छाता चीनी मिल में एथेनॉल प्लांट के विरोध में गरजे किसान: कुंवर नरेंद्र की दलीलों पर जताई असहमति, चीनी मिल खोलने की मांग पर अड़े #rprnewstv #brajkiawaaz छाता (मथुरा): बुधवार को छाता चीनी मिल परिसर में प्रस्तावित एथेनॉल प्लांट को लेकर पूर्व सैनिकों और किसानों का विरोध प्रदर्शन जारी रहा। धरना स्थल पर मौजूद स्थानीय किसानों और ग्रामीणों ने एथेनॉल प्लांट को लेकर अपनी आपत्तियां दर्ज कराते हुए कहा कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन प्रस्तावित प्लांट को घनी आबादी और कृषि क्षेत्र से हटाकर किसी अन्य स्थान पर स्थापित किया जाना चाहिए। प्रदर्शनकारी किसानों का आरोप है कि उनकी जायज मांगों और पर्यावरण संबंधी आपत्तियों को शासन-प्रशासन तक सही तरीके से नहीं पहुंचाया गया। किसानों ने कहा कि उनकी मुख्य मांग छाता चीनी मिल को पुनः चालू कराना है। एथेनॉल प्लांट को लेकर क्या हैं किसानों की चिंताएं? धरना दे रहे किसानों ने एथेनॉल प्लांट से संभावित पानी की खपत, अपशिष्ट जल (Spent Wash), दुर्गंध, वायु प्रदूषण, भूजल और कृषि भूमि पर संभावित प्रभाव जैसे मुद्दे उठाए। जानकारियों के अनुसार, एथेनॉल उत्पादन में प्रयुक्त तकनीक और कच्चे माल के आधार पर पानी तथा अपशिष्ट प्रबंधन की आवश्यकता अलग-अलग हो सकती है। यदि अपशिष्ट का उचित उपचार नहीं किया जाए तो पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका रहती है। दूसरी ओर, आधुनिक तकनीक, उपचार संयंत्र और Zero Liquid Discharge (ZLD) जैसी व्यवस्थाओं से प्रदूषण और जल-अपशिष्ट को नियंत्रित करने का प्रयास किया जाता है। इसी वजह से किसानों की मांग है कि प्लांट शुरू करने से पहले पर्यावरणीय प्रभाव, पानी की उपलब्धता, भूजल, अपशिष्ट प्रबंधन और स्थानीय आबादी पर प्रभाव से संबंधित सभी रिपोर्ट सार्वजनिक की जाएं। धरना स्थल पर पहुंचे कुंवर नरेंद्र सिंह दोपहर बाद धरना स्थल पर पहुंचे कुंवर नरेंद्र सिंह ने किसानों को समझाने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि एथेनॉल प्लांट से प्रदूषण नहीं होता और इससे क्षेत्र में रोजगार तथा विकास के अवसर पैदा होंगे। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि यदि क्षेत्र में विकास और रोजगार की जरूरत है तो एथेनॉल प्लांट का विरोध क्यों किया जा रहा है। उनके द्वारा रिफाइनरी और प्रदूषण को लेकर भी उदाहरण दिया गया तथा कहा गया कि सरकार ने जो निर्णय लिया है, वह सभी के हित में है और इसे स्वीकार किया जाना चाहिए। हालांकि, धरना स्थल पर मौजूद किसानों और ग्रामीणों ने इन दलीलों पर अपनी असहमति जताई। महिला, पुरुष और युवाओं ने प्रस्तावित एथेनॉल प्लांट के स्थान को लेकर विरोध दर्ज कराया और कहा कि उनकी प्राथमिक मांग छाता चीनी मिल को चालू कराने की है। कर्मयोगी ललित ने संभाला मोर्चा माहौल में बढ़ते तनाव को देखते हुए पूर्व सैनिक कर्मयोगी ललित ने लोगों से शांत और अनुशासित रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि आंदोलन को शांतिपूर्ण तरीके से आगे बढ़ाया जाए और किसी भी प्रकार का विवाद न होने दिया जाए। कर्मयोगी ललित ने कहा कि उनका चीनी मिल धरना सफलता की ओर बढ़ रहा है और प्रदर्शनकारियों की मांग स्पष्ट है कि छाता में चीनी मिल खोली जाए। उन्होंने सभी प्रदर्शनकारियों से एकजुट रहने और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग शासन-प्रशासन तक पहुंचाने का आह्वान किया। किसानों की मुख्य मांग “एक ही मांग — छाता चीनी मिल चालू करो।” अब देखने वाली बात यह होगी कि शासन-प्रशासन किसानों की पर्यावरण संबंधी आपत्तियों, एथेनॉल प्लांट से जुड़े तकनीकी पहलुओं और छाता चीनी मिल को पुनः शुरू करने की मांग पर क्या कदम उठाता है।हैशटैग: #YogiAdityanath #PMOIndia #ChhataSugarMill #EthanolPlant #छाता #मथुरा #MathuraVrindavan #BreakingNews #FarmersProtest #KisanAndolan #SugarMill #UttarPradesh #UPNews #AllIndia #FB #Update
