हौसले की मिसाल : परिवार में खुशी का माहौल 3 साल के मासूम निसार ने रखा अपना पहला रोजा, संवाददाता - संतोष व्यास डूंगरपुर। इबादत के मुकद्दस महीने में जहां बड़े-बुजुर्ग पूरी शिद्दत के साथ रोजे रख रहे हैं, वहीं डूंगरपुर में एक साढ़े तीन साल के मासूम बच्चे ने अपनी भक्ति और दृढ़ निश्चय से सभी को हैरान कर दिया है। एमएमबी ग्रुप डूंगरपुर के सदर नूर मोहम्मद मकरानी के नवासे मोहम्मद निसार मकरानी ने महज 3 साल 11 माह की नन्ही उम्र में अपना पहला रोजा रखकर अल्लाह की इबादत की। मासूम की इस हिम्मत और लगन को देखकर न सिर्फ मकरानी परिवार बल्कि पूरे समाज में चर्चा हो रही है। मकरानी ने बताया कि नन्हे निसार ने किसी दबाव में नहीं, बल्कि अपनी मर्जी और उत्साह के साथ सेहरी के वक्त उठकर रोजा रखने की जिद की। निसार ने परिवार के सभी सदस्यों से स्पष्ट कहा कि आज वह भी रोजा रखेगा। इतनी कम उम्र में बच्चे के इस फैसले ने एक पल के लिए सबको हैरत में डाल दिया, लेकिन उसके जज्बे को देखते हुए परिजनों ने खुशी-खुशी उसका साथ दिया। निसार के लिए प्रेरणा का स्रोत घर का माहौल रहा है, उनके भाई अब्दुल हाफिज इस साल के अपने सभी रोजे मुकम्मल कर रहे हैं और बहन मेहरीन फातिमा भी नियमित रूप से रोजे रख रही हैं। अपने भाई-बहनों को इबादत करते देख निसार के मन में भी रोजा रखने की इच्छा जागी। इस नेक और बरकत वाले मौके पर निसार के वालिद मोहम्मद वसीम, वालिदा मखदूमा मकरानी और दादी अनिसा मकरानी सहित पूरे मकरानी परिवार ने फूल-मालाओं और दुआओं के साथ मासूम को मुबारकबाद दी। परिजनों का कहना है कि नन्ही उम्र में दीन के प्रति ऐसा लगाव वाकई काबिले-तारीफ है। दिन भर चले इस सिलसिले के बाद शाम को इफ्तार के वक्त मासूम के चेहरे पर एक अलग ही रौनक और खुशी देखने को मिली। सोशल मीडिया और क्षेत्र में भी इस छोटे से रोजेदार की खूब सराहना की जा रही है।
हौसले की मिसाल : परिवार में खुशी का माहौल 3 साल के मासूम निसार ने रखा अपना पहला रोजा, संवाददाता - संतोष व्यास डूंगरपुर। इबादत के मुकद्दस महीने में जहां बड़े-बुजुर्ग पूरी शिद्दत के साथ रोजे रख रहे हैं, वहीं डूंगरपुर में एक साढ़े तीन साल के मासूम बच्चे ने अपनी भक्ति और दृढ़ निश्चय से सभी को हैरान कर दिया है। एमएमबी ग्रुप डूंगरपुर के सदर नूर मोहम्मद मकरानी के नवासे मोहम्मद निसार मकरानी ने महज 3 साल 11 माह की नन्ही उम्र
में अपना पहला रोजा रखकर अल्लाह की इबादत की। मासूम की इस हिम्मत और लगन को देखकर न सिर्फ मकरानी परिवार बल्कि पूरे समाज में चर्चा हो रही है। मकरानी ने बताया कि नन्हे निसार ने किसी दबाव में नहीं, बल्कि अपनी मर्जी और उत्साह के साथ सेहरी के वक्त उठकर रोजा रखने की जिद की। निसार ने परिवार के सभी सदस्यों से स्पष्ट कहा कि आज वह भी रोजा रखेगा। इतनी कम उम्र में बच्चे के इस फैसले ने एक पल के
लिए सबको हैरत में डाल दिया, लेकिन उसके जज्बे को देखते हुए परिजनों ने खुशी-खुशी उसका साथ दिया। निसार के लिए प्रेरणा का स्रोत घर का माहौल रहा है, उनके भाई अब्दुल हाफिज इस साल के अपने सभी रोजे मुकम्मल कर रहे हैं और बहन मेहरीन फातिमा भी नियमित रूप से रोजे रख रही हैं। अपने भाई-बहनों को इबादत करते देख निसार के मन में भी रोजा रखने की इच्छा जागी। इस नेक और बरकत वाले मौके पर निसार के वालिद मोहम्मद वसीम,
वालिदा मखदूमा मकरानी और दादी अनिसा मकरानी सहित पूरे मकरानी परिवार ने फूल-मालाओं और दुआओं के साथ मासूम को मुबारकबाद दी। परिजनों का कहना है कि नन्ही उम्र में दीन के प्रति ऐसा लगाव वाकई काबिले-तारीफ है। दिन भर चले इस सिलसिले के बाद शाम को इफ्तार के वक्त मासूम के चेहरे पर एक अलग ही रौनक और खुशी देखने को मिली। सोशल मीडिया और क्षेत्र में भी इस छोटे से रोजेदार की खूब सराहना की जा रही है।
