मध्यप्रदेश के जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट ने घोषणा की है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की पहल से सरदार सरोवर परियोजना के तीस वर्षों से लंबित मुद्दे का समाधान कर लिया गया है। मंत्री सिलावट ने बताया कि कई वर्षों से चारों राज्य गणना राशियों की अलग-अलग मांग कर रहे थे, और फरवरी 2026 में भारत के अटॉर्नी जनरल द्वारा दिए गए अभिमत के अनुसार, मध्यप्रदेश को गुजरात राज्य को 1500 करोड़ रुपये का भुगतान करना पड़ रहा था, क्योंकि गुजरात पर परियोजना के 50 प्रतिशत व्यय की हिस्सेदारी थी। मंत्री सिलावट के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में चारों राज्यों ने गहन विचार-विमर्श किया। जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल के निर्देश पर यह निर्णय लिया गया कि गुजरात राज्य अपनी व्यय हिस्सेदारी 50 प्रतिशत से बढ़ाकर 75 प्रतिशत करेगा। इस निर्णय के परिणामस्वरूप, मध्यप्रदेश की देनदारी 1500 करोड़ रुपये से घटकर मात्र 231 करोड़ रुपये रह गई है। उन्होंने आगे बताया कि इस फैसले से सरदार सरोवर परियोजना अब पूरी तरह से विवाद रहित हो गई है। मध्यप्रदेश को परियोजना से 31 लाख हेक्टेयर सिंचाई और 85 पैसे प्रति यूनिट की दर से बिजली निरंतर मिलती रहेगी। मंत्री सिलावट ने इस सफल समाधान के लिए राष्ट्र के गौरव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह का हृदय से आभार व्यक्त किया, जिनके प्रयासों से सभी राज्यों को लाभ मिला। उन्होंने इस मुद्दे पर भ्रम फैला रही कांग्रेस को राजनीति न करने की सलाह भी दी।
मध्यप्रदेश के जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट ने घोषणा की है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की पहल से सरदार सरोवर परियोजना के तीस वर्षों से लंबित मुद्दे का समाधान कर लिया गया है। मंत्री सिलावट ने बताया कि कई वर्षों से चारों राज्य गणना राशियों की अलग-अलग मांग कर रहे थे, और फरवरी 2026 में भारत के अटॉर्नी जनरल द्वारा दिए गए अभिमत के अनुसार, मध्यप्रदेश को गुजरात राज्य को 1500 करोड़ रुपये का भुगतान करना पड़ रहा था, क्योंकि गुजरात पर परियोजना के 50 प्रतिशत व्यय की हिस्सेदारी थी। मंत्री सिलावट के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में चारों राज्यों ने गहन विचार-विमर्श किया। जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल के निर्देश पर यह निर्णय लिया गया कि गुजरात राज्य अपनी व्यय हिस्सेदारी 50 प्रतिशत से बढ़ाकर 75 प्रतिशत करेगा। इस निर्णय के परिणामस्वरूप, मध्यप्रदेश की देनदारी 1500 करोड़ रुपये से घटकर मात्र 231 करोड़ रुपये रह गई है। उन्होंने आगे बताया कि इस फैसले से सरदार सरोवर परियोजना अब पूरी तरह से विवाद रहित हो गई है। मध्यप्रदेश को परियोजना से 31 लाख हेक्टेयर सिंचाई और 85 पैसे प्रति यूनिट की दर से बिजली निरंतर मिलती रहेगी। मंत्री सिलावट ने इस सफल समाधान के लिए राष्ट्र के गौरव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह का हृदय से आभार व्यक्त किया, जिनके प्रयासों से सभी राज्यों को लाभ मिला। उन्होंने इस मुद्दे पर भ्रम फैला रही कांग्रेस को राजनीति न करने की सलाह भी दी।
- डिंडोरी से अमरकंटक को जोड़ने वाले मार्ग पर स्थित कूड़ा गांव में राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे नाली निर्माण के कारण ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस निर्माण कार्य के चलते गांव के बीच का रास्ता अवरुद्ध हो गया है, जिससे एक ओर तो चारों तरफ कीचड़ फैल गई है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीणों को आवाजाही में गंभीर दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। यह समस्या जीआरटीसी कंपनी द्वारा पैदा की गई है, जो इस राष्ट्रीय राजमार्ग पर नाली का निर्माण कार्य करवा रही है, और ग्रामीणों का आरोप है कि कंपनी उनकी परेशानियों से पूरी तरह बेखबर है।4