छाता चीनी मिल में एथेनॉल प्लांट के विरोध में गरजे किसान: कुंवर नरेंद्र की दलीलों पर जताई असहमति, चीनी मिल खोलने की मांग पर अड़े #rprnewstv #brajkiawaaz छाता (मथुरा): बुधवार को छाता चीनी मिल परिसर में प्रस्तावित एथेनॉल प्लांट को लेकर पूर्व सैनिकों और किसानों का विरोध प्रदर्शन जारी रहा। धरना स्थल पर मौजूद स्थानीय किसानों और ग्रामीणों ने एथेनॉल प्लांट को लेकर अपनी आपत्तियां दर्ज कराते हुए कहा कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन प्रस्तावित प्लांट को घनी आबादी और कृषि क्षेत्र से हटाकर किसी अन्य स्थान पर स्थापित किया जाना चाहिए। प्रदर्शनकारी किसानों का आरोप है कि उनकी जायज मांगों और पर्यावरण संबंधी आपत्तियों को शासन-प्रशासन तक सही तरीके से नहीं पहुंचाया गया। किसानों ने कहा कि उनकी मुख्य मांग छाता चीनी मिल को पुनः चालू कराना है। एथेनॉल प्लांट को लेकर क्या हैं किसानों की चिंताएं? धरना दे रहे किसानों ने एथेनॉल प्लांट से संभावित पानी की खपत, अपशिष्ट जल (Spent Wash), दुर्गंध, वायु प्रदूषण, भूजल और कृषि भूमि पर संभावित प्रभाव जैसे मुद्दे उठाए। जानकारियों के अनुसार, एथेनॉल उत्पादन में प्रयुक्त तकनीक और कच्चे माल के आधार पर पानी तथा अपशिष्ट प्रबंधन की आवश्यकता अलग-अलग हो सकती है। यदि अपशिष्ट का उचित उपचार नहीं किया जाए तो पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका रहती है। दूसरी ओर, आधुनिक तकनीक, उपचार संयंत्र और Zero Liquid Discharge (ZLD) जैसी व्यवस्थाओं से प्रदूषण और जल-अपशिष्ट को नियंत्रित करने का प्रयास किया जाता है। इसी वजह से किसानों की मांग है कि प्लांट शुरू करने से पहले पर्यावरणीय प्रभाव, पानी की उपलब्धता, भूजल, अपशिष्ट प्रबंधन और स्थानीय आबादी पर प्रभाव से संबंधित सभी रिपोर्ट सार्वजनिक की जाएं। धरना स्थल पर पहुंचे कुंवर नरेंद्र सिंह दोपहर बाद धरना स्थल पर पहुंचे कुंवर नरेंद्र सिंह ने किसानों को समझाने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि एथेनॉल प्लांट से प्रदूषण नहीं होता और इससे क्षेत्र में रोजगार तथा विकास के अवसर पैदा होंगे। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि यदि क्षेत्र में विकास और रोजगार की जरूरत है तो एथेनॉल प्लांट का विरोध क्यों किया जा रहा है। उनके द्वारा रिफाइनरी और प्रदूषण को लेकर भी उदाहरण दिया गया तथा कहा गया कि सरकार ने जो निर्णय लिया है, वह सभी के हित में है और इसे स्वीकार किया जाना चाहिए। हालांकि, धरना स्थल पर मौजूद किसानों और ग्रामीणों ने इन दलीलों पर अपनी असहमति जताई। महिला, पुरुष और युवाओं ने प्रस्तावित एथेनॉल प्लांट के स्थान को लेकर विरोध दर्ज कराया और कहा कि उनकी प्राथमिक मांग छाता चीनी मिल को चालू कराने की है। कर्मयोगी ललित ने संभाला मोर्चा माहौल में बढ़ते तनाव को देखते हुए पूर्व सैनिक कर्मयोगी ललित ने लोगों से शांत और अनुशासित रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि आंदोलन को शांतिपूर्ण तरीके से आगे बढ़ाया जाए और किसी भी प्रकार का विवाद न होने दिया जाए। कर्मयोगी ललित ने कहा कि उनका चीनी मिल धरना सफलता की ओर बढ़ रहा है और प्रदर्शनकारियों की मांग स्पष्ट है कि छाता में चीनी मिल खोली जाए। उन्होंने सभी प्रदर्शनकारियों से एकजुट रहने और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग शासन-प्रशासन तक पहुंचाने का आह्वान किया। किसानों की मुख्य मांग “एक ही मांग — छाता चीनी मिल चालू करो।” अब देखने वाली बात यह होगी कि शासन-प्रशासन किसानों की पर्यावरण संबंधी आपत्तियों, एथेनॉल प्लांट से जुड़े तकनीकी पहलुओं और छाता चीनी मिल को पुनः शुरू करने की मांग पर क्या कदम उठाता है।हैशटैग: #YogiAdityanath #PMOIndia #ChhataSugarMill #EthanolPlant #छाता #मथुरा #MathuraVrindavan #BreakingNews #FarmersProtest #KisanAndolan #SugarMill #UttarPradesh #UPNews #AllIndia #FB #Update
- कैबिनेट मंत्री चौधरी लक्ष्मी नारायण की रैली में आम जनमानस को दी गई गलियां कैबिनेट मंत्री चौधरी लक्ष्मी नारायण की रैली में आम जनमानस को दी गई गलियां1
- प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन पर जिला अस्पताल पहुंचे राज्यमंत्री संदीप सिंह, मरीजों को बांटे फल और जाना हालचाल मथुरा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस के अवसर पर गुरुवार को मथुरा के जिला अस्पताल में सेवा एवं जनकल्याण से जुड़ा विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान उत्तर प्रदेश सरकार के बेसिक शिक्षा विभाग के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह जिला अस्पताल पहुंचे और भर्ती मरीजों को फल वितरित कर उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। कार्यक्रम के दौरान राज्यमंत्री संदीप सिंह ने जिला अस्पताल के विभिन्न वार्डों का भ्रमण किया और वहां उपचार करा रहे मरीजों से मुलाकात कर उनका कुशलक्षेम जाना। उन्होंने मरीजों और उनके तीमारदारों से बातचीत कर अस्पताल में उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं, चिकित्सकीय सेवाओं और उपचार व्यवस्था के बारे में जानकारी ली। राज्यमंत्री ने मरीजों से उनकी समस्याओं के बारे में भी जानकारी प्राप्त की और अस्पताल प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं के संबंध में अधिकारियों से चर्चा की। उन्होंने चिकित्सकों एवं स्वास्थ्यकर्मियों से मरीजों को बेहतर उपचार और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया। इस अवसर पर राज्यमंत्री संदीप सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन को सेवा पखवाड़े के रूप में मनाया जा रहा है। इसका उद्देश्य समाज के अंतिम पायदान पर खड़े जरूरतमंद व्यक्ति तक सेवा और सहायता पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि मरीजों की सेवा और उनके दुख-दर्द में सहभागी बनना समाज के प्रति जिम्मेदारी का महत्वपूर्ण हिस्सा है। फल वितरण के दौरान मरीजों और उनके तीमारदारों में भी उत्साह देखने को मिला। राज्यमंत्री ने सभी मरीजों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की। कार्यक्रम में स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, चिकित्सक, स्वास्थ्यकर्मी एवं स्थानीय जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।4
