ष मोहर सिंह मीणा की अध्यक्षता में संपन्न हुई। बैठक में राजारामजी मीणा बी प्रमुख, बत्ती लाल मीणा, हरेती मीणा, हंसराज मीणा और प्रहलाद मीणा सहित कई प्रमुख कार्यकर्ता उपस्थित रहे। बैठक के दौरान आगामी सदस्यता अभियान को लेकर विस्तृत रणनीति तैयार की गई। जिला अध्यक्ष मोहर सिंह मीणा ने बुधवार दोपहर 3:00 बजे जिले के सभी कार्यकर्ताओं, तहसील अध्यक्षों, मंत्रियों और जिला कार्यकारिणी को इस अभियान के संबंध में आवश्यक जानकारी दी। उन्होंने जोर देकर कहा कि जिले की कोई भी ग्राम पंचायत इस सदस्यता अभियान से छूटनी नहीं चाहिए और ज्यादा से ज्यादा सदस्यता सुनिश्चित की जाए। इसके लिए उन्होंने प्रत्येक ग्राम समिति में 11 लोगों की समिति गठित करने के निर्देश दिए। इसके अलावा, बैठक में जिले में यूरिया खाद की हो रही कालाबाजारी का मुद्दा भी गरमाया। प्रांतीय उपाध्यक्ष गंगाराम मीणा ने बताया कि उन्होंने इस गंभीर समस्या को लेकर डिप्टी डायरेक्टर धर्म सिंह मीणा से फोन पर वार्ता की है। उन्होंने डिप्टी डायरेक्टर को खाद डीलरों और सहकारी समितियों की मनमानी से अवगत कराया, जिस पर उन्होंने संगठन को आश्वस्त करते हुए डीलरों और सहकारी समितियों की मनमानी को रोकने का पूरा भरोसा दिलाया है।1
- राजस्थान के करौली जिला अंतर्गत हिण्डौन सिटी में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर उपखंड कार्यालय पर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के बाद कार्यकर्ताओं ने एसडीएम और सीडीपीओ को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। इनकी सबसे प्रमुख मांग मानदेय प्रथा को समाप्त कर फिक्स वेतन व्यवस्था लागू करने की है। सौपे गए ज्ञापन में कार्यकर्ताओं के लिए ₹21,000 और सहायिकाओं के लिए ₹12,000 मासिक वेतन देने की मांग की गई है। इसके साथ ही इन्हें संविदा नियम-2022 में शामिल करने, राज्य कर्मचारी का दर्जा देने और सभी सरकारी सुविधाएं मुहैया कराने की मांग उठाई गई है। अन्य मांगों में सेवानिवृत्ति पर कार्यकर्ताओं को ₹10 लाख व सहायिकाओं को ₹6 लाख की एकमुश्त राशि देने, मासिक पेंशन, प्रमोशन और पदोन्नति में 30% आरक्षण देने की बात कही गई है। कार्यकर्ताओं ने विभागीय कार्यों के अलावा उनसे अन्य कोई भी कार्य नहीं कराने की मांग भी पुरजोर ढंग से उठाई है।1
- राजस्थान के करौली जिला अंतर्गत टोडाभीम तहसील के पहाड़ी गांव के निवासी निरंजन मीणा ने जिला कलेक्टर को एक प्रार्थना व शिकायत पत्र सौंपकर गांव की सड़क की बदहाली की ओर ध्यान आकर्षित किया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि पहाड़ी गांव को जोड़ने वाली यह सड़क पिछले 25 से अधिक सालों से कच्ची पड़ी हुई है। इस सड़क पर न तो पक्का निर्माण हुआ है और न ही जल निकासी के लिए नाली की कोई व्यवस्था की गई है। बारिश के मौसम में यह सड़क पूरी तरह से दलदल का रूप ले लेती है, जिससे यहां रहने वाले 30 से अधिक परिवारों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। इस मार्ग के दलदल बन जाने से किसानों को अपनी उपज मंडी तक ले जाने, बच्चों को स्कूल जाने और मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाने में अत्यधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। ग्रामीण निरंजन मीणा ने अपनी इस शिकायत में कानूनी और संवैधानिक आधारों का हवाला देते हुए कहा है कि सड़क के अभाव में संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिलने वाले 'गरिमापूर्ण जीवन जीने के अधिकार' का हनन हो रहा है। इसके साथ ही उन्होंने राजस्थान नगरपालिका अधिनियम, 2009 की धारा 104 व 105 और राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 88 का उल्लेख करते हुए इसे ग्राम पंचायत और स्थानीय निकाय का प्राथमिक कर्तव्य बताया है। पीड़ित ग्रामीण ने जिला कलेक्टर से मांग की है कि इस सड़क का तुरंत भौतिक सर्वेक्षण कराया जाए और इसे मनरेगा, 15वें वित्त आयोग या पीएमजीएसवाई (PMGSY) योजना के तहत पक्का किया जाए। इसके अतिरिक्त, शिकायतकर्ता ने सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम, 2005 की धारा 6(1) के तहत पिछले 3 वर्षों के बजट आवंटन, सड़क को पक्का करने के प्रस्ताव की स्थिति और इसके लिए जिम्मेदार विभाग व अधिकारी के संबंध में 30 दिनों के भीतर जानकारी मांगी है। इस शिकायत पत्र की प्रतिलिपि करौली जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और टोडाभीम पंचायत समिति के विकास अधिकारी को भी प्रेषित की गई है।3
- धौलपुर के सरमथुरा के पास आगई में स्कूली बच्चों ने रैली निकालकर लोगों को नव नामांकन का संदेश दिया है। इस रैली के जरिए बच्चों ने अधिक से अधिक नए नामांकन कराने के उद्देश्य से लोगों को जागरूक और प्रेरित करने का प्रयास किया।1
- राजस्थान के हिंडौन सिटी में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं ने बुधवार को अपनी विभिन्न मांगों को लेकर उपखंड कार्यालय पर जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने जमकर नारेबाजी की और मुख्यमंत्री के नाम एसडीएम व सीडीपीओ को ज्ञापन सौंपा। इस प्रदर्शन के माध्यम से कार्यकर्ताओं ने खुद को संविदा नियम 2022 में शामिल करने और मानदेय की जगह मासिक फिक्स वेतन देने की मांग उठाई है, जिसमें कार्यकर्ता के लिए ₹21,000 और सहायिका के लिए ₹12,000 प्रति माह वेतन तय करने की मांग की गई है। इसके अलावा, मोबाइल व बिजली बिल और सीबीसी जैसे कार्यों का भुगतान प्रति माह करने, सेवानिवृत्ति पर कार्यकर्ता को ₹10 लाख व सहायिका को ₹6 लाख रुपये एकमुश्त देने तथा सेवानिवृत्ति के बाद क्रमशः ₹3,000 और ₹2,000 प्रति माह पेंशन देने की मांग की गई है। कार्यकर्ताओं ने राज्य कर्मचारी की सभी सुविधाएं देने, महिला एवं बाल विकास विभाग के अतिरिक्त कोई अन्य कार्य न करवाने, उपस्थिति को उन्हीं के हस्ताक्षर से प्रमाणित मानने, योग्यता व अनुभव के आधार पर पदोन्नति में 30% आरक्षण देने और आकस्मिक मृत्यु पर परिवार के सदस्य को अनुकंपा नियुक्ति देने की भी पुरजोर मांग की है। इस दौरान रेनू शर्मा, सुनीता देवी, गीता देवी, चंचल धाकड़, भगवती जांगिड़, सुनीता शर्मा, मोहनी देवी, निशा और सुनीता गोयल सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और सहायिकाएं मौजूद रहीं।4