न्यूज स्क्रिप्ट 👇 भाथूपारा में भैंसों का कब्जा, नगर निगम अंबिकापुर बेखबर! शहर के भाथूपारा के पास इलाके में कल दोपहर सड़कों पर भैंसों का ऐसा जमावड़ा लगा कि पूरा रास्ता जाम में तब्दील हो गया। आम जनता घंटों परेशान होती रही, वाहन रेंगते नजर आए, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी कहीं दिखाई नहीं दिए। सबसे बड़ा सवाल — क्या शहर की सड़कें अब मवेशियों के लिए छोड़ दी गई हैं? क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जा रहा है? अगर कोई एंबुलेंस फंस जाती तो जिम्मेदार कौन होता? स्थानीय लोगों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है। आए दिन सड़कों पर भैंसों का डेरा जम जाता है, जिससे दुर्घटना का खतरा बना रहता है। नगर निगम प्रशासन आखिर कब जागेगा? क्या आवारा मवेशियों को पकड़ने की कोई योजना है? क्या उनके मालिकों पर कार्रवाई होगी? या फिर जनता यूं ही परेशान होती रहेगी? अब देखना यह है कि खबर के बाद प्रशासन हरकत में आता है या फिर भाथूपारा की सड़कें यूं ही मवेशियों के कब्जे में रहेंगी। Khas report by himanshu raj patrkar vice buero md news ambikapur cg.7805838076.
न्यूज स्क्रिप्ट 👇 भाथूपारा में भैंसों का कब्जा, नगर निगम अंबिकापुर बेखबर! शहर के भाथूपारा के पास इलाके में कल दोपहर सड़कों पर भैंसों का ऐसा जमावड़ा लगा कि पूरा रास्ता जाम में तब्दील हो गया। आम जनता घंटों परेशान होती रही, वाहन रेंगते नजर आए, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी कहीं दिखाई नहीं दिए। सबसे बड़ा सवाल — क्या शहर की सड़कें अब मवेशियों के लिए छोड़ दी गई हैं? क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जा रहा है? अगर कोई एंबुलेंस फंस जाती तो जिम्मेदार कौन होता? स्थानीय लोगों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है। आए दिन सड़कों पर भैंसों का डेरा जम जाता है, जिससे दुर्घटना का खतरा बना रहता है। नगर निगम प्रशासन आखिर कब जागेगा? क्या आवारा मवेशियों को पकड़ने की कोई योजना है? क्या उनके मालिकों पर कार्रवाई होगी? या फिर जनता यूं ही परेशान होती रहेगी? अब देखना यह है कि खबर के बाद प्रशासन हरकत में आता है या फिर भाथूपारा की सड़कें यूं ही मवेशियों के कब्जे में रहेंगी। Khas report by himanshu raj patrkar vice buero md news ambikapur cg.7805838076.