- छाता चीनी मिल में एथेनॉल प्लांट के विरोध में गरजे किसान: कुंवर नरेंद्र की दलीलों पर जताई असहमति, चीनी मिल खोलने की मांग पर अड़े #rprnewstv #brajkiawaaz छाता (मथुरा): बुधवार को छाता चीनी मिल परिसर में प्रस्तावित एथेनॉल प्लांट को लेकर पूर्व सैनिकों और किसानों का विरोध प्रदर्शन जारी रहा। धरना स्थल पर मौजूद स्थानीय किसानों और ग्रामीणों ने एथेनॉल प्लांट को लेकर अपनी आपत्तियां दर्ज कराते हुए कहा कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन प्रस्तावित प्लांट को घनी आबादी और कृषि क्षेत्र से हटाकर किसी अन्य स्थान पर स्थापित किया जाना चाहिए। प्रदर्शनकारी किसानों का आरोप है कि उनकी जायज मांगों और पर्यावरण संबंधी आपत्तियों को शासन-प्रशासन तक सही तरीके से नहीं पहुंचाया गया। किसानों ने कहा कि उनकी मुख्य मांग छाता चीनी मिल को पुनः चालू कराना है। एथेनॉल प्लांट को लेकर क्या हैं किसानों की चिंताएं? धरना दे रहे किसानों ने एथेनॉल प्लांट से संभावित पानी की खपत, अपशिष्ट जल (Spent Wash), दुर्गंध, वायु प्रदूषण, भूजल और कृषि भूमि पर संभावित प्रभाव जैसे मुद्दे उठाए। जानकारियों के अनुसार, एथेनॉल उत्पादन में प्रयुक्त तकनीक और कच्चे माल के आधार पर पानी तथा अपशिष्ट प्रबंधन की आवश्यकता अलग-अलग हो सकती है। यदि अपशिष्ट का उचित उपचार नहीं किया जाए तो पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका रहती है। दूसरी ओर, आधुनिक तकनीक, उपचार संयंत्र और Zero Liquid Discharge (ZLD) जैसी व्यवस्थाओं से प्रदूषण और जल-अपशिष्ट को नियंत्रित करने का प्रयास किया जाता है। इसी वजह से किसानों की मांग है कि प्लांट शुरू करने से पहले पर्यावरणीय प्रभाव, पानी की उपलब्धता, भूजल, अपशिष्ट प्रबंधन और स्थानीय आबादी पर प्रभाव से संबंधित सभी रिपोर्ट सार्वजनिक की जाएं। धरना स्थल पर पहुंचे कुंवर नरेंद्र सिंह दोपहर बाद धरना स्थल पर पहुंचे कुंवर नरेंद्र सिंह ने किसानों को समझाने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि एथेनॉल प्लांट से प्रदूषण नहीं होता और इससे क्षेत्र में रोजगार तथा विकास के अवसर पैदा होंगे। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि यदि क्षेत्र में विकास और रोजगार की जरूरत है तो एथेनॉल प्लांट का विरोध क्यों किया जा रहा है। उनके द्वारा रिफाइनरी और प्रदूषण को लेकर भी उदाहरण दिया गया तथा कहा गया कि सरकार ने जो निर्णय लिया है, वह सभी के हित में है और इसे स्वीकार किया जाना चाहिए। हालांकि, धरना स्थल पर मौजूद किसानों और ग्रामीणों ने इन दलीलों पर अपनी असहमति जताई। महिला, पुरुष और युवाओं ने प्रस्तावित एथेनॉल प्लांट के स्थान को लेकर विरोध दर्ज कराया और कहा कि उनकी प्राथमिक मांग छाता चीनी मिल को चालू कराने की है। कर्मयोगी ललित ने संभाला मोर्चा माहौल में बढ़ते तनाव को देखते हुए पूर्व सैनिक कर्मयोगी ललित ने लोगों से शांत और अनुशासित रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि आंदोलन को शांतिपूर्ण तरीके से आगे बढ़ाया जाए और किसी भी प्रकार का विवाद न होने दिया जाए। कर्मयोगी ललित ने कहा कि उनका चीनी मिल धरना सफलता की ओर बढ़ रहा है और प्रदर्शनकारियों की मांग स्पष्ट है कि छाता में चीनी मिल खोली जाए। उन्होंने सभी प्रदर्शनकारियों से एकजुट रहने और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग शासन-प्रशासन तक पहुंचाने का आह्वान किया। किसानों की मुख्य मांग “एक ही मांग — छाता चीनी मिल चालू करो।” अब देखने वाली बात यह होगी कि शासन-प्रशासन किसानों की पर्यावरण संबंधी आपत्तियों, एथेनॉल प्लांट से जुड़े तकनीकी पहलुओं और छाता चीनी मिल को पुनः शुरू करने की मांग पर क्या कदम उठाता है।हैशटैग: #YogiAdityanath #PMOIndia #ChhataSugarMill #EthanolPlant #छाता #मथुरा #MathuraVrindavan #BreakingNews #FarmersProtest #KisanAndolan #SugarMill #UttarPradesh #UPNews #AllIndia #FB #Update1