- 3 साल के मासूम निसार ने रखा अपना पहला रोजा, संवाददाता - संतोष व्यास डूंगरपुर। इबादत के मुकद्दस महीने में जहां बड़े-बुजुर्ग पूरी शिद्दत के साथ रोजे रख रहे हैं, वहीं डूंगरपुर में एक साढ़े तीन साल के मासूम बच्चे ने अपनी भक्ति और दृढ़ निश्चय से सभी को हैरान कर दिया है। एमएमबी ग्रुप डूंगरपुर के सदर नूर मोहम्मद मकरानी के नवासे मोहम्मद निसार मकरानी ने महज 3 साल 11 माह की नन्ही उम्र में अपना पहला रोजा रखकर अल्लाह की इबादत की। मासूम की इस हिम्मत और लगन को देखकर न सिर्फ मकरानी परिवार बल्कि पूरे समाज में चर्चा हो रही है। मकरानी ने बताया कि नन्हे निसार ने किसी दबाव में नहीं, बल्कि अपनी मर्जी और उत्साह के साथ सेहरी के वक्त उठकर रोजा रखने की जिद की। निसार ने परिवार के सभी सदस्यों से स्पष्ट कहा कि आज वह भी रोजा रखेगा। इतनी कम उम्र में बच्चे के इस फैसले ने एक पल के लिए सबको हैरत में डाल दिया, लेकिन उसके जज्बे को देखते हुए परिजनों ने खुशी-खुशी उसका साथ दिया। निसार के लिए प्रेरणा का स्रोत घर का माहौल रहा है, उनके भाई अब्दुल हाफिज इस साल के अपने सभी रोजे मुकम्मल कर रहे हैं और बहन मेहरीन फातिमा भी नियमित रूप से रोजे रख रही हैं। अपने भाई-बहनों को इबादत करते देख निसार के मन में भी रोजा रखने की इच्छा जागी। इस नेक और बरकत वाले मौके पर निसार के वालिद मोहम्मद वसीम, वालिदा मखदूमा मकरानी और दादी अनिसा मकरानी सहित पूरे मकरानी परिवार ने फूल-मालाओं और दुआओं के साथ मासूम को मुबारकबाद दी। परिजनों का कहना है कि नन्ही उम्र में दीन के प्रति ऐसा लगाव वाकई काबिले-तारीफ है। दिन भर चले इस सिलसिले के बाद शाम को इफ्तार के वक्त मासूम के चेहरे पर एक अलग ही रौनक और खुशी देखने को मिली। सोशल मीडिया और क्षेत्र में भी इस छोटे से रोजेदार की खूब सराहना की जा रही है।4
- डूंगरपुर । होली पर्व को लेकर जिलेभर में शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखने के बाद डूंगरपुर पुलिस ने रिजर्व लाइन परिसर में उत्साह और उमंग के साथ होली उत्सव मनाया। सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी सफलतापूर्वक निभाने के बाद पुलिस अधिकारियों और जवानों ने एक-दूसरे को गुलाल लगाकर पर्व की शुभकामनाएं दीं। इस दौरान जिला पुलिस अधीक्षक मनीष कुमार भी पुलिसकर्मियों के बीच पहुंचे। जवानों ने एसपी को कंधों पर उठाकर होली की बधाई दी। ढोल, नगाड़ों और टूल-कुंडी की थाप पर पुलिस अधिकारी व जवान जमकर थिरकते नजर आए। एसपी मनीष कुमार ने भी जवानों के साथ नृत्य कर उत्सव में उत्साह का संचार किया। कार्यक्रम में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मुकेश सांखला, जिले के सभी थानों के थाना अधिकारी, पुलिस जवान और महिला पुलिसकर्मी मौजूद रहे। पुलिस परिवार ने आपसी भाईचारे और सौहार्द के साथ रंगों का त्योहार मनाया। रिजर्व लाइन परिसर रंग-गुलाल और उत्साह से सराबोर नजर आया।1
- सीमलवाड़ा। शहीदों की वीर भूमि रास्तापाल में होली पर्व के उपलक्ष्य में पारंपरिक गैर नृत्य का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में रास्तापाल के बीस फलो सहित आसपास के गांवों और गुजरात के सीमावर्ती क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। पारंपरिक वेशभूषा में सजे युवक-युवतियां हाथों में डांडिया और पैरों में घुंघरू बांधकर ढोल-नगाड़ों व कुंडी की थाप पर देर तक गैर नृत्य करते रहे, जिससे पूरा क्षेत्र उत्सव के रंग में सराबोर हो गया। गैर नृत्य में भक्तमेट कोतवाल भगत गमेती के नेतृत्व में ढोल, नगाड़े और कुंडी की थाप पर कलाकारों ने आकर्षक प्रस्तुतियां दीं। ढोल की गूंज और पारंपरिक लोकधुनों के बीच युवाओं का जोश देखते ही बन रहा था। नर्तक गोल घेरा बनाकर लयबद्ध ढंग से डांडिया घुमाते हुए नृत्य करते रहे, जिसे देखने के लिए दूर-दराज के ग्रामीण भी बड़ी संख्या में पहुंचे। इस दौरान ग्राम पंचायत के सरपंच संजय कलासुआ, ताराचंद बरंडा, रमन डामोर, सोहनलाल रोत, प्रेमनाथ कलासुआ, अनिल डामोर, हंसराज आमलिया सहित कई