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- लंबे समय से एक ही स्थान पर जमे पटवारियों पर प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। कलेक्टर अजित वसंत ने एक साथ 83 पटवारियों के तबादले का आदेश जारी किया है। अंबिकापुर/प्रशासनिक दक्षता और कार्यों के बेहतर संपादन के उद्देश्य से बड़ा कदम उठाते हुए कार्यालय कलेक्टर (भू-अभिलेख शाखा) ने 18 हल्का 83 पटवारियों के तबादले का आदेश जारी किया है। अंबिकापुर कलेक्टर सरगुजा द्वारा जारी आदेश के अनुसार, छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता एवं छत्तीसगढ़ भू-अभिलेख नियमावली (भाग-1) के नियम 7(2) तथा राजस्व पुस्तक परिपत्र के प्रावधानों के तहत लंबे समय से एक ही स्थान पर पदस्थ पटवारियों को आगामी आदेश तक नई तहसीलों में पदस्थ किया गया है।1
- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज अपने गृह स्थल में मनाई अपने माता जी एवं स्कूल बच्चो के साथ अपनी जन्म दिन और लोगो ने दी ढेर सारी शुभकामनाएं।।1
- सरकार चाहे लाख मंचों से यह दावा करे कि राज्य की व्यवस्था चुस्त-दुरुस्त है, प्रशासन सजग है और “ऑल इज़ वेल” का नारा हर तरफ़ गूंज रहा है—लेकिन ज़रा गांव, शहर, सोसाइटी, धान खरीदी केंद्र, स्कूल, आश्रम, अस्पताल या किसी भी निर्माण स्थल पर निगाह डालिए। तस्वीर बिल्कुल उलट नज़र आएगी। हर जगह ढीलापन है, हर कोने में अनियमितता है और हर व्यवस्था के भीतर भ्रष्टाचार की परतें खुली पड़ी हैं। यह बात शायद सत्ता पक्ष को चुभे, पर सच न तो बयान बदलने से छुपता है और न ही प्रचार से मिटता है। शिक्षा से राशन तक—सब कुछ सवालों के घेरे में स्कूलों में नकल का बोलबाला है। सोसाइटी में गरीबों का चावल खुलेआम बेचा जा रहा है। किसी को एक महीने राशन नहीं मिलता, किसी को दो महीने। कभी चावल गायब, कभी चना नहीं, कभी शक्कर का नामोनिशान नहीं। और जब शक्कर मिलती भी है, तो ₹20 किलो में—जबकि बाजार भाव सब जानते हैं। गरीब दो-तीन रुपये के लिए झगड़े की हिम्मत नहीं जुटा पाता, क्योंकि डर यह है कि कल को चावल भी बंद हो गया तो भीख मांगने की नौबत आ जाएगी। धान खरीदी—खरीद तो हुई, जिम्मेदारी नहीं सरकार ने जैसे-तैसे धान खरीदी का आंकड़ा तो पूरा कर लिया, लेकिन उठाव अब तक अधूरा है। धान खुले में पड़ा है—कहीं चूहे खा रहे हैं, कहीं धूप में सूख रहा है। बरसात आएगी तो वही धान भीगेगा, सड़ेगा, और फिर नुकसान का ठीकरा किसके सिर फूटेगा? तब सरकार सांय-सांय, आंय-बांय कर अपनी इज्जत बचाने में लग जाएगी। सरमना की सड़क—निर्माण नहीं, खानापूर्ति सरमना में बन रही छह किलोमीटर लंबी सड़क इसका ताज़ा उदाहरण है। रायगढ़ के बड़े ठेकेदार, मोटी पहुंच, मोटा मुनाफ़ा। सड़क तो बना दी गई, लेकिन क्योरिंग? वह ज़रूरी नहीं समझी गई। सीसी रोड धूल उगल रही है। कहीं सीसी, कहीं डामर—कोई मानक नहीं, कोई जवाबदेही नहीं। पहाड़ी इलाके में घाट कटिंग के बिना सड़क चढ़ा दी गई। सवाल उठाने पर मुंशी का जवाब— “हाईवे से भारी गाड़ियां ले जाएंगे तो सड़क टूटेगी ही। ठेका हमेशा के लिए थोड़े लिया है।” जब विधायक को आपत्ति नहीं, तो गांव वालों की आवाज़ मुख्यमंत्री तक पहुंचेगी भी क्यों? लिहाजा गांव चुप है—लेकिन खतरा हर दिन बढ़ रहा है। एक फिसलन और गाड़ी सीधे नीचे। सोसाइटी