- नगर निगम मथुरा वृन्दावन वार्ड 33 पाली खेड़ा नई नगर में सीज निर्माण में दुकानें संचालित होने का आरोप, एमवीडीए की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल मथुरा। नगर निगम मथुरा-वृंदावन के वार्ड नंबर 33, पाली खेड़ा नई नगर क्षेत्र में खसरा संख्या 10/100 की संपत्ति पर कथित अवैध निर्माण और सीज की गई दुकानों के संचालन को लेकर मामला सामने आया है। शिकायत के अनुसार माधव सिंह, गंगा सिंह और भगत सिंह पर आरोप है कि उन्होंने बिना स्वीकृत नक्शे के उक्त संपत्ति पर दुकानों का निर्माण कराया और उनका व्यावसायिक उपयोग किया जा रहा है। बताया गया है कि दुकान का निर्माण वर्ष 2020 से शुरू हुआ, जबकि अक्टूबर 2021 में मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण यानी एमवीडीए द्वारा उक्त निर्माण को सीज किया गया था। शिकायतकर्ता का दावा है कि संबंधित निर्माण की पत्रावली आज भी एमवीडीए में विचाराधीन है। इसके बावजूद मौके पर दुकानें संचालित होने की बात सामने आ रही है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि वर्ष 2021 में सीज किए गए निर्माण में दोबारा व्यावसायिक गतिविधियां किस आधार पर संचालित हो रही हैं। स्थानीय लोगों की ओर से यह भी शिकायत की जा रही है कि उक्त निर्माण नगर निगम के नालों के ऊपर या उनके हिस्से को प्रभावित करते हुए किया गया है, जिसके चलते नालों की समुचित सफाई में परेशानी हो रही है। मामले को लेकर एमवीडीए के अधिकारियों की भूमिका पर भी शिकायतकर्ताओं ने सवाल उठाए हैं और मिलीभगत तथा अनुचित लाभ पहुंचाने के आरोप लगाए हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। स्थानीय लोगों की मांग है कि वार्ड नंबर 33 पाली खेड़ा नई नगर क्षेत्र में संबंधित निर्माण का स्थलीय निरीक्षण कराया जाए और निर्माण की स्वीकृति, सील की स्थिति, वर्तमान व्यावसायिक गतिविधियों तथा नगर निगम के नालों पर पड़े प्रभाव की निष्पक्ष जांच की जाए। अब देखने वाली बात होगी कि इस मामले में एमवीडीए और नगर निगम मथुरा-वृंदावन की ओर से क्या कार्रवाई की जाती है और जांच के बाद वास्तविक स्थिति क्या सामने आती है।2
- वृंदावन के पास पानी गांव में लगा सांपों के रोग के इलाज का मेला दूर-दूर से आकर लोगों ने अब कराया अपना इलाज वृंदावन के पास पानीगाम में सांपों के रोग का मेला लगा जिसमें सांपों से संबंधित विशबेल कंठमाला बन्द आदि रोगों का इलाज किया जाता है सत्यनारायण नाम के भाई ने बताया यहां सांपों के हर रोग का इलाज किया जाता है जो बिल्कुल फ्री किया जाता है किसी से कोई पैसा नहीं लिया जाता है सांपों के रोग का इलाज दो तरह से किया जाता है एक तो झाड़ा मार कर इलाज करते हैं दूसरा धाली बजाकर रोग का इलाज करते हैं इलाज करते समय देवता जो कुछ मांगता है उसकी मन्नत पूरी की आती है और उसे विनती की आती है कि वह उसे रोगी को हमेशा के लिए छोड़ दें पानीगांव में यह मेला प्रतिवर्ष भाधो मास की बलदेव छठ से शुरू होता है जो कई दिन तक चलता है2
