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हमारे मोहल्ले में कचरा लेने भी नहीं आते ने कचरा ऐसे डालकर चले जाते हैं रोड भी खराबहै
Abhishek Bhoi
हमारे मोहल्ले में कचरा लेने भी नहीं आते ने कचरा ऐसे डालकर चले जाते हैं रोड भी खराबहै
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- Post by Abhishek Bhoi1
- Post by Rajendra Tabiyar1
- Post by Bapulal Ahari2
- सीमलवाड़ा। शहीदों की वीर भूमि रास्तापाल में होली पर्व के उपलक्ष्य में पारंपरिक गैर नृत्य का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में रास्तापाल के बीस फलो सहित आसपास के गांवों और गुजरात के सीमावर्ती क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। पारंपरिक वेशभूषा में सजे युवक-युवतियां हाथों में डांडिया और पैरों में घुंघरू बांधकर ढोल-नगाड़ों व कुंडी की थाप पर देर तक गैर नृत्य करते रहे, जिससे पूरा क्षेत्र उत्सव के रंग में सराबोर हो गया। गैर नृत्य में भक्तमेट कोतवाल भगत गमेती के नेतृत्व में ढोल, नगाड़े और कुंडी की थाप पर कलाकारों ने आकर्षक प्रस्तुतियां दीं। ढोल की गूंज और पारंपरिक लोकधुनों के बीच युवाओं का जोश देखते ही बन रहा था। नर्तक गोल घेरा बनाकर लयबद्ध ढंग से डांडिया घुमाते हुए नृत्य करते रहे, जिसे देखने के लिए दूर-दराज के ग्रामीण भी बड़ी संख्या में पहुंचे। इस दौरान ग्राम पंचायत के सरपंच संजय कलासुआ, ताराचंद बरंडा, रमन डामोर, सोहनलाल रोत, प्रेमनाथ कलासुआ, अनिल डामोर, हंसराज आमलिया सहित कई जनप्रतिनिधि और ग्रामीण मौजूद रहे। कार्यक्रम स्थल पर हजारों की संख्या में स्त्री-पुरुष, युवा और बच्चे पहुंचे, जिससे पूरे क्षेत्र में मेले जैसा माहौल बन गया। इस अवसर पर रास्तापाल स्थित वीर शहीद काली बाई और नानाभाई खांट स्मारक स्थल पर उपस्थित जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने माल्यार्पण कर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की तथा उनके बलिदान को याद किया। गैर नृत्य के दौरान ग्रामीणों ने एक-दूसरे को रंग-गुलाल लगाकर होली की बधाई दी और पारंपरिक लोक संस्कृति का आनंद लिया। देर शाम तक चले इस आयोजन में लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और लोक परंपराओं को जीवंत बनाए रखने का संदेश दिया। कार्यक्रम के दौरान शांति एवं कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए धंबोला पुलिस भी मौके पर तैनात रही और पूरे आयोजन के दौरान स्थिति पर नजर रखी। ग्रामीणों ने बताया कि हर वर्ष होली के अवसर पर आयोजित होने वाला यह पारंपरिक गैर नृत्य क्षेत्र की लोक संस्कृति और आपसी भाईचारे का प्रतीक है।3
- Post by Kamlesh tabiyar Tabiyar1
- 3 साल के मासूम निसार ने रखा अपना पहला रोजा, संवाददाता - संतोष व्यास डूंगरपुर। इबादत के मुकद्दस महीने में जहां बड़े-बुजुर्ग पूरी शिद्दत के साथ रोजे रख रहे हैं, वहीं डूंगरपुर में एक साढ़े तीन साल के मासूम बच्चे ने अपनी भक्ति और दृढ़ निश्चय से सभी को हैरान कर दिया है। एमएमबी ग्रुप डूंगरपुर के सदर नूर मोहम्मद मकरानी के नवासे मोहम्मद निसार मकरानी ने महज 3 साल 11 माह की नन्ही उम्र में अपना पहला रोजा रखकर अल्लाह की इबादत की। मासूम की इस हिम्मत और लगन को देखकर न सिर्फ मकरानी परिवार बल्कि पूरे समाज में चर्चा हो रही है। मकरानी ने बताया कि नन्हे निसार ने किसी दबाव में नहीं, बल्कि अपनी मर्जी और उत्साह के साथ सेहरी के वक्त उठकर रोजा रखने की जिद की। निसार ने परिवार के सभी सदस्यों से स्पष्ट कहा कि आज वह भी रोजा रखेगा। इतनी कम उम्र में बच्चे के इस फैसले ने एक पल के लिए सबको हैरत में डाल दिया, लेकिन उसके जज्बे को देखते हुए परिजनों ने खुशी-खुशी उसका साथ दिया। निसार के लिए प्रेरणा का स्रोत घर का माहौल रहा है, उनके भाई अब्दुल हाफिज इस साल के अपने सभी रोजे मुकम्मल कर रहे हैं और बहन मेहरीन फातिमा भी नियमित रूप से रोजे रख रही हैं। अपने भाई-बहनों को इबादत करते देख निसार के मन में भी रोजा रखने की इच्छा जागी। इस नेक और बरकत वाले मौके पर निसार के वालिद मोहम्मद वसीम, वालिदा मखदूमा मकरानी और दादी अनिसा मकरानी सहित पूरे मकरानी परिवार ने फूल-मालाओं और दुआओं के साथ मासूम को मुबारकबाद दी। परिजनों का कहना है कि नन्ही उम्र में दीन के प्रति ऐसा लगाव वाकई काबिले-तारीफ है। दिन भर चले इस सिलसिले के बाद शाम को इफ्तार के वक्त मासूम के चेहरे पर एक अलग ही रौनक और खुशी देखने को मिली। सोशल मीडिया और क्षेत्र में भी इस छोटे से रोजेदार की खूब सराहना की जा रही है।4
- Post by VAGAD news241
- Post by Rajendra Tabiyar1