की चोरी—और सवालों का पहाड़ जिले की कई सोसाइटीज से रात में एक-एक ट्रक चावल चोरी हो रहा है। रिपोर्ट लिखी जा रही है, चोर नहीं पकड़े जा रहे। जब चोर का “कलेजा” इतना बड़ा है, तो यह समझने में देर नहीं लगती कि उसके पीछे कौन खड़ा है। निष्कर्ष आज समस्या विपक्ष की आलोचना नहीं है, समस्या व्यवस्था का भीतर से सड़ जाना है। अगर सरकार अब भी आत्ममंथन नहीं करेगी, अपने सिस्टम को दुरुस्त नहीं करेगी, तो आने वाले समय में सत्ता उसके लिए सपना बन जाए—तो इसमें किसी को हैरानी नहीं होनी चाहिए। — सीतापुर सुनील गुप्ता की कलम से4
- चांदो पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दो मवेशी तस्कर करने वाले आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया हहै तिन बैल को मारते पिटते झारखण्ड ले जा रे थे मुखविर की सूचना पर किया यह बडी कार्यवाई....1
- जशपुर के नारायणपुर थाना क्षेत्र से बड़ी खबर नाबालिग बालिका से दुष्कर्म के गंभीर मामले में जशपुर पुलिस की त्वरित कार्रवाई। सूचना के चंद घंटों में 09 आरोपी हिरासत में। डीआईजी व एसएसपी के निर्देश पर चार विशेष टीमों ने की कार्रवाई। BNS व POCSO एक्ट की गंभीर धाराओं में मामला दर्ज। #Jashpur #Narayanpur #CrimeNews #POCSO #BreakingNews #JashpurTimes Jashpur Times Chhattisgarh Police छत्तीसगढ़ पुलिस1
- स्थल निरीक्षण में दे रहे नियमों का हवाला ? अपील की तैयारी, उच्च स्तर पर स्पष्टता की अपेक्षा धरमजयगढ़ – धरमजयगढ़ के वनपरिक्षेत्र बाकारुमा में संचालित वृक्षारोपण योजनाओं के संबंध में पारदर्शिता को लेकर चर्चा का विषय बना हुआ है। सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत मांगी गई जानकारी के प्रत्युत्तर में विभाग द्वारा उपलब्ध कराए गए विवरण को आवेदक ने आंशिक बताते हुए शेष बिंदुओं पर स्पष्ट जानकारी की अपेक्षा जताई है। जानकारी के अनुसार आवेदक ने बीते वर्षों में संचालित वृक्षारोपण कार्यों की स्वीकृति, वित्तीय व्यय, मदवार भुगतान तथा वर्तमान प्रगति संबंधी तथ्यात्मक जानकारी मांगी थी। विभाग की ओर से एक योजना से संबंधित संक्षिप्त विवरण उपलब्ध कराया गया है, जबकि अन्य बिंदुओं के संबंध में पृथक प्रक्रिया अपनाने की सलाह दी गई है। प्राप्त आंकड़ों में स्वीकृत राशि एवं व्यय का समेकित उल्लेख है, किंतु मदवार व्यौरा और कार्य प्रगति की विस्तृत स्थिति स्पष्ट न होने के कारण आवेदक ने अतिरिक्त स्पष्टीकरण की आवश्यकता व्यक्त की है। स्थानीय जानकारों का कहना है कि सार्वजनिक योजनाओं में विस्तृत वित्तीय विवरण और प्रगति रिपोर्ट उपलब्ध होने से जनविश्वास और पारदर्शिता सुदृढ़ होती है। स्थल निरीक्षण के संबंध में भी तिथि निर्धारण को लेकर स्पष्ट सूचना न मिलने से आवेदक ने प्रथम अपील दायर करने की तैयारी की है। बताया जा रहा है कि अपील प्रक्रिया के माध्यम से विषय को उच्च वन अधिकारियों के समक्ष रखा जाएगा, ताकि आवश्यक स्पष्टीकरण प्राप्त हो सके। फिलहाल यह पूरा मामला प्रशासनिक प्रक्रिया के अंतर्गत विचाराधीन है। सभी पक्षों को अपने-अपने स्तर पर तथ्य प्रस्तुत करने और स्पष्टीकरण देने का अवसर प्राप्त है। आगे की कार्रवाई अपील प्राधिकारी के निर्णय पर निर्भर करेगी।1
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