- मध्य प्रदेश सरकार प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घोषणा की है कि प्राकृतिक खेती अपनाने वाले किसानों को राज्य सरकार की ओर से एक वर्ष तक प्रतिमाह ₹1,000 की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। इस योजना का मुख्य उद्देश्य किसानों को रासायनिक खेती से प्राकृतिक खेती की ओर प्रोत्साहित करना है, जिससे टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल कृषि प्रणाली को बढ़ावा मिल सके। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस बात पर जोर दिया कि प्राकृतिक खेती से खेती की लागत कम होती है, मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है और पर्यावरण संरक्षण को भी बल मिलता है। उन्होंने यह भी बताया कि इसके माध्यम से किसानों को गुणवत्तापूर्ण एवं सुरक्षित कृषि उत्पाद प्राप्त होते हैं, जिससे उनकी आय बढ़ाने में भी सहायता मिलेगी।1
- डिंडोरी जिले के बजाग में साइबर ठगी की लगातार बढ़ती घटनाओं को देखते हुए सतर्क रहने की सलाह दी गई है। साइबर अपराधों से बचाव के लिए नागरिकों को निर्देशित किया गया है कि वे किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ मोबाइल कॉल, व्हाट्सएप, एसएमएस, क्यूआर कोड लिंक और ओटीपी जैसी बैंक से संबंधित कोई भी गोपनीय जानकारी साझा न करें। इस सुरक्षा संदेश का प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करने के लिए स्थानीय स्तर पर कोटवारों की मदद ली जा रही है। गाँव-गाँव जाकर कोटवारों के माध्यम से लोगों को साइबर धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों के प्रति जागरूक किया जा रहा है।1
- डिंडोरी जिले के एक गांव में पिछले एक सप्ताह से बिजली आपूर्ति पूरी तरह से ठप्प थी। इस लंबी अवधि तक बिजली न मिलने से उत्पन्न हुई परेशानी के बाद, गांव के युवाओं ने स्वयं निर्णय लेते हुए स्थिति को सुधारने का बीड़ा उठाया। उनके प्रयासों के फलस्वरूप, गांव में बिजली फिर से चालू हो सकी।1
- उमरिया जिले की मानपुर जनपद पंचायत के ग्राम पड़वार स्थित हलफल-भदार नदी पर पुल का अभाव बारिश के मौसम में एक बड़ी मुसीबत बन गया है। नदी का जलस्तर बढ़ते ही बचहा, मुडगुड़ी, सलैया, कुंडी, भरौली और पड़वार सहित आसपास के गांवों का संपर्क टूट जाता है, जिससे स्थानीय निवासियों का आवागमन पूरी तरह प्रभावित हो जाता है। इस स्थिति से सबसे अधिक जूझना छात्र-छात्राओं को पड़ रहा है, जो पड़वार स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में पढ़ने जाते हैं। सामान्य दिनों में विद्यालय की दूरी 4 से 5 किलोमीटर है, लेकिन बरसात में नदी उफान पर होने के कारण उन्हें अमरपुर होकर 18 से 20 किलोमीटर का अतिरिक्त सफर तय करना पड़ता है। विद्यार्थियों की पढ़ाई पर इसका सीधा असर पड़ रहा है और कई बार स्कूल पहुंचना भी मुश्किल हो जाता है। ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि ग्राम कुंडी के पास बने स्टॉप डेम में किए गए अवरोध के कारण जलभराव की समस्या और बढ़ गई है, जिससे न केवल आवागमन प्रभावित है बल्कि किसानों की कृषि भूमि का कटाव भी हो रहा है। ग्रामीणों ने शिकायत की है कि वे वर्षों से पुल की मांग कर रहे हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई है। उन्होंने जिला खनिज प्रतिष्ठान (DMF) या अन्य योजनाओं के माध्यम से पुल निर्माण की मांग रखी है। ग्रामीणों के अनुसार, पूर्व में अपनी पढ़ाई और पुल की मांग को लेकर छात्र-छात्राओं ने 'नदी बचाओ आंदोलन' का समर्थन किया था, जिसके बाद जिला प्रशासन ने कुछ शिक्षकों के विरुद्ध निलंबन की कार्रवाई तो की, लेकिन पुल के निर्माण पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। अब ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर से बरसात के दौरान मौके का निरीक्षण करने और पुल निर्माण की प्रक्रिया शीघ्र शुरू करने की मांग की है। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो वे क्षेत्रीय नागरिकों के साथ लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन और धरना-प्रदर्शन करेंगे, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।2
- डिण्डौरी में भारतीय किसान संघ ने किसानों और ग्रामीणों की विभिन्न समस्याओं को लेकर मुख्यमंत्री के नाम तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में शहपुरा में 132 केवी विद्युत सबस्टेशन का काम तुरंत शुरू कराने, बिलगड़ा बांध के वेस्टवेयर और ढोंढ़ा बैगा टोला के घरों में आई दरारों की जांच कराने, कृषि उपसंचालक द्वारा किसानों के फोन न उठाने पर नाराजगी जताते हुए मार्गदर्शन मांगने और उद्यानिकी विभाग के स्थायी कार्यालय स्थापित करने जैसी प्रमुख मांगें शामिल हैं। संघ ने बताया कि शहपुरा विकासखंड में मजबूत विद्युत व्यवस्था के लिए लंबे समय से 132 केवी सबस्टेशन की मांग की जा रही है। एक साल पहले मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बालपुर में एक कार्यक्रम के दौरान शहपुरा में 132 केवी सबस्टेशन स्थापित करने की घोषणा की थी, लेकिन निर्माण कार्य अभी तक शुरू नहीं हुआ। इससे शहपुरा और मेंहदवानी विकासखंड के 316 गाँव अघोषित बिजली कटौती से प्रभावित हैं, जिससे किसानों, पेयजल व्यवस्था, शिक्षा और दैनिक जीवन पर बुरा असर पड़ रहा है। किसान संघ ने मुख्यमंत्री की घोषणा पर तत्काल अमल करते हुए सबस्टेशन का निर्माण कार्य शुरू कराने की मांग की। ज्ञापन में बिलगड़ा जलाशय मध्यम परियोजना के इंटेकवेल निर्माण के दौरान हुई ब्लास्टिंग का मुद्दा भी उठाया गया। किसान संघ का आरोप है कि इस ब्लास्टिंग के कारण बांध के वेस्टवेयर और ढोंढ़ा बैगा टोला के दर्जनों मकानों में दरारें आ गई हैं। संघ ने आशंका व्यक्त की है कि यदि समय रहते जांच और मरम्मत नहीं की गई तो भविष्य में जनहानि या कोई बड़ा हादसा हो सकता है। उन्होंने विशेषज्ञों से तत्काल जांच कराकर सुरक्षा और मरम्मत कार्य कराने की मांग की है। कृषि उपसंचालक के कार्य व्यवहार को लेकर भी किसान संघ ने कड़ी नाराजगी जाहिर की। ज्ञापन में कहा गया है कि कृषि उपसंचालक किसानों के फोन कॉल रिसीव नहीं करते, जिससे किसान अपनी समस्याएं नहीं बता पाते। खरीफ सीजन के दौरान समय पर बीज उपलब्ध न होने के कारण कई किसानों की बोनी प्रभावित हुई थी। संघ ने सवाल उठाया कि जब अधिकारी किसानों की बात ही नहीं सुनेंगे, तो शासन की योजनाओं का लाभ उन तक कैसे पहुँचेगा और किसान किससे बात करें। इसके अतिरिक्त, किसान संघ ने उद्यानिकी विभाग के जिला और विकासखंड स्तर पर स्थायी कार्यालय स्थापित करने की भी मांग की। संघ का कहना है कि स्थायी कार्यालय न होने से किसानों को योजनाओं और तकनीकी सेवाओं का लाभ समय पर नहीं मिल पाता और उन्हें अनावश्यक परेशानी झेलनी पड़ती है। संघ ने सभी विकासखंडों में उद्यानिकी विभाग के स्थायी कार्यालय जनपद पंचायत या कृषि विभाग परिसर में संचालित करने का सुझाव दिया। ज्ञापन सौंपने के दौरान भारतीय किसान संघ के जिलाध्यक्ष बिहारी लाल साहू, जिला कोषाध्यक्ष विवेकानंद साहू सहित बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे। किसान संघ ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई, तो किसानों के हित में व्यापक आंदोलन किया जाएगा।3
- मध्य प्रदेश के उमरिया जिले से होकर गुजरने वाले नेशनल हाईवे-43 पर गुरुवार को एक भीषण सड़क हादसा हो गया। उमरिया कोतवाली क्षेत्र के भरौला गाँव के पास सड़क किनारे खड़े एक ट्रक से तेज रफ्तार एर्टिगा कार जा टकराई। यह टक्कर इतनी भयावह थी कि कार के परखच्चे उड़ गए और उसमें सवार पाँच लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, एर्टिगा कार अनूपपुर जिले से चित्रकूट की ओर जा रही थी। भरौला के समीप पहुँचते ही चालक ने वाहन से नियंत्रण खो दिया, जिसके परिणामस्वरूप कार सीधे हाईवे किनारे खड़े ट्रक में जा घुसी। इस जबरदस्त टक्कर में मौके पर ही चार लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। मृतकों में दो महिलाएँ, एक पुरुष और एक तीन वर्षीय मासूम बच्चा शामिल हैं। वहीं, एक अन्य व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हुआ है, जिसे तत्काल उपचार के लिए जिला अस्पताल पहुँचाया गया, जहाँ उसकी हालत गंभीर बताई जा रही है। हादसे की सूचना मिलते ही उमरिया कोतवाली पुलिस मौके पर पहुँची और स्थानीय लोगों की मदद से कार में फँसे लोगों को बाहर निकाला। पुलिस ने सभी शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और दुर्घटना के कारणों की जाँच शुरू कर दी है। प्रारंभिक तौर पर तेज रफ्तार और सड़क किनारे खड़े ट्रक को ही इस दर्दनाक हादसे का मुख्य कारण माना जा रहा है। पुलिस मृतकों की पहचान करने और उनके परिजनों को सूचना देने की प्रक्रिया में जुटी हुई है। इस घटना से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है।2