- पानीगांव में शुरू हुआ 250 वर्ष पुराना तीन दिवसीय वायगीर मेला, 72 घंटे तक गूंजेगी वायगीरों की थाली की आवाज। थाना जमुनापार क्षेत्र के पानीगांव में दशकों वर्षो से चला आ रहा बलदेव छठ का तीन दिवसीय वायगीर मेला आज से परम्परागत अनुसार शुरू हो गया है। जिसमें लगभग तीन दिनों तक गंगा मंदिर, हनुमान बगीची, और मदा अखाड़े पर थाली की आवाज दूर-दूर तक गुंजायमान होगी। जानकारी के अनुसार पानीगांव में लगने वाला बलदेव छठ का तीन दिवसीय वायगीर मेला परम्परागत अनुसार करीब 250 वर्षों से चला आ रहा है जिसमें वायगीरों द्वारा थाली की थाप पर रामायण का गायन करके कंठमाला, विषवेल का लगभग तीन दिनों तक पानीगांव में अलग-अलग तीन स्थानों पर निःशुल्क उपचार किया जाएगा। जबकि मेला के दूसरे दिन शुक्रवार को मंत्रों के माध्यम से झाड़ फूंक कर सर्पदंश के मरीजों को वायगीरों द्वारा पूर्व में लगाए गए अमर बंद खोले जाएंगे। वहीं प्राप्त जानकारी के अनुसार 250 वर्षों से पानीगांव में चले आ रहे बलदेव छठ के इस तीन दिवसीय वायगीर मेला में उत्तर प्रदेश के साथ-साथ हरियाणा, राजस्थान, मध्यप्रदेश और हिमाचल प्रदेश एवं उत्तराखंड तक के हजारों लोग वायगीरों से सर्पदंश, कंठमाला, विषवेल और जहरीले जीव जन्तुओं द्वारा काटे जाने पर निशुल्क उपचार कराने मेला में प्रत्येक वर्ष आते हैं। इस दौरान मेला में उपचार को आने वाले बाहरी लोगों के लिए भोजन की समुचित व्यवस्था पूर्व प्रधान और ग्रामीणों के सहयोग से भंण्डारा लगाकर की जाती है।4
- सऊदी:- बुर्ज खलीफा से तिरंगे की रोशनी के साथ पीएम मोदी को जन्मदिवस की शुभकामनाएं दी1
- *बरसाना* में राधा अष्टमी का त्यौहार बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है और लाखों की संख्या में श्रद्धालु यहाँ दर्शन करने आते हैं। मेले के लिए विशेष व्यवस्था सुनिश्चित की गई है, जिसमें पूरे क्षेत्र को 07 ज़ोन में विभाजित कर पुलिस ऑफिसर्स और मजिस्ट्रेट्स की ड्यूटी लगाई गई है। *एकल मार्ग व्यवस्था, PA सिस्टम, होल्डिंग एरियाज, सीसीटीवी, कंट्रोल रूम इत्यादि के माध्यम से भीड़ प्रबंधन सुनिश्चित किया जाएगा।* एक ट्रैफिक प्लान भी तैयार किया गया है, जिसमें कि कहाँ नो-एंट्री है, कहाँ दोपहिया वाहनों की ही एंट्री है, कहाँ पार्किंग एरियाज हैं, कहाँ वन-वे है; और इसका प्रचार-प्रसार भी किया गया है। आपके माध्यम से आने वाले श्रद्धालुओं से यह अनुरोध है कि जो व्यवस्था बनाई गई है, उसमें सहयोग करें। पर्याप्त संख्या में पुलिस बल, पीएसी, सिविल और सादे वस्त्रों में ड्यूटी, एलआईयू की ड्यूटी, और जो कुंड इत्यादि हैं, उन पर फ्लड पीएसी की व्यवस्था की गई है। बैरिकेडिंग करते हुए चैनलाइज़ करके लोगों को दर्शन कराने का प्रयास किया जा रहा है। और हमें पूरा विश्वास है कि इस त्यौहार को हम लोग सकुशल संपन्न करवाएंगे। जो भी लोग आएँ, अच्छे से दर्शन-लाभ प्राप्त कर अपने गंतव्य को जाएँ, यही हमारा प्रयास है।" *जेब कतरों और अवांछित तत्वों के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। एक तो सादा वस्त्रों में ड्यूटी लगाई जा रही है, दूसरा सीसीटीवी से निगरानी रखी* *जाएगी।* पूर्व के जो भी अपराधी हैं, उनको चिह्नित करके पाबंद किया गया है। और हमारी SOG और SWAT टीम भी यहाँ ऐसे अराजक तत्वों को पकड़ने के लिए भ्रमणशील रहेगी।" *बाइट:- वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, जनपद मथुरा।*1