जनप्रतिनिधि और ग्रामीण मौजूद रहे। कार्यक्रम स्थल पर हजारों की संख्या में स्त्री-पुरुष, युवा और बच्चे पहुंचे, जिससे पूरे क्षेत्र में मेले जैसा माहौल बन गया। इस अवसर पर रास्तापाल स्थित वीर शहीद काली बाई और नानाभाई खांट स्मारक स्थल पर उपस्थित जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने माल्यार्पण कर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की तथा उनके बलिदान को याद किया। गैर नृत्य के दौरान ग्रामीणों ने एक-दूसरे को रंग-गुलाल लगाकर होली की बधाई दी और पारंपरिक लोक संस्कृति का आनंद लिया। देर शाम तक चले इस आयोजन में लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और लोक परंपराओं को जीवंत बनाए रखने का संदेश दिया। कार्यक्रम के दौरान शांति एवं कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए धंबोला पुलिस भी मौके पर तैनात रही और पूरे आयोजन के दौरान स्थिति पर नजर रखी। ग्रामीणों ने बताया कि हर वर्ष होली के अवसर पर आयोजित होने वाला यह पारंपरिक गैर नृत्य क्षेत्र की लोक संस्कृति और आपसी भाईचारे का प्रतीक है।3
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- घोटाद में होली स्नेह मिलन के साथ गूंजा सड़क सुरक्षा का संदेश डूंगरपुर। रंगों के त्यौहार होली के पावन अवसर पर घोटाद में सर्वसमाज के तत्वावधान में आयोजित होली स्नेह मिलन समारोह केवल खुशियों के मेल-मिलाप तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह सामाजिक जिम्मेदारी का केंद्र भी बना। ग्राम विकास समिति, घोटाद की पहल पर इस उत्सव के बीच सड़क सुरक्षा को लेकर एक विशेष जागरूकता अभियान चलाया गया, जिसमें उपस्थित जनसमूह को सुरक्षित यातायात का संकल्प दिलाया गया। - दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने की अपील समारोह के दौरान ग्राम विकास समिति के प्रतिनिधियों ने बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त की। ग्रामीणों और विशेषकर युवाओं को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि सड़क पर बरती गई थोड़ी सी लापरवाही न केवल एक व्यक्ति, बल्कि पूरे परिवार की खुशियों को उजाड़ देती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए सरकार के साथ-साथ प्रत्येक नागरिक का सजग और अनुशासित होना अनिवार्य है। "जान है तो जहान है" के मूल मंत्र को आत्मसात करने की अपील के साथ युवाओं को सुरक्षित ड्राइविंग के लिए प्रेरित किया गया। - नशा मुक्त और नियमों के साथ ड्राइविंग की ली शपथ कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण सड़क सुरक्षा की शपथ रही। समिति द्वारा सामूहिक रूप से सभी वाहन चालकों को संकल्प दिलाया गया कि वे सड़क पर वाहन चलाते समय गति सीमा का सदैव ध्यान रखेंगे और कभी भी निर्धारित गति से तेज वाहन नहीं चलाएंगे। शपथ के दौरान दोपहिया वाहन चालकों के लिए हेलमेट और चारपहिया वाहन चालकों के लिए सीट बेल्ट की अनिवार्यता पर जोर दिया गया। सबसे महत्वपूर्ण संकल्प 'शराब पीकर वाहन न चलाने' का रहा, जिसे सभी युवाओं ने पूरी निष्ठा के साथ दोहराया। - भविष्य में भी जारी रहेंगे ऐसे प्रयास स्नेह मिलन के इस सौहार्दपूर्ण वातावरण में युवाओं का उत्साह देखते ही बनता था। उन्होंने न केवल स्वयं नियमों के पालन का संकल्प लिया, बल्कि समाज के अन्य लोगों को भी यातायात नियमों के प्रति जागरूक करने की जिम्मेदारी उठाई। आयोजकों ने बताया कि त्यौहारों के समय दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ जाती है, इसलिए यह सही समय है जब हम खुशियों के साथ सुरक्षा का संदेश फैलाएं। समिति ने भविष्य में भी इस प्रकार के जागरूकता अभियान निरंतर चलाने का निर्णय लिया है। कार्यक्रम का समापन सुरक्षित यातायात के संकल्प और भाईचारे के संदेश के साथ हुआ। अंत में सभी ने एक-दूसरे को गुलाल लगाकर होली की बधाई दी और इस संदेश को घर-घर तक पहुँचाने का आह्